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North Korea Nuclear Attack Threat | Kim Jong Un

North Korea Nuclear Attack Threat | Kim Jong Un

प्योंगयांग45 मिनट पहले कॉपी लिंक उत्तर कोरिया ने अपने संविधान और परमाणु नीति में बड़ा बदलाव करते हुए नया प्रावधान जोड़ा है। अब अगर देश के सुप्रीम लीडर किम जोंग-उन की हत्या हो जाती है या किसी विदेशी हमले के दौरान वे लीडरशिप करने की हालात में नहीं रहते, तो उत्तर कोरिया तुरंत परमाणु हमला करेगा। ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बदलाव मार्च में तेहरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद किया गया। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और कई सीनियर ईरानी अधिकारियों की मौत हो गई थी। दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी के मुताबिक, इन हमलों ने प्योंगयांग को सोचने पर मजबूर कर दिया और उत्तर कोरिया को डर सताने लगा कि भविष्य में ऐसा ‘डिकैपिटेशन स्ट्राइक’ यानी टॉप लीडरशिप को खत्म करने वाला हमला उसके खिलाफ भी हो सकता है। यह नया प्रावधान 22 मार्च को प्योंगयांग में शुरू हुए 15वीं सुप्रीम पीपुल्स असेंबली के पहले सत्र के दौरान अपनाया गया। बाद में दक्षिण कोरिया की नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस ने सीनियर सरकारी अधिकारियों को इस बदलाव की जानकारी दी। नॉर्थ कोरिया की 15वीं सुप्रीम पीपुल्स असेंबली (संसदीय सत्र) के दौरान देश के संविधान में बदलाव किया गया। क्यों बदली गई उत्तर कोरिया की परमाणु नीति? डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान पर हुए हमलों ने उत्तर कोरिया की लीडरशिप को झकझोर दिया। हमलों की तेजी और सटीकता देखकर प्योंगयांग को लगा कि विदेशी शक्तियां किम जोंग-उन और उत्तर कोरियाई मिलिट्री लीडरशिप के खिलाफ भी इसी तरह का ऑपरेशन कर सकती हैं। सियोल स्थित कूकमिन यूनिवर्सिटी में इतिहास और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर आंद्रेई लांकोव ने मीडिया से कहा कि ईरान पर हुआ ऑपरेशन उत्तर कोरिया के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत बन गया। लांकोव ने कहा कि ईरान एक वेक-अप कॉल था। उत्तर कोरिया ने देखा कि अमेरिका और इजराइल के डिकैपिटेशन हमले कितने प्रभावी थे, जिन्होंने तुरंत ईरानी लीडरशिप के बड़े हिस्से को खत्म कर दिया। अब उत्तर कोरिया बेहद डरा हुआ होगा। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है ऐसी नीति पहले अनौपचारिक रूप से मौजूद रही हो, लेकिन अब इसे संविधान का हिस्सा बना दिया गया है, इसलिए इसका महत्व बढ़ गया है। तेहरान में 28 फरवरी को ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के दफ्तर पर हमला किया गया था, जिसमें उनकी मौत हो गई थी। उत्तर कोरिया में हमला करना मुश्किल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ईरान के मुकाबले उत्तर कोरिया में ऐसा हमला करना कहीं ज्यादा मुश्किल होगा। उत्तर कोरिया दुनिया के सबसे बंद देशों में से एक है। वहां विदेशी डिप्लोमैट्स, सहायता कर्मियों और कारोबारियों पर कड़ी निगरानी रखी जाती है, जिससे खुफिया जानकारी जुटाना बेहद मुश्किल हो जाता है। लोकल ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइली खुफिया एजेंसियों ने ईरानी नेताओं पर नजर रखने के लिए हैक किए गए ट्रैफिक कैमरों और डिजिटल सर्विलांस सिस्टम का इस्तेमाल किया था। हालांकि प्योंगयांग में ऐसा करना बहुत कठिन होगा, क्योंकि उत्तर कोरिया में CCTV नेटवर्क सीमित है और वहां इंटरनेट सिस्टम पर सरकार का कड़ा कंट्रोल है। किम जोंग-उन अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर भी बेहद सख्त माने जाते हैं। वे आमतौर पर भारी हथियारों से लैस बॉडीगार्ड्स के बड़े ग्रुप के साथ यात्रा करते हैं और हवाई यात्रा से बचते हैं। इसके बजाय वे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दौरों के लिए बख्तरबंद ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं। फुटेज अप्रैल 2019 की है। उस समय भी किम जोंग ट्रेन से ही रूस दौरे पर गए थे। (क्रेडिट-ग्लोबल टाइम्स) उत्तर कोरिया को सैटेलाइट ट्रैकिंग तकनीक से डर प्रोफेसर लांकोव ने कहा कि उत्तर कोरिया अब पारंपरिक जासूसी से ज्यादा सैटेलाइट ट्रैकिंग तकनीक से डरता है। उन्होंने कहा- उनका (किम जोंग) सबसे बड़ा डर सैटेलाइट तकनीक से मिलने वाली जानकारी है। उनकी चिंता गलत भी नहीं है, क्योंकि किसी भी संघर्ष की शुरुआत में लीडरशिप को खत्म करना निर्णायक साबित हो सकता है। लांकोव के मुताबिक, अगर किम जोंग-उन पर हमला होता है तो उत्तर कोरिया की मिलिट्री लीडरशिप परमाणु जवाबी कार्रवाई के आदेश का पालन करेगी, क्योंकि वहां के अधिकारी किसी भी विदेशी हमले को देश के अस्तित्व के लिए खतरा मानते हैं। उन्होंने कहा- मुझे दक्षिण कोरिया की तरफ से ऐसे किसी हमले की संभावना नहीं दिखती, इसलिए किसी भी जवाबी कार्रवाई का निशाना अमेरिका होगा। उत्तर कोरिया और कौन से सैन्य कदम उठा रहा है? उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया पर दबाव बढ़ाते हुए बॉर्डर के पास लॉन्ग रेंज की आर्टिलरी सिस्टम तैनात करने की योजना भी घोषित की है। सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के मुताबिक, किम जोंग-उन ने हाल ही में एक हथियार फैक्ट्री का दौरा किया और वहां “नई प्रकार की 155 मिलीमीटर सेल्फ-प्रोपेल्ड गन-हाउइट्जर” के प्रोडक्शन का निरीक्षण किया। यह नया आर्टिलरी सिस्टम 60 किमी से ज्यादा दूरी तक हमला कर सकती है और इसे इसी साल दक्षिण कोरिया सीमा के पास तैनात किया जाएगा। इससे राजधानी सियोल सीधे हमले की जद में आ सकती है। KCNA ने किम जोंग-उन के हवाले से कहा कि नया हाउइट्जर सिस्टम हमारी सेना के जमीनी ऑपरेशन में महत्वपूर्ण बदलाव और बढ़त देगा। हाल के सालों में उत्तर और दक्षिण कोरिया के संबंध लगातार खराब हुए हैं, जबकि सियोल की तरफ से कई बार शांति प्रयास किए गए। अब उत्तर कोरिया खुलकर दक्षिण कोरिया को अपना मुख्य दुश्मन बताने लगा है और उसने अपने संविधान से कोरियाई एकीकरण से जुड़े संदर्भ भी हटा दिए हैं। उत्तर और दक्षिण कोरिया तकनीकी रूप से अब भी युद्ध की स्थिति में हैं, क्योंकि 1950-1953 का कोरियाई युद्ध केवल युद्धविराम समझौते के साथ खत्म हुआ था, किसी औपचारिक शांति संधि के साथ नहीं। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन हथियार बनाने वाली फैक्ट्री का दौरा करते हुए। यह तस्वीर 8 मई 2026 को उत्तर कोरियाई सरकार ने जारी की। नॉर्थ कोरिया के पास अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलें हैं फिलहाल नॉर्थ कोरिया के पास कुल कितनी मिसाइलें हैं, इसका सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है। लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुमान के मुताबिक नॉर्थ कोरिया के पास सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनमें शॉर्ट रेंज, मीडियम रेंज और और लंबी दूरी (ICBM) की मिसाइलें शामिल हैं। ICBM यानी लंबी दूरी की मिसाइलें ऐसी हैं, जो अमेरिका तक पहुंचने