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Maharashtra Rajya Sabha Election: BJP Candidates List Released

Maharashtra Rajya Sabha Election: BJP Candidates List Released

नई दिल्ली17 मिनट पहले

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राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 4 प्रत्याशियों के नाम वाली दूसरी लिस्ट जारी की है। इसमें केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष विनोद तावड़े और माया चिंतामन इवनाते और रामराव वडकुते के नाम हैं।

3 मार्च: 9 प्रत्याशियों के नाम की पहली लिस्ट

एक दिन पहले भाजपा ने राज्यसभा के लिए पार्टी उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसमें 6 राज्यों से 9 नाम शामिल थे। अब 7 राज्यों से कुल 13 प्रत्याशियों के नाम का ऐलान हो चुका है।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी बिहार से राज्यसभा भेजे जाएंगे। उनके अलावा बिहार से शिवेश कुमार का भी नाम है। छत्तीसगढ़ से भाजपा ने लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाया है।

असम से तेराश गोवाला, जोगेन मोहन, हरियाणा से संजय भाटिया, ओडिशा मनमोहन सामल, सुजीत कुमार और पश्चिम बंगाल से राहुल सिन्हा उम्मीदवार हैं।

10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को चुनाव कराया जाएगा। 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच वोटिंग होगी और उसी दिन शाम 5 बजे वोटों की गिनती की जाएगी।

राज्यसभा के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल पूरा

ये सभी सीटें संबंधित सदस्यों के कार्यकाल पूरा होने के कारण रिक्त हो रही हैं। राज्यसभा का कार्यकाल छह साल का होता है। जिन सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है, उनकी सीटों पर ये चुनाव कराए जा रहे हैं। निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल उनके शपथ ग्रहण की तिथि से आगामी छह वर्षों, यानी 2032 तक रहेगा। संबंधित राज्यों की जिन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, वहीं ये सीटें रिक्त मानी जाएंगी।

37 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव

चुनाव आयोग ने 18 फरवरी को 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव की तारीखों का ऐलान किया था। 37 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होना है। जो सीटें खाली हो रही हैं, उनमें 12 एनडीए के पास हैं, 25 पर विपक्षका कब्जा है।

सबसे ज्यादा महाराष्ट्र की 7, तमिलनाडु की 6 और पश्चिम बंगाल-बिहार की 5-5 सीटों पर चुनाव कराया जाना है। शरद पवार, रामदास अठावले, कणिमोझी, तिरुचि शिवा, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का कार्यकाल 2 अप्रैल को समाप्त हो रहा है।

16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच वोटिंग होगी और उसी दिन शाम 5 बजे वोटों की गिनती की जाएगी।

बैलेट पेपर पर खास पेन से होगी वोटिंग

चुनाव आयोग ने कहा है कि वोट डालते समय केवल रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से दिए गए तय मानक का वॉयलेट रंग का स्केच पेन ही इस्तेमाल होगा। किसी अन्य पेन का उपयोग मान्य नहीं होगा।

आयोग ने कहा है कि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे। चुनाव आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में EVM और VVPAT को लेकर जागरूकता अभियान भी शुरू किया है।

आयोग के मुताबिक 5 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में 1.20 लाख से ज्यादा लोगों ने डेमो कैंप में हिस्सा लिया। 1.16 लाख से ज्यादा लोगों ने मॉक वोट डाले। 10 फरवरी तक 29 हजार से ज्यादा पोलिंग स्टेशन लोकेशन मोबाइल डेमो वैन से कवर किए जा चुके हैं। यह अभियान EVM डेमो सेंटर और मोबाइल वैन के जरिए चलाया जा रहा है।

ऐसे होता है राज्यसभा चुनाव

राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया दूसरे चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं।

चुनाव हर दो साल में होते हैं, क्योंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं।

राज्यसभा सीटों की कुल संख्या 245 हैं। इनमें से 233 सीटों पर अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है।

महाराष्ट्र की 7 सीटों के उदाहरण से फॉर्मूला समझते हैं

राज्यसभा चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए एक निश्चित संख्या में मतों की आवश्यकता होती है, जिसे जीतने का कोटा (Quota) कहा जाता है। महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 विधायक हैं। खाली हो रही सीटें 7 हैं।

कुल विधायकों की संख्या x 100/ (राज्यसभा की सीटें+1) = +1 288X100/(7+1)= +1 28800/8= +1 3600= +1 3601 चूंकि एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 होती है। इसलिए महाराष्ट्र में अभी एक राज्यसभा सीट पर जीत के लिए कम से कम 36 विधायकों की जरूरत होगी।

अब समझिए राज्यों का समीकरण…

बिहार: चिराग पासवान मां को बनवाएंगे सांसद, हरिवंश रिपीट हो सकते हैं

जदयू के जिन दो नेताओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर का नाम है। बड़े पद पर होने और सीएम के करीबी होने के कारण चर्चा है कि इन्हें एक बार फिर से रिपीट किया जा सकता है।

चिराग के लिए यही परीक्षा होगी। विधानसभा चुनाव के दौरान भी मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से दावा किया गया था कि वे अपनी मां के लिए राज्यसभा के एक सीट की डिमांड कर रहे है। पूरी खबर पढ़ें…

छत्तीसगढ़: केटीएस तुलसी और फूलो देवी नेताम का कार्यकाल हो रहा खत्म

छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी और फूलो देवी नेताम का कार्यकाल 2 अप्रैल 2026 को समाप्त हो जाएगा। केटीएस तुलसी सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील हैं। वह 2020 में छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद चुने गए थे।

वहीं, फूलो देवी नेताम बस्तर क्षेत्र से आने वाली आदिवासी नेता हैं। वह छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। सामाजिक और जनजातीय मुद्दों पर उनकी मजबूत आवाज रही है। वह भी 2020 में राज्यसभा सांसद चुनी गई थीं। पूरी खबर पढ़ें…

हरियाणा: किरण चौधरी-रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल खत्म हो रहा

भाजपा के दो राज्यसभा सांसद किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल 9 अप्रैल तक है। राज्यसभा सांसद राम चंद्र जांगड़ा मार्च 2020 में राज्यसभा सांसद बने थे। वे निर्विरोध चुने गए थे।

वहीं, किरण चौधरी 27 अगस्त 2024 को राज्यसभा उपचुनाव में निर्विरोध सांसद चुनी गई थीं। यह सीट दीपेंद्र हुड्डा के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। दीपेंद्र ने रोहतक से सांसद बनने के बाद इस्तीफा दिया था। इस बार भाजपा और कांग्रेस को एक-एक सीट मिल सकती है। पूरी खबर पढ़ें… ————————

ये खबर भी पढ़ें…

TMC ने राज्यसभा के लिए 4 कैंडिडेट का ऐलान किया:इनमें सुप्रीम कोर्ट के वकील मेनका गुरुस्वामी का नाम; जीते तो पहले LGBTQ सांसद होंगे

तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार शाम को राज्यसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। इनमें मंत्री बाबुल सुप्रियो, बंगाल के पूर्व DGP राजीव कुमार, सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी और एक्ट्रेस कोयल मल्लिक का नाम शामिल है। पूरी खबर पढ़ें…

भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। पार्टी हाईकमान ने 6 राज्यों के लिए कैंडिडेट की लिस्ट जारी की है। जिसमें छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा का नाम है।

मंथन के बाद 7 नामों के पैनल में से 3 नामों को अंतिम रूप दिया था। इनमें लक्ष्मी वर्मा, नारायण चंदेल और डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी का नाम शामिल था। जिसके बाद पार्टी ने राजनीति में 30 साल से सक्रिय रही लक्ष्मी वर्मा को टिकट दिया है।

बता दें कि लंबे समय से चर्चा थी कि, राज्यसभा के लिए संगठन और सामाजिक समीकरण के साथ ही मातृशक्ति को मौका दिया जाएगा। दैनिक भास्कर ने पहले ही बता दिया था कि किसी महिला उम्मीदवार को मौका मिल सकता है।

‘मातृशक्ति’ को प्राथमिकता

राजनीतिज्ञ जानकारों के मुताबिक, पार्टी इस बार ‘मातृशक्ति’ को प्राथमिकता देने के मूड में थी। ऐसे में लक्ष्मी वर्मा का नाम सबसे आगे चल रहा था। संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और महिला वर्ग में पकड़ को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व ने सकारात्मक संकेत दिए।

बीजेपी ने मंथन के बाद 3 नाम तय किए हैं। इनमें लक्ष्मी वर्मा का नाम सबसे आगे था। (फाइल फोटो)

बीजेपी ने मंथन के बाद 3 नाम तय किए हैं। इनमें लक्ष्मी वर्मा का नाम सबसे आगे था। (फाइल फोटो)

चंदेल-बांधी भी मजबूत दावेदार थे

नारायण चंदेल और डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी भी मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। दोनों का संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक पृष्ठभूमि मजबूत है, लेकिन महिला प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देने की रणनीति ने समीकरण बदल दिए।

इससे पहले शुरुआती पैनल में लक्ष्मी वर्मा, नारायण चंदेल, सरोज पांडेय, भूपेंद्र सवन्नी, किरण बघेल, डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी और निर्मल का नाम शामिल था। विचार-विमर्श के बाद तीन नाम शॉर्टलिस्ट किए गए थे।

अभी ये हैं राज्यसभा सांसद

छत्तीसगढ़ से राज्यसभा के लिए वर्तमान में 5 सदस्य प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनमें 2 सांसदों का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, जबकि 2 सदस्यों का कार्यकाल 2028 और 2030 तक जारी रहेगा।

9 अप्रैल 2026 तक कार्यकाल वाले सांसदों में फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी शामिल हैं। यह दोनों कांग्रेस पार्टी से हैं। इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला और रंजीत रंजन का कार्यकाल 29 जून 2028 तक है। वहीं भाजपा से देवेन्द्र प्रताप सिंह का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक निर्धारित है।

ऐसे होता है राज्यसभा चुनाव

राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया दूसरे चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। चुनाव हर दो साल में होते हैं, क्योंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं।

राज्यसभा सीटों की कुल संख्या 245 हैं। इनमें से 233 सीटों पर अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है।

छत्तीसगढ़ की 2 सीटों के उदाहरण से फॉर्मूला समझते हैं

राज्यसभा चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए एक निश्चित संख्या में मतों की आवश्यकता होती है, जिसे जीतने का कोटा (Quota) कहा जाता है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं। खाली हो रही सीटें 2 हैं।

कुल विधायक ÷ (रिक्त सीटें + 1) + 1। यानी 90 ÷ (2+1) = 90 ÷ 3 = 30, और उसमें 1 जोड़ने पर आंकड़ा 31 आता है। इसका मतलब साफ है कि किसी भी उम्मीदवार को एक सीट जीतने के लिए कम से कम 31 विधायकों के प्रथम वरीयता मत चाहिए। राज्यसभा चुनाव में हर विधायक के वोट की वैल्यू समान होती है। इसलिए जो उम्मीदवार 31 का आंकड़ा पार कर लेता है, उसकी जीत सुनिश्चित हो जाती है।

………………….

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छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की 2 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 26 फरवरी को अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि 5 मार्च नामांकन की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने अपने-अपने स्तर पर मंथन तेज कर दिया है। पढ़ें पूरी खबर…

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असम से तेराश गोवाला, जोगेन मोहन, हरियाणा से संजय भाटिया, ओडिशा मनमोहन सामल, सुजीत कुमार और पश्चिम बंगाल से राहुल सिन्हा उम्मीदवार हैं।

10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को चुनाव कराया जाएगा। 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच वोटिंग होगी और उसी दिन शाम 5 बजे वोटों की गिनती की जाएगी।

राज्यसभा के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल पूरा

ये सभी सीटें संबंधित सदस्यों के कार्यकाल पूरा होने के कारण रिक्त हो रही हैं। राज्यसभा का कार्यकाल छह साल का होता है। जिन सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है, उनकी सीटों पर ये चुनाव कराए जा रहे हैं। निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल उनके शपथ ग्रहण की तिथि से आगामी छह वर्षों, यानी 2032 तक रहेगा। संबंधित राज्यों की जिन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, वहीं ये सीटें रिक्त मानी जाएंगी।

37 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव

चुनाव आयोग ने 18 फरवरी को 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव की तारीखों का ऐलान किया था। 37 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होना है। जो सीटें खाली हो रही हैं, उनमें 12 एनडीए के पास हैं, 25 पर विपक्षका कब्जा है।

सबसे ज्यादा महाराष्ट्र की 7, तमिलनाडु की 6 और पश्चिम बंगाल-बिहार की 5-5 सीटों पर चुनाव कराया जाना है। शरद पवार, रामदास अठावले, कणिमोझी, तिरुचि शिवा, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का कार्यकाल 2 अप्रैल को समाप्त हो रहा है।

16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच वोटिंग होगी और उसी दिन शाम 5 बजे वोटों की गिनती की जाएगी।

बैलेट पेपर पर खास पेन से होगी वोटिंग

चुनाव आयोग ने कहा है कि वोट डालते समय केवल रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से दिए गए तय मानक का वॉयलेट रंग का स्केच पेन ही इस्तेमाल होगा। किसी अन्य पेन का उपयोग मान्य नहीं होगा।

आयोग ने कहा है कि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे। चुनाव आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में EVM और VVPAT को लेकर जागरूकता अभियान भी शुरू किया है।

आयोग के मुताबिक 5 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में 1.20 लाख से ज्यादा लोगों ने डेमो कैंप में हिस्सा लिया। 1.16 लाख से ज्यादा लोगों ने मॉक वोट डाले। 10 फरवरी तक 29 हजार से ज्यादा पोलिंग स्टेशन लोकेशन मोबाइल डेमो वैन से कवर किए जा चुके हैं। यह अभियान EVM डेमो सेंटर और मोबाइल वैन के जरिए चलाया जा रहा है।

ऐसे होता है राज्यसभा चुनाव

राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया दूसरे चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं।

चुनाव हर दो साल में होते हैं, क्योंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं।

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राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है।

महाराष्ट्र की 7 सीटों के उदाहरण से फॉर्मूला समझते हैं

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कुल विधायकों की संख्या x 100/ (राज्यसभा की सीटें+1) = +1 288X100/(7+1)= +1 28800/8= +1 3600= +1 3601 चूंकि एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 होती है। इसलिए महाराष्ट्र में अभी एक राज्यसभा सीट पर जीत के लिए कम से कम 36 विधायकों की जरूरत होगी।

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चिराग के लिए यही परीक्षा होगी। विधानसभा चुनाव के दौरान भी मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से दावा किया गया था कि वे अपनी मां के लिए राज्यसभा के एक सीट की डिमांड कर रहे है। पूरी खबर पढ़ें…

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छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी और फूलो देवी नेताम का कार्यकाल 2 अप्रैल 2026 को समाप्त हो जाएगा। केटीएस तुलसी सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील हैं। वह 2020 में छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद चुने गए थे।

वहीं, फूलो देवी नेताम बस्तर क्षेत्र से आने वाली आदिवासी नेता हैं। वह छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। सामाजिक और जनजातीय मुद्दों पर उनकी मजबूत आवाज रही है। वह भी 2020 में राज्यसभा सांसद चुनी गई थीं। पूरी खबर पढ़ें…

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वहीं, किरण चौधरी 27 अगस्त 2024 को राज्यसभा उपचुनाव में निर्विरोध सांसद चुनी गई थीं। यह सीट दीपेंद्र हुड्डा के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। दीपेंद्र ने रोहतक से सांसद बनने के बाद इस्तीफा दिया था। इस बार भाजपा और कांग्रेस को एक-एक सीट मिल सकती है। पूरी खबर पढ़ें… ————————

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मंथन के बाद 7 नामों के पैनल में से 3 नामों को अंतिम रूप दिया था। इनमें लक्ष्मी वर्मा, नारायण चंदेल और डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी का नाम शामिल था। जिसके बाद पार्टी ने राजनीति में 30 साल से सक्रिय रही लक्ष्मी वर्मा को टिकट दिया है।

बता दें कि लंबे समय से चर्चा थी कि, राज्यसभा के लिए संगठन और सामाजिक समीकरण के साथ ही मातृशक्ति को मौका दिया जाएगा। दैनिक भास्कर ने पहले ही बता दिया था कि किसी महिला उम्मीदवार को मौका मिल सकता है।

‘मातृशक्ति’ को प्राथमिकता

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बीजेपी ने मंथन के बाद 3 नाम तय किए हैं। इनमें लक्ष्मी वर्मा का नाम सबसे आगे था। (फाइल फोटो)

बीजेपी ने मंथन के बाद 3 नाम तय किए हैं। इनमें लक्ष्मी वर्मा का नाम सबसे आगे था। (फाइल फोटो)

चंदेल-बांधी भी मजबूत दावेदार थे

नारायण चंदेल और डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी भी मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। दोनों का संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक पृष्ठभूमि मजबूत है, लेकिन महिला प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देने की रणनीति ने समीकरण बदल दिए।

इससे पहले शुरुआती पैनल में लक्ष्मी वर्मा, नारायण चंदेल, सरोज पांडेय, भूपेंद्र सवन्नी, किरण बघेल, डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी और निर्मल का नाम शामिल था। विचार-विमर्श के बाद तीन नाम शॉर्टलिस्ट किए गए थे।

अभी ये हैं राज्यसभा सांसद

छत्तीसगढ़ से राज्यसभा के लिए वर्तमान में 5 सदस्य प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनमें 2 सांसदों का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, जबकि 2 सदस्यों का कार्यकाल 2028 और 2030 तक जारी रहेगा।

9 अप्रैल 2026 तक कार्यकाल वाले सांसदों में फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी शामिल हैं। यह दोनों कांग्रेस पार्टी से हैं। इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला और रंजीत रंजन का कार्यकाल 29 जून 2028 तक है। वहीं भाजपा से देवेन्द्र प्रताप सिंह का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक निर्धारित है।

ऐसे होता है राज्यसभा चुनाव

राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया दूसरे चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। चुनाव हर दो साल में होते हैं, क्योंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं।

राज्यसभा सीटों की कुल संख्या 245 हैं। इनमें से 233 सीटों पर अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है।

छत्तीसगढ़ की 2 सीटों के उदाहरण से फॉर्मूला समझते हैं

राज्यसभा चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए एक निश्चित संख्या में मतों की आवश्यकता होती है, जिसे जीतने का कोटा (Quota) कहा जाता है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं। खाली हो रही सीटें 2 हैं।

कुल विधायक ÷ (रिक्त सीटें + 1) + 1। यानी 90 ÷ (2+1) = 90 ÷ 3 = 30, और उसमें 1 जोड़ने पर आंकड़ा 31 आता है। इसका मतलब साफ है कि किसी भी उम्मीदवार को एक सीट जीतने के लिए कम से कम 31 विधायकों के प्रथम वरीयता मत चाहिए। राज्यसभा चुनाव में हर विधायक के वोट की वैल्यू समान होती है। इसलिए जो उम्मीदवार 31 का आंकड़ा पार कर लेता है, उसकी जीत सुनिश्चित हो जाती है।

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छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की 2 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 26 फरवरी को अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि 5 मार्च नामांकन की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने अपने-अपने स्तर पर मंथन तेज कर दिया है। पढ़ें पूरी खबर…

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