Not only strategy but correct body language is also important in sports

Hindi News Sports Not Only Strategy But Correct Body Language Is Also Important In Sports द न्यूयॉर्क टाइम्स18 मिनट पहले कॉपी लिंक विशेषज्ञों का मानना है कि जब एक दिग्गज खिलाड़ी मैदान पर ऐसी निराशा दिखाता है, तो इसका सीधा असर टीम के युवा खिलाड़ियों पर पड़ता है। खेल मैदान पर अक्सर खिलाड़ियों के प्रदर्शन, उनके आंकड़ों और रणनीति की चर्चा होती है, लेकिन एक पहलू ऐसा है जो बिना कुछ कहे मैच का रुख बदल सकता है और वह है खिलाड़ी की ‘बॉडी लैंग्वेज’। यह कोई किताबी या मनोवैज्ञानिक रहस्य नहीं है, बल्कि दबाव के पलों में हार और जीत के बीच का एक बड़ा अंतर साबित हो सकता है। हाल ही में अमेरिकी बास्केटबॉल लीग एनबीए के दिग्गज खिलाड़ी केविन डुरंट की बॉडी लैंग्वेज चर्चा का विषय रही। एक मैच के दौरान जब उनके युवा साथियों ने कुछ खराब पास दिए, तो डुरंट ने झुंझलाते हुए हाथ हवा में उठा दिए और उनके कंधे झुक गए। विशेषज्ञों का मानना है कि जब एक दिग्गज खिलाड़ी मैदान पर ऐसी निराशा दिखाता है, तो इसका सीधा असर टीम के युवा खिलाड़ियों पर पड़ता है। वे स्वाभाविक खेल खेलने के बजाय सहम जाते हैं। मैदान पर किसी गलती के बाद जब कोई खिलाड़ी शारीरिक रूप से सिकुड़ता है या सिर झुकाता है, तो वह सिर्फ अपनी निराशा जाहिर नहीं कर रहा होता, बल्कि उस निराशा को खुद पर और अधिक हावी होने दे रहा होता है। इसके विपरीत, जो खिलाड़ी भावनाओं पर काबू रखना जानते हैं, वे दबाव में भी टीम को बिखरने नहीं देते। डामियन लिलार्ड जैसे दिग्गज युवाओं को यही सलाह देते हैं कि अगर कोई पास छूट जाए या शॉट मिस हो जाए, तो अपनी प्रतिक्रिया को न्यूनतम रखें और तुरंत अगले मूव पर फोकस करें। इसी तरह, डब्ल्यूएनबीए की महान खिलाड़ी सू बर्ड को उनके शांत स्वभाव के लिए जाना जाता था। चाहे टीम बड़े अंतर से आगे हो या पीछे, उनकी बॉडी लैंग्वेज हमेशा एक जैसी रहती थी, जो पूरी टीम को बांध कर रखती थी। सबसे अच्छी बात यह है कि बॉडी लैंग्वेज कोई ऐसी जन्मजात आदत नहीं है जिसे बदला न जा सके। यह एक अभ्यास है। गलती होने पर गहरी सांस लेना, अपने कंधों को सीधा रखना और तुरंत अपने साथियों की तरफ बढ़ना- ये छोटे बदलाव किसी भी खिलाड़ी को दबाव के क्षणों में मजबूत बनाते हैं। तीन स्तरों पर नुकसान पहुंचाती है खराब बॉडी लैंग्वेज कमजोर बॉडी लैंग्वेज का नुकसान तीन स्तरों पर होता है। पहला- यह खुद खिलाड़ी के आत्मविश्वास को गिराता है, जिससे गलती की गुंजाइश बढ़ जाती है। दूसरा- यह टीम के साथियों को हताश करता है, खासकर तब जब वह टीम लीडर हो। तीसरा- यह विरोधी टीम को साफ संकेत देता है कि आप मानसिक रूप से टूट रहे हैं, जिससे विरोधियों का आत्मविश्वास दोगुना हो जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
रियल एस्टेट- छोटे शहरों में प्रॉपर्टी नया सोना:बुनियादी ढांचे पर निवेश; 2-4 साल में 100% तक बढ़ सकते हैं दाम, इंदौर-जयपुर नए हॉटस्पॉट

अगर आप जमीन-जायदाद में निवेश की सोच रहे हैं तो जल्द फैसला करना फायदेमंद हो सकता है। इंदौर, भोपाल, जयपुर, पटना, रांची और लुधियाना जैसे टियर-2,3 शहर बेहतर विकल्प हो सकते हैं। प्रॉपटेक कंपनी स्क्वेयर यार्ड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 2 से 4 साल में इन शहरों में प्लॉट के दाम 25% से लेकर 100% तक बढ़ सकते हैं। स्क्वेयर यार्ड्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में ₹12.2 लाख करोड़ के सरकारी पूंजी निवेश, नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और रोजगार विस्तार की वजह से छोटे शहरों की जमीन आगामी वर्षों में सबसे तेज रफ्तार से महंगी होगी। इंदौर, जयपुर, भुवनेश्वर, कटक, वाराणसी और पुरी जैसे शहर इस लहर की अगुआई करेंगे। मुख्य शहर के बाहरी इलाकों में सबसे तेज बढ़ेंगे दाम 15-40% – मेट्रो कॉरिडोर के 1 किमी दायरे में 30-70% – नए एयरपोर्ट/ एक्सप्रेसवे के पास 80-100% – हाई-ग्रोथ पेरिफेरल प्लॉटेड एरिया 20-60% – इंडस्ट्रियल कॉरिडोर/ लॉजिस्टिक हब (स्रोत: स्क्वेयर यार्ड्स रिपोर्ट 2026) 2020-25 – टियर-2 और टियर 3 शहरों में 5 साल में दोगुना तक हो चुके दाम यह कोई नई शुरुआत नहीं है। 2020 से 2025 के बीच भी छोटे-मझोले शहरों में जमीन और मकान, दोनों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। हर शहर में प्लॉट की बढ़त फ्लैट से 10-25% अधिक रही है। इंदौर में इस दौरान फ्लैट 72% तक और प्लाट में 85-100% तक तेजी देखी गई। शहर फ्लैट महंगे प्लॉट के दाम बढ़े इंदौर 72% 85-100% जयपुर 65% 75-90% भोपाल 49% 60-75% नागपुर 47% 55-70% चंडीगढ़ 44% 50-65% रायपुर 40% 45-60% लुधियाना 38% 45-60% पटना 35% 40-55% रांची 33% 40-55% जबलपुर 28% 35-50% उदयपुर 25% 35-50% स्रोत: एनएचबी रेजिडेक्स एचपीआई, प्रॉपइक्विटी 50 लाख से 1 करोड़ रुपए के घरों की मांग सबसे ज्यादा निवेशक – लंबे समय के लिए प्लॉट सबसे बेहतर विकल्प। इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स के पास लिए गए प्लॉट अगले 5-10 वर्षों में मल्टी-बैगर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। नौकरीपेशा वर्ग – 50 से 1 करोड़ रुपए के मकानों की मांग सबसे ज्यादा। पहली बार घर खरीदने वाले – ब्याज दरें घटने, आसान सुविधाएं मददगार। 200 इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स और ‘अर्बन चैलेंज फंड’ से रियल एस्टेट में क्रांति टियर-2,3 शहरों में 200 से ज्यादा पुराने इंडस्ट्रियल क्लस्टर की बहाली, सेमीकंडक्टर मिशन-2.0 और इलेक्ट्रॉनिक्स-केमिकल सेक्टर में विस्तार से बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे, जो इन शहरों में घर-प्लॉट की मांग बढ़ाएंगे। सरकार का 1 लाख करोड़ का ‘अर्बन चैलेंज फंड’ इसे रफ्तार देगा। आखिर टियर-2 और 3 शहरों में उछाल क्यों? मेट्रो शहरों में सीमित और महंगी जमीन से विस्तार की सीमित संभावनाएं हैं। छोटे शहरों में कम कीमतों पर बड़े प्लॉट खरीदे जा सकते हैं। इन्फ्रा निवेश का सबसे ज्यादा लाभ उन्हीं इलाकों को, जहां अभी विकास कम है। 70% ब्लू-कॉलर और बड़ी संख्या में वाइट-कॉलर जॉब्स महानगरों से निकलकर छोटे शहरों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
वॉरजोन में फंसे डॉ. मिलर का मिशन इम्पॉसिबल:ट्रम्प सरकार ने हाथ खड़े किए तो अमेरिकी डॉक्टर ने मोर्चा संभाला; कतर से 4 महाद्वीप होकर 62 घंटे में घर पहुंचे

अमेरिका के न्यू ऑरलियन्स के रहने वाले डॉक्टर जेय मिलर के लिए भारत की ‘वन्स-इन-ए-लाइफटाइम’ फैमिली वेकेशन एक डरावने अनुभव में बदल गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के तनाव के बीच फंसे डॉक्टर ने जिस तरह से अपनी जान बचाकर घर वापसी की, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। 28 फरवरी को डॉ. मिलर दोहा (कतर) से डलास के लिए रवाना हुए थे, लेकिन ईरान-इजरायल तनाव के चलते हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण उनका विमान एक घंटे बाद वापस दोहा लौट आया। इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था। जवाब में ईरान रॉकेट और ड्रोन दाग रहा था। कतर समेत मध्य-पूर्व के कई देशों ने एयरस्पेस बंद कर दिया। फ्लाइटें रद्द हो गईं। हजारों यात्री फंस गए। डॉ. मिलर ने बताया कि उस वक्त उन्होंने अपनी पत्नी को फोन किया और बस इतना कहा कि ‘मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं, क्योंकि मुझे नहीं पता था कि मैं घर लौट पाऊंगा या नहीं।’ मिलर 45 साल के पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट हैं। वे मरीजों के पास लौटने के लिए पत्नी स्वाथी नर्रा और 5 साल की बेटी देवी से एक हफ्ते पहले भारत से निकल गए थे। भारत से अमेरिका जाते वक्त कतर से मिलर को अगली फ्लाइट पकड़नी थी, लेकिन युद्ध छिड़ने के कारण वे दोहा में ही फंस गए। वे एंडाज दोहा होटल में ठहरे थे। इस दौरान मिलर ने अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट को कॉल किए। फॉर्म भरे। लुइसियाना के नेताओं से संपर्क किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। अमेरिकी विदेश विभाग ने जब यह कह दिया कि यात्री अपनी सुरक्षा के लिए सरकार पर निर्भर न रहें, तब डॉक्टर मिलर ने खुद ही निकलने का रास्ता बनाया। दोहा से रियाद टैक्सी से 9 घंटे में पूरा किया सफर एशिया (सऊदी अरब) – दोहा एयरपोर्ट बंद होने के कारण मिलर ने रियाद तक 9 घंटे का सफर टैक्सी से पूरा किया। इसके लिए उन्हें 3 कारें बदलनी पड़ीं और 2.5 लाख रुपए खर्च किए। अफ्रीका (इथियोपिया) – रियाद से वे इथोपिया की राजधानी अदिस अबाबा पहुंचे। यहां 15 घंटे रुके । यूरोप और अमेरिका – इथियोपिया से उनकी फ्लाइट तेल भरवाने के लिए इटली (रोम) रुकी, फिर शिकागो होते हुए वे न्यू ऑरलियन्स पहुंचे।
फोर्ब्स अफ्रीकी अरबपतियों की सूची में अव्वल अलीको डेंगोटे:बैंक से निकाले 90 करोड़, रातभर कैश छूते रहे ताकि अमीर होने का एहसास हो, 8 की उम्र में सीखने लगे थे बिजनेस के गुर

फोर्ब्स 2026 की सूची के अनुसार, नाइजीरियाई कारोबारी अलीको डेंगोटे (68) 2.62 लाख करोड़ रु. (28.5 बिलियन डॉलर) की संपत्ति के साथ लगातार 15वीं बार अफ्रीका के सबसे अमीर व्यक्ति बने हैं। डेंगोटे का नाइजेरिया में सीमेंट, चीनी और तेल रिफाइनरी का कारोबार है। उनकी कंपनी डांगोटे सीमेंट अफ्रीका की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी है। डेंगोटे का जीवन सादगी व विलासिता का संगम है। मुनाफा दोबारा निवेश करने के मंत्र पर चलने वाले डेंगोटे सोने की नक्काशी वाले महल में रहते हैं। वे समंदर के बीच 396 करोड़ की लग्जरी याट ‘मरिया’ पर बिजनेस डील्स करने के शौकीन हैं। पढ़िए इनके कई किस्से. पॉकेटमनी के पैसे बचाकर स्कूल में दोस्तों को कैंडी बेचा करते थे डेंगोटे डेंगोटे ने 8 की उम्र में कारोबार की पहली समझ स्कूल के मैदान में कैंडी बेचकर विकसित की। वे पॉकेट मनी बचाकर मिठाइयों के पैकेट खरीदते और उन्हें दोस्तों को बेचकर मुनाफा कमाते। उनके अनुसार, वह सिर्फ मिठाई नहीं बेच रहे थे, बल्कि लाभ कमाने की कला सीख रहे थे। कार में भरकर घर लाए थे 90 करोड़ रुपए, अमीरी परखने का अनोखा जुनून डेंगोटे को एक बार यकीन नहीं हुआ कि वे अरबपति बन चुके हैं। महज यह परखने के लिए कि अमीरी सिर्फ कागजी आंकड़े नहीं है, बैंक से 90 करोड़ रु. कैश निकलवाए। वे सारा पैसा गाड़ी में रखकर घर ले गए, उसे देखा, छुआ और तसल्ली होने पर अगले दिन वापस बैंक में जमा करवा दिया। पहली बार कारोबार के लिए 3 साल का कर्ज कहकर 3 महीने में ही चुका दिया 21 की उम्र में डेंगोटे ने चाचा से 3 साल के लिए 2.5 लाख रु. उधार लिए। इससे उन्होंने चावल और ब्राजील से चीनी आयात कर बेचना शुरू किया। उनमें कारोबार की ऐसी कला थी कि 3 महीने में कर्ज चुका दिया। यह उनके कमोडिटी ट्रेडिंग बिजनेस की पहली बड़ी सफलता थी। बेटी के जन्म के बाद छोड़ा 290 किमी की खतरनाक रफ्तार से कार चलाना डेंगोटे के पास पोर्शे और फेरारी जैसी 25 लग्जरी गाड़ियां थीं। वे युवावस्था में अक्सर 290 किमी/घंटा की रफ्तार से कार चलाते थे। लेकिन दूसरी बेटी के जन्म के बाद उन्होंने अपनी जिम्मेदारी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने खतरनाक ड्राइविंग करना छोड़ दिया।
ओलिंपिक में क्रिकेट शामिल होने का फायदा चीनी महिलाओं को:चीन को 62% मेडल महिला एथलीट दिलाती हैं, इसलिए महिला क्रिकेट टीम को ज्यादा समर्थन; उन्हें पुरुषों से बेहतर ट्रेनिंग सुविधाएं-विदेशी दौरों के मौके भी

भारत सहित कई देशों में पारंपरिक रूप से पुरुष क्रिकेट का प्रभाव अधिक रहा है। इसके उलट चीन में एक नई व्यवस्था देखने को मिलती है। चीन में क्रिकेट को मुख्य रूप से महिलाओं का खेल माना जाता है और सारा ध्यान महिला टीम के विकास पर केंद्रित है। हाल ही में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘क्रिकेट रिसर्च नेटवर्क’ के सम्मेलन में चीन की इसी अनूठी खेल नीति पर विस्तार से चर्चा की गई। सम्मेलन में चीन की शीआन जियाओतोंग यूनिवर्सिटी के रिसर्चर मैक्स हे ने एक शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि चीन में खेलों का पूरा ढांचा ओलिंपिक मेडल की संख्या बढ़ाने पर आधारित है। 1988 के सोल ओलिंपिक में चीन को केवल पांच गोल्ड मिले थे। इसके बाद, चीनी खेल प्रशासन ने रणनीति में बड़ा बदलाव किया। उन्होंने तय किया कि खेल महाशक्ति बनने और मेडल टेबल में शीर्ष पर रहने के लिए ‘महिला खेलों’ में निवेश करना सबसे प्रभावी तरीका है। इसके परिणाम भी सामने आए हैं। पिछले चार ओलिंपिक (लंदन, रियो, टोक्यो, पेरिस) में चीन ने कुल 143 गोल्ड जीते हैं। इनमें से 62.2% मेडल महिला एथलीटों ने ही दिलाए हैं। यही ‘ओलिंपिक रणनीति’ चीन में क्रिकेट पर भी लागू होती है। वहां के मीडिया में आधिकारिक तौर पर महिला क्रिकेट टीम को ही मुख्य टीम का दर्जा प्राप्त है। उनके पास टर्फ विकेट पर अभ्यास करने की सुविधा, अनुभवी कोच और विदेशी दौरों के अधिक मौके हैं। चीन पुरुष टीम के कोच मोहम्मद रमजान (पाक के पूर्व टेस्ट क्रिकेटर) के अनुभव भी इसी बात की पुष्टि करते हैं। उनके अनुसार, पुरुष टीम को लंबे समय से इंटरनेशनल टी20 खेलने का मौका नहीं मिला है, जबकि महिला टीम नियमित रूप से टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही है। उन्हें अधिक मैच खेलने मिलते हैं। चीन की पुरुष टीम 2024 से कोई टी20 नहीं खेली है, जबकि महिला टीम 2025 में जापान दौरा कर चुकी है। एलए ओलिंपिक 2028 में क्रिकेट की वापसी हो रही है। हालांकि चीन की टीम फिलहाल वहां क्वालिफाई करने की स्थिति में नहीं है, लेकिन भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए चीन अपनी महिला क्रिकेट टीम को लगातार बढ़ावा दे रहा है। महिला टीम आईसीसी रैंकिंग में 45वें पर, पुरुष 91 पर चीन की पुरुष टीम के पास संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय अवसरों का अभाव है। सुविधाओं के इस अंतर का सीधा असर रैंकिंग पर भी दिखता है। वर्तमान आईसीसी टी20 रैंकिंग में चीन की महिला टीम 45वें स्थान पर है, जबकि पुरुष टीम 91वें स्थान पर संघर्ष कर रही है।
मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना का शुभारंभ

खरगोन| मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना के तहत जिले में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और गोपालन व डेयरी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में पहल शुरू की गई है। कलेक्टर भव्या मित्तल ने बताया कि जिले में 2000 से अधिक आबादी और 500 से अधिक गोवंश वाले 6 ग्रामों का चयन किया गया है। इसी क्रम में गुरुवार को चयनित ग्राम टेमला में ग्राम भ्रमण कर महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के समूहों के साथ चर्चा कर गांव की प्रमुख आवश्यकताओं का आकलन किया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर, जिपं सीईओ मिलिंद कुमार नागदेवे, अतिरिक्त सीईओ राजेश शाक्य सहित अधिकारी व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। योजना के तहत कार्यों के माध्यम से समग्र ग्राम विकास किया जाएगा।
दफ्तरों में जॉब हगिंग का ट्रेंड:लोगों के लिए अब वेतन वृद्धि से ज्यादा जरूरी पक्की नौकरी; धीमी हायरिंग, महंगाई-छंटनी का डर और एआई का असर भी वजह

बदलते आर्थिक माहौल में अब कर्मचारी ‘जॉब हॉपिंग’ (नौकरी बदलना) के बजाय ‘जॉब हगिंग’ को अपना रहे हैं। लोग नई और बेहतर नौकरी तलाशने के बजाय अपनी मौजूदा नौकरी को ही मजबूती से पकड़े हुए हैं। इसकी बड़ी वजह ज्यादा सैलरी नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता है। भर्ती की सुस्त रफ्तार, बढ़ती महंगाई और छंटनी के डर ने लोगों का आत्मविश्वास कम किया है। इसके साथ ही एआई और ऑटोमेशन के बढ़ते असर ने भी रोजगार को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक कर्मचारी सतर्कता के कारण एक ही जगह टिके हुए हैं। उनके लिए जॉब सिक्योरिटी भावनात्मक सुरक्षा कवच की तरह बन गई है, जो आर्थिक झटके से बचाने में मदद करती है 75% कर्मचारियों ने 2027 तक नौकरी न बदलने की बात कही अमेरिकी रोजगार प्लेटफॉर्म मॉन्स्टर 2025 रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में 75% कर्मचारियों ने कहा कि वे कम से कम 2027 तक मौजूदा नौकरी में बने रहना चाहते हैं। इनमें 48% ने माना कि रुकने की वजह जॉब संतुष्टि नहीं, आर्थिक अनिश्चितता और बदलाव का डर है। उम्रदराज कर्मचारी नौकरी की सुरक्षा को देते हैं तरजीह सर्वे में 55% का माना कि उम्रदराज कर्मचारी नौकरी से ज्यादा मजबूती से जुड़े रहते हैं। सिर्फ 25% लोगों का मानना है कि युवा कर्मचारी भी इसी तरह व्यवहार कर रहे हैं। आर्थिक वजहों से 26% लोग नौकरी की गारंटी को सबसे ऊपर रखते हैं। 94% पेशेवर: एक ही रोल में टिके रहने से रुकेगी तरक्की एक ही रोल में लंबे समय तक रहने से प्रोफेशनल ग्रोथ रुक सकती है। सर्वे में 94% लोगों ने माना कि लंबे समय तक एक जगह टिके रहने से बेहतर वेतन, और नए अनुभव छूट सकते हैं, जो आगे चलकर बर्नआउट की वजह बनता है। एक ही कंपनी में रहकर ग्रोथ कैसे करें विशेषज्ञों के मुताबिक एक जगह टिकने का मतलब ग्रोथ रोकना नहीं है। कर्मचारी नई जिम्मेदारियां लें, नए स्किल्स सीखें, दूसरे डिपार्टमेंट के साथ प्रोजेक्ट करें। इंडस्ट्री नेटवर्क मजबूत रखें, ताकि हालात बदलने पर मौके कम न पड़ें।
मारवाड़ी समाज ने निकाला गणगौर माता का बिंदोरा, झाले देकर पिलाया पानी

भास्कर संवाददाता | बड़वानी शहर के अंजड़ नाका स्थित आदिनाथ जिनिंग परिसर में परशुराम मारवाड़ी समाज की महिलाओं द्वारा हर्षोल्लास के साथ गणगौर माता का बिंदोरा निकाला गया। लोक गीतों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच माता की विशेष पूजा-अर्चना की गई है। कार्यक्रम के दौरान समाज की महिलाओं ने खंभा पूजन कर माता के झाले लिए और माता को पारंपरिक रूप से पानी पिलाया। गौर-गौर गणापति, ईसर पूजे पार्वती के सुमधुर गीतों के साथ पूरा परिसर भक्तिमय हो गया। इस अवसर पर समाज की अध्यक्ष संगीता जैमन, जया शर्मा, गायत्री शर्मा, ज्योति शर्मा, दुलारी शर्मा, वंदना गौड़ और ममता शर्मा सहित समाज की अन्य महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।
शतरंज का नन्हा जादूगर; दुनिया का नंबर-1 खिलाड़ी:तमिज अमुधन 2000 ईलो रेटिंग पार करने वाले दुनिया के सबसे युवा खिलाड़ी, आठ साल की उम्र में जीती कार

तमिलनाडु के तमिज अमुधन इस समय विश्व शतरंज जगत में चर्चा का केंद्र है। मात्र 9 साल की उम्र में तमिज न केवल अंडर-9 कैटेगरी में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी बन गए हैं, बल्कि वे इस उम्र में 2000 ईलो रेटिंग पार करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी भी हैं। तमिज ने महज चार साल की उम्र में चचेरे भाइयों को देखकर शतरंज सीखना शुरू किया था। उनके भीतर खेल की सहज समझ इतनी गहरी थी कि एक जिला स्तरीय टूर्नामेंट के दौरान कल्लाकुरिची के एक बस ड्राइवर रविचंद्रन की नजर उन पर पड़ी। रविचंद्रन पार्ट-टाइम शतरंज कोचिंग भी देते थे। उन्होंने देखा कि बिना किसी औपचारिक ट्रेनिंग के भी इस छोटे से बच्चे ने अनुभवी खिलाड़ियों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया। एथेंस ऑफ द ईस्ट शतरंज टूर्नामेंट में रविचंद्रन ने सिल्वर मेडल जीता रविचंद्रन ने तमिज की प्रतिभा को पहचान लिया और उन्हें मुफ्त में कोचिंग देने का फैसला किया। इसके बाद तमिज ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 6 साल की उम्र में उन्होंने स्टेट अंडर-9 टूर्नामेंट में 9 में से 9 अंक हासिल कर सबको हैरान कर दिया। यह उनके करियर का पहला बड़ा ‘ब्रेक’ था। तमिज के करियर का सबसे यादगार पल पिछले साल आया। ‘एथेंस ऑफ द ईस्ट’ शतरंज टूर्नामेंट में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता। पुरस्कार के रूप में इस 8 साल के बच्चे को कार दी गई। किसी भी एथलीट के लिए इतनी कम उम्र में ऐसा पुरस्कार जीतना एक दुर्लभ उपलब्धि है। तमिज की इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता का असाधारण बलिदान है। पिता सरकारी नौकरी में हैं और साधारण कृषि पृष्ठभूमि से आते हैं। तमिज की बेहतर ट्रेनिंग के लिए परिवार ने एक कठिन फैसला लिया। तमिज की मां उनके साथ 350 किलोमीटर दूर दूसरे शहर में रहती हैं ताकि ट्रेनिंग बाधित न हो। वहीं, पिता घर पर 10 साल की बेटी उथिशा के साथ रहते हैं। तमिज के पिता स्वीकार करते हैं कि शतरंज महंगा खेल है। यात्रा, रहने, एंट्री फीस और कोचिंग का खर्च उठाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण है। तमिज के पिता का कहना है कि अगर उन्हें पहले पता होता कि इस क्षेत्र में इतना खर्च आता है, तो शायद वे इस खेल को नहीं चुनते। लेकिन अब जब वह नंबर-1 खिलाड़ी है, तो हम उसे बीच रास्ते में नहीं छोड़ सकते। तमिज की इस यात्रा को जारी रखने के लिए अब उन्हें किसी बड़े प्रायोजक की जरूरत है। आर्थिक तंगी के कारण वे कई बार नेशनल और इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स में हिस्सा नहीं ले पाए थे।
शेयर बाजार में आ सकती है इतिहास की सबसे बड़ी:रिच डैड पुअर डैड के लेखक ने चेताया; चांदी जरूर खरीदें, भले एक वक्त का खाना न खाएं

मशहूर किताब ‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। कियोसाकी ने कहा है कि शेयर बाजार में इतिहास का सबसे बड़ी गिरावट अब आने ही वाली है। वैसे उन्होंने 2013 में आई अपनी किताब ‘रिच डैड्स प्रोफेसी’ में ही इस बड़े संकट का जिक्र कर दिया था। कियोसाकी का मानना है कि 2008 के वित्तीय संकट के मूल कारण आज भी जड़ें जमाए हुए हैं। दुनिया में बढ़ता कर्ज और फाइनेंशियल सिस्टम की कमजोरियां नए संकट की आशंका बढ़ा रही हैं। कियोसाकी के मुताबिक, ब्लैकरॉक का प्राइवेट क्रेडिट मॉडल संकट की वजह बन सकता है। यदि यह होता है, तो पूरी दुनिया में ‘बेबी बूमर्स’ (62-80 के बुजुर्ग) की रिटायरमेंट बचत पूरी तरह खत्म हो जाएगी, क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब ऐसे कर्ज के बोझ तले दबी है, जिसे चुकाना नामुमकिन है। मौजूदा भू-राजनैतिक तनाव के बीच कियोसाकी ने आम निवेशकों को एक सख्त और व्यावहारिक सलाह दी है। उनका कहना है कि वित्तीय शिक्षा की शुरुआत हमेशा छोटे कदमों से होती है। यदि आपके पास निवेश के लिए 10 डॉलर (करीब 900 रुपए) की अतिरिक्त राशि भी नहीं है, तो एक दिन का खाना छोड़ दें, लेकिन निवेश करना न छोड़ें। यह छोटी राशि भी चांदी खरीदने में लगाएं। यह न केवल धन संचय का सुरक्षित माध्यम है, बल्कि डीलर से बाजार की व्यावहारिक समझ पाने का भी अच्छा जरिया है। कियोसाकी के अनुसार, डीलर के साथ लंबे समय तक जुड़ने से निवेशकों को भविष्य के वित्तीय जोखिम समझने में बहुत मदद मिलती है। वैश्विक उथल-पुथल के बीच मंगलवार को घरेलू सराफा बाजार में चांदी में तेजी रही। आईबीजेए के मुताबिक, मंगलवार को चांदी 10,888 रुपए महंगी हुई और औसत कीमत 4.2% बढ़कर 2,70,944 रुपए किलो हो गई। 29 जनवरी को चांदी 3,79,988 रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर थी। इस साल मंगलवार तक चांदी 40,524 रुपए (17.6%) चढ़ चुकी है। यानी निवेश बढ़ रहा है। बीते साल 31 दिसंबर को चांदी 2,30,420 रुपए प्रति किलो थी। रणनीति: जैसे-जैसे करेंसी का अवमूल्यन होगा, सोने-चांदी के दाम बढ़ते जाएंगे रॉबर्ट कियोसाकी का मानना है कि मौजूदा आर्थिक हालात में पारंपरिक वित्तीय साधनों के मुकाबले सोने-चांदी जैसे फिजिकल एसेट्स कहीं ज्यादा सुरक्षित हैं। वे लगातार सोना, चांदी, बिटकॉइन, इथेरियम और कच्चे तेल के कुओं में हिस्सेदारी खरीदने की सलाह दे रहे हैं। उनके अनुसार, जैसे-जैसे करेंसी का अवमूल्यन होगा और महंगाई बढ़ेगी, इन फिजिकल एसेट्स की कीमतें आसमान छुएंगी। वे चांदी को औद्योगिक इस्तेमाल और महंगाई के खिलाफ सुरक्षा के लिए सबसे बेहतर शुरुआती विकल्प मानते हैं। कियोसाकी का मानना है कि आम आदमी को छोटी-छोटी बचत कर ऐसी संपत्तियां अपने पोर्टफोलियो में जोड़ना शुरू करना चाहिए।









