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कुम्हारों को मटके-मूर्तियों के लिए नहीं मिल रही मिट्टी, उनके नाम पर चल रहे 200 अवैध ईंट भट्ठे

कुम्हारों को मटके-मूर्तियों के लिए नहीं मिल रही मिट्टी, उनके नाम पर चल रहे 200 अवैध ईंट भट्ठे

जिले में ईंट भट्ठों का अवैध कारोबार बेलगाम होता जा रहा है। हालात यह हैं कि कुम्हारों और प्रजापति समाज को परंपरागत रूप से मिट्टी के बर्तन और मूर्तियां बनाने के लिए मिट्टी की जरूरत होती है। उन्हें ही पर्याप्त मिट्टी नहीं मिल पा रही है। दूसरी ओर, उनके नाम की आड़ में प्रभावशाली लोग सैकड़ों ईंट भट्ठे चला रहे हैं। अनुमान है कि रायसेन तहसील में ही 200 से ज्यादा ईंट भट्ठे बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहे हैं। नदियों, तालाबों और छोटे नालों के आसपास की राजस्व और वन भूमि से बेधड़क मिट्टी की खुदाई की जा रही है। इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। राजस्व और वन विभाग को भी लाखों रुपए की हानि हो रही है। प्रशासनिक अधिकारियों को इस स्थिति की जानकारी है। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। भट्ठा संचालकों के हौसले बुलंद हैं। नियमों के अनुसार ईंट भट्ठा संचालन की अनुमति मुख्यतः एससी-एसटी और प्रजापति समाज के लोगों को दी जाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनके नाम का उपयोग कर दूसरे समाज के प्रभावशाली लोग कारोबार चला रहे हैं। भोपाल रोड पर नीमखेड़ा के पास केवटी गांव में संचालित एक भट्ठे पर मजदूरों को कर्ज के बदले बंधुआ बनाकर काम कराने का मामला सामने आया है। एक दिन पहले एसडीओपी नीलम चौधरी, डिप्टी कलेक्टर सरोज अग्निवंशी और नायब तहसीलदार अमृता सुमन ने मौके पर पहुंचकर जांच की थी। दूसरे दिन भी टीम ने ईंट भट्ठे पर पहुंचकर सबूत जुटाए। तीन परिवारों को बंधक बनाकर काम कराने की बात सामने आई है। प्रशासन ने 20 परिवारों के 84 लोगों का मेडिकल परीक्षण जिला अस्पताल लाकर कराया है। विनीता बाईं और लक्ष्मण ने बताया कि उन्हें बंधक बनाकर काम कराया जा रहा था। ^केवटी गांव में ईंट भट्ठे पर मजदूरों को बंधुआ रूप में रखकर काम कराने के मामले में दूसरे दिन भी जांच की गई है। मौके से डायरी जब्त की गई है। मजदूरों से एग्रीमेंट संबंधी दस्तावेज मांगे गए हैं, ताकि बंधुआ मजदूरी एक्ट के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। -मनीष शर्मा, एसडीएम रायसेन प्रजापति समाज के अध्यक्ष लखन चक्रवर्ती ने बताया कि कुम्हारों को मटके और मूर्तियां बनाने के लिए भी मिट्टी नहीं मिल रही है। पिछले पांच-छह वर्षों से समाज की ओर से कलेक्टर को आवेदन दिए जा रहे हैं। समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि प्रजापति समाज के नाम की आड़ में अवैध भट्ठे संचालित किए जा रहे हैं। प्रशासन को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। श्रम मंत्री के बयान के बाद कार्रवाई प्रदेश के श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने श्रम कानून के 50 वर्ष पूरे होने पर बयान दिया था, “गौरव तब होगा, जब हमारे राज्य में बंधुआ मजदूरी का एक भी मामला नहीं होगा।” महज 10 दिन बाद रायसेन जिले में बंधुआ मजदूरी का मामला सामने आया है। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया है।

भारत में हर वर्ष 54 हजार करोड़ का दान:हाउ इंडिया गिव्स 2025’ की रिपोर्ट 68% किसी न किसी रूप से करते हैं मदद, सर्वाधिक 45.9% धार्मिक संस्थाओं को

भारत में हर वर्ष 54 हजार करोड़ का दान:हाउ इंडिया गिव्स 2025’ की रिपोर्ट 68% किसी न किसी रूप से करते हैं मदद, सर्वाधिक 45.9% धार्मिक संस्थाओं को

भारत में व्यक्तिगत दान का 45.9% हिस्सा धार्मिक संगठनों को जाता है। 41.8% दान सीधे बेहद गरीब, जरूरतमंद व भिक्षा मांगने वालों को मिलता है। गैर-धार्मिक संगठनों तक सिर्फ 14.9% दान पहुंचता है। यह बात ‘हाउ इंडिया गिव्स’ रिपोर्ट के तीसरे संस्करण में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में दान का सबसे बड़ा आधार आम घर हैं। कुल घरेलू दान का अनुमान हर साल 54 हजार करोड़ रुपए है। रिपोर्ट के मुताबिक 68% लोगों ने किसी न किसी रूप में देने की बात कही। दान में दिया बहुत सा खाना मुफ्त सामुदायिक रसोइयों तक जाता है। सेवा का सबसे आम रूप धार्मिक संस्थानों में काम है। रिपोर्ट में भारत में घरों के रोजमर्रा के दान का पैमाना, पैटर्न, वजहें बताई गई हैं। बताया गया है कि भारतीय दुनिया के सबसे उदार लोगों में हैं। यह अध्ययन 20 राज्यों में सर्वे पर आधारित है। इसका मकसद यह समझना रहा कि आम लोग नकद, सामान के रूप में मदद, सामाजिक कामों में कैसे योगदान देते हैं। दान किस रूप में 48% खाना, कपड़े, जरूरी वस्तुएं 44% नकद दान 30% समय देकर सेवा ऊंची आय: दान 80%तक 4000–5000 रुपए महीना आय वाले आधे घर दान करते हैं ऊंची आय पर भागीदारी 70 से 80% तक बढ़ जाती है। दान की सबसे बड़ी वजह 90%+ इसे धार्मिक कर्तव्य मानते हैं नैतिक जिम्मेदारी आमने-सामने अपील सबसे असरदार कुल दान में नकद का हिस्सा 44 फीसदी रिपोर्ट में दान के तरीके भी बताए गए हैं। सामान के रूप में मदद का हिस्सा सबसे ज्यादा 46% है। नकद दान 44% है। करीब 30% लोगों ने वॉलंटियरिंग की बात कही। रिपोर्ट के मुताबिक यह दान के रिश्तों और समुदाय आधारित स्वरूप को दिखाता है। रिपोर्ट में दान के तरीके और पैटर्न पर भी हुआ विश्लेषण रिपोर्ट के मुताबिक भारत में रोजमर्रा के घरेलू दान का इकोसिस्टम सालाना करीब 54 हजार करोड़ रुपए का है। रिपोर्ट लॉन्च पर सीएसआईपी की डायरेक्टर और हेड जिनी उप्पल ने कहा कि ‘हाउ इंडिया गिव्स 2025-26’ की रिपोर्ट भारत की उस उदारता को सामने लाती है, जो हमेशा से रही है, पर कम आंकी गई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खपत आंकड़ों के आधार पर विश्लेषण करने से यह समझ आता है कि भारत कैसे दान देता है। यह भी पता चलता है कि देश के विकास की गति के साथ दान कैसे बदलता है। हर आय वर्ग के लोग रोजाना करते हैं दान रिपोर्ट के मुताबिक,रोजमर्रा का दान हर आय वर्ग में होता है। कम खपत स्तर 4 से 5 हजार रुपए महीना पर भी करीब आधे घर दान करते हैं। आय बढ़ने पर भागीदारी तेजी से बढ़ती है। रिपोर्ट ने दानदाताओं के चार प्रकार भी बताए हैं। ग्रासरूट, एस्पिरेशनल, प्रैक्टिकल, वेल-ऑफ गिवर्स। इनकी प्रेरणा, जागरूकता, जुड़ने की पसंद अलग-अलग बताई गई है।

भारत में हर वर्ष 54 हजार करोड़ का दान:68% लोग किसी न किसी रूप से करते हैं मदद, सर्वाधिक 45.9% दान धार्मिक संस्थाओं को; हाउ इंडिया गिव्स 2025’ की रिपोर्ट

भारत में हर वर्ष 54 हजार करोड़ का दान:68% लोग किसी न किसी रूप से करते हैं मदद, सर्वाधिक 45.9% दान धार्मिक संस्थाओं को; हाउ इंडिया गिव्स 2025’ की रिपोर्ट

भारत में व्यक्तिगत दान का 45.9% हिस्सा धार्मिक संगठनों को जाता है। 41.8% दान सीधे बेहद गरीब, जरूरतमंद व भिक्षा मांगने वालों को मिलता है। गैर-धार्मिक संगठनों तक सिर्फ 14.9% दान पहुंचता है। यह बात ‘हाउ इंडिया गिव्स’ रिपोर्ट के तीसरे संस्करण में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में दान का सबसे बड़ा आधार आम घर हैं। कुल घरेलू दान का अनुमान हर साल 54 हजार करोड़ रुपए है। रिपोर्ट के मुताबिक 68% लोगों ने किसी न किसी रूप में देने की बात कही। दान में दिया बहुत सा खाना मुफ्त सामुदायिक रसोइयों तक जाता है। सेवा का सबसे आम रूप धार्मिक संस्थानों में काम है। रिपोर्ट में भारत में घरों के रोजमर्रा के दान का पैमाना, पैटर्न, वजहें बताई गई हैं। बताया गया है कि भारतीय दुनिया के सबसे उदार लोगों में हैं। यह अध्ययन 20 राज्यों में सर्वे पर आधारित है। इसका मकसद यह समझना रहा कि आम लोग नकद, सामान के रूप में मदद, सामाजिक कामों में कैसे योगदान देते हैं। दान किस रूप में 48% खाना, कपड़े, जरूरी वस्तुएं 44% नकद दान 30% समय देकर सेवा ऊंची आय: दान 80%तक 4000–5000 रुपए महीना आय वाले आधे घर दान करते हैं ऊंची आय पर भागीदारी 70 से 80% तक बढ़ जाती है। दान की सबसे बड़ी वजह 90%+ इसे धार्मिक कर्तव्य मानते हैं नैतिक जिम्मेदारी आमने-सामने अपील सबसे असरदार कुल दान में नकद का हिस्सा 44 फीसदी रिपोर्ट में दान के तरीके भी बताए गए हैं। सामान के रूप में मदद का हिस्सा सबसे ज्यादा 46% है। नकद दान 44% है। करीब 30% लोगों ने वॉलंटियरिंग की बात कही। रिपोर्ट के मुताबिक यह दान के रिश्तों और समुदाय आधारित स्वरूप को दिखाता है। रिपोर्ट में दान के तरीके और पैटर्न पर भी हुआ विश्लेषण रिपोर्ट के मुताबिक भारत में रोजमर्रा के घरेलू दान का इकोसिस्टम सालाना करीब 54 हजार करोड़ रुपए का है। रिपोर्ट लॉन्च पर सीएसआईपी की डायरेक्टर और हेड जिनी उप्पल ने कहा कि ‘हाउ इंडिया गिव्स 2025-26’ की रिपोर्ट भारत की उस उदारता को सामने लाती है, जो हमेशा से रही है, पर कम आंकी गई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खपत आंकड़ों के आधार पर विश्लेषण करने से यह समझ आता है कि भारत कैसे दान देता है। यह भी पता चलता है कि देश के विकास की गति के साथ दान कैसे बदलता है। हर आय वर्ग के लोग रोजाना करते हैं दान रिपोर्ट के मुताबिक,रोजमर्रा का दान हर आय वर्ग में होता है। कम खपत स्तर 4 से 5 हजार रुपए महीना पर भी करीब आधे घर दान करते हैं। आय बढ़ने पर भागीदारी तेजी से बढ़ती है। रिपोर्ट ने दानदाताओं के चार प्रकार भी बताए हैं। ग्रासरूट, एस्पिरेशनल, प्रैक्टिकल, वेल-ऑफ गिवर्स। इनकी प्रेरणा, जागरूकता, जुड़ने की पसंद अलग-अलग बताई गई है।

स्विट्जरलैंड 1 करोड़ की आबादी के बाद रोक देगा एंट्री:भीड़ से थका ‘धरती का स्वर्ग‘, 14 जून को होगा जनमत संग्रह, प्रयोग पर पूरी दुनिया की नजर

स्विट्जरलैंड 1 करोड़ की आबादी के बाद रोक देगा एंट्री:भीड़ से थका ‘धरती का स्वर्ग‘, 14 जून को होगा जनमत संग्रह, प्रयोग पर पूरी दुनिया की नजर

यूरोप का समृद्ध और अनुशासित देश अब एक असाधारण फैसले की दहलीज पर खड़ा है। 14 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में जनमत संग्रह होगा, जिसमें तय किया जाएगा कि 2050 तक देश की कुल स्थायी आबादी अधिकतम 1 करोड़ पर सीमित की जाए या नहीं। यह प्रस्ताव दक्षिणपंथी दल स्विस पीपुल्स पार्टी ने आगे बढ़ाया है। स्विट्जरलैंड की वर्तमान आबादी लगभग 91 लाख है। पिछले बीस वर्षों में वृद्धि का बड़ा कारण बाहरी कामगारों का आगमन रहा है। कुल जनसंख्या का पच्चीस प्रतिशत हिस्सा विदेशी मूल का है। इसी तेज वृद्धि ने आवास संकट को गहरा किया है। ज्यूरिख और जिनेवा जैसे शहरों में खाली मकानों की दर एक प्रतिशत से भी कम बताई जाती है। किराये बढ़े हैं। अस्पतालों में प्रतीक्षा समय लंबा हुआ है, सड़कों, रेल मार्गों पर भीड़ बढ़ी है। प्रस्तावित प्रावधान स्पष्ट करते हैं कि 1 करोड़ की सीमा जन्म दर से नहीं, बल्कि आव्रजन पर नियंत्रण के जरिये लागू की जाएगी। ​जिसके अनुसार यदि आबादी 95 लाख से ऊपर जाती है, तो सरकार को वीसा, कामगार कोटा, शरण नियम और पारिवारिक पुनर्मिलन जैसे प्रावधानों को सख्त करना होगा। यदि जनसंख्या 1 करोड़ पार जाती है, तो आव्रजन को और सीमित कर आबादी को वापस सीमा के भीतर लाने के उपाय करने होंगे। समर्थक इसे अव्यवस्था की रफ्तार थामने का तरीका बताते हैं। वहीं ज्यूरिख विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री यान आइगनबर्गर मानते हैं कि उत्पादकता वृद्धि का महत्वपूर्ण हिस्सा कुशल विदेशी श्रमिकों से आता है। कठोर सीमा से श्रम बाजार में कमी और कर राजस्व पर दबाव पड़ सकता है। स्विस नियोक्ता संघ के अध्यक्ष वैलेंटिन वोग्ट पहले संकेत दे चुके हैं कि स्वास्थ्य, निर्माण और सेवा क्षेत्र पहले से श्रमिक कमी झेल रहे हैं। आबादी सीमा से यह संकट गहरा सकता है। अब फैसला स्विस मतदाताओं के हाथ में है, लेकिन इसकी गूंज वैश्विक बहस में दूर तक सुनाई देगी। कुल आबादी पर संवैधानिक सीमा का उदाहरण नहीं इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने 2013 के बाद अवैध समुद्री प्रवेश रोका। हंगरी ने 2015 के बाद सीमा बाड़ और कड़े शरण नियम लागू किए। जापान ने लंबे समय तक सीमित आव्रजन रखा, लेकिन वृद्ध होती आबादी और श्रमिक कमी के कारण नियमों में ढील देनी पड़ी। स्विट्जरलैंड का प्रस्ताव इसलिए अलग है क्योंकि यह कुल आबादी की ऊपरी सीमा तय करने की कोशिश है। सवाल सीधा है कि भविष्य की समृद्धि खुली व्यवस्था से आएगी या नियंत्रित विस्तार से।

अमेजन अब सबसे बड़ी कंपनी:10 साल में पहली बार पिछड़ी वॉलमार्ट, आय के पैमाने पर टेक सपोर्टेड कंपनी आगे निकली

अमेजन अब सबसे बड़ी कंपनी:10 साल में पहली बार पिछड़ी वॉलमार्ट, आय के पैमाने पर टेक सपोर्टेड कंपनी आगे निकली

रिटेल की दुनिया में एक नया युग शुरू हो चुका है। दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन ने वार्षिक राजस्व के मामले में वॉलमार्ट को पछाड़कर दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी का खिताब अपने नाम कर लिया है। यह उपलब्धि न केवल अमेजन के विशाल विस्तार को दर्शाती है, बल्कि बाजार में तकनीक और क्लाउड कंप्यूटिंग के बढ़ते वर्चस्व का भी प्रमाण है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वॉलमार्ट ने 31 जनवरी को समाप्त हुए पिछले 12 महीनों के लिए 713.2 अरब डॉलर की बिक्री दर्ज की। इसके मुकाबले, अमेजन ने वर्ष 2025 के लिए 717 अरब डॉलर का राजस्व रिपोर्ट किया है। बेजोस द्वारा 1994 में एक गैरेज से शुरू हुआ यह सफर अब 717 अरब डॉलर की वार्षिक बिक्री तक पहुंच गया है, जो ई-कॉमर्स और क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ती ताकत का प्रमाण है। अमेजन वेब सर्विसेज की बदौलत आय वृद्धि 10 गुना विशेषज्ञों का मानना है कि अमेजन की यह बढ़त शुद्ध रिटेल के बजाय तकनीक की वजह से है। -क्लाउड का दबदबा: अमेजन का क्लाउड कंप्यूटिंग व्यवसाय, ‘अमेजन वेब सर्विसेज’ (एडब्ल्यूएस), इस कामयाबी का मुख्य आधार है। -डेटा का महत्व: यदि एडब्ल्यूएस के राजस्व को हटा दिया जाए, तो अमेजन की बिक्री 588 अरब डॉलर रह जाती। यानी एआई के युग में डेटा सेंटर्स के दम पर अमेजन ने यह मुकाम हासिल किया है। -विकास की रफ्तार: पिछले एक दशक में अमेजन का राजस्व वॉलमार्ट की तुलना में 10 गुना तेजी से बढ़ा है। दोनों दिग्गज एक-दूसरे के क्षेत्र में सेंध लगा रहे दोनों कंपनियां एक-दूसरे के मुख्य क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश में हैं – वॉलमार्ट की ई-कॉमर्स में सफलता- अमेजन द्वारा ‘होल फूड्स’ खरीदने के बावजूद, वॉलमार्ट ऑनलाइन बिजनेस विकसित करने में आगे रही। – अमेजन की डिजिटल पहुंच- अमेजन के एप और वेबसाइट पर हर माह 2.7 अरब लोग आते हैं। वॉलमार्ट सबसे बड़ा फिजिकल रिटेलर है। एक्सपर्ट व्यू- यह अमेजन की एक खोखली जीत है सांता क्लारा यूनिवर्सिटी के रिटेल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के निदेशक कीर्ति कल्याणम का कहना है, ‘यह एक खोखली जीत है। अमेजन ने वॉलमार्ट को रिटेल के खेल में नहीं हराया, बल्कि एक ऐसे नए बिजनेस (क्लाउड) के जरिए पीछे छोड़ा है, जिसमें वॉलमार्ट मौजूद ही नहीं है।’ जेफ बेजोस दुनिया के चौथे सबसे अमीर शख्स, संपत्ति 228 अरब डॉलर ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस फिलहाल दुनिया के चौथे सबसे अमीर व्यक्ति हैं। उनकी कुल संपत्ति 228 अरब डॉलर आंकी गई है, जो मुख्य रूप से अमेजन में उनके शेयरों से जुड़ी है। मार्केट वैल्यू में एनवीडिया टॉप पर, अमेजन से दोगुनी, वॉलमार्ट से 4 गुनी राजस्व के मामले में भले ही अमेजन नंबर-1 हो, लेकिन निवेशकों की नजर में एनवीडिया दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है। 4.5 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ एनवीडिया की वैल्यू अमेजन से दोगुनी और वॉलमार्ट से चार गुना है।

Marathons have increased by 30% in the country, now every third runner is Gen-G.

Marathons have increased by 30% in the country, now every third runner is Gen-G.

Hindi News Sports Marathons Have Increased By 30% In The Country, Now Every Third Runner Is Gen G. मुंबई9 मिनट पहले कॉपी लिंक स्ट्रावा ईयर इन स्पोर्ट ट्रेंड रिपोर्ट के अनुसार 2025 में रनिंग दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल बना। – प्रतीकात्मक फोटो कोविड के बाद भारत में एक बदलाव आया…… लोग जिम से बाहर निकले और सड़कों पर दौड़ने लगे। रनिंग अब शहरी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुकी है। टाटा मुंबई मैराथन की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार उनकी 2019 मैराथन में लगभग 47,000 प्रतिभागी थे जो 2025 में बढ़कर 65 हजार हो गए। यानी करीब 30% की वृद्धि। 2025 में देशभर में 1,500 से ज्यादा रनिंग इवेंट आयोजित हुए। अनुमान है कि इस पूरे इकोसिस्टम से करीब 50 करोड़ डॉलर (लगभग 4,000 करोड़ रुपए) का आर्थिक प्रभाव पड़ा। इसमें स्पोर्ट्स ब्रांड्स, कॉर्पोरेट स्पॉन्सर, होटल, ट्रैवल, इवेंट मैनेजमेंट, न्यूट्रिशन और फिटनेस गैजेट मार्केट शामिल हैं, यानी रनिंग अब एक इंडस्ट्री बन चुकी है। लोकप्रियता: 2025 में रनिंग स्पोर्ट ऑफ द ईयर स्ट्रावा ईयर इन स्पोर्ट ट्रेंड रिपोर्ट के अनुसार 2025 में रनिंग दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल बना और इसमें सबसे बड़ा ग्रुप युवाओं का रहा। भागीदारी: मैराथन में जेन-जी सबसे आगे मतलब हर बड़ी कैटेगरी में लगभग एक-तिहाई या उससे ज्यादा भागीदारी जेन-जी की। – 38% 5 किलोमीटर रेस में – 39% 10 किलोमीटर में – 31% हाफ मैराथन में – 33% फुल मैराथन में ग्रोथ: 20 साल में 250 गुना बढ़े रनर्स 2004 में देश में रजिस्टर्ड रनर्स लगभग 10 हजार ही थे। 2025 तक यह संख्या 25 लाख हो गई है, यानी दो दशकों में 250 गुना वृद्धि। इवेंट: 800 टाइम्ड रेस, 700+ रन क्लब भारत में अब कम से कम 800 टाइम्ड रनिंग इवेंट होते हैं और 700 से ज्यादा रन क्लब मौजूद हैं। रनिंग अब संगठित इकोसिस्टम बन चुकी है, सिर्फ मैराथन डे इवेंट नहीं रहे. बल्कि कम्युनिटी रनिंग भी प्रचलित हो रही है। वैश्विक ट्रेंड: मैराथन ही नया ‘स्टेटस सिंबल’ न्यूयॉर्क सिटी मैराथन 2025 में 59,226 प्रतिभागी थे। इनमें से लगभग 11,000 (करीब 25%) 25–29 साल के युवा। 2022 में 30 साल से कम उम्र के फिनिशर सिर्फ 17% थे। मतलब 3 साल में युवा भागीदारी में बड़ा उछाल। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

The impact of relations with Pakistan on world cricket

The impact of relations with Pakistan on world cricket

Hindi News Sports League Cricket: The Impact Of Relations With Pakistan On World Cricket लंदन3 मिनट पहले कॉपी लिंक द हंड्रेड’ लीग की जिन टीमों में भारतीय कंपनियों का निवेश है, वे पाकिस्तानी क्रिकेटरों को नहीं लेने पर विचार नहीं कर रही हैं। इंग्लैंड में 11-12 मार्च को ‘द हंड्रेड’ लीग की नीलामी होने जा रही है। 18 देशों के 711 क्रिकेटर्स ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें 63 पाकिस्तान के हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि जिन टीमों में भारतीय कंपनियों का निवेश है, वे पाकिस्तानी क्रिकेटरों को न लेने पर विचार नहीं कर रही हैं। ये हालात दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव का परिणाम हैं। 2009 के बाद से कोई भी पाकिस्तानी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का हिस्सा नहीं रहा है। यही असर इंग्लैंड में भी दिख रहा है। द हंड्रेड की 8 में से 4 फ्रेंचाइजी मैनचेस्टर सुपर जायंट्स, एमआई लंदन, सदर्न ब्रेव और सनराइजर्स लीड्स में आईपीएल टीमों का आंशिक या पूर्ण मालिकाना हक है। एक एजेंट ने बताया कि भारतीय निवेश वाली टी20 लीग्स में पाक खिलाड़ियों को न चुनना ‘अघोषित नियम’ बन गया है। इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के वरिष्ठ अधिकारी ने एक एजेंट को संकेत दिया है कि पाकिस्तानी क्रिकेटर्स को लेकर केवल उन टीमों की ही दिलचस्पी होगी, जिनका सीधा संबंध आईपीएल मालिकों से नहीं है। जब पिछले सीजन में नए निवेशकों ने कंट्रोल नहीं लिया था, तब मोहम्मद आमिर और इमाद वसीम जैसे इंटरनेशनल स्टार्स खेले थे, जबकि शाहीन अफरीदी, शादाब खान और हारिस रऊफ भी पहले इस टूर्नामेंट का हिस्सा रह चुके हैं। स्थानीय प्रशंसकों की निराशा का डर भी; बड़े शहरों में 4-12% आबादी पाक मूल की साल 2018 में ईसीबी ने विक्रम बनर्जी के नेतृत्व में ‘साउथ एशियन एक्शन प्लान’ पेश किया था। इसका उद्देश्य 10 प्रमुख शहरों में दक्षिण एशियाई समुदायों की भागीदारी को बढ़ाना था। जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, ग्रेटर मैनचेस्टर की 12 प्रतिशत और लीड्स की 4 प्रतिशत आबादी खुद को पाकिस्तानी मूल का मानती है। अब जिन टीमों पर भारतीय मालिकाना हक है, वे इन्हीं शहरों (मैनचेस्टर, लीड्स और लंदन) का प्रतिनिधित्व करती हैं। ऐसे में इन फैंस को अपनी स्थानीय टीम में पाकिस्तान का कोई प्रतिनिधित्व देखने को नहीं मिलेगा। काउंटी क्रिकेट मेंबर्स ग्रुप ने स्पष्ट किया है कि यदि राष्ट्रीयता के आधार पर खिलाड़ियों को न चुनने का कोई सामूहिक फैसला होता है, तो संबंधित बोर्डों और ईसीबी को निजी भागीदारों की जवाबदेही तय करनी चाहिए। पहले से असमानता के आरोप झेल रहा इंग्लिश क्रिकेट, इससे विवाद गहराएगा 2023 की ‘इक्विटी इन क्रिकेट’ रिपोर्ट में इंग्लिश क्रिकेट में भेदभाव को ‘व्यापक’ पाया गया था। ग्लोबल प्लेयर्स यूनियन ‘वर्ल्ड क्रिकेटर्स एसोसिएशन’ के मुख्य कार्यकारी टॉम मोफैट का कहना है कि हर खिलाड़ी को समान अवसर का अधिकार होना चाहिए और भर्ती के फैसले सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए। विदेशी टी20 लीग्स में ये ट्रेंड, पाक प्लेयर्स को मौके नहीं – दुनियाभर की फ्रेंचाइजी क्रिकेट में भारतीय निवेश बढ़ने के साथ ही नया पैटर्न उभर रहा है। दक्षिण अफ्रीका की ‘एसए20’ लीग 2023 में शुरू हुई थी। इसकी सभी छह टीमें आईपीएल ग्रुप्स के पास हैं; वहां अब तक किसी पाकिस्तानी को मौका नहीं मिला है। – संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की ‘आईएलटी20’ में भी एमआई ग्रुप और जीएमआर ने चार सीजन में 15 अलग-अलग देशों के क्रिकेटरों को खरीदा, लेकिन पाक के किसी खिलाड़ी को शामिल नहीं किया। – इसके उलट, इसी लीग में अमेरिकी स्वामित्व वाली डेजर्ट वाइपर्स ने आठ पाकिस्तानी खिलाड़ियों को साइन किया। हाल ही में बीसीसीआई के निर्देश पर केकेआर ने बांग्लादेशी गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को भी रिलीज कर दिया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

पल्स से कोलगेट तक देसी विज्ञापनों में छाए कोरियन स्टार्स:5 साल में 350% बढ़ा पॉप का क्रेज, भारतीय बाजार में सबसे बड़े 'ब्रांड एंबेसडर' कोरियन

पल्स से कोलगेट तक देसी विज्ञापनों में छाए कोरियन स्टार्स:5 साल में 350% बढ़ा पॉप का क्रेज, भारतीय बाजार में सबसे बड़े 'ब्रांड एंबेसडर' कोरियन

पिछले कुछ साल से भारत में कोरियन कल्चर तेजी से उभर रहा है। संगीत में बीटीएस बैंड हो या वेब सीरीज में स्किव्ड गेम्स-डिमेन हंटर्स जैसी कहानियां। भारत में ‘कोरियन वेव’ अपने पीक पर है। हाल ही में साउथ कोरियन सिंगर औरा (Aoora) ने भारत की आइकॉनिक पल्स कैंडी के लिए जिंगल गाया, डांस चैलेंज किया और एक ऐसे ब्रांड का चेहरा बने जो भारतीय स्ट्रीट कल्चर में गहराई से जुड़ा है। औरा 2023 में भारत शिफ्ट हुए। लोकल आर्टिस्ट्स के साथ काम किया। मथुरा में ‘वो किसना है’ गाना गाया। नगालैंड के हॉर्नबिल फेस्टिवल में परफॉर्म भी किया। औरा ने हाल ही में शिव तांडव स्तोत्र का एक नया वर्जन भी गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वे बिग बॉस में नजर आ चुके हैं और बालाजी टेलीफिल्म्स के शो का हिस्सा बन चुके हैं… यानी यह ट्रेंड सिर्फ ब्रांड एंबेसडर वाला मॉडल नहीं है, बल्कि कल्चरल मिक्स है। कोरियन कल्चर; भारत में इस तरह बढ़ रहा – 362 फीसदी उछाल दिखी भारत में कोरियन पॉप स्ट्रीमिंग में…, यानी 5 साल में साढ़े तीन गुना उछाल। – 266 मिलियन व्यूज मिले कोरियन शो डिमेन हंटर्स को, वो भी रिलीज के महज 91 दिनों में…। – 84.5 फीसदी भारतीय कोरियन कंटेंट को लेकर पॉजिटिव रुझान रखते हैं। भारत इस में तीसरे स्थान पर। क्रॉक्स का विज्ञापन, सिद्धांत चतुर्वेदी संग कोरियन एक्ट्रेस क्रॉक्स इंडिया ने अपने मॉनसून कैंपेन में गली बॉय फेम एक्टर सिद्धांत चतुर्वेदी के साथ कोरियन एक्ट्रेस चे सू बिन (Chae Soo-bin) को लिया था। यूट्यूब पर 2 करोड़ से ज्यादा व्यू और इंस्टाग्राम पर 41 करोड़ व्यूज मिले। कोलगेट का विज्ञापन, कोरियन सिंगर को चेहरा बनाया कोलगेट इंडिया ने एशिया-पैसिफिक कैंपेन में कोरियन सिंगर-एक्ट्रेस IU को शामिल किया। यूट्यूब पर इसके 5.8 करोड़ व्यूज हैं। पल्स कैंडी का विज्ञापन, देसी अंदाज में दिखे कोरियन स्टार पल्स कैंडी ने औरा के साथ हिंग्लिश जिंगल लॉन्च किया। इंस्टाग्राम पर 67 लाख से ज्यादा व्यू हैं। यह पहली बार है जब किसी बड़े ब्रांड ने कोरियन स्टार को देसी अंदाज मे पेश किया। कोका कोला का विज्ञापन, भारतीय एक्ट्रेस संग कोरियन पॉप ग्रुप भारतीय अभिनेत्री और मॉडल एंड्रिया केविचुसा ने कोरियन-पॉप ग्रुप न्यू जीन्स के साथ कोका-कोला के एक विज्ञापन में काम किया था।

महायज्ञ के साथ समापन:डबरा में नवग्रह शक्ति पीठ के पट खुले

महायज्ञ के साथ समापन:डबरा में नवग्रह शक्ति पीठ के पट खुले

नवग्रह शक्ति पीठ पर 10 दिनों से चल रहे धार्मिक अनुष्ठान का शुक्रवार को नवग्रह प्राण-प्रतिष्ठा और महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने इसे ईश्वरीय कृपा बताते हुए सत्कर्म और मंदिर निर्माण का संदेश दिया।

सभी केस हाईकोर्ट लौटे:सुप्रीम कोर्ट ने कहा-MP में OBC आरक्षण पर फैसला हाईकोर्ट करे

सभी केस हाईकोर्ट लौटे:सुप्रीम कोर्ट ने कहा-MP में OBC आरक्षण पर फैसला हाईकोर्ट करे

मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% करने के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी लंबित मामलों को मप्र हाईकोर्ट को वापस भेज दिया है। जस्टिस पी. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने इस मामले से जुड़ी अपीलें, विशेष अनुमति याचिकाएं (एसएलपी) और हाईकोर्ट से ट्रांसफर हुए सभी केसों पर अब हाईकोर्ट को ही सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा है कि आरक्षण मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष पीठ (स्पेशल बेंच) गठित की जाए। यह पीठ तीन माह के भीतर सभी विवादों का अंतिम निपटारा करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरक्षण नीति की वैधता की जांच संबंधित राज्य की सामाजिक संरचना के आधार पर होनी चाहिए और इसके लिए हाईकोर्ट ही उपयुक्त मंच है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर कोई टिप्पणी नहीं की है। कोर्ट ने यह अधिकार मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की विशेष पीठ को दिया है कि वह विभिन्न पक्षों द्वारा दायर अंतरिम आवेदनों पर सुनवाई कर निर्णय ले। यानी भर्ती प्रक्रियाओं पर लगी रोक हटेगी या नहीं, इसका फैसला अब हाईकोर्ट की नई स्पेशल बेंच करेगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास लंबित सभी याचिकाओं और कार्यवाहियों का निपटारा कर दिया। राज्य सरकार ने प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने का तर्क देते हुए नियुक्तियों की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने कहा- राज्य की सामाजिक संरचना पर हाईकोर्ट ही करे परीक्षण सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आरक्षण नीति राज्य की सामाजिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों पर आधारित होती है। इसलिए छत्तीसगढ़ की स्थिति मप्र के लिए बाध्यकारी नहीं हो सकती। बिना हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में परीक्षण उचित नहीं है। अभी कहां-कितना आरक्षण क्या है मुख्य विवाद