Driverless monorail launched in Egypt at a cost of Rs 26,800 crore

द इकोनॉमिस्ट. काहिरा7 मिनट पहले कॉपी लिंक 26,800 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का 56.5 किमी लंबा पहला रूट काहिरा इंटरनेशनल स्टेडियम से न्यू एडमिनिस्ट्रेटिव कैपिटल के बीच शुरू हुआ है।- फाइल फोटो मिस्र की राजधानी काहिरा में ट्रैफिक जाम से राहत देने के लिए रेगिस्तान के बीच ड्राइवरलेस मोनोरेल सेवा शुरू हुई है। यह अफ्रीका की पहली इलेक्ट्रिक हाई-टेक मोनोरेल है। 26,800 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का 56.5 किमी लंबा पहला रूट काहिरा इंटरनेशनल स्टेडियम से न्यू एडमिनिस्ट्रेटिव कैपिटल के बीच शुरू हुआ है। जो काहिरा के नस्र सिटी को नई प्रशासनिक राजधानी से जोड़ती है। प्रोजेक्ट पूरा होने पर यह 100 किमी लंबा हो जाएगा और चीन के 98.5 किमी लंबे चोंगकिंग नेटवर्क को पछाड़कर दुनिया का सबसे लंबा मोनोरेल नेटवर्क बनेगा। यह ट्रेन ब्रेकिंग एनर्जी का 99% हिस्सा दोबारा इस्तेमाल करती है। 22 स्टेशनों को जोड़ने वाली चालक रहित मोनोरेल का उद्देश्य भीड़भाड़ को कम करना और शहरी कनेक्टिविटी में सुधार करना है। यह अफ्रीका की सबसे लंबी एकल मोनोरेल लाइन है और दूसरी लाइन के साथ मिलकर यह महाद्वीप के सबसे बड़े मोनोरेल नेटवर्क का हिस्सा बन जाती है। पर्यावरण के अनुकूल यह स्वचालित प्रणाली पारंपरिक इलेक्ट्रिक रेल की तुलना में ऊर्जा की खपत को 30% तक कम कर देती है। मुख्य विशेषताएं और मार्ग यह मोनोरेल परियोजना मिस्र की नई राजधानी को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन से जोड़ने की एक बड़ी पहल है। मार्ग की लंबाई और स्थान – ईस्ट नाइल मोनोरेल लाइन कुल 56.5 किलोमीटर लंबी है। यह पूर्वी काहिरा के नस्र सिटी से शुरू होकर मिस्र की ‘न्यू एडमिनिस्ट्रेटिव कैपिटल’ (नई प्रशासनिक राजधानी) तक जाती है। स्टेशन और समय – इस मार्ग पर कुल 22 स्टेशन बनाए गए हैं। यह पूरी तरह से ऑटोमेटेड (चालक रहित) है और पारंपरिक इलेक्ट्रिक ट्रेनों की तुलना में 30% तक कम ऊर्जा की खपत करती है। टिकट और क्षमता यात्रियों के सफर को आसान बनाने के लिए किराये और जोन को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। चार ज़ोन प्रणाली – यात्रा के स्टेशनों की संख्या के आधार पर मूल्य संरचना बनाई गई है (अधिकतम लाइन का किराया 80 मिस्र पाउंड तक है)। परिवहन क्षमता – यह प्रणाली काहिरा के भारी ट्रैफिक को कम करने और यात्रियों को सुरक्षित व तेज़ विकल्प प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Driverless monorail launched in Egypt at a cost of Rs 26,800 crore

द इकोनॉमिस्ट. काहिरा30 मिनट पहले कॉपी लिंक 26,800 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का 56.5 किमी लंबा पहला रूट काहिरा इंटरनेशनल स्टेडियम से न्यू एडमिनिस्ट्रेटिव कैपिटल के बीच शुरू हुआ है।- फाइल फोटो मिस्र की राजधानी काहिरा में ट्रैफिक जाम से राहत देने के लिए रेगिस्तान के बीच ड्राइवरलेस मोनोरेल सेवा शुरू हुई है। यह अफ्रीका की पहली इलेक्ट्रिक हाई-टेक मोनोरेल है। 26,800 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का 56.5 किमी लंबा पहला रूट काहिरा इंटरनेशनल स्टेडियम से न्यू एडमिनिस्ट्रेटिव कैपिटल के बीच शुरू हुआ है। जो काहिरा के नस्र सिटी को नई प्रशासनिक राजधानी से जोड़ती है। प्रोजेक्ट पूरा होने पर यह 100 किमी लंबा हो जाएगा और चीन के 98.5 किमी लंबे चोंगकिंग नेटवर्क को पछाड़कर दुनिया का सबसे लंबा मोनोरेल नेटवर्क बनेगा। यह ट्रेन ब्रेकिंग एनर्जी का 99% हिस्सा दोबारा इस्तेमाल करती है। 22 स्टेशनों को जोड़ने वाली चालक रहित मोनोरेल का उद्देश्य भीड़भाड़ को कम करना और शहरी कनेक्टिविटी में सुधार करना है। यह अफ्रीका की सबसे लंबी एकल मोनोरेल लाइन है और दूसरी लाइन के साथ मिलकर यह महाद्वीप के सबसे बड़े मोनोरेल नेटवर्क का हिस्सा बन जाती है। पर्यावरण के अनुकूल यह स्वचालित प्रणाली पारंपरिक इलेक्ट्रिक रेल की तुलना में ऊर्जा की खपत को 30% तक कम कर देती है। मुख्य विशेषताएं और मार्ग यह मोनोरेल परियोजना मिस्र की नई राजधानी को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन से जोड़ने की एक बड़ी पहल है। मार्ग की लंबाई और स्थान – ईस्ट नाइल मोनोरेल लाइन कुल 56.5 किलोमीटर लंबी है। यह पूर्वी काहिरा के नस्र सिटी से शुरू होकर मिस्र की ‘न्यू एडमिनिस्ट्रेटिव कैपिटल’ (नई प्रशासनिक राजधानी) तक जाती है। स्टेशन और समय – इस मार्ग पर कुल 22 स्टेशन बनाए गए हैं। यह पूरी तरह से ऑटोमेटेड (चालक रहित) है और पारंपरिक इलेक्ट्रिक ट्रेनों की तुलना में 30% तक कम ऊर्जा की खपत करती है। टिकट और क्षमता यात्रियों के सफर को आसान बनाने के लिए किराये और जोन को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। चार ज़ोन प्रणाली – यात्रा के स्टेशनों की संख्या के आधार पर मूल्य संरचना बनाई गई है (अधिकतम लाइन का किराया 80 मिस्र पाउंड तक है)। परिवहन क्षमता – यह प्रणाली काहिरा के भारी ट्रैफिक को कम करने और यात्रियों को सुरक्षित व तेज़ विकल्प प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
8 days away; how much has the game changed since 2022?

Hindi News Sports FIFA 2022: 8 Days Away; How Much Has The Game Changed Since 2022? न्यूयॉर्क14 मिनट पहले कॉपी लिंक 2022 वर्ल्ड कप के बाद मेसी यूरोप छोड़कर अमेरिका चले गए। अब अर्जेंटीना की कप्तानी करेंगे।- फाइल फोटो साल 2022 में कतर की धरती पर लियोनेल मेसी का चमचमाती वर्ल्ड कप ट्रॉफी उठाना हर फुटबॉल प्रेमी के जहन में अब भी ताजा है। लेकिन उस ऐतिहासिक पल के बाद से अब तक फुटबॉल की दुनिया में बहुत कुछ बदल चुका है। कई बड़े खिलाड़ियों के क्लब बदले, नए सूरमाओं का उदय हुआ और दिग्गजों ने नए कीर्तिमान रचे। अब जब 11 जून 2026 से अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की मेजबानी में फीफा वर्ल्ड कप शुरू होने जा रहा है, तो कई फैंस 4 साल बाद फिर से इस रोमांच में गोता लगाने लौटेंगे। आइए जानते हैं इन चार सालों में फुटबॉल की दुनिया में क्या कुछ बदला मेसी की तरह ही यमाल भी डेब्यू वर्ल्ड कप में स्पेन के लिए 19 नंबर जर्सी पहनेंगे।- फाइल फोटो मेसी – अमेरिका पहुंचे, जीते कई खिताब 2022 वर्ल्ड कप के बाद मेसी यूरोप छोड़कर अमेरिका चले गए। लगा था कि शायद वे धीमे पड़ रहे हैं। लेकिन तब से वे इंटर मियामी के लिए 104 मैचों में 90 गोल कर चुके हैं। उन्होंने क्लब को तीन बड़े खिताब; लीग कप (2023), सपोर्टर शील्ड (2024) और एमएलस कप (2025) जिताए हैं। अब अर्जेंटीना की कप्तानी करेंगे। यमाल – मेसी के उत्तराधिकारी माने जा रहे मेसी यूरोप छोड़कर गए तो बार्सिलोना में एक नए सितारे का उदय हुआ। अप्रैल 2023 में 15 साल के लामिने यमाल ने डेब्यू किया। अब 18 साल की उम्र तक वे तीन ला लीगा और यूरो कप जीत चुके हैं। उन्हें वर्ल्ड फुटबॉल मेसी का उत्तराधिकारी मान रहा है। मेसी की तरह ही यमाल भी डेब्यू वर्ल्ड कप में स्पेन के लिए 19 नंबर जर्सी पहनेंगे। रोनाल्डो – 1000 गोल के आंकड़े के करीब दिसंबर 2022 में वर्ल्ड कप खत्म होने के दो हफ्ते बाद ही रोनाल्डो सऊदी के क्लब अल-नासर में शामिल हो गए। अब 41 की उम्र में वे पुर्तगाल के लिए छठा वर्ल्ड कप खेलेंगे। बीते चार साल में वे अपने क्लब को सिर्फ इसी सीजन सऊदी लीग खिताब जिता पाए। हालांकि, 973 गोल के साथ हजार के जादुई आंकड़े के करीब हैं। नेमार – क्लब, इंटरनेशनल में सिर्फ 63 मैच एक ओर जहां मेसी-रोनाल्डो गोल की बारिश कर रहे थे, वहीं ब्राजील के सुपर स्टार नेमार चोटों से जूझते दिखे। वर्ल्ड कप 2022 के बाद उन्होंने क्लब और इंटरनेशनल मिलाकर सिर्फ 63 मैच खेले हैं। अब भी वे पिंडली की चोट से उबर रहे हैं, लेकिन उन्हें ब्राजील की 26-सदस्यीय टीम में चुना गया है। हैरी केन – बेस्ट फॉर्म से खिताब पर नजर बीते चार सालों में इंग्लैंड के हैरी केन दुनिया के सर्वश्रेष्ठ स्ट्राइकर बनकर उभरे हैं। 2023 के बाद से वे 140 गोल दाग चुके हैं। हैरी केन 2023 की गर्मियों में बायर्न म्यूनिख चले गए। वहां उन्होंने 146 गोल दागे हैं, जिनमें से 58 सिर्फ 2025-26 में आए हैं। 60 साल से कोई बड़ा इंटरनेशनल खिताब नहीं जीती इंग्लिश टीम उन पर काफी निर्भर करेगी। इंटरनेशनल टीमों का क्लब कोचों पर भरोसा 2026 के वर्ल्ड कप से पहले कई बड़ी इंटरनेशनल टीमों ने सफल क्लबों के कोचों को टीम से जोड़ा है। ब्राजील की टीम 2002 के बाद पहला वर्ल्ड कप जीतने के लिए कार्लो एंसेलोटी के नेतृत्व में उतरेगी, जबकि इंग्लैंड के पास थॉमस टुचेल और जर्मनी के पास जूलियन नागेल्समान जैसे नाम हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
फीफा में दम दिखाएंगे भारतवंशी तहसीन:कतर की ओर से खेलेंगे मलयाली तहसीन मोहम्मद; फीफा के इतिहास में दूसरे भारतीय प्लेयर

इस फीफा विश्व कप में भारत के लिए गर्व का क्षण आने वाला है। इतिहास में दूसरी बार ऐसा होने जा रहा है, जब भारतीय मूल का कोई खिलाड़ी विश्व कप के मैदान पर फुटबॉल खेलता नजर आएगा। यह इतिहास दोहराने जा रहे हैं 19 वर्षीय भारतवंशी तहसीन मोहम्मद जमशेद, जो कतर की ओर से मैदान पर उतरेंगे। इससे पहले 2006 के वर्ल्ड कप में आंध्र प्रदेश मूल के विकास धोरासू ने फ्रांस की टीम से खेलकर यह उपलब्धि हासिल की थी। तहसीन को फुटबॉल से लगाव कैसे हुआ और वे संघर्ष करते हुए शीर्ष तक कैसे पहुंचे, पढ़िए… तहसीन की फुटबॉल के प्रति दीवानगी कोई इत्तेफाक नहीं थी, बल्कि यह उन्हें विरासत में मिली थी। उनके पिता जमशेद केरल की कालीकट यूनिवर्सिटी के बेहतरीन फुटबॉलर थे, वे बड़े स्तर पर देश के लिए खेलना चाहते थे। लेकिन आर्थिक परिस्थितियों और भविष्य की चिंताओं के कारण उन्हें कतर में साधारण अकाउंटेंट की नौकरी करनी पड़ी। 2006 में कतर में तहसीन का जन्म हुआ तो पिता ने अपने अधूरे सपने को बेटे की आंखों में देखा। पढ़ाई के सख्त माहौल के बीच खेल के लिए समय निकालना बेहद मुश्किल था। पर, तहसीन ने ठान लिया था। जब बाकी बच्चे स्कूल की छुट्टियों में आराम करते थे, तब तहसीन अल सुबह ही ग्राउंड पर पहुंच जाते थे। वे चिलचिलाती धूप में भी दिनभर प्रैक्टिस करते थे। रात को पढ़ने बैठते थे। पिता द्वारा सिखाई गई फुटबॉल की बारीकियां और कड़े अनुशासन की बदौलत वे सबसे अलग बन पाए। दुनिया की सबसे आधुनिक व कठिन अकादमियों में शामिल कतर की एस्पायर फुटबॉल अकादमी में चुनिंदा खिलाड़ियों को ही एंट्री मिलती है। भारतीय मूल के लड़के के लिए स्थानीयव अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के बीच जगह बनाना संघर्ष था। शुरुआती दिनों में भाषा, संस्कृति और कठोर फिजिकल टेस्ट तहसीन के लिए चुनौती बने। कई साथी खिलाड़ियों का मनोबल टूट गया, पर तहसीन ने अपनी रफ्तार व ड्रिबलिंग को इतना निखारा कि स्पेनिश कोच जुलेन लोपेटेगुई भी प्रतिभा के कायल हो गए। उन्होंने कतर के दिग्गज खिलाड़ी सेबेस्टियन सोरिया को ड्रॉप कर तहसीन पर भरोसा जताया। यही तहसीन के संघर्ष की सबसे बड़ी जीत थी। तहसीन ने सीनियर कॅरियर की शुरुआत कतर स्टार्स लीग में अल दुहैल क्लब से की। वे कतर की अंडर-16 व अंडर-17 टीमों का हिस्सा भी रहे। अल दुहैल के लिए उनके प्रदर्शन ने कॅरियर को ऊंचाई दी और 19 साल में वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के पेशेवर खिलाड़ी बन गए। स्पेनिश फुटबॉल विश्लेषक और पूर्व प्लेयर अल्फोंसो पेरेज कहते हैं, तहसीन को मैदान पर देखना विजुअल ट्रीट है। लेफ्ट-विंगर के तौर पर उनके पास जो ‘रॉ-पेस’ (अंधाधुंध रफ्तार) है, वह उन्हें खतरनाक बनाती है। वे इसी तरह सीखते रहे, तो जल्द हम उन्हें बड़े यूरोपीय क्लब की जर्सी में देखेंगे।’ इन तीन फुटबॉलर्स का भी इंडिया कनेक्शन सरप्रीत सिंह (न्यूजीलैंड), निशान वेलुपिल्ले (ऑस्ट्रेलिया) और सैमुअल मुतुसामी (डीआर कांगो) भी वर्ल्ड कप में खेल सकते हैं। सरप्रीत पंजाब मूल के और बाकी दोनों का जुड़ाव तमिलनाडु से है।
5,000 Indian restaurants on the verge of closure

द इकोनॉमिस्ट.टोक्यो5 मिनट पहले कॉपी लिंक पूर्वी टोक्यो का ‘हिमालयन कारवां’ रेस्टोरेंट पिछले दो दशकों से चल रहा है। कम कीमत में बेहतरीन स्वाद मिलने से दोपहर में ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ती है, जो अब बड़े संकट में है।- फाइल फोटो जापान सरकार विदेशी प्रवासियों को लेकर सख्त हो गई है। इस कारण वहां चल रहे नेपाली मालिकाना हक वाले हजारों भारतीय रेस्टोरेंट्स पर बंद होने का खतरा मंडरा गया है। प्रशासन ने रेस्टोरेंट मालिकों के लिए ‘बिजनेस मैनेजमेंट’ वीसा नियम अचानक सख्त कर दिए हैं। दरअसल सरकार को संदेह है कि अमीर चीनी निवेशक इस परमिट का गलत इस्तेमाल करने के लिए फर्जी कंपनियां बना रहे हैं। इसे रोकने के लिए न्यूनतम पूंजी की शर्त 50 लाख येन (करीब 29.82 लाख रुपए) से बढ़ाकर सीधे 3 करोड़ येन (करीब 1.78 करोड़ रुपए) कर दी गई है। साथ ही हर रेस्टोरेंट में कम से कम एक पूर्णकालिक जापानी नागरिक या स्थायी निवासी को नौकरी पर रखना अनिवार्य कर दिया है। इस बदलाव से आवेदनों में 96% की भारी गिरावट आई है। पुराने संचालकों को ये शर्तें पूरी करने के लिए सिर्फ तीन साल की मोहलत दी गई है। जानकारों के मुताबिक नियमों में इस बदलाव से जापान में व्यापार करने वाले छोटे विदेशी उद्यमियों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। आंतरिक मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक जापान की 9% से भी कम स्थानीय कंपनियों के पास 3 करोड़ येन की पूंजी है। ऐसे में छोटे स्तर पर चलने वाले भारतीय करी हाउस के लिए इतनी बड़ी रकम का इंतजाम कर पाना बिल्कुल नामुमकिन साबित हो रहा है। रेस्टोरेंट मालिक 32 वर्षीय अंजू खत्री के मुताबिक जब बड़ी कंपनियों को ही स्थानीय कर्मचारी नहीं मिल पा रहे, तो हम जैसे छोटे विदेशी प्रवासियों को वे कैसे मिलेंगे। पूर्वी टोक्यो की शांत सड़क पर ‘हिमालयन कारवां’ रेस्टोरेंट पिछले दो दशकों से चल रहा है। इसके नेपाली मालिक संजय साहनी साल 2006 में पहली बार बतौर शेफ वहां आए थे। उनके लिए यहां आने वाले नियमित ग्राहक अब एक बड़े परिवार जैसे बन चुके हैं। इस रेस्टोरेंट का 850 येन का करी-नान लंच सेट कर्मचारियों, आम पाठकों और बुजुर्गों में काफी लोकप्रिय है। कम कीमत में बेहतरीन स्वाद मिलने से दोपहर में ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ती है, जो अब बड़े संकट में है। विदेशी रसोइया और प्रवासी लोग टोक्यो के खानपान को सांस्कृतिक रूप देने के साथ ही सस्ते भोजन के विकल्प देते हैं। अगर इस फैसले से भारतीय, थाई और वियतनामी रेस्टोरेंट बंद हो गए, तो स्थानीय कर्मचारियों के दोपहर के भोजन के सबसे पसंदीदा विकल्प हमेशा के लिए छिन जाएंगे। जापान में विदेशी नागरिक सिर्फ 3%, पर भारतीय रेस्टोरेंट मैकडॉनल्ड्स से भी ज्यादा जापान में सिर्फ 59 हजार भारतीय रहते हैं, लेकिन वहां करीब 5,000 भारतीय रेस्टोरेंट मौजूद हैं। यह वहां चल रहे दुनिया के सबसे बड़े फास्ट फूड ब्रांड मैकडॉनल्ड्स के आउटलेट की कुल संख्या से भी ज्यादा है। छोटे निवेशकों के दम पर ही यह कारोबार फैला है। जापान की आबादी में विदेशी नागरिकों का हिस्सा सिर्फ 3% है। यह ओईसीडी देशों के 15% औसत से बेहद कम है। वहां चल रहे ज्यादातर भारतीय रेस्टोरेंट्स के मालिक और स्टाफ नेपाली प्रवासी हैं, जिनकी कुल संख्या वहां अभी करीब 3 लाख है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
डिस्काउंट की बारिश; मंदी से लड़ रहे फैशन ब्रांड्स:बिक्री 30% घटी तो जुलाई की सेल जून में, फैशन प्रोडक्ट्स पर 40% तक छूट

फैशन रिटेलर्स ने इस साल बिक्री बढ़ाने के लिए समय से पहले ही बड़े डिस्काउंट का सहारा लेना शुरू कर दिया है। कई कंपनियों और रिटेलर्स ने मिड-सीजन सेल लॉन्च कर दी है। आम तौर पर ऐसी सेल जुलाई में शुरू होती है। बढ़ती महंगाई, वैश्विक अनिश्चितताओं और ग्राहकों की सतर्क खरीदारी के बीच स्टॉक खाली करना और कमजोर मांग से निपटना इस रणनीति का लक्ष्य है। इंडस्ट्री डेटा के मुताबिक, बीते दो महीनों में फैशन सेक्टर की बिक्री करीब 30% कम हो गई है। पेट्रोल-डीजल, सीएनजी, एलपीजी और रोजमर्रा की जरूरतों पर बढ़ते खर्च के चलते ज्यादातर उपभोक्ता कपड़े और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स पर खर्च घटाने लगे हैं। यह घरेलू बजट संतुलित रखने के प्रयास का हिस्सा है। इसे देखते हुए बिक्री बढ़ाने के लिए आधा दर्जन ब्रांड्स और मिंत्रा, नायका फैशन, फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म चुनिंदा प्रोडक्ट्स पर 40% तक छूट दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रिटेलर्स अब पारंपरिक ‘एंड-ऑफ-सीजन सेल’ का इंतजार करने के बजाय बीच सीजन में ही इन्वेंट्री निकालने की रणनीति अपना रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि उपभोक्ता अब खर्च करने से पहले कीमत और वैल्यू को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं। चुनौती – गैर-जरूरी खर्च में अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे आम भारतीय – पिछले 2 महीनों में फैशन प्रोडक्ट्स की बिक्री करीब 30% घटी – भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू खर्च बढ़ने से लोग चिंतित – बिजनेस के मामले में स्प्रिंग-समर सीजन खासा कमजोर रहा – कंज्यूमर बड़े गैर-जरूरी खर्च में अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे 30% पर आ गई इस साल मार्च में गैर-जरूरी चीजें खरीदने की इच्छा, पहले ये 70% से ऊपर थी। रणनीति – ग्राहक स्टोर तक आएं, ऐसी कोशिश ब्लैंकेट मार्कडाउन नहीं- सिर्फ चुनिंदा स्टॉक-कीपिंग यूनिट्स पर डिस्काउंट दे रहीं कंपनियां। बंडलिंग ऑफ- 1+1, 1+2 जैसे ऑफर्स की मदद से एक खरीदारी पर ज्यादा प्रोडक्ट बेचने की चल रही कोशिश। इसमें एक प्रोडक्ट की खरीदारी पर एक या दो प्रोक्ट्स फ्री देने की पेशकश की जाती है। फुटफॉल बढ़ाना- आकर्षक ऑफर के जरिए ग्राहकों को स्टोर तक लाकर त्योहारी सीजन से पहले इन्वेंटरी खाली करना। मार्जिन सुरक्षा- दाम में गहरी छूट की जगह टारगेटेड डिस्काउंट, ताकि मार्जिन बना रहे। ग्रोथ: चार साल में 52% बढ़ा भारतीय फैशन/अपैरल बाजार, 2025 में मार्केट साइज 11 लाख करोड़ पार वर्ष – मार्केट साइज विश्लेषण 2021 – 7.5 कोविड बाद रिकवरी; बिक्री 45% बढ़ी 2022 – 8.5 फिजिकल स्टोर खुले; 15-20% ग्रोथ 2023 – 9.5 बिक्री अनुमान के अनुरूप 2024 – 10 बिक्री अनुमान से ज्यादा 2025 – 11.4 14 फीसदी की तेज ग्रोथ (नोट: आंकड़े लाख करोड़ रुपए में, स्रोत: स्टैटिस्टा, वजीर एडवाइजर्स) ‘एंड-ऑफ-सीजन सेल’ भी जल्द शुरू होने के आसार पहले: जुलाई में शुरू होती थी और 15 अगस्त तक चलती थी अब: जून के शुरुआती हफ्ते में शुरू हो गई, ताकि बिक्री बढ़े कलेक्शन: अगस्त की जगह मिड-जुलाई से ही आने लगेगा कंज्यूमर मूड: डेलॉय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मार्च के दौरान भारत में बड़ी और गैर-जरूरी शॉपिंग की इच्छा घटकर 65% पर आ आई, जो पहले 70% थी। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भारतीय उपभोक्ता कैलिब्रेटेड कंजम्पशन के दौर में हैं। यानी ये आकांक्षा और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में हैं।’
‘वेलकम टू द जंगल' ट्रेलर 11 जून को होगा लॉन्च:विंदु दारा सिंह बोले- मजनू, उदय नहीं लेकिन कई नए सरप्राइज

मल्टीस्टारर फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ से अक्षय कुमार और दिशा पाटनी के साथ ‘ऊंचा लंबा कद फॉरएवर’ गाना रिलीज हो गया है। इस फिल्म में विंदु दारा सिंह भी अहम रोल में नजर आएंगे। उन्होंने एक खास बातचीत में इस फिल्म को लेकर रोचक जानकारियां साझा करते हुए बताया कि ‘यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा का महाकुंभ है। पिछले कई दशकों में शायद ही कोई ऐसी फिल्म बनी हो, जिसमें इतने बड़े कलाकार एक साथ नजर आए हों। सेट पर कई बार उन्हें खुद यकीन नहीं होता था कि इतने सारे नामी कलाकार एक ही प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। मेरा मानना है कि फिल्म का स्केल, कलाकारों की संख्या और इसकी प्रस्तुति दर्शकों को चौंकाने वाली है।’ कई बड़े एक्टर्स को एक साथ लेकर फिल्म बनाना चैलेंजिंग है विंदु ने फिल्म की तुलना पुराने दौर की मल्टीस्टारर फिल्मों से करते हुए कहा कि ‘मुझे राजकुमार कोहली की ‘जानी दुश्मन’ याद आती है, जिसमें उस समय के कई बड़े सितारे एक साथ नजर आए थे। हालांकि आज के दौर में एक फिल्म के लिए इतने बड़े कलाकारों को एक साथ लाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। अहमद ने संभाला मुश्किल काम इतनी बड़ी स्टारकास्ट को एक साथ मैनेज करना आसान नहीं था। विंदु बताते हैं कि ‘शूटिंग शुरू होने से पहले कलाकारों के बीच भी यह चर्चा होती थी कि निर्देशक अहमद खान इतने बड़े सेटअप को कैसे संभालेंगे। शुरुआत में सभी के मन में थोड़ी आशंका थी, लेकिन जैसे-जैसे शूटिंग आगे बढ़ी, पूरी टीम को अहमद खान की कार्यशैली पर भरोसा हो गया।’ पिछले पार्ट्स से अलग है कहानी फिल्म की कहानी को लेकर विंदु ने साफ किया कि ‘दर्शकों को ‘वेलकम’ और ‘वेलकम बैक’ की कहानी दिमाग से निकालकर थिएटर जाना होगा। यह फ्रेंचाइज का तीसरा भाग जरूर है, लेकिन इसकी कहानी पूरी तरह नई है। उन्होंने कहा कि फिल्म का डीएनए वही पुराना ‘वेलकम’ वाला रहेगा, लेकिन प्रस्तुति और पैमाना पहले से कहीं ज्यादा बड़ा है। अक्षय पूरी तरह फ्रंट फुट पर नजर आएंगे। इस बार एक्शन और कॉमेडी दोनों है।’ ट्रेलर में दिखेगा ‘प्रत्येक फ्रेम का पागलपन’, 11 जून को है लॉन्च फिल्म का ट्रेलर 11 जून को यशराज स्टूडियो में लॉन्च किया जाएगा। विंदु का कहना है कि ‘ट्रेलर दर्शकों को फिल्म के विशाल स्केल की पहली झलक देगा। शूटिंग का एक दिलचस्प किस्सा है कि कई बार एक ही फ्रेम में इतने कलाकार मौजूद होते थे कि उन्हें लगता था कैमरे में जगह ही नहीं बचेगी। ट्रेलर सिर्फ एक झलक होगी, क्योंकि फिल्म में अब भी कई बड़े सरप्राइज और कुछ ऐसे कलाकार हैं, जिनकी मौजूदगी को मेकर्स ने जानबूझकर छिपाकर रखा है। ये सरप्राइज सीधे सिनेमाघरों में सामने आएंगे।’ स्क्रिप्ट में हुए थे कई बदलाव, एक्टर्स की डेट्स भी चुनौती बनी विंदु ने कहा कि ‘हर फिल्म की अपनी जर्नी होती है और हर किरदार हर कहानी में फिट नहीं बैठता। स्क्रिप्ट में समय-समय पर बदलाव हुए और कुछ कलाकारों की उपलब्धता भी चुनौती बनी। हालांकि मेकर्स को भरोसा है कि दर्शकों को थिएटर में अनिल कपूर और नाना पाटेकर की कमी महसूस नहीं होगी। फिल्म में मौजूद सभी पुराने कलाकारों और नए किरदारों की ऊर्जा इतनी जबरदस्त है कि दर्शक लगातार हंसते रहेंगे। इस फिल्म का संगीत बड़ा सरप्राइज होगा। जल्द ही कई और गाने भी रिलीज होंगे।’
‘वेलकम टू द जंगल' ट्रेलर 11 जून को होगा लॉन्च:विंदु दारा सिंह बोले- मजनू, उदय नहीं लेकिन फिल्म में कई नए सरप्राइज

मल्टीस्टारर फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ से अक्षय कुमार और दिशा पाटनी के साथ ‘ऊंचा लंबा कद फॉरएवर’ गाना रिलीज हो गया है। इस फिल्म में विंदु दारा सिंह भी अहम रोल में नजर आएंगे। उन्होंने एक खास बातचीत में इस फिल्म को लेकर रोचक जानकारियां साझा करते हुए बताया कि ‘यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा का महाकुंभ है। पिछले कई दशकों में शायद ही कोई ऐसी फिल्म बनी हो, जिसमें इतने बड़े कलाकार एक साथ नजर आए हों। सेट पर कई बार उन्हें खुद यकीन नहीं होता था कि इतने सारे नामी कलाकार एक ही प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। मेरा मानना है कि फिल्म का स्केल, कलाकारों की संख्या और इसकी प्रस्तुति दर्शकों को चौंकाने वाली है।’ कई बड़े एक्टर्स को एक साथ लेकर फिल्म बनाना चैलेंजिंग है विंदु ने फिल्म की तुलना पुराने दौर की मल्टीस्टारर फिल्मों से करते हुए कहा कि ‘मुझे राजकुमार कोहली की ‘जानी दुश्मन’ याद आती है, जिसमें उस समय के कई बड़े सितारे एक साथ नजर आए थे। हालांकि आज के दौर में एक फिल्म के लिए इतने बड़े कलाकारों को एक साथ लाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। अहमद ने संभाला मुश्किल काम इतनी बड़ी स्टारकास्ट को एक साथ मैनेज करना आसान नहीं था। विंदु बताते हैं कि ‘शूटिंग शुरू होने से पहले कलाकारों के बीच भी यह चर्चा होती थी कि निर्देशक अहमद खान इतने बड़े सेटअप को कैसे संभालेंगे। शुरुआत में सभी के मन में थोड़ी आशंका थी, लेकिन जैसे-जैसे शूटिंग आगे बढ़ी, पूरी टीम को अहमद खान की कार्यशैली पर भरोसा हो गया।’ पिछले पार्ट्स से अलग है कहानी फिल्म की कहानी को लेकर विंदु ने साफ किया कि ‘दर्शकों को ‘वेलकम’ और ‘वेलकम बैक’ की कहानी दिमाग से निकालकर थिएटर जाना होगा। यह फ्रेंचाइज का तीसरा भाग जरूर है, लेकिन इसकी कहानी पूरी तरह नई है। उन्होंने कहा कि फिल्म का डीएनए वही पुराना ‘वेलकम’ वाला रहेगा, लेकिन प्रस्तुति और पैमाना पहले से कहीं ज्यादा बड़ा है। अक्षय पूरी तरह फ्रंट फुट पर नजर आएंगे। इस बार एक्शन और कॉमेडी दोनों है।’ ट्रेलर में दिखेगा ‘प्रत्येक फ्रेम का पागलपन’, 11 जून को है लॉन्च फिल्म का ट्रेलर 11 जून को यशराज स्टूडियो में लॉन्च किया जाएगा। विंदु का कहना है कि ‘ट्रेलर दर्शकों को फिल्म के विशाल स्केल की पहली झलक देगा। शूटिंग का एक दिलचस्प किस्सा है कि कई बार एक ही फ्रेम में इतने कलाकार मौजूद होते थे कि उन्हें लगता था कैमरे में जगह ही नहीं बचेगी। ट्रेलर सिर्फ एक झलक होगी, क्योंकि फिल्म में अब भी कई बड़े सरप्राइज और कुछ ऐसे कलाकार हैं, जिनकी मौजूदगी को मेकर्स ने जानबूझकर छिपाकर रखा है। ये सरप्राइज सीधे सिनेमाघरों में सामने आएंगे।’ स्क्रिप्ट में हुए थे कई बदलाव, एक्टर्स की डेट्स भी चुनौती बनी विंदु ने कहा कि ‘हर फिल्म की अपनी जर्नी होती है और हर किरदार हर कहानी में फिट नहीं बैठता। स्क्रिप्ट में समय-समय पर बदलाव हुए और कुछ कलाकारों की उपलब्धता भी चुनौती बनी। हालांकि मेकर्स को भरोसा है कि दर्शकों को थिएटर में अनिल कपूर और नाना पाटेकर की कमी महसूस नहीं होगी। फिल्म में मौजूद सभी पुराने कलाकारों और नए किरदारों की ऊर्जा इतनी जबरदस्त है कि दर्शक लगातार हंसते रहेंगे। इस फिल्म का संगीत बड़ा सरप्राइज होगा। जल्द ही कई और गाने भी रिलीज होंगे।’
अमेरिका फर्स्ट की नीति आप्रवासियों का रहना कठिन बना रही:बच्चों की डे-केयर जैसी सेवाएं घटीं; स्वास्थ्य और वित्तीय सुविधाएं तक रोकी जा रहीं

अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर ट्रम्प प्रशासन लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। पिछले एक साल में ऐसे कई कदम उठाए गए हैं, जिनसे इमिग्रेंट्स यानी अप्रवासियों का अमेरिका में रहना और काम करना कठिन हो जाए। नौकरियों, स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय सुविधाओं, टैक्स लाभ और बच्चों की डे-केयर सेवाओं तक पहुंच सीमित करने जैसी नीतियों पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य उन सुविधाओं को कम करना है, जो लंबे समय से लोगों को अमेरिका की ओर आकर्षित करती रही हैं। ट्रम्प संसद को दरकिनार रखकर एक्जीक्यूटिव आदेशों के जरिये इमिग्रेशन नीति को नया रूप दे रहे हैं। इस साल की शुरुआत में प्रमुख शहरों में मिलिट्री के छापों और डिपोर्टेशन के खिलाफ तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद ट्रम्प प्रशासन अधिक क्रिएटिव और कम विवादित तरीकों पर अमल कर रहा है। इसके तहत इमिग्रेशन व्यवस्था में बदलाव के साथ हजारों लोगों को नौकरियों से निकालने और सरकारी सुविधाएं छीनने जैसे कदम उठाए गए हैं। ट्रम्प के इमिग्रेशन एजेंडे के प्रमुख रणनीतिकार स्टीफन मिलर का तर्क है कि बड़ी संख्या में आने वाले नए प्रवासी अमेरिका की पहचान, सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि के लिए चुनौती बन सकते हैं। एल सल्वाडोर की इमिग्रेंट रेक्वेल मोलिना के मामले से ट्रम्प के अभियान को समझा जा सकता है। मोलिना करीब 30 वर्षों से वैध सोशल सिक्योरिटी नंबर और काम की अनुमति के साथ बोस्टन के लोगान इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विमानों की सफाई का काम कर रही थीं। हाल ही में उन्हें और कई अन्य इमिग्रेंट कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया। प्रशासन ने फैसला किया है कि एयरपोर्ट के सुरक्षित क्षेत्रों में अब केवल अमेरिकी नागरिकों, ग्रीन कार्ड धारकों और स्थायी निवासियों को ही प्रवेश मिलेगा। इसी तरह के नियमों के कारण हजारों लोगों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं। अमेरिका में शरण लेने की प्रक्रिया भी कठिन बनाई जा रही है। अपने देशों से भागकर अमेरिका पहुंचने वाले कई शरणार्थियों को वर्क परमिट जारी करने पर रोक लगाई जा रही है। इससे उनके लिए आर्थिक रूपसे आत्मनिर्भर बनना मुश्किल हो सकता है। जापान में भी कई देशों के लोग प्रभावित जापान की सरकार भी ऐसे 47 हजार विदेशियों की जांच कर रही है जो देश में बिजनेस मैनेजर वीसा के तहत रहते हैं। सरकार ने बिजनेस वीसा आवेदकों के लिए पूंजी की सीमा 31 हजार डॉलर से बढ़ाकर एक लाख 88 हजार कर दी है। नए नियम से भारत, नेपाल, श्रीलंका, वियतनाम, थाइलैंड सहित अन्य देशों के लोग अधर में लटक गए हैं। ये जापान के शहरों और गांवों में करी, फ्राइड चावल,नूडल्स और अन्य व्यंजन परोसने वाले रेस्तरां चलाते हैं। सजा की धमकियों के बीच एक लाख से अधिक लोगों ने अमेरिका छोड़ा गिरफ्तारियों और सजा की धमकियों के साथ प्रशासन की रणनीति ने कई आप्रवासियों को भूमिगत होने पर मजबूर कर दिया है। उन्हें टैक्स जमा करने, डॉक्टरों के यहां जाने और यात्रा करने से रोका जाता है। अब तक स्थायी कानूनी दर्जे के बिना रहने वाले एक लाख 16 हजार से अधिक लोग स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ चुके हैं। इनमें सरकार के सेल्फ डिपोर्टेशन प्रोग्राम के तहत गए कुछ लोग भी शामिल हैं। कई लोग सरकार को बताए बगैर जा चुके हैं। पैरेंट के नागरिक न होने पर अमेरिका में जन्मे बच्चों को भी सुविधाएं नहीं मिलेंगी ट्रम्प की रणनीति से स्थायी निवासियों, शरणार्थियों और उनके परिवारों सहित कई वैध इमिग्रेंट्स भी प्रभावित हुए हैं। किसी पैैरेंट के नागरिक न होने की स्थिति में अमेरिका में जन्मे बच्चों को डे-केयर सुविधाएं लेने से रोकने के लिए नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं। ग्रीन कार्ड होल्डरों सहित सभी गैर नागरिकों के सरकारी लोन लेने पर प्रतिबंध है। कई इमिग्रेंट्स को ट्रक ड्राइविंग के लिए कॉमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिए गए हैं।
अमेरिका फर्स्ट की नीति आप्रवासियों का रहना कठिन बना रही:बच्चों की डे-केयर जैसी सेवाएं घटीं; स्वास्थ्य और वित्तीय सुविधाएं तक रोकी जा रहीं

अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर ट्रम्प प्रशासन लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। पिछले एक साल में ऐसे कई कदम उठाए गए हैं, जिनसे इमिग्रेंट्स यानी अप्रवासियों का अमेरिका में रहना और काम करना कठिन हो जाए। नौकरियों, स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय सुविधाओं, टैक्स लाभ और बच्चों की डे-केयर सेवाओं तक पहुंच सीमित करने जैसी नीतियों पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य उन सुविधाओं को कम करना है, जो लंबे समय से लोगों को अमेरिका की ओर आकर्षित करती रही हैं। ट्रम्प संसद को दरकिनार रखकर एक्जीक्यूटिव आदेशों के जरिये इमिग्रेशन नीति को नया रूप दे रहे हैं। इस साल की शुरुआत में प्रमुख शहरों में मिलिट्री के छापों और डिपोर्टेशन के खिलाफ तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद ट्रम्प प्रशासन अधिक क्रिएटिव और कम विवादित तरीकों पर अमल कर रहा है। इसके तहत इमिग्रेशन व्यवस्था में बदलाव के साथ हजारों लोगों को नौकरियों से निकालने और सरकारी सुविधाएं छीनने जैसे कदम उठाए गए हैं। ट्रम्प के इमिग्रेशन एजेंडे के प्रमुख रणनीतिकार स्टीफन मिलर का तर्क है कि बड़ी संख्या में आने वाले नए प्रवासी अमेरिका की पहचान, सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि के लिए चुनौती बन सकते हैं। एल सल्वाडोर की इमिग्रेंट रेक्वेल मोलिना के मामले से ट्रम्प के अभियान को समझा जा सकता है। मोलिना करीब 30 वर्षों से वैध सोशल सिक्योरिटी नंबर और काम की अनुमति के साथ बोस्टन के लोगान इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विमानों की सफाई का काम कर रही थीं। हाल ही में उन्हें और कई अन्य इमिग्रेंट कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया। प्रशासन ने फैसला किया है कि एयरपोर्ट के सुरक्षित क्षेत्रों में अब केवल अमेरिकी नागरिकों, ग्रीन कार्ड धारकों और स्थायी निवासियों को ही प्रवेश मिलेगा। इसी तरह के नियमों के कारण हजारों लोगों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं। अमेरिका में शरण लेने की प्रक्रिया भी कठिन बनाई जा रही है। अपने देशों से भागकर अमेरिका पहुंचने वाले कई शरणार्थियों को वर्क परमिट जारी करने पर रोक लगाई जा रही है। इससे उनके लिए आर्थिक रूपसे आत्मनिर्भर बनना मुश्किल हो सकता है। जापान में भी कई देशों के लोग प्रभावित जापान की सरकार भी ऐसे 47 हजार विदेशियों की जांच कर रही है जो देश में बिजनेस मैनेजर वीसा के तहत रहते हैं। सरकार ने बिजनेस वीसा आवेदकों के लिए पूंजी की सीमा 31 हजार डॉलर से बढ़ाकर एक लाख 88 हजार कर दी है। नए नियम से भारत, नेपाल, श्रीलंका, वियतनाम, थाइलैंड सहित अन्य देशों के लोग अधर में लटक गए हैं। ये जापान के शहरों और गांवों में करी, फ्राइड चावल,नूडल्स और अन्य व्यंजन परोसने वाले रेस्तरां चलाते हैं। सजा की धमकियों के बीच एक लाख से अधिक लोगों ने अमेरिका छोड़ा गिरफ्तारियों और सजा की धमकियों के साथ प्रशासन की रणनीति ने कई आप्रवासियों को भूमिगत होने पर मजबूर कर दिया है। उन्हें टैक्स जमा करने, डॉक्टरों के यहां जाने और यात्रा करने से रोका जाता है। अब तक स्थायी कानूनी दर्जे के बिना रहने वाले एक लाख 16 हजार से अधिक लोग स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ चुके हैं। इनमें सरकार के सेल्फ डिपोर्टेशन प्रोग्राम के तहत गए कुछ लोग भी शामिल हैं। कई लोग सरकार को बताए बगैर जा चुके हैं। पैरेंट के नागरिक न होने पर अमेरिका में जन्मे बच्चों को भी सुविधाएं नहीं मिलेंगी ट्रम्प की रणनीति से स्थायी निवासियों, शरणार्थियों और उनके परिवारों सहित कई वैध इमिग्रेंट्स भी प्रभावित हुए हैं। किसी पैैरेंट के नागरिक न होने की स्थिति में अमेरिका में जन्मे बच्चों को डे-केयर सुविधाएं लेने से रोकने के लिए नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं। ग्रीन कार्ड होल्डरों सहित सभी गैर नागरिकों के सरकारी लोन लेने पर प्रतिबंध है। कई इमिग्रेंट्स को ट्रक ड्राइविंग के लिए कॉमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिए गए हैं।









