Saturday, 06 Jun 2026 | 12:03 PM

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Strong performance from leading AI companies

Strong performance from leading AI companies

मुंबई15 मिनट पहले कॉपी लिंक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में एआई-फ्रेंडली कंज्यूमर बेस बहुत बड़ा है। लेकिन भारतीय मिडिल क्लास में नौकरियों पर एआई के असर को लेकर गहरी चिंता भी है।- फाइल फोटो ब्रांड बाजार के लिए 2026 ऐतिहासिक साल बन गया है। दुनिया के शीर्ष 100 ब्रांड्स की कुल वैल्यू 13 ट्रिलियन डॉलर (1,244 लाख करोड़ रुपए) पार निकल गई। यह 22% बढ़ा, लेकिन तरक्की समान नहीं रही। एआई की लहर पर सवार ब्रांड्स ने रिकॉर्ड तोड़े, पर टॉप-5 में बड़ा उलटफेर हुआ। चार साल से नंबर पर एक काबिज एपल से यह ताज गूगल ने छीन लिया। गूगल की ब्रांड वैल्यू 57% बढ़ी, जबकि एपल की 6% ही बढ़ पाई। भारतीय कंपनी टीसीएस की ब्रांड वैल्यू तो 43% घट गई। ​ पहली बार एक साथ 4 ब्रांड 1 ट्रिलियन डॉलर पार रैंक – ब्रांड – वैल्यू – बढ़ोतरी 1 – गूगल – 142 – 57% 2 – एपल – 132 – 6% 3 – माइक्रोसॉफ्ट – 106 – 26% 4 – अमेजन – 98 – 18% 5 – एनवीडिया – 78 – 60% 6 – फेसबुक – 35 – 22% 7 – इंस्टाग्राम – 27 – 25% 8 – टेंसेट – 24 – 45% 9 – ओरेकल – 23 – 10% 10 – मैक्डोनल्ड्स – 23 – 6% (ब्रांड वैल्यू लाख करोड़ रु. में, वृद्धि 2025 के मुकाबले।) – चैटजीपीटी की ब्रांड वैल्यू में 1 साल में 285% बढ़कर ~16 लाख करोड़ हो गई। यह किसी कंपनी की सबसे तेज रफ्तार है। – क्लॉड पहली बार इस क्लब में (27वें) शामिल हुआ। ~9.2 लाख करोड़ की ब्रांड वैल्यू के साथ किसी नए ब्रांड के लिए इस ऊंचाई पर सीधी एंट्री असाधारण है। लग्जरी की चमक फीकी, चीन की वापसी – लुई वितां की वैल्यू 22% घटी और यह 15 पायदान नीचे खिसककर 32वें स्थान पर आ गया। शनेल 15% गिरा और 9 पायदान नीचे 51वें स्थान पर रहा। – चीन के अलीबाबा की ब्रांड वैल्यू 51%, एग्री बैंक ऑफ चाइना की 54% बढ़ी। शाओमी ब्रांड की वैल्यू में 48% इजाफा हुआ। टेनसेंट की वापसी ‘एआई-ड्रिवन कमबैक फॉर चाइनीज टेक’ ब्रांड्स का हिस्सा है। भारत के लिए एआई मौका और चुनौती दोनों कैंटा ब्रांड्ज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में एआई-फ्रेंडली कंज्यूमर बेस बहुत बड़ा है। लेकिन भारतीय मिडिल क्लास में नौकरियों पर एआई के असर को लेकर गहरी चिंता भी है। यही वजह है कि टीसीएस जैसी कंपनियों के लिए चुनौती बढ़ गई है। भारतीय ब्रांड – एयरटेल टॉप गेनर, रैंकिंग बढ़ी 3 भारतीय ब्रांड्स -ब्रांड – एयरटेल – एचडीएफसी – टीसीएस ग्लोबल – रैंक – 62 – 63 – 82 टॉप-100 – वैल्यू – 4.56 – 4.55 – 3.10 में शामिल – बदलाव – 28% – 6% – 43% (वैल्यू लाख करोड़ रुपए में) भारत के लिए एआई मौका और चुनौती दोनों – एयरटेल 4 पायदान चढ़कर 62वें स्थान पर आ गया। एचडीएफसी बैंक की ब्रांड वैल्यू सिर्फ 6% बढ़ पाई। – टीसीएस अब भी सबसे आगे है, लेकिन इसकी वैल्यू 43% गिरकर 3.1 लाख करोड़ रु. रह गई। यह रिपोर्ट में सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है। एक्सेंचर की वैल्यू भी 56% घटी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

फिल्म अभिनेता आर.माधवन के संघर्ष की कहानी:फौजी नहीं बन पाए, सर्जरी ने 3 साल रोक दिया करिअर; आज हैं पैन-इंडिया स्टार

फिल्म अभिनेता आर.माधवन के संघर्ष की कहानी:फौजी नहीं बन पाए, सर्जरी ने 3 साल रोक दिया करिअर; आज हैं पैन-इंडिया स्टार

हिंदी और तमिल सिनेमा जगत में आर.माधवन आज न सिर्फ एक स्थापित अभिनेता, बल्कि जाने-माने निर्माता-निर्देशक भी हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 25 मई को उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करेंगी। जानते हैं उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी… जमशेदपुर में एक मध्यमवर्गीय तमिल परिवार में 1 जून 1970 को जन्मे आर.माधवन का जीवन आर्थिक व शारीरिक संघर्षों और करिअर की चुनौतियों से भरा रहा है। माधवन कॉलेज के दिनों में सर्वश्रेष्ठ एनसीसी ​कैडेट थे। फौज में अफसर बनना उनका सपना था, लेकिन उम्र संबंधी नियमों के चलते वह परीक्षा में अयोग्य कर दिए गए। संघर्ष -गुजारे के लिए कोचिंग देते, फिल्मों में रिजेक्शन झेले 1993 में माधवन मुम्बई आए तो उनके पास पैसे नहीं थे। वे पब्लिक स्पीकिंग की कोचिंग और छोटी-मोटी मॉडलिंग से गुजारा करते थे। तमिल फिल्म “इरुवर’ के लिए स्क्रीन टेस्ट में मणिरत्नम ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया। चॉकलेटी छवि के कारण उन्हें गंभीर भूमिकाओं के लिए कई रिजेक्शन झेलने पड़े। माधवन जब करिअर के शिखर पर थे तो थ्री ईडियट्स की शूटिंग में उनके घुटने में चोट आई। डॉक्टरों की सलाह को अनदेखा कर वे तमिल फिल्म शूट करने लगे और वापस उसी घुटने में इतनी गंभीर चोट लगी कि उनकी ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में दो सर्जरी करनी पड़ीं। यह कॅरिअर का सबसे बुरा दौर था। 3 साल तक वे फिल्मों से दूर रहे। फिर “रॉक्रेट्री’ की शूटिंग के दौरान कोरोना आ गया। माधवन बताते हैं कि तब चार साल तक उनकी कोई कमाई नहीं हुई। सफलता – तमिल सिनेमा से चमके, रहना है से बने स्टार माधवन उन गिने-चुने अभिनेताओं में हैं, जो अंग्रेजी, हिंदी और दक्षिण भारतीय भाषाओं में 70 से ज्यादा फिल्में कर चुके हैं। सबसे पहले 1997 में माधवन ने अंग्रेजी फिल्म “इन्फर्नो’ में छोटी-सी भूमिका निभाई। इससे पहले वे टीवी एड और धारावाहिक करते थे। 1998 में “शांति,शांति,शांति’ से कन्नड डेब्यू किया। 2000 में तमिल ब्लाॅकबस्टर “अलाईपायुथे’ उनके कॅरिअर का टर्निंग पॉइंट रही। इससे पहचान मिली और माधवन ने “रहना है तेरे दिल में’ से धमाकेदार बॉलीवुड डेब्यू किया। 2006 से 2015 के बीच माधवन ने रंग देे बसंती, थ्री ईडियट्स, तनु वेड्स मनु में दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीता। “रॉक्रेट्री: द नंबी इफेक्ट’ से वो निर्माता भी बन गए। माधवन को आइफा, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, टेलीविजन अकादमी अवॉर्ड के अलावा कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं।

राजकुमार राव की बतौर निर्माता पहली थिएट्रिकल फिल्म:दशहरे पर रिलीज होगी ‘रफ्तार’, साउथ एक्ट्रेस कीर्ति सुरेश भी लीड रोल में दिखेंगी

राजकुमार राव की बतौर निर्माता पहली थिएट्रिकल फिल्म:दशहरे पर रिलीज होगी ‘रफ्तार’, साउथ एक्ट्रेस कीर्ति सुरेश भी लीड रोल में दिखेंगी

राजकुमार राव और साउथ एक्ट्रेस कीर्ति सुरेश स्टारर फिल्म ‘रफ्तार’ अब 16 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म को पहले जुलाई में रिलीज किया जाना था, लेकिन अब इसे दशहरे के लंबे वीकेंड पर दर्शकों के बीच लाने का फैसला किया गया है। फिल्म को अमेजन एमजीएम स्टूडियोज का समर्थन प्राप्त है। फिल्म का निर्माण पत्रलेखा ने अपने बैनर ‘कम्पा फिल्म’ के तहत किया है। यह पत्रलेखा और राजकुमार राव की बतौर निर्माता पहली थिएट्रिकल फिल्म होगी। फिल्म का निर्देशन आदित्य निम्बालकर ने किया है। फिल्म के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर तरुण बाली हैं, जबकि कहानी और स्क्रीनप्ले रोहन नारुला ने लिखा है। फिल्म के वितरण की जिम्मेदारी पीवीआर आईनॉक्स पिक्चर्स संभालेगी। फिल्म में अनुराग ठाकुर, रोहन वर्मा, तान्या मानिकतला और रजत कपूर भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। महत्वाकांक्षा, सत्ता और सफलता की दौड़ ‘रफ्तार’ एक ड्रामा फिल्म है, जो महत्वाकांक्षा, सत्ता और सफलता की दौड़ में चुकाई जाने वाली भावनात्मक कीमत को दर्शाती है। कहानी भारत की तेजी से बढ़ती एड-टेक इंडस्ट्री की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहां एक स्टार्टअप की तेज सफलता और उसके बाद आने वाले उतार-चढ़ाव को दिखाया जाएगा। फिल्म यह भी बताती है कि बड़े सपनों की चाहत किस तरह नैतिक सीमाओं को धुंधला कर देती है और निजी रिश्तों को प्रभावित करती है।

बॉलीवुड में अलग पहचान बना चुके कुमुद मिश्रा से बातचीत:बोले- ‘सतरंगी’ में मेरा किरदार रसूखदार, पर बेहद गंभीर है

बॉलीवुड में अलग पहचान बना चुके कुमुद मिश्रा से बातचीत:बोले- ‘सतरंगी’ में मेरा किरदार रसूखदार, पर बेहद गंभीर है

फिल्मों और ओटीटी पर अपनी अदाकारी से अलग पहचान बना चुके कुमुद मिश्रा अब जी 5 की वेब सीरीज ‘सतरंगी’ में एक जटिल और रसूखदार किरदार निभाते दिख रहे हैं। उन्होंने सीरीज, अपने को-एक्टर्स, सेट के माहौल और अभिनय के नजरिए पर खुलकर बात की… अच्छी स्क्रिप्ट और निर्देशक का विजन सबसे ज्यादा प्रभावित करता है कुमुद ने बताया…‘किसी भी प्रोजेक्ट को हां कहने की पहली वजह हमेशा स्क्रिप्ट होती है। ‘सतरंगी’ में निर्देशक का विजन और कहानी को लेकर उनका जुनून सबसे ज्यादा असर छोड़ गया। जब मुझे पता चला कि टीम में अंशुमन जैसे कलाकार हैं, तो भरोसा और बढ़ गया। वहीं आरजे महविश शुरुआत में भले वह थोड़ी संकोची लगीं, लेकिन कैमरे के सामने आते ही उनकी प्रतिभा साफ नजर आने लगी।’ काम के बाद जिंदगी को हल्केपन से जीना भी बहुत ज्यादा जरूरी है अपनी गंभीर छवि पर कुमुद ने कहा कि ‘कैमरे के सामने पूरी शिद्दत से काम करता हूं, लेकिन काम खत्म होने के बाद खुद को बहुत ज्यादा गंभीरता से लेना सही नहीं मानता। जब शॉट खत्म होता है, तो जिंदगी को हल्केपन से जीना चाहिए। सेट पर मजाक, बातचीत और एक-दूसरे की खिंचाई भी जरूरी है। ‘जॉली एलएलबी 2’ और ‘सतरंगी’ के किरदारों की कमजोरी अलग है… अपने किरदारों की तुलना पर कुमुद ने कहा कि ‘जॉली एलएलबी 2’ का इंस्पेक्टर सिंह और ‘सतरंगी’ का मौजूदा किरदार दोनों अलग दुनिया के लोग हैं। ‘सतरंगी’ का किरदार रसूखदार जरूर है, लेकिन भीतर से वह एक संवेदनशील पिता और भाई भी है।’ अक्षय के प्रैंक्स से अभी तक बचा हूं… अक्षय कुमार के साथ अपने रिश्ते पर बात करते हुए कुमुद ने कहा- अब तक उनके मशहूर प्रैंक्स से बचता आया हूं। अभी तक तो मै साफ बच गया हूं, लेकिन अब आप मुझे याद मत दिलाइए, वरना अगली बार वो कसर पूरी कर देंगे। बाकी सतरंगी के सेट पर माहौल ज्यादा सीखने और नए लोगों को समझने वाला था, न कि सिर्फ प्रैंक्स और मस्ती वाला।

भारत में आवारा कुत्ते बड़ी समस्या:पर ताइवान ने इनकी देखरेख का सबसे सफल मॉडल बनाया, यहां आवारा कुत्तों के लिए पार्क और पूल बने

भारत में आवारा कुत्ते बड़ी समस्या:पर ताइवान ने इनकी देखरेख का सबसे सफल मॉडल बनाया, यहां आवारा कुत्तों के लिए पार्क और पूल बने

भारत में आवारा कुत्तों की समस्या सिरदर्द बन चुकी है। सुप्रीम कोर्ट इन्हें मौत की नींद सुलाने की टिप्पणियां कर रहा है, लेकिन ताइवान की राजधानी ताइपे ने इस समस्या का ऐसा समाधान निकाला है, जो अब विश्व मॉडल बन रहा है। आज यहां आवारा कुत्तों को लोग गोद लेते हैं। उनके लिए मेट्रो ट्रेनें हैं। डॉग पार्क हैं। स्वीमिंग पूल हैं, लेकिन ताइपे के लिए यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। इसकी भी एक दिलचस्प कहानी है, जो भास्कर को ताइपे में हुई डॉग ​​स्प्रिंग आउटिंग इवेंट में पता चली। इसमें मेयर वांग एन चियांग भी डॉग फ्रेंडली मेट्रो और बस में सवारी करते हुए 100 से अधिक पेट मालिकों के बीच मिलने पहुंचे थे। यहां एरिजोना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फ्रांसिस नोबर्ट ने इस बदलाव की पूरी कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि एक समय यहां आवारा कुत्तों की गंभीर समस्या थी। इन्हें रोकने के लिए 1998 में एनिमल प्रोटेक्शन एक्ट लागू हुआ। फिर 2013 में ‘12 नाइट्स’ नामक डॉक्यूमेंट्री आई। इसने सरकारी शेल्टरों की भयावह तस्वीर दुनिया के सामने रखी। इसके बाद ताइवान में बड़ा जनांदोलन खड़ा हुआ। पांच उपाय: कुत्तों के कान में माइक्रोचिप, ताकि उसे व मालिक को ढूंढ सकें 1. अनिवार्य डिजिटल पहचान: हर पालतू कुत्ते के कान में माइक्रोचिप लगाई। इसमें कुत्ते और उसके मालिक की जानकारी होती है। इसकी लागत सिर्फ 650 रु. है। 2. जियो-टैगिंग एप से ट्रैकिंग: आवारा कुत्तों की ट्रैकिंग के लिए कृषि मंत्रालय ने एक एप लॉन्च किया है। नागरिक इस पर कुत्ते की फोटो जियो-टैगिंग (लोकेशन) के साथ अपलोड करते हैं, जिसके बाद नगर निकाय की टीम तुरंत उसका टीकाकरण करती है। 3. भारी जुर्माना भी: यदि कोई मालिक अपने कुत्ते को सड़क पर बेसहारा छोड़ता है तो उस पर 10 हजार रु. का जुर्माना लगाते हैं। इसे सख्ती से वसूला जाता है। 4. नसबंदी पर सब्सिडी: सरकार और नगर निगम में नर कुत्ते के लिए 3 हजार रुपए और मादा के लिए करीब 9 हजार रुपए की सब्सिडी दे रहा है। 5. स्मार्ट आउटडोर फीडिंग: खुले में खाना खिलाने वालों को नसबंदी अभियान से जोड़ा।

फ्रेंच ओपन आज से, डिफेंडिंग चैम्पियन अल्कारेज नहीं खेलेंगे:पुरुष वर्ग में सिर्फ सिनर बड़े दावेदार, महिला सिंगल्स में कई स्टार खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर

फ्रेंच ओपन आज से, डिफेंडिंग चैम्पियन अल्कारेज नहीं खेलेंगे:पुरुष वर्ग में सिर्फ सिनर बड़े दावेदार, महिला सिंगल्स में कई स्टार खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर

साल के दूसरे ग्रैंड स्लैम फ्रेंच ओपन की शुरुआत के साथ ही पेरिस की लाल मिट्टी एक बार फिर टेनिस की सबसे बड़ी कहानियों की गवाह बनने जा रही है। लेकिन इस बार पुरुष और महिला सिंगल्स की तस्वीर बिल्कुल अलग है। पुरुष वर्ग में पूरा टूर्नामेंट लगभग वर्ल्ड नंबर-1 यानिक सिनर के इर्द-गिर्द घूमता दिख रहा है, जबकि महिला सिंगल्स में इतनी दावेदार हैं कि हर दिन नई टक्कर और नया उलटफेर देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि इस बार फ्रेंच ओपन में पुरुष और महिला वर्ग दो अलग-अलग दुनिया जैसे नजर आ रहे हैं। पुरुष सिंगल्स: सिनर के सामने 127 खिलाड़ी पुरुष टेनिस में इस समय सबसे बड़ा नाम सिनर का है। इटैलियन ओपन के सेमीफाइनल में डेनियल मेदवेदेव ने शायद इस साल का अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाया। लंबी रैलियां, तेज शॉट्स और लगातार दबाव के बावजूद वह सिनर को पूरी तरह नहीं तोड़ सके। मैच के बाद मेदवेदेव ने कहा कि सिनर को हराने के लिए सर्विस, रिटर्न, फिटनेस और मानसिक मजबूती, हर चीज परफेक्ट होनी चाहिए। इस बार सिनर के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी कार्लोस अल्कारेज चोट के कारण टूर्नामेंट में नहीं हैं। पिछले साल अल्कारेज ने ही फ्रेंच ओपन फाइनल में सिनर को हराया था। उनकी गैरमौजूदगी में 128 प्लेयर्स में सिनर अकेले दावेदार लग रहे हैं। मास्टर्स 1000 स्तर पर सिनर की जीत की कड़ी 34 मैच तक पहुंच गई है। ऑस्ट्रेलियन ओपन, यूएस ओपन और विम्बलडन जीत चुके सिनर के पास अब करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करने का मौका है। महिला सिंगल्स: टॉप-10 में से 9 के पास बड़ी ट्रॉफी महिला सिंगल्स में दावेदारों की लंबी कतार है और यही इस टूर्नामेंट को बेहद रोमांचक बना रहा है। यहां टॉप-10 में से नौ के पास ग्रैंड स्लैम या डब्ल्यूटीए 1000 खिताब है। यानी हर राउंड में कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। नंबर-1 आर्यना सबालेंका लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन क्ले कोर्ट सीजन में वह थोड़ी कमजोर दिखीं। ऐसे में बाकी खिलाड़ियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। एलिना रायबकिना ऑस्ट्रेलियन ओपन जीत चुकी हैं और हर सतह पर मजबूत मानी जाती हैं। इगा स्वातेक पांचवीं बार फ्रेंच ओपन जीतने उतरेंगी, जबकि डिफेंडिंग चैम्पियन कोको गॉफ भी शानदार फॉर्म में हैं। इसके अलावा एलिना स्वितोलिना, जेसिका पेगुला और युवा स्टार मिरा एंड्रीवा भी खिताब की बड़ी दावेदार हैं। यही वजह है कि जहां पुरुष वर्ग में सबकी नजर सिर्फ सिनर पर है, वहीं महिला सिंगल्स में हर दिन नई कहानी बनने की उम्मीद है।

फिनलैंड में दोहरे इस्तेमाल वाले बंकर:अनोखा प्लेग्राउंड, इसे आपातकाल के समय 72 घंटे में बंकर में बदल सकते हैं

फिनलैंड में दोहरे इस्तेमाल वाले बंकर:अनोखा प्लेग्राउंड, इसे आपातकाल के समय 72 घंटे में बंकर में बदल सकते हैं

वैश्विक तनाव के बीच तस्वीर में दिख रहे फिनलैंड में बने ‘ड्यूल-यूज’ (दोहरे उपयोग) वाले बंकरों की मांग तेजी से बढ़ गई है। राजधानी हेलसिंकी का ‘मेरीहाका’ सिविल शेल्टर इसका अहम उदाहरण है। जमीन से 25 मीटर नीचे बना यह शेल्टर आम दिनों में स्विमिंग पूल, जिम, प्लेग्राउंड और पार्किंग की तरह इस्तेमाल होता है, लेकिन आपातकाल में इसे 72 घंटे के भीतर 6,000 लोगों के लिए सारी सुविधाओं के साथ सुरक्षित बंकर में बदला जा सकता है। 2003 में बने इस विशालकाय शेल्टर को देखने और इसकी तकनीक समझने के लिए यूक्रेन, पोलैंड, जर्मनी और यूएई सहित कई यूरोपीय व एशियाई देशों के करीब 800 प्रतिनिधिमंडल फिनलैंड का दौरा कर चुके हैं। फिनलैंड में दूसरे विश्व युद्ध के समय से ही 1,200 वर्ग मीटर से बड़ी इमारतों के नीचे बंकर बनाना कानूनन अनिवार्य है। मेरीहाका शेल्टर 71,000 घन मीटर में फैला है, जिसका आकार लगभग एक 7-मंजिला कॉमर्शियल इमारत के बराबर है। पूरे फिनलैंड में ऐसे कुल 50,500 शेल्टर मौजूद हैं, जिनमें से अकेले हेलसिंकी में 48 बड़े और 5,500 छोटे बंकर हैं। अब इन शेल्टर्स और सुरक्षा उपकरणों के निर्यात को तेज करने के लिए ‘रेजिलिएंस सेंटर फिनलैंड’ संस्था भी बनाई गई है।

यूरोप से चोरी हुए फोन चीन भेजे जा रहे:लंदन में आईफोन छीना, फिर चीन से मां को धमकियां भेजीं; एपल आईडी हटवाकर माने चोर

यूरोप से चोरी हुए फोन चीन भेजे जा रहे:लंदन में आईफोन छीना, फिर चीन से मां को धमकियां भेजीं; एपल आईडी हटवाकर माने चोर

शिकागो के 37 वर्षीय एलेक्स पिकुला मई 2024 में लंदन घूमने गए थे। वेस्ट एंड में थिएटर से बाहर निकलते ही ई-बाइक सवार बदमाश ने उनके हाथ से आईफोन छीन लिया। एलेक्स को लगा, फोन गया और बात खत्म। लेकिन असली परेशानी इसके बाद शुरू हुई। कुछ दिन बाद उनकी 65 वर्षीय मां जूडी पिकुला को अजीब मैसेज आने लगे। पहले मैसेज एपल-पे जैसा दिखा। उसमें लिखा था कि फोन चीन में इस्तेमाल हो रहा है और बेटे के बैंक अकाउंट खतरे में हैं। फिर फिलीपींस के नंबर से मैसेज आया- हमारे पास आपके बेटे के ईमेल, कार्ड, बैंक डिटेल और निजी जानकारी है। इसके बाद धमकियां तेज हो गईं। जूडी को एक वीडियो भेजा गया, जिसमें एक व्यक्ति बंदूक दिखा रहा था। मैसेज में दुष्कर्म, हत्या और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी थी। गैंग की एक ही मांग थी- चोरी हुए फोन से एपल आईडी हटाओ। एलेक्स ने मां से कहा कि इसे नजरअंदाज करें, लेकिन धमकियां बढ़ती गईं। आखिरकार एलेक्स ने फोन से एपल आईडी हटा दी और डेटा मिटा दिया। इसके बाद धमकी भरे मैसेज बंद हो गए। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में लंदन में रिकॉर्ड 81 हजार फोन चोरी हुए। 2025 में यह संख्या घटकर करीब 71 हजार रही, लेकिन चोरी के बाद धमकियों का ट्रेंड बढ़ गया। लंदन पुलिस अब उन अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर फोकस कर रही है, जो चोरी के फोन चीन भेजते हैं। कई पीड़ितों ने बताया कि फोन चीन के शेन्जेन शहर में दिखा। क्रिमिनोलॉजिस्ट डेविड वॉल के मुताबिक, गैंग पहले फर्जी एपल मैसेज भेजते हैं। फिर खुद को मददगार खरीदार बताते हैं। जब पीड़ित नहीं मानता, तो हिंसक धमकियां शुरू हो जाती हैं। ये मनोवैज्ञानिक हमला है विशेषज्ञ इसे मनोवैज्ञानिक हमला बताते हैं, क्योंकि फोन में बैंकिंग, फोटो, ईमेल और निजी डेटा होता है। चोरी के आईफोन को नया खरीदार तभी इस्तेमाल कर सकता है, जब पुरानी एपल आईडी हटे। आईडी जुड़ी रहे तो फोन रीसेट नहीं होता और उसकी रीसेल वैल्यू खत्म हो जाती है। इसलिए गैंग पीड़ितों को धमकाकर फोन को अनलिंक करवाते हैं, ताकि उसे ब्लैक मार्केट में बेचा जा सके। साइबर विशेषज्ञों की सलाह है कि चोरी के बाद फोन को लॉक और वाइप करें, लेकिन एपल आईडी से न हटाएं। एपल भी कहता है कि फोन को फाइंड माई लिस्ट में रहने दें, ताकि चोर उसे नए यूजर के लिए सेटअप न कर सकें।

मेंटल हेल्थ को लेकर चिंतित परिवार‎:अमेरिका में बच्चों की होम स्कूलिंग‎ पांच साल में दोगुनी से ज्यादा बढ़ी‎

मेंटल हेल्थ को लेकर चिंतित परिवार‎:अमेरिका में बच्चों की होम स्कूलिंग‎ पांच साल में दोगुनी से ज्यादा बढ़ी‎

अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे ‎‎देशों में बच्चों को घर में पढ़ाने यानी होम स्कूलिंग ‎का चलन तेजी से बढ़ रहा है। 2024 में अमेरिका ‎में स्कूल जाने की उम्र के करीब 32 लाख यानी ‎6% बच्चों ने घर में पढ़ाई की। यह संख्या 2019‎ के मुकाबले दोगुनी है। पहले होम स्कूलिंग मुख्य ‎रूप से परंपरावादी ईसाइयों से जुड़ी मानी जाती‎ थी। लेकिन अब दूसरे समुदायों में भी इसका‎ चलन बढ़ रहा है। कई पैरेंट्स स्कूलों में भेदभाव, ‎‎संवेदनहीन पाठ्यक्रम, सोशल मीडिया के दबाव‎ और बच्चों की मानसिक सेहत को लेकर चिंतित ‎हैं। डब्ल्यूएचओ के 44 देशों में हुए सर्वे के‎ मुताबिक स्कूल का दबाव महसूस करने वाली 15‎साल की लड़कियों की संख्या 2018 से 2022‎ के बीच 54% से बढ़कर 63% हो गई। इंग्लैंड के ‎एक सर्वे में घर में पढ़ने वाले छह में से एक बच्चे ‎की पढ़ाई पर मानसिक स्वास्थ्य का असर पाया‎ गया। हालांकि चीन, जर्मनी, ग्रीस, स्पेन औेर‎ तुर्की में इसकी अनुमति मुश्किल से मिलती है।‎ अमेरिका में सबसे ज्यादा‎ 2019-24 के बीच होम स्कूलिंग के मामले में‎ सबसे ज्यादा वृद्धि अमेरिका में हुई। यहां करीब ‎32 लाख बच्चों ने घर पर पढ़ाई की जो करीब‎ 120% की वृद्धि है। ऐसे ही ब्रिटेन में एक लाख‎12 हजार ( 105%) और ऑस्ट्रेलिया में 63‎हजार ( 95%) बच्चों ने होम स्कूलिंग की।‎

बंद फोन, लैपटॉप पर भी आपके काम करेगा एआई:गूगल-ओपन एआई के बीच प्रतिस्पर्धा, जेमिनाई के नए एजेंट लाॅन्च‎

बंद फोन, लैपटॉप पर भी आपके काम करेगा एआई:गूगल-ओपन एआई के बीच प्रतिस्पर्धा, जेमिनाई के नए एजेंट लाॅन्च‎

गूगल अब केवल सर्च इंजन कंपनी नहीं रहना चाहती। उसका अगला लक्ष्य कंज्यूमर एआई की दुनिया में वही दबदबा बनाना है, जो कभी इंटरनेट सर्च में था। और अब ऐसा लगने लगा है कि वह ओपनएआई से एआई की दौड़ में ताज छीन सकती है। 19 मई को गूगल ने नए जेमिनाई 3.5 फ्लैश मॉडल से चलने वाले एआई एजेंट्स की श्रृंखला पेश की। इनमें ऐसे एआई कोडर्स भी शामिल हैं जो ओपनएआई और एंथ्रोपिक के टूल्स को चुनौती देने के लिए बनाए गए हैं। गूगल का फोकस अब केवल चैटबॉट नहीं, बल्कि “काम करने वाले एआई’ पर है। कंपनी ऐसे एजेंट्स ला रही है जो यूजर के फोन या लैपटॉप बंद करने के बाद भी काम जारी रख सकेंगे। “जेमिनाई स्पार्क’ नाम का एजेंट ईमेल स्कैन करने, ग्रुप ट्रिप आयोजित करने जैसे कई डिजिटल काम अपने आप निपटा सकेगा। वहीं गूगल सर्च में जोड़े जा रहे “इंफॉर्मेशन एजेंट्स’ स्पोर्ट्स टूर्नामेंट्स, शॉपिंग सेल्स और शेयर बाजार पर नजर रखेंगे। उसके कुछ एजेंट सीधे जेमिनाई ऐप में होंगे, जिसे हर महीने करीब 90 करोड़ लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ एआई फीचर्स गूगल सर्च में जुड़ेंगे। इससे ओपनएआई पर दबाव बढ़ सकता है। दरअसल, गूगल की तेजी ने ओपनएआई को पहले ही सतर्क कर दिया था। नवंबर में जेमिनाई- 3 मॉडल आने के बाद ओपनएआई के सीईओ सैम आल्टमैन ने कर्मचारियों के लिए “कोड रेड’ इमरजेंसी जारी की थी। इसके बाद कंपनी ने अपने कोडिंग एजेंट्स पर फोकस बढ़ाया। लेकिन जेमिनाई 3.5 फ्लैश और नए एआई एजेंट्स ने फिर चैटजीपीटी की बढ़त पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट इनकॉर्पोरेशन का बाजार मूल्य जनवरी के 382 लाख करोड़ रु. से बढ़कर अब लगभग 478 लाख करोड़ रु. तक पहुंच गया है। हालांकि इस सफलता के साथ चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। सीईओ सुंदर पिचई के मुताबिक एआई उपयोग मापने वाले टोकन्स की संख्या एक साल पहले 480 खरब थी, जो अब बढ़कर हर महीने 3.2 क्वाड्रिलियन (3.2 के बाद 15 जीरो) हो गई है। इसका मतलब है कि कम्प्यूटिंग कॉस्ट तेजी से बढ़ रही है। खर्च घटाने के लिए गूगल एआई सेवाओं में विज्ञापन जोड़ सकती है। फिलहाल जेमिनाई एप में विज्ञापन नहीं हैं, लेकिन गूगल ने सर्च सेवाओं के एआई-जनरेटेड जवाबों में विज्ञापन दिखाने शुरू कर दिए हैं। यही संकेत है कि आने वाले समय में एआई केवल तकनीकी लड़ाई नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा विज्ञापन और डेटा कारोबार भी बनने जा रहा है। पूंजी खर्च छह गुना बढ़ेगा‎ एआई टोकन जनरेट करने के लिए कंप्यूटिंग‎पॉवर लगती है। इस कारण गूगल का पूंजी‎खर्च चार साल पहले से छह गुना बढ़कर ‎इस साल 18.18 लाख करोड़ रु. हो जाएगा। ‎चिप से लेकर बिजली के दाम बढ़ने से यह ‎खर्च और भी बढ़ सकता है।‎