Interesting traditions at the 92-year-old tournament

Hindi News Sports ‘The Masters’ Golf: Interesting Traditions At The 92 year old Tournament ऑगस्टा15 मिनट पहले कॉपी लिंक मास्टर्स में खेलने वाले सभी खिलाड़ियों को उनके व्यक्तिगत उपयोग के लिए मर्सिडीज-बेंज कार दी जाती है। गोल्फ की दुनिया में ‘द मास्टर्स’ का स्थान चारों मेजर टूर्नामेंट में सबसे ऊपर माना जाता है। इस साल प्रतिष्ठित मेजर चैम्पियनशिप का 90वां संस्करण खेला जा रहा है। ऑगस्टा नेशनल गोल्फ क्लब के हरे-भरे और शानदार मैदानों पर यह केवल एक टूर्नामेंट नहीं है, बल्कि परंपराओं और इतिहास का महाकुंभ है। मास्टर्स टूर्नामेंट की स्थापना वर्ष 1934 में गोल्फ के दिग्गज एमेच्योर चैम्पियन बॉबी जोन्स और निवेश बैंकर क्लिफर्ड रॉबर्ट्स ने की थी। मैदान के इतिहास (एक पूर्व नर्सरी) का सम्मान करते हुए, कोर्स के हर होल का नाम किसी न किसी पेड़ या झाड़ी के नाम पर रखा गया है। मास्टर्स की सबसे बड़ी पहचान ‘ग्रीन जैकेट’ की शुरुआत 1937 में हुई थी। शुरुआत में इसे क्लब के सदस्यों के लिए पेश किया गया था ताकि वे अलग दिख सकें, लेकिन बाद में इसे विजेताओं को दिया जाने लगा। क्लिफर्ड रॉबर्ट्स द्वारा 1940 के दशक में शुरू की गई एक परंपरा के तहत, मास्टर्स में कैडी (खिलाड़ी का बैग उठाने वाले) हमेशा सफेद जंपसूट (ओवरऑल) और हरी टोपी पहनते हैं। ड्वाइट आइजनहावर ऑगस्टा नेशनल के सदस्य बनने वाले एकमात्र अमेरिकी राष्ट्रपति हैं। उनके लिए केबिन बनाया गया था, जिसकी डिजाइन में सीक्रेट सर्विस की भी भूमिका थी। टूर्नामेंट का सबसे कड़ा नियम यह है कि मैदान पर सेल फोन या मोबाइल उपकरणों पर प्रतिबंध है। यदि कोई फोन के साथ पकड़ा जाता है, तो उसे तुरंत बाहर निकाल दिया जाता है और उस पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया जाता है। मोबाइल न होने की भरपाई के लिए, पूरे कोर्स में पुराने जमाने के काले लैंडलाइन फोन लगाए गए हैं, जहां से मुफ्त कॉल कर सकते हैं। प्रवेश के लिए आवश्यक आधिकारिक टिकट को ‘बैज’ कहा जाता है। ये बैज इतने मूल्यवान होते हैं कि लोग इन्हें पीढ़ियों तक सहेज कर रखते हैं। बैज पाने का तरीका ‘मास्टर्स लॉटरी’ है। हर साल अनुमानित रूप से 20 लाख से अधिक लोग इसके लिए आवेदन करते हैं और जीतने की संभावना 1% से भी कम होती है। ट्रॉफी रूम में मास्टर्स चैम्पियन जीत की रात क्लब के सदस्यों के साथ डिनर करता है। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले मंगलवार को एक विशेष डिनर आयोजित किया जाता है। इसमें केवल मास्टर्स विजेताओं (वर्तमान में 35 जीवित हैं) को आमंत्रित किया जाता है। डिनर का मेन्यू पिछले साल का विजेता तय करता है। मास्टर्स जीतने वाले खिलाड़ी को इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए आजीवन निमंत्रण मिलता है। मास्टर्स में खेलने वाले सभी खिलाड़ियों को उनके व्यक्तिगत उपयोग के लिए मर्सिडीज-बेंज कार दी जाती है। ऑटोग्राफ का भी खास नियम; कोर्स की सूखी जगह पर हरे रंग से पेंट यदि किसी फैन ने मास्टर्स के लोगो वाले झंडे पर ऑटोग्राफ मांगा है, तो एक दिलचस्प नियम लागू होता है। जिन खिलाड़ियों ने मास्टर्स जीता है, वे झंडे पर बने अमेरिका के नक्शे के अंदर हस्ताक्षर करते हैं, जबकि अन्य खिलाड़ियों को नक्शे के बाहर हस्ताक्षर करने होते हैं। मैदान को टीवी पर बिल्कुल परफेक्ट और हरा-भरा दिखाने के लिए कोर्स पर किसी भी सूखे या खाली स्थान को हरे रंग से पेंट कर दिया जाता है। विजेता ट्रॉफी चांदी के 900 टुकड़े जोड़कर बनाई है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
अनोखा ग्रीन कॉरिडोर; 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री करेंगे उद्घाटन:210 किमी लंबा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, 100 की रफ्तार से दौड़ेंगे वाहन, जानवर रहेंगे सुरक्षित

पहाड़ों के बीच बल खाती एक सिंगल लेन सड़क… सामने अचानक हाथियों का झुंड, पीछे लंबा जाम। कभी उफनती नदी तो कभी शिवालिक पहाड़ियों से गिरता मलबा। पहले ऐसा था दिल्ली से देहरादून रोड पर आने वाला मोहंड बेल्ट। 210 किमी लंबे और तीन राज्यों से गुजरने वाले इस एक्सप्रेस-वे का 20 किमी का हिस्सा राजाजी टाइगर रिजर्व में आता है। यह हिस्सा अब पूरी तरह बदल चुका है। मैं उसी मोहंड घाटी के ऊपर बने एलिवेटेड कॉरिडोर पर हूं। गाड़ी 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बिना ब्रेक, बिना जाम दौड़ रही हैं और नीचे हाथियों का झुंड गुजर रहा है। 20 किमी लंबे हिस्से में एलिवेटेड पार्ट 12 किमी का है। यह ग्रीन कॉरिडोर पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन का बेहतरीन उदाहरण बनने जा रहा है। एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 14 अप्रैल को पीएम नरेंद्र मोदी करेंगे। मोहंड घाटी जिस बरसाती नदी से घिर जाती थी, वो अब नजर नहीं आती, क्योंकि उसे इस एलिवेटेड रोड के नीचे से निकाला गया है। सड़क को 35-40 फीट ऊपर, 400 से ज्यादा पिलर्स पर खड़ा किया गया है, ताकि नदी का बहाव, जानवरों के झुंड और विकास तीनों बिना रुकावट चलते रहें। एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर राजाजी टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर कोको रोसे कहते हैं कि 14 हजार करोड़ रुपए में बने एक्सप्रेस-वे का 12 किमी का हिस्सा एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर है। तस्वीरें इस बात का संकेत हैं कि जानवर इसके नीचे से सुरक्षित निकल रहे हैं। ऊपर से भारी वाहन 80 की स्पीड में बाएं और हल्के वाहन 100 की स्पीड पर दाएं चलेंगे। जंगल और विकास साथ-साथ पे-पर-यूज टोल सिस्टम – टोल पारंपरिक नाकों वाला नहीं, बल्कि क्लोज्ड टोलिंग सिस्टम होगा। एंट्री-एग्जिट के आधार पर दूरी के हिसाब से शुल्क कटेगा। फास्टैग से बिना रुके भुगतान, जाम की समस्या नहीं। सहारनपुर के कुम्हारहेड़ा में एक टोल प्लाजा पहले से सक्रिय, बाकी एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स पर टोल गेट्स। इस एक्सप्रेसवे से क्या बदलेगा? सफर तेज, खर्च कम – 6-7 घंटे का सफर अब 2.5-3 घंटे में, दूरी 260 किमी से 210 किमी होगी। सुरक्षा बेहतर- 20 किमी जोखिम भरा पहाड़ी रास्ता अब 12 किमी एलिवेटेड, एक्सीडेंट रिस्क कम। प्रदूषण घटेगा- सालाना 93 लाख किलो कार्बन उत्सर्जन घटेगा। पर्यटन, व्यापार बूस्ट- हरिद्वार-ऋषिकेश-देहरादून का सफर आसान, छुटमलपुर इंटरचेंज से लॉजिस्टिक्स तेज। पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। छोटे शहरों को फायदा- बागपत, शामली, सहारनपुर जैसे शहरों में एक्सप्रेसवे पर नए ग्रोथ हब बनेंगे।
सत्संग भवन तिली में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ आज

सागर | सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ तिली स्थित सत्संग भवन के सामने जिया मां पुरम में गुरुवार से किया जा रहा है। बुधवार को कथा की कलशयात्रा निकाली गई। जिसमें महिलाएं पीले वस्त्र धारण कर शामिल हुई। कथा प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से कथा व्यास पं. आशीष दीक्षित के मुखारविंद से सुनाई जाएगी। कथा में मुख्य यजमान सविता सीताराम केसरवानी हैं।
‘वंदे मातरम’ पर घमासान:पार्षद ने वंदे मातरम गाने से किया इंकार; आपत्ति ली तो बोलीं-एक्ट दिखाओ

नगर निगम के बजट सत्र में बुधवार को ‘वंदे मातरम’ पर घमासान हुआ। कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम के वंदे मातरम गाने से साफ इनकार करने पर सदन ‘गद्दार’ और ‘गुंडागर्दी’ के नारों से गूंज उठा। इसी बवाल के बीच 8,455 करोड़ का बजट बिना किसी सार्थक चर्चा के पास हो गया और बैठक तय समय से ढाई घंटे पहले ही खत्म कर दी गई। भाजपा पार्षद सुरेश कुरवाड़े ने फौजिया पर वंदे मातरम से बचने के लिए देर से आने का तंज कसा। इस पर फौजिया ने दो-टूक कहा, मैं नहीं गाऊंगी, वो एक्ट दिखाओ जिसमें यह अनिवार्य है। भाजपा पार्षद महेश बसवाल, मनोज मिश्रा, योगेश गेंदर व रूपा पांडे ने इसे राष्ट्रगीत का अपमान बताते हुए कार्रवाई की मांग की। सभापति मुन्नालाल यादव ने फौजिया को सदन से बाहर कर दिया। विवाद बढ़ाते हुए कांग्रेसी पार्षद रुबीना खान ने कहा, कुरान इसकी इजाजत नहीं देता। अमेरिका ने ईरान के खामेनेई को शहीद किया, तो वहां से तेल क्यों ले रहे हैं? सिर्फ मुस्लिमों को टारगेट किया जा रहा है। संविधान में धर्म पालन की छूट है। इस्लाम में वंदे मातरम नहीं बोल सकते। – फौजिया शेख, कांग्रेसी पार्षद जिस देश का अन्न-जल लेते हैं, उसका सम्मान न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। ईरान के नेता को श्रद्धांजलि देते हैं, लेकिन भारत माता की जय बोलने में पेट दर्द होता है। – पुष्यमित्र भार्गव, महापौर वंदे मातरम नहीं गाना है, वहां तक भी ठीक है, लेकिन ऐसे सदन में सार्वजनिक रूप से राष्ट्रगीत का अपमान कैसे कर सकते हैं कि नहीं गाऊंगी। – राजेन्द्र राठौर, एमआईसी सदस्य कांग्रेस की रग-रग में वंदे मातरम है। फौजिया के बयान से पार्टी का सरोकार नहीं। – चिंटू चौकसे, नेता प्रतिपक्ष
फुटबॉल में इक्विटी, बास्केटबॉल में रेवेन्यू शेयरिंग से कमाई:महंगे खिलाड़ियों का बिजनेस मॉडल, कई खेलों में संन्यास के बाद भी सैलरी

खेल की दुनिया का एक सीधा सच है कि जो खिलाड़ी जितना मशहूर है, उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा है। मौजूदा दौर में सुपरस्टार एथलीट्स सिर्फ अपनी टीमों के लिए खेलने वाले मोहरे नहीं रह गए हैं। वे खुद ग्लोबल ब्रांड हैं। यही वजह है कि लियोनेल मेसी या क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसे दिग्गज करियर के ढलान पर होने के बावजूद दुनिया में सबसे ज्यादा कमाई करने वाले एथलीट हैं। इन खिलाड़ियों को पैसे देने का बिजनेस मॉडल काफी अलग है। कहीं ‘डिफर्ड मनी’ (भविष्य में भुगतान) से टैक्स बचाया जा रहा है, तो कहीं ‘लेवरेज’ (दबाव) का इस्तेमाल कर खिलाडी मनचाही कीमत वसूल रहे हैं। फुटबॉल – मेसी को अमेरिकन क्लब इंटर मियामी में सैलरी के साथ हिस्सेदारी भी मिली 38 साल के लियोनेल मेसी जब यूरोप छोड़कर अमेरिकी लीग की टीम इंटर मियामी से जुड़े, तो उन्हें सिर्फ 800 करोड़ रुपए की सालाना सैलरी ही नहीं मिली, बल्कि क्लब में ‘इक्विटी’ (हिस्सेदारी) और लीग के ब्रॉडकास्ट पार्टनर के रेवेन्यू में से एक तय हिस्सा भी दिया गया। वहीं, रोनाल्डो सऊदी क्लब अल-नासर क्लब में सालाना 2000 करोड़ रुपए कमा रहे हैं। यह पैसा सऊदी के ‘पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड’ से आता है। रोनाल्डो की स्टार पावर का इस्तेमाल कर सऊदी अरब अपनी छवि सुधारना चाहता है। बेसबॉल – शोहेई ओटानी के साथ ‘डिफर्ड मनी’ मॉडल, क्लब की टैक्स बचाने की डील मेजर लीग बेसबॉल में कोई सैलरी कैप नहीं है, लेकिन एक तय सीमा से ज्यादा खर्च करने पर ‘लग्जरी टैक्स’ देना पड़ता है। जापानी सुपरस्टार शोहेई ओटानी ने लॉस एंजिलिस डोजर्स के साथ 10 साल के लिए करीब 6450 करोड़ रुपए का करार किया। ओटानी हर साल करीब 18.5 करोड़ रुपए की सैलरी लेंगे। बाकी के करीब 6300 करोड़ उन्हें उनके रिटायरमेंट के बाद (2034 से 2043 तक) किश्तों में दिए जाएंगे। इस ‘डिफर्ड मनी’ मॉडल ने टीम को लग्जरी टैक्स से बचा लिया। एनएफएल व बास्केटबॉल – कमाई में हिस्सा और टीम पर दबाव बनाकर राशि बढ़वाना एनएफएल में डलास काउबॉयज के डैक प्रेस्कॉट (4 साल के लिए 2230 करोड़) सबसे महंगे खिलाड़ी हैं। प्रेस्कॉट लीग के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी नहीं हैं, लेकिन उन्होंने सही समय पर टीम पर दबाव बनाया। टीम के पास दूसरा विकल्प नहीं था, इसलिए उन्हें ऐतिहासिक डील देनी पड़ी। वहीं, एनबीए में रेवेन्यू खिलाड़ियों और मालिकों के बीच 50-50 बंटता है। 10 साल से ज्यादा अनुभव वाले सुपरस्टार्स सैलरी कैप का 35% तक ले सकते हैं। इसलिए स्टीफन करी जैसे खिलाड़ी इस सीजन में करीब 550 करोड़ रुपए कमा रहे है। बॉक्सिंग – खिलाड़ी की मार्केट वैल्यू और पे-पर-व्यू सबसे अहम बॉक्सिंग में मार्केट वैल्यू और पे-पर-व्यू की ताकत है। मैक्सिकन बॉक्सर अल्वारेज को हाल ही में टेरेंस क्रॉफर्ड के खिलाफ हार मिली। इसके बावजूद, कैनेलो को इस फाइट के लिए करीब 910 करोड़ रुपए मिले। वहीं, विजेता क्रॉफर्ड को करीब 92 करोड़ राशि मिली। गोल्फ – सऊदी का नया टूर्नामेंट बना तगड़ी कमाई का आधार वर्ल्ड नंबर-1 स्कॉटी शेफलर ने 2024 व 2025 में हर साल करीब 280 करोड़ कमाए। दूसरी तरफ, जॉन रैम ने 2025 में एक भी टूर्नामेंट नहीं जीता लेकिन सऊदी फंडेड ‘LIV Golf’ में खेलने के कारण शुरुआती साइनिंग बोनस करीब 3 हजार करोड़ रुपए मिला।
सर्वे- 29 में से 23 देश भविष्य को लेकर चिंतित:भारत के 65 फीसदी लोग मानते हैं कि देश सही दिशा में – इप्सोस

इस साल दुनियाभर में कई महत्वपूर्ण व्यवधान देखने को मिले हैं, जिनमें पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष भी शामिल है। वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। पूरी दुनिया के लोग भविष्य को लेकर चिंतित है और निराशा बढ़ रही है। इसके बीच भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों में उम्मीद की किरण बरकरार है। ग्लोबल रिसर्च फर्म इप्सोस ने मार्च 2026 की एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट का शीर्षक है ‘वाट वरीज द वर्ल्ड’ यानी पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा क्या चितिंत करता है। रिपोर्ट में सर्वे किए गए 29 में से 23 देशों के अधिकांश लोग अपने भविष्य को लेकर नकारात्मक सोच रखते हैं लेकिन भारत, सिंगापुर, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड जैसे देश इस ट्रेंड से अलग खड़े हैं। सर्वे में शामिल भारत के 65% लोगों का मानना है कि देश सही दिशा में जा रहा है। दुनिया में यह औसत महज 39% है। सर्वे में उन प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर नागरिकों की राय भी शामिल की गई है जो उनके दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं। सर्वे में कई लोगों ने माना है कि तेल और गैस आपूर्ति पर बढ़ता दबाव भविष्य में चुनौती बन सकता है। अपराध-हिंसा-बेरोजगारी सबसे बड़ी चिंताएं वैश्विक चिंताओं में अपराध, हिंसा, बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी और सामाजिक असमानता, वितीय और राजनीतिक भ्रष्टाचार प्रमुख हैं। भारत में भी इसी तरह की चिंताएं देखने को मिलती हैं, लेकिन प्राथमिकताओं का क्रम अलग है। महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, अपराध और हिंसा के अलावा वित्तीय और राजनतिक भ्रष्टाचार भारतीयों की सबसे बड़ी चिंताएं हैं। भारत की तटस्थ स्थिति ने बढ़ाई सकारात्मकता इप्सोस इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के लोगों को सकारात्मक सोच के पीछे कई कारण हैं। भारत की तटस्थ भू राजनीतिक स्थिति और वैश्विक ईंधन संकट के प्रभाव को कम करने के लिए किए गए सक्रिय प्रयासों ने अर्थव्यवस्था को अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखा है। पूरी दुनिया में एक सी चिंता- लगातार बढ़ रहे भू-राजनीतिक तनावों से बन रहीं कठिन परिस्थितियां ये सभी चिंताएं एक साझा वैश्विक चिंता की ओर इशारा करते है। यह बैचेनी काफी हद तक लगातार हो रहे भू-राजनीतिक तनावों की वजह से पैदा हुई है। बीते कुछ वर्षों में इन तनाव और संघर्षों ने दुनियभर की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव डाला है और नागरिकों के लिए कठिन परिस्थितियां पैदा की – सुरेश रामलिंगम, सीईओ, इप्सोस इंडिया
परमाणु ऊर्जा का शक्तिमानः स्वदेशी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तैयार:400 साल की बिजली गारंटी; ऐसा करने वाला भारत दुनिया का दूसरा देश

भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में वह कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने दुनिया के विकसित देशों को चौंका दिया है। तमिलनाडु के कलपक्कम में भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी-BHAVINI) का 500 मेगावाट का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) अब कमर्शियल उत्पादन लिए तैयार है। इसे बनाने में 200 से अधिक भारतीय एमएसएमई और निजी कंपनियों ने कलपुर्जे बनाए हैं। इस वजह से भारत पर किसी भी तरह के विदेशी प्रतिबंधों का कोई असर नहीं होगा। रूस के बाद भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन गया है, जिसने इस जटिल तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर उतारा है। इसे किसी विदेशी मदद के बिना, पूरी तरह स्वदेशी इंजीनियरिंग से तैयार किया गया है। इससे भारत के न्यूक्लियर प्रोग्राम के स्टेज-3 का रास्ता खुलेगा और थोरियम से परमाणु बिजली बनाना संभव होगा। परमाणु विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य रिएक्टरों की तुलना में ‘फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ कहीं अधिक उन्नत होते हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह जितना ईंधन (यूरेनियम) इस्तेमाल करता है, उससे कहीं ज्यादा पैदा करता है। इसीलिए इसे ‘ब्रीडर’ कहा जाता है। भारत के पास यूरेनियम के भंडार सीमित हैं, लेकिन थोरियम का विशाल भंडार है। यह रिएक्टर भारत के ‘तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम’ के दूसरे चरण की शुरुआत है, जो भविष्य में थोरियम के इस्तेमाल का रास्ता खोलेगा। परमाणु विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका, फ्रांस ने परमाणु रिएक्टर के एक ही डिजाइन- पेशराइज्ड वाटर रिएक्टर (पीडब्ल्यूआर) को अपनाया। जर्मनी और ब्रिटेन की कोशिश नाकाम रही। भारत ने इस जटिल इंजीनियरिंग चुनौती को स्वीकार किया। भारत में लगभग 9.63 लाख टन थोरियम का भंडार है। एक बार जब हम तीसरे चरण में पूरी तरह प्रवेश कर जाएंगे, तो ये भंडार भारत को अगले 400 वर्षों तक निर्बाध बिजली प्रदान करने में सक्षम होंगे। परमाणु वैज्ञानिक डॉ. अनिल काकोदकर के विजन का जिक्र करते हुए विशेषज्ञ बताते हैं कि हालांकि इस परियोजना में समय लगा, जो ‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी मिसाल है। यह भारत की ‘ऊर्जा संप्रभुता’ का घोषणा-पत्र जैसा है। कलपक्कम स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर इसलिए खास है ईंधन की बचत – यह रिएक्टर इस्तेमाल किए गए ईंधन को फिर से रिसाइकिल कर ऊर्जा पैदा करता है। सुरक्षा – लिक्विड सोडियम का इस्तेमाल, जो बिजली न होने पर भी रिएक्टर को खुद ही ठंडा रख सकता है। 72 साल पहले होमी भाभा ने यह विजन रखा था। 22 साल लगे रिएक्टर के निर्माण में। 7,700 करोड़ रु. कुल लागत। 100% स्वदेशी तकनीक।
ग्लोबल स्टोर तक भारतीय लग्जरी फैशन की धमक:इनका 22% बिजनेस विदेशी बाजारों से; न्यूयॉर्क से दुबई तक खुले स्टोर, हॉलीवुड मुरीद

कभी ऑयलफील्ड के उपकरणों की दुनिया से निकले तरुण ताहिलियानी आज दुबई के पॉश जुमेरा इलाके में दो मंजिला लग्जरी स्टोर सजा रहे हैं। यह महज एक शख्स की कहानी नहीं, बल्कि पूरे भारतीय फैशन इंडस्ट्री के वैश्विक महत्वाकांक्षा का प्रतीक है। रिलायंस, आदित्य बिड़ला फैशन जैसे कॉरपोरेट निवेशकों की बदौलत सब्यसाची, मनीष मल्होत्रा, अनिता डोंगरे जैसे भारतीय ब्रांड्स न्यूयॉर्क, दुबई जैसे शहरों में मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। भारतीय क्राफ्ट, हैंडवर्क इन ब्रांड्स को पहचान दिला रहे हैं। दिलचस्प मार्केटिंग, अलग स्टाइल और तासीर की बदौलत ये ब्रांड्स पूरी दुनिया में जगह बना रहे हैं। इसके चलते भारतीय फैशन इंडस्ट्री की 22 प्रतिशत आय विदेशी बाजारो से होने लगी है। भारतीय फैशन हॉलीवुड, पेरिस के सबसे बड़े मंचों तक पहुंचा अंतरराष्ट्रीय पहचान – भारतीय डिजाइन्स को वैल्यू मिल रही है। भारतीय कारीगरी को ग्लोबल लेवल पर एक ‘ब्रांड’ माना जाता है। हॉलीवुड स्टार्स की पसंद- गौरव गुप्ता जैसे भारतीय डिजाइनरों के कपड़े अब ‘कार्डी बी’ और ‘मेगन दी स्टैलियन’ जैसे बड़े ग्लोबल सुपरस्टार्स पहन रहे हैं। यह ट्रेंड बढ़ रहा है। रेड कार्पेट तक- मशहूर एक्ट्रेस जेंडाया ने राहुल मिश्रा के डिजाइन किए कपड़े पहने, वहीं पॉप स्टार बियॉन्से ने अपने शो के लिए गौरव गुप्ता के आउटफिट्स चुने। विदेशी ब्रांड्स पर प्रभाव- प्रादा जैसे बड़े इंटरनेशनल लग्जरी ब्रांड ने भारत की पारंपरिक कोल्हापुरी चप्पलें अपने कलेक्शन में शामिल की है। पेरिस फैशन वीक में धाक – दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ‘पेरिस हॉट कूटूर वीक’ में अब भारतीय डिजाइनर हर साल नियमित रूप से शो कर रहे हैं। डिजाइन चोरी गंभीर परेशानी, कस्टम ड्यूटी में खप रही पूंजी – इंटरनेशनल रेंट, स्टाफिंग और कस्टम्स में काफी पूंजी खप रही। हाथ से बने प्रोडक्ट्स के लिए इन्वेंट्री मैनेजमेंट जरूरी है। – यूरोपियन लग्जरी हाउस से सीधी प्रतिस्पर्धा बड़ी चुनौती, करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव और मैक्रोइकोनॉमिक अस्थिरता – राहुल मिश्रा के ‘टाइग्रेस’ डिजाइन की एक टीवी शो में नकल पाई गई। – सूरत, चांदनी चौक, इंस्टाग्राम पेज पर कूटूर लुक दिनों में कॉपी हो जाते हैं। साब्यसाची, मनीष मल्होत्रा, अनीता डोंगरे, सभी को दिल्ली हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर मिले -आईपी कानून मौजूद हैं पर फैशन की रफ्तार से काफी धीमे हैं।
Doctors are prescribing fishing, gardening, and social service alongside medication; these can improve mental health.

Hindi News Happylife Doctors Are Prescribing Fishing, Gardening, And Social Service Alongside Medication; These Can Improve Mental Health. लंदन / वॉशिंगटन7 घंटे पहले कॉपी लिंक फिश एंड चैट सेशन में बुजुर्ग। ब्रिटेन के कैंट में रहने वाले स्टीफन (58) की पत्नी को हार्ट अटैक आया। इसके बाद वे मानसिक संकट में घिर गए। स्टीफन बताते हैं, ‘एक समय ऐसा आया था जब मुझे अपनी जिंदगी समझ ही नहीं आ रही थी। 50 साल के ली भी उन्हीं की तरह विषम परिस्थितियों से जूझ रहे थे। अवसाद हावी होने लगा था… दोनों को फैमिली डॉक्टर्स ने मछली पकड़ना, आर्ट ग्रुप, वॉकिंग ग्रुप और वॉलंटियरिंग से जुड़ने को कहा। यह सोशल प्रिस्क्राइविंग है… इलाज का पारंपरिक तरीका। दोनों ने फिशिंग चुनी। वे गैर लाभकारी संस्था ‘कास्ट ए थॉट’ से जुड़ गए। यहां उन्हें बचपन की पसंदीदा गतिविधि के साथ समान अनुभव वाले लोग भी मिले। स्टीफन कहते हैं, ‘यहां आकर लोगों से मिलना और पानी के किनारे बैठना जादू जैसा रहा। यह थेरेपिस्ट के सामने सूट पहनकर बैठने से कहीं आसान और असरदार है। इस सेशन का नाम ‘फिश एंड चैट’ रखा गया। दो घंटे फिशिंग होती है। फिर कैफे में कॉफी। दोस्त बनते हैं। कोई तय स्क्रिप्ट नहीं होती। दुनियाभर में हेल्थ केयर सिस्टम दबाव में हैं। कोविड के बाद वेटिंग लिस्ट लंबी हुई, स्टाफ की कमी बढ़ी। ऐसे में डॉक्टर ‘सोशल प्रिस्क्राइविंग’ की ओर लौट रहे हैं। इसमें डॉक्टर मरीज की बीमारी के सामाजिक और मानसिक कारणों को समझते हुए उन्हें ऐसी गतिविधियों से जोड़ते हैं जो उनके अकेलेपन को दूर करें और मानसिक सेहत में सुधार लाएं। ब्रिटेन और नीदरलैंड्स में इसकी सफलता के बाद अमेरिका में पायलट शुरू हुए हैं। ‘सोशल प्रिस्क्राइविंग यूएसए’ संगठन 2035 तक अमेरिकियों को कला, संगीत व प्रकृति आधारित उपचार दिलाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। रोमानिया व डेनमार्क में नए प्रोजेक्ट शुरू हुए। मकसद है पोस्टनेटल डिप्रेशन घटाना। नई मांओं को गाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। नीदरलैंड्स में साइक्लिंग क्लब, म्यूजियम विजिट, ताई ची जैसी एक्टिविटी पर सब्सिडी मिलती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2030 तक दुनिया में करीब 1.1 करोड़ स्वास्थ्य कर्मियों की कमी होगी। ऐसे में बीमारियों को रोकने के लिए ‘रोकथाम और सामाजिक जुड़ाव’ ही सबसे सस्ता व प्रभावी रास्ता दिख रहा है। सोशल प्रिस्क्राइविंग यूएसए के कोफाउंडर एलन सीगल कहते हैं, ‘डिप्रेशन में उनके पास थेरेपी और दवा के बाद विकल्प जल्दी खत्म हो जाते हैं। कई लोग साइड इफेक्ट झेलते हैं। कई थेरेपिस्ट के पास नहीं जाना चाहते। उनके मुताबिक इलाज का बड़ा हिस्सा क्लिनिक के बाहर की जिंदगी में होता है। ऐसे में सोशल प्रिस्क्राइविंग बेहतर विकल्प बन सकता है।’ एक्टिविटी कोच डेव एलस्टोन कहते हैं, ‘सोशल प्रिस्क्राइविंग उसी दौर की याद दिलाता है जब डॉक्टर घर-घर जाकर मरीजों की बातें सुना करते थे। डेव कहते हैं, ‘चाहे ताजी हवा से काम हो या गप्पे मारने से, सच तो यह है कि यह काम करता है… हमने लोगों को ठीक होते देखा है।’ दवाइयों की जरूरत कम पड़ रही, डिप्रेशन भी आध आधाः एक्सपर्ट यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की प्रोफेसर डेजी फैनकोर्ट के शोध के अनुसार, जो लोग महीने में कम से कम एक बार संगीत बजाने या बुनाई जैसी गतिविधियां करते हैं, उनमें डिप्रेशन का खतरा करीब आधा हो जाता है। ग्लोबल मेटा-एनालिसिस में पाया गया कि सर्जरी के बाद संगीत सुनने वाले मरीजों को कम दर्द हुआ और उन्हें दवाइयों की जरूरत भी कम पड़ी। यही वजह है कि डॉक्टर्स इसे महत्व दे रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
भगवान परशुराम प्राकट्योत्सव की तैयारियों को लेकर बैठक आज

सागर | भगवान परशुराम प्राकट्योत्सव को लेकर ब्राह्मण समाज के विभिन्न संगठनों की एक बृहद बैठक बुधवार को सिविल लाइन स्थित होटल आशीर्वाद में शाम 4 बजे से आयोजित की गई है। जिसमें 19 अप्रैल को पूर्व संध्या पर निकलने वाली वाहन रैली एवं 20 अप्रैल को प्राकट्य दिवस पर होने वाले पूजन अभिषेक एवं शोभायात्रा की रूपरेखा तय की जाएगी। सभी विप्रजनों से बैठक में शामिल होने की अपील की गई है। उक्त जानकारी पं. भरत तिवारी एवं पं. शिवप्रसाद तिवारी ने दी।









