Will Making FAQs; Testament Legal Documents List & Process Explained

Hindi News Lifestyle Will Making FAQs; Testament Legal Documents List & Process Explained | Vasiyat 38 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक लोग जीवन भर भागदौड़ करते हैं, ताकि अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर सकें और संपत्ति बना सकें। लेकिन इस सबके बीच अक्सर यह तय करना भूल जाते हैं कि उनके बाद इस संपत्ति का क्या होगा? इसका सबसे अच्छा हल है, वसीयत। यह एक कानूनी डॉक्यूमेंट है, जिसमें व्यक्ति ये तय करता है कि उसकी संपत्ति, बैंक बैलेंस, निवेश और अन्य कीमती चीजें उसके बाद किसे मिलेंगी। वसीयत परिवार को विवाद, तनाव और कानूनी झंझटों से भी बचा सकती है। आज ‘आपका पैसा‘ कॉलम में वसीयत की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- वसीयत बनाना क्यों जरूरी है? इसका कंप्लीट प्रोसेस क्या है? एक्सपर्ट: रुद्र विक्रम सिंह, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट सवाल- वसीयत क्या होती है? जवाब- वसीयत एक लिखित कानूनी डॉक्यूमेंट है, जिसमें व्यक्ति ये स्पष्ट निर्देश देता है कि मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति का मालिक कौन होगा। इसमें बैंक बैलेंस, प्रॉपर्टी, निवेश, गहने और अन्य संपत्तियों का बंटवारा तय किया जाता है। सवाल- वसीयत कौन बना सकता है? जवाब- भारत में कोई भी व्यक्ति, जिसकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक है और जो मानसिक रूप से स्वस्थ है, वसीयत बना सकता है। हालांकि, व्यक्ति को यह साबित करने में सक्षम होना चाहिए कि उसने यह डॉक्यूमेंट किसी दबाव, धोखे या लालच के बिना तैयार किया है। सवाल- वसीयत बनाना क्यों जरूरी है? जवाब- इससे व्यक्ति ये तय कर सकता है कि मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति का मालिक कौन होगा। अगर वसीयत न बनाई जाए तो कानून अपने हिसाब से संपत्ति का बंटवारा करता है, जो व्यक्ति की इच्छाओं के खिलाफ भी हो सकता है। इसके अलावा वसीयत से परिवार में विवाद की आशंका कम हो जाती है और कानूनी प्रक्रिया भी सरल हो जाती है। यह खासतौर पर तब और भी जरूरी है, जब परिवार के कई सदस्य संपत्ति के दावेदार हों। इसके सभी फायदे ग्राफिक में देखिए- सवाल- वसीयत कैसे लिखें? जवाब- वसीयत लिखने का कोई तय फॉर्मेट नहीं होता, लेकिन इसमें कुछ नियमों को फॉलो करना जरूरी है। जैसेकि- सबसे पहले व्यक्ति को यह घोषित करना होता है कि वसीयत लिखते समय वह दिमागी रूप से स्वस्थ है और इसे बिना किसी दबाव के लिख रहा है। इसके बाद उसे अपनी सभी संपत्तियों की सूची तैयार करनी होती है। वसीयत के कागज पर यह स्पष्ट रूप से लिखना जरूरी है कि कौन-सी संपत्ति किसे दी जानी है। अगर बच्चे नाबालिग हैं, तो वसीयतनामा पर गार्जियन का नाम लिखना जरूरी है, जो संपत्ति की रक्षा करेगा। बच्चों के बालिग होने पर उन्हें सौंपेगा। इसका पूरा प्रोसेस ग्राफिक से समझिए- सवाल- वसीयत में कौन-कौन सी जानकारी होनी चाहिए? जवाब- वसीयत में आपकी पर्सनल और फाइनेंशियल जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए। इसमें वसीयत लिख रहे व्यक्ति का पूरा नाम, जन्मतिथि, पता और पहचान संबंधी जानकारी होनी चाहिए। यह जानकारी आधार और पैन कार्ड के मुताबिक होनी चाहिए। इसमें अपनी सभी चल और अचल संपत्तियों का विवरण देना जरूरी है, जैसे घर, जमीन, बैंक अकाउंट, निवेश आदि। इसमें और कौन-कौन सी जानकारियां जरूरी हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या वसीयत रजिस्टर कराना जरूरी है? जवाब- भारत में वसीयत को रजिस्टर कराना अनिवार्य नहीं है। आप इसे साधारण कागज पर लिखकर भी कानूनी रूप से वैध बना सकते हैं, बशर्ते सभी आवश्यक शर्तें पूरी की गई हों। हालांकि, वसीयत का रजिस्ट्रेशन करवाने से इसकी प्रामाणिकता बढ़ जाती है और भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में इसे चुनौती देना मुश्किल होता है। रजिस्ट्रेशन से डॉक्यूमेंट्स सुरक्षित रहते हैं और इससे छेड़छाड़ की आशंका कम हो जाती है। सवाल- वसीयत में कौन-कौन से कानूनी शब्द होते हैं? इनका क्या मतलब है? जवाब- इसमें कई महत्वपूर्ण कानूनी शब्द होते हैं। आइए इन्हें एक-एक करके समझते हैं। टेस्टेटर- जो व्यक्ति वसीयत बना रहा है। एग्जीक्यूटर- जो व्यक्ति वसीयत को लागू करेगा। बेनिफिशियरी- जिसे/जिन्हें संपत्ति मिलेगी। कोडोसिल- वसीयत में किया गया बदलाव या सुधार। प्रोबेट- अदालत द्वारा वसीयत की पुष्टि। इंटेस्टेट- अगर किसी व्यक्ति की वसीयत लिखे बिना मृत्यु हो जाती है। सवाल- डिजिटल वसीयत (Digital Will) क्या है? जवाब- डिजिटल वसीयत एक ऐसा डॉक्यूमेंट है, जो अक्सर ऑनलाइन सुरक्षित रखा जाता है। इसमें यह लिखा होता है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति की डिजिटल संपत्तियां किसे मिलेंगी, जैसे- सोशल मीडिया अकाउंट क्रिप्टोकरेंसी क्लाउड फाइल्स ईमेल अकाउंट ऑनलाइन बैंकिंग अकाउंट डिजिटल वॉलेट इसमें यह स्पष्ट किया जाता है कि इन अकाउंट्स का एक्सेस किन लोगों को मिलेगा। यह आधुनिक समय में उतनी ही जरूरी है, जितनी पारंपरिक वसीयत। सवाल- अगर वसीयत न लिखी गई हो तो क्या होगा? जवाब- अगर वसीयत लिखे बिना ही किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसकी संपत्ति का बंटवारा कानून के अनुसार होता है। हिन्दू उत्तराधिकार कानून- हिंदुओं के लिए। इंडियन सक्सेशन एक्ट- ईसाइयों और पारसियों के लिए। शरीयत कानून- मुसलमानों के लिए। इस स्थिति में व्यक्तिगत इच्छाओं का कोई महत्व नहीं दिया जाता और संपत्ति तय कानूनी नियमों के अनुसार बांटी जाती है। सवाल- क्या वसीयत बदली जा सकती है? जवाब- हां, वसीयत को जीवित रहते किसी भी समय बदला जा सकता है। अगर आपकी संपत्ति, पारिवारिक स्थिति या इच्छाओं में बदलाव आता है तो आप नई वसीयत बना सकते हैं। इसमें संशोधन भी किया जा सकता है। नई वसीयत बनाते ही पुरानी अपने आप निरस्त हो जाती है। संशोधन करते समय भी नई वसीयत की तरह ही पूरी प्रक्रिया अपनानी होती है। सवाल- क्या नॉमिनी ही वसीयत का असली मालिक होता है? जवाब- नहीं, नॉमिनी केवल ट्रस्टी होता है, वह असली मालिक नहीं होता है। उसका काम संपत्ति को सुरक्षित रखना और उसे सही वारिस तक पहुंचाना होता है। कानूनी मालिक वही होता है, जिसका नाम वसीयत में बेनीफिशियरी के रूप में लिखा होता है। सवाल- क्या वसीयत को चुनौती दी जा सकती है? जवाब- हां, वसीयत को चुनौती दी जा सकती है, लेकिन यह सिर्फ सीमित परिस्थितियों में होता है, जैसे- अगर दबाव बनाकर वसीयत लिखवाई गई हो। अगर धोखाधड़ी की गई हो। अगर मानसिक अस्थिरता में वसीयत लिखवाई गई हो। अगर गवाह मुकर जाएं। अगर डॉक्यूमेंट्स अस्पष्ट हैं। इसलिए इसे साफ भाषा, सही प्रक्रिया और
Soya Chunks Health Benefits Explained; Protein – Nutritional Value

Hindi News Lifestyle Soya Chunks Health Benefits Explained; Protein Nutritional Value | Side Effects 28 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सोया चंक्स शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का बेहतरीन सोर्स है। इसमें प्रोटीन के साथ फाइबर, कैल्शियम और आयरन जैसे कई जरूरी पोषक तत्व भी होते हैं। ये मसल्स और हड्डियों को मजबूत रखने व शरीर की इम्यूनिटी को सपोर्ट करने में मदद करता है। ‘नेशनल सेंटर फॉर कॉम्प्लिमेंटरी एंड इंटीग्रेटिव हेल्थ (NCCIH)’ के मुताबिक, सोया चंक्स कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करने में मददगार हैं। इससे महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान होने वाले हॉट फ्लैशेज (अचानक तेज गर्मी महसूस होना) से भी राहत मिलती है। कुछ स्टडीज में पता चला है कि इससे ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क भी कम हो सकता है। साथ ही यह हड्डियों को मजबूत रखने और ब्लड प्रेशर को संतुलित करने में भी मददगार है। हालांकि, हर व्यक्ति में इसका प्रभाव अलग हो सकता है। फिर भी संतुलित मात्रा में सोया चंक्स आमतौर पर सेहत के लिए फायदेमंद है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम सोया चंक्स की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- सोया चंक्स में कौन-कौन से न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं? क्या ज्यादा सोया चंक्स खाने के कोई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं? किन लोगों को सोया चंक्स नहीं खाना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइडटुडे’ सवाल- सोया चंक्स में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं? जवाब- ‘यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (USDA)’ के मुताबिक, 100 ग्राम सोया चंक्स में लगभग 50 ग्राम प्रोटीन होता है, जो मसल बिल्डिंग और रिकवरी के लिए बेहद फायदेमंद है। सोया चंक्स वेजिटेरियन और वीगन लोगों के लिए प्रोटीन का एक बेहतरीन सोर्स है। इसमें कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे कई जरूरी मिनरल्स भी पाए जाते हैं। नीचे दिए ग्राफिक में पानी में भिगोए हुए 100 ग्राम सोया चंक्स की न्यूट्रिशनल वैल्यू देखिए- सवाल- सोया चंक्स कैसे तैयार किए जाते हैं? जवाब- सोयाबीन से तेल निकालने के बाद बचे हुए हिस्से काे बारीक पीस लिया जाता है। फिर इसे प्रोसेस करके ‘सोया चंक्स’ बनाए जाते हैं। इसे बनाने की प्रक्रिया समझिए- कच्चे सोयाबीन से तेल निकालकर बचे हुए ‘डी-फैटेड सोया फ्लोर’ को पानी के साथ मिक्सर में मिलाया जाता है, जिससे गाढ़ी स्लरी बनती है। यह स्लरी सोया नगेट ‘एक्सट्रूडर कुकिंग मशीन’ में डाली जाती है। इसके अंदर स्लरी को हाई टेम्परेचर और प्रेशर पर पकाया जाता है। मशीन पके हुए सोया पेस्ट को कटर की मदद से छोटे-छोटे टुकड़ों में काट देती है। यह प्रक्रिया हाई प्रेशर में होती है, जिससे सोया चंक्स को स्पंजी टेक्सचर मिलता है। इन छोटे-छोटे टुकड़ों को ड्रायर में सुखा लिया जाता है। इनकी क्वालिटी जांचकर अंत में पैक करके बाजार में भेज दिया जाता है। सवाल- सोया चंक्स हमारी सेहत के लिए कितने फायदेमंद हैं? जवाब- सोया चंक्स एक हाई-प्रोटीन, लो-फैट और फाइबर से भरपूर फूड है, जो शरीर की कई जरूरतों को पूरा करता है। जैसेकि- सोया चंक्स में लगभग 52% प्रोटीन होता है, जो मसल्स ग्रोथ और रिपेयर में मदद करता है। हाई फाइबर और लो फैट होने के कारण इससे पेट देर तक भरा रहता है। यह वेट मैनेजमेंट में सपोर्ट करता है। बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) कम करके हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करता है। कैल्शियम और फॉस्फोरस से भरपूर होने के कारण हड्डियों और दांतों को मजबूती देता है। आयरन से भरपूर होने के कारण हीमोग्लोबिन लेवल सुधारने में मदद करता है। इसमें मौजूद डाइटरी फाइबर पाचन बेहतर करता है। यह ब्लड शुगर कंट्रोल करने में भी मदद करता है। सोया चंक्स में पौधे में पाया जाने वाला ‘आइसोफ्लेवोन्स’ कंपाउंड होता है। ये मेनोपॉज से गुजर रही महिलाओं में हॉट फ्लैशेज जैसी समस्याओं को कम करता है। इसमें मौजूद फॉस्फोरस ब्रेन फंक्शन और मेमोरी को सपोर्ट करता है। नीचे दिए ग्राफिक में इसके हेल्थ बेनिफिट्स देखिए- सवाल- सोया चंक्स को अपनी डाइट में कैसे शामिल कर सकते हैं? जवाब- इसे अपनी रोजमर्रा की डाइट में आसानी से शामिल कर सकते हैं। जैसेकि- इसे सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। चावल से बने व्यंजन जैसे, पुलाव या फ्राइड राइस में इस्तेमाल हो सकता है। इसे सूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। सोया चंक्स को उबालकर सलाद में मिला सकते हैं। इसे सब्जियों के साथ हल्का सा भूनकर भी खा सकते हैं। सवाल- क्या सोया चंक्स के ज्यादा सेवन से कोई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं? जवाब- हां, इसके ज्यादा सेवन के कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। जैसेकि- गैस सूजन अपच दस्त कुछ लोगों में सोया से एलर्जी भी होती है, जिससे खुजली, रैशेज या सांस लेने में परेशानी हो सकती है। सोया में मौजूद ‘फाइटोएस्ट्रोजेन थायरॉइड’ से पीड़ित लोगों में हाॅर्मोनल असंतुलन हो सकता है। सवाल- एक दिन में कितना सोया चंक्स खाना सुरक्षित है? जवाब- सीनियर डाइटीशियन डाॅ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि आमतौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए एक दिन में 25 से 30 ग्राम सोया चंक्स सुरक्षित है। पकाने के बाद यह मात्रा लगभग ½ से 1 कटोरी हो जाती है। सवाल- क्या डायबिटिक लोग सोया चंक्स खा सकते हैं? जवाब- हां, इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स लो होता है। इसलिए यह ब्लड शुगर धीरे-धीरे बढ़ाता है। यह डायबिटिक लोगों के लिए बेहतर विकल्प है। सवाल- क्या बच्चों को सोया चंक्स देना सही है? जवाब- हां, सीमित मात्रा में बच्चों को सोया चंक्स दिया जा सकता है। ये उनकी ग्रोथ, मसल डेवलपमेंट और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। अगर बच्चे को कोई हेल्थ कंडीशन है तो पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। सवाल- किन लोगों को सोया चंक्स नहीं खाना चाहिए? जवाब- डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि कुछ लोगों के लिए सोया चंक्स नुकसानदायक हो सकते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक में देखिए- सवाल- मार्केट से सोया चंक्स खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- सोया चंक्स खरीदते समय उनकी क्वालिटी पर ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि- पैकेट पर FSSAI नंबर जरूर देखें। मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट भी चेक करें। देखें कि पैकेट सील्ड है या नहीं। अजीब गंध वाले सोया चंक्स न खरीदें। ब्रांडेड और भरोसेमंद कंपनी के सोया चंक्स चुनें। इंग्रीडिएंट लिस्ट देखें। चेक करें कि इसमें अनावश्यक
Why Laser Is Used in Surgery Medical Science Explained Benefits | सर्जरी में लेजर का इस्तेमाल क्यों होता है जानें वैज्ञानिक कारण

Last Updated:February 25, 2026, 11:41 IST Laser Surgery Benefits for Surgery: आजकल अधिकतर सर्जरी लेजर के जरिए की जा रही हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो लेजर सर्जरी बेहद सटीक होती है और इसमें कम ब्लीडिंग होती है. इस तकनीक से मरीजों की रिकवरी भी तेजी से होती है. यही वजह है कि सर्जरी में लेजर लाइट का इस्तेमाल होता है. यह तकनीक कई प्रक्रियाओं को ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी बना सकती है. ख़बरें फटाफट लेजर सर्जरी को ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. Why Laser Light Good for Surgery: मेडिकल साइंस में लगातार नए बदलाव हो रहे हैं और इलाज के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी सामने आ रही हैं. कई दशक पहले जहां अधिकतर सर्जरी सर्जिकल ब्लेड से चीरा लगाकर की जाती थीं, लेकिन अब ज्यादातर सर्जरी लेजर के जरिए की जा रही हैं. आज आंख, स्किन, पेट, किडनी, दांत और कुछ कैंसर संबंधी ऑपरेशन भी लेजर की मदद से किए जा रहे हैं. अक्सर लोगों के मन में सवाल यह उठता है कि आखिर सर्जरी में लेजर लाइट का ही इस्तेमाल क्यों किया जाता है? अगर आप भी इसका जवाब जानना चाहते हैं, तो इस पूरी खबर को पढ़ लीजिए. अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक लेजर का पूरा नाम लाइट एंप्लिफिकेशन बाइ स्टिम्युलेटेड एमिशन ऑफ रेडिएशन (LASER) है. लेजर लाइट फोकस्ड, एक दिशा में जाने वाली और हाई एनर्जी वाली वाली होती है. यही विशेषताएं इसे सर्जरी के लिए उपयुक्त बनाती हैं. लेजर की सबसे बड़ी खासियत उसकी सटीकता (precision) है. पारंपरिक सर्जिकल ब्लेड की तुलना में लेजर लाइट बहुत ही कंट्रोल तरीके से टिश्यूज को काट सकती है. लेजर सर्जरी में आसपास के स्वस्थ टिश्यूज को कम से कम नुकसान पहुंचता है, क्योंकि डॉक्टर बहुत छोटे और सटीक क्षेत्र पर एनर्जी केंद्रित कर सकते हैं. इससे ऑपरेशन के दौरान अनावश्यक कटाव और चोट की संभावना घट जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. US फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की रिपोर्ट बताती है कि लेजर लाइट जब टिश्यूज को काटती है, तब वह सी समय छोटे ब्लड वेसल्स को सील भी कर देती है. इस प्रोसेस को मेडिकल साइंस में कोएगुलेशन कहा जाता है. इससे खून बहना कम होता है और सर्जरी ज्यादा सुरक्षित बनती है. पारंपरिक सर्जरी में ब्लीडिंग बहुत ज्यादा होती थी, लेकिन लेजर में ब्लीडिंग कम होती है. यही वजह है कि कई कॉस्मेटिक और डर्मेटोलॉजी प्रक्रियाओं में लेजर को प्राथमिकता दी जाती है. आजकल आंखों की अधिकतर सर्जरी लेजर लाइट से की जाती हैं, क्योंकि इससे कई तरह के खतरे कम हो जाते हैं. मेडिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो लेजर का उपयोग इंफेक्शन के जोखिम को भी कम कर सकता है. लेजर सर्जरी में ब्लेड की तरह बॉडी से डायरेक्ट संपर्क नहीं होता है. इसलिए बैक्टीरिया के फैलने का खतरा घटता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार सर्जरी के बाद इंफेक्शन दुनियाभर में एक बड़ी चुनौती है. लेजर तकनीक इस इंफेक्शन को कम करती है और मरीज की रिकवरी को बेहतर बना सकती हैं. हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि संक्रमण की रोकथाम केवल लेजर पर निर्भर नहीं करती, बल्कि प्रॉपर प्रोटोकॉल पर आधारित होती है. लेजर सर्जरी का एक बड़ा फायदा फास्ट रिकवरी है. कम कट और कम ब्लीडिंग के कारण सूजन और दर्द भी कम होता है. आई डिजीज जैसे मोतियाबिंद या रेटिना संबंधी प्रक्रियाओं में लेजर का खूब इस्तेमाल किया जाता है. अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी के अनुसार आंखों की कई बीमारियों में लेजर ट्रीटमेंट असरदार और अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है. हालांकि इस तरह की सर्जरी हमेशा क्वालिफाइड एक्सपर्ट से ही करानी चाहिए. लेजर हर सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं है. इसकी कुछ लिमिटेशंस भी होती हैं. कुछ जटिल या गहरे आंतरिक ऑपरेशन में पारंपरिक सर्जिकल तकनीक ज्यादा प्रभावी हो सकती है. इसके अलावा लेजर उपकरण महंगे होते हैं और इनके लिए स्पेशल ट्रेनिंग की भी जरूरत होती है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : February 25, 2026, 11:41 IST
SCSS Benefits Explained; Senior Citizen Savings Scheme Interest Rate & Rules

Hindi News Lifestyle SCSS Benefits Explained; Senior Citizen Savings Scheme Interest Rate & Rules 30 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ा सवाल होता है कि अब नियमित इनकम के बिना खर्च कैसे चलेगा? ऐसे में अगर पहले से प्लानिंग न की जाए तो आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। अगर आपने पहले से पेंशन की कोई प्लानिंग नहीं की है, तो दिक्कतें और बढ़ सकती हैं। हालांकि अच्छी बात यह है कि भारत सरकार ने सीनियर सिटिजन्स के लिए ऐसी कई योजनाएं बनाई हैं, जिनसे उन्हें हर महीने तय राशि मिलती है। इन्हीं में से एक स्कीम है– सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम, जिसमें 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को सुरक्षित रिटर्न मिलता है। इसलिए आज ‘आपका पैसा‘ कॉलम में ‘सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- इस सरकारी योजना का लाभ किसे मिल सकता है? इसमें हर महीने कितनी पेंशन मिल सकती है? एक्सपर्ट: राजशेखर, फाइनेंशियल एक्सपर्ट सवाल- सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम (SCSS) क्या है? जवाब- सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम (SCSS) एक सरकारी बचत और पेंशन योजना है। यह खासतौर पर 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए बनाई गई है। इस सेविंग स्कीम में पैसे जमा करने पर ब्याज के साथ हर तीन महीने में पेंशन भी मिलती है, जिससे रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम बनी रहती है। इसमें टैक्स में छूट भी मिलती है। इसलिए यह सीनियर सिटिजंस के लिए निवेश और पेंशन का अच्छा विकल्प है। सवाल- सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में कौन निवेश कर सकता है? जवाब- SCSS स्कीम में निवेश करने के लिए कुछ क्राइटेरिया को पूरा करना जरूरी होता है। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं। सवाल- सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में कितना निवेश कर सकते हैं? जवाब- इसमें आप एक बार में अधिकतम 30 लाख रुपए तक निवेश कर सकते हैं। अगर पति और पत्नी दोनों के खाते अलग हैं, तो कुल मिलाकर 60 लाख रुपए तक जमा किए जा सकते हैं। इस स्कीम में कम-से-कम 1,000 रुपए से निवेश शुरू किया जा सकता है। ध्यान देने की बात ये है कि पैसे हमेशा 1,000 के गुणांक में ही जमा किए जा सकते हैं। यानी 1000, 2000, 3000… इसमें पैसा एक साथ यानी एकमुश्त जमा करना होता है, किस्तों में नहीं दे सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली रकम जैसे पीएफ (प्रोविडेंट फंड) या ग्रेच्युटी को यहां लगाकर आप हर तिमाही अच्छे ब्याज के साथ नियमित कमाई कर सकते हैं। सवाल- सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में कितनी ब्याज दर और कितनी पेंशन मिलती है? जवाब- इसमें वर्तमान ब्याज दर 8.2% सालाना है। ब्याज हर तीन महीने में खाते में क्रेडिट हो जाता है। उदाहरण के तौर पर, 30 लाख रुपए के निवेश पर सालाना 2.46 लाख रुपए यानी लगभग 20,500 रुपए प्रति माह के बराबर नियमित आय मिलती है। सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम की सभी विशेषताओं को विस्तार से समझते हैं। सुरक्षित निवेश: यह सरकारी योजना है। इसलिए इसमें लगाया गया पैसा सुरक्षित रहता है और तय समय पर निश्चित रिटर्न मिलता है। ब्याज दर: वर्तमान में 8.2% प्रतिवर्ष की दर से ब्याज दिया जाता है (वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के लिए)। निवेश सीमा: न्यूनतम निवेश 1,000 और अधिकतम 30 लाख रुपए तक किया जा सकता है। निवेश का तरीका: एक लाख रुपए तक का निवेश नकद किया जा सकता है। इससे अधिक राशि के लिए चेक के माध्यम से भुगतान अनिवार्य है। समयावधि: योजना की मूल अवधि 5 साल है, जिसे 3 साल और बढ़ाया जा सकता है। विस्तार के लिए मैच्योरिटी के एक साल के भीतर आवेदन करना होता है। खाता ट्रांसफर सुविधा: खाता पोस्ट ऑफिस और बैंक के बीच ट्रांसफर किया जा सकता है। यह सुविधा पूरे भारत में उपलब्ध है। नॉमिनी सुविधा: खाता खोलते समय या बाद में नॉमिनी नियुक्त किया जा सकता है। सवाल- क्या सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में निवेश करने पर टैक्स में भी छूट मिलती है? जवाब- हां, SCSS में निवेश करने पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है। आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपए तक की छूट मिलती है। यह छूट केवल मूल निवेश राशि पर लागू होती है। स्कीम में मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है। सालाना ब्याज 50,000 रुपए से ज्यादा होने पर TDS कटता है। फॉर्म 15H/15G जमा करके TDS से राहत ली जा सकती है। टैक्स प्लानिंग के लिए SCSS उपयोगी है, लेकिन ब्याज पर टैक्स ध्यान रखें। सवाल- क्या मैच्योरिटी से पहले पैसा निकाल सकते हैं? जवाब- हां, सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में मैच्योरिटी से पहले पैसा निकाला जा सकता है, लेकिन इस पर पेनल्टी लग सकती है। अगर खाता एक साल के भीतर बंद किया जाता है, तो मूलधन पर मिला ब्याज वापस लिया जाता है। 1-2 साल के बीच 1.5% और 2 साल बाद 1% की कटौती होती है। सवाल- SCSS खाता कहां और कैसे खोलें? जवाब- SCSS खाता किसी भी अधिकृत बैंक या पोस्ट ऑफिस में खोला जा सकता है। इसके लिए आधार कार्ड, PAN कार्ड और आयु प्रमाण जैसे डॉक्यूमेंट्स जरूरी होते हैं। निर्धारित फॉर्म भरकर और एकमुश्त राशि जमा करके खाता आसानी से खोला जा सकता है, जिससे तिमाही आय शुरू हो जाती है। सवाल- क्या एक से ज्यादा खाते खोल सकते हैं? जवाब- हां, एक व्यक्ति SCSS में एक से ज्यादा खाते खोल सकता है, लेकिन सभी खातों में कुल निवेश 30 लाख रुपए से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके अलावा जॉइंट अकाउंट केवल लाइफ पार्टनर के साथ ही खोला जा सकता है। इस खाते में जमा राशि पहले अकाउंट होल्डर के नाम पर मानी जाती है। सवाल- क्या इसमें नॉमिनी जोड़ सकते हैं? जवाब- हां, SCSS खाते में नॉमिनी जोड़ने की सुविधा उपलब्ध है। खाता खोलते समय या बाद में भी नॉमिनी नामित किया जा सकता है। एक या एक से अधिक नॉमिनी जोड़े जा सकते हैं, जिससे खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में राशि का ट्रांसफर आसान और सुरक्षित हो जाता है। सवाल- क्या ब्याज दर बदल सकती है? जवाब- SCSS की ब्याज दर सरकार द्वारा हर तिमाही तय की जाती है। इसलिए समय-समय पर इसमें बदलाव हो सकता है। हालांकि एक बार जब आप निवेश
Aloe Vera Juice Health Benefits Explained; Nutrition Facts

4 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक हम बचपन से एलोवेरा के हेल्थ बेनिफिट्स के बारे में सुनते आए हैं। स्किन में निखार लाने से लेकर पाचन तंत्र को बेहतर बनाने तक, इसके कई फायदे बताए जाते हैं। यही वजह है कि लोग इसका खूब इस्तेमाल करते हैं। आयुर्वेद और मेडिकल साइंस दोनों ही इसे एक बेहद उपयोगी औषधीय पौधा मानते हैं। साल 2016 में इंटरनेशनल पीयर रिव्यू ओपन एक्सेस जर्नल ‘बायोसाइंस बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च कम्युनिकेशन’ में एक स्टडी पब्लिश हुई। इसके मुताबिक, एलोवेरा में एंटीमाइक्रोबियल और एंटीवायरल गुण होते हैं। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव भी देखे गए हैं। इसलिए एलोवेरा घाव भरने, सनबर्न और स्किन डैमेज ठीक करने में मददगार हो सकता है। पिछले कुछ सालों में एलोवेरा जूस पीने का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग इसे पाचन सुधारने, शरीर को डिटॉक्स करने, इम्यूनिटी बढ़ाने और स्किन हेल्थ बेहतर बनाने वाले नेचुरल टॉनिक के रूप में अपना रहे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या रोज एलोवेरा जूस पीना वास्तव में सुरक्षित है। साथ ही इसका शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है? तो आइए, आज ‘जरूरत की खबर’ में एलोवेरा जूस से जुड़े इन सभी सवालों के जवाब विस्तार से समझते हैं। साथ ही इसके फायदे, सही मात्रा, सेवन का तरीका और जरूरी सावधानियों पर भी चर्चा करेंगे। एक्सपर्ट: डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइडटुडे’ सवाल- एलोवेरा में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं? जवाब- यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (USDA) के मुताबिक, एलोवेरा में भरपूर मात्रा में पानी होता है। साथ ही कैल्शियम, सोडियम और विटामिन C जैसे कई जरूरी पोषक तत्व भी होते हैं। एलोवेरा जूस आमतौर पर इसके पत्ते के अंदर मौजूद जेल को साफ करके तैयार किया जाता है। नीचे दिए ग्राफिक से 100 ग्राम एलोवेरा जूस की न्यूट्रिशनल वैल्यू समझिए- सवाल- एलोवेरा जूस हमारे शरीर में क्या काम करता है? जवाब- एलोवेरा जूस मुख्य रूप से हमारे शरीर में ये काम करता है– पाचन तंत्र को सपोर्ट करता है। हाइड्रेशन बढ़ाता है। इंफ्लेमेशन कम करता है। गट हेल्थ को सपोर्ट करता है। कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। इसमें मौजूद नेचुरल एंजाइम पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाते हैं। सवाल- रोज एलोवेरा जूस पीने के क्या फायदे हैं? जवाब- नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए– एलोवेरा जूस में पानी की मात्रा अधिक होती है, जिससे यह शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स और मिनरल्स इम्यूनिटी को सपोर्ट करने और ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं। इसके एंजाइम्स और बायोएक्टिव कंपाउंड्स पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाते हैं। यह हल्की कब्ज जैसी समस्याओं में भी राहत देते हैं। कम कैलोरी होने के कारण इसे पीने पर कैलोरी इंटेक का भी डर नहीं होता। एलाेवेरा जूस के बाकी हेल्थ बेनिफिट्स नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- एलोवेरा जूस पीने का सही तरीका क्या है? जवाब- नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए– एलोवेरा जूस को हमेशा सीमित मात्रा में पिएं। इसे हमेशा पानी में मिलाकर ही पिएं। पानी मिलाना इसलिए जरूरी है क्योंकि इसमें मौजूद लेटेक्स की अधिकता दस्त, पेट में ऐंठन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का कारण बन सकती है। बेहतर है कि इसे सुबह खाली पेट या भोजन से आधे घंटे पहले पिएं। शुरुआत कम मात्रा से करें और शरीर की प्रतिक्रिया देखें। अगर पेट में दर्द, दस्त या जलन हो तो तुरंत बंद कर दें। लंबे समय तक नियमित सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित है। सवाल- क्या एलोवेरा जूस खाली पेट पीना ज्यादा फायदेमंद होता है? जवाब- हां, खाली पेट लेने से इसका अवशोषण बेहतर होता है और पाचन तंत्र को एक्टिव करने में मदद मिलती है। हालांकि यह सभी के लिए सुरक्षित नहीं है। कुछ लोगों को इससे पेट दर्द, दस्त या ऐंठन हो सकती है। इसलिए पहले डॉक्टर की सलाह लें। सवाल- एलोवेरा जूस स्किन और बालों के लिए कैसे फायदेमंद है? जवाब- नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए- एलोवेरा जूस में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स, विटामिन C और E स्किन को फ्री-रेडिकल डैमेज से बचाने में मदद कर सकते हैं। इससे चेहरे पर निखार आता है। इसके हाइड्रेटिंग गुण स्किन को अंदर से सपोर्ट करते हैं और इंफ्लेमेशन कम करने में मदद करते हैं। इससे पिंपल्स और हल्की स्किन इरिटेशन की समस्या में राहत मिल सकती है। साल 2018, में ‘जर्नल ऑफ ड्रग डिलीवरी एंड थेरेप्यूटिक्स’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, एलोवेरा में मौजूद बायोएक्टिव कंपाउंड्स स्किन को मुलायम और हेल्दी रखने में मदद करते हैं। इसके हीलिंग और पोषण गुणों के कारण कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में इसका खूब यूज किया जाता है। एलोवेरा में पाए जाने वाले पोषक तत्व स्कैल्प हेल्थ को बेहतर बनाने, डैंड्रफ कम करने और बालों को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, बेहतर परिणाम के लिए संतुलित आहार और उचित हेयर केयर भी जरूरी है। सवाल- एक दिन में कितनी मात्रा में एलोवेरा जूस लेना सेफ है? जवाब- सामान्य तौर पर वयस्कों के लिए दिन में 20–30 ml एलोवेरा जूस पर्याप्त और सुरक्षित माना जाता है। इसे एक गिलास पानी में मिलाकर लेना बेहतर रहता है। सवाल- क्या एलोवेरा जूस पीने के कोई साइड इफेक्ट्स भी हैं? जवाब- हां, अधिक मात्रा में या लंबे समय तक एलोवेरा जूस पीने से कुछ लोगों में दस्त, पेट दर्द, ऐंठन या इलेक्ट्रोलाइट्स असंतुलन हो सकता है। इसका लैक्सेटिव प्रभाव शरीर में पोटेशियम की कमी की वजह बन सकता है। कुछ लोगों में एलर्जी या स्किन संबंधी रिएक्शन भी हो सकते हैं। सवाल- किन लोगों को एलोवेरा जूस नहीं पीना चाहिए? जवाब- कुछ लोगों को एलोवेरा जूस नहीं पीना चाहिए। जैसेकि- प्रेग्नेंट और ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाएं। छोटे बच्चे और बुजुर्ग। जिन्हें एलोवेरा से एलर्जी है। जिन्हें किडनी या लिवर डिजीज है। जिन्हें आंतों से जुड़ी समस्या है। जिन्हें कोई गंभीर बीमारी है। जिनका ब्लड प्रेशर लो रहता है। जिनका ब्लड शुगर लो रहता है। सवाल- बाजार से एलोवेरा जूस खरीदते समय किन बाताें का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- इस दौरान कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि- FSSAI लाइसेंस नंबर और कंपनी की पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से दी गई हो। इंग्रीडिएंट लिस्ट ध्यान से पढ़ें। उसमें एडेड शुगर, आर्टिफिशियल कलर या फ्लेवर न हों। मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट जरूर जांचें। बोतल की सील
Pension Fraud; Life Certificate APK Files Scam Case Explained

6 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक कुछ दिनों पहले दिल्ली के एक 79 वर्षीय रिटायर्ड सिविल इंजीनियर के साथ साइबर ठगी हुई। स्कैमर्स ने फर्जी विज्ञापन के जरिए उन्हें लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट करने का झांसा दिया। इसके बाद उनके बैंक खाते से पैसे निकाल लिए। हाल ही में इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने अपने ‘एक्स’ हैंडल से ऐसी ही एक घटना का वीडियो शेयर किया है। इसमें पेंशनधारकों को लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट के नाम पर होने वाले स्कैम के बारे में सतर्क किया गया है। साइबर ठग बुजुर्गों की तकनीकी जानकारी की कमी का फायदा उठाते हैं। ऐसे में हमें अपने घर के बुजुर्गों को डिजिटल दुनिया के पीछे छिपे खतरों के बारे में बताना जरूरी है। चलिए, आज साइबर लिटरेसी कॉलम में हम इस स्कैम के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- स्कैमर पेंशनर्स को अपने जाल में कैसे फंसाते हैं? ऐसे स्कैम से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट क्या है, ठगों ने रिटायर्ड बुजुर्ग को कैसे चूना लगाया? जवाब- यह पेंशन धारक के जीवित होने का आधिकारिक प्रमाणपत्र है। पेंशनर्स को हर साल यह सर्टिफिकेट अपने बैंक या अधिकृत पोर्टल के माध्यम से अपडेट कराना होता है। अगर यह समय पर जमा न हो तो पेंशन रुक सकती है। ठग इसी का फायदा उठाते हैं। नीचे दो अलग-अलग मामले समझिए- पहला मामला I4C द्वारा शेयर किए गए वीडियो के मुताबिक, एक रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर को फेसबुक स्क्रॉल करते हुए पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट करने का एक एड दिखा। जैसे ही उन्होंने इस एड पर क्लिक किया, एक वेबपेज खुला। इसमें ऑलरेडी उनकी कुछ पर्सनल डिटेल्स ऑटो-फिल थीं। उन्होंने ज्यादा सोचा नहीं और फॉर्म सबमिट कर दिया। कुछ देर बाद उन्हें एक फोन कॉल आया और वॉट्सएप पर .apk फाइल भेजी आई। उनसे कहा गया कि ये फाइल डाउनलोड करके फॉर्म भर दीजिए। आपका पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट हो जाएगा। उन्होंने फॉर्म में अपना आधार नंबर, फोन नंबर दर्ज किया और ओटीपी सबमिट किया। ऐसा करते ही उनके फोन का कंट्रोल साइबर क्रिमिनल्स के पास चला गया। कुछ ही समय में उनके बैंक अकाउंट से 2.40 लाख रुपए कट गए। दूसरा मामला दूसरी घटना में रिटायर्ड सिविल इंजीनियर को फेसबुक स्क्रॉलिंग के दौरान PNB लाइफ सर्टिफिकेट का विज्ञापन दिखा। लिंक पर क्लिक करते ही उनसे नाम और मोबाइल नंबर लिया गया। कॉलर ने खुद को PNB स्टाफ बताकर वॉट्सएप पर ‘PNB Pension Life Certificate Update.apk’ भेजा और एप डाउनलोड करवाया। एप के जरिए पर्सनल व बैंक डिटेल ली गई और भरोसे के लिए 1 रुपए कटते दिखाया गया। कुछ ही घंटों में खाते से 4.15 लाख रुपए निकाल लिए गए। सवाल- रिटायर्ड बुजुर्गों की तरफ से क्या गलती हुई, जिसके कारण वे ठगी का शिकार हो गए? जवाब- दोनों रिटायर्ड बुजुर्गों ने तीन बड़ी गलतियां की थीं- उन्होंने सोशल मीडिया पर दिखे विज्ञापन पर भरोसा कर लिया। अनजान लिंक से APK फाइल डाउनलोड की, जो कभी भी बैंक या सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होती है। अनजान एप में अपनी पर्सनल और बैंक से जुड़ी जानकारी भर दी। इन्हीं तीन गलतियों के कारण उनकी मेहनत की कमाई एक बार में उड़ गई। सवाल- पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट के नाम पर साइबर स्कैमर्स ठगी को कैसे अंजाम देते हैं? जवाब- स्कैमर्स पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट के नाम पर फर्जी एप और कॉल के जरिए बैंक डिटेल्स हासिल करते हैं। इसके बाद खाते से पैसे ऐंठ लेते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- लोग इतनी आसानी से इस तरह के स्कैम के झांसे में क्यों फंस जाते हैं? जवाब- इस स्कैम में ठग पेंशनर्स की सीमित तकनीकी जानकारी का फायदा उठाते हैं। ‘लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट’ जैसी जरूरी प्रक्रिया का नाम लेकर वे पेंशनर्स को डराते हैं कि अगर तुरंत अपडेट नहीं किया गया तो पेंशन रुक सकती है। इस डर से वे बिना जांच-पड़ताल के फर्जी लिंक पर क्लिक कर देते हैं। सवाल- इस तरह के किसी भी स्कैम से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- इसके लिए घर के बुजुर्गों को तकनीक के बारे में जागरूक करना जरूरी है। उन्हें ये बताएं कि बैंक या सरकार कभी भी APK फाइल भेजकर या फोन पर डिटेल्स मांगकर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट नहीं कराती है। इसके साथ ही उन्हें कुछ और बुनियादी बातों की जानकारी दें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल– पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट कराने या प्राप्त करने का सही तरीका क्या है? जवाब– लाइफ सर्टिफिकेट सिर्फ बैंक ब्रांच, पोस्ट ऑफिस या सरकारी jeevanpramaan.gov.in पोर्टल के जरिए ही अपडेट होता है। यह कभी भी सोशल मीडिया लिंक, कॉल या APK फाइल से नहीं होता है। सवाल- घर के बुजुर्गों को स्कैम से बचाने के लिए क्या जरूरी कदम उठाने चाहिए? जवाब- इसके लिए घर के बुजुर्गों को कुछ बातें जरूर बताएं। जैसेकि- उन्हें समझाएं कि बैंक कभी भी फोन, वॉट्सएप या लिंक से डिटेल नहीं मांगते हैं। सोशल मीडिया विज्ञापनों पर तुरंत भरोसा न करें। अनजान एप डाउनलोड न करने के लिए मना करें। अनजान कॉल, मैसेज या लिंक से इंटरैक्ट न करें। समय-समय पर उनके मोबाइल फोन चेक करते रहें। देखें कोई संदिग्ध एप तो नहीं है। उनके फोन में सिर्फ जरूरी और भरोसेमंद एप ही रखें। बैंकिंग एप में डेली ट्रांजैक्शन लिमिट सेट करें। नेट बैंकिंग और UPI पर अलर्ट/SMS नोटिफिकेशन हमेशा ऑन रखें। उनके फोन में साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 सेव करें। बैंक और परिवार के दो भरोसेमंद नंबर स्पीड डायल में डालें। समय-समय पर उनके साथ बैठकर स्कैम के नए तरीकों के बारे में बताएं। प्ले स्टोर में ‘प्ले प्रोटेक्ट’ विकल्प हमेशा ऑन रखें। किसी के कहने पर भी इसे बंद न करें। सेटिंग्स से ‘इंस्टॉलेशन फ्रॉम अननोन सोर्स’ विकल्प को हमेशा ऑफ रखें। सवाल- किसी भी स्कैम से बचने के लिए किन बुनियादी बातों का ध्यान रखना जरूरी है? जवाब- इसके लिए 6 बुनियादी बातों का खास ख्याल रखें। अगर इसे समझ लिए तो किसी भी स्कैम से बच सकते हैं। किसी भी कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें। किसी भी अनजान लिंक पर कभी क्लिक न करें। .apk फाइल कभी भी









