पाकिस्तान में जन्म, न्यूजीलैंड से रिकॉर्ड:पिता की कोचिंग और अकरम से प्रेरणा; अब्बास ने डेब्यू मैच में ही रचा इतिहास

लाहौर में जन्मे मुहम्मद अब्बास जब एक साल के थे, तब उनका परिवार हजारों किलोमीटर दूर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड चला गया था। अब पाकिस्तान की कोई याद उनके पास नहीं बची। लेकिन पहचान दो देशों से मिलकर बनी है- खून में पाकिस्तान और परवरिश में न्यूजीलैंड। अब्बास कहते हैं, ‘मैं बहुत छोटा था, इसलिए कुछ याद नहीं है। लेकिन मेरी पूरी परवरिश न्यूजीलैंड में हुई।’ यही दोहरी पहचान उनकी कहानी को खास बनाती है। अब्बास के पिता की वजह से उनका क्रिकेट से बचपन से ही लगाव था। अब्बास के शुरुआती हीरो पाकिस्तानी पेसर वसीम अकरम रहे। अब्बास कहते हैं, ‘मैंने उनके करियर का आखिरी हिस्सा ही देखा, लेकिन मेरे पापा हमेशा उनके बारे में बताते थे।’ बाद में न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों ने उन्हें प्रेरित किया। केन विलियमसन और ट्रेंट बोल्ट उनके रोल मॉडल बने। कुछ साल पहले उनकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया। पिता को वेलिंगटन में कोच की नौकरी मिली। अब अब्बास के सामने दो रास्ते थे, ऑकलैंड में रहना या परिवार के साथ वेलिंगटन जाना। उन्होंने परिवार को चुना। यही बदलाव उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक ले आया। मार्च 2025 में उन्हें न्यूजीलैंड के लिए वनडे डेब्यू का मौका मिला। खास बात यह थी कि मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ नेपियर में था। अब्बास कहते हैं ‘यह थोड़ा अजीब अहसास था। मैं उम्मीद नहीं कर रहा था कि खेलूंगा, लेकिन अचानक प्लेइंग इलेवन में आ गया। यह मेरे लिए सपने जैसा था।’ उन्होंने डेब्यू को यादगार बना दिया। नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए 26 गेंदों में 52 रन ठोक दिए और डेब्यू मैच में सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड बना दिया। वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘मुझे उस समय पता ही नहीं था कि यह रिकॉर्ड है। बाद में बताया गया। अभी भी विश्वास नहीं होता।’ टॉम लैथम जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना उन्हें अब भी खास लगता है। हालांकि, पाकिस्तान से उनका रिश्ता अब भी कायम है। वे कहते हैं ‘मेरे कई रिश्तेदार वहां हैं। मैं 2018 तक नियमित जाता था। अब क्रिकेट की वजह से नहीं जा पाता, लेकिन दोनों देशों से मेरा गहरा जुड़ाव है।’ क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं बल्कि पिता से जुड़ा खास रिश्ता अब्बास के क्रिकेटिंग करियर की शुरुआत उनके पिता से होती है। उनके पिता ही उनके कोच भी रहे हैं। क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि पिता से जुड़ा रिश्ता भी है। वे बताते हैं, ‘मेरे पिता ही मेरे सबसे बड़े कोच हैं। वे बॉलिंग कोच हैं और बचपन से मैंने उन्हीं के साथ ट्रेनिंग की है। उन्होंने ही मुझे क्रिकेट से जोड़ा।’ पिता के साथ बिताए गए समय, अभ्यास और अनुशासन ने उन्हें एक मजबूत खिलाड़ी बनाया।
अनूठी परंपरा; मियाओ सिस्टर्स फेस्टिवल:रंग-बिरंगे चावलों से बयां होता है दिल का हाल, 'सिस्टर्स राइस' देकर युवतियों ने चुना हमसफर

तस्वीर थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक की है, जहां मियाओ समुदाय का प्रसिद्ध ‘मियाओ सिस्टर्स फेस्टिवल’ मनाया गया। इस दौरान आयोजित परेड में युवतियों ने अपनी सांस्कृतिक वेशभूषा और जटिल नक्काशी वाले भारी चांदी के आभूषण पहनकर हिस्सा लिया। यह मुख्य रूप से चीन का त्योहार है, जहां मियाओ समुदाय की सबसे अधिक आबादी है। इसके अलावा थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में भी यह त्योहार मनाया जाता है। इस दिन युवा लड़के-लड़कियां पारंपरिक गीत गाकर, वाद्ययंत्र बजाकर और नृत्य के जरिए एक-दूसरे से मिलते हैं और अपना जीवनसाथी चुनते हैं। इस त्योहार की सबसे खास परंपरा ‘सिस्टर्स राइस’ है। इस अवसर पर पेड़ों की पत्तियों और फूलों का उपयोग करके रंग-बिरंगे चावल पकाते हैं। युवतियां इन खास चावलों को रूमालों या टोकरियों में रखकर युवकों को भेंट करती हैं। चावलों के साथ दिए गए अन्य छोटे प्रतीक युवाओं के बीच प्यार, इनकार या दोस्ती के संदेश को दर्शाते हैं। मियाओ बहनों के भोजन उत्सव का इतिहास और किंवदंती लोककथाओं के अनुसार, एक समय की बात है, एक बूढ़े व्यक्ति और उसकी पत्नी की तीन सुंदर बेटियाँ थीं। एक दिन, जब वे नदी किनारे खेल रही थीं, तो लड़कियों को अकेलापन और प्रेम की पीड़ा महसूस हुई। दाढ़ी वाले देवता, झांग गुओलाओ, ने लड़कियों की आत्मा में प्रवेश किया और उन्हें झींगा, मछली और अन्य विशेष सामग्रियों से भरे हुए पाँच रंगों के चिपचिपे चावल के रोल बनाने के लिए कहा। जब युवक पहाड़ से नीचे आए, तो सुंदर लड़कियों ने उन्हें चावल भेंट किए और वे उनसे प्रेम करने लगे। चीन का सिस्टर्स मील फेस्टिवल मियाओ संस्कृति में गहराई से जुड़ा हुआ है, जो सैकड़ों साल पुराना है। मूल रूप से यह एक प्रेम-प्रसंग की रस्म के रूप में शुरू हुआ था, जिसमें युवा मियाओ लड़कियां विशेष भोजन तैयार करती थीं और शादी के इच्छुक दूल्हों को भेंट करती थीं। रंगीन रेशम में लिपटे और प्रतीकात्मक सजावट से सजे ये भोजन, एक महिला की अपने प्रेमी के प्रति भावनाओं के बारे में गुप्त संदेश देते थे। चावल के पैकेट के अंदर अलग-अलग वस्तुएं अलग-अलग भावनाओं को दर्शाती थीं,दो चॉपस्टिक रुचि का संकेत देती थीं, जबकि एक मिर्च अस्वीकृति का प्रतीक थी।
अनूठी परंपरा; मियाओ सिस्टर्स फेस्टिवल:रंग-बिरंगे चावलों से बयां होता है दिल का हाल, 'सिस्टर्स राइस' देकर युवतियों ने चुना हमसफर

तस्वीर थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक की है, जहां मियाओ समुदाय का प्रसिद्ध ‘मियाओ सिस्टर्स फेस्टिवल’ मनाया गया। इस दौरान आयोजित परेड में युवतियों ने अपनी सांस्कृतिक वेशभूषा और जटिल नक्काशी वाले भारी चांदी के आभूषण पहनकर हिस्सा लिया। यह मुख्य रूप से चीन का त्योहार है, जहां मियाओ समुदाय की सबसे अधिक आबादी है। इसके अलावा थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में भी यह त्योहार मनाया जाता है। इस दिन युवा लड़के-लड़कियां पारंपरिक गीत गाकर, वाद्ययंत्र बजाकर और नृत्य के जरिए एक-दूसरे से मिलते हैं और अपना जीवनसाथी चुनते हैं। इस त्योहार की सबसे खास परंपरा ‘सिस्टर्स राइस’ है। इस अवसर पर पेड़ों की पत्तियों और फूलों का उपयोग करके रंग-बिरंगे चावल पकाते हैं। युवतियां इन खास चावलों को रूमालों या टोकरियों में रखकर युवकों को भेंट करती हैं। चावलों के साथ दिए गए अन्य छोटे प्रतीक युवाओं के बीच प्यार, इनकार या दोस्ती के संदेश को दर्शाते हैं। मियाओ बहनों के भोजन उत्सव का इतिहास और किंवदंती लोककथाओं के अनुसार, एक समय की बात है, एक बूढ़े व्यक्ति और उसकी पत्नी की तीन सुंदर बेटियाँ थीं। एक दिन, जब वे नदी किनारे खेल रही थीं, तो लड़कियों को अकेलापन और प्रेम की पीड़ा महसूस हुई। दाढ़ी वाले देवता, झांग गुओलाओ, ने लड़कियों की आत्मा में प्रवेश किया और उन्हें झींगा, मछली और अन्य विशेष सामग्रियों से भरे हुए पाँच रंगों के चिपचिपे चावल के रोल बनाने के लिए कहा। जब युवक पहाड़ से नीचे आए, तो सुंदर लड़कियों ने उन्हें चावल भेंट किए और वे उनसे प्रेम करने लगे। चीन का सिस्टर्स मील फेस्टिवल मियाओ संस्कृति में गहराई से जुड़ा हुआ है, जो सैकड़ों साल पुराना है। मूल रूप से यह एक प्रेम-प्रसंग की रस्म के रूप में शुरू हुआ था, जिसमें युवा मियाओ लड़कियां विशेष भोजन तैयार करती थीं और शादी के इच्छुक दूल्हों को भेंट करती थीं। रंगीन रेशम में लिपटे और प्रतीकात्मक सजावट से सजे ये भोजन, एक महिला की अपने प्रेमी के प्रति भावनाओं के बारे में गुप्त संदेश देते थे। चावल के पैकेट के अंदर अलग-अलग वस्तुएं अलग-अलग भावनाओं को दर्शाती थीं,दो चॉपस्टिक रुचि का संकेत देती थीं, जबकि एक मिर्च अस्वीकृति का प्रतीक थी।
बास्केटबॉल दिग्गज कोबे ब्रायंट की सफलता का सीक्रेट:आंख खुलते ही फोन देखने की बजाय 15 मिनट शांत बैठें; मेमोरी बढ़ेगी, तनाव दूर होगा

भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर खुद के लिए समय नहीं निकाल पाते। ऐसे में दिवंगत बास्केटबॉल खिलाड़ी कोबे ब्रायंट की दिनचर्या की एक आसान आदत हमारे लिए बेहद काम की हो सकती है। अपनी आक्रामक खेल शैली और जीतने की जिद के लिए मशहूर कोबे का अभ्यास सुबह 4 बजे ही शुरू हो जाता था। लेकिन इस कड़े रूटीन के बीच उनका एक खास नियम था, जिसने उन्हें मानसिक रूप से अभेद्य बनाया था। अमेरिका के कोबे हर सुबह उठने के बाद कम से कम 15 मिनट एक जगह बिल्कुल शांत बैठकर ध्यान लगाते थे। उनके लिए यह मौन शारीरिक कसरत जितना ही महत्वपूर्ण था। कोबे मानते थे कि सुबह की 15 मिनट की यह शांति उनके पूरे दिन की नींव तय करती है। यह उन्हें दिनभर मानसिक रूप से स्थिर रखती। इसके बिना उन्हें लगता था कि वे बस काम और तनाव के पीछे भाग रहे हैं। इस मौन के अभ्यास से वे अपने दिन को खुद नियंत्रित कर पाते थे। रात को बड़े मैचों से पहले भी वे इसी तरह शांत बैठकर चुनौतियों की कल्पना करते और मानसिक रूप से खुद को तैयार करते थे। मनोविज्ञान में इस अभ्यास को ‘टाइप 2 फन’ कहा जाता है। शुरुआत में 15-20 मिनट बिना मोबाइल या किसी बाहरी रुकावट के चुपचाप बैठना उबाऊ और बेचैन करने वाला लग सकता है। लेकिन आदत बनने पर यह गहरी संतुष्टि देता है। जब इंसान बिल्कुल शांत बैठता है, तो दिमाग में वो बातें और भावनाएं आने लगती हैं, जिन्हें वह दिनभर की भागदौड़ में नजरअंदाज कर देता है- जैसे शरीर का कोई पुराना दर्द, या अटका हुआ काम। खाली बैठकर हम विचारों से भागने के बजाय उनका सामना करना सीखते हैं। कोबे भी मानते थे कि डर या घबराहट को दबाने से वे बढ़ती हैं, जबकि शांत बैठकर उन्हें स्वीकार करने से नकारात्मक प्रभाव खत्म हो जाता है। ड्यूक यूनिवर्सिटी के अध्ययन के अनुसार, दिन में कुछ देर की गहरी शांति दिमाग के ‘हिप्पोकैम्पस’ हिस्से में नई कोशिकाओं को जन्म देने में मदद करती है, जो याददाश्त और सीखने की क्षमता से जुड़ा है। इयरफोन लगाकर टहलने और एक जगह स्थिर बैठकर शांति का अनुभव करने में बड़ा अंतर है। स्थिरता में हमारा दिमाग खुद को रिपेयर करके री-स्टोर मोड में चला जाता है, जबकि चलते या कुछ सुनते समय वह प्रतिक्रियाओं में उलझा रहता है। नोवाक जोकोविच जैसे टेनिस दिग्गज भी मुश्किल पलों में तुरंत फैसले लेने और तनाव के बीच शांत रहने के लिए ध्यान का सहारा लेते हैं। बिना शोर के बैठने पर आप खुद के भीतर गहराई से झांक पाते हैं। इसलिए, आंख खुलते ही फोन चेक करने या काम पर भागने के बजाय 15 मिनट की शांति के साथ दिन की शुरुआत करें। यह छोटा-सा बदलाव जीवन को नई ऊर्जा, बेहतर फोकस और गजब का नियंत्रण दे सकता है।
नई स्पोर्ट्स ड्रामा:चार जून को रिलीज होगी राम चरण स्टारर ‘पेड्डी’, दो फिल्मों की मुश्किलें बढ़ीं

राम चरण इन दिनों अपनी फिल्म ‘पेड्डी’ को लेकर चर्चा में हैं। अब मेकर्स ने इसकी रिलीज डेट अनाउंस कर दी। इसके साथ मेकर्स ने फिल्म का नया पोस्टर भी रिलीज किया है। बता दें कि बूची बाबू निर्देशित यह फिल्म पहले 30 अप्रैल को रिलीज होने वाली थी, लेकिन मेकर्स ने आईपीएल के चलते इसकी रिलीज आगे खिसका दी। अब आईपीएल के खत्म होते ही मेकर्स इसे रिलीज करने की तैयारी में हैं। यह फिल्म 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। बड़ी बात यह है कि ‘पेद्दी’ की इस नई रिलीज डेट ने दो फिल्मों की मुसीबत बढ़ा दी है। एक तरफ 5 जून को बॉबी देओल की फिल्म ‘बंदर’ सिनेमाघरों में रिलीज होनी थी। वहीं दूसरी तरफ इसी दिन वरुण धवन की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ भी रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म में वरुण धवन के साथ मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े भी नजर आएंगी। फिल्म में जाह्नवी कपूर भी लीड रोल में हैं स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म ‘पेड्डी’ की शूटिंग पूरी हो चुकी है। इस फिल्म में राम के साथ जाह्नवी कपूर भी मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। वहीं इसमें शिव राजकुमार, दिव्येंदु शर्मा, जगपति बाबू और बोमन ईरानी भी अहम किरदारों में दिखाई देंगे। इसका म्यूजिक ए आर रहमान ने कंपोज किया है। श्रुति हासन भी इस फिल्म का हिस्सा हो सकती हैं।
बड़े प्रोजेक्ट्स:‘तुम्बाड 2’ में हुई आलिया की सरप्राइज एंट्री, आखिरी फेज में है स्पाई ड्रामा ‘अल्फा’

आलिया भट्ट इस समय अपने करियर के बेहद व्यस्त और दिलचस्प दौर से गुजर रही हैं। एक के बाद एक बड़े प्रोजेक्ट्स के बीच अब उनके नाम एक और सरप्राइज जुड़ गया है। खबर है कि वह कल्ट क्लासिक फिल्म ‘तुम्बाड’ के सीक्वल ‘तुम्बाड 2’ में खास भूमिका निभाने जा रही हैं। हालांकि यह रोल कैमियो बताया जा रहा है, लेकिन इसकी अहमियत कहानी में काफी बड़ी मानी जा रही है, क्योंकि उनका किरदार फिल्म के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर नजर आएगा। आलिया ने मुंबई के मड आइलैंड में दो दिनों की शूटिंग पूरी कर ली है। फिल्म से जुड़े लोगों का कहना है कि मेकर्स को एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी, जो कम स्क्रीन टाइम में भी कहानी में गहराई और रहस्य जोड़ सके। आलिया इस भूमिका के लिए एकदम फिट मानी गईं, क्योंकि उनकी स्क्रीन प्रेजेंस मजबूत है और वह छोटे रोल में भी बड़ा प्रभाव छोड़ने की क्षमता रखती हैं। यही वजह है कि उनका यह कैमियो ‘तुम्बाड 2’ के नैरेटिव में खास महत्व रखेगा। ‘लव एंड वॉर’ में आलिया भी सैनिक के रोल में हैं ‘लव एंड वॉर’ में आलिया के साथ रणबीर कपूर और विकी कौशल हैं। सूत्रों के अनुसार, आलिया इस फिल्म में एक जांबाज सैनिक के रूप में नजर आएंगी। उनके करियर में यह पहली बार होगा जब वह युद्ध की पृष्ठभूमि वाली फिल्म में इस तरह का सशक्त किरदार निभाएंगी। फिल्म की शूटिंग फिलहाल मुंबई में चल रही है, जहां भारतीय सेना के विभिन्न विभागों, मेस और कल्चरल एक्टिविटीज को बड़े पैमाने पर फिल्माया गया है। भंसाली इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद संजीदा हैं। उन्होंने एक्टर्स से लंबी डेट्स ली हैं। महू स्थिति आर्मी बेस कैंप में भी होगी ‘लव एंड…’ के कई हिस्सों की शूटिंग बताया जा रहा है कि ‘लव एंड वॉर’ की लंबाई भी लगभग सवा तीन घंटे होने की संभावना है। पहले इस फिल्म के लिए इटली में 45 दिनों का एक भव्य शूटिंग शेड्यूल तय किया गया था, लेकिन बाद में लॉजिस्टिक चुनौतियों के चलते इसे रद्द करना पड़ा। भंसाली ने इसका तोड़ निकालते हुए मुंबई के गोरेगांव स्थित रॉयल पाम्स के पास ही एक विशाल सेट तैयार करवाया है। फिल्म के ‘वॉर’ वाले बैकड्रॉप के लिए मध्य प्रदेश के महू स्थित ब्रिटिश काल के आर्मी बेस कैंप का भी चयन किया गया है। ‘अल्फा’ में है स्पाई अवतार, एक्शन में दिखेगा एक नया अंदाज इसके अलावा आलिया की ‘अल्फा’ भी चर्चा में है, जिसमें वह एक स्पाई के रोल में दिखेंगी। इसके लिए उन्होंने खास ट्रेनिंग ली है और कई एक्शन सीक्वेंस भी शूट किए हैं। फिल्म की शूटिंग अब अंतिम दौर में है और आलिया अपना मुख्य हिस्सा शूट कर चुकी हैं। ‘अल्फा’ के अनुभव ने आलिया को ‘लव एंड वॉर’ में काफी मदद की है।
The passion of Spain’s Angel Mateos became an example, Angel Mateos Gonzalez

Hindi News Sports The Passion Of Spain’s Angel Mateos Became An Example, Angel Mateos Gonzalez मैड्रिड17 मिनट पहले कॉपी लिंक एंजेल मातेओस गोंजालेज 27 साल पहले प्रतिस्पर्धी फुटबॉल से संन्यास ले चुके थे, अब एक बार फिर मैदान पर उतरने जा रहे हैं। स्पेन में फुटबॉल के लिए लोगों में अलग ही जुनून देखने को मिलता है और इस जुनून की कोई उम्र नहीं होती। ऐसी ही कहानी है उस खिलाड़ी की, जिसका खेल के प्रति जुनून और समर्पण पूरी दुनिया में मिसाल बन गया है। 70 वर्षीय एंजेल मातेओस गोंजालेज, जो 27 साल पहले प्रतिस्पर्धी फुटबॉल से संन्यास ले चुके थे, अब एक बार फिर मैदान पर उतरने जा रहे हैं। मातेओस रविवार को स्पेनिश फुटबॉल के पांचवें डिवीजन टूर्नामेंट में एस्टूरियन क्लब सीडी कोलुंगा के लिए गोलकीपर के रूप में खेल सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो वह स्पेन में आधिकारिक मैच खेलने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन जाएंगे। मातेओस इस सीजन में टीम के गोलकीपर्स की मदद कर रहे थे। हालांकि, मातेओस ने खुद कहा है कि अभी यह तय नहीं है कि वे पूरे 90 मिनट खेलेंगे या सिर्फ पहला हाफ। उन्होंने स्थानीय अखबार ‘एल कोमर्सियो’ से बातचीत में कहा, ‘मैंने इस हफ्ते टीम के साथ अभ्यास किया, लेकिन अभी यह तय नहीं है कि मैं पूरा मैच खेलूंगा या नहीं।’ क्लब ने साफ किया कि यह कोई दिखावा या प्रचार का तरीका नहीं है। यह एक ऐसे खिलाड़ी को सम्मान देने का प्रयास है, जिसने अपने जीवन में कड़ी मेहनत और खेल के प्रति सच्ची लगन दिखाई है। क्लब के बयान में कहा गया, ‘मातेओस हमारे क्लब के मूल्यों को दर्शाते हैं, जुनून, निरंतरता और खेल के प्रति सम्मान। उम्र मायने नहीं रखती, असली बात है समर्पण और प्रतिबद्धता।’ क्लब का कहना है कि मातेओस सिर्फ 70 साल के होने की वजह से नहीं खेल रहे हैं, बल्कि इसलिए खेल रहे हैं क्योंकि उन्होंने इसे अपनी मेहनत से हासिल किया है। मातेओस ने बताया, ‘जब मैंने खेलना शुरू किया था, तब खेल काफी अलग था। उस समय के मैदान और गेंदें आज से बिल्कुल अलग थीं। मुझे याद है कि बारिश के समय मैदान में पानी भर जाता था, तो मैं गोलपोस्ट के पास एक बाल्टी रखता था ताकि पानी निकाल सकूं।’ सीडी कोलुंगा के अनुसार, यह मैच सिर्फ उम्र का नहीं, बल्कि खेल की असली भावना का जश्न है। यह कहानी दिखाती है कि अगर जुनून और समर्पण हो, तो उम्र सिर्फ एक संख्या बनकर रह जाती है। फिट रहने के लिए रोज खेलें या टहलें: मातेओस एंजेल मातेओस पहले एक खदान में काम करते थे। मातेओस ने कहा, ‘आपको हमेशा सक्रिय रहना चाहिए, चाहे खेल खेलें या रोज टहलें।’ उन्होंने यह भी बताया कि वे बचपन से ही खेल के प्रति समर्पित रहे हैं और आज भी खुद को फिट रखते हैं। मातेओस ने कहा कि उनका वजन अब भी लगभग करीब 68-69 किलो ही है, जितना 18 साल की उम्र में था। वे अब भी प्रतिस्पर्धा में विश्वास रखते हैं और हारना पसंद नहीं करते। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
द्वारकेश पॉडकास्ट के मुरीद टेक दिग्गज:जकरबर्ग को कह दिया था- दोबारा रिकॉर्ड करना पड़ेगा, हुआंग-नडेला करते हैं घंटों चर्चा

एआई की जादुई दुनिया में जहां बड़े-बड़े दिग्गज भी तकनीक के शोर में खो जाते हैं, वहीं द्वारकेश पटेल सिलिकॉन वैली के एआई समुदाय की सबसे अहम आवाज बनकर उभरे हैं। 25 वर्षीय भारतीय मूल के द्वारकेश के पॉडकास्ट को प्रति एपिसोड औसतन 20 लाख बार सुना जाता है। मार्क जकरबर्ग, सत्या नडेला और जैंसन हुआंग जैसे दिग्गज सीईओ उनके साथ घंटों तक चर्चाएं करते हैं। लोकप्रियता ऐसी है कि उनके साथ सेल्फी लेने के लिए होड़ लग जाती है। पटेल इंटरव्यू के लिए गहन अध्ययन करते हैं और एआई की जटिल भाषा को नए अंदाज में पेश करते हैं। बोरियत से शुरू हुआ सफर द्वारकेश के पॉडकॉस्ट का सफर 2020 में एक कॉलेज हॉस्टल के कमरे से शुरू हुआ था। कोरोना महामारी के दौरान जब सब कुछ ठप हो गया था, तब यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सस के छात्र द्वारकेश कुछ अलग करने की तलाश में थे। उन्होंने अपनी जिज्ञासा के दम पर विशेषज्ञों को ईमेल करना शुरू किया। आज ‘द्वारकेश पॉडकास्ट’ की अलग पहचान है। एंथ्रोपिक की मुख्य संचार अधिकारी साशा डी मारिग्नी कहती हैं, ‘लोग उन्हें केवल कमेंटेटर नहीं मानते, वे एआई समुदाय के अभिन्न अंग हैं।’ इंटरव्यू के लिए उन्हीं मेहमानों को चुनते हैं, जिनसे नया सीखने को मिले द्वारकेश एक इंटरव्यू के लिए दो हफ्ते तक रिसर्च करते हैं। फ्लैश कार्ड बनाते हैं। विषयों को समझने के लिए इकोनॉमिक्स, फिजिक्स तक के ट्यूटर हायर करते हैं। साख ऐसी है कि उन्होंने मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग से भी इंटरव्यू को दोबारा रिकॉर्ड करने के लिए कह दिया था। एनवीडिया के सीईओ जैंसन हुआंग और ओपनएआई के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक इल्या सुत्स्केवर जैसे दिग्गजों से तकनीकी बारीकियों पर चर्चा करते हैं। द्वारकेश के पॉडकास्ट में निवेशक करोड़ों रु. लगाने को तैयार हैं, लेकिन वे इसे स्वतंत्र रिसर्च कंपनी या नेटवर्क की तरह नहीं चलाना चाहते। वे अपने कंटेंट की एडिटिंग खुद देखते हैं और उन्हीं मेहमानों को चुनते हैं, जिनसे उन्हें कुछ नया सीखने को मिले। द्वारकेश जटिल तकनीकी शब्दों और मुद्दों पर घंटों बात करते हैं जहां मुख्यधारा का मीडिया अक्सर एआई को लेकर डर या सतही बातें करता है, द्वारकेश ‘क्वाड्रेटिक अटेंशन कॉस्ट’ और ‘केवी वेक्टर्स’ जैसे जटिल तकनीकी शब्दों पर घंटों बात करते हैं। प्रख्यात अर्थशास्त्री टायलर कोवेन उन्हें ‘एआई युग का नंबर-1 इतिहासकार’ बताते हैं। वे एआई के उस भविष्य की बात करते हैं, जहां मशीनें इंसान की तरह लगातार सीख सकेंगी, हालांकि वे इसके बी च आने वाली तकनीकी बाधाओं को लेकर भी सवाल उठाते हैं।
Stanford-MIT expert warns- Gemini, ChatGPT, and the Cloud are providing dangerous information.

Hindi News International Stanford MIT Expert Warns Gemini, ChatGPT, And The Cloud Are Providing Dangerous Information. न्यूयॉर्क5 मिनट पहले कॉपी लिंक एआई की खौफनाक हकीकत ने वैज्ञानिकों की रातों की नींद उड़ा दी है। – प्रतीकात्मक फोटो कुछ दिन पहले स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजिस्ट व बायोसिक्युरिटी एक्सपर्ट डॉ. डेविड रलमैन लैपटॉप के सामने बैठे थे, उनके पसीने छूट रहे थे। स्क्रीन पर एआई चैटबॉट विस्तार से बता रहा था कि सामूहिक नरसंहार की योजना कैसे बनाएं… यह किसी साइंस-फिक्शन फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि एआई की वह खौफनाक हकीकत थी, जिसने वैज्ञानिकों की रातों की नींद उड़ा दी है। डॉ. रलमैन को एक एआई कंपनी ने उत्पाद की सार्वजनिक रिलीज से पहले उसकी सुरक्षा जांच की जिम्मेदारी दी थी। चैटबॉट ने न सिर्फ कुख्यात रोगजनक (पैथोजन) को लैब में मॉडिफाई करने का तरीका बताया ताकि उस पर मौजूदा दवाएं बेअसर हो जाएं बल्कि उसने बड़े सार्वजनिक परिवहन तंत्र की सुरक्षा खामियों की भी पहचान की। चैटबॉट ने बिंदुवार समझाया कि उस ‘सुपरबग’ को कहां और कैसे फैलाया जाए ताकि कम वक्त में ज्यादा लोग मारे जाएं और पकड़े जाने की गुंजाइश न हो। डॉ. रलमैन इस ‘चालाकी और धूर्तता’ से इतने दहल गए कि उन्हें दिमाग शांत करने के लिए टहलने जाना पड़ा। चैटबॉट उन सवालों के जवाब दे रहा था, जो रलमैन ने पूछे तक नहीं थे। एक्सपर्ट द्वारा साझा किए गए संवादों से स्पष्ट हुआ कि जेमिनी, चैटजीपीटी और एंथ्रोपिक के क्लाउड जैसे प्रमुख एआई मॉडल खतरनाक जानकारी देने में सक्षम हैं। मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के वैज्ञानिक केविन एसवेल्ट ने बताया कि चैटजीपीटी ने जैविक हथियारों के छिड़काव की योजना बनाई। गूगल जेमिनी ने ऐसे पैथोजन्स की सूची दी जो मीट उद्योग को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं और सुरक्षा से बचने के तरीकों का उल्लेख किया। एंथ्रोपिक क्लाउड ने नई विषाक्त रेसिपी पेश की। यहां तक कि गूगल के ‘डीप रिसर्च’ से एक वैज्ञानिक ने महामारी फैलाने वाले वायरस का प्रोटोकॉल मांगा, तो बॉट ने 8 हजार शब्दों का विस्तृत निर्देश दिया। यह घटनाएं एआई मॉडलों की सुरक्षा और नैतिकता पर गंभीर सवाल उठा रही हैं। एआई कंपनियां दावा करती हैं कि वे लगातार सुरक्षा घेरे मजबूत कर रही हैं, पर एक्सपर्ट इन्हें ‘कमजोर बाड़’ मानते हैं, जिसे ‘जेल-ब्रेकिंग’ से आसानी से पार किया जा सकता है। इसी तरह के एक मामले में बीते साल गुजरात पुलिस ने एक डॉक्टर को आईएसआईएस से जुड़ी साजिश में गिरफ्तार किया था। वह कथित तौर पर रिसिन (घातक जहर) की तैयारी कर रहा था और इसके लिए एआई टूल्स व गूगल सर्च की मदद ले रहा था। इस तरह की घटना एआई सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है। फिलहाल कंपनियों के पास इसका कोई ठोस मैकेनिज्म नहीं है। चैटजीपीटी ने 94% वायरोलॉजिस्ट को हरा दिया रलमैन और एसवेल्ट समेत कई एक्सपर्ट का कहना है कि पहले जो प्रोटोकॉल साइंस मैगजीन तक सीमित थे, अब एआई के जरिए वे इंटरनेट पर बिखरे हुए हैं। आज कच्चा जेनेटिक मटेरियल खरीदना, उसे लैब आउटसोर्स करना व लॉजिस्टिक्स संभालना चैटबॉट की मदद से संभव है। जॉन्स हॉपकिन्स सेंटर के डॉ. मोरित्ज हांके कहते हैं कि चैटबॉट्स द्वारा सुझाए गए तरीके ‘अद्भुत रूप से यथार्थवादी’ हैं। ताजा स्टडी के नतीजे चौंकाने वाले हैं- चैटजीपीटी ने लैब प्रोटोकॉल से जुड़े कठिन सवालों के जवाब देने में 94% वायरोलॉजिस्ट को पछाड़ दिया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Country’s first space city soon, India’s First Space City in Tirupati, India’s First Space City

Hindi News National Country’s First Space City Soon, India’s First Space City In Tirupati, India’s First Space City एमएस शंकर. अमरावती5 मिनट पहले कॉपी लिंक स्पेस सिटी गगनयान जैसे भारत के महत्वाकांक्षी मिशनों के लिए बेस कैंप का काम करेगी। – प्रतीकात्मक फोटो यदि सबकुछ योजना के अनुसार हुआ तो इसी महीने देश की पहली स्पेस सिटी बननी शुरू हो जाएगी। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पिछले साल इसका आइडिया सामने रखा था। उनकी सरकार अब इसका ब्लू प्रिंट तैयार कर चुकी है। इस ‘अंतरिक्ष शहर’ में न केवल सैकड़ों छोटी कंपनियां रॉकेट के पुर्जे, सेंसर बनाएंगी, बल्कि स्काईरूट, कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स, एचएफसीएल जैसी बड़ी कंपनियां दुनियाभर के लिए प्राइवेट रॉकेट बनाकर देंगी। सरकार ने यहां 570 एकड़ का स्टार्टटप एक्टिवेशन जोन बनाया है, जिसमें अग्निकुल, कॉसमॉस, पिक्सेल जैसे स्पेस स्टार्टअप भविष्य की अंतरिक्ष संभावनाओं को आकार देंगे। यह सिटी गगनयान जैसे भारत के महत्वाकांक्षी मिशनों के लिए बेस कैंप का काम करेगी। नायडू सरकार ने पांच राज्यों में सरकार गठन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों स्पेस सिटी की आधारशिला रखने की योजना तैयार की है। स्काईरूट के सीईओ पवन कुमार चंदना ने बताया कि तिरुपति जिले के थोट्टाम्बेडु मंडल के रौथुसुरमाला गांव में 2600 एकड़ जमीन तैयार की जा रही है। यह अंतरिक्ष औद्योगिक क्लस्टर होगा। यहां एयरोस्पेस, रक्षा विनिर्माण, निजी अंतरिक्ष इनोवेशन के अलग-अलग हब बनने हैं। इस पर 3400 करोड़ रु. से ज्यादा खर्च होंगे। इन कंपनियों के बड़े बेस होंगे स्काई रूट: स्काई रूट इस प्रोजेक्ट की ‘एंकर यूनिट’ है। कंपनी ने यहां रॉकेट निर्माण, असेंबली और टेस्टिंग के लिए ₹400 करोड़ के निवेश की घोषणा की है। उन्हें 300 एकड़ जमीन मिली है, जहां वे अपने ‘विक्रम’ सीरीज के रॉकेट तैयार करेंगे। कल्याणी स्ट्रैटजिक सिस्टम्स: भारत फोर्ज की यह सहायक कंपनी पास ही के मदाकाशिरा धहब में ₹1,430 करोड़ निवेश कर रही है। इसके पास डिफेंस पेलोड और रॉकेट एनर्जेटिक्स का काम है। एचएफसीएल: यह कंपनी ₹1,186 करोड़ निवेश कर आर्टिलरी और गोला-बारूद निर्माण इकाई लगा रही है, जो रक्षा अनुप्रयोगों के लिए स्पेस सिटी के डेटा का उपयोग करेगी। स्टार्टअप जोन: सरकार ने 570 एकड़ का ‘स्टार्टअप एक्टिवेशन जोन’ बनाया है, जिसमें अग्निकुल कॉसमॉस और पिक्सेल जैसे स्टार्टअप्स अपना विस्तार करेंगे। भारत का एक्सपोर्ट बनाने का लक्ष्य भारत का लक्ष्य अपनी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को 2033 तक 44 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। तिरुपति की स्पेस सिटी इस लक्ष्य में ‘एक्सपोर्ट हब’ की भूमिका निभाएगी। इस क्लस्टर से 5,000 प्रत्यक्ष और 30,000 अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। इसमें वैज्ञानिकों से लेकर लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञों तक की जरूरत होगी। यह सिटी छोटे उद्योगों के लिए एक ‘हब और स्पोक’ मॉडल पर काम करेगी। समझें… क्या है इस ब्लूप्रिंट में 1. लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर जोन: छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) के लिए पैड और मिशन कंट्रोल सेंटर। 2. सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर: नैनो और माइक्रो सैटेलाइट बनाने के लिए एडवांस क्लीन रूम। 3. अनुसंधान और नवाचार कॉरिडोर: स्टार्टअप्स और इसरो के बीच सहयोग के लिए इनक्यूबेशन सेंटर। 4. स्पेस डेटा हब: कृषि और रक्षा के लिए सैटेलाइट डेटा प्रोसेसिंग सेंटर भी यहीं से ऑपरेट होगा। 5. सहायक विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र: सटीक इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स इकाइयों का निर्माण। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔









