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The ‘Zombie’ Flower In Epstein Files

The 'Zombie' Flower In Epstein Files

वॉशिंगटन डीसी4 दिन पहले कॉपी लिंक हाल ही में जारी हुए एपस्टीन फाइल्स के ईमेल्स में यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की जहरीले पौधों में दिलचस्पी को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इन ईमेल्स में खास तौर पर ‘ट्रम्पेट प्लांट्स’ (धतुरा का पौधा) का जिक्र है। ईमेल्स में ऐसे लेख फॉरवर्ड किए गए थे, जिनमें कोलंबिया में इसके इस्तेमाल का जिक्र था। बताया गया कि इसके असर में व्यक्ति को कहीं भी ‘ले जाया’ जा सकता है, क्योंकि वह पूरी तरह आज्ञाकारी और भ्रमित हो जाता है। हिंदू परंपरा में धतूरा भगवान शिव से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, समुद्र मंथन के दौरान जब विष निकला, तो शिव ने संसार की रक्षा के लिए उसे पी लिया। शिव मंदिरों में धतूरा के फूल और फल चढ़ाए जाते हैं। एपस्टीन फाइल्स में ‘जॉम्बी फ्लावर’ क्या है? ईमेल के स्क्रीनशॉट से पता चलता है कि उसके फाइनेंसर ने ऐसे पौधों में रुचि दिखाई थी। धतुरा के पौधों से स्कोपोलामीन नाम का एक रसायन निकलता है, जो दिमाग पर गहरा असर डालता है। स्कोपोलामीन याददाश्त कमजोर कर सकता है, व्यक्ति को भ्रम की स्थिति में डाल सकता है। इसी वजह से कुछ विशेषज्ञ इसे ‘जॉम्बी ब्रीथ’ भी कहते हैं। इसमें बताया गया था कि यह दवा लोगों को बहुत ज्यादा असर डालती है और उन्हें आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। ईमेल्स से पता चलता है कि एपस्टीन धतुरा के पौधे के बारे में पूछताछ कर रहा था। हालांकि यह साफ नहीं है कि उसने इनका इस्तेमाल किया या नहीं। वहीं, 2022 के एक अन्य ईमेल में एक पीड़ित के बयान का जिक्र है, जिसमें स्कोपोलामीन के संपर्क में आने की बात कही गई। इन दस्तावेजों से यह साफ होता है कि एपस्टीन ऐसे पौधों से जुड़ा था, जिनमें दिमाग को प्रभावित करने की ताकत होती है। ईमेल्स में 3 बार इस पौधे का जिक्र पहला ईमेल (3 मार्च 2014): यह ईमेल सीधे एपस्टीन ने ‘एन रोड्रिगेज’ नाम के एक व्यक्ति को भेजा था। ईमेल में उन्होंने लिखा था कि नर्सरी में लगे उनके ट्रम्पेट पौधों के बारे में क्रिस से पूछो। इससे साफ संकेत मिलता है कि एपस्टीन की नर्सरी में ट्रम्पेट प्लांट यानी धतूरा के पौधे लगे हुए थे। दूसरा ईमेल (27 जनवरी 2015): बताया जाता है कि यह ईमेल फ्रांसीसी फैशन फोटोग्राफर एंटोनी वेरग्लास की ओर से आगे भेजा गया था। ईमेल्स में जिस “जॉम्बी फ्लावर” का जिक्र है, वह दरअसल ट्रम्पेट आकार वाले पौधे हैं। फॉरवर्ड किए गए एक मैसेज का शीर्षक था- “स्कोपोलामीन: कोलंबिया के जंगलों में उगने वाली एक शक्तिशाली दवा, जो इंसान की चेतना को खत्म कर देती है।” यह मैसेज डेली मेल और वाइस की एक रिपोर्ट से जुड़ा था। रिपोर्ट में स्कोपोलामीन को ऐसा पदार्थ बताया गया था, जिसके असर में व्यक्ति बेहद आज्ञाकारी हो सकता है। लेख की कुछ पंक्तियों को खास तौर पर चिन्हित किया गया था। उनमें कहा गया था कि इस नशे के प्रभाव में व्यक्ति को कहीं भी ले जाया जा सकता है और वह छोटे बच्चे की तरह व्यवहार करने लगता है। तीसरा ईमेल (7 फरवरी 2022): तीसरा दस्तावेज सीधे एपस्टीन के साथ बातचीत नहीं है। यह गिलेरमो फारिनास नाम के व्यक्ति द्वारा जुआन एंटोनियो गोंजालेज को भेजा गया एक ईमेल बताया गया है, जिसकी कॉपी जोसेफ मंजारो को भी भेजी गई थी। फिलहाल यह साफ नहीं है कि ये लोग कौन हैं। इसमें मंजारो ने दिसंबर 2014 की एक कथित घटना का जिक्र किया है। उनका दावा है कि उन्हें स्कोपोलामीन नाम के नशीले पदार्थ के जरिए बेहोश किया गया। यह पदार्थ कुछ खास पौधों से बनता है, जिनमें ट्रम्पेट प्लांट यानी धतूरा भी शामिल है। बयान में साफ तौर पर स्कोपोलामीन का नाम लिया गया है। मंजारो का आरोप है कि उन्हें ले जा रहे दो लोगों में से एक ने कहा था, “मैंने उसे काफी मात्रा में स्कोपोलामीन दे दिया है।” इसके बाद उसने याददाश्त खोने और बेहद ज्यादा नींद आने जैसी हालत का दावा किया है। हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है धतूरे का फूल हिंदू परंपरा में बिगुल जैसे आकार वाला धतूरा फूल पवित्र माना जाता है। यह भगवान शिव से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने पिया था, जिससे सृष्टि की रक्षा हुई। धतूरा उसी विष से जुड़ा प्रतीक माना जाता है। भारत में कई मंदिरों में, खासकर महाशिवरात्रि के समय, धतूरा के फूल और फल चढ़ाए जाते हैं। हालांकि यह पौधा जहरीला होता है, फिर भी इसे आध्यात्मिक शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। हालांकि इस धार्मिक महत्व का एपस्टीन फाइल्स में बताए गए संदर्भ से कोई सीधा संबंध नहीं है। भारतीय लड़की भी यौन अपराधी एपस्टीन का शिकार हुई, नई फाइल्स में खुलासा यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी नई फाइलों में खुलासा हुआ है कि एक भारतीय लड़की भी उसका शिकार हुई थी। दस्तावेजों के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने उसे पीड़ित मुआवजा फंड से भुगतान दिलाने के लिए भारत में तलाश शुरू की थी। 13 जनवरी 2020 की एक ईमेल में अमेरिकी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत सामने आई है। इसमें भारत में मौजूद पीड़िता का पता और जानकारी जुटाने को कहा गया है, ताकी भारत स्थित अमेरिकी दूतावास के जरिए उससे संपर्क किया जा सके। यह ईमेल एपस्टीन की अगस्त 2019 में जेल में हुई मौत के बाद की है। रिलीज दस्तावेजों में इस मेल का टाइटल ‘एपस्टीन विक्टिम्स’ है, हालांकि अधिकारियों के नाम और कुछ जानकारियां छुपाई गई हैं। कौन था जेफ्री एपस्टीन? जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी। उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली। उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और

Bill Gates Out of India AI Summit After Epstein Files Mention; Govt Stands With Victims

Bill Gates Out of India AI Summit After Epstein Files Mention; Govt Stands With Victims

Hindi News Business Bill Gates Out Of India AI Summit After Epstein Files Mention; Govt Stands With Victims नई दिल्ली4 दिन पहले कॉपी लिंक बिल गेट्स 16 फरवरी को भारत आ चुके हैं। -फाइल फोटो माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स के ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ में शामिल होने को लेकर बनी असमंजस की स्थिति अब साफ हो गई है। गेट्स फाउंडेशन के प्रवक्ता के अनुसार, बिल गेट्स तय कार्यक्रम के मुताबिक समिट में हिस्सा लेंगे और अपना कीनोट एड्रेस देंगे। आज 17 फरवरी को वेबसाइट पर गेस्ट की लिस्ट में उनका नाम नहीं था। ऐसे में खबरें चल रही थीं कि सरकार ने उनका निमंत्रण रद्द कर दिया है। इसकी वजह अमेरिकी अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े विवादित दस्तावेजों में आए उनके नाम को बताया गया था। 16 फरवरी से दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हुई समिट 20 फरवरी तक चलेगी। समिट के साथ-साथ ‘इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026’ का भी आयोजन किया गया है। यहां दुनियाभर की कंपनियों ने अपने लेटेस्ट AI सॉल्यूशंस दुनिया के सामने पेश किए है। माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर और गेट्स फाउंडेशन के चेयरमैन बिल गेट्स एक्सपो में शामिल होने के लिए 16 फरवरी को भारत आ चुके हैं। गेट्स बोले- एपस्टीन से मुलाकात करना मेरी बड़ी गलती थी जेफ्री एपस्टीन एक अमेरिकी फाइनेंसर था, जिस पर यौन अपराधों और नाबालिगों की तस्करी के गंभीर आरोप थे। 2019 में जेल में उसकी आत्महत्या के बाद, हाल ही में उससे जुड़े कई क्लासीफाइड दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं। इसमें बिल गेट्स का भी नाम था। इन फाइलों में दावा किया गया है कि एपस्टीन और गेट्स के बीच गहरे संबंध थे। एपस्टीन ने कथित रूप से गेट्स के एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर्स और अन्य निजी गतिविधियों में मदद की थी। बिल गेट्स ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इन मुलाकातों पर अफसोस जताया है। उन्होंने कहा कि मैंने एपस्टीन के साथ जो भी समय बिताया, मुझे उसका पछतावा है और मैं इसके लिए माफी मांगता हूं। गेट्स पहले भी कह चुके हैं कि उन्होंने एपस्टीन से केवल चैरिटी और फंडरेजिंग के सिलसिले में मुलाकात की थी, लेकिन अब वो इसे एक बड़ी गलती मानते हैं। एनवीडिया CEO ने भारत दौरा टाला इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में गूगल के सीईओ सुंदर पिचई और ओपन-एआई के सैम ऑल्टमैन जैसे दिग्गज शामिल हो रहे हैं। इसमें एनवीडिया के CEO जेंसेन हुआंग भी शामिल होने वाले थे, लेकिन उन्होंने कार्यक्रम रद्द कर दिया है। कयास थे कि उनके हटने की वजह बिल गेट्स की मौजूदगी हो सकती है। हालांकि कंपनी ने कोई आधिकारिक कारण नहीं दिया है। ———————————– समिट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… PM मोदी ने AI इम्पैक्ट समिट का उद्घाटन किया, जियो इंटेलिजेंस जैसे AI मॉडल्स को जाना भारत में आज 16 फरवरी से दुनिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी इवेंट में से एक ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका औपचारिक उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने इवेंट में शामिल हुए स्‍टार्टअप्‍स के पवेलियंस में जाकर उनके इनोवेशंस की जानकारी ली। पूरा खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Epstein Files: US Seeks Indian Victim for Compensation

Epstein Files: US Seeks Indian Victim for Compensation

वॉशिंगटन डीसी/नई दिल्ली5 दिन पहले कॉपी लिंक यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी नई फाइलों में खुलासा हुआ है कि एक भारतीय लड़की भी उसका शिकार हुई थी। दस्तावेजों के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने उसे पीड़ित मुआवजा फंड से भुगतान दिलाने के लिए भारत में तलाश शुरू की थी। 13 जनवरी 2020 की एक ईमेल में अमेरिकी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत सामने आई है। इसमें भारत में मौजूद पीड़िता का पता और जानकारी जुटाने को कहा गया है, ताकी भारत स्थित अमेरिकी दूतावास के जरिए उससे संपर्क किया जा सके। यह ईमेल एपस्टीन की अगस्त 2019 में जेल में हुई मौत के बाद की है। रिलीज दस्तावेजों में इस मेल का टाइटल ‘एपस्टीन विक्टिम्स’ है, हालांकि अधिकारियों के नाम और कुछ जानकारियां छुपाई गई हैं। दस्तावेज में अमेरिकी अधिकारियों से भारतीय लड़की और उसकी कॉन्टैक्ट डीटेल्स निकालने के लिए कहा गया है। फाइल्स में पूर्व केंद्रीय मंत्री हर्ष वर्धन का भी जिक्र नई फाइल्स में 5 जून 2014 को बिल गेट्स और एपस्टीन के बीच बातचीत की एक ईमेल शामिल है। इसमें एपस्टीन बिल गेट्स से पूछता है कि क्या डॉ. हर्ष वर्धन से 17 सितंबर को भारत में उनकी मीटिंग हैं। उस समय हर्ष वर्धन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री थे। इसके अलावा 2 अप्रैल 2017 की एक ईमेल में भारत के PR कंपनी प्रमोटर दिलीप चेरियन का भी जिक्र है। इस मेल में एपस्टीन के सहयोगी गिनो यू ने उनसे पूछा कि क्या वे दिलीप चेरियन से मिलना चाहेंगे। ईमेल में लिखा है कि दिलीप पेरिस में 3 से 6 अप्रैल तक रहेंगे और उन्होंने 160 मिलियन अमेरिकी डॉलर में अपनी विज्ञापन और पीआर कंपनी बेची है। 8 जुलाई 2010 की एक ईमेल में एक महिला ने एपस्टीन को अपने फ्लाइट अनुभव के बारे में लिखा। उसने बताया कि उसके पास बैठे एक बुजुर्ग भारतीय व्यक्ति ने शराब पी रखी थी और वह बार-बार उससे बात कर रहा था और छू रहा था। मेल में लिखा है कि वह व्यक्ति सोने के बाद जागा और उसने महिला को गले लगाते हुए कहा कि वह उससे प्यार करता है। डॉ हर्षवर्धन भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं और दो बार भारत के स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। (फाइल फोटो) एपस्टीन से 3-4 बार मिले थे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 11 फरवरी को बताया था कि वह यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से तीन या चार बार मिले थे। यह बातचीत पूरी तरह से प्रोफेशनल थी, जो इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज्म और दूसरे इंटरनेशनल कामों से जुड़ी थी। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एपस्टीन के आपराधिक मामलों से अपना कोई संबंध होने के आरोपों को बेबुनियाद बताया। पुरी ने कहा, जब मैंने मई 2009 से न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत के रूप में कार्यभार संभाला था, तब से लेकर 2017 में मंत्री बनने तक की अवधि के 30 लाख ईमेल जारी किए गए हैं। इस दौरान, केवल तीन या चार बैठकों का ही जिक्र मिलता है और मेरी बातचीत पूरी तरह से पेशेवर थी। केंद्रीय मंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एपस्टीन के आपराधिक मामलों से अपना कोई संबंध होने के आरोपों को बेबुनियाद बताया। यौन अपराधी और अनिल अंबानी की चैट भी सामने आई जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में अनिल अंबानी से जुड़े खुलासे हुए हैं। ये दस्तावेज एपस्टीन और उद्योगपति अनिल अंबानी के बीच 2017 से 2019 के दौरान हुई बातचीत से जुड़े हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें कारोबार, वैश्विक मामलों और महिलाओं को लेकर चर्चा हुई। 9 मार्च 2017 की बातचीत में अनिल ने एपस्टीन से पूछा- क्या सुझाव है? इस पर एपस्टीन ने लिखा- मुलाकात ‘मजेदार’ बनाने के लिए ‘लंबी स्वीडिश ब्लॉन्ड महिला’ बेहतर होगी। इसके बाद अंबानी ने जवाब दिया, ‘इसे अरेंज करो।’ बातचीत तब की है। यह बातचीत उस समय की है, जब एप्सटीन को पहले ही 2008 में नाबालिगों से जुड़े यौन आपराध के मामले में सजा मिल चुकी थी। इसके बावजूद एप्सटीन दुनिया के कई प्रभावशाली और ताकतवर लोगों के संपर्क में बना हुआ था। रिकॉर्ड बताते हैं कि दोनों के बीच पेरिस और न्यूयॉर्क में मिलने की योजना बनीं। मई 2019 में अनिल अंबानी के न्यूयॉर्क दौरे के वक्त एपस्टीन ने उन्हें मैनहैटन स्थित अपने घर बुलाया, जहां दोनों मिले। दूसरे ईमेल्स से यह भी पता चलता है कि अंबानी और एपस्टीन के बीच अंतरराष्ट्रीय यात्राओं, बिजनेस मीटिंग्स और वैश्विक मंचों पर होने वाले कार्यक्रमों को लेकर बातचीत हुई थी। इनमें पेरिस, न्यूयॉर्क और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के कार्यक्रमों में संभावित मुलाकातों का जिक्र है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने X पर पोस्ट कर अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच 16 मार्च 2017 को हुई चैट का स्क्रीनशॉट शेयर किया था। कौन था जेफ्री एपस्टीन? जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी। उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली। उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है। एपस्टीन केस की पूरी कहानी क्या है इसकी शुरुआत 2005 में तब हुई जब फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि एपस्टीन के आलीशान घर में उसकी बेटी को ‘मसाज’ के बहाने बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उस पर सेक्स का दबाव डाला गया। जब उसने घर लौटकर यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की। तब पहली बार जेफ्री एपस्टीन के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि यह अकेला मामला नहीं है। धीरे-धीरे करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने एपस्टीन पर ऐसे ही आरोप लगाए। पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कई महीनों तक छानबीन की। इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू हुई। मामले

एपस्टीन फाइल्स की सामने आई एक और नई कहानी, ऐसे फंसती थी विदेशी लड़कियां, स्टूडेंट वीजा के जरिए बड़ी साजिश | jeffrey epstein files new row surfaced how foreign women girls were trapped massive conspiracy using student visa

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Last Updated:February 15, 2026, 18:18 IST Epstein Files Row: कुख्यात अपराधी जेफरी एपस्टीन के काले कारनामों की एक नई परत खुली है. अमेरिकी न्याय विभाग की फाइलों से खुलासा हुआ है कि कैसे एपस्टीन ने फर्जी शादियों और स्टूडेंट वीजा का इस्तेमाल कर विदेशी महिलाओं को अमेरिका में रुकने के लिए मजबूर किया. इसमें कोलंबिया यूनिवर्सिटी और बड़े वकीलों के नाम भी सामने आ रहे हैं. खास बात यह है कि इसमें एपस्टीन की पत्नी का रोल बड़ा था. पढ़ें कैसे एपस्टीन फाइल्स ने भारत सहित दुनिया के कई देशों में सनसनी फैला दी है. जेफ्री एप्सटीन Jeffrey Epstein scandal: यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन की मौत के वर्षों बाद भी उसके गुनाहों की नई कहानियां दुनिया को झकझोर रही हैं. हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों के एक जखीरे से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि एपस्टीन ने अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर कई विदेशी महिलाओं को अपने जाल में फंसाए रखा. एपस्टीन ने इन महिलाओं को अमेरिका में टिकाए रखने के लिए फर्जी शादियों, स्टूडेंट वीजा और कोलंबिया यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिले का सहारा लिया. इस पूरे खेल का सबसे प्रमुख चेहरा एपस्टीन की प्रेमिका करीना शुलियाक बनकर उभरी है. 2013 में शुलियाक अपने वीजा स्टेटस को लेकर बेहद तनाव में थी. इसके समाधान के लिए एपस्टीन ने एक ऐसी साजिश रची जिसने कानूनी विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया. शुलियाक ने एक अमेरिकी नागरिक जेनिफर से शादी की. दिलचस्प बात यह है कि जेनिफर पहले से ही एपस्टीन के नेटवर्क का हिस्सा थी. इस शादी के बाद शुलियाक को ग्रीन कार्ड मिला और 2018 में वह अमेरिकी नागरिक बन गई. नागरिकता मिलते ही उसने जेनिफर को तलाक दे दिया. यह पूरी शादी केवल कागजों पर इमिग्रेशन अधिकारियों को धोखा देने के लिए की गई थी. जेफ्री एपस्टीन फाइल्स खुला बिल गेट्स का गंदा राज यूएस स्टूडेंट वीजा का दुरुपयोग दस्तावेजों से पता चलता है कि एपस्टीन ने शुलियाक को कोलंबिया यूनिवर्सिटी के डेंटल स्कूल में ट्रांसफर छात्र के रूप में दाखिला दिलाने के लिए अपने रसूख का इस्तेमाल किया. बेलारूस से आई शुलियाक के पास कोई डिग्री पूरी नहीं थी, फिर भी उसे प्रवेश मिल गया. जब उसके वीजा स्टेटस में दिक्कत आई, तो यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने उसे ईमेल कर आश्वासन दिया कि ‘सब कुछ ठीक है.’ बड़े नामों और रसूखदारों का कनेक्शन एपस्टीन ने पर्दे के पीछे से बड़े वकीलों और रसूखदार लोगों को ईमेल लिखकर शुलियाक के स्टूडेंट वीजा को बहाल करने के लिए दबाव बनाया. इन फाइलों में कई हाई-प्रोफाइल नाम भी सामने आए हैं. एपस्टीन ने शुलियाक के वीजा के लिए ब्रिटिश निवेशक इयान ऑस्बोर्न से संपर्क किया था. ऑस्बोर्न ने दावा किया था कि उसके पास ऐसे वकील हैं जिनके संबंध इमिग्रेशन एंड नेचुरलाइजेशन सर्विस के उच्चतम स्तर तक हैं. ईमेल में ओबामा प्रशासन के पूर्व व्हाइट हाउस काउंसिल ग्रेग क्रेग और वर्तमान होमलैंड सुरक्षा सचिव अली मयोरकास के नामों का भी जिक्र मिला है. जेफ्री एप्सटीन से जुड़ी कई फाइलें गायब हो गई हैं. शरण का दांव भी खेला गया हालांकि, मयोरकास या क्रेग की इस मामले में किसी प्रत्यक्ष संलिप्तता के प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन यह साफ है कि एपस्टीन इन बड़े नामों का इस्तेमाल अपने रास्ते साफ करने के लिए कर रहा था. जब स्टूडेंट वीजा बहाल करना मुश्किल हो गया, तो वकीलों ने एपस्टीन को सलाह दी कि शुलियाक का वीजा अवधि से ज्यादा रुकना परेशानी पैदा कर सकता है. इसके बाद एपस्टीन ने राजनैतिक शरण का रास्ता चुनने पर विचार किया. उसने अपने वकीलों से पूछा कि क्या शरण के लिए मामला ठोकना स्टूडेंट वीजा से ज्यादा सुरक्षित रहेगा. यह सब केवल इसलिए किया जा रहा था ताकि वे महिलाएं जिन्हें वह नियंत्रित करना चाहता था, अमेरिका से बाहर न जा सकें. ये खुलासे बताते हैं कि कैसे एक अपराधी ने पैसे और रसूख के दम पर दुनिया के सबसे सख्त माने जाने वाले इमिग्रेशन सिस्टम को खिलौना बना दिया था. फर्जी शादियां और फर्जी शैक्षणिक दाखिले उस बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसके जरिए एपस्टीन महिलाओं का शोषण करता था. ऑस्बोर्न जैसे कई लोगों ने अब एपस्टीन से किसी भी जुड़ाव पर खेद जताया है, लेकिन ये फाइलें आज भी अमेरिकी प्रशासन के लिए एक बड़ा सवालिया निशान बनी हुई हैं. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें First Published : February 15, 2026, 18:18 IST

Pension Fraud; Life Certificate APK Files Scam Case Explained

Pension Fraud; Life Certificate APK Files Scam Case Explained

6 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक कुछ दिनों पहले दिल्ली के एक 79 वर्षीय रिटायर्ड सिविल इंजीनियर के साथ साइबर ठगी हुई। स्कैमर्स ने फर्जी विज्ञापन के जरिए उन्हें लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट करने का झांसा दिया। इसके बाद उनके बैंक खाते से पैसे निकाल लिए। हाल ही में इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने अपने ‘एक्स’ हैंडल से ऐसी ही एक घटना का वीडियो शेयर किया है। इसमें पेंशनधारकों को लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट के नाम पर होने वाले स्कैम के बारे में सतर्क किया गया है। साइबर ठग बुजुर्गों की तकनीकी जानकारी की कमी का फायदा उठाते हैं। ऐसे में हमें अपने घर के बुजुर्गों को डिजिटल दुनिया के पीछे छिपे खतरों के बारे में बताना जरूरी है। चलिए, आज साइबर लिटरेसी कॉलम में हम इस स्कैम के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- स्कैमर पेंशनर्स को अपने जाल में कैसे फंसाते हैं? ऐसे स्कैम से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट क्या है, ठगों ने रिटायर्ड बुजुर्ग को कैसे चूना लगाया? जवाब- यह पेंशन धारक के जीवित होने का आधिकारिक प्रमाणपत्र है। पेंशनर्स को हर साल यह सर्टिफिकेट अपने बैंक या अधिकृत पोर्टल के माध्यम से अपडेट कराना होता है। अगर यह समय पर जमा न हो तो पेंशन रुक सकती है। ठग इसी का फायदा उठाते हैं। नीचे दो अलग-अलग मामले समझिए- पहला मामला I4C द्वारा शेयर किए गए वीडियो के मुताबिक, एक रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर को फेसबुक स्क्रॉल करते हुए पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट करने का एक एड दिखा। जैसे ही उन्होंने इस एड पर क्लिक किया, एक वेबपेज खुला। इसमें ऑलरेडी उनकी कुछ पर्सनल डिटेल्स ऑटो-फिल थीं। उन्होंने ज्यादा सोचा नहीं और फॉर्म सबमिट कर दिया। कुछ देर बाद उन्हें एक फोन कॉल आया और वॉट्सएप पर .apk फाइल भेजी आई। उनसे कहा गया कि ये फाइल डाउनलोड करके फॉर्म भर दीजिए। आपका पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट हो जाएगा। उन्होंने फॉर्म में अपना आधार नंबर, फोन नंबर दर्ज किया और ओटीपी सबमिट किया। ऐसा करते ही उनके फोन का कंट्रोल साइबर क्रिमिनल्स के पास चला गया। कुछ ही समय में उनके बैंक अकाउंट से 2.40 लाख रुपए कट गए। दूसरा मामला दूसरी घटना में रिटायर्ड सिविल इंजीनियर को फेसबुक स्क्रॉलिंग के दौरान PNB लाइफ सर्टिफिकेट का विज्ञापन दिखा। लिंक पर क्लिक करते ही उनसे नाम और मोबाइल नंबर लिया गया। कॉलर ने खुद को PNB स्टाफ बताकर वॉट्सएप पर ‘PNB Pension Life Certificate Update.apk’ भेजा और एप डाउनलोड करवाया। एप के जरिए पर्सनल व बैंक डिटेल ली गई और भरोसे के लिए 1 रुपए कटते दिखाया गया। कुछ ही घंटों में खाते से 4.15 लाख रुपए निकाल लिए गए। सवाल- रिटायर्ड बुजुर्गों की तरफ से क्या गलती हुई, जिसके कारण वे ठगी का शिकार हो गए? जवाब- दोनों रिटायर्ड बुजुर्गों ने तीन बड़ी गलतियां की थीं- उन्होंने सोशल मीडिया पर दिखे विज्ञापन पर भरोसा कर लिया। अनजान लिंक से APK फाइल डाउनलोड की, जो कभी भी बैंक या सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होती है। अनजान एप में अपनी पर्सनल और बैंक से जुड़ी जानकारी भर दी। इन्हीं तीन गलतियों के कारण उनकी मेहनत की कमाई एक बार में उड़ गई। सवाल- पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट के नाम पर साइबर स्कैमर्स ठगी को कैसे अंजाम देते हैं? जवाब- स्कैमर्स पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट के नाम पर फर्जी एप और कॉल के जरिए बैंक डिटेल्स हासिल करते हैं। इसके बाद खाते से पैसे ऐंठ लेते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- लोग इतनी आसानी से इस तरह के स्कैम के झांसे में क्यों फंस जाते हैं? जवाब- इस स्कैम में ठग पेंशनर्स की सीमित तकनीकी जानकारी का फायदा उठाते हैं। ‘लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट’ जैसी जरूरी प्रक्रिया का नाम लेकर वे पेंशनर्स को डराते हैं कि अगर तुरंत अपडेट नहीं किया गया तो पेंशन रुक सकती है। इस डर से वे बिना जांच-पड़ताल के फर्जी लिंक पर क्लिक कर देते हैं। सवाल- इस तरह के किसी भी स्कैम से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- इसके लिए घर के बुजुर्गों को तकनीक के बारे में जागरूक करना जरूरी है। उन्हें ये बताएं कि बैंक या सरकार कभी भी APK फाइल भेजकर या फोन पर डिटेल्स मांगकर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट नहीं कराती है। इसके साथ ही उन्हें कुछ और बुनियादी बातों की जानकारी दें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल– पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट कराने या प्राप्त करने का सही तरीका क्या है? जवाब– लाइफ सर्टिफिकेट सिर्फ बैंक ब्रांच, पोस्ट ऑफिस या सरकारी jeevanpramaan.gov.in पोर्टल के जरिए ही अपडेट होता है। यह कभी भी सोशल मीडिया लिंक, कॉल या APK फाइल से नहीं होता है। सवाल- घर के बुजुर्गों को स्कैम से बचाने के लिए क्या जरूरी कदम उठाने चाहिए? जवाब- इसके लिए घर के बुजुर्गों को कुछ बातें जरूर बताएं। जैसेकि- उन्हें समझाएं कि बैंक कभी भी फोन, वॉट्सएप या लिंक से डिटेल नहीं मांगते हैं। सोशल मीडिया विज्ञापनों पर तुरंत भरोसा न करें। अनजान एप डाउनलोड न करने के लिए मना करें। अनजान कॉल, मैसेज या लिंक से इंटरैक्ट न करें। समय-समय पर उनके मोबाइल फोन चेक करते रहें। देखें कोई संदिग्ध एप तो नहीं है। उनके फोन में सिर्फ जरूरी और भरोसेमंद एप ही रखें। बैंकिंग एप में डेली ट्रांजैक्शन लिमिट सेट करें। नेट बैंकिंग और UPI पर अलर्ट/SMS नोटिफिकेशन हमेशा ऑन रखें। उनके फोन में साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 सेव करें। बैंक और परिवार के दो भरोसेमंद नंबर स्पीड डायल में डालें। समय-समय पर उनके साथ बैठकर स्कैम के नए तरीकों के बारे में बताएं। प्ले स्टोर में ‘प्ले प्रोटेक्ट’ विकल्प हमेशा ऑन रखें। किसी के कहने पर भी इसे बंद न करें। सेटिंग्स से ‘इंस्टॉलेशन फ्रॉम अननोन सोर्स’ विकल्प को हमेशा ऑफ रखें। सवाल- किसी भी स्कैम से बचने के लिए किन बुनियादी बातों का ध्यान रखना जरूरी है? जवाब- इसके लिए 6 बुनियादी बातों का खास ख्याल रखें। अगर इसे समझ लिए तो किसी भी स्कैम से बच सकते हैं। किसी भी कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें। किसी भी अनजान लिंक पर कभी क्लिक न करें। .apk फाइल कभी भी