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ट्रम्प आज चीनी राष्ट्रपति से मिलेंगे:₹9 लाख करोड़ की बोइंग विमान डील संभव; जिनपिंग अमेरिकी उद्योगपतियों के साथ बैठक करेंगे

ट्रम्प आज चीनी राष्ट्रपति से मिलेंगे:₹9 लाख करोड़ की बोइंग विमान डील संभव; जिनपिंग अमेरिकी उद्योगपतियों के साथ बैठक करेंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आज बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं की यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब दुनिया की नजर अमेरिका-चीन रिश्तों, व्यापार और टेक्नोलॉजी को लेकर चल रही तनातनी पर टिकी हुई है। इस दौरे की सबसे बड़ी चर्चा बोइंग विमान डील को लेकर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन अमेरिकी कंपनी बोइंग से करीब 9 लाख करोड रुपए के विमानों की खरीद का बड़ा समझौता कर सकता है। अगर यह डील होती है तो यह दुनिया की सबसे बड़ी एविएशन डील्स में शामिल हो सकती है। बैठक में व्यापार, टैरिफ, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ताइवान जैसे मुद्दों पर भी बातचीत होगी। पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के रिश्तों में काफी तनाव रहा है, इसलिए इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। ट्रम्प के साथ कई बड़े अमेरिकी कारोबारी भी चीन पहुंचे हैं। इनमें टेक और फाइनेंस सेक्टर की बड़ी कंपनियों के अधिकारी शामिल हैं। शी जिनपिंग इन उद्योगपतियों के साथ अलग से बैठक करेंगे। इस दौरान निवेश, बाजार पहुंच और टेक्नोलॉजी सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। ट्रम्प 8 साल बाद चीन पहुंचे ट्रम्प बुधवार को 8 साल बाद चीन दौरे पर पहुंचे। उनका विमान बीजिंग कैपिटल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड किया, जहां चीनी उपराष्ट्रपति हान जेंग ने उन्हें रिसीव किया। हान जेंग को शी जिनपिंग का भरोसेमंद माना जाता है और वे पिछले साल ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुए थे। ट्रम्प के एयर फोर्स वन से उतरते समय करीब 300 बच्चे नीले और सफेद रंग की यूनिफॉर्म में एयरपोर्ट पर मौजूद थे। ये अमेरिका और चीन के झंडे लहरा रहे थे। ट्रम्प के साथ उनके बेटे एरिक ट्रम्प और बहू लारा ट्रम्प भी मौजूद थे। ट्रम्प के साथ इलॉन मस्क, एप्पल CEO टिम कुक और बोइंग CEO समेत 17 बड़े अमेरिकी कारोबारी भी गए हैं। हालांकि चिप कंपनी एनवीडिया के CEO जेनसन हुआंग इस दौरे में शामिल नहीं होंगे ट्रम्प के चीन पहुंचने की 4 तस्वीरें…. चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ट्रम्प को स्टेट डिनर देंगे व्हाइट हाउस के मुताबिक चीन दौरे के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग, डोनाल्ड ट्रम्प के सम्मान में स्टेट डिनर आयोजित करेंगे। चीन में इस तरह के स्टेट डिनर को बड़े कूटनीतिक सम्मान के तौर पर देखा जाता है। ऐसे कार्यक्रम आमतौर पर बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में आयोजित किए जाते हैं, जहां चीन का शीर्ष नेतृत्व विदेशी मेहमानों का स्वागत करता है। इसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी, कारोबारी प्रतिनिधि और खास मेहमान शामिल होते हैं। डिप्लोमैटिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन किसी विदेशी नेता को जितना बड़ा औपचारिक स्वागत देता है, उसे रिश्तों की अहमियत का संकेत माना जाता है। स्टेट डिनर के जरिए चीन यह संदेश देने की कोशिश करता है कि वह अमेरिका के साथ रिश्तों को रणनीतिक स्तर पर महत्व दे रहा है। ट्रम्प के पहले कार्यकाल में 2017 के चीन दौरे के दौरान भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनके सम्मान में विशेष स्वागत कार्यक्रम रखा था। ट्रम्प-जिनपिंग के बीच 4 अहम मुद्दों पर बातचीत संभव 1. ट्रेड टैरिफ विवाद अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर अब भी बड़ा मुद्दा है। ट्रम्प पहले चीनी सामान पर भारी टैरिफ की चेतावनी दे चुके हैं। दोनों देश अब व्यापारिक तनाव कम करने पर बातचीत कर सकते हैं। 2. ताइवान और हथियार बिक्री ताइवान को लेकर भी दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। ट्रम्प ने कहा है कि वह शी जिनपिंग से 11 अरब डॉलर के अमेरिकी हथियार पैकेज पर बात करेंगे। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और अमेरिकी हथियार बिक्री का लगातार विरोध करता रहा है। 3. रेयर अर्थ मिनरल्स और AI रेयर अर्थ मिनरल्स इलेक्ट्रिक व्हीकल, चिप्स और डिफेंस इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम हैं। चीन दुनिया का सबसे बड़ा सप्लायर है, जबकि अमेरिका उसकी निर्भरता कम करना चाहता है। AI और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी को लेकर भी दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है। 4. सोयाबीन और कृषि व्यापार चीन अमेरिकी किसानों के लिए बड़ा बाजार है। ट्रेड वॉर के बाद चीन ने अमेरिकी सोयाबीन खरीद घटाई थी। अब ट्रम्प प्रशासन कृषि निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। ईरानी तेल खरीदने पर चीन का अमेरिका से विवाद ईरान से तेल खरीद को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बना हुआ है। ट्रम्प प्रशासन का आरोप है कि चीन बड़े पैमाने पर ईरानी तेल खरीदकर तेहरान को आर्थिक सहारा दे रहा है, जबकि चीन इसे अपनी ऊर्जा जरूरतों से जुड़ा मामला बता रहा है। अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद चीन लंबे समय से ईरान से बड़े पैमाने पर तेल खरीदता रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सस्ता तेल खरीदने की रणनीति अपनाता है। ईरान पर प्रतिबंध लगने के बाद उसे अपना तेल डिस्काउंट पर बेचना पड़ता है। चीन की कई निजी रिफाइनरियां इसी रियायती तेल को खरीदती हैं। इससे चीन को सस्ती ऊर्जा मिलती है, जबकि ईरान को विदेशी मुद्रा कमाने का बड़ा रास्ता मिलता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल के वर्षों में ईरान के कुल तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन जाता रहा है। कई बार यह कारोबार सीधे ईरान के नाम से नहीं, बल्कि दूसरे देशों के जरिए या ब्लेंडेड ऑयल के रूप में किया जाता है, ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों से बचा जा सके। चीन पर ईरानी तेल न खरीदने का दबाव बना रहा अमेरिका अमेरिका चाहता है कि चीन ईरानी तेल की खरीद कम करे, ताकि तेहरान की कमाई घटे और उस पर दबाव बढ़े। अगर चीन खरीद कम करता है तो ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है, क्योंकि तेल निर्यात उसकी सबसे बड़ी आय का स्रोत है। हालांकि चीन पहले भी साफ कर चुका है कि वह अपने ऊर्जा हितों के आधार पर फैसले लेता है और बाहरी दबाव में नीति नहीं बदलता। बीजिंग का कहना है कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा उसके लिए प्राथमिकता है। इसी वजह से ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक में यह मुद्दा अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका व्यापार और टैरिफ विवाद के साथ ईरानी तेल को लेकर भी चीन से सहयोग मांग सकता है। अमेरिकी किसानों को ट्रेड डील की उम्मीद ट्रम्प की चीन यात्रा पर अमेरिकी किसानों की नजर है। ट्रेड वॉर, महंगाई और घटते सोयाबीन निर्यात से परेशान किसान चाहते हैं कि चीन के साथ मजबूत ट्रेड डील हो। NPR की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प के टैरिफ के बाद चीन ने अमेरिकी सोयाबीन खरीद घटाकर ब्राजील से खरीद बढ़ा दी थी। इससे कई अमेरिकी किसानों को फसल स्टोर करनी पड़ी। हालांकि पिछले साल के आखिर में चीन ने फिर अमेरिकी सोयाबीन खरीद शुरू की। व्हाइट हाउस का दावा है कि इस साल चीन 2.5 करोड़ मीट्रिक टन सोयाबीन खरीद सकता है, लेकिन किसान लिखित समझौते की मांग कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में चीन ने अमेरिका से 3 करोड़ मीट्रिक टन सोयाबीन खरीदी थी, जबकि ट्रम्प के पहले कार्यकाल से पहले यह आंकड़ा 3.6 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुंच गया था।

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ट्रम्प आज चीनी राष्ट्रपति से मिलेंगे:₹9 लाख करोड़ की बोइंग विमान डील संभव; जिनपिंग अमेरिकी उद्योगपतियों के साथ बैठक करेंगे

ट्रम्प आज चीनी राष्ट्रपति से मिलेंगे:₹9 लाख करोड़ की बोइंग विमान डील संभव; जिनपिंग अमेरिकी उद्योगपतियों के साथ बैठक करेंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आज बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं की यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब दुनिया की नजर अमेरिका-चीन रिश्तों, व्यापार और टेक्नोलॉजी को लेकर चल रही तनातनी पर टिकी हुई है। इस दौरे की सबसे बड़ी चर्चा बोइंग विमान डील को लेकर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन अमेरिकी कंपनी बोइंग से करीब 9 लाख करोड रुपए के विमानों की खरीद का बड़ा समझौता कर सकता है। अगर यह डील होती है तो यह दुनिया की सबसे बड़ी एविएशन डील्स में शामिल हो सकती है। बैठक में व्यापार, टैरिफ, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ताइवान जैसे मुद्दों पर भी बातचीत होगी। पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के रिश्तों में काफी तनाव रहा है, इसलिए इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। ट्रम्प के साथ कई बड़े अमेरिकी कारोबारी भी चीन पहुंचे हैं। इनमें टेक और फाइनेंस सेक्टर की बड़ी कंपनियों के अधिकारी शामिल हैं। शी जिनपिंग इन उद्योगपतियों के साथ अलग से बैठक करेंगे। इस दौरान निवेश, बाजार पहुंच और टेक्नोलॉजी सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। ट्रम्प 8 साल बाद चीन पहुंचे ट्रम्प बुधवार को 8 साल बाद चीन दौरे पर पहुंचे। उनका विमान बीजिंग कैपिटल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड किया, जहां चीनी उपराष्ट्रपति हान जेंग ने उन्हें रिसीव किया। हान जेंग को शी जिनपिंग का भरोसेमंद माना जाता है और वे पिछले साल ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुए थे। ट्रम्प के एयर फोर्स वन से उतरते समय करीब 300 बच्चे नीले और सफेद रंग की यूनिफॉर्म में एयरपोर्ट पर मौजूद थे। ये अमेरिका और चीन के झंडे लहरा रहे थे। ट्रम्प के साथ उनके बेटे एरिक ट्रम्प और बहू लारा ट्रम्प भी मौजूद थे। ट्रम्प के साथ इलॉन मस्क, एप्पल CEO टिम कुक और बोइंग CEO समेत 17 बड़े अमेरिकी कारोबारी भी गए हैं। हालांकि चिप कंपनी एनवीडिया के CEO जेनसन हुआंग इस दौरे में शामिल नहीं होंगे ट्रम्प के चीन पहुंचने की 4 तस्वीरें…. चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ट्रम्प को स्टेट डिनर देंगे व्हाइट हाउस के मुताबिक चीन दौरे के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग, डोनाल्ड ट्रम्प के सम्मान में स्टेट डिनर आयोजित करेंगे। चीन में इस तरह के स्टेट डिनर को बड़े कूटनीतिक सम्मान के तौर पर देखा जाता है। ऐसे कार्यक्रम आमतौर पर बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में आयोजित किए जाते हैं, जहां चीन का शीर्ष नेतृत्व विदेशी मेहमानों का स्वागत करता है। इसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी, कारोबारी प्रतिनिधि और खास मेहमान शामिल होते हैं। डिप्लोमैटिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन किसी विदेशी नेता को जितना बड़ा औपचारिक स्वागत देता है, उसे रिश्तों की अहमियत का संकेत माना जाता है। स्टेट डिनर के जरिए चीन यह संदेश देने की कोशिश करता है कि वह अमेरिका के साथ रिश्तों को रणनीतिक स्तर पर महत्व दे रहा है। ट्रम्प के पहले कार्यकाल में 2017 के चीन दौरे के दौरान भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनके सम्मान में विशेष स्वागत कार्यक्रम रखा था। ट्रम्प-जिनपिंग के बीच 4 अहम मुद्दों पर बातचीत संभव 1. ट्रेड टैरिफ विवाद अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर अब भी बड़ा मुद्दा है। ट्रम्प पहले चीनी सामान पर भारी टैरिफ की चेतावनी दे चुके हैं। दोनों देश अब व्यापारिक तनाव कम करने पर बातचीत कर सकते हैं। 2. ताइवान और हथियार बिक्री ताइवान को लेकर भी दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। ट्रम्प ने कहा है कि वह शी जिनपिंग से 11 अरब डॉलर के अमेरिकी हथियार पैकेज पर बात करेंगे। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और अमेरिकी हथियार बिक्री का लगातार विरोध करता रहा है। 3. रेयर अर्थ मिनरल्स और AI रेयर अर्थ मिनरल्स इलेक्ट्रिक व्हीकल, चिप्स और डिफेंस इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम हैं। चीन दुनिया का सबसे बड़ा सप्लायर है, जबकि अमेरिका उसकी निर्भरता कम करना चाहता है। AI और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी को लेकर भी दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है। 4. सोयाबीन और कृषि व्यापार चीन अमेरिकी किसानों के लिए बड़ा बाजार है। ट्रेड वॉर के बाद चीन ने अमेरिकी सोयाबीन खरीद घटाई थी। अब ट्रम्प प्रशासन कृषि निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। ईरानी तेल खरीदने पर चीन का अमेरिका से विवाद ईरान से तेल खरीद को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बना हुआ है। ट्रम्प प्रशासन का आरोप है कि चीन बड़े पैमाने पर ईरानी तेल खरीदकर तेहरान को आर्थिक सहारा दे रहा है, जबकि चीन इसे अपनी ऊर्जा जरूरतों से जुड़ा मामला बता रहा है। अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद चीन लंबे समय से ईरान से बड़े पैमाने पर तेल खरीदता रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सस्ता तेल खरीदने की रणनीति अपनाता है। ईरान पर प्रतिबंध लगने के बाद उसे अपना तेल डिस्काउंट पर बेचना पड़ता है। चीन की कई निजी रिफाइनरियां इसी रियायती तेल को खरीदती हैं। इससे चीन को सस्ती ऊर्जा मिलती है, जबकि ईरान को विदेशी मुद्रा कमाने का बड़ा रास्ता मिलता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल के वर्षों में ईरान के कुल तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन जाता रहा है। कई बार यह कारोबार सीधे ईरान के नाम से नहीं, बल्कि दूसरे देशों के जरिए या ब्लेंडेड ऑयल के रूप में किया जाता है, ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों से बचा जा सके। चीन पर ईरानी तेल न खरीदने का दबाव बना रहा अमेरिका अमेरिका चाहता है कि चीन ईरानी तेल की खरीद कम करे, ताकि तेहरान की कमाई घटे और उस पर दबाव बढ़े। अगर चीन खरीद कम करता है तो ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है, क्योंकि तेल निर्यात उसकी सबसे बड़ी आय का स्रोत है। हालांकि चीन पहले भी साफ कर चुका है कि वह अपने ऊर्जा हितों के आधार पर फैसले लेता है और बाहरी दबाव में नीति नहीं बदलता। बीजिंग का कहना है कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा उसके लिए प्राथमिकता है। इसी वजह से ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक में यह मुद्दा अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका व्यापार और टैरिफ विवाद के साथ ईरानी तेल को लेकर भी चीन से सहयोग मांग सकता है। अमेरिकी किसानों को ट्रेड डील की उम्मीद ट्रम्प की चीन यात्रा पर अमेरिकी किसानों की नजर है। ट्रेड वॉर, महंगाई और घटते सोयाबीन निर्यात से परेशान किसान चाहते हैं कि चीन के साथ मजबूत ट्रेड डील हो। NPR की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प के टैरिफ के बाद चीन ने अमेरिकी सोयाबीन खरीद घटाकर ब्राजील से खरीद बढ़ा दी थी। इससे कई अमेरिकी किसानों को फसल स्टोर करनी पड़ी। हालांकि पिछले साल के आखिर में चीन ने फिर अमेरिकी सोयाबीन खरीद शुरू की। व्हाइट हाउस का दावा है कि इस साल चीन 2.5 करोड़ मीट्रिक टन सोयाबीन खरीद सकता है, लेकिन किसान लिखित समझौते की मांग कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में चीन ने अमेरिका से 3 करोड़ मीट्रिक टन सोयाबीन खरीदी थी, जबकि ट्रम्प के पहले कार्यकाल से पहले यह आंकड़ा 3.6 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुंच गया था।

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