Sunday, 19 Apr 2026 | 09:41 PM

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Mayank Chakraborty, first king of the North-East on the chessboard, grandmaster, Grandmaster from Assam and North-east India

Mayank Chakraborty, first king of the North-East on the chessboard, grandmaster, Grandmaster from Assam and North-east India

Hindi News Sports Mayank Chakraborty, First King Of The North East On The Chessboard, Grandmaster, Grandmaster From Assam And North east India स्टॉकहोम/गुवाहाटी42 मिनट पहले कॉपी लिंक असम के मयंक चक्रवर्ती भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर बने हैं। वे नॉर्थ ईस्ट से इस मुकाम तक पहुंचने वाले पहले खिलाड़ी हैं। शतरंज की बिसात पर जब मोहरे अपनी चालें चलते हैं, तो अक्सर जीत और हार के बीच का फासला केवल एक ‘चेकमेट’ का होता है, लेकिन स्वीडन के स्टॉकहोम में जब 16 साल के एक लड़के ने अपना आखिरी दांव चला, तो वह जीत केवल एक टूर्नामेंट की नहीं थी। वह जीत थी- वर्षों के गुमनाम संघर्ष की, एक पिता के त्याग की और पूर्वोत्तर भारत के उस भरोसे की, जिसने पहली बार दुनिया को अपना ‘ग्रैंडमास्टर’ दिया। असम के मयंक चक्रवर्ती अब भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर बन चुके हैं। वे नॉर्थ ईस्ट से इस मुकाम तक पहुंचने वाले पहले खिलाड़ी हैं। ‘होटल स्टॉकहोम नॉर्थ यंग टैलेंट टूर्नामेंट’ में मयंक जब उतरे, तो उनके कंधों पर उम्मीदों का भारी बोझ था, लेकिन उन्होंने गजब का संयम दिखाया। आठवें राउंड में फिलिप लिंडबर्ग को मात देते ही मयंक ने एक राउंड बाकी रहते अपना अंतिम ‘ग्रैंडमास्टर नॉर्म’ पक्का कर लिया। उन्होंने 9 में से 7 अंक हासिल कर न केवल खिताब जीता, बल्कि अपनी लाइव रेटिंग को 2508 तक पहुंचा दिया। यह जीत इसलिए भी बड़ी है क्योंकि मयंक ने दिग्गज अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को एकतरफा मुकाबले में पीछे छोड़ दिया। किसी फिल्म जैसी है मयंक की कहानी मयंक की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी है। पूर्वोत्तर भारत, जहां युवाओं के हाथों में अक्सर फुटबॉल या मुक्केबाजी के दस्ताने दिखते हैं, वहां मयंक ने शतरंज की बिसात चुनी। गुवाहाटी जैसे शहर में शतरंज का बुनियादी ढांचा बहुत सीमित था। शुरुआती दिनों में मयंक के पास कोई प्रोफेशनल कोच नहीं था। उन्होंने घंटों यूट्यूब वीडियो और ‘चेस-बेस’ की डीवीडी देखकर खेल की पेचीदगियां समझीं। बाद में उन्हें ग्रैंडमास्टर सप्तर्षि राय चौधरी का साथ मिला, जिन्होंने उनके हुनर को धार दी। मयंक के पिता केशब चक्रवर्ती ने बेटे के इंटरनेशनल दौरों के लिए अपनी कॉर्पोरेट नौकरी तक छोड़ दी। यह एक पिता का बेटे की प्रतिभा पर अटूट विश्वास ही था, जिसने मयंक को दुनिया के सामने ‘ग्रैंडमास्टर’ बनाकर खड़ा कर दिया। सबसे ज्यादा ग्रैंडमास्टर वाले देश देश – ग्रैंडमास्टर रूस- 255 अमेरिका- 101 जर्मनी- 96 भारत- 94 यूक्रेन- 93 साल 2026 में भारत को मिला तीसरा ग्रैंडमास्टर मयंक इस साल ग्रैंडमास्टर (जीएम) बनने वाले तीसरे भारतीय हैं। उन्होंने 2019 में नेशनल अंडर-11 चैम्पियनशिप जीती थी। दो बार नेशनल अंडर-17 खिताब भी जीते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

टाइम मैग्जीन वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट प्लेसेस में भारत के 4 स्थान:पर्यटकों को लुभा रहे ‘जोधपुरी स्ट्रॉबेरी खेत’, 7000 फीट की ऊंचाई पर मिल रहा सुकून

टाइम मैग्जीन वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट प्लेसेस में भारत के 4 स्थान:पर्यटकों को लुभा रहे ‘जोधपुरी स्ट्रॉबेरी खेत’, 7000 फीट की ऊंचाई पर मिल रहा सुकून

पूरी दुनिया में घूमने का क्रेज लगातार बढ़ रहा है। साल 2025 में करीब 1.5 अरब पर्यटकों ने विदेश यात्रा की, जो पिछले साल से 4% अधिक है। इसी उत्साह को देखते हुए ‘टाइम’ मैग्जीन ने दुनिया के 100 द वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट प्लेसेस ऑफ 2026 की सूची जारी की है। इसमें भारत के भी 4 स्थानों को शामिल किया गया है। यह लिस्ट अंतरराष्ट्रीय लेखकों और संवाददाताओं के फीडबैक के आधार पर तैयार की गई है, जिसमें नए और रोमांचक अनुभव देने वाले होटल और संग्रहालयों को प्राथमिकता दी गई है। थार के बीच जोधपुर का ‘म्हारो खेत’, खेती के साथ लग्जरी स्टे जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर के बाहरी इलाके में स्थित ‘म्हारो खेत’ थार रेगिस्तान के बीच एग्री-टूरिज्म का शानदार ठिकाना है। 40 एकड़ के रीजेनरेटिव फार्म पर बने इस परिसर में 10 लग्जरी सुइट्स हैं, जो मेहमानों को प्रकृति और खेती के करीब लाते हैं। यहां का मुख्य आकर्षण खेत की ताजी उपज और स्ट्रॉबेरी-अनार के बागान हैं। मेहमान खुद सब्जियां चुनने के साथ कुकिंग लेसन और फार्म वॉक का आनंद ले सकते हैं। भोजन के लिए यहां 3 रेस्टोरेंट्स भी मौजूद हैं। पहाड़ियों में ‘शक्ति प्राण लॉज’, पहुंचने का रास्ता सिर्फ पैदल कुमाऊं। उत्तराखंडके कुमाऊं की पहाड़ियों में स्थित ‘शक्ति प्राण लॉज’ शांति और रोमांच का अनूठा संगम है। 7,000 फीट की ऊंचाई पर बने इस रिट्रीट तक केवल पैदल ही पहुंचा जा सकता है। यहां सौर ऊर्जा से संचालित सिर्फ 7 सुइट्स हैं, जहां से नंदा देवी और पंचाचूली चोटियों के अद्भुत दृश्य दिखते हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जगह खास है, जहां बर्फीली चोटियों के बीच लकड़ी के फायरप्लेस और सुकून भरा वातावरण मिलता है। पहाड़ियों में लीजिए बाघों और ऐतिहासिक मंदिरों का आनंद राजगढ़। मध्य प्रदेश की मणियागढ़ पहाड़ियों में स्थित ‘द ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस’ बुंदेला वंश के 350 साल पुराने निवास को रीस्टोर कर बनाया गया भव्य रिसॉर्ट है। झील के किनारे बसे इस रिसॉर्ट की बड़ी खूबी पन्ना नेशनल पार्क के पास इसकी लोकेशन है, जहां सैलानी बाघ और तेंदुए देख सकते हैं। यहां के विशेषज्ञ मेहमानों को रनेह जलप्रपात और केन अभयारण्य की सफारी कराते हैं। साथ ही, पास ही स्थित यूनेस्को धरोहर खजुराहो के प्राचीन मंदिरों की नक्काशी देखने का अवसर भी मिलता है। एएबीबीसीसी: बार नहीं, ड्रिंक्स का म्यूजियम जैसा एक्सपीरियंस नई दिल्ली। दिल्ली के वसंत विहार में स्थित ‘एएबीबीसीसी’ ड्रिंक्स का एक आधुनिक म्यूजियम है। इसकी शुरुआत एक लैब से होती है, जहां जड़ी-बूटियों और शहद जैसी अनोखी सामग्रियों से पेयों को नया स्वाद दिया जाता है। यहां का मेन्यू समय की यात्रा जैसा है, जो बीता कल, आज और आने वाला कल श्रेणियों में बंटा है। इसमें बैंगन भरते जैसे अनूठे कॉकटेल प्रयोग भी शामिल हैं। अंत में एक म्यूजिक लाउंज है, जहां शानदार साउंड क्वालिटी का आनंद ले सकते हैं।

AI will help in war, Pentagon’s Deals with US Tech Companies, AI Chatbots to Determine Which Targets Are Struck First

AI will help in war, Pentagon's Deals with US Tech Companies, AI Chatbots to Determine Which Targets Are Struck First

Hindi News International AI Will Help In War, Pentagon’s Deals With US Tech Companies, AI Chatbots To Determine Which Targets Are Struck First न्यूयॉर्क46 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका अब युद्ध की रणनीति में एआई को एक ‘सलाहकार’ के रूप में जोड़ रहा है। – सिम्बॉलिक इमेज युद्ध के मैदान में अब जनरल और सिपाही ही नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर एआई ‘चैटबॉट्स’ भी यह तय करेंगे कि पहले किस दुश्मन पर मिसाइल गिरानी है। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने हाल ही में एक्सएआई और ओपनएआई के साथ गुप्त सैन्य नेटवर्क में एआई इस्तेमाल के लिए डील की है। पेंटागन अब युद्ध की रणनीति में एआई को एक ‘सलाहकार’ के रूप में जोड़ रहा है। यह तकनीक अब केवल डेटा ही नहीं जुटाएगी, बल्कि इंसानों को युद्ध के दौरान यह सलाह भी देगी कि मौजूदा स्थिति और विमानों की लोकेशन के आधार पर सबसे पहले दुश्मन के किन ठिकानों को निशाना बनाया जाए। हालांकि अंतिम फैसला इंसान ही लेगा। चैटबॉट्स के साथ सीधे बातचीत से तय होगी हमलों की प्राथमिकता अब तक अमेरिकी सेना ‘मेवेन’ प्रोजेक्ट जैसी तकनीक से ड्रोन फुटेज और तस्वीरों के आधार पर लक्ष्य पहचानती थी। अब इसमें चैटजीपीटी और ग्रोक जैसे स्मार्ट चैटबॉट की नई परत जुड़ रही है। सैन्य अधिकारी के अनुसार सैनिक उनसे सीधे पूछ सकेंगे कि किन लक्ष्यों को पहले प्राथमिकता दी जाए। इससे प्रक्रिया तेज होती है, लेकिन चुनौती इन मशीनी सुझावों की सच्चाई परखना है, क्योंकि नया एआई डेटा के बजाय सीधे निष्कर्ष देता है। आर्मी ऑपरेशंस में एआई का इस्तेमाल बढ़ा अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान ही ईरान के स्कूल पर हाल ही में हुए हमले में 160 से ज्यादा लड़कियों की मौत हुई थी। हालांकि पेंटागन अभी इसकी जांच कर रहा है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक यह हमला अमेरिकी मिसाइल से हुआ था। इस स्ट्राइक में पुराने और गलत डेटा का हाथ था। कुछ रिपोर्ट में इस लक्ष्य के फैसलों में ‘क्लॉड’ और ‘मेवेन’ तकनीक के इस्तेमाल की बात भी कही जा रही है। यही तकनीक वेनेजुएला ऑपरेशंस में भी की गई थी, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है। चुनौती यह है कि कंपनियां अपने सिस्टम पर कुछ सीमाएं लगाती हैं, लेकिन युद्ध के दौरान वे कितनी कारगर होंगी, स्पष्ट नहीं। ट्रम्प ने कुछ कंपनियों को ‘सप्लाई चेन रिस्क’ तक बताया, यानी ऐसी तकनीकी निर्भरता जो युद्ध के समय काम बंद या हैक की जा सकती है। चैटबॉट डेटा स्कैन कर लक्ष्य की प्राथमिकता तय करता है युद्ध के दौरान ड्रोन, सैटेलाइट, रडार और खुफिया स्रोतों से हर सेकेंड भारी मात्रा में डेटा आता है। इस दौरान एआई चैटबॉट डेटा को तेजी से स्कैन कर पैटर्न पहचानता है। इसके बाद यह खतरे का आकलन कर प्राथमिकता तय करता है कि कौन सा लक्ष्य तुरंत हमला कर सकता है। चैटबॉट यह सुझाव भी देता है कि किसी लक्ष्य पर कौन-सा हथियार सबसे ज्यादा प्रभावी रहेगा, ताकि कार्रवाई सटीक तरीके से हो सके। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अंतिम मंजूरी मानव सैनिक ही देता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

बीसीजी रिपोर्ट पार्ट-1: यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिका की आबादी में भारतवंशी 1.5% ही, लेकिन कुल टैक्स में हिस्सेदारी 6%

बीसीजी रिपोर्ट पार्ट-1: यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिका की आबादी में भारतवंशी 1.5% ही, लेकिन कुल टैक्स में हिस्सेदारी 6%

अमेरिका के माइक्रोसॉफ्ट (सत्या नडेला), गूगल (सुंदर पिचाई) और एडोबी (शांतनु नारायण) जैसे बड़े संस्थान हों या स्टार्टअप के सरताज 72 यूनिकॉर्न या होटल और किराना स्टोर, हर जगह भारतवंशियों का दबदबा है। खर्च करने और दान करने की बात आए या टैक्स चुकाने की, उसमें भी भारतीय मूल के अमेरिकी अपनी आबादी के हिसाब से कहीं आगे खड़े हैं। बीसीजी और इंडियास्पोरा द्वारा तैयार की गई ‘अमेरिका में भारतवंशियों के दमखम की कहानी’ के पहले हिस्से में पढ़िए, कैसे अमेरिकी इकोनॉमी में अहम भूमिका निभा रहे भारतवंशी… अमेरिका में भारतीय समुदाय की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के आर्थिक ढांचे का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। अमेरिका में भारतवंशियों की महज 1.5% जनसंख्या होने के बावजूद यह समुदाय अमेरिकी खजाने में 5-6% टैक्स का योगदान देता है। सिलिकॉन वैली के बोर्डरूम से लेकर छोटे शहरों की छोटी-छोटी दुकानों तक, भारतीय मूल के उद्यमियों ने लाखों अमेरिकियों के लिए रोजगार पैदा किए हैं। फॉर्च्यून 500 कंपनियों के नेतृत्व से लेकर नए यूनिकॉर्न्स खड़े करने तक, भारतीय मेहनत और मेधा ने अमेरिका को दुनिया के मुकाबले आगे रखा है। सालाना 42 लाख करोड़ खर्च कर रहे हैं अमेरिका में भारतीय मूल का हर परिवार सालाना औसतन 2.8 करोड़ रुपए खर्च कर रहा। – अमेरिका में भारतीय मूल के कुल 51 लाख लोग रहते हैं, जो उत्तराखंड की कुल आबादी का लगभग आधा है। – भारत ने अपने 140 करोड़ लोगों के लिए जितना सालाना बजट बनाया है, उसका 79% अकेले 51 लाख भारतीय अमेरिकी हर साल वहां खर्च कर देते हैं। हर साल 28 लाख करोड़ रु. टैक्स दे रहे अपनी कुल आबादी के हिसाब से देखें तो 4 गुना से भी ज्यादा टैक्स दे रहे भारतवंशी। – भारतीय डायस्पोरा की औसत आयु 36 साल है, अमेरिकियों की 39.2 है। – भारतवंशियों की औसत आय 1.36 लाख डॉलर है, जो अमेरिकियों के 70 हजार डॉलर के मुकाबले करीब दोगुनी। – फॉर्च्यून 500 कंपनियों के सीईओ में 16 भारतवंशी, ये 25 लाख जॉब दे रहे। 91 हजार करोड़ सालाना दे रहे छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों को 2008 से तीन अरब डॉलर से ज्यादा दान दे चुके भारतवंशी। – ओपन डोर्स के अनुसार 2022-23 में भारत से 2.7 लाख छात्रों ने अमेरिकी विवि में स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री के लिए दाखिला लिया, जो अमेरिका में विदेशी छात्र आबादी का 25% है। – ये छात्र सालाना 91,000 करोड़ रुपए खर्च करते हैं। 93,000 नौकरियां पैदा होती हैं। अमेरिका के 60% होटल भारतवंशियों के होटल कारोबार में भारतीयों की भागीदारी 1940 के दशक में कांजी देसाई से शुरू हुई। – भारतवंशी लगभग 60% होटलों के मालिक हैं, जिससे सालाना लगभग 64 लाख करोड़ रु. राजस्व आता है और 40 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा हुई हैं। – भारतवंशी 35-50% छोटी दुकानों के भी मालिक हैं। इनसे करीब 45 लाख करोड़ रु. का राजस्व अर्जित होता है। यूएस में 1.1 करोड़ नौकरियां पैदा कर दीं जहां ज्यादा भारतवंशी काम करते हैं, ऐसे सेक्टर अपेक्षाकृत अधिक रोजगार दे रहे। – अमेरिका में सीधे काम करने वाले 31 लाख भारतीय, 1.15 करोड़ से भी ज्यादा नौकरियां पैदा कर चुके हैं। – जहां अधिकांश भारतवंशी काम करते हैं, जैसे- स्टेम, कारोबार व कला, वे 3.9 गुना जॉब पैदा करते हैं, जबकि बाकी सेक्टरों में ये आंकड़ा 2.7 गुना है। अमेरिका में भारतीय मूल का हर परिवार सालाना औसतन 2.8 करोड़ रुपए खर्च कर रहा। इन्होंने बनाई रिपोर्ट बीसीजी और इंडियास्पोरा ने ‘अमेरिका में भारतीय डायस्पोरा’ नाम से यह रिपोर्ट तैयार की। बीसीजी (बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप) दुनिया की सबसे बड़ी मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनियों में शुमार है। वहीं, अमेरिकी संगठन इंडियास्पोरा दुनिया भर के भारतीय मूल के प्रभावशाली लोगों को एकजुट कर उन्हें सकारात्मक कार्यों में हिस्सेदार बना रहा है।

सामाजिक पेंशन के आवेदन 31 मार्च तक

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सागर| सामाजिक न्याय व निशक्तजन कल्याण विभाग द्वारा 12 प्रकार की सामाजिक सुरक्षा पेंशन लोगों को दी जा रही हैं। संकल्प से समाधान अभियान के तहत वार्ड और गांवों में शिविर लगाकर तथा डोर-टू-डोर जाकर आवेदन प्राप्त किए जा रहे हैं। लोग इन पेंशन योजनाओं के पात्र होने पर आवेदन कर सकते हैं। 31 मार्च तक यह अभियान चलेगा। पीएससी कोचिंग के लिए आवेदन बुलाए सागर| राज्य सेवा प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए शासकीय परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र, सिरोंजा में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए निशुल्क ऑफलाइन कोचिंग के आवेदन बुलाए हैं। प्रदेश के मूलनिवासी आवेदक के परिवार की वार्षिक आय 6 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। आवेदन की अंतिम तारीख 23 मार्च है।

नेशनल हाईवे पर हादसा:बिजासन घाट में डिवाइडर पर चढ़ा ट्रेलर, चार किमी जाम

नेशनल हाईवे पर हादसा:बिजासन घाट में डिवाइडर पर चढ़ा ट्रेलर, चार किमी जाम

बिजासन घाट नेशनल हाईवे-52 पर बिजासन घाट क्षेत्र में शनिवार दोपहर करीब 2 बजे तेज रफ्तार ट्रेलर डिवाइडर पर चढ़ गया। इससे सेंधवा की ओर आने वाली लेन में यातायात बाधित हो गया और वाहन धीमी गति से निकलने लगे। कुछ ही देर में वाहनों की कतार करीब चार किमी तक पहुंच गई। ट्रेलर (सीजी 10बी 4914) महाराष्ट्र से सीमेंट खाली कर लौट रहा था। सूचना मिलते ही बिजासन चौकी प्रभारी रोहित पाटीदार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। क्रेन की मदद से करीब एक घंटे में ट्रेलर हटाया गया, जिसके बाद यातायात धीरे-धीरे सुचारू हो गया। क्रेन बुलाकर हटवाया ट्रेलर जाम की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात व्यवस्था संभाली। क्रेन की मदद से ट्रेलर को डिवाइडर से हटाया गया। इस दौरान प्रधान आरक्षक मकसूद खान, मुकेश यादव, आरक्षक नारायण पाटीदार, राकेश सिलोजे और हाईवे पेट्रोलिंग के दिनेश चौहान व दिलीप साहू मौजूद रहे।

विरासत वन में महादेव सहित 25 मंदिरों की झलक दिखाई देगी

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भास्कर संवाददाता | छतरपुर विश्व पर्यटन स्थल खजुराहो के पास गुजरात के पैटर्न पर विरासत वन विकसित किया जा रहा है। यह विरासत वन राजनगर-गंज मार्ग पर गोरा तिराहे से खजुराहो मार्ग पर 100 मीटर की दूरी पर दाहिने और वन कक्ष- 675 के अंदर 17 एकड़ जमीन में निर्मित किया जा रहा है। जिसके लिए राज्य शासन से 12 करोड़ रुपए का बजट जारी किया है। खजुराहो रेंजर नीलेश प्रजापति ने बताया कि विरासत वन के पहले चरण में क्षेत्र का सीमांकन, सफाई, विद्युत लाइन और पानी के लिए बोर कराया गया। इसके बाद परिसर की फेंसिंग और गेट निर्माण के साथ राशि वन, नक्षत्र वन, ग्रह वाटिका, चांदनी वन व तरह-तरह की छोटी छोटी वाटिकाओं के रूप में विलुप्त हो रही वृक्ष प्रजातियों को लगाया गया। जो प्रजातियां हमें अपने पूर्वजों से विरासत में प्राप्त हुई थीं। वर्तमान में गेस्ट रूम, कार्ड रूम, टॉयलेट और पार्किंग सहित अन्य पक्के निर्माण किया जा रहे हैं। जो आगामी 6 माह में पूरे होने की उम्मीद है। विरासत वन में जिले की संस्कृति देखने को मिलेगी, इसी मंशा से इसे विकसित किया जा रहा है। 17 एकड़ में प्रस्तावित संस्कृति वन में खजुराहो मंदिर के साथ कंदरिया महादेव और देवी जगदंबिका सहित 25 मंदिरों की झलक दिखाई देगी। खजुराहो में औषधि से संबंधित पौधों के रोपण के साथ ही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के वन से पौधे लाकर विकसित किए गए हैं। विरासत वन में स्थानीय क्षेत्र की संस्कृति के अनुसार प्रतिमाएं, वृक्ष नक्षत्र वन, नवग्रह पंचवटी वन, तीर्थंकर वन, सप्त ऋषि वन, श्रीपर्णी वन, चरक आरोग्य राशि वन आदि शामिल है। इसके अलावा इस वन के अंदर ओपन चिल्ड्रन एक्टिविटी, कुंड पार्क, गजिबो ओपन एयर थिएटर आदि भी बनाए जाएंगे।

29 मार्च से समर शेड्यूल:जैसलमेर से सभी फ्लाइट बंद होने की आशंका, जोधपुर-उदयपुर में भी कटौती

29 मार्च से समर शेड्यूल:जैसलमेर से सभी फ्लाइट बंद होने की आशंका, जोधपुर-उदयपुर में भी कटौती

देशभर के एयरपोर्ट पर 29 मार्च से समर फ्लाइट शेड्यूल लागू होने जा रहा है, लेकिन इस बार राजस्थान के कई एयरपोर्ट पर उड़ानों की संख्या घटने की संभावना है। सबसे ज्यादा असर जैसलमेर एयरपोर्ट पर देखने को मिल सकता है, जहां समर शेड्यूल में फ्लाइट संचालन पूरी तरह बंद होने की आशंका है। दरअसल पिछले कुछ वर्षों से ऐसा लगातार होता रहा है कि अप्रैल से सितंबर के बीच जैसलमेर एयरपोर्ट से नियमित फ्लाइट संचालन बंद हो जाता है। इसी पैटर्न के चलते इस बार भी 29 मार्च से लागू होने वाले समर शेड्यूल में यहां से एक भी फ्लाइट संचालित नहीं होने की संभावना जताई जा रही है। वर्तमान में जैसलमेर एयरपोर्ट से दिल्ली, मुंबई, जयपुर और बेंगलुरु के लिए रोजाना 6 फ्लाइट संचालित हो रही हैं, लेकिन 28 मार्च के बाद ये सभी उड़ानें बंद हो सकती हैं। पर्यटन ऑफ सीजन का असर फ्लाइट्स में कमी का असर केवल जैसलमेर तक सीमित नहीं रहेगा। उदयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जयपुर एयरपोर्ट पर भी उड़ानों की संख्या घटने की संभावना है। गर्मियों में पर्यटन गतिविधियां कम होने के कारण एयरलाइंस उड़ानों की संख्या घटा देती हैं। जैसलमेर के व्यापारिक संगठनों ने गर्मियों में भी नियमित फ्लाइट संचालन की मांग को लेकर एयरलाइंस और एयरपोर्ट अथॉरिटी को पत्र लिखे हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक समर शेड्यूल में यहां से फ्लाइट संचालन जारी रखने पर कोई फैसला नहीं हुआ है। हालांकि डीजीसीए की ओर से समर शेड्यूल अभी अंतिम रूप से जारी नहीं किया गया है। जैसलमेर से ये 6 फ्लाइट बंद होने की संभावना एआई-1864 – जैसलमेर से दिल्ली (10:30 बजे) 6E-6143 – जैसलमेर से मुंबई (11:00 बजे) 6E-7677 – जैसलमेर से जयपुर (11:25 बजे) 6E-6509 – जैसलमेर से दिल्ली (2:55 बजे) एआई-184 – जैसलमेर से दिल्ली (3:40 बजे) 6E-6838 – जैसलमेर से बेंगलुरु (4:35 बजे) समर शेड्यूल में फ्लाइट्स की संभावित स्थिति उदयपुर: अभी 23 फ्लाइट, घटकर 17 होने की संभावना जोधपुर: अभी 14 फ्लाइट, घटकर 11 होने की संभावना बीकानेर: समर शेड्यूल में सिर्फ 1 फ्लाइट किशनगढ़ (अजमेर): रोजाना करीब 3 फ्लाइट जयपुर: अभी 65 फ्लाइट, 4-5 कम होने की संभावना असर;

होंडा की अमेरिका में इलेक्ट्रिक कार लॉन्च योजना रद्द:ट्रम्प ईवी से सब्सिडी घटा पेट्रोल कारों को बढ़ावा दे रहे; फोर्ड, जीएम, स्टेलांटिस भी ईवी योजनाएं टाल रहीं, होंडा को घाटे का अंदेशा

होंडा की अमेरिका में इलेक्ट्रिक कार लॉन्च योजना रद्द:ट्रम्प ईवी से सब्सिडी घटा पेट्रोल कारों को बढ़ावा दे रहे; फोर्ड, जीएम, स्टेलांटिस भी ईवी योजनाएं टाल रहीं, होंडा को घाटे का अंदेशा

होंडा ने अमेरिका में इलेक्ट्रिक कार (ईवी) लॉन्च करने की योजना रद्द कर दी है। कंपनी ने कहा है कि अमेरिका में ईवी की मांग धीमी पड़ने और नीतिगत बदलावों के कारण उसने यह फैसला किया है। कंपनी को 1957 में शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद पहली बार 2025-26 में 36,550 करोड़ रुपए से ज्यादा घाटा होने का अंदेशा है। ईवी से जुड़ी रणनीति बदलने से भी कंपनी को 1.45 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। होंडा के मुताबिक, अमेरिका में ईवी मार्केट का विस्तार कई कारणों से धीमा पड़ा है। सरकार ने ईवी प्रोत्साहन कम कर दिए हैं और पेट्रोल-डीजल से जुड़े नियमों में ढील दी है। अमेरिकी प्रशासन ऑटो कंपनियों को बड़े पिकअप और एसयूवी बेचने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। कंपनी को नई टैरिफ नीति के कारण पेट्रोल और हाइब्रिड कारों से मुनाफा घट रहा है। इससे कमाई पर दबाव बढ़ा है। इसी वजह से कंपनी ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अपनी ईवी प्लान टालने का फैसला किया है। होंडा के साथ फोर्ड, जनरल मोटर्स और स्टेलांटिस जैसी कंपनियां भी ईवी योजनाएं टाल रही हैं। इन्हें इनमें किए गए निवेश पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि कुछ कंपनियों ने अब भी ईवी रणनीति जारी रखी है। टोयोटा, सुबारू, बीएमडब्ल्यू, फॉक्सवैगन और ह्युंडई नई इलेक्ट्रिक कारें लॉन्च कर रही हैं। यूरोप और एशिया के कई देशों में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री भी बढ़ रही है। कार खरीद से जुड़े प्लेटफॉर्म एडमंड्स के अनुसार हाल के युद्ध और पेट्रोल कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बाद कुछ खरीदार इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी विचार कर रहे हैं। इतिहास बताता है कि पेट्रोल पम्प पर कीमतें बढ़ने से लोग अगली कार के रूप में ईवी विकल्प पर ज्यादा ध्यान देने लगते हैं। स्टार्टअप्स सस्ते, तेज चार्ज होने वाले मॉडल बाजार में उतारने की तैयारी कर रहे अमेरिकी स्टार्टअप्स रिवियन और ल्यूसिड कम कीमत वाले नए मॉडल ला रही हैं। ये कंपनियां 50 लाख रुपए से कम कीमत वाले ईवी बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं। मौजूदा मॉडल 65 लाख रुपए से ज्यादा कीमत के हैं। इसके कारण बड़ी संख्या में ग्राहक इन्हें खरीद नहीं पाते हैं। ल्यूसिड ने ‘कॉसमॉस’ नाम की कार पेश करने की योजना बनाई है। यह 14 मिनट में चार्ज होकर 322 किमी चलने में सक्षम होगी। कंपनी इस साल सऊदी अरब में उत्पादन शुरू करेगी और 2027 में बिक्री शुरू करेगी।

गलतियों पर खुद को न कोसें, तनाव हंसी में उड़ाएं:मनोवैज्ञानिक का दावा- खुद की गलतियों पर हंसना लोगों को आपसे मानवीय रूप से जोड़ता है; इससे आत्मविश्वास मजबूत होगा

गलतियों पर खुद को न कोसें, तनाव हंसी में उड़ाएं:मनोवैज्ञानिक का दावा- खुद की गलतियों पर हंसना लोगों को आपसे मानवीय रूप से जोड़ता है; इससे आत्मविश्वास मजबूत होगा

अक्सर सार्वजनिक जगहों पर छोटी गलतियों पर भी हम शर्मिंदा हो जाते हैं। चाहे कांच के दरवाजे से टकराना हो या योग क्लास में अचानक फिसलना, हमारा पहला रिएक्शन खुद को छिपाना होता है। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर ओवुल सेजर की रिसर्च ये सोच बदल रही हैै। शोध के मुताबिक ऐसे पलों में शर्मिंदा होने के बजाय खुद पर हंसें। यह आपको दूसरों की नजर में अधिक मिलनसार, सक्षम और सच्चा बनाता है। अपनी गलती पर मुस्कुराना माहौल को ‘जजमेंट’ से हटाकर ‘सहजता’ की ओर मोड़ देता है। यह आत्म-स्वीकृति का संकेत है और दुनिया अपनी कमियों को मुस्कुराकर अपनाने वालों को पसंद करती है। गलतियों को सहजता से स्वीकार करना ही असली आत्मविश्वास है रिसर्च के मुताबिक जो लोग अपनी गलतियों पर मुस्कुराते हैं, वे दुनिया की नजर में अधिक खुशमिजाज और काबिल दिखते हैं। वहीं, दूसरी ओर जरूरत से ज्यादा शर्मिंदगी आपकी असुरक्षा और ‘लोग क्या सोचेंगे’ वाले डर को उजागर करती है। रिसर्च ये भी कहती है कि खुद का मजाक उड़ाना दरअसल दूसरों के लिए आपसे जुड़ने का निमंत्रण है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह हंसी न केवल माहौल का तनाव कम करती है, बल्कि आसपास के लोगों को भी आपको सहज महसूस कराने की औपचारिकता से मुक्त कर देती है। खुद को कसूरवार समझना छोड़ें, दुनिया को आपकी कोई परवाह नहीं अक्सर हम ‘स्पॉटलाइट इफेक्ट’ के भ्रम में जीते हैं, जहां हमें लगता है कि दुनिया की नजरें सिर्फ हमारी गलतियों पर टिकी हैं। इसकी हकीकत कुछ और है। दरअसल, लोग अपनी उलझनों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें आपकी छोटी भूलों की उतनी परवाह नहीं होती, जितनी आप मान बैठते हैं। प्रोफेसर सेजर की सलाह है कि अगली बार किसी सामाजिक चूक पर खुद को कोसने के बजाय बस यह पूछें ‘क्या इससे किसी का नुकसान हुआ?’ यदि जवाब ‘नहीं’ है, तो ग्लानि छोड़िए और बस मुस्कुरा दीजिए। यह सहज बदलाव न केवल आपके आत्मविश्वास को मजबूत करेगा, बल्कि आपको दूसरों की नजर में और भी अधिक सरल और खास बना देगा। हंसी तभी अच्छी लगती है जब तक उससे किसी को ठेस न पहुंचे खुद पर हंसने की कला में अहम है ‘इमोशनल कैलिब्रेशन’ यानी सही भावना का चुनाव। शोधकर्ता आगाह करते हैं कि हंसी तभी तक गरिमापूर्ण है, जब तक वह किसी को ‘ठेस’ न पहुंचाए। यदि आपकी गलती से किसी को शारीरिक चोट पहुंची है या कोई नुकसान हुआ है, तो वहां हंसना आपको संवेदनहीन और अनैतिक साबित कर सकता है। ऐसे वक्त में हंसी नहीं, बल्कि खेद और शर्मिंदगी ही सही मानवीय आचरण है। याद रहे, आत्मविश्वास मुस्कुराने में है, लेकिन बड़प्पन यह पहचानने में है कि कब माफी मांगनी है।