Saturday, 06 Jun 2026 | 10:40 AM

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एक दिन में शूट हुआ अक्षय के साथ सॉन्ग:भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह से फिल्म के इंट्रो सॉन्ग को लेकर खास बातचीत

एक दिन में शूट हुआ अक्षय के साथ सॉन्ग:भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह से फिल्म के इंट्रो सॉन्ग को लेकर खास बातचीत

हिंदी और साउथ के मेनस्ट्रीम मेकर्स भोजपुरी एक्टर्स और सिंगर्स के साथ लगातार कोलैब कर रहें हैं। अब ‘वेलकम टू द जंगल’ के लिए भी अक्षय ने अक्षरा सिंह के साथ एक गाना किया है। अक्षरा फिल्म के एक खास इंट्रो सॉन्ग में अक्षय के साथ थिरकती दिखेंगी। उनसे हुई खास बातचीत… ‘वेलकम टू द जंगल’ का यह ऑफर आपके पास कैसे आया? इस फिल्म का ऑफर सीधे मशहूर कोरियोग्राफर गणेश आचार्य की तरफ से आया। मास्टर जी से मेरी बातचीत हमेशा होती रही है, लेकिन काफी समय पहले हम लोगों ने एक शो के दौरान साथ में काम किया था। उस वक्त उन्होंने स्टेज पर मेरा लाइव परफॉर्मेंस देखा था। मास्टर जी के जेहन में मेरा वो परफॉर्मेंस और मेरा हुनर हमेशा रहा। एक दिन अचानक उनका कॉल आया और उन्होंने कहा…‘अक्षरा, एक बहुत बड़ा गाना है अक्षय कुमार के साथ और वे लोग इसे तुम्हारे साथ करने के लिए उत्सुक हैं। आपका पहला रिएक्शन क्या था? मेरा पहला रिएक्शन तो यही था- ‘अरे बाप रे!’ मेरे मन में तुरंत यह ख्याल आया कि बॉलीवुड की इतनी बड़ी फिल्म के मेकर्स और खुद अक्षय सर ने ऐसा कैसे सोचा? पूरी भोजपुरी इंडस्ट्री में से उन्होंने सिर्फ और सिर्फ मुझे ही क्यों चुना? मैंने अपनी यह दुविधा तुरंत मास्टर जी के सामने रख दी। इस पर उन्होंने जो मुझसे कहा, उसने मेरा हौसला सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। उन्होंने कहा…’अक्षरा, तुम्हें खुद अंदाजा नहीं है कि तुम क्या हो!’ बस फिर क्या था मैं तुरंत इस गाने के लिए तैयार हो गई। आपके इस गाने के फ्लेवर क्या है? यह कोई हिप-हॉप सॉन्ग नहीं है। यह फिल्म का इंट्रो सॉन्ग है, जो कहानी और किरदारों को दर्शकों से रूबरू कराएगा। यह पूरी तरह से एक कमर्शियल, कलरफुल और धमाकेदार सेटअप पर फिल्माया गया है। इसमें आपको बॉलीवुड का वो आइकॉनिक और एवरग्रीन ‘सरकाई लो खटिया जाड़ा लगे’ वाला असली देसी फ्लेवर देखने को मिलेगा। बैकग्राउंड से लेकर डांस मूव्स तक, सब कुछ बेहद पेप्पी है। शूटिंग के दौरान ब्रेक्स में अक्षय कुमार के साथ आपकी क्या बातचीत हुईं? अक्षय कुमार सर के साथ काम करने का अनुभव मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकती। सेट पर जाने से पहले मेरे मन में थोड़ा डर था कि इतने बड़े सुपरस्टार हैं, पता नहीं कैसे बिहेव करेंगे? लेकिन जब उनसे मिली तो महसूस हुआ कि वे बेहद डाउन-टू-अर्थ इंसान हैं। उन्होंने मुझसे बहुत गर्मजोशी से मुलाकात की और कहा…‘अक्षरा, तुम कितनी सुंदर हो, कब से इंडस्ट्री में काम कर रही हो?’ यह सुनकर मैं बेहद खुश हुई। सिर्फ अक्षय सर ही नहीं, बल्कि सेट पर मौजूद हर किसी ने मेरे काम की तारीफ की। अक्षय सर ने कई बार मुझसे पूछा कि तुम्हें यह गाना कैसा लग रहा है? उन्होंने कहा कि मैं बहुत अच्छा काम करती हूं और इतने सालों से भोजपुरी सिनेमा को संभाल रही हूं, यह काबिले तारीफ है। उनके जैसे बड़े स्टार से इतनी इज्जत और प्यार मिलना मेरे लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं है। इस गाने की शूटिंग में कितने दिनों का समय लगा? शॉकिंग है कि पूरे गाने की शूटिंग को सिर्फ और सिर्फ एक ही दिन में पूरा कर लिया गया। जी हां, पूरा काम एक दिन के शेड्यूल में ही सिमट गया था। हम लोग सुबह-सुबह ही सेट पर पहुंच गए थे। गणेश आचार्य जी की सबसे बड़ी खूबी यही है कि उनकी टेकिंग और काम करने की रफ्तार बहुत तेज और अलग है। सुबह की शिफ्ट से शुरू करके रात के करीब 9:10 बजे तक हम लोगों ने पूरा गाना शूट कर लिया था। सेट पर गाने की शूटिंग के समय कोई दिलचस्प किस्सा हुआ? इस गाने की पहले शुरुआती लाइन्स थी- ‘हमार लागल बा दिलवा प्लेबॉय से…’। पहले इस लाइन के आगे ही राइमिंग बिठाने के लिए एक मशहूर साबुन ब्रांड का नाम इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन शूटिंग के आखिरी पलों में मेकर्स और मास्टर जी को लगा कि किसी ब्रांड का नाम सीधे इस्तेमाल करना शायद ठीक नहीं होगा, इसलिए लास्ट मिनट पर उसे चेंज कर दिया। हालांकि गाना सुनने में अब भी उतना ही मजेदार है। भोजपुरी और बॉलीवुड के काम करने के तरीके में क्या अंतर महसूस किया? एक एक्टर के तौर पर हम हर दिन, हर सेट पर कुछ न कुछ नया सीखते हैं। बॉलीवुड के इस सेट पर जो तकनीकी बारीकियां मैंने देखीं, वे मेरे लिए बेहद नया अनुभव थीं। भोजपुरी में हम पहले पूरा गाना या सीन शूट कर लेते हैं, फिर वह फुटेज एडिटिंग टेबल पर जाती है और लगभग 15-20 दिनों के बाद हमें अपना काम देखने को मिलता है। ‘वेलकम टू द जंगल’ के सेट पर तकनीक का एक अलग ही लेवल था। वहां ऑन-द-स्पॉट ‘शॉट चेक’ और एडिटिंग की सुविधा थी। मास्टर जी गाना शूट कर रहे थे और मॉनिटर पर शॉट तुरंत एडिट हो रहा था।

एक दिन में शूट हुआ अक्षय के साथ सॉन्ग:भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह से फिल्म के इंट्रो सॉन्ग को लेकर खास बातचीत

एक दिन में शूट हुआ अक्षय के साथ सॉन्ग:भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह से फिल्म के इंट्रो सॉन्ग को लेकर खास बातचीत

हिंदी और साउथ के मेनस्ट्रीम मेकर्स भोजपुरी एक्टर्स और सिंगर्स के साथ लगातार कोलैब कर रहें हैं। अब ‘वेलकम टू द जंगल’ के लिए भी अक्षय ने अक्षरा सिंह के साथ एक गाना किया है। अक्षरा फिल्म के एक खास इंट्रो सॉन्ग में अक्षय के साथ थिरकती दिखेंगी। उनसे हुई खास बातचीत… ‘वेलकम टू द जंगल’ का यह ऑफर आपके पास कैसे आया? इस फिल्म का ऑफर सीधे मशहूर कोरियोग्राफर गणेश आचार्य की तरफ से आया। मास्टर जी से मेरी बातचीत हमेशा होती रही है, लेकिन काफी समय पहले हम लोगों ने एक शो के दौरान साथ में काम किया था। उस वक्त उन्होंने स्टेज पर मेरा लाइव परफॉर्मेंस देखा था। मास्टर जी के जेहन में मेरा वो परफॉर्मेंस और मेरा हुनर हमेशा रहा। एक दिन अचानक उनका कॉल आया और उन्होंने कहा…‘अक्षरा, एक बहुत बड़ा गाना है अक्षय कुमार के साथ और वे लोग इसे तुम्हारे साथ करने के लिए उत्सुक हैं। आपका पहला रिएक्शन क्या था? मेरा पहला रिएक्शन तो यही था- ‘अरे बाप रे!’ मेरे मन में तुरंत यह ख्याल आया कि बॉलीवुड की इतनी बड़ी फिल्म के मेकर्स और खुद अक्षय सर ने ऐसा कैसे सोचा? पूरी भोजपुरी इंडस्ट्री में से उन्होंने सिर्फ और सिर्फ मुझे ही क्यों चुना? मैंने अपनी यह दुविधा तुरंत मास्टर जी के सामने रख दी। इस पर उन्होंने जो मुझसे कहा, उसने मेरा हौसला सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। उन्होंने कहा…’अक्षरा, तुम्हें खुद अंदाजा नहीं है कि तुम क्या हो!’ बस फिर क्या था मैं तुरंत इस गाने के लिए तैयार हो गई। आपके इस गाने के फ्लेवर क्या है? यह कोई हिप-हॉप सॉन्ग नहीं है। यह फिल्म का इंट्रो सॉन्ग है, जो कहानी और किरदारों को दर्शकों से रूबरू कराएगा। यह पूरी तरह से एक कमर्शियल, कलरफुल और धमाकेदार सेटअप पर फिल्माया गया है। इसमें आपको बॉलीवुड का वो आइकॉनिक और एवरग्रीन ‘सरकाई लो खटिया जाड़ा लगे’ वाला असली देसी फ्लेवर देखने को मिलेगा। बैकग्राउंड से लेकर डांस मूव्स तक, सब कुछ बेहद पेप्पी है। शूटिंग के दौरान ब्रेक्स में अक्षय कुमार के साथ आपकी क्या बातचीत हुईं? अक्षय कुमार सर के साथ काम करने का अनुभव मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकती। सेट पर जाने से पहले मेरे मन में थोड़ा डर था कि इतने बड़े सुपरस्टार हैं, पता नहीं कैसे बिहेव करेंगे? लेकिन जब उनसे मिली तो महसूस हुआ कि वे बेहद डाउन-टू-अर्थ इंसान हैं। उन्होंने मुझसे बहुत गर्मजोशी से मुलाकात की और कहा…‘अक्षरा, तुम कितनी सुंदर हो, कब से इंडस्ट्री में काम कर रही हो?’ यह सुनकर मैं बेहद खुश हुई। सिर्फ अक्षय सर ही नहीं, बल्कि सेट पर मौजूद हर किसी ने मेरे काम की तारीफ की। अक्षय सर ने कई बार मुझसे पूछा कि तुम्हें यह गाना कैसा लग रहा है? उन्होंने कहा कि मैं बहुत अच्छा काम करती हूं और इतने सालों से भोजपुरी सिनेमा को संभाल रही हूं, यह काबिले तारीफ है। उनके जैसे बड़े स्टार से इतनी इज्जत और प्यार मिलना मेरे लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं है। इस गाने की शूटिंग में कितने दिनों का समय लगा? शॉकिंग है कि पूरे गाने की शूटिंग को सिर्फ और सिर्फ एक ही दिन में पूरा कर लिया गया। जी हां, पूरा काम एक दिन के शेड्यूल में ही सिमट गया था। हम लोग सुबह-सुबह ही सेट पर पहुंच गए थे। गणेश आचार्य जी की सबसे बड़ी खूबी यही है कि उनकी टेकिंग और काम करने की रफ्तार बहुत तेज और अलग है। सुबह की शिफ्ट से शुरू करके रात के करीब 9:10 बजे तक हम लोगों ने पूरा गाना शूट कर लिया था। सेट पर गाने की शूटिंग के समय कोई दिलचस्प किस्सा हुआ? इस गाने की पहले शुरुआती लाइन्स थी- ‘हमार लागल बा दिलवा प्लेबॉय से…’। पहले इस लाइन के आगे ही राइमिंग बिठाने के लिए एक मशहूर साबुन ब्रांड का नाम इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन शूटिंग के आखिरी पलों में मेकर्स और मास्टर जी को लगा कि किसी ब्रांड का नाम सीधे इस्तेमाल करना शायद ठीक नहीं होगा, इसलिए लास्ट मिनट पर उसे चेंज कर दिया। हालांकि गाना सुनने में अब भी उतना ही मजेदार है। भोजपुरी और बॉलीवुड के काम करने के तरीके में क्या अंतर महसूस किया? एक एक्टर के तौर पर हम हर दिन, हर सेट पर कुछ न कुछ नया सीखते हैं। बॉलीवुड के इस सेट पर जो तकनीकी बारीकियां मैंने देखीं, वे मेरे लिए बेहद नया अनुभव थीं। भोजपुरी में हम पहले पूरा गाना या सीन शूट कर लेते हैं, फिर वह फुटेज एडिटिंग टेबल पर जाती है और लगभग 15-20 दिनों के बाद हमें अपना काम देखने को मिलता है। ‘वेलकम टू द जंगल’ के सेट पर तकनीक का एक अलग ही लेवल था। वहां ऑन-द-स्पॉट ‘शॉट चेक’ और एडिटिंग की सुविधा थी। मास्टर जी गाना शूट कर रहे थे और मॉनिटर पर शॉट तुरंत एडिट हो रहा था।

ग्रीन कार्ड आवेदन से पहले मूल देश लौटना होगा‎:अमेरिकी सरकार की नई नीतियों से मुश्किल में हजारों इमिग्रेंट्स

ग्रीन कार्ड आवेदन से पहले मूल देश लौटना होगा‎:अमेरिकी सरकार की नई नीतियों से मुश्किल में हजारों इमिग्रेंट्स

अमेरिकी सरकार की नई नीति ने हजारों ‎इमिग्रेंट्स को मुश्किल में फंसा दिया है। हाल ही में ‎सिटीजनशिप और इमिग्रेशन सर्विसेस एजेंसी ने‎ कहा है कि ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले‎ लोगों को पहले अपने मूल देश लौटना पड़ेगा। अब‎ आवेदक और इमिग्रेशन वकील समझने की कोशिश कर रहे हैं कि बदलाव से स्थायी निवास‎ की स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ेगा। एजेंसी का कहना ‎है कि केवल असाधारण परिस्थितियों में ही‎ अमेरिका में पहले से रह रहे लोगों को परमानेंट‎ रेसीडेंस की मंजूरी दी जाएगी। अमेरिका में स्थायी‎ तौर पर बसने के इच्छुक किसी अन्य व्यक्ति को‎ अपने गृह देश में अमेरिकन कौन्सुलेट में आवेदन‎ करना पड़ेगा।‎ इमिग्रेशन वकील चार्ल्स कुक ने कहा कि ‎बदलाव उन लोगों के लिए खासतौर से चिंताजनक है, जिन्होंने अमेरिकी नागरिकों से शादी की है और‎ वे स्थायी निवास चाहते हैं। ऐसे इमिग्रेंट्स को ग्रीन‎कार्ड लेने से पहले अपने इमिग्रेशन दर्जे को तय करने की जरूरत रहती है और आमतौर पर वे‎ अमेरिका में रहते हुए ऐसे मामलों को निपटा लेते‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎ हैं। कुक कहते हैं, यह इमिग्रेशन की गति धीमी‎ करने और इमिग्रेशन को इतना जटिल और‎ असुविधाजनक बनाने का प्रयास है कि आप‎ अपने देश लौट जाएं।‎ नेशनल इमिग्रेशन लॉ सेंटर में कानूनी रणनीति‎ के वाइस प्रेसिडेंट एफरेन ओलिवरेस का कहना है,‎ नई नीति का उद्देश्य ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को‎ अस्त-व्यस्त करना है। ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पूरी होने‎ तक अधिकतर आवेदकों को अपने परिवारों के‎ साथ अमेरिका में रहने की अनुमति है, लेकिन अब‎ देश में बने रहना अपवाद होगा। ओलिवरेस कहते‎ हैं, पहले कई बार डिपोर्ट किए जा चुके या गंभीर ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎आपराधिक इतिहास जैसी असाधारण परिस्थितियों‎ में किसी को अपने देश से आवेदन के लिए कहा‎ जाता था।‎ कार्रवाई के भय से नाम न छापने की शर्त पर‎ कुछ इमिग्रेंट्स ने कहा कि वे भ्रमित और चिंतित हैं ‎कि इस बदलाव का उनके या उनके पार्टनर के‎ आवेदनों के लिए क्या मतलब होगा। इमिग्रेंट्स की‎ मदद करने वाले एक गैर लाभकारी संगठन‎ इमिग्रेशन प्रैक्टिस के मैनेजिंग डायरेक्टर कार्ला‎ ओस्टोलेजा कहते हैं, इस परिवर्तन का असर तुरंत‎ तो नहीं लेकिन बहुत ज्यादा महसूस किया जाएगा।‎ 2024 में 14 लाख लोगों को ग्नीन ‎कार्ड मिला इमिग्रेशन वकीलों और उनके समर्थक संगठनों‎ का कहना है कि नए नियमों से ग्रीन कार्ड‎ आवेदन कम होंगे। 2024 में 14 लाख ग्रीन ‎कार्ड जारी किए गए थे। कार्ड पाने वाले आठ‎ लाख से अधिक लोग अमेरिका में पहले से हैं‎ और प्रक्रिया के तहत उनका इमिग्रेशन दर्जा ‎बदला गया है।‎

ब्रांड्स को अपनी दुनिया का हिस्सा बनाना चाह रहे जेनजी:भारत का लाइव इवेंट सेगमेंट 2025 में 44% बढ़कर 14,500 करोड़ रुपए तक पहुंचा

ब्रांड्स को अपनी दुनिया का हिस्सा बनाना चाह रहे जेनजी:भारत का लाइव इवेंट सेगमेंट 2025 में 44% बढ़कर 14,500 करोड़ रुपए तक पहुंचा

आप हाल के 3 ऑनलाइन विज्ञापन याद कर सकते हैं? शायद नहीं। लेकिन दोस्तों के साथ देखा गया आखिरी कॉन्सर्ट या कॉमेडी शो जरूर याद होगा। यही फर्क भारत के मार्केटिंग की दुनिया को बदल रहा है। फिक्की-ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का लाइव इवेंट सेगमेंट 2025 में 44% बढ़कर ~14,500 करोड़ तक पहुंच गया। अब यह मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में सबसे तेज बढ़ने वाली कैटेगरी है। यह एक बड़े बदलाव का सिर्फ एक उदाहरण है। बुकमाईशो में पार्टनरशिप और रेवेन्यू हेड समृद्धा तिब्रेवाला फॉर्च्यून इंडिया से कहती हैं कि यह सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के व्यवहार में ढांचागत बदलाव है। अनिरुद्ध रविचंदर के शो मिनटों में हाउसफुल हो जाते हैं, जाकिर खान 40 से ज्यादा शहरों में हॉल भर रहे हैं और ‘हमारे राम’ जैसे नाटक 500 शोज का आंकड़ा पार कर चुके हैं। ब्रांड्स इस बदलाव को भांप चुके हैं। पहले सफलता का पैमाना था कि कितनी आंखों ने लोगो देखा। अब सवाल यह है कि दर्शक ने कितनी गहराई से ब्रांड को महसूस किया। बुकमाईशो की ईवाई-पार्थेनन के साथ तैयार रिपोर्ट बताती है कि लाइव इवेंट में ऑन-ग्राउंड अनुभव लेने वाले 59% दर्शकों को वहां मौजूद ब्रांड्स याद रहे। 63% ने माना कि ब्रांड्स ने उनका अनुभव बेहतर बनाया और 81% को यह एकीकरण स्वाभाविक लगा। कुछ दिलचस्प उदाहरण भी हैं। मसलन, एयरबीएनबी ने सिद्धांत चतुर्वेदी के साथ मुंबई के अनुभवों को क्यूरेट किया। रुपे ने टिकट बुकिंग से लेकर इवेंट तक के पूरे सफर में फैन की परेशानियां दूर कीं। लेनोवो ने लोलापालूजा में एआई-जनरेटेड पर्सनलाइज्ड पोस्टर बनाने का मौका दिया। यहां हर अनुभव अलग, हर याद निजी है। तिब्रेवाला कहती हैं कि जेन जी (15-30 साल के युवा और किशोर) ब्रांड्स से बात सुनना नहीं चाहती। यह पीढ़ी चाहती है कि ब्रांड उनकी दुनिया का हिस्सा बने। इसीलिए सफल ब्रांड अब ग्राहकों के एक्सपीरियंस पर फोकस कर रहे हैं। तिब्रेवाला के मुताबिक आगे का रास्ता और चौड़ा है। कॉमेडी, रीजनल म्यूजिक, इमर्सिव आर्ट एग्जीबिशन और टियर-2,3 शहर- सब नए मोर्चे हैं। एआई-जनरेटेड कंटेंट की बाढ़ में लाइव एंटरटेनमेंट वह इंसानी अनुभव है, जिसकी नकल कोई एल्गोरिदम नहीं कर सकता। हजारों लोगों का एक साथ एक गाना गुनगुनाना- ये पल न रिकॉर्ड होता है, न दोहराया जा सकता है। जैसा तिब्रेवाला कहती हैं, ‘यादें वापस नहीं होतीं’ और यही वह जगह है, जहां असली मार्केटिंग हो रही है।’ पहुंच नहीं, भागीदारी बना सफलता का नया पैमाना पारंपरिक मार्केटिंग में ‘रीच’ और ‘इम्प्रेशन’ सफलता के पैमाने थे। अब ये सिर्फ न्यूनतम अपेक्षा हैं। ब्रांड्स अब ‘एंगेजमेंट डेप्थ’, दर्शक की भावनात्मक भागीदारी, इवेंट के बाद की चर्चा और टिकाऊ ब्रांड अफिनिटी को मापना चाहते हैं। लाइव इवेंट में एक दर्शक जो सहज रूप से ब्रांड का प्रचार अपने समुदाय में करे, वह करोड़ों की डिजिटल रीच से कहीं अधिक मूल्यवान है।

ब्रांड्स को अपनी दुनिया का हिस्सा बनाना चाह रहे जेनजी:भारत का लाइव इवेंट सेगमेंट 2025 में 44% बढ़कर 14,500 करोड़ रुपए तक पहुंचा

ब्रांड्स को अपनी दुनिया का हिस्सा बनाना चाह रहे जेनजी:भारत का लाइव इवेंट सेगमेंट 2025 में 44% बढ़कर 14,500 करोड़ रुपए तक पहुंचा

आप हाल के 3 ऑनलाइन विज्ञापन याद कर सकते हैं? शायद नहीं। लेकिन दोस्तों के साथ देखा गया आखिरी कॉन्सर्ट या कॉमेडी शो जरूर याद होगा। यही फर्क भारत के मार्केटिंग की दुनिया को बदल रहा है। फिक्की-ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का लाइव इवेंट सेगमेंट 2025 में 44% बढ़कर ~14,500 करोड़ तक पहुंच गया। अब यह मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में सबसे तेज बढ़ने वाली कैटेगरी है। यह एक बड़े बदलाव का सिर्फ एक उदाहरण है। बुकमाईशो में पार्टनरशिप और रेवेन्यू हेड समृद्धा तिब्रेवाला फॉर्च्यून इंडिया से कहती हैं कि यह सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के व्यवहार में ढांचागत बदलाव है। अनिरुद्ध रविचंदर के शो मिनटों में हाउसफुल हो जाते हैं, जाकिर खान 40 से ज्यादा शहरों में हॉल भर रहे हैं और ‘हमारे राम’ जैसे नाटक 500 शोज का आंकड़ा पार कर चुके हैं। ब्रांड्स इस बदलाव को भांप चुके हैं। पहले सफलता का पैमाना था कि कितनी आंखों ने लोगो देखा। अब सवाल यह है कि दर्शक ने कितनी गहराई से ब्रांड को महसूस किया। बुकमाईशो की ईवाई-पार्थेनन के साथ तैयार रिपोर्ट बताती है कि लाइव इवेंट में ऑन-ग्राउंड अनुभव लेने वाले 59% दर्शकों को वहां मौजूद ब्रांड्स याद रहे। 63% ने माना कि ब्रांड्स ने उनका अनुभव बेहतर बनाया और 81% को यह एकीकरण स्वाभाविक लगा। कुछ दिलचस्प उदाहरण भी हैं। मसलन, एयरबीएनबी ने सिद्धांत चतुर्वेदी के साथ मुंबई के अनुभवों को क्यूरेट किया। रुपे ने टिकट बुकिंग से लेकर इवेंट तक के पूरे सफर में फैन की परेशानियां दूर कीं। लेनोवो ने लोलापालूजा में एआई-जनरेटेड पर्सनलाइज्ड पोस्टर बनाने का मौका दिया। यहां हर अनुभव अलग, हर याद निजी है। तिब्रेवाला कहती हैं कि जेन जी (15-30 साल के युवा और किशोर) ब्रांड्स से बात सुनना नहीं चाहती। यह पीढ़ी चाहती है कि ब्रांड उनकी दुनिया का हिस्सा बने। इसीलिए सफल ब्रांड अब ग्राहकों के एक्सपीरियंस पर फोकस कर रहे हैं। तिब्रेवाला के मुताबिक आगे का रास्ता और चौड़ा है। कॉमेडी, रीजनल म्यूजिक, इमर्सिव आर्ट एग्जीबिशन और टियर-2,3 शहर- सब नए मोर्चे हैं। एआई-जनरेटेड कंटेंट की बाढ़ में लाइव एंटरटेनमेंट वह इंसानी अनुभव है, जिसकी नकल कोई एल्गोरिदम नहीं कर सकता। हजारों लोगों का एक साथ एक गाना गुनगुनाना- ये पल न रिकॉर्ड होता है, न दोहराया जा सकता है। जैसा तिब्रेवाला कहती हैं, ‘यादें वापस नहीं होतीं’ और यही वह जगह है, जहां असली मार्केटिंग हो रही है।’ पहुंच नहीं, भागीदारी बना सफलता का नया पैमाना पारंपरिक मार्केटिंग में ‘रीच’ और ‘इम्प्रेशन’ सफलता के पैमाने थे। अब ये सिर्फ न्यूनतम अपेक्षा हैं। ब्रांड्स अब ‘एंगेजमेंट डेप्थ’, दर्शक की भावनात्मक भागीदारी, इवेंट के बाद की चर्चा और टिकाऊ ब्रांड अफिनिटी को मापना चाहते हैं। लाइव इवेंट में एक दर्शक जो सहज रूप से ब्रांड का प्रचार अपने समुदाय में करे, वह करोड़ों की डिजिटल रीच से कहीं अधिक मूल्यवान है।

The world’s first doping-friendly tournament sparked outrage in the sports world.

The world's first doping-friendly tournament sparked outrage in the sports world.

Hindi News Sports The World’s First Doping friendly Tournament Sparked Outrage In The Sports World. न्यूयॉर्क10 मिनट पहले कॉपी लिंक क्रिश्चियन एंगरमेयर।- फाइल फोटो जोखिम और मुनाफे की बुनियाद पर खड़े शहर लास वेगास में इन दिनों एक अजीबोगरीब खेल की पटकथा लिखी गई। लेखक थे 48 वर्षीय अरबपति बायोहैकर क्रिश्चियन एंगरमेयर… सुबह उठकर वे खुद को वजन घटाने वाली दवाएं, टेस्टोस्टेरोन और लीगल ग्रोथ हार्मोन्स इंजेक्ट करते हैं। फोकस करने के लिए स्लीप एप्निया की दवा और लोगों से घुलने-मिलने के लिए ‘ऑक्सीटोसिन’ की मदद लेते हैं। एंगरमेयर खुद तो 48 की उम्र में 38 के दिखते ही हैं, पर अब वह पूरी दुनिया को ‘बायोहैकिंग’ का दीवाना बनाने निकले हैं। वे ‘एनहैंस्ड गेम्स’ के फाउंडर हैं। बीते रविवार को हुए इस अनूठे टूर्नामेंट में एथलीट्स पर ड्रग्स, स्टेरॉयड, हार्मोन्स और पेप्टाइड्स लेने पर कोई प्रतिबंध नहीं था, बल्कि उन्हें सरेआम इसे लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया। खेल इतिहास में पहली बार किसी टूर्नामेंट को खुलेआम ‘डोपिंग को बढ़ावा’ देने के लिए तैयार किया गया।पहली बार हुए इस आयोजन में दुनियाभर के 42 शीर्ष तैराक, धावक और वेटलिफ्टर ने हिस्सा लिया, जिनमें कई ओलिंपिक मेडल विजेता भी थे। इनमें से 91% टेस्टोस्टेरोन और 79% ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन के हैवी डोज पर हैं। ग्रीक ओ​लिंपिक तैराक क्रिस्टियन गोलोमेव ने गुप्त ट्रायल के दौरान 50 मीटर फ्रीस्टाइल में 20.89 सेकंड का समय निकालकर आधिकारिक वर्ल्ड रिकॉर्ड को दो सौवें सेकंड से तोड़ दिया, जिसके लिए उन्हें करीब 9.55 करोड़ रुपए का बोनस भी मिला। कंपनी के 29 वर्षीय सीईओ मैक्स मार्टिन का कहना है,‘यह इनोवेशन सिर्फ एथलीट्स के लिए नहीं है। यह उन दादाजी के लिए भी है जो अपने पोते के साथ पार्क में दौड़ने के लिए ऊर्जा चाहते हैं।’ दिग्गजों ने किया निवेश, नजर 650 लाख करोड़ की वेलनेस इंडस्ट्री पर 11,460 करोड़ रु. के वैल्यूएशन के साथ पब्लिक हुई कंपनी एनहैंस्ड गेम्स इंक के पीछे सिलिकॉन वैली के दिग्गज अरबपति पीटर थिएल व ट्रम्प जूनियर की साझेदारी वाली वेंचर फर्म ‘1789 कैपिटल’ का हाथ है। एंगरमेयर इसके कोफाउंडर हैं। 191 करोड़ की लागत से हुए इस इवेंट का मकसद स्पोर्ट्स नहीं, बल्कि बिजनेस एम्पायर खड़ा करना है। कंपनी का टेलीहेल्थ प्लेटफॉर्म ‘एनहैंस्ड’ जल्द ही आम लोगों को टेस्टोस्टेरोन और एंटी-एजिंग सप्लीमेंट्स बेचेगा। 650 लाख करोड़ रु. की वैश्विक वेलनेस इंडस्ट्री को भुनाने के लिए इस टूर्नामेंट ‘लाइव विज्ञापन’ की भूमिका निभाई। गलत संदेश जाएगा इवेंट को लेकर खेल जगत और मेडिकल एक्सपर्ट में आक्रोश है। अमेरिकी एंटी-डोपिंग एजेंसी के प्रमुख ट्रैविस टायगार्ट मानते हैं कि इससे बच्चों में गलत संदेश जाएगा कि खेल में आगे बढ़ने के लिए ड्रग्स जरूरी हैं। वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी ने चेतावनी दी है कि भले ही ये दवाएं डॉक्टरों की देखरेख में दी जा रही हों, पर इनके कॉकटेल से भविष्य में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, लिवर डैमेज और अचानक मौत का खतरा बढ़ जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

The world’s first doping-friendly tournament sparked outrage in the sports world.

The world's first doping-friendly tournament sparked outrage in the sports world.

Hindi News Sports The World’s First Doping friendly Tournament Sparked Outrage In The Sports World. न्यूयॉर्क30 मिनट पहले कॉपी लिंक क्रिश्चियन एंगरमेयर खुद तो 48 की उम्र में 38 के दिखते ही हैं, पर अब वह पूरी दुनिया को ‘बायोहैकिंग’ का दीवाना बनाने निकले हैं।- फाइल फोटो जोखिम और मुनाफे की बुनियाद पर खड़े शहर लास वेगास में इन दिनों एक अजीबोगरीब खेल की पटकथा लिखी गई। लेखक थे 48 वर्षीय अरबपति बायोहैकर क्रिश्चियन एंगरमेयर… सुबह उठकर वे खुद को वजन घटाने वाली दवाएं, टेस्टोस्टेरोन और लीगल ग्रोथ हार्मोन्स इंजेक्ट करते हैं। फोकस करने के लिए स्लीप एप्निया की दवा और लोगों से घुलने-मिलने के लिए ‘ऑक्सीटोसिन’ की मदद लेते हैं। एंगरमेयर खुद तो 48 की उम्र में 38 के दिखते ही हैं, पर अब वह पूरी दुनिया को ‘बायोहैकिंग’ का दीवाना बनाने निकले हैं। वे ‘एनहैंस्ड गेम्स’ के फाउंडर हैं। बीते रविवार को हुए इस अनूठे टूर्नामेंट में एथलीट्स पर ड्रग्स, स्टेरॉयड, हार्मोन्स और पेप्टाइड्स लेने पर कोई प्रतिबंध नहीं था, बल्कि उन्हें सरेआम इसे लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया। खेल इतिहास में पहली बार किसी टूर्नामेंट को खुलेआम ‘डोपिंग को बढ़ावा’ देने के लिए तैयार किया गया।पहली बार हुए इस आयोजन में दुनियाभर के 42 शीर्ष तैराक, धावक और वेटलिफ्टर ने हिस्सा लिया, जिनमें कई ओलिंपिक मेडल विजेता भी थे। इनमें से 91% टेस्टोस्टेरोन और 79% ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन के हैवी डोज पर हैं। ग्रीक ओ​लिंपिक तैराक क्रिस्टियन गोलोमेव ने गुप्त ट्रायल के दौरान 50 मीटर फ्रीस्टाइल में 20.89 सेकंड का समय निकालकर आधिकारिक वर्ल्ड रिकॉर्ड को दो सौवें सेकंड से तोड़ दिया, जिसके लिए उन्हें करीब 9.55 करोड़ रुपए का बोनस भी मिला। कंपनी के 29 वर्षीय सीईओ मैक्स मार्टिन का कहना है,‘यह इनोवेशन सिर्फ एथलीट्स के लिए नहीं है। यह उन दादाजी के लिए भी है जो अपने पोते के साथ पार्क में दौड़ने के लिए ऊर्जा चाहते हैं।’ दिग्गजों ने किया निवेश, नजर 650 लाख करोड़ की वेलनेस इंडस्ट्री पर 11,460 करोड़ रु. के वैल्यूएशन के साथ पब्लिक हुई कंपनी एनहैंस्ड गेम्स इंक के पीछे सिलिकॉन वैली के दिग्गज अरबपति पीटर थिएल व ट्रम्प जूनियर की साझेदारी वाली वेंचर फर्म ‘1789 कैपिटल’ का हाथ है। एंगरमेयर इसके कोफाउंडर हैं। 191 करोड़ की लागत से हुए इस इवेंट का मकसद स्पोर्ट्स नहीं, बल्कि बिजनेस एम्पायर खड़ा करना है। कंपनी का टेलीहेल्थ प्लेटफॉर्म ‘एनहैंस्ड’ जल्द ही आम लोगों को टेस्टोस्टेरोन और एंटी-एजिंग सप्लीमेंट्स बेचेगा। 650 लाख करोड़ रु. की वैश्विक वेलनेस इंडस्ट्री को भुनाने के लिए इस टूर्नामेंट ‘लाइव विज्ञापन’ की भूमिका निभाई। गलत संदेश जाएगा इवेंट को लेकर खेल जगत और मेडिकल एक्सपर्ट में आक्रोश है। अमेरिकी एंटी-डोपिंग एजेंसी के प्रमुख ट्रैविस टायगार्ट मानते हैं कि इससे बच्चों में गलत संदेश जाएगा कि खेल में आगे बढ़ने के लिए ड्रग्स जरूरी हैं। वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी ने चेतावनी दी है कि भले ही ये दवाएं डॉक्टरों की देखरेख में दी जा रही हों, पर इनके कॉकटेल से भविष्य में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, लिवर डैमेज और अचानक मौत का खतरा बढ़ जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Australia begins preparations for the 2027 ODI World Cup

Australia begins preparations for the 2027 ODI World Cup

मेलबर्न9 मिनट पहले कॉपी लिंक क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को पूरा भरोसा है कि पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड की स्टार तेज गेंदबाजी तिकड़ी दक्षिण अफ्रीका में होने वाले अगले वर्ल्ड कप में पूरी तरह फिट होकर खेलेगी।- फाइल फोटो एक ओर दुनिया जहां आईपीएल में व्यस्त है, वहीं डिफेंडिंग चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया ने 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियां शुरू कर दी हैं। उम्र और फिटनेस की चुनौतियों के बावजूद, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को पूरा भरोसा है कि पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड की स्टार तेज गेंदबाजी तिकड़ी दक्षिण अफ्रीका में होने वाले अगले वर्ल्ड कप में पूरी तरह फिट होकर खेलेगी। इन तीनों ने 2023 वर्ल्ड कप फाइनल के बाद से सिर्फ एक वनडे एक साथ खेला है। फिलहाल इन तीनों दिग्गज गेंदबाजों को पाकिस्तान और बांग्लादेश के खिलाफ आगामी लिमिटेड ओवर्स सीरीज से आराम दिया गया है। टीम के मुख्य कोच एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने साफ किया कि ये तीनों इन सीरीज में खेलना चाहते थे, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के आगामी व्यस्त टेस्ट शेड्यूल को देखते हुए मैनेजमेंट ने उन्हें आराम देने का फैसला किया। कोच मैकडोनाल्ड ने कहा, ‘लोगों को अक्सर लगता है कि ये बड़े खिलाड़ी अपनी मर्जी से सीरीज चुनते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। यह फैसला पूरी तरह से मैनेजमेंट का है। अगर हम वर्ल्ड कप के नजरिए से देखें, तो इन गेंदबाजों को शारीरिक रूप से तरोताजा रखने के लिए यह ब्रेक देना बहुत जरूरी था। हम पूरी तरह से योजना बना रहे हैं कि ये तीनों 2027 में टीम का हिस्सा हों।’कोच ने टीम की कप्तानी पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि कमिंस की गैरमौजूदगी में मिचेल मार्श वनडे टीम की कप्तानी कर रहे हैं। हालांकि, जैसे ही कमिंस की वनडे टीम में वापसी होगी, मार्श कप्तानी छोड़ देंगे। दोनों खिलाड़ियों के बीच बेहतरीन तालमेल है और वे टीम के हित में साथ मिलकर काम कर रहे हैं। 34 से ऊपर होगी तीनों प्रीमियर पेसर्स की उम्र ऑस्ट्रेलिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने प्रीमियर गेंदबाजों को बढ़ती उम्र और चोटों से बचाना है। स्टार्क 36, हेजलवुड 35 और कमिंस 33 साल के हैं। यानी वर्ल्ड कप तक सभी 34 साल से ऊपर के होंगे। आईपीएल 2026 के दौरान भी इनकी फिटनेस को लेकर काफी सावधानी बरती गई है। जहां स्टार्क का वर्कलोड खुद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया संभाल रहा था, वहीं कमिंस पीठ की चोट व हेजलवुड हैमस्ट्रिंग की समस्या से जूझ रहे थे। कोच ने माना कि बढ़ती उम्र के साथ उनके वर्कलोड को मैनेज करना चैलेंज होगा। ऑलराउंडर मैक्सवेल के संन्यास से बढ़ी चुनौती – 2025 में ऑलराउंडर मैक्सवेल के वनडे से संन्यास लेने के बाद ऑस्ट्रेलिया को एक धाकड़ फिनिशर (नंबर 7 बल्लेबाज) की तलाश है। मैनेजमेंट टिम डेविड की वनडे में वापसी पर विचार कर रहा है। डेविड ने अपना आखिरी वनडे 2023 में खेला था। कोच के मुताबिक, अगर वे वनडे खेलने की इच्छा जताते हैं, तो उनके लिए दरवाजे खुले हैं। – ऑलराउंडर कैमरन ग्रीन भी इस भूमिका के लिए एक मजबूत दावेदार हैं। आगामी सीरीज में उन्हें हर पोजीशन पर आजमाया जाएगा, ताकि क्षमता का अंदाजा लग सके। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Bhopal athlete Dev won gold with a national record, Kuldeep won silver, then had to carry poles in an e-rickshaw.

Bhopal athlete Dev won gold with a national record, Kuldeep won silver, then had to carry poles in an e-rickshaw.

Hindi News Local Mp Bhopal Bhopal Athlete Dev Won Gold With A National Record, Kuldeep Won Silver, Then Had To Carry Poles In An E rickshaw. भोपाल/रांची7 मिनट पहले कॉपी लिंक रांची में आयोजित फेडरेशन कप में मप्र अकादमी भोपाल के दो खिलाड़ियों ने भारतीय एथलेटिक्स में इतिहास रच दिया। देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार ने पुरुष पोल वॉल्ट में 5.45 मीटर की समान छलांग लगाकर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए क्वालिफाई किया। लेकिन इस ऐतिहासिक उपलब्धि के कुछ ही घंटों बाद दोनों खिलाड़ी अपने 5 मीटर लंबे फाइबरग्लास पोल ई-रिक्शा में लादकर होटल ले जाते दिखे। पोल वॉल्ट में इस्तेमाल होने वाले ये विशेष पोल इतने लंबे और संवेदनशील होते हैं कि इन्हें संभालना और एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान नहीं होता। इसके बावजूद खिलाड़ियों को अपने उपकरण खुद ढोने पड़े। यह तस्वीर खेल व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। इसी साल मुंबई में भी जबरन उतारा था इसी साल ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैम्पियनशिप से लौटते समय पनवेल स्टेशन पर एक टीटीई ने इन्हीं दोनों खिलाड़ियों को ट्रेन से उतार दिया था। अफसरों का तर्क था कि इतने लंबे पोल बोगी में नहीं ले जाए जा सकते। शाटपुट में समरदीप को गोल्ड, कॉमनवेल्थ क्वालीफाई किया भोपाल के ही समरदीप सिंह गिल ने शॉटपुट में गोल्ड मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स 2026 के लिए क्वालिफाई किया। उन्होंने 20.46 मीटर गोला फेंका। {मप्र अकादमी भोपाल के विनोद सिंह ने 5 हजार मीटर दौड़ में सिल्वर जीता। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

सुनहरे दौर में इंग्लैंड की महिला रग्बी टीम:5 ग्रैंड स्लैम, 38 जीत का सिलसिला, 8 बार सिक्स नेशंस कप जीता

सुनहरे दौर में इंग्लैंड की महिला रग्बी टीम:5 ग्रैंड स्लैम, 38 जीत का सिलसिला, 8 बार सिक्स नेशंस कप जीता

फ्रांस के बॉरदॉ शहर में मैच खत्म होते ही इंग्लैंड की महिला रग्बी टीम (रेड रोजेज) की खिलाड़ी एक-दूसरे से गले मिल रही थीं। स्कोरबोर्ड पर 43-28 चमक रहा था। जीत के साथ इंग्लैंड ने लगातार आठवीं बार विमंस सिक्स नेशंस खिताब और लगातार पांचवां ग्रैंड स्लैम अपने नाम कर लिया था। लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह रही कि टीम की कई खिलाड़ियों को यह भी ठीक से याद नहीं था कि उनकी जीतों का सिलसिला अब 38 मैच तक पहुंच चुका है। यह वही टीम है, जिसने 2022 महिला रग्बी वर्ल्ड कप फाइनल में न्यूजीलैंड से आखिरी मिनटों में हार झेली थी। 31-34 की वह हार आज भी खिलाड़ियों को याद है। लेकिन उसी हार के बाद रेड रोजेज ने खुद को ऐसे बदला कि अब उन्हें रोकना लगभग नामुमकिन लगने लगा है। पिछले सात वर्षों में इंग्लैंड ने सिर्फ एक मैच गंवाया है। कप्तान मेग जोन्स कहती हैं, ‘हम रिकॉर्ड नहीं गिनते। हम सिर्फ अगले मैच और खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान देते हैं।’ शायद यही वजह है कि यह टीम सिर्फ जीत नहीं रही, बल्कि खेल में एक नया मानक बना रही है। दिलचस्प बात यह है कि इंग्लैंड की मौजूदा टीम अपनी पूरी ताकत के साथ भी नहीं खेल रही। कई अहम खिलाड़ी चोट के कारण बाहर हैं और चार खिलाड़ी प्रेग्नेंट हैं। इसके बावजूद टीम की रफ्तार नहीं रुकी। फ्रांस ने हाल के वर्षों में इंग्लैंड को चुनौती देना शुरू किया है। इस बार भी फ्रांस ने दूसरे हाफ में वापसी की कोशिश की, लेकिन इंग्लैंड ने दबाव में भी मैच हाथ से नहीं जाने दिया। इंग्लैंड की स्टार खिलाड़ी सारा बर्न कहती हैं, ‘अगर यह टीम एक बार हारती भी है, तो दोबारा हारना नहीं चाहेगी। हम हमेशा बेहतर बनने की कोशिश करते हैं।’ सारा के मुताबिक टीम का लक्ष्य सिर्फ जीतना नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बेहतरीन खेल टीम बनना है। अब सवाल सिर्फ इतना है कि आखिर इंग्लैंड को हराएगा कौन? अगली चुनौती फिर न्यूजीलैंड होगी। लेकिन अगर कभी यह टीम हार भी गई, तो शायद उनकी सोच नहीं बदलेगी। मेग जोन्स के शब्दों में, ‘सूरज अगली सुबह फिर उगेगा, और हम वही रहेंगे।’ 2019 में मिला था फुल टाइम प्रोफेशनल कॉन्ट्रैक्ट इस सफलता के पीछे सिर्फ प्रतिभा नहीं, बल्कि मजबूत सिस्टम भी है। 2019 में इंग्लैंड ने महिला खिलाड़ियों को फुल-टाइम प्रोफेशनल कॉन्ट्रैक्ट देना शुरू किया था। पिछले साल रग्बी फुटबॉल यूनियन ने महिला रग्बी में करीब 195 करोड़ रुपए का निवेश किया। इसके उलट पिछले वर्ल्ड कप की फाइनलिस्ट कनाडा को टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए क्राउडफंडिंग करनी पड़ी थी। यही अंतर बताता है कि निवेश व सुविधाएं किसी टीम को कितना बदल सकती हैं।