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चीन बोला- भारत दलाई लामा उत्तराधिकारी मामले से दूर रहे:यह हमारा आंतरिक मासला, तिब्बत मुद्दे में बाहरी दखल मंजूर नहीं

चीन बोला- भारत दलाई लामा उत्तराधिकारी मामले से दूर रहे:यह हमारा आंतरिक मासला, तिब्बत मुद्दे में बाहरी दखल मंजूर नहीं

चीन ने भारत को दलाई लामा के उत्तराधिकार के मुद्दे से दूर रहने की सलाह दी है। बीजिंग ने कहा कि दलाई लामा के पुनर्जन्म और उत्तराधिकारी तय करने की प्रक्रिया पूरी तरह चीन का आंतरिक मामला है और इसमें किसी बाहरी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी। भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि दलाई लामा का पुनर्जन्म सदियों पुराने धार्मिक रीति-रिवाजों और ऐतिहासिक परंपराओं के तहत होता है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के लिए चीन की केंद्रीय सरकार की मंजूरी जरूरी होती है और 14वें दलाई लामा को भी इसी प्रक्रिया के तहत मान्यता दी गई थी। चीनी दूतावास ने भारत को तिब्बत पर अपने पुराने रुख की याद भी दिलाई। बयान में कहा गया कि भारत को तिब्बती स्वतंत्रता से जुड़ी गतिविधियों के लिए मंच उपलब्ध नहीं कराना चाहिए। यह क्षेत्रीय स्थिरता और भारत-चीन संबंधों के लिए जरूरी है। चीन दलाई लामा के मुद्दे को संबंधों में कांटा बता चुका यह पहला मौका नहीं है जब चीन ने दलाई लामा मुद्दे पर भारत को चेतावनी दी हो। पिछले साल भी बीजिंग ने कहा था कि दलाई लामा का उत्तराधिकार भारत-चीन संबंधों में कांटे की तरह है। दलाई लामा पहले भी कह चुके हैं कि उनके उत्तराधिकारी तय करने में चीन की कोई भूमिका नहीं होगी। तिब्बती मान्यता के मुताबिक, किसी वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा पुनर्जन्म लेती है। हालांकि चीन कहता है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी की प्रक्रिया को चीनी सरकार की मंजूरी जरूरी है। दलाई लामा 1959 से भारत में निर्वासन में रह रहे हैं। तिब्बत में चीनी शासन के खिलाफ असफल विद्रोह के बाद वे भारत आए थे। भारत में करीब 70 हजार तिब्बती शरणार्थी और निर्वासित तिब्बती सरकार भी मौजूद है। भारतीय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि दलाई लामा की भारत में मौजूदगी चीन के साथ संबंधों में नई दिल्ली को रणनीतिक बढ़त देती है।

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चीन बोला- भारत दलाई लामा उत्तराधिकारी मामले से दूर रहे:यह हमारा आंतरिक मासला, तिब्बत मुद्दे में बाहरी दखल मंजूर नहीं

चीन बोला- भारत दलाई लामा उत्तराधिकारी मामले से दूर रहे:यह हमारा आंतरिक मासला, तिब्बत मुद्दे में बाहरी दखल मंजूर नहीं

चीन ने भारत को दलाई लामा के उत्तराधिकार के मुद्दे से दूर रहने की सलाह दी है। बीजिंग ने कहा कि दलाई लामा के पुनर्जन्म और उत्तराधिकारी तय करने की प्रक्रिया पूरी तरह चीन का आंतरिक मामला है और इसमें किसी बाहरी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी। भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि दलाई लामा का पुनर्जन्म सदियों पुराने धार्मिक रीति-रिवाजों और ऐतिहासिक परंपराओं के तहत होता है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के लिए चीन की केंद्रीय सरकार की मंजूरी जरूरी होती है और 14वें दलाई लामा को भी इसी प्रक्रिया के तहत मान्यता दी गई थी। चीनी दूतावास ने भारत को तिब्बत पर अपने पुराने रुख की याद भी दिलाई। बयान में कहा गया कि भारत को तिब्बती स्वतंत्रता से जुड़ी गतिविधियों के लिए मंच उपलब्ध नहीं कराना चाहिए। यह क्षेत्रीय स्थिरता और भारत-चीन संबंधों के लिए जरूरी है। चीन दलाई लामा के मुद्दे को संबंधों में कांटा बता चुका यह पहला मौका नहीं है जब चीन ने दलाई लामा मुद्दे पर भारत को चेतावनी दी हो। पिछले साल भी बीजिंग ने कहा था कि दलाई लामा का उत्तराधिकार भारत-चीन संबंधों में कांटे की तरह है। दलाई लामा पहले भी कह चुके हैं कि उनके उत्तराधिकारी तय करने में चीन की कोई भूमिका नहीं होगी। तिब्बती मान्यता के मुताबिक, किसी वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा पुनर्जन्म लेती है। हालांकि चीन कहता है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी की प्रक्रिया को चीनी सरकार की मंजूरी जरूरी है। दलाई लामा 1959 से भारत में निर्वासन में रह रहे हैं। तिब्बत में चीनी शासन के खिलाफ असफल विद्रोह के बाद वे भारत आए थे। भारत में करीब 70 हजार तिब्बती शरणार्थी और निर्वासित तिब्बती सरकार भी मौजूद है। भारतीय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि दलाई लामा की भारत में मौजूदगी चीन के साथ संबंधों में नई दिल्ली को रणनीतिक बढ़त देती है।

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