Sunday, 08 Nov 2026 | 04:41 AM

Trending :

SC: Borrower Notice & Chance to Reply Sufficient for Bank Fraud

SC: Borrower Notice & Chance to Reply Sufficient for Bank Fraud
  • Hindi News
  • National
  • SC: Borrower Notice & Chance To Reply Sufficient For Bank Fraud | Hearing Not Mandatory

नई दिल्ली1 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि अगर बैंक किसी खाते को फ्रॉड घोषित करता है, तो उससे पहले उधार लेने वाले को आमने-सामने (पर्सनल) सुनवाई का मौका देना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि नोटिस देना और जवाब का मौका देना ही काफी है।

जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच ने यह फैसला देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने बैंक से कहा था कि उधार लेने वाले के खाते को फ्रॉड घोषित करने से पहले मौखिक सुनवाई का मौका दिया जाए।

ऑडिट रिपोर्ट की कॉपी देना जरूरी

कोर्ट ने कहा कि अगर बैंक ऑडिट रिपोर्ट, खासकर फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर फैसला ले रहा है, तो उसकी कॉपी उधार लेने वाले को देना जरूरी है। साथ ही, उस पर उधार लेने वाले का जवाब भी लिया जाना चाहिए।

बेंच के मुताबिक RBI के नियमों में जो प्रक्रिया बताई गई है उसे अपनाना चाहिए। यह इस बात पर निर्भर करता है कि मामला किस तरह का है और कानून क्या कहता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में फैसले ज्यादातर कागजों, लेन-देन और ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर लिए जाते हैं।

पर्सनल सुनवाई से प्रक्रिया धीमी होगी

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर हर केस में पर्सनल सुनवाई जरूरी कर दी जाए, तो प्रक्रिया धीमी हो जाएगी। इससे फ्रॉड पकड़ने में देरी हो सकती है और उधारकर्ता अपने पैसे या संपत्ति छिपाने की कोशिश कर सकते हैं।

बेंच ने साफ किया कि पहले के फैसलों, खासकर SBI बनाम राजेश अग्रवाल केस में भी पर्सनल सुनवाई को अनिवार्य नहीं बताया गया था। उसमें सिर्फ नोटिस देने और जवाब का मौका देने की बात कही गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने RBI के पक्ष से सहमति जताई और कहा कि तय प्रक्रिया का पालन करने से न्याय भी होगा और गलत फैसले की संभावना भी कम होगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि बैंकिंग सिस्टम और जनता के पैसे की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि फ्रॉड के मामलों में जल्दी और सही कार्रवाई हो।

खाते को फ्रॉड घोषित करने के लिए RBI की प्रक्रिया

1. सबसे पहले जांच और ऑडिट

बैंक को शक होने पर अकाउंट की जांच की जाती है। अक्सर फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाता है, इसमें ट्रांजेक्शन, फंड फ्लो और दस्तावेजों की पड़ताल होती है

2. नोटिस दिया जाता है

बैंक सीधे फ्रॉड घोषित नहीं कर सकता, उधार लेने वाले को लिखित नोटिस दिया जाता है। इसमें आरोप और आधार स्पष्ट बताना होता है। जिस आधार पर फैसला लिया जा रहा है ,जैसे फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट आदि की कॉपी देना जरूरी है। इसके बाद उधार लेने वाले को अपनी सफाई देने का मौका मिलता है। वह दस्तावेज, स्पष्टीकरण या आपत्ति दे सकता है।

5. बैंक का अंतिम फैसला

जवाब और रिकॉर्ड देखने के बाद बैंक निर्णय लेता है। अगर आरोप सही लगे, तो अकाउंट को फ्रॉड घोषित किया जाता है।

6.RBI को रिपोर्ट भेजी जाती है

RBI को रिपोर्ट भेजी जाती है। CBI/ED जैसी एजेंसियों को मामला भेजा जा सकता है। उधार लेने वाले का नाम ‘फ्रॉड लिस्ट’ में डाल दिया जाता है। इसके बाद उसे भविष्य में लोन मिलना मुश्किल हो जाता है।

——————————

ये खबर भी पढ़ें:

केवल हिंदू-बौद्ध-सिख ही अनुसूचित जाति का दावा कर सकते हैं:सुप्रीम कोर्ट का फैसला- धर्म बदला तो अनुसूचित जाति का दर्जा भी खत्म हो जाता है

द कॉन्स्टिट्यूशन शेड्यूल कास्ट ऑर्डर 1950 के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू धर्म तक सीमित था, 1956 में सिख और 1990 में बौद्ध धर्म जोड़ा गया- फोटो AI जनरेटेड

द कॉन्स्टिट्यूशन शेड्यूल कास्ट ऑर्डर 1950 के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू धर्म तक सीमित था, 1956 में सिख और 1990 में बौद्ध धर्म जोड़ा गया- फोटो AI जनरेटेड

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़े लोग ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। अगर कोई ईसाई या किसी और धर्म में धर्मांतरण करता है तो वह अनुसूचित जाति का दर्जा खो देगा। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
सेंसेक्स 100 अंक गिरकर 78,400 पर कारोबार कर रहा:निफ्टी में 50 अंक की गिरावट, बैंकिंग और IT शेयर्स में बिकवाली

April 20, 2026/
9:22 am

शेयर बाजार में आज यानी सोमवार, 20 अप्रैल को गिरावट है। सेंसेक्स करीब 100 अंक की गिरावट के साथ 78,400...

कट्टे से हमला करने वाला चौथा आरोपी पकड़ाया:हत्या के इरादे से किया था हमला, पुलिस ने कोर्ट में पेश कर भेजा जेल

March 25, 2026/
8:35 am

सतना सिटी कोतवाली पुलिस ने 7 फरवरी को रीवा रोड पर हुए प्राणघातक हमले के चौथे आरोपी को गिरफ्तार कर...

हिमंता दूसरी बार असम के सीएम पद की शपथ लेंगे:4 मंत्री भी बनेंगे, पीएम मोदी समेत NDA के कई बड़े नेता शामिल होंगे

May 12, 2026/
5:30 am

हिमंता बिस्वा सरमा आज 11 बजे दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके साथ 4 और विधायक...

ट्रम्प ने होर्मुज को अमेरिका का नया इलाका बताया:सोशल मीडिया पर मैप पोस्ट किया; ईरान बोला- ट्रम्प की गलतफहमी जल्द दूर हो जाएगी

August 18, 2026/
6:06 pm

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताते हुए सोशल मीडिया पर मैप पोस्ट किया है।...

शादी में शामिल होने गए युवक का शव मिला:धार के राजगढ़ में पेड़ से लटका मिला, पुलिस ने जताई आत्महत्या की आशंका

April 27, 2026/
9:09 pm

धार के राजगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम धुलेट में सोमवार को एक युवक का शव इमली के पेड़ से लटका...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

SC: Borrower Notice & Chance to Reply Sufficient for Bank Fraud

SC: Borrower Notice & Chance to Reply Sufficient for Bank Fraud
  • Hindi News
  • National
  • SC: Borrower Notice & Chance To Reply Sufficient For Bank Fraud | Hearing Not Mandatory

नई दिल्ली1 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि अगर बैंक किसी खाते को फ्रॉड घोषित करता है, तो उससे पहले उधार लेने वाले को आमने-सामने (पर्सनल) सुनवाई का मौका देना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि नोटिस देना और जवाब का मौका देना ही काफी है।

जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच ने यह फैसला देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने बैंक से कहा था कि उधार लेने वाले के खाते को फ्रॉड घोषित करने से पहले मौखिक सुनवाई का मौका दिया जाए।

ऑडिट रिपोर्ट की कॉपी देना जरूरी

कोर्ट ने कहा कि अगर बैंक ऑडिट रिपोर्ट, खासकर फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर फैसला ले रहा है, तो उसकी कॉपी उधार लेने वाले को देना जरूरी है। साथ ही, उस पर उधार लेने वाले का जवाब भी लिया जाना चाहिए।

बेंच के मुताबिक RBI के नियमों में जो प्रक्रिया बताई गई है उसे अपनाना चाहिए। यह इस बात पर निर्भर करता है कि मामला किस तरह का है और कानून क्या कहता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में फैसले ज्यादातर कागजों, लेन-देन और ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर लिए जाते हैं।

पर्सनल सुनवाई से प्रक्रिया धीमी होगी

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर हर केस में पर्सनल सुनवाई जरूरी कर दी जाए, तो प्रक्रिया धीमी हो जाएगी। इससे फ्रॉड पकड़ने में देरी हो सकती है और उधारकर्ता अपने पैसे या संपत्ति छिपाने की कोशिश कर सकते हैं।

बेंच ने साफ किया कि पहले के फैसलों, खासकर SBI बनाम राजेश अग्रवाल केस में भी पर्सनल सुनवाई को अनिवार्य नहीं बताया गया था। उसमें सिर्फ नोटिस देने और जवाब का मौका देने की बात कही गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने RBI के पक्ष से सहमति जताई और कहा कि तय प्रक्रिया का पालन करने से न्याय भी होगा और गलत फैसले की संभावना भी कम होगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि बैंकिंग सिस्टम और जनता के पैसे की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि फ्रॉड के मामलों में जल्दी और सही कार्रवाई हो।

खाते को फ्रॉड घोषित करने के लिए RBI की प्रक्रिया

1. सबसे पहले जांच और ऑडिट

बैंक को शक होने पर अकाउंट की जांच की जाती है। अक्सर फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाता है, इसमें ट्रांजेक्शन, फंड फ्लो और दस्तावेजों की पड़ताल होती है

2. नोटिस दिया जाता है

बैंक सीधे फ्रॉड घोषित नहीं कर सकता, उधार लेने वाले को लिखित नोटिस दिया जाता है। इसमें आरोप और आधार स्पष्ट बताना होता है। जिस आधार पर फैसला लिया जा रहा है ,जैसे फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट आदि की कॉपी देना जरूरी है। इसके बाद उधार लेने वाले को अपनी सफाई देने का मौका मिलता है। वह दस्तावेज, स्पष्टीकरण या आपत्ति दे सकता है।

5. बैंक का अंतिम फैसला

जवाब और रिकॉर्ड देखने के बाद बैंक निर्णय लेता है। अगर आरोप सही लगे, तो अकाउंट को फ्रॉड घोषित किया जाता है।

6.RBI को रिपोर्ट भेजी जाती है

RBI को रिपोर्ट भेजी जाती है। CBI/ED जैसी एजेंसियों को मामला भेजा जा सकता है। उधार लेने वाले का नाम ‘फ्रॉड लिस्ट’ में डाल दिया जाता है। इसके बाद उसे भविष्य में लोन मिलना मुश्किल हो जाता है।

——————————

ये खबर भी पढ़ें:

केवल हिंदू-बौद्ध-सिख ही अनुसूचित जाति का दावा कर सकते हैं:सुप्रीम कोर्ट का फैसला- धर्म बदला तो अनुसूचित जाति का दर्जा भी खत्म हो जाता है

द कॉन्स्टिट्यूशन शेड्यूल कास्ट ऑर्डर 1950 के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू धर्म तक सीमित था, 1956 में सिख और 1990 में बौद्ध धर्म जोड़ा गया- फोटो AI जनरेटेड

द कॉन्स्टिट्यूशन शेड्यूल कास्ट ऑर्डर 1950 के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू धर्म तक सीमित था, 1956 में सिख और 1990 में बौद्ध धर्म जोड़ा गया- फोटो AI जनरेटेड

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़े लोग ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। अगर कोई ईसाई या किसी और धर्म में धर्मांतरण करता है तो वह अनुसूचित जाति का दर्जा खो देगा। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.