Monday, 20 Apr 2026 | 12:24 PM

Trending :

EXCLUSIVE

इंदौर में दूषित पानी से मौतों पर बहस:कैलाश बोले- भागीरथपुरा मुंबई के धारावी जैसा, लोग अशिक्षित

इंदौर में दूषित पानी से मौतों पर बहस:कैलाश बोले- भागीरथपुरा मुंबई के धारावी जैसा, लोग अशिक्षित

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों पर शुक्रवार को विधानसभा में तीखी बहस हुई। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पहली बार सदन में बयान देते हुए भागीरथपुरा की तुलना मुंबई की धारावी से की। उन्होंने कहा कि यह 80-90 साल पुरानी बस्ती है और मिनी धारावी जैसी परिस्थितियां हैं। वहां कुछ अशिक्षित लोग रहते हैं, जिससे नगर निगम के लिए हर दृष्टि से व्यवस्थित काम करना कठिन हो जाता है। इन हालात में कर्मचारी भी प्रॉपर काम नहीं कर पाते थे। मंत्री ने घटना को इंदौर के लिए कलंक और व्यक्तिगत आत्मग्लानि का विषय बताया। उन्होंने माना कि भागीरथपुरा के लोगों और स्थानीय पार्षद ने दूषित पानी की शिकायत की थी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद काम शुरू होने में देरी हुई। कांग्रेस द्वारा किए गए धरना-प्रदर्शन को उन्होंने अशोभनीय बताते हुए कहा कि जहां मरहम की जरूरत थी, वहां “लाशों पर राजनीतिक रोटियां सेंकी गईं।” उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई की गई है और इसमें किसी जाति को नहीं देखा गया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा- मंत्री जी, गिनती मत करिए, लेकिन गिल्टी तो फील करिए नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वे संवेदना व्यक्त करने गए थे, राजनीति करने नहीं। इंदौर में घोटाले पर घोटाले हो रहे हैं, एक रात में 5 करोड़ की सीवर लाइन डल जाती है। हाईकोर्ट ने हालात को हेल्थ इमरजेंसी जैसा बताया और दखल देना पड़ा। 35 से ज्यादा मौतें हुईं, सरकार 22 पर अटकी है। गिनती मत करिए, लेकिन गिल्टी तो फील करिए। आरोप लगाया कि कार्रवाई जाति देखकर की गई। दलित-आदिवासी अधिकारियों को हटाया गया, बाकी को सिर्फ ट्रांसफर किया गया। पार्षद द्वारा एक साल से गंदे पानी पर लिखे पत्रों की अनदेखी का भी मुद्दा उठाया गया। लखन घनघोरिया ने जबलपुर के गंदे पानी के सैंपल दिखाए, जबकि जयवर्धन सिंह ने कहा कि अवॉर्ड लेने में नेता आगे रहते हैं, तो विफलता पर जिम्मेदारी भी लें।

रीमेक की बेड़ियों से आजाद हुई 'दृश्यम 3':अजय और जयदीप के बीच होगी साइकोलॉजिकल वॉर, गोवा में फिल्माया जाएगा हाई-वोल्टेज फेस-ऑफ

रीमेक की बेड़ियों से आजाद हुई 'दृश्यम 3':अजय और जयदीप के बीच होगी साइकोलॉजिकल वॉर, गोवा में फिल्माया जाएगा हाई-वोल्टेज फेस-ऑफ

इंडियन सिनेमा में सस्पेंस और थ्रिलर की परिभाषा बदलने वाली फ्रेंचाइज दृश्यम अपने तीसरे और सबसे घातक चैप्टर की ओर बढ़ चुकी है। विजय सलगांवकर की शातिर चालाकी और कानून के फौलादी शिकंजे के बीच अब ऐसी बिसात बिछने वाली है , जहां से किसी एक का बचना नामुमकिन है। इस फिल्म की आधी शूटिंग पूरी हो चुकी है और अब पूरी यूनिट अपने सबसे निर्णायक पड़ाव गोवा के लिए उड़ान भरने को तैयार है। आगामी 25 फरवरी को अजय देवगन अपनी टीम के साथ गोवा पहुंचेंगे, जहां कहानी कि किस्मत तय करने वाले सीन्स फिल्माए जाएंगे। गोवा शेड्यूल में 1 मार्च से होगा ‘माइंड गेम्स’ का आगाज मेकर्स ने इस शेड्यूल के लिए बेहद गोपनीय और फुल रणनीति तैयार की है। 25 फरवरी को गोवा पहुंचने के बाद टीम 26 से 28 फरवरी तक शुरूआती शूट और टेक्निकल सेटअप पूरा करेगी। लेकिन असली शूट 1 मार्च से शुरू होगा, जब अजय और जयदीप अहलावत के बीच हाई-वोल्टेज फेस-ऑफ फिल्माया जाएगा। यह शेड्यूल संक्षिप्त लेकिन बेहद इंटेंस है, जिसे 2 मार्च तक समेटकर टीम मुंबई लौट आएगी। इस जल्दबाजी के पीछे का मकसद होली से पहले फिल्म के सबसे जटिल इमोशनल और थ्रिलर हिस्सों को लॉक करना है। इसके बाद मई में मात्र 2-3 दिनों के पेंचवर्क के साथ फिल्म की प्रिंसिपल फोटोग्राफी पूरी हो जाएगी। जयदीप अहलावत का किरदार पुलिस की वर्दी में नहीं दिखेगा इस बार सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक कास्टिंग में दिखता है। अक्षय खन्ना के बाहर होने के बाद पाताल लोक फेम जयदीप क्राइम एसपी की भूमिका में नजर आएंगे। वह वर्दी या पारंपरिक पुलिसिया रौब में नहीं बल्कि सिविल ड्रेस में सलगांवकर के घर पहुंचेगे। जयदीप और अजय के बीच संवादों का तीखा दंगल दिखेगा। जयदीप उन दफन राजों का जिक्र करेंगे, जिन्हें विजय सलगांवकर ने छिपाया था। तीसरा पार्ट पूरी तरह मौलिक और नॉर्थ के लिहाज से है निर्देशक अभिषेक पाठक ने इस बार साहस दिखाते हुए फिल्म को रीमेक की बेड़ियों से आजाद कर दिया है। दृश्मय 3 अब मोहनलाल के मलयालम वर्जन को फॉलो नहीं करेगी। इसे पूरी तरह नॉर्थ इंडियन कल्चर और अपनी मौलिक स्क्रिप्ट के आधार पर ढाला गया है। मेकर्स का मानना है कि दृश्यम अब एक ग्लोबल ब्रांड है और सलगांवकर का अंत अब उसकी अपनी शर्तों पर होगा। फिल्म का क्लाइमैक्स दर्शकों को शॉक्ड करेगा।

सालाना 90 लाख होगा कार प्रोडक्शन:कार कंपनियां 1 लाख करोड़ लगा 65% बढ़ाएंगी उत्पादन, कम दाम पर बेहतर कारों की उम्मीद

सालाना 90 लाख होगा कार प्रोडक्शन:कार कंपनियां 1 लाख करोड़ लगा 65% बढ़ाएंगी उत्पादन, कम दाम पर बेहतर कारों की उम्मीद

देश की पांच बड़ी कार कंपनियां अगले 5-6 साल में करीब 1 लाख करोड़ रुपए निवेश करके उत्पादन क्षमता 65% तक बढ़ाने जा रही हैं। इससे कारों का सालाना उत्पादन 55 लाख से बढ़कर 90 लाख तक पहुंच सकता है। बढ़ती मांग के बीच इससे सप्लाई बढ़ेगी, नए मॉडल आएंगे और लोकप्रिय मॉडलों के लिए इंतजार की अवधि घट सकती है। देश की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों मारुति सुजुकी इंडिया, टोयोटा फिलोस्कर मोटर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया ने आक्रामक विस्तार की योजना बनाई है। इसके तहत भारी-भरकम निवेश से नए कारखाने खोले जाएंगे। एसयूवी, ईपी और हाइब्रिड टेक्नोलॉजी पर जोर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि आगामी वर्षों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। नतीजतन अभी के मुकाबले कम कीमतों पर बेहतर फीचर वाली कारें बाजार में आ सकती हैं। क्षमता विस्तार की होड़: नई फैक्ट्रियां, मॉडल, टेक्नोलॉजी पर फोकस मारुति सुजुकीः 35,000 करोड़ रुपए का नया निवेश कंपनी अभी सालाना 26 लाख कारें बना सकती है। 2027 से 2030 के बीच अतिरिक्त 15 लाख कारों की उत्पादन क्षमता जोड़ेगी। गुजरात के गांधीनगर में सालाना 10 लाख कारों का नया बड़ा प्लांट लगेगा। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनी बाजार हिस्सेदारी बचाना चाहती है। टोयोटा किर्लोस्कर मोटरः क्षमता दोगुनी करेगी टोयोटा किलोस्कर मोटर उत्पादन क्षमता दोगुनी सालाना 10 लाख कारों तक पहुंचाने जा रही है। बिदादी (कर्नाटक) प्लांट का विस्तार करेगी। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में नया बड़ा कारखाना लगाएगी। इससे फॉच्यूनर, इनोवा जैसे मॉडलों की लंबी वेटिंग कम हो जाएगी। महिंद्रा एंड महिंद्राः सालाना उत्पादन 7.4 लाख बढ़ाएगी कंगनी नागपुर में 5 लाख और चाकण में 2.4 लाख यूनिट की नई फैसिलिटी जोड़ेगी। अभी उत्पादन क्षमता सालाना 7.74 लाख कारों की है। 2030 तक इसे 15 लाख से ऊपर ले जाने का लक्ष्य है। 2027 में आने वाली कॉम्पैक्ट एसयूवी रेंज के लिए यह जरूरी है। टाटा मोटर्स नई ईवी, एसयूवी उतारेगी कंपनी तमिलनाडु में नया प्लॉट लगाएगी। जिसमें 9,000 करोड़ रुपए लगेंगे और सालाना 2.5 लाख कारें बनेगी। मौजूदा फैक्ट्रियां सालाना 8.5 लाख तक कारें बना रही हैं। कंपनी इलेक्ट्रिक कारों और एसयूवी के नए मॉडलों पर फोकस करेगी। नए मॉडल उतारेगी। एमजी मोटर क्षमता तीन गुना करेगी जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया 4,000 करोड़ रुपए के निवेश से क्षमता लगभग तीन गुना करके सालाना 3 लाख कारों तक पहुंचाएगी। कंपनी प्लग-इन हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों के नए मॉडल बाजार में उतारने पर फोकस कर रही है। आक्रामक विस्तार की जरूरत इसलिए पड़ी – जीएसटी के ढांचे में बदलाव और कटौती से टैक्स व्यवस्था अब बिलकुल स्पष्ट हो गई है। पहले टैक्स के मामले में अनिश्चितता बनी हुई थी, लेकिन अब कंपनियां लंबे समय की प्लानिंग कर सकती है। – मांग लगातार बढ़ रही है। आगामी वर्षों में भी कमोबेश यही स्थिति रहेगी। वाहन डीलरों के संगठन फाडा के प्रेसिडेंट सीएस विग्नेश्वर ने कहा कि जीएसटी में कटौती कई साल तक मांग मजबूत रखेगी। घरेलु, विदेशी बाजारों में मजबूत डिमांड सबसे बड़ा आकर्षण। – 2025 में रिकॉर्ड 45.30 लाख कारों की बिक्री हुई। – घरेलू बाजार में बिकी सालाना 7.3% बढ़ी, इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन 17% बढ़ा – गाड़ियों के निर्यात में 19.2% की तगड़ी बढ़ोतरी हुई।

निवेश का साधन बनी 'टाइमपीस':रखना-छिपाना आसान होने से दुनिया में हर घंटे चोरी हो रही लग्जरी घड़ी, ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में घर से 54 करोड़ की घड़ी चोरी

निवेश का साधन बनी 'टाइमपीस':रखना-छिपाना आसान होने से दुनिया में हर घंटे चोरी हो रही लग्जरी घड़ी, ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में घर से 54 करोड़ की घड़ी चोरी

लग्जरी घड़ियां अब सिर्फ रईसी दिखाने और समय जानने का साधन नहीं रहीं, बल्कि तेजी से उम्दा निवेश बनती जा रही हैं। यही वजह है कि ये अपराधियों के निशाने पर हैं। अंतरराष्ट्रीय वॉच ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म ‘द वॉच रजिस्टर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में दुनियाभर में 10 हजार से ज्यादा महंगी घड़ियां चोरी या गुम होने के मामले दर्ज हुए। यानी औसतन हर घंटे एक लग्जरी घड़ी गायब हो रही है। आंकड़े दिलचस्प हैं। वैश्विक लग्जरी वॉच मार्केट का आकार 4.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। पिछले एक दशक में 1.13 लाख से ज्यादा चोरी या लूट की घड़ियां डेटाबेस में दर्ज हई। इनकी अनुमानित कीमत 20,800 करोड़ रुपए आंकी गई है। एक चोरी हुई घड़ी की औसत कीमत 14 लाख रुपए होती है। 2025 में करीब 1,400 गुम घड़ियां ट्रेस करके रिकवर की गई, जो बड़ी सफलता मानी जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि असली चोरी के मामले इससे कहीं ज्यादा हो सकते हैं. क्योंकि केवल आधे मालिक ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हैं। कई लोग अपनी घड़ी का सीरियल नंबर तक रिकॉर्ड में नहीं रखते, जिससे रिकवरी मुश्किल हो जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में महंगी घड़ियां चोरी के आधे से ज्यादा मामले लंदन में दर्ज हुए। जनवरी 2022 से जुलाई 2025 के बीच यहां 5.180 लग्जरी घड़ियां चोरी हई। चलती-फिरती संपत्ति द वॉच रजिस्टर के विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी और ऊंची कीमत के कारण लग्जरी घड़ियां ‘चलती-फिरती संपत्ति’ हैं। कुछ पुरानी घड़ियां खरीदने के लिए लोग लाखों डॉलर खर्च देने को तैयार रहते हैं। चोरी गईं घड़ियां 51% रोलेक्स की 2025 में गुम या चोरी हुई घड़ियों में सबसे ज्यादा 51% रोलेक्स थीं। पुरानी घड़ियों के बाजार में भी 44% टाइमपीस इसी ब्रांड की होती हैं। रिचर्ड मिल की घड़ियां सबसे महंगी रिचर्ड मिल की घड़ियां काफी महंगी होती हैं। 2024 में चोरी हुई टॉप-10 घड़ियां इसी ब्रांड की थीं। ऐसी एक घड़ी की औसत कीमत 3.23 करोड़ रुपए है। 2025 में ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में एक घर से 54 करोड़ रुपए की लिमिटेड एडिशन घड़ी चोरी की घटना ने बाजार को चौंका दिया था। आखिर क्यों लग्जरी घड़ियां अपराधियों के निशाने पर हैं? लग्जरी घड़ियों की कीमत तेजी से बढ़ने और निवेश एसेट के रूप में उनकी स्वीकार्यता ने चोरी के मामले बढ़ाए हैं। इन्हें बेचना और छिपाना आसान होता है। सेकंडरी मार्केट और ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म ने भी रीसेल आसान बना दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 17% मालिक अपनी घड़ी का सीरियल नंबर रिकॉर्ड नहीं रखते और 8% को याद नहीं कि उन्होंने नंबर सुरक्षित रखा या नहीं। इससे चोरी के बाद ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है।

ब्राजील कार्निवल, उमड़ा जनसैलाब, टूटेगा रिकॉर्ड:6.5 करोड़ लोगों की भीड़ और 190 करोड़ का बजट, सांबा की धुन पर थिरकी दुनिया

ब्राजील कार्निवल, उमड़ा जनसैलाब, टूटेगा रिकॉर्ड:6.5 करोड़ लोगों की भीड़ और 190 करोड़ का बजट, सांबा की धुन पर थिरकी दुनिया

दुनिया के सबसे बड़े उत्सवों में से एक बाजील कार्निवल चरम पर पहुंच चुका है। 13 फरवरी से शुरू हुआ उत्सव अलग-अलग शहरों के बाद अब रियो डी जेनेरियों में दस्तक दे चुका है। 21 फरवरी तक चलने वाले कार्निवल में रिकॉर्ड तोड़ भीड़ उमड़ रही है। इस साल अनुमान है कि लगभग 6.5 करोड़ लोग शामिल होंगे। अलग-अलग शहरों में कार्निवाल में 4 हजार से ज्यादा कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। रियो डी जेनेरियो में ही करीब 80 लाख लोगों के आने की उम्मीद है। कलाकार और सांबा स्कूल भाग ले रहे हैं रियो में परेड का केंद्र सांबाडीम है, जहां 12 टॉप-लीग सांबा स्कूल मुख्य प्रतियोगिता में उतर रहे हैं। इनके साथ दर्जनों स्कूल निचली डिवीजनों में परेड करते हैं। हर बड़े सांबा स्कूल में हजारों डांसर, म्यूजीशियन, कारीगर, कॉस्ट्यूम डिजाइनर टेलर और सेट बनाने वाले लोग जुड़े होते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक अकेले एक उभरते स्कूल पाड़े मिग्वेल का बजट करीब 190 करोड़ रु है। अकेले रियो में हर साल करीब 70.000 अस्थायी नौकरियां मिलती हैं। इसमें सुरक्षा, सफाई, स्टाल, होटल रेस्तरां स्टाफ, इवेंट मैनेजमेंट शामिल हैं।

इटली का ‘क्रिकेट’ वाला चमत्कार:जिस देश में घास की पिच तक नहीं, वह वर्ल्ड कप में नेपाल को हरा चुका; 78 साल के बुजुर्ग का सपना सच

इटली का ‘क्रिकेट’ वाला चमत्कार:जिस देश में घास की पिच तक नहीं, वह वर्ल्ड कप में नेपाल को हरा चुका; 78 साल के बुजुर्ग का सपना सच

मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में टी20 वर्ल्ड कप के एक मैच में इटली ने नेपाल को 10 विकेट से हराकर इतिहास रच दिया था। यह 78 साल के फ्रांसिस जयराजा के लिए एक चमत्कार था, जो स्टेडियम में बैठकर अपनी आंखों के सामने अपने 50 साल के संघर्ष को जीत में बदलते देख रहे थे। यह कहानी है एक ऐसे देश इटली की, जहां फुटबॉल तो धर्म है, लेकिन क्रिकेट के लिए एक जूनून कुछ लोगों के दिल में धड़कता रहा और इन जुनूनी लोगों ने देश में क्रिकेट को बचाए रखा। श्रीलंका के जाफना से रोम तक का सफर श्रीलंका के जाफना से 1968 में गणित पढ़ने रोम पहुंचे फ्रांसिस जयराजा ने नहीं सोचा था कि वे इटली के पहले क्रिकेट कप्तान बनेंगे। वे दिन में नौकरी करते और फिर शाम को विदेशी दूतावासों के कर्मचारियों के साथ खेलते। यहीं उनकी मुलाकात सिमोन गैम्बिनो से हुई। गैम्बिनो गर्मियों में इंग्लैंड में क्रिकेट देख चुके थे। दोनों ने 1980 में ‘इटालियन क्रिकेट फेडरेशन’ की नींव रखी। 1984 में इटली की टीम पहली बार इंग्लैंड दौरे पर गई, जिसके कप्तान जयराजा थे। मिलान और युवेंटस जैसे मशहूर क्लबों की शुरुआत में शामिल था क्रिकेट इटली में आम आदमी को क्रिकेट समझाना टेढ़ी खीर है। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इटली के मशहूर फुटबॉल क्लब एसी मिलान और युवेंटस की शुरुआत क्रिकेट और फुटबॉल क्लब के रूप में ही हुई थी। शुरुआत में एसी मिलान का नाम ‘मिलान फुटबॉल एंड क्रिकेट क्लब’ था, लेकिन 1900 के दशक में वहां से क्रिकेट गायब हो गया। इसका एक बड़ा कारण था बेनिटो मुसोलिनी का फासीवादी शासन। उन्होंने क्रिकेट को ‘अन-इटालियन’ और ‘अंग्रेजों का खेल’ बताकर इसे दबा दिया और फुटबॉल को राष्ट्रवाद के हथियार के तौर पर प्रचारित किया। 2023-24 में कुछ शहरों में क्रिकेट खेलने पर प्रतिबंध भी लग चुका 2023-24 के आसपास मोनफाल्कन शहर की मेयर ने पार्कों में क्रिकेट पर यह कहकर बैन लगा दिया था कि यह संस्कृति और सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। इटली में क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। गैम्बिनो बताते हैं, ‘शायद हम वर्ल्ड कप खेलने वाले पहले ऐसे देश हैं, जिसके पास अपने देश में ढंग की घास वाली विकेट तक नहीं हैं।’ हालांकि, इस जीत के बाद इटली में क्रिकेट को लेकर माहौल बन रहा है। गैम्बिनो व लिएंड्रो का मानना है कि असली बदलाव ओलिंपिक से आएगा। जब इटली के लोग क्रिकेट को ओलिंपिक में देखेंगे, तभी यह खेल वहां का हिस्सा बन पाएगा।

अब नौकरी लगते ही घर का ट्रेंड:सर्वेः 35 की उम्र से पहले 74% जेन-जी बन रहे मकान मालिक

अब नौकरी लगते ही घर का ट्रेंड:सर्वेः 35 की उम्र से पहले 74% जेन-जी बन रहे मकान मालिक

पैसा जमा करो… फिर घर खरीदो। कम से कम डाउनपेमेंट जितनी रकम तो हो। आम भारतीय प​रिवारों की ये सोच अब पुरानी हो रही है। अब ट्रेंड शुरू हुआ है- नौकरी लगते ही घर खरीद लो। देश में ​बिकने वाले 74% घर 35 वर्ष से कम उम्र वाले खरीद रहे हैं। इनमें भी 32% खरीदार 25 साल से छोटे हैं। घर खरीदने वालों की औसत आयु महज 6 साल के अंदर 38 से घटकर 34 साल रह गई। ये बातें होम लोन एग्रीगेशन और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म बे​​​सिक होम लोन के सर्वे ‘घर का सपना कैसे पूरा करता है भारत’ में सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, अपने घर की चाह इतनी गहरी है​ कि उच्च आय वर्ग सालाना कमाई में से 50% तक ईएमआई भरने को तैयार है। डिजिटल प्लेटफाॅर्म के ज​रिए हो रही तेज प्रोसेसिंग नई उम्र के खरीदारों को लुभाती है। हालांकि, ये उसी वित्तीय संस्था से लोन लेने पर जोर देते हैं, जो कम से कम 50 साल पुरानी और विश्वसनीय हो। सर्वे अलग-अलग उम्र और आय वर्ग के 23 हजार लोगों पर ​किया गया। इनमें से 31% की सालाना आय 50 लाख से ज्यादा थी। 32% घरों के खरीदार 25 साल तक की उम्र के, 76% लोगों को झूठे वादों से समस्या है 47% ग्रामीणों ने पेपरवर्क को लोन की राह में समस्या माना, मेट्रो शहरों में आंकड़ा 45% रहा 74% होम लोन के ग्राहक 11 से 20 लाख रुपए तक के आय वर्ग से संबंधित थे 76% ​लोगों ने ज्यादा दस्तावेज की मांग और झूठे वादों को होम लोन की राह में बड़ी समस्या माना घर खरीदने में जेन-जी कम मानते हैं दोस्तों की सलाह 21-24 वर्ष आयुवर्ग में 9% ही दोस्तों के कहने पर होम लोन लेते हैं। 50-60 आयु में सर्वाधिक 14% दोस्तों की राय पर मकान लेते हैं। 60+ की श्रेणी में 11% लोग घर खरीदने में दोस्तों से सलाह लेते हैं। इनके अलावा, 5 लाख तक वाले 29%, 5 से 10 लाख के 20% , 11 से 20 लाख के 7%, 21 से 35 लाख के 4% और 36 से 40 लाख तक आमदनी वाले 9% उत्तरदाता शामिल थे। इनमें 91% पुरूष व 9% महिलाएं थी। महिलाओं की घर खरीदने में हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। महिलाओं ने 2024 में शीर्ष शहरों मे्ं 1.29 लाख आवासीय लेनदेन किए। यह उन शहरों में हुए कुल सौदों का 14% था। कम आय वाले आमदनी की 25% ईएमआई को तैयार 5 लाख तक आय वाले आमदनी का 25% हिस्सा ईएमआई में देने को तैयार हैं। 11 से 40 लाख तक आय वाले 40% ईएमआई को तैयार थे। इससे ऊपर वाले 50% हिस्से से ईएमआई भरकर घर खरीदना चाहते हैं।

पैट मैक्ग्रा की सौंदर्य प्रसाधन कंपनी संकट में:मैडोना-रिहाना इनकी क्लाइंट रहीं, किचन में बनाए उत्पादों से 9 हजार करोड़ की कंपनी खड़ी की

पैट मैक्ग्रा की सौंदर्य प्रसाधन कंपनी संकट में:मैडोना-रिहाना इनकी क्लाइंट रहीं, किचन में बनाए उत्पादों से 9 हजार करोड़ की कंपनी खड़ी की

लंदन की अश्वेत लड़की पैट मैक्ग्रा, जिसने मां के किचन से शुरू करके पेरिस-मिलान के सबसे बड़े रैम्प तक मेकअप का जादू पहुंचाया। आज अपनी ही कंपनी पैट मैक्ग्रा लैब्स को दिवालियेपन से बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं। दुनिया उन्हें ‘मदर ऑफ मेकअप’ कहती है। मैडोना, टेलर स्विफ्ट, किम कार्दशियां से लेकर रिहाना तक के जिन चेहरों को हम रेड कार्पेट पर चमकता देखते हैं, उनमें पैट के ब्रश का स्पर्श होता है। 2015 में शुरू हुआ उनका ब्रांड पैट मैक्ग्रा लैब्स 2018 में 9000 करोड़ रु. से ज्यादा का सौंदर्य कारोबार कर रहा था। ऐसा करने वाला पहला अश्वेत महिला स्वामित्व का सौंदर्य ब्रांड बना। इसके आठ साल बाद ही पिछले महीने जनवरी में इसी कंपनी को कर्ज से राहत के लिए अमेरिका में दिवालिया होने की अर्जी देनी पड़ी। इसमें कंपनी पर 453 करोड़ रु. से अधिक के कर्ज की बात कही गई है। पेरिस या मिलान फैशन वीक में 80 बड़े सूटकेस के साथ आने के लिए मशहूर पैट के हर सूटकेस में हजारों आईशैडो, ग्लिटर और उनके बनाए सीक्रेट फॉर्मूले होते हैं। उनका सबसे चर्चित प्रोडक्ट ‘गोल्ड 001’ किसी हाई-टेक लैब में नहीं, बल्कि किचन में बना था। वे धातु जैसी चमक वाला गोल्ड शेड चाहती थीं और हाथ से पिगमेंट मिलाकर जो रंग निकला, वह पेरिस फैशन वीक में लॉन्च होते ही ऑनलाइन मिनटों में सोल्ड-आउट हो गया। 2024 के एक शो में उन्होंने मॉडल्स के चेहरे पर ऐसा ग्लास-स्किन इफेक्ट बनाया कि सोशल मीडिया में कई हफ्तों तक यही चर्चा होती रही कि यह ‘कांच की गुड़िया’ जैसा चेहरा आखिर कैसे बना। इस ग्लैमर की चमक के पीछे उनकी कंपनी की बैलेंस शीट बिगड़ गई। रिपोर्टों के अनुसार, तेज विस्तार, भारी मार्केटिंग खर्च, सप्लाई चेन में रुकावटें और रिटेल पार्टनरशिप की लागत ने पैट मैक्ग्रॉ लैब्स के बजट ढांचे को ध्वस्त कर दिया। पहचान: चलती-फिरती रिसर्च लैब लेकर घूमती हैं मैक्ग्रा ब्रिटेन में जमैका मूल की सिंगल मदर के घर जन्मी पैट मैक्ग्राॅ का रुझान बचपन से फैशन की ओर था। इटालियन वोग की कॉपियों को देखती थीं। 1990 के दशक में सोल सेकंड सोल की सिंगर कैरॉन व्हीलर के साथ टूर, फिर फोटोग्राफर स्टीवन मीजल के साथ काम ने उन्हें प्राडा, लुई वितां और वर्साचे जैसे फैशन हाउस की पहली पसंद बना दिया। वह शो में 70-80 बड़े ट्रंक मेकअप बैग लेकर पहुंचती हैं। कहा जाता है कि वे चलती-फिरती रिसर्च लैब लेकर घूमती हैं। 2021 में ब्रिटिश एम्पायर की ‘डेम’ की उपाधि मिली। सौंदर्य जगत से यह सम्मान पाने वाली वह पहली अश्वेत महिला हैं।

87% पुरुष ज्यादा कमाने वाली से भी शादी को तैयार:शादी को लेकर बदल रही सोच, 27 के बजाय 29 की उम्र में पार्टनर चाहते हैं लोग

87% पुरुष ज्यादा कमाने वाली से भी शादी को तैयार:शादी को लेकर बदल रही सोच, 27 के बजाय 29 की उम्र में पार्टनर चाहते हैं लोग

देश में शादी को लेकर सोच बदल रही है। जीवनसाथी की रिपोर्ट ‘द बिग शिफ्ट: हाउ इंडिया इज रीराइटिंग द रूल्स ऑफ पार्टनर सर्च एंड मैरिज’ के मुताबिक, अब युवा उम्र या आर्थिक मजबूती से ज्यादा ‘सही पार्टनर’ चाहते हैं। 50% यूजर्स 29 साल की उम्र में पार्टनर सर्च शुरू कर रहे हैं। यह अध्ययन 2016-25 के डेटा पर आधारित है, जिसमें 30 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए। फैसले… 77% प्रोफाइल युवा खुद संभाल रहे, शादियों में पेरेंट्स का दखल 10% कम -77% प्रोफाइल अब युवा खुद मैनेज कर रहे। (पहले से 10% ज्यादा) -33% से घटकर 23% रह गया है माता-पिता का कंट्रोल। (पहले से 10% कम) -90% यूजर्स के लिए ‘सैलरी’ से ज्यादा ‘सही पार्टनर’ होना जरूरी। (शादी की औसत उम्र 27 से बढ़कर अब 29 साल हुई। (+2) समाज… जाति की दीवारें ढहीं, अब 54% ही जाति को लेकर सख्त, पहले 91 फीसदी थी -54% रह गई है सख्त जाति प्राथमिकता, यह पहले 91% थी। (-37%) -49% लोग ही जाति को अहमियत दे रहे हैं बड़े शहरों में। -16% हुए दूसरी शादी चाहने वाले पहले ये 11% था। (43% की बढ़ोतरी)। (15% कुंवारे यूजर्स अब तलाकशुदा पार्टनर अपनाने को तैयार हैं।) नजरिया… 87 फीसदी पुरुषों को अब ज्यादा कमाने वाली पत्नी से कोई आपत्ति नहीं -87% पुरुष खुद से ज्यादा कमाने वाली महिला से शादी को तैयार। -92% लोग चाहते हैं कि पति-पत्नी दोनों कमाएं, सिर्फ 8% ‘सिंगल अर्नर’ के पक्ष में। -78% यूजर्स अगले 6 महीने के भीतर ही शादी करना चाहते हैं। (15% महिलाएं अब खुद से कम कमाने वाले पति को चुन रही हैं।)

महज एक सैलरी काफी नहीं:नौकरी के साथ युवा मनपसंद काम कर बना रहे अपनी पहचान, 57% पार्ट टाइम जॉब भी कर रहे

महज एक सैलरी काफी नहीं:नौकरी के साथ युवा मनपसंद काम कर बना रहे अपनी पहचान, 57% पार्ट टाइम जॉब भी कर रहे

दुनियाभर के युवाओं खासकर ‘जेन जी’ में करियर को लेकर बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। अब युवा केवल एक नौकरी के भरोसे रहने के बजाय अपनी कमाई और शौक के लिए ‘दूसरे रास्ते’ तलाश रहे हैं। अमेरिका में हुए सर्वे (हैरिस पोल) के अनुसार जहां 57% युवा पार्ट टाइम जॉब, फ्रीलांसिंग या साइड हसल (जैसे पॉडकास्ट, कंटेंट क्रिएशन या इलस्ट्रेशन) कर रहे हैं, ताकि उन्हें आर्थिक स्थिरता के साथ अपने सपनों को जीने की आजादी भी मिल सके। न्यूयॉर्क में इंजीनियर भारतीय मूल की आशना दोषी नौकरी के साथ पॉडकास्ट और सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाती हैं। यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जहां युवा मुख्य नौकरी के अलावा असली पहचान अपने जुनून वाले कामों से बना रहे हैं। ट्रेंड: ‘कई हुनर-कई कमाई’ का फॉर्मूला अपना रहे युवा आशना जैसी युवा प्रोफेशनल्स के लिए यह अतिरिक्त काम एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह है। टेक सेक्टर में बढ़ती छंटनी और एआई के कारण अनिश्चितता ने जेन-जी को डरा दिया है। उन्हें लगता है कि आज नौकरी है, शायद कल न रहे; ऐसे में खुद का कोई काम उन्हें आत्मनिर्भर बनाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के जरिए अपना ‘फ्यूचर पोर्टफोलियो’ तैयार कर रहे हैं। इससे न केवल आमदनी बढ़ती है, बल्कि मानसिक सुकून भी मिलता है। निजी काम आजादी और रचनात्मकता ज्यादा देता है न्यूयॉर्क की सेन हो ड्यूटी के बाद डिजिटल पेंटिंग और ग्राफिक्स का काम करते हैं। वे दिन में स्टोर की नौकरी और रात में अपने हुनर को क्लाइंट्स तक पहुंचाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक भविष्य में कंपनियां केवल वेतन पर युवाओं को नहीं रोक पाएंगी, उन्हें काम में लचीलापन देना ही होगा।