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एपस्टीन फाइल्स की सामने आई एक और नई कहानी, ऐसे फंसती थी विदेशी लड़कियां, स्टूडेंट वीजा के जरिए बड़ी साजिश | jeffrey epstein files new row surfaced how foreign women girls were trapped massive conspiracy using student visa

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Last Updated:February 15, 2026, 18:18 IST Epstein Files Row: कुख्यात अपराधी जेफरी एपस्टीन के काले कारनामों की एक नई परत खुली है. अमेरिकी न्याय विभाग की फाइलों से खुलासा हुआ है कि कैसे एपस्टीन ने फर्जी शादियों और स्टूडेंट वीजा का इस्तेमाल कर विदेशी महिलाओं को अमेरिका में रुकने के लिए मजबूर किया. इसमें कोलंबिया यूनिवर्सिटी और बड़े वकीलों के नाम भी सामने आ रहे हैं. खास बात यह है कि इसमें एपस्टीन की पत्नी का रोल बड़ा था. पढ़ें कैसे एपस्टीन फाइल्स ने भारत सहित दुनिया के कई देशों में सनसनी फैला दी है. जेफ्री एप्सटीन Jeffrey Epstein scandal: यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन की मौत के वर्षों बाद भी उसके गुनाहों की नई कहानियां दुनिया को झकझोर रही हैं. हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों के एक जखीरे से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि एपस्टीन ने अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर कई विदेशी महिलाओं को अपने जाल में फंसाए रखा. एपस्टीन ने इन महिलाओं को अमेरिका में टिकाए रखने के लिए फर्जी शादियों, स्टूडेंट वीजा और कोलंबिया यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिले का सहारा लिया. इस पूरे खेल का सबसे प्रमुख चेहरा एपस्टीन की प्रेमिका करीना शुलियाक बनकर उभरी है. 2013 में शुलियाक अपने वीजा स्टेटस को लेकर बेहद तनाव में थी. इसके समाधान के लिए एपस्टीन ने एक ऐसी साजिश रची जिसने कानूनी विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया. शुलियाक ने एक अमेरिकी नागरिक जेनिफर से शादी की. दिलचस्प बात यह है कि जेनिफर पहले से ही एपस्टीन के नेटवर्क का हिस्सा थी. इस शादी के बाद शुलियाक को ग्रीन कार्ड मिला और 2018 में वह अमेरिकी नागरिक बन गई. नागरिकता मिलते ही उसने जेनिफर को तलाक दे दिया. यह पूरी शादी केवल कागजों पर इमिग्रेशन अधिकारियों को धोखा देने के लिए की गई थी. जेफ्री एपस्टीन फाइल्स खुला बिल गेट्स का गंदा राज यूएस स्टूडेंट वीजा का दुरुपयोग दस्तावेजों से पता चलता है कि एपस्टीन ने शुलियाक को कोलंबिया यूनिवर्सिटी के डेंटल स्कूल में ट्रांसफर छात्र के रूप में दाखिला दिलाने के लिए अपने रसूख का इस्तेमाल किया. बेलारूस से आई शुलियाक के पास कोई डिग्री पूरी नहीं थी, फिर भी उसे प्रवेश मिल गया. जब उसके वीजा स्टेटस में दिक्कत आई, तो यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने उसे ईमेल कर आश्वासन दिया कि ‘सब कुछ ठीक है.’ बड़े नामों और रसूखदारों का कनेक्शन एपस्टीन ने पर्दे के पीछे से बड़े वकीलों और रसूखदार लोगों को ईमेल लिखकर शुलियाक के स्टूडेंट वीजा को बहाल करने के लिए दबाव बनाया. इन फाइलों में कई हाई-प्रोफाइल नाम भी सामने आए हैं. एपस्टीन ने शुलियाक के वीजा के लिए ब्रिटिश निवेशक इयान ऑस्बोर्न से संपर्क किया था. ऑस्बोर्न ने दावा किया था कि उसके पास ऐसे वकील हैं जिनके संबंध इमिग्रेशन एंड नेचुरलाइजेशन सर्विस के उच्चतम स्तर तक हैं. ईमेल में ओबामा प्रशासन के पूर्व व्हाइट हाउस काउंसिल ग्रेग क्रेग और वर्तमान होमलैंड सुरक्षा सचिव अली मयोरकास के नामों का भी जिक्र मिला है. जेफ्री एप्सटीन से जुड़ी कई फाइलें गायब हो गई हैं. शरण का दांव भी खेला गया हालांकि, मयोरकास या क्रेग की इस मामले में किसी प्रत्यक्ष संलिप्तता के प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन यह साफ है कि एपस्टीन इन बड़े नामों का इस्तेमाल अपने रास्ते साफ करने के लिए कर रहा था. जब स्टूडेंट वीजा बहाल करना मुश्किल हो गया, तो वकीलों ने एपस्टीन को सलाह दी कि शुलियाक का वीजा अवधि से ज्यादा रुकना परेशानी पैदा कर सकता है. इसके बाद एपस्टीन ने राजनैतिक शरण का रास्ता चुनने पर विचार किया. उसने अपने वकीलों से पूछा कि क्या शरण के लिए मामला ठोकना स्टूडेंट वीजा से ज्यादा सुरक्षित रहेगा. यह सब केवल इसलिए किया जा रहा था ताकि वे महिलाएं जिन्हें वह नियंत्रित करना चाहता था, अमेरिका से बाहर न जा सकें. ये खुलासे बताते हैं कि कैसे एक अपराधी ने पैसे और रसूख के दम पर दुनिया के सबसे सख्त माने जाने वाले इमिग्रेशन सिस्टम को खिलौना बना दिया था. फर्जी शादियां और फर्जी शैक्षणिक दाखिले उस बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसके जरिए एपस्टीन महिलाओं का शोषण करता था. ऑस्बोर्न जैसे कई लोगों ने अब एपस्टीन से किसी भी जुड़ाव पर खेद जताया है, लेकिन ये फाइलें आज भी अमेरिकी प्रशासन के लिए एक बड़ा सवालिया निशान बनी हुई हैं. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें First Published : February 15, 2026, 18:18 IST

Pension Fraud; Life Certificate APK Files Scam Case Explained

Pension Fraud; Life Certificate APK Files Scam Case Explained

6 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक कुछ दिनों पहले दिल्ली के एक 79 वर्षीय रिटायर्ड सिविल इंजीनियर के साथ साइबर ठगी हुई। स्कैमर्स ने फर्जी विज्ञापन के जरिए उन्हें लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट करने का झांसा दिया। इसके बाद उनके बैंक खाते से पैसे निकाल लिए। हाल ही में इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने अपने ‘एक्स’ हैंडल से ऐसी ही एक घटना का वीडियो शेयर किया है। इसमें पेंशनधारकों को लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट के नाम पर होने वाले स्कैम के बारे में सतर्क किया गया है। साइबर ठग बुजुर्गों की तकनीकी जानकारी की कमी का फायदा उठाते हैं। ऐसे में हमें अपने घर के बुजुर्गों को डिजिटल दुनिया के पीछे छिपे खतरों के बारे में बताना जरूरी है। चलिए, आज साइबर लिटरेसी कॉलम में हम इस स्कैम के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- स्कैमर पेंशनर्स को अपने जाल में कैसे फंसाते हैं? ऐसे स्कैम से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट क्या है, ठगों ने रिटायर्ड बुजुर्ग को कैसे चूना लगाया? जवाब- यह पेंशन धारक के जीवित होने का आधिकारिक प्रमाणपत्र है। पेंशनर्स को हर साल यह सर्टिफिकेट अपने बैंक या अधिकृत पोर्टल के माध्यम से अपडेट कराना होता है। अगर यह समय पर जमा न हो तो पेंशन रुक सकती है। ठग इसी का फायदा उठाते हैं। नीचे दो अलग-अलग मामले समझिए- पहला मामला I4C द्वारा शेयर किए गए वीडियो के मुताबिक, एक रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर को फेसबुक स्क्रॉल करते हुए पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट करने का एक एड दिखा। जैसे ही उन्होंने इस एड पर क्लिक किया, एक वेबपेज खुला। इसमें ऑलरेडी उनकी कुछ पर्सनल डिटेल्स ऑटो-फिल थीं। उन्होंने ज्यादा सोचा नहीं और फॉर्म सबमिट कर दिया। कुछ देर बाद उन्हें एक फोन कॉल आया और वॉट्सएप पर .apk फाइल भेजी आई। उनसे कहा गया कि ये फाइल डाउनलोड करके फॉर्म भर दीजिए। आपका पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट हो जाएगा। उन्होंने फॉर्म में अपना आधार नंबर, फोन नंबर दर्ज किया और ओटीपी सबमिट किया। ऐसा करते ही उनके फोन का कंट्रोल साइबर क्रिमिनल्स के पास चला गया। कुछ ही समय में उनके बैंक अकाउंट से 2.40 लाख रुपए कट गए। दूसरा मामला दूसरी घटना में रिटायर्ड सिविल इंजीनियर को फेसबुक स्क्रॉलिंग के दौरान PNB लाइफ सर्टिफिकेट का विज्ञापन दिखा। लिंक पर क्लिक करते ही उनसे नाम और मोबाइल नंबर लिया गया। कॉलर ने खुद को PNB स्टाफ बताकर वॉट्सएप पर ‘PNB Pension Life Certificate Update.apk’ भेजा और एप डाउनलोड करवाया। एप के जरिए पर्सनल व बैंक डिटेल ली गई और भरोसे के लिए 1 रुपए कटते दिखाया गया। कुछ ही घंटों में खाते से 4.15 लाख रुपए निकाल लिए गए। सवाल- रिटायर्ड बुजुर्गों की तरफ से क्या गलती हुई, जिसके कारण वे ठगी का शिकार हो गए? जवाब- दोनों रिटायर्ड बुजुर्गों ने तीन बड़ी गलतियां की थीं- उन्होंने सोशल मीडिया पर दिखे विज्ञापन पर भरोसा कर लिया। अनजान लिंक से APK फाइल डाउनलोड की, जो कभी भी बैंक या सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होती है। अनजान एप में अपनी पर्सनल और बैंक से जुड़ी जानकारी भर दी। इन्हीं तीन गलतियों के कारण उनकी मेहनत की कमाई एक बार में उड़ गई। सवाल- पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट के नाम पर साइबर स्कैमर्स ठगी को कैसे अंजाम देते हैं? जवाब- स्कैमर्स पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट के नाम पर फर्जी एप और कॉल के जरिए बैंक डिटेल्स हासिल करते हैं। इसके बाद खाते से पैसे ऐंठ लेते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- लोग इतनी आसानी से इस तरह के स्कैम के झांसे में क्यों फंस जाते हैं? जवाब- इस स्कैम में ठग पेंशनर्स की सीमित तकनीकी जानकारी का फायदा उठाते हैं। ‘लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट’ जैसी जरूरी प्रक्रिया का नाम लेकर वे पेंशनर्स को डराते हैं कि अगर तुरंत अपडेट नहीं किया गया तो पेंशन रुक सकती है। इस डर से वे बिना जांच-पड़ताल के फर्जी लिंक पर क्लिक कर देते हैं। सवाल- इस तरह के किसी भी स्कैम से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- इसके लिए घर के बुजुर्गों को तकनीक के बारे में जागरूक करना जरूरी है। उन्हें ये बताएं कि बैंक या सरकार कभी भी APK फाइल भेजकर या फोन पर डिटेल्स मांगकर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट नहीं कराती है। इसके साथ ही उन्हें कुछ और बुनियादी बातों की जानकारी दें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल– पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट कराने या प्राप्त करने का सही तरीका क्या है? जवाब– लाइफ सर्टिफिकेट सिर्फ बैंक ब्रांच, पोस्ट ऑफिस या सरकारी jeevanpramaan.gov.in पोर्टल के जरिए ही अपडेट होता है। यह कभी भी सोशल मीडिया लिंक, कॉल या APK फाइल से नहीं होता है। सवाल- घर के बुजुर्गों को स्कैम से बचाने के लिए क्या जरूरी कदम उठाने चाहिए? जवाब- इसके लिए घर के बुजुर्गों को कुछ बातें जरूर बताएं। जैसेकि- उन्हें समझाएं कि बैंक कभी भी फोन, वॉट्सएप या लिंक से डिटेल नहीं मांगते हैं। सोशल मीडिया विज्ञापनों पर तुरंत भरोसा न करें। अनजान एप डाउनलोड न करने के लिए मना करें। अनजान कॉल, मैसेज या लिंक से इंटरैक्ट न करें। समय-समय पर उनके मोबाइल फोन चेक करते रहें। देखें कोई संदिग्ध एप तो नहीं है। उनके फोन में सिर्फ जरूरी और भरोसेमंद एप ही रखें। बैंकिंग एप में डेली ट्रांजैक्शन लिमिट सेट करें। नेट बैंकिंग और UPI पर अलर्ट/SMS नोटिफिकेशन हमेशा ऑन रखें। उनके फोन में साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 सेव करें। बैंक और परिवार के दो भरोसेमंद नंबर स्पीड डायल में डालें। समय-समय पर उनके साथ बैठकर स्कैम के नए तरीकों के बारे में बताएं। प्ले स्टोर में ‘प्ले प्रोटेक्ट’ विकल्प हमेशा ऑन रखें। किसी के कहने पर भी इसे बंद न करें। सेटिंग्स से ‘इंस्टॉलेशन फ्रॉम अननोन सोर्स’ विकल्प को हमेशा ऑफ रखें। सवाल- किसी भी स्कैम से बचने के लिए किन बुनियादी बातों का ध्यान रखना जरूरी है? जवाब- इसके लिए 6 बुनियादी बातों का खास ख्याल रखें। अगर इसे समझ लिए तो किसी भी स्कैम से बच सकते हैं। किसी भी कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें। किसी भी अनजान लिंक पर कभी क्लिक न करें। .apk फाइल कभी भी