Fraud in auto check clearing; names erased with chemicals

वॉशिंगटन14 मिनट पहले कॉपी लिंक विशेषज्ञों के मुताबिक, नए दौर की बैंकिंग में बैंकों के ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग सिस्टम बहुत तेजी से चेक क्लियर करती है। यही सुविधा कमजोरी साबित हो रही है।- प्रतीकात्मक फोटो अमेरिका में पुराने जमाने का एक स्कैम नए और खतरनाक रूप में लौट आया है। जालसाज केमिकल से चेक पर लिखा नाम और रकम मिटाकर उसे अपने नाम कर ले रहे हैं। इससे चेक फ्रॉड के मामले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। एफबीआई और यूएस पोस्टल सर्विस ने चेतावनी जारी कर लोगों से कागजी चेक की जगह डिजिटल पेमेंट अपनाने की अपील की है। जालसाज एसीटोन या ब्लीच जैसे आम घरेलू केमिकल से चेक पर लिखी जानकारी मिटाकर उसे दोबारा अपने नाम पर जारी कर देते हैं। यह तरीका अब सिर्फ निजी चेकबुक तक सीमित नहीं रहा, बिजनेस पेमेंट, टैक्स रिफंड और सोशल सिक्योरिटी जैसी सरकारी सुविधाओं से जुड़े चेक भी जालसाजों के निशाने पर हैं। कैलिफोर्निया के एक दंपती के साथ हुई घटना इस स्कैम की गंभीरता बताती है। दंपती को आईआरएस से नोटिस मिला कि उन्होंने 12,000 डॉलर (11.3 लाख रुपए) का तिमाही टैक्स पेमेंट नहीं किया, जबकि उनके चेस बैंक स्टेटमेंट में यह चेक क्लियर दिखा रहा था। बाद में स्कैन कॉपी देखने पर पता चला कि ‘पे टू द ऑर्डर’ लाइन से आईआरएस का नाम मिटाकर किसी और व्यक्ति का नाम लिख दिया गया था। दंपती ने चेस बैंक से शिकायत की, लेकिन बैंक ने शुरू में यह कहकर मदद करने से मना कर दिया कि फ्रॉड रिपोर्ट करने की तय समय-सीमा खत्म हो चुकी है, क्योंकि चेक एक साल पहले ही चोरी होकर जमा हो गया था। बैंक की डिपॉजिट पॉलिसी और कानूनी नियमों के तहत तय समय सीमा बीतने पर नुकसान की जिम्मेदारी आम तौर पर ग्राहक पर ही आती है। लेकिन दंपती के दबाव और मामला सामने आने के बाद चेस बैंक ने दोबारा जांच शुरू की और उस फर्जी खाते का पता लगाया, जिसमें चोरी की रकम भेजी गई थी। उस खाते में तब भी करीब 11,000 डॉलर (10.4 लाख रुपए) बचे हुए थे। इससे दंपती को लगभग पूरी रकम वापस मिल गई। बैंक प्रवक्ता जैरी डुब्रोव्स्की ने कहा कि वे इस मामले को सुलझाने पर संतुष्ट हैं और ग्राहकों को सलाह दी कि वे डाक से चेक भेजने से बचें। हर महीने अपना बैंक स्टेटमेंट जरूर जांचें। विशेषज्ञों के मुताबिक, नए दौर की बैंकिंग में बैंकों के ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग सिस्टम बहुत तेजी से चेक क्लियर करती है। यही सुविधा कमजोरी साबित हो रही है। ऑटो क्यिरिंग सिस्टम में चेक से छेड़छाड़, रंग में बदलाव या लिखावट में मिसमैच जैसी गड़बड़ियां पकड़ में नहीं आतीं। इसका सीधा फायदा जालसाजों को मिल रहा है। आसान जालसाजी के चलते अमेरिका में चेक फ्रॉड के मामले 13 साल में 2,000% बढ़े अमेरिका में चेक फ्रॉड की शिकायतें 2021 के 3.5 लाख से बढ़कर 2022 में 6.8 लाख हो गईं। हाई-वॉल्यूम मेल चोरी के मामले 2010 में सिर्फ 2,200 थे, जो 2023 में 49,000 से ज्यादा हो गए, यानी करीब 2,000% की बढ़ोतरी। पोस्टल पुलिस अधिकारी संघ के प्रेसिडेट फ्रैंक अल्बर्गो के मुताबिक, यह अब संगठित डाक अपराध का दौर है। एफबीआई और पोस्टल सर्विस की सलाह है कि चेक की जगह ई-चेक और डिजिटल पेमेंट करें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Vikram Bhatt Jail Statement | Fraud Case Bollywood Producer

कुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को 7 दिसंबर 2025 को राजस्थान पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया था। फिल्ममेकर विक्रम भट्ट ने हाल ही में कथित धोखाधड़ी के आरोप में उदयपुर जेल में बिताए 70 दिनों का अनुभव शेयर किया। विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी पर 30 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगा था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में भट्ट ने कहा कि जेल में उनका समय बहुत मुश्किल था, लेकिन वहां उन्हें अपने साथी कैदियों से उम्मीद से ज्यादा सपोर्ट मिला। उन्होंने बताया कि वह 60 से 80 कैदियों के साथ एक बैरक में रहते थे। उनके अनुसार, साथी कैदी उनका खास ध्यान रखते थे, उनके लिए खाना लाते थे और कपड़ों की देखभाल करते थे। भट्ट ने कहा कि कैदी उन्हें ‘भीष्म पितामह’ कहकर बुलाते थे और रात में उनसे डरावनी कहानियां सुनाने की मांग करते थे। विक्रम भट्ट ने राज, 1920, हॉन्टेड 3डी, राज 3 जैसी कई फिल्में बनाई हैं। जेल में भट्ट को पीलिया हो गया था भट्ट ने बताया कि जेल के दौरान उनकी तबीयत और बिगड़ गई तथा उन्हें पीलिया हो गया। उन्होंने कहा, “मैं वहां लगभग मर ही गया था। अब मुझे नहीं पता कि वहां की राजनीति क्या थी, क्योंकि मेरे साथ तो लोग अच्छे थे, लेकिन मैं एक ऑटोइम्यून बीमारी, एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से पीड़ित हूं। इसकी वजह से मेरे जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द रहता है।” फिल्ममेकर ने आगे कहा कि दिसंबर-जनवरी का महीना था और बहुत ठंड पड़ रही थी। मैं जिस करवट सोता, उसी तरफ की हिप बोन में दर्द होने लगता। दूसरी करवट लेता तो वहां दर्द शुरू हो जाता। इसी दौरान मुझे पीलिया भी हो गया। विक्रम ने अस्पताल ले जाने में देरी का दावा किया भट्ट ने दावा किया कि तेज बुखार और कमजोरी के बावजूद उन्हें अस्पताल ले जाने में देरी हुई। उन्होंने कहा कि बैरक के साथी कैदी उन्हें अपने कंबल ओढ़ाकर मदद करते थे, जबकि वे लगातार अस्पताल भेजे जाने की मांग कर रहे थे। रिहाई के बाद उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों के फोन आए। भट्ट ने बताया कि मिथुन चक्रवर्ती और संजय दत्त ने उनका हालचाल पूछा। उन्होंने कहा कि संजय दत्त का फोन उनके लिए खास था क्योंकि उन्होंने कभी साथ काम नहीं किया था। जब उनसे पूछा गया कि क्या अक्षय कुमार ने भी संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि अक्षय उनके दोस्त नहीं हैं, इसलिए ऐसी उम्मीद नहीं थी। भट्ट ने अपने बचपन के दोस्त अजय देवगन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अजय का फोन आना नैचुरल था क्योंकि दोनों का रिश्ता सालों का पुराना है। भट्ट के अनुसार, हर रिश्ते का नेचर अलग होता है और सभी से समान अपेक्षा रखना उचित नहीं है। विक्रम भट्ट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जेल से बाहर आए विक्रम भट्ट, बोले-सत्य पराजित नहीं होगा:अंदर एक दोस्त बना, मुझे मेवाड़ की मिट्टी की तासीर के बारे में बताया बॉलीवुड फिल्म डायरेक्टर विक्रम भट्ट 19 फरवरी 2026 को 2 महीने 11 दिन बाद उदयपुर सेंट्रल जेल से बाहर आए गए थे। जेल से निकलते ही उन्होंने सबसे पहले कैंपस में स्थित भगवान शिव के दर्शन किए। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Vikram Bhatt Jail Statement | Fraud Case Bollywood Producer

17 मिनट पहले कॉपी लिंक विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को 7 दिसंबर 2025 को राजस्थान पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया था। फिल्ममेकर विक्रम भट्ट ने हाल ही में कथित धोखाधड़ी के आरोप में उदयपुर जेल में बिताए 70 दिनों का अनुभव शेयर किया। विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी पर 30 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगा था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में भट्ट ने कहा कि जेल में उनका समय बहुत मुश्किल था, लेकिन वहां उन्हें अपने साथी कैदियों से उम्मीद से ज्यादा सपोर्ट मिला। उन्होंने बताया कि वह 60 से 80 कैदियों के साथ एक बैरक में रहते थे। उनके अनुसार, साथी कैदी उनका खास ध्यान रखते थे, उनके लिए खाना लाते थे और कपड़ों की देखभाल करते थे। भट्ट ने कहा कि कैदी उन्हें ‘भीष्म पितामह’ कहकर बुलाते थे और रात में उनसे डरावनी कहानियां सुनाने की मांग करते थे। विक्रम भट्ट ने राज, 1920, हॉन्टेड 3डी, राज 3 जैसी कई फिल्में बनाई हैं। जेल में भट्ट को पीलिया हो गया था भट्ट ने बताया कि जेल के दौरान उनकी तबीयत और बिगड़ गई तथा उन्हें पीलिया हो गया। उन्होंने कहा, “मैं वहां लगभग मर ही गया था। अब मुझे नहीं पता कि वहां की राजनीति क्या थी, क्योंकि मेरे साथ तो लोग अच्छे थे, लेकिन मैं एक ऑटोइम्यून बीमारी, एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से पीड़ित हूं। इसकी वजह से मेरे जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द रहता है।” फिल्ममेकर ने आगे कहा कि दिसंबर-जनवरी का महीना था और बहुत ठंड पड़ रही थी। मैं जिस करवट सोता, उसी तरफ की हिप बोन में दर्द होने लगता। दूसरी करवट लेता तो वहां दर्द शुरू हो जाता। इसी दौरान मुझे पीलिया भी हो गया। विक्रम ने अस्पताल ले जाने में देरी का दावा किया भट्ट ने दावा किया कि तेज बुखार और कमजोरी के बावजूद उन्हें अस्पताल ले जाने में देरी हुई। उन्होंने कहा कि बैरक के साथी कैदी उन्हें अपने कंबल ओढ़ाकर मदद करते थे, जबकि वे लगातार अस्पताल भेजे जाने की मांग कर रहे थे। रिहाई के बाद उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों के फोन आए। भट्ट ने बताया कि मिथुन चक्रवर्ती और संजय दत्त ने उनका हालचाल पूछा। उन्होंने कहा कि संजय दत्त का फोन उनके लिए खास था क्योंकि उन्होंने कभी साथ काम नहीं किया था। जब उनसे पूछा गया कि क्या अक्षय कुमार ने भी संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि अक्षय उनके दोस्त नहीं हैं, इसलिए ऐसी उम्मीद नहीं थी। भट्ट ने अपने बचपन के दोस्त अजय देवगन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अजय का फोन आना नैचुरल था क्योंकि दोनों का रिश्ता सालों का पुराना है। भट्ट के अनुसार, हर रिश्ते का नेचर अलग होता है और सभी से समान अपेक्षा रखना उचित नहीं है। विक्रम भट्ट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जेल से बाहर आए विक्रम भट्ट, बोले-सत्य पराजित नहीं होगा:अंदर एक दोस्त बना, मुझे मेवाड़ की मिट्टी की तासीर के बारे में बताया बॉलीवुड फिल्म डायरेक्टर विक्रम भट्ट 19 फरवरी 2026 को 2 महीने 11 दिन बाद उदयपुर सेंट्रल जेल से बाहर आए गए थे। जेल से निकलते ही उन्होंने सबसे पहले कैंपस में स्थित भगवान शिव के दर्शन किए। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Rajesh Mehta SEBI Ban | Rajesh Exports Revenue Fraud Allegations

मुंबई3 मिनट पहले कॉपी लिंक सेबी ने गोल्ड रिफाइनिंग कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स के फाउंडर राजेश मेहता पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग पर रोक लगा दी है। बाजार नियमाक ने शुरुआती जांच में पाया कि कंपनी ने अपने कुल रेवेन्यू का करीब 97% हिस्सा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है। इस खबर के बाद कंपनी का शेयर 5% टूट गया। सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं पूरा मामला…. सवाल 1: सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर राजेश मेहता पर क्या कार्रवाई की है? जवाब: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रमोटर और चेयरमैन राजेश मेहता पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने से अंतरिम रोक लगा दी है। सेबी को कंपनी के वित्तीय कामकाज में गंभीर अनियमितताएं मिली हैं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है। सवाल 2: सेबी को जांच में क्या गड़बड़ी मिली है, जिसे रेगुलेटर ने चौंकाने वाला कहा है? जवाब: सेबी ने 109 पन्नों का एक अंतरिम आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि शुरुआती जांच के मुताबिक, राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी कुल रिपोर्ट की गई बिक्री को बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है। सेबी के मुताबिक कंपनी का लगभग 97% से 99% रेवेन्यू केवल कागजों पर हो सकता है। आदेश में कहा गया है कि इतनी बड़ी मात्रा में रेवेन्यू बढ़ाना चौंकाने वाला है। सवाल 3: सेबी के आरोपों पर राजेश एक्सपोर्ट्स ने क्या आधिकारिक सफाई दी है? जवाब: कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि उन्हें 3 जून 2026 को सेबी का अंतरिम आदेश मिला है। कंपनी के मुताबिक, यह सिर्फ एक अंतरिम आदेश है और सेबी ने अभी तक किसी भी पहलू पर कोई अंतिम या प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला है। रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के आरोप पर कंपनी ने कहा कि कंपनी का घोषित किया गया रेवेन्यू पूरी तरह सही है और इसमें कोई बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना नहीं है। ऐसा लगता है कि सेबी और कंपनी के बीच किसी तरह का ‘कम्युनिकेशन गैप’ और भ्रम पैदा हुआ है। सवाल 4: सेबी के ऑर्डर के बाद आज कंपनी के शेयरों का बाजार में क्या हाल रहा? जवाब: वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों के बाद गुरुवार के पूरे ट्रेडिंग सेशन के दौरान राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में बिकवाली रही। कंपनी का शेयर लगातार 5% के लोअर सर्किट पर लॉक रहा। यानी कि बाजार में सिर्फ सेलर मौजूद थे और कोई खरीदार नहीं था। सवाल 5: राजेश मेहता कौन हैं और उन्होंने इस कंपनी की शुरुआत कैसे की थी? जवाब: 60 साल के राजेश जे. मेहता बेंगलुरु के रहने वाले हैं और वे राजेश एक्सपोर्ट्स के फाउंडर और चेयरमैन हैं। उन्होंने कॉलेज छोड़ने के बाद बहुत कम उम्र में कीमती धातुओं के बिजनेस में कदम रखा था। शुरुआती दिनों में वे चांदी का व्यापार करते थे, जिसके बाद वे ज्वेलरी बिजनेस में आए। उन्होंने साल 1989 में राजेश एक्सपोर्ट्स की स्थापना की और इसे दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट कंपनियों में से एक बना दिया। सवाल 6: राजेश एक्सपोर्ट्स का बिजनेस मॉडल क्या है और कंपनी कितनी बड़ी है? जवाब: राजेश एक्सपोर्ट्स का बिजनेस कच्चे सोने को खरीदने से शुरू होता है। कंपनी इसे रिफाइन करके शुद्ध सोना बनाती है, फिर इससे ज्वेलरी तैयार करती है और सोने के प्रोडक्ट्स बेचती है। कंपनी का सालाना रेवेन्यू लगभग 39.2 बिलियन डॉलर (करीब 3.75 लाख करोड़ रुपए) है। सवाल 7: कंपनी के इतिहास में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट या मील का पत्थर क्या रहा है? जवाब: कंपनी के बिजनेस में सबसे बड़ा बदलाव साल 2015 में आया था। तब राजेश एक्सपोर्ट्स ने स्विट्जरलैंड की मशहूर गोल्ड रिफाइनरी ‘वैलकैम्बी’ का अधिग्रहण किया था। वैलकैम्बी को दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग फैसिलिटीज में से एक माना जाता है। इस डील के बाद राजेश मेहता की कंपनी ग्लोबल लेवल पर एक बड़ी ताकत बनकर उभरी थी। सवाल 8: रेवेन्यू में गड़बड़ी का कुल आंकड़ा कितना आंका जा रहा है? जवाब: निवेशकों और एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर सेबी के दावे को आधार माना जाए तो रेवेन्यू में गड़बड़ी का यह आंकड़ा करीब 15.15 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि इसे कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े संदिग्ध रेवेन्यू मामलों में से एक माना जा रहा है। सवाल 9: इस कार्रवाई का देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी LIC पर क्या असर पड़ा है? जवाब: राजेश एक्सपोर्ट्स पर सेबी के इस एक्शन का सीधा असर लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) पर पड़ा है। LIC के पास राजेश एक्सपोर्ट्स की कुल 10.8% हिस्सेदारी है। सेबी का ऑर्डर आने के बाद LIC के शेयरों में भी करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई है। सवाल 10: आम निवेशकों और LIC को इस मामले से क्या नुकसान हो सकता है? जवाब: बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर रेवेन्यू के फर्जी होने के आरोपों से राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भारी गिरावट आ सकती है। शेयर की कीमतें गिरने से कंपनी में LIC के किए गए निवेश की वैल्यू कम हो जाएगी। इसके अलावा, जिन रिटेल निवेशकों ने इस कंपनी के शेयर खरीद रखे हैं, उनकी पूंजी भी डूबने का खतरा बढ़ गया है। सवाल 11: इस अंतरिम आदेश के बाद आगे क्या प्रक्रिया होगी? जवाब: सेबी का यह आदेश अभी अंतरिम है, जिसका मतलब है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। सेबी अपनी विस्तृत जांच जारी रखेगा। इस दौरान राजेश मेहता और कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। यदि आरोप अंतिम जांच में भी सही साबित होते हैं, तो सेबी कंपनी पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ प्रमोटर्स को लंबे समय के लिए बाजार से प्रतिबंधित कर सकता है और मामला आपराधिक जांच एजेंसियों को भी भेजा जा सकता है। नॉलेज पार्ट: जानें क्या होता है ‘रेवेन्यू इन्फ्लेशन’ ? जब कोई कंपनी अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत दिखाने, बैंक लोन हासिल करने या शेयर बाजार में अपने शेयर की कीमतें बढ़ाने के लिए असल बिक्री से ज्यादा कमाई कागजों पर दिखाती है, तो उसे ‘रेवेन्यू इन्फ्लेशन’ या रेवेन्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना कहते हैं। इसमें अक्सर बिना किसी वास्तविक माल की डिलीवरी के केवल बिल बना दिए जाते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Rajesh Mehta SEBI Ban | Rajesh Exports Revenue Fraud Allegations

मुंबई58 मिनट पहले कॉपी लिंक सेबी ने गोल्ड रिफाइनिंग कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स के फाउंडर राजेश मेहता पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग पर रोक लगा दी है। बाजार नियमाक ने शुरुआती जांच में पाया कि कंपनी ने अपने रेवेन्यू का करीब 97% हिस्सा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है। इस खबर से कंपनी का शेयर 5% टूट गया। सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं पूरा मामला…. सवाल 1: सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर राजेश मेहता पर क्या कार्रवाई की है? जवाब: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रमोटर और चेयरमैन राजेश मेहता पर ट्रेडिंग करने से अंतरिम रोक लगा दी है। सेबी को कंपनी के वित्तीय कामकाज में गंभीर अनियमितताएं मिली हैं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है। सवाल 2: सेबी को जांच में क्या गड़बड़ी मिली है, जिसे रेगुलेटर ने चौंकाने वाला कहा है? जवाब: सेबी ने 109 पन्नों का एक अंतरिम आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि शुरुआती जांच के मुताबिक, राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी कुल रिपोर्ट की गई बिक्री को बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है। कंपनी का लगभग 99% रेवेन्यू केवल कागजों पर हो सकता है। आदेश में कहा गया है कि इतनी बड़ी मात्रा में रेवेन्यू बढ़ाना चौंकाने वाला है। सवाल 3: सेबी के आरोपों पर राजेश एक्सपोर्ट्स ने क्या आधिकारिक सफाई दी है? जवाब: कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि उन्हें 3 जून 2026 को सेबी का अंतरिम आदेश मिला है। कंपनी के मुताबिक, यह सिर्फ एक अंतरिम आदेश है और सेबी ने अभी तक किसी भी पहलू पर कोई अंतिम या प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला है। रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के आरोप पर कंपनी ने कहा कि कंपनी का घोषित किया गया रेवेन्यू पूरी तरह सही है और इसमें कोई बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना नहीं है। ऐसा लगता है कि सेबी और कंपनी के बीच किसी तरह का ‘कम्युनिकेशन गैप’ और भ्रम पैदा हुआ है। सवाल 4: सेबी के ऑर्डर के बाद आज कंपनी के शेयरों का बाजार में क्या हाल रहा? जवाब: वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों के बाद गुरुवार के पूरे ट्रेडिंग सेशन के दौरान राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में बिकवाली रही। कंपनी का शेयर लगातार 5% के लोअर सर्किट पर लॉक रहा। यानी कि बाजार में सिर्फ सेलर मौजूद थे और कोई खरीदार नहीं था। सवाल 5: राजेश मेहता कौन हैं और उन्होंने इस कंपनी की शुरुआत कैसे की थी? जवाब: 60 साल के राजेश जे. मेहता बेंगलुरु के रहने वाले हैं और वे राजेश एक्सपोर्ट्स के फाउंडर और चेयरमैन हैं। उन्होंने कॉलेज छोड़ने के बाद बहुत कम उम्र में कीमती धातुओं के बिजनेस में कदम रखा था। शुरुआती दिनों में वे चांदी का व्यापार करते थे। इसके बाद वे ज्वेलरी बिजनेस में आए। उन्होंने साल 1989 में राजेश एक्सपोर्ट्स की स्थापना की और इसे दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट कंपनियों में से एक बना दिया। सवाल 6: राजेश एक्सपोर्ट्स का बिजनेस मॉडल क्या है और कंपनी कितनी बड़ी है? जवाब: राजेश एक्सपोर्ट्स का बिजनेस कच्चे सोने को खरीदने से शुरू होता है। कंपनी इसे रिफाइन करके शुद्ध सोना बनाती है, फिर इससे ज्वेलरी तैयार करती है और बेचती है। कंपनी का सालाना रेवेन्यू लगभग 39.2 बिलियन डॉलर (करीब 3.75 लाख करोड़ रुपए) है। सवाल 7: कंपनी के इतिहास में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट या मील का पत्थर क्या रहा है? जवाब: कंपनी के बिजनेस में सबसे बड़ा बदलाव साल 2015 में आया था। तब राजेश एक्सपोर्ट्स ने स्विट्जरलैंड की मशहूर गोल्ड रिफाइनरी ‘वैलकैम्बी’ का अधिग्रहण किया था। वैलकैम्बी को दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग फैसिलिटीज में से एक माना जाता है। इस डील के बाद राजेश मेहता की कंपनी ग्लोबल लेवल पर एक बड़ी ताकत बनकर उभरी थी। सवाल 8: रेवेन्यू में गड़बड़ी का कुल आंकड़ा कितना आंका जा रहा है? जवाब: निवेशकों और एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर सेबी के दावे को आधार माना जाए तो रेवेन्यू में गड़बड़ी का यह आंकड़ा करीब 15.15 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि इसे कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े संदिग्ध रेवेन्यू मामलों में से एक माना जा रहा है। सवाल 9: इस कार्रवाई का सरकारी बीमा कंपनी LIC पर क्या असर पड़ा है? जवाब: राजेश एक्सपोर्ट्स पर सेबी के इस एक्शन का सीधा असर लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) पर पड़ा है। LIC के पास राजेश एक्सपोर्ट्स की कुल 10.8% हिस्सेदारी है। सेबी का ऑर्डर आने के बाद LIC के शेयरों में भी करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई है। सवाल 10: आम निवेशकों और LIC को इस मामले से क्या नुकसान हो सकता है? जवाब: बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर रेवेन्यू के फर्जी होने के आरोपों से राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भारी गिरावट आ सकती है। शेयर की कीमतें गिरने से कंपनी में LIC के किए गए निवेश की वैल्यू कम हो जाएगी। इसके अलावा, जिन रिटेल निवेशकों ने इस कंपनी के शेयर खरीद रखे हैं, उनकी पूंजी भी डूबने का खतरा बढ़ गया है। सवाल 11: इस अंतरिम आदेश के बाद आगे क्या प्रक्रिया होगी? जवाब: सेबी का यह आदेश अभी अंतरिम है, जिसका मतलब है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। सेबी अपनी विस्तृत जांच जारी रखेगा। इस दौरान राजेश मेहता और कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। यदि आरोप अंतिम जांच में भी सही साबित होते हैं, तो सेबी कंपनी पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ प्रमोटर्स को लंबे समय के लिए बाजार से प्रतिबंधित कर सकता है और मामला आपराधिक जांच एजेंसियों को भी भेजा जा सकता है। नॉलेज पार्ट: जानें क्या होता है ‘रेवेन्यू इन्फ्लेशन’ ? जब कोई कंपनी अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत दिखाने, बैंक लोन हासिल करने या शेयर बाजार में अपने शेयर की कीमतें बढ़ाने के लिए असल बिक्री से ज्यादा कमाई कागजों पर दिखाती है, तो उसे ‘रेवेन्यू इन्फ्लेशन’ या रेवेन्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना कहते हैं। इसमें अक्सर बिना किसी वास्तविक माल की डिलीवरी के केवल बिल बना दिए जाते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Ashoknagar Fraud Gang | Luxury Life, Temple Donations

अशोकनगर पुलिस ने ठगी के 2 आरोपियों को अरेस्ट किया है। मध्य प्रदेश के अशोकनगर में सामने आए हाई-प्रोफाइल ब्लैकमेल गैंग ने सोशल मीडिया को हथियार बनाकर एक युवती को टारगेट किया। इंस्टाग्राम पर दोस्ती, फिर प्रेमजाल और उसके बाद अश्लील फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर 1 करोड़ 30 लाख रुपए की वसूली की। . गिरफ्तार आकाश चौहान और उसकी पत्नी आयुषी चौहान से पुलिस रिमांड में पूछताछ के दौरान कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, ठगी के पैसों से आरोपियों ने लग्जरी लाइफस्टाइल बनाई थी। गिरोह की मास्टरमाइंड आयुषी चांदी की चप्पल पहनती थी और चांदी का पर्स रखती थी। ‘पाप न लगे’ इसलिए विदेश में कराते थे भंडारे अशोकनगर कोतवाली पुलिस के मुताबिक, आरोपी ‘पाप न लगे’ इसलिए देश-विदेश के मंदिरों में दान-पुण्य और भंडारे करवाते थे। पुलिस अब तक करीब 70 लाख रुपए की संपत्ति, लग्जरी सामान और नकदी जब्त कर चुकी है। वारदात से जुड़ी तस्वीरें देखिए… दंपती आयुषी चौहान और आकाश चौहान पर भी केस दर्ज हुआ है। आयुषी चौहान चांदी की चप्पलें पहनती थी। आरोपियों से घर से 70 लाख रुपए की संपत्ति और लग्जरी सामान बरामद किया । इंस्टाग्राम से शुरू हुआ जाल, फिर शुरू हुआ ब्लैकमेल पुलिस जांच के अनुसार, आरोपियों ने इंस्टाग्राम के जरिए एक युवती से संपर्क किया। धीरे-धीरे उसे प्रेमजाल में फंसाया गया। इसके बाद उसके निजी फोटो और वीडियो हासिल कर लिए गए, फिर ब्लैकमेलिंग शुरू हुई। आरोपियों ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर युवती को डराया। अश्लील फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी दी। भय और बदनामी के डर से पीड़िता से करीब 1 करोड़ 30 लाख रुपए वसूले गए। गैंग में तांत्रिक युवती और टैटू आर्टिस्ट भी शामिल गिरोह में एक तांत्रिक युवती और एक टैटू आर्टिस्ट की भूमिका भी सामने आई है। मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक आरोपी अभी फरार है। चांदी की चप्पल और पर्स, ठगी के पैसों से बनी ‘लग्जरी क्वीन’ पुलिस के मुताबिक, गिरोह की मास्टरमाइंड आयुषी चौहान ठगी के पैसों से शाही अंदाज में रहती थी। पूछताछ में सामने आया कि वह चांदी की चप्पलें पहनती थी। उसके पास चांदी का पर्स भी था। आरोपियों ने लाखों रुपए के सोने-चांदी के जेवर खरीदे थे। पुलिस ने उनके घर से अब तक करीब 70 लाख रुपए की संपत्ति और लग्जरी सामान जब्त किया है। इससे पहले पुलिस महिंद्रा थार रॉक्स, स्कूटी और अन्य वाहन भी जब्त कर चुकी है। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और पेमेंट गेटवे की जांच कर रही। नेपाल तक में कराया भंडारा, मंदिरों में बांटते थे पैसा पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि गलत तरीके से कमाए गए पैसों से उन्हें “पाप लगने” का डर था। इसी वजह से वे जगह-जगह मंदिरों में दर्शन करने जाते थे। वहां दान-पुण्य और भंडारे करवाते थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी असम, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और नेपाल तक घूमने जाते थे। वे अपनी थार गाड़ी से धार्मिक स्थलों पर पहुंचते थे और भंडारे आयोजित करते थे। नेपाल में भी उन्होंने भंडारा कराया था। घर से मिला लग्जरी सामान का अंबार कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के घर से भारी मात्रा में महंगा सामान बरामद किया है। जब्त सामान में सोने-चांदी के जेवर, चांदी की चप्पलें और पर्स, आईफोन, एप्पल लैपटॉप, करीब एक लाख रुपए कीमत का फ्रिज, वॉशिंग मशीन, अलमारी, ड्रेसिंग टेबल, महंगी घड़ियां और अन्य घरेलू सामान शामिल हैं। इसके अलावा 1.50 लाख रुपए कैश भी जब्त किए गए हैं। मोबाइल और लैपटॉप FSL जांच के लिए भेजे कोतवाली थाना प्रभारी रवि प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि आरोपियों के मोबाइल फोन और लैपटॉप एफएसएल जांच के लिए भेजे गए हैं। पुलिस को आशंका है कि इनमें अन्य युवतियों और लोगों के वीडियो और डेटा भी हो सकते हैं। अब पुलिस आरोपियों के बैंक खातों और पेमेंट गेटवे की भी जांच कर रही है। हर ट्रांजेक्शन को खंगाला जा रहा है, ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं और लोग भी इस गैंग का शिकार तो नहीं बने। कोर्ट में पेश होगा जब्त सामान जब्त की गई संपत्ति और नकदी को कोर्ट में पेश किया जाएगा। कोशिश रहेगी कि पीड़िता को मुआवजे के तौर पर राहत दिलाई जा सके। फिलहाल चारों आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल ब्लैकमेल गैंग से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं। ………………………………. यह भी पढ़ें… इंस्टाग्राम पर दोस्ती, फिर युवती से डेढ़ करोड़ की ठगी:क्राइम ब्रांच अफसर बनकर धमकाते रहे आरोपी अशोकनगर में सोशल मीडिया पर दोस्ती कर युवती को प्रेमजाल में फंसाने, अश्लील फोटो-वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने और फर्जी क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर करीब 1 करोड़ 30 लाख रुपए की ठगी करने वाले संगठित गिरोह का पुलिस ने रविवार को पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में आदित्य सिंह तोमर, आयुषी चौहान, आकाश चौहान और आर्यन सोनी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से ठगी की रकम से खरीदे गए सोने-चांदी के जेवर, थार रॉक्स कार, स्कूटी, मोबाइल, लैपटॉप और नकदी बरामद की गई है। पूरी खबर पढ़िए…
Anil Ambani 40,000 Cr Fraud Case

Hindi News Business Anil Ambani 40,000 Cr Fraud Case | Supreme Court ED Debate, Arrest Question नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक अनिल अंबानी की कंपनियों से जुड़े 40,000 करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड मामले में सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस हुई। याचिकाकर्ता वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में पूछा कि जब सेबी (SEBI) खुद अनिल अंबानी को इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड बता चुकी है, तो फिर उन्हें अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? इस सवाल पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जांच एजेंसियां इस बात का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं कि उन्होंने किसी ‘X’ या ‘Y’ व्यक्ति को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया। एजेंसियों ने दर्ज कीं दो नई FIR सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को जानकारी दी कि जांच के दौरान कुछ नए सबूत मिलने के बाद एजेंसियों ने 2 नई FIR दर्ज की हैं। उन्होंने कहा कि जांच जारी है और वे व्यक्तिगत गिरफ्तारी के सवालों पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकते। इससे पहले प्रशांत भूषण ने तर्क दिया था कि ED ने इस मामले में कुछ छोटे कर्मचारियों को तो गिरफ्तार किया है, लेकिन मुख्य आरोपी अनिल अंबानी पर अब तक वैसी कार्रवाई नहीं हुई है। रिलायंस कम्युनिकेशंस के फाउंडर हैं अनिल अंबानी। (फाइल फोटो) 40,000 करोड़ के फ्रॉड की जांच, 8 मई को अगली सुनवाई CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने अब इस मामले को 8 मई के लिए टाल दिया है। उस दिन ED और CBI द्वारा दाखिल की गई नई ‘स्टेटस रिपोर्ट’ पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह आगे कोई भी निर्देश जारी करने से पहले इन जांच एजेंसियों की विस्तृत रिपोर्ट देखना चाहता है। 2,983 करोड़ का कर्ज सिर्फ 26 करोड़ में सेटल हुआ पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ED की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए हैरानी जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अनिल अंबानी ग्रुप की कुछ कंपनियों का 2,983 करोड़ रुपए का कर्ज इन्सॉल्वेंसी (दिवाला) प्रक्रिया के दौरान महज 26 करोड़ रुपए में सेटल कर दिया गया था। कोर्ट ने यह भी पाया कि इन अधिग्रहणों को 8 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) ने “प्रोजेक्ट हेल्प” के जरिए सुगम बनाया था। IBC प्रक्रिया के दुरुपयोग पर CJI की चिंता सीजेआई सूर्यकांत ने दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) प्रक्रिया के बढ़ते दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं जहां दिवालिया कंपनियां अपनी संपत्तियों को अपने ही परिवार के सदस्यों या दोस्तों को बहुत कम कीमतों पर नीलाम कर देती हैं। उन्होंने इसे एक गंभीर मुद्दा बताते हुए एजेंसियों को तेजी से जांच करने के निर्देश दिए। ₹584 करोड़ का कर्ज ₹85 करोड़ में निपटाया सुनवाई के दौरान एक लेनदार के वकील ने एक चौंकाने वाला उदाहरण पेश किया। उन्होंने बताया कि एक पूरी तरह सक्षम कंपनी जो हर महीने 8.5 करोड़ रुपए का टोल वसूल रही थी, उसने खुद को दिवालिया घोषित करने के लिए आवेदन किया। बाद में उस कंपनी का 584 करोड़ रुपए का कर्ज महज 85 करोड़ रुपए में निपटा दिया गया। इस तरह कंपनी कर्जमुक्त होकर बाहर आ गई और कर्ज देने वालों को भारी नुकसान हुआ। कोर्ट ने कहा कि अगर जांच से जुड़ा कोई भी ऐसा सबूत है, तो एजेंसियां उसे संज्ञान में लें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Anil Ambani 40,000 Cr Fraud Case

Hindi News Business Anil Ambani 40,000 Cr Fraud Case | Supreme Court ED Debate, Arrest Question नई दिल्ली24 मिनट पहले कॉपी लिंक अनिल अंबानी की कंपनियों से जुड़े 40,000 करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड मामले में सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस हुई। याचिकाकर्ता वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में पूछा कि जब सेबी (SEBI) खुद अनिल अंबानी को इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड बता चुकी है, तो फिर उन्हें अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? इस सवाल पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जांच एजेंसियां इस बात का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं कि उन्होंने किसी ‘X’ या ‘Y’ व्यक्ति को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया। एजेंसियों ने दर्ज कीं दो नई FIR सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को जानकारी दी कि जांच के दौरान कुछ नए सबूत मिलने के बाद एजेंसियों ने 2 नई FIR दर्ज की हैं। उन्होंने कहा कि जांच जारी है और वे व्यक्तिगत गिरफ्तारी के सवालों पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकते। इससे पहले प्रशांत भूषण ने तर्क दिया था कि ED ने इस मामले में कुछ छोटे कर्मचारियों को तो गिरफ्तार किया है, लेकिन मुख्य आरोपी अनिल अंबानी पर अब तक वैसी कार्रवाई नहीं हुई है। रिलायंस कम्युनिकेशंस के फाउंडर हैं अनिल अंबानी। (फाइल फोटो) 40,000 करोड़ के फ्रॉड की जांच, 8 मई को अगली सुनवाई CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने अब इस मामले को 8 मई के लिए टाल दिया है। उस दिन ED और CBI द्वारा दाखिल की गई नई ‘स्टेटस रिपोर्ट’ पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह आगे कोई भी निर्देश जारी करने से पहले इन जांच एजेंसियों की विस्तृत रिपोर्ट देखना चाहता है। 2,983 करोड़ का कर्ज सिर्फ 26 करोड़ में सेटल हुआ पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ED की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए हैरानी जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अनिल अंबानी ग्रुप की कुछ कंपनियों का 2,983 करोड़ रुपए का कर्ज इन्सॉल्वेंसी (दिवाला) प्रक्रिया के दौरान महज 26 करोड़ रुपए में सेटल कर दिया गया था। कोर्ट ने यह भी पाया कि इन अधिग्रहणों को 8 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) ने “प्रोजेक्ट हेल्प” के जरिए सुगम बनाया था। IBC प्रक्रिया के दुरुपयोग पर CJI की चिंता सीजेआई सूर्यकांत ने दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) प्रक्रिया के बढ़ते दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं जहां दिवालिया कंपनियां अपनी संपत्तियों को अपने ही परिवार के सदस्यों या दोस्तों को बहुत कम कीमतों पर नीलाम कर देती हैं। उन्होंने इसे एक गंभीर मुद्दा बताते हुए एजेंसियों को तेजी से जांच करने के निर्देश दिए। ₹584 करोड़ का कर्ज ₹85 करोड़ में निपटाया सुनवाई के दौरान एक लेनदार के वकील ने एक चौंकाने वाला उदाहरण पेश किया। उन्होंने बताया कि एक पूरी तरह सक्षम कंपनी जो हर महीने 8.5 करोड़ रुपए का टोल वसूल रही थी, उसने खुद को दिवालिया घोषित करने के लिए आवेदन किया। बाद में उस कंपनी का 584 करोड़ रुपए का कर्ज महज 85 करोड़ रुपए में निपटा दिया गया। इस तरह कंपनी कर्जमुक्त होकर बाहर आ गई और कर्ज देने वालों को भारी नुकसान हुआ। कोर्ट ने कहा कि अगर जांच से जुड़ा कोई भी ऐसा सबूत है, तो एजेंसियां उसे संज्ञान में लें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
ग्वालियर में भोजपुरी अभिनेता रियाज हुसैन उर्फ राजा पर FIR:भोजपुरी मूवी के लिए किया था साइन, 2 लाख रुपए लेकर एक्टर ने नहीं दी शूटिंग की डेट

ग्वालियर में भोजपुरी फिल्म अभिनेता रियाज हुसैन उर्फ राजा भोजपुरिया के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। झांसी रोड थाना पुलिस ने एक फिल्म प्रोड्यूसर की शिकायत पर कोर्ट के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि अभिनेता ने फिल्म में काम करने के नाम पर साइनिंग अमाउंट लिया, लेकिन शूटिंग के लिए तारीख नहीं दी। शिकायतकर्ता मैसर्स मेट्रोज प्रोडक्शन के प्रोपराइटर ओमप्रकाश कुकरेजा निवासी विजय नगर हैं। उनके अधिवक्ता कांति प्रकाश मिलिंद ने बताया कि ओमप्रकाश फिल्म निर्माण का कार्य करते हैं। उन्होंने भोजपुरी अभिनेता राजा भोजपुरिया से फिल्म साइन करने के लिए संपर्क किया था। दोनों के बीच पहले से परिचय होने के कारण अभिनेता ने सहमति जताई और साइनिंग अमाउंट के रूप में रकम मांगी। किस्तों में भेजे 2 लाख रुपए शिकायत के अनुसार वर्ष 2023 में ओमप्रकाश ने अपने एचडीएफसी बैंक खाते से आरोपी के खाते में अलग-अलग तारीखों पर कुल 2 लाख रुपए ट्रांसफर किए। इसमें 20 अगस्त और 27 अगस्त 2023 को 1-1 लाख रुपए भेजे गए। इसके बाद 20 सितंबर को 50 हजार रुपए, 2 अक्टूबर को 25 हजार रुपए और 17 अक्टूबर को 25 हजार रुपए भेजे गए। शूटिंग डेट मांगने पर टालमटोल रकम भेजने के बाद प्रोड्यूसर ने फिल्म शूटिंग के लिए तारीख मांगी, लेकिन आरोपी लगातार व्यस्तता का हवाला देकर टालता रहा। कई बार संपर्क करने के बाद भी जब कोई तारीख नहीं दी गई, तब शिकायतकर्ता को धोखाधड़ी का संदेह हुआ। पैसे मांगने पर धमकी का आरोप ओमप्रकाश का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपी भड़क गया। उसने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। साथ ही सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो और पोस्ट डालकर उनकी सामाजिक व व्यापारिक छवि खराब करने की कोशिश की। कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर शिकायतकर्ता ने पहले झांसी रोड थाने में शिकायत की थी, लेकिन सुनवाई नहीं होने पर कोर्ट की शरण ली। इसके बाद न्यायालय के निर्देश पर पुलिस ने रियाज हुसैन उर्फ राजा भोजपुरिया के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
Bigg Boss Fame Shiyas Kareem Accused of Cheating Millions; Threatens Partner

4 मिनट पहले कॉपी लिंक बिग बॉस मलयालम के एक्स कंटेस्टेंट और एक्टर शियास करीम पर ठगी का केस दर्ज हुआ है। केरल पुलिस ने उनके खिलाफ धोखाधड़ी, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने और आपराधिक धमकी देने के मामले में केस दर्ज किया है। यह शिकायत उनकी एक महिला बिजनेस पार्टनर ने दर्ज कराई है। पुलिस ने मंगलवार को इस मामले की पुष्टि की है। लाखों रुपए लेकर वादे से मुकरे एक्टर महिला ने अपनी शिकायत में बताया है कि शियास ने उसे एक नए बिजनेस वेंचर में पार्टनरशिप का लालच दिया था। इसके लिए महिला ने लाखों रुपए इन्वेस्ट किए थे। पैसे लेने के बाद शियास अपने वादे से मुकर गया। उसने न तो बिजनेस शुरू किया और न ही महिला को पार्टनरशिप दी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, महिला पहले विदेश में रहती थी और सोशल मीडिया के जरिए शियास के संपर्क में आई थी। पैसे मांगने पर दी धमकी शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उसने अपने निवेश किए हुए पैसे वापस मांगे, तो शियास ने उसे डराया और धमकाया। पुलिस ने शियास के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। इसमें धारा 318(4) (धोखाधड़ी), धारा 79 (महिला की गरिमा का अपमान) और धारा 351(2) (आपराधिक धमकी) शामिल है। शियास करीम बिग बॉस मलयालम के पहले सीजन के कंटेस्टेंट रह चुके हैं। पुलिस जल्द कर सकती है पूछताछ अधिकारियों ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। शियास करीम को जल्द ही पूछताछ के लिए समन भेजा जा सकता है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या शियास ने किसी और के साथ भी इसी तरह की धोखाधड़ी की है या इस मामले में कोई और भी शामिल है। फिलहाल एक्टर की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बिग बॉस से मिली थी पहचान शियास करीम मलयालम फिल्म इंडस्ट्री का जाना-माना नाम हैं। उन्हें असली पहचान बिग बॉस मलयालम के पहले सीजन से मिली थी। उन्होंने वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट के तौर पर शो में एंट्री ली थी और अपनी स्ट्रॉन्ग पर्सनैलिटी के दम पर टॉप-5 में जगह बनाई थी। शो के बाद वे कई टीवी प्रोजेक्ट्स और मॉडलिंग में एक्टिव रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔







