Monday, 25 May 2026 | 07:25 PM

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Prateek Yadav Ashes Immersion Haridwar

Prateek Yadav Ashes Immersion Haridwar

लखनऊ4 मिनट पहले कॉपी लिंक सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव की अस्थियां आज हरिद्वार में गंगा में विसर्जित की जाएंगी। शनिवार सुबह 9:15 बजे पत्नी अपर्णा अपनी बड़ी बेटी प्रथमा, पिता अरविंद बिष्ट और भाई अमन के साथ अस्थियां लेकर निकली हैं। परिवार लखनऊ एयरपोर्ट से चार्टर्ड प्लेन से हरिद्वार के लिए रवाना होगा। शिवपाल के बेटे बदायूं से सांसद आदित्य यादव भी साथ जा रहे हैं। वह अमौसी एयरपोर्ट पर प्रतीक का अस्थि कलश लेकर अपर्णा से आगे चलते दिखे। परिवार ने 6 सीटर चार्टर्ड प्लेन बुक किया है। हालांकि, सपा प्रमुख अखिलेश यादव जाएंगे या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। चार्टर्ड प्लेन देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर उतरेगा। वहां से परिवार कार से हरिद्वार पहुंचेगा। जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि की मौजूदगी में अस्थि-विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रतीक यादव का लखनऊ में 13 मई को 38 साल की उम्र में निधन हो गया था। अगले दिन 14 मई को उनका अंतिम संस्कार किया गया था। उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने मुखाग्नि दी थी। प्रतीक यादव, मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे। प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव भाजपा नेता हैं और वर्तमान में यूपी राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं। 2 तस्वीरें देखिए- लखनऊ एयरपोर्ट पर शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव (बदायूं सांसद) प्रतीक का अस्थि कलश लेकर जाते दिखे। उनके पीछे अपर्णा, उनके भाई अमन, बेटी पद्मजा हैं। लखनऊ से शनिवार सुबह 9:15 बजे ससुर अरविंद बिष्ट, साले अमन और प्रतीक यादव की बड़ी बेटी प्रथमा अस्थियां लेकर हरिद्वार के लिए रवाना हुए। ब्रिटेन से पढ़ाई की, राजनीति से दूर थे प्रतीक की मां साधना गुप्ता की पहली शादी 1986 में चंद्रप्रकाश गुप्ता से हुई थी। 1987 में प्रतीक का जन्म हुआ। 1990 में चंद्रप्रकाश गुप्ता और साधना का तलाक हो गया। इसी दौरान साधना और मुलायम की करीबी हो गई। 2003 में मुलायम सिंह ने साधना गुप्ता से शादी कर ली और सार्वजनिक तौर पर प्रतीक को बेटे का हक दिया था प्रतीक ने ब्रिटेन की लीड्स यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी। उन्हें महंगी कारों और सुपर बाइक्स का शौक था। यादव परिवार से होने के बावजूद प्रतीक को राजनीति पसंद नहीं थी। प्रतीक का रियल एस्टेट और फिटनेस का बिजनेस था। 2022 के चुनावी हलफनामे में अपर्णा और प्रतीक की चल-अचल संपत्ति 23 करोड़ रुपए बताई गई थी। प्रतीक ने अपर्णा से 14 साल पहले लव मैरिज की थी। दोनों की दो बेटियां हैं। प्रतीक ने 19 जनवरी को अचानक पत्नी अपर्णा से तलाक लेने का ऐलान कर दिया था। उन्होंने कहा था- अपर्णा ने मेरी जिंदगी नरक बना दी। हालांकि, 9 दिन बाद दोनों में सुलह हो गई थी। इंस्टाग्राम पर प्रतीक ने अपर्णा के साथ तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था-‘All is Good’, यानी सब अच्छा है। प्रतीक यादव के अस्थी विसर्जन से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए… लाइव अपडेट्स 7 मिनट पहले कॉपी लिंक उत्तराखंड में है अपर्णा यादव का मायका अपर्णा यादव मूलरूप से उत्तराखंड की रहने वाली हैं। उनका उत्तरकाशी जिले के डुंडा ब्लॉक स्थित गढ़बरसाली (कुरा) गांव में मायका है। अपर्णा का परिवार लंबे समय से उत्तराखंड से जुड़ा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, गांव में जैसे ही यह दुखद समाचार पहुंचा, माहौल गमगीन हो गया। प्रतीक के निधन की खबर जैसे ही उनकी पत्नी अपर्णा यादव के पैतृक गांव तक पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। गांव के लोगों ने गहरा दुख जताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। 14 मिनट पहले कॉपी लिंक एयरपोर्ट पर अस्थिकलश लेकर जाते दिखे आदित्य अमौसी एयरपोर्ट पर शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव अस्थिकलश लेकर जाते दिख रहे हैं। उनके पीछे अपर्णा यादव छोटी बेटी पद्मजा और अपने भाई अमन बिष्ट के साथ चल रही हैं। पद्मजा को प्रतीक बहुत प्यार करते थे। 22 मिनट पहले कॉपी लिंक अपर्णा ने रात 1 बजे सोशल मीडिया पर डाला था पोस्ट अपर्णा यादव ने रात के 1 बजे सोशल मीडिया पर अस्थि विसर्जन से संबंधित पोस्ट किया था। इस पोस्ट में लिखा- ‘पूज्य स्मरणीय श्री प्रतीक यादव की पवित्र अस्थियों के विसर्जन का कार्यक्रम हरिद्वार के चौधरी चरण सिंह वीवीआईपी घाट पर दोपहर 12:30 बजे आयोजित किया जाएगा। सभी शुभचिंतकों से प्रार्थना है कि वो पहुंचें जिससे हमें शक्ति मिलेगी। 34 मिनट पहले कॉपी लिंक अमौसी एयरपोर्ट पर VIP लाउंज में बैठी हैं अपर्णा अपर्णा यादव भी अमौसी एयरपोर्ट पर पहुंच चुकी हैं। वह VIP लाउंज में बैठी हुई हैं। यह जानकारी दैनिक भास्कर रिपोर्टर को विश्वस्त सूत्रों ने दी है। 04:47 AM16 मई 2026 कॉपी लिंक थोड़ी देर में हरिद्वार के लिए रवाना होगा परिवार प्रतीक की अस्थियां लेकर परिवार लखनऊ एयरपोर्ट पहुंच गया है। थोड़ी देर में चार्टर प्लेन से परिवार रवाना होगा। परिवार के पहुंचने से पहले ही एयरपोर्ट पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। 04:31 AM16 मई 2026 कॉपी लिंक प्रतीक अस्थियां लेकर परिवार लखनऊ से हरिद्वार के लिए रवाना प्रतीक यादव की अस्थियां आज हरिद्वार में गंगा में विसर्जित की जाएंगी। शनिवार सुबह 9:15 बजे ससुर अरविंद बिष्ट, साले अमन और प्रतीक की बड़ी बेटी प्रथमा घर से अस्थियां लेकर निकले हैं। चार्टर्ड प्लेन सीधे देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट पर उतरेगा। वहां से परिवार कार से हरिद्वार पहुंचेगा। जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि की मौजूदगी में अस्थि-विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 03:57 AM16 मई 2026 कॉपी लिंक 14 मई को हुए प्रतीक के अंतिम संस्कार से जुड़ी तस्वीरें देखिए- अखिलेश ने भाई की चिता पर लकड़ी रखी और अंतिम प्रणाम किया। प्रतीक की दोनों बेटियां भी श्मशान घाट पर मौजूद रहीं। दोनों ने पिता की चिता पर लकड़ी रखी। अपर्णा के पिता यानी ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने प्रतीक की चिता को मुखाग्नि दी। प्रतीक की डॉग्स और बंदर के साथ वाली तस्वीर शव वाहन पर लगाई गई। अखिलेश प्रतीक की छोटी बेटी पद्मजा से बातचीत करते रहे। उन्होंने बच्ची को चॉकलेट भी दी। आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज ने प्रतीक यादव को श्रद्धांजलि दी तो उनके सामने अपर्णा फूट-फूटकर रोईं। आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज ने अपर्णा यादव को ढांढस बंधाया। देवर

हरिद्वार में सायना नेहवाल ने की गंगा आरती; VIDEO:6 दिनों से उत्तराखंड घूम रहीं, मसूरी में नदी किनारे परिवार के साथ ब्रेकफास्ट

हरिद्वार में सायना नेहवाल ने की गंगा आरती; VIDEO:6 दिनों से उत्तराखंड घूम रहीं, मसूरी में नदी किनारे परिवार के साथ ब्रेकफास्ट

ओलिंपिक मेडलिस्ट और इंटरनेशनल बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल इन दिनों परिवार के साथ उत्तराखंड घूमने आई हैं। सायना देर शाम हरिद्वार में गंगा आरती में परिवार के 6 सदस्यों के साथ शामिल हुईं। इस दौरान उनके पिता डॉ. हरवीर सिंह नेहवाल और बहन अबू चंद्रांशु नेहवाल भी साथ दिखे। हरिद्वार पहुंचने के बाद सायना नेहवाल सबसे पहले नील पर्वत स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ चण्डी देवी मंदिर पहुंचीं। यहां उन्होंने रोपवे के जरिए मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और मां चंडी देवी का आशीर्वाद लिया। इसकी खबर फैलते ही मंदिर परिसर में प्रशंसकों की भीड़ लग गई। सायना रविवार को मसूरी घूमने आईं थीं और वो नदी किनारे परिवार के साथ ब्रेकफास्ट करती दिखी। इसके बाद वे मंगलवार को अपने परिवार के साथ टिहरी की प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां सुरकंडा देवी मंदिर के दर्शन करने पहुंचीं। सायना की PHOTOS… रोपवे के जरिए मंदिर पहुंचीं सायना गुरुवार को हरिद्वार पहुंची। सायना नेहवाल ने सबसे पहले नील पर्वत स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ चंडी देवी मंदिर के दर्शन किए। उन्होंने परिवार के साथ रोपवे के जरिए मंदिर पहुंचकर मां चंडी देवी की विधिवत पूजा-अर्चना की। मंदिर के मुख्य पुजारी भवानी नंदन गिरी ने सायना और उनके परिवार को पूजा संपन्न कराई। उन्होंने सायना की खेल जगत की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। चंडी देवी मंदिर में दर्शन के बाद शाम के समय सायना नेहवाल अचानक हरकी पौड़ी पहुंचीं, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में भाग लिया। गंगा तट पर पहुंचते ही वहां मौजूद श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल बन गया। इस दौरान श्री गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ समेत कई तीर्थ पुरोहितों ने उनका स्वागत किया। उन्हें मां गंगा की चुनरी और गंगाजली भेंट कर सम्मानित किया गया। तन्मय वशिष्ठ ने सायना नेहवाल को गंगा आरती की परंपरा, हरकी पैड़ी की पौराणिक मान्यता और मां गंगा की महिमा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। तन्मय वशिष्ठ ने बताया कि सायना नेहवाल का हरकी पैड़ी पहुंचना पूरी तरह अचानक था। उनके साथ उनके पिता और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। उन्होंने पूरी श्रद्धा और आत्मीयता के साथ गंगा आरती में सहभागिता की और कुछ समय हरकी पैड़ी पर बिताने के बाद परिवार सहित हरिद्वार से रवाना हो गईं। देश की पहली महिला बैडमिंटन ओलिंपिक पदक विजेता हैं सायना सायना नेहवाल भारतीय बैडमिंटन इतिहास की सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल हैं। वह देश की पहली महिला बैडमिंटन खिलाड़ी हैं जिन्होंने ओलिंपिक में पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया। खेल जगत में उनके योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार, राजीव गांधी खेल रत्न और पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने अपना आखिरी कंपीटिटर मैच जून 2023 में सिंगापुर ओपन के दौरान खेला था।

नवीन बोले- ईशान किशन का विकेट जिंदगी भर याद रहेगा:UPL को करियर का टर्निंग पॉइंट बताया; IPL कैंप पहुंचे

नवीन बोले- ईशान किशन का विकेट जिंदगी भर याद रहेगा:UPL को करियर का टर्निंग पॉइंट बताया; IPL कैंप पहुंचे

ईशान किशन जैसे बड़े बल्लेबाज का विकेट लेना, वह भी अपने डेब्यू मैच में… यह पल जिंदगी भर याद रहेगा। यह कहना है हरिद्वार के तेज गेंदबाज नवीन के. सिंह का, जिन्होंने बिना किसी एज-ग्रुप क्रिकेट (अंडर-16, अंडर-19) खेले सीधे सीनियर स्तर पर अपनी पहचान बनाई और अब आईपीएल फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स के कैंप तक पहुंच गए हैं। क्रिकेट की दुनिया में अक्सर वही नाम सामने आते हैं, जो सिस्टम के तय रास्तों से आगे बढ़ते हैं। लेकिन हरिद्वार के जलालपुर कलां गांव के तेज गेंदबाज नवीन ने इस धारणा को तोड़ा है। बिना अंडर-16 या अंडर-19 खेले सीधे सीनियर क्रिकेट में जगह बनाई और अब आईपीएल फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स के साथ अपने अगले असाइनमेंट के लिए अहमदाबाद रवाना हो चुके हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में नवीन ने अपने संघर्ष, सीख और सपनों को खुलकर साझा किया। अब सवाल-जवाब में पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल: शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही? जवाब: शुरुआत में सबसे बड़ी कमी गाइडेंस की थी। पहले उत्तराखंड में सुविधाएं भी कम थीं। जैसे-जैसे मैं प्रोफेशनल क्रिकेट में आया, तब जाकर समझ आया कि चीजें कैसे काम करती हैं। अब माहौल पहले से काफी बेहतर है। सवाल: आपकी सफलता का सबसे बड़ा मंत्र क्या है? नवीन: फिटनेस। मैं हमेशा कहता हूं- आप क्रिकेट खेलकर फिट नहीं रह सकते, लेकिन अगर आप फिट हैं, तो लंबा क्रिकेट खेल सकते हैं। सवाल: परिवार का सपोर्ट कितना अहम रहा? जवाब: शुरुआत में परिवार पूरी तरह आश्वस्त नहीं था, जो कि मिडिल क्लास फैमिली में सामान्य है। लेकिन जैसे-जैसे मैंने परफॉर्म किया, उनका सपोर्ट बढ़ता गया। आज वे मेरे साथ मजबूती से खड़े हैं। सवाल: करियर का टर्निंग पॉइंट क्या रहा? नवीन: उत्तराखंड प्रीमियर लीग (UPL)। सीजन-1 में उतना अच्छा नहीं किया, लेकिन सीजन-2 में 5 मैच में 10 विकेट लिए। मेरा माइंडसेट बदल गया था। वहीं से IPL फ्रेंचाइजियों के ट्रायल का मौका मिला। सवाल: डेब्यू मैच और ईशान किशन का विकेट, कैसा अनुभव था? जवाब: बहुत खास। शुरू में दबाव था, क्योंकि ईशान सर बड़े खिलाड़ी हैं, लेकिन जब उन्हें आउट किया, तो वह पल शब्दों में नहीं बता सकता। वह विकेट जिंदगी भर याद रहेगा। सवाल: टी20 और वनडे में क्या फर्क महसूस हुआ? जवाब: वनडे में आपको एक जगह गेंदबाजी करनी होती है, धैर्य रखना पड़ता है। टी20 में हर गेंद पर कुछ नया करना होता है। इस बदलाव को समझने में कोच मनीष शर्मा सर ने बहुत मदद की। सवाल: राजस्थान रॉयल्स कैंप का अनुभव कैसा रहा? जवाब: बहुत सीखने को मिलता है। वहां दबाव जैसा कुछ नहीं होता, बस हेल्दी कॉम्पिटिशन रहता है। बड़े खिलाड़ियों को देखकर और उनसे सीखकर काफी सुधार होता है। सवाल: शेन बॉन्ड से क्या सीख मिली? जवाब: उनका सीधा मंत्र है- पिच और कंडीशन के हिसाब से गेंदबाजी करो। ज्यादा सोचो मत, एक प्लान बनाओ और उसे सही से लागू करो। सवाल: आपकी स्ट्रेंथ और फोकस एरिया क्या है? जवाब: मेरी बाउंसर मेरी सबसे बड़ी स्ट्रेंथ है। लेकिन अभी मैं अपनी यॉर्कर पर ज्यादा काम कर रहा हूं, ताकि उसे और बेहतर बना सकूं। सवाल: आगे का लक्ष्य क्या है? जवाब: हर खिलाड़ी का सपना टीम इंडिया के लिए खेलना होता है। लेकिन फिलहाल मेरा फोकस घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना है। सवाल: उत्तराखंड के युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे? जवाब: कभी हार मत मानो। कई बार लगेगा कि कुछ नहीं हो रहा, लेकिन लगातार मेहनत करते रहो। कंसिस्टेंसी बहुत जरूरी है। मैंने एज-ग्रुप क्रिकेट नहीं खेला, फिर भी यहां तक पहुंचा हूं— अगर मेहनत है, तो मौका जरूर मिलेगा। ——————- ये खबर भी पढ़ें : उत्तराखंड नेशनल मास्टर्स फुटबॉल में चैंपियन बना: 40+ आयु वर्ग ने छत्तीसगढ़ को हराया, 50+ टीम उप-विजेता उत्तराखंड की 40+ आयु वर्ग की फुटबॉल टीम ने चंडीगढ़ में आयोजित ‘खेलो मास्टर्स नेशनल गेम्स 2026’ में राष्ट्रीय चैंपियन का खिताब जीत लिया है। टीम ने कड़े मुकाबले में छत्तीसगढ़ को हराकर यह उपलब्धि हासिल की। (पढ़ें पूरी खबर)

Honey Singh’s Faith Connection: Neeleshwar Mahadev Temple Haridwar

Honey Singh’s Faith Connection: Neeleshwar Mahadev Temple Haridwar

नीलेश्वर महादेव के मंदिर में शिवलिंग पर दूध और दही अर्पित करते हनी सिंह। उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित प्राचीन नीलेश्वर महादेव मंदिर पंजाबी और बॉलीवुड सिंगर हनी सिंह का फेवरेट है। मंदिर के महंत हरिदास का दावा है कि सिंगर के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव और उनके म्यूजिक कमबैक में इस मंदिर की अहम भूमिका रही है। उनके अनुसार, . महंत बताते हैं कि कठिन दौर के बाद जब हनी सिंह ने यहां साधना और अभिषेक किया, तो उनके भीतर गहरा आध्यात्मिक परिवर्तन देखने को मिला। उनका कहना है कि महादेव की कृपा से सिंगर को मानसिक संतुलन, नई ऊर्जा और जीवन की नई दिशा मिली। महंत हरिदास के अनुसार, नीलेश्वर महादेव मंदिर में उन्हें जो आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा मिली, वैसा अनुभव उन्हें कहीं और नहीं हुआ और यही जुड़ाव उनके जीवन में स्थिरता और सकारात्मकता लेकर आया। हरिद्वार के नीलेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग। पहले 3 पॉइंट्स में नीलेश्वर मंदिर के बारे में जानिए नील पर्वत पर स्थित प्राचीन शिव धाम: हरिद्वार-नजीबाबाद रोड पर चंडी घाट के पास नील पर्वत क्षेत्र में स्थित नीलेश्वर महादेव मंदिर प्राचीन शिव धामों में गिना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यहां स्थित स्वयंभू शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा की जाती है। सुबह-शाम आरती होती है और देश-विदेश से श्रद्धालु यहां जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पौराणिक कथाओं और शिव परंपरा से जुड़ा स्थल: मंदिर के पुजारी राघव भारती के अनुसार, यह स्थान सतयुग काल से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि यहीं से भगवान शिव ने अपनी जटा से वीरभद्र को उत्पन्न कर दक्ष यज्ञ का विध्वंस कराया था। यह भी कहा जाता है कि समुद्र मंथन से निकला विष पीने के बाद भगवान शिव इसी क्षेत्र से नीलकंठ की ओर विश्राम के लिए गए, जिसके कारण पर्वत और गंगा का जल नीला पड़ गया और यह क्षेत्र नील पर्वत व नील गंगा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। विशेष पूजा परंपराएं और मनोकामना पूर्ति की मान्यता: नीलेश्वर महादेव मंदिर में गंगाजल और दूध से अभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि एक लोटा गंगाजल चढ़ाने से तीर्थफल की प्राप्ति होती है, सोमवार को पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जबकि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और पूर्णिमा पर अभिषेक करने से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। श्रद्धालु यहां तन-मन के कष्टों से मुक्ति और आध्यात्मिक शांति की कामना लेकर आते हैं। हनी सिंह कोरोना काल के बाद से लगातार इस मंदिर में आकर अभिषेक करते हैं। अब महंत के अनुसार समझिए हनी सिंह के लिए क्यों खास है मंदिर पहली बार अभिषेक में भावुक हुए हनी सिंह मंदिर के महंत हरिदास के अनुसार, जब हनी सिंह पहली बार नीलेश्वर महादेव मंदिर में अभिषेक करने पहुंचे तो वे बेहद भावुक हो गए थे। महंत बताते हैं कि उन्होंने पंजाबी रैपर से कहा था कि जो श्रद्धालु इस शिवलिंग को अपने हाथों में भर लेते हैं, उनके अवगुण दूर हो जाते हैं। महंत के अनुसार, जैसे ही सिंगर ने शिवलिंग को अपनी भुजाओं में भरा, उनकी आंखों से आंसू बहने लगे और वे गहरे आध्यात्मिक भाव में डूब गए। चार घंटे तक तल्लीन होकर किया अभिषेक महंत बताते हैं कि पहली पूजा के दौरान हनी सिंह लगभग चार से साढ़े चार घंटे तक एक ही आसन पर बैठकर अभिषेक करते रहे। उनके अनुसार, वह दृश्य ऐसा था मानो कोई भक्त लंबे समय बाद अपने आराध्य से मिला हो। महंत का कहना है कि उस साधना के बाद उनके भीतर आध्यात्मिक परिवर्तन स्पष्ट रूप से महसूस किया गया। महंत कहते हैं कि अभिषेक के दौरान हनी सिंह के अंदर दिव्य भक्ति भाव दिखता है। हर 90 दिन में अभिषेक, ऊर्जा का स्रोत मानते हैं महंत हरिदास के अनुसार, हनी सिंह अब हर तीन महीने में मंदिर आकर अभिषेक कराते हैं। उनका कहना है कि सिंगर स्वयं बताते हैं कि यदि यह अभिषेक समय पर न हो तो उनकी ऊर्जा कम होने लगती है, जबकि पूजा के बाद वे स्वयं को अत्यंत ऊर्जावान और सकारात्मक महसूस करते हैं। महादेव भक्ति से आया जीवन में परिवर्तन महंत का दावा है कि कठिन दौर के बाद जब हनी सिंह महादेव की शरण में आए, तो उनके जीवन में स्थिरता और सकारात्मकता आई। उनके अनुसार, आज सिंगर के चेहरे की मुस्कान, उनकी ओजस्वी वाणी और व्यक्तित्व में दिखाई देने वाला संतुलन महादेव की कृपा और जागृत भक्ति का परिणाम है। दुनिया देखी, पर ऐसी शांति कहीं नहीं मिली महंत हरिदास के मुताबिक, हनी सिंह ने उनसे कहा कि उन्होंने दुनिया देखी है, लेकिन नीलेश्वर महादेव मंदिर में बैठकर जो शांति, प्रेम और आध्यात्मिक अनुभव मिलता है, वैसा अनुभव उन्हें कहीं और नहीं हुआ। महंत का कहना है कि यही जुड़ाव उन्हें बार-बार इस धाम की ओर खींच लाता है। 2014 में गायब हुए, इंटरव्यू में बताई बाइपोलर डिसऑर्डर की जंग यो यो हनी सिंह 2014 के आसपास अचानक म्यूजिक इंडस्ट्री और सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए थे। उस समय वे करियर के शिखर पर थे, लेकिन इसके बाद न नए गाने आए, न लाइव शो और न ही मीडिया में उनकी मौजूदगी दिखाई दी। उनकी अनुपस्थिति को लेकर लंबे समय तक तरह-तरह की अटकलें लगती रहीं। बाद में एक इंटरव्यू में हनी सिंह ने खुलासा किया कि वे बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझ रहे थे। उन्होंने बताया कि यह दौर उनके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कठिन था, जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक इलाज और एकांत में रहना पड़ा। इसी चुनौतीपूर्ण दौर के बाद उन्होंने धीरे-धीरे खुद को संभाला और वर्षों बाद नए दृष्टिकोण के साथ संगीत जगत में वापसी की। 2021 में किया कमबैक, छवि पूरी तरह बदली 2021 के आसपास हनी सिंह ने फिर से म्यूजिक इंडस्ट्री में सक्रिय होना शुरू किया। नए गानों, लाइव परफॉर्मेंस और सार्वजनिक उपस्थितियों के जरिए उन्होंने वापसी की। यह वापसी केवल पेशेवर नहीं बल्कि एक बदले हुए व्यक्तित्व के साथ देखी गई। पहले जहां वे विवादों और पार्टी कल्चर से जुड़े नजर आते थे, वहीं अब वे अधिक शांत, संतुलित और आध्यात्मिक झुकाव वाले व्यक्तित्व के रूप में दिखाई देते हैं। महंत भी इस बदलाव को महादेव की भक्ति से जोड़ते हैं। नीलेश्वर