नशे के खिलाफ देसी ब्रह्मास्त्र! साफ होगा शरीर का जहर, पाचन भी होगा दुरुस्त – News18 हिंदी

X नशे के खिलाफ देसी ब्रह्मास्त्र! साफ होगा शरीर का जहर, पाचन भी होगा दुरुस्त Natural Remedy For Alcohol And Smoking Addiction: नशे की जानलेवा लत से जूझ रहे परिवारों के लिए रसोई में रखी एक मामूली सी चीज संजीवनी साबित हो रही है. आयुर्वेद के जानकार पुरुषार्थी पवन आर्य के अनुसार अजवाइन का वैज्ञानिक तरीके से तैयार काढ़ा न केवल शरीर को डिटॉक्स करता है. बल्कि नशीले पदार्थों की तलब को भी धीरे-धीरे खत्म कर देता है. इस औषधि को तैयार करने की विधि बेहद खास है. आधा किलो अजवाइन को 8 लीटर पानी में तब तक उबाला जाता है. जब तक वह घटकर 4 लीटर न रह जाए. भोजन से 10 मिनट पहले एक कप इस काढ़े का सेवन करने से शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं. एक से दो महीने का नियमित सेवन सिगरेट, शराब और गुटखे जैसी आदतों को छुड़ाने में गेमचेंजर साबित हो सकता है. अजवाइन में मौजूद थाइमोल तत्व पाचन तंत्र को इतना मजबूत कर देता है कि शरीर प्राकृतिक रूप से नशे को नकारने लगता है. यह घरेलू नुस्खा गैस, कब्ज और एसिडिटी में भी रामबाण है. विशेषज्ञ किसी भी गंभीर बीमारी की स्थिति में डॉक्टरी सलाह लेने की ताकीद भी करते हैं.
प्रोस्टेट का साइज बढ़ जाए, तब क्या ट्रीटमेंट कराएं? यूरोलॉजिस्ट ने बताया आपके लिए क्या बेहतर, देखें वीडियो

Treatment for Enlarged Prostate: बढ़े हुए प्रोस्टेट की समस्या उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में कॉमन है, लेकिन सही समय पर इलाज बेहद जरूरी है. गंगाराम हॉस्पिटल के सीनियर यूरोलॉजिस्ट डॉ. अमरेंद्र पाठक ने यूट्यूब पर अपलोड किए गए एक वीडियो में बताया है कि जब प्रोस्टेट का साइज बढ़ जाए, तो आपके पास उपचार के क्या विकल्प होते हैं. शुरुआती स्टेज में दवाओं से राहत मिल सकती है, लेकिन गंभीर मामलों में सर्जरी अधिक प्रभावी साबित होती है. बार-बार पेशाब आना या पेशाब रुकने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें. यह बढ़े हुए प्रोस्टेट का संकेत हो सकता है.
Health Tips : आप भी एक झटके में गटक जाते हैं पानी की बोतल? खराब हो जाएगी किडनी, ये वाला काम भी घातक

Last Updated:March 22, 2026, 20:29 IST Kidney disease : देश में किडनी मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. अक्सर भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल और काम की धुन में हम अपनी सेहत को पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते. आईटी सेक्टर में काम करने वाले युवा और घंटों पढ़ाई में जुटे छात्रों में ये आदत ज्यादा देखी जाती है. वे एक ऐसी आदत के शिकार हो रहे हैं, जो धीरे-धीरे उनके शरीर के मुख्य अंगों को खोखला कर रही है. लोकल 18 ने पीलीभीत के आयुर्वेदाचार्य डॉ. आदित्य पांडे से इन छिपे हुए खतरों के बारे में पूछा. पीलीभीत. आजकल की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में हम अक्सर काम की धुन में अपनी सेहत को पीछे छोड़ देते हैं. खासकर आईटी सेक्टर में काम करने वाले युवा और घंटों पढ़ाई में जुटे छात्र एक ऐसी आदत के शिकार हो रहे हैं, जो धीरे-धीरे उनके शरीर के मुख्य अंगों को खोखला कर रही है. पीलीभीत के वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. आदित्य पांडे ने लोकल 18 से उन छिपे हुए खतरों के प्रति आगाह किया है, जिन्हें हम रोजमर्रा की जिंदगी में नजरअंदाज कर देते हैं. रोकना घातक डॉ. पांडे बताते हैं कि लगातार 12 से 16 घंटे तक एक ही जगह बैठकर काम करना केवल थकान का कारण नहीं है, बल्कि यह शरीर के भीतर एक गंभीर संकट खड़ा कर रहा है. अक्सर काम के दबाव में युवा अपने शरीर के नेचुरल वेग, जैसे पेशाब को लंबे समय तक रोक लेते हैं. आयुर्वेद में इसे अधारणीय वेग कहा गया है. इस वेग को रोकने से शरीर के अंदर इंफेक्शन बढ़ने लगता है, जो सीधा आपकी किडनी (गुर्दों) पर हमला करता है. लंबे समय में यह आदत किडनी फेलियर जैसी नौबत भी ला सकती है. खतरा सिर्फ किडनी तक ही सीमित नहीं है. घंटों एक ही स्थिति में बैठे रहने से शरीर के निचले हिस्सों की नसों पर भारी दबाव पड़ता है. सभी करते हैं ये गलती डॉ. पांडे का कहना है कि इसी कारण आजकल के युवाओं में बवासीर (पाइल्स) और फिशर जैसी बीमारियां बहुत तेजी से फैल रही हैं. शरीर को जरूरी मूवमेंट न मिलने और गलत तरीके से बैठने के कारण पाचन तंत्र और आंतों की कार्यक्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है. डॉ. पांडे ने पानी पीने की एक ऐसी आम गलती के बारे में भी बताया है, जो लगभग हर दूसरा व्यक्ति करता है. लोग घंटों काम में डूबे रहते हैं और पानी पीना भूल जाते हैं, फिर अचानक याद आने पर एक साथ पूरी बोतल खाली कर देते हैं. अचानक लोड खतरनाक डॉ. पांडे के मुताबिक, यह तरीका किडनी के लिए बहुत खतरनाक है. जैसे किसी थके हुए आदमी पर अचानक भारी बोझ डाल दिया जाए तो वह ढह जाता है, वैसे ही प्यासी किडनी पर अचानक पानी का भारी लोड पड़ने से उसके ‘नेफ्रॉन्स’ डैमेज होने लगते हैं. डॉ. पांडे की सलाह है कि इस डिजिटल युग में अपनी सेहत को दांव पर न लगाएं. काम के बीच-बीच में छोटे ब्रेक लेना और शरीर के संकेतों को समझना बहुत जरूरी है. पानी को एक साथ पीने के बजाय घूंट-घूंट करके और थोड़े-थोड़े अंतराल पर पिएं. अगर समय रहते इन छोटी आदतों को नहीं सुधारा गया, तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Pilibhit,Uttar Pradesh First Published : March 22, 2026, 20:29 IST
गुर्दे की पथरी को गलाकर राख बना देगा यह पौधा! कई गंभीर बीमारियों के लिए काल, ऐसे करें इस्तेमाल

Last Updated:March 22, 2026, 14:48 IST Punarnava Health Benefits: पुनर्नवा को ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में भी सहायक माना जाता है. इसके पाउडर को शहद के साथ लेने से ब्लड प्रेशर संतुलित रखने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा इसमें विटामिन-C, विटामिन-B और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में एक ऐसा पौधा पाया जाता है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है. यह पौधा आपको खेतों व घर के आसपास खाली पड़ी जमीन में आसानी मिल जाता है. पुनर्नवा एक ऐसा औषधीय पौधा है, जिसे आयुर्वेद में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. यह पौधा सूजन से लेकर कई बीमारियों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. पुनर्नवा एक फैलने वाली घास के रूप में उगने वाला पौधा है. यह आमतौर पर उन जगहों पर ज्यादा मिलता है, जहां नमी और बारिश अधिक होती है. अगर आप भी किडनी जैसी समस्याओं से अक्सर परेशान रहते हैं, तो यह पौधा आपकी किडनी जैसी समस्याओं से आपको छुटकारा दिला सकता है. पुनर्नवा का सेवन चाय या काढ़े के रूप में किया जा सकता है. इसके जड़, पत्तियां और तना को पानी में उबालकर छान लिया जाता है और फिर इसे पिया जाता है. पुनर्नवा को ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में भी सहायक माना जाता है. इसके पाउडर को शहद के साथ लेने से ब्लड प्रेशर संतुलित रखने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा इसमें विटामिन-C, विटामिन-B और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. भोजन से पहले इसका रस लेने से कब्ज, गैस और पेट दर्द जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google अगर आप भी वजन जैसी समस्या से अक्सर परेशान रहते हैं, अधिक वजन होने के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में पुनर्नवा का पौधा बहुत ही फायदेमंद माना जाता है. पुनर्नवा के पौधों के रस का सेवन करने से वजन जैसी समस्या से आपको राहत मिल सकती है, क्योंकि पुनर्नवा में प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है. आज के समय भागदौड़ के कारण अक्सर तनाव की समस्या देखी जा रही है. कई बार नींद ना आने के कारण लोग बीमार हो जाते हैं. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे पौधे के बारे में बताने जा रहे हैं, जो तनाव जैसी समस्याओं से आपको राहत दिला सकता है. यह पौधा पुनर्नवा है, क्योंकि पुनर्नवा में एंटी स्ट्रैस और एंटीडिप्रेसेंट गुण पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं. आयुर्वेदिक आचार्य देवेंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि बदलते खान-पान के कारण पथरी की समस्या अधिक देखी जा रही है. पथरी की समस्या से छुटकारा पाने के लिए पुनर्नवा बहुत ही फायदेमंद माना जाता है. पुनर्नवा को कुछ लोग पत्थरी भाजी के नाम से भी जानते हैं, क्योंकि इसमें पोटेशियम की मात्रा बहुत ज्यादा है. पोटेशियम होने की वजह से पत्थरी भाजी हमारे शरीर में ग्लोमेरूलर फिल्ट्रेशन रेट यानी गुर्दे की ओर से रक्त को छानने की प्रक्रिया को बढ़ा देता है. किडनी के सही फिल्टरेशन नही करने की वजह से हमारे शरीर में सूजन होता है. First Published : March 22, 2026, 14:48 IST
सफेद कद्दूू के जूस में छिपा है ये राज, पीने से दिमाग होता है तेज, पाचन तंत्र ठीक से करता है काम, एक्सपर्ट ने बताया

Last Updated:March 22, 2026, 08:45 IST आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव बताते हैं कि कद्दू कई प्रकार के होते हैं. जिनमें मुख्य रूप से हर कद्दू और सफेद कद्दू होता है. ज्यादातर कद्दू की सब्जी बनाई जाती है और सफेद कद्दू पेठा बनाने के लिए काफी फेमस होता है, लेकिन यदि सफेद कद्दू का जूस बनाकर पिया जाए तो इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है. क्योंकि इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को सफल बनाते हैं. मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव बताते हैं कि कद्दू कई प्रकार के होते हैं. जिनमें मुख्य रूप से हर कद्दू और सफेद कद्दू होता है. ज्यादातर कद्दू की सब्जी बनाई जाती है और सफेद कद्दू पेठा बनाने के लिए काफी फेमस होता है. लेकिन यदि सफेद कद्दू का जूस बनाकर पिया जाए तो इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है, क्योंकि इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को सफल बनाते हैं. चूंकि इसमें लगभग 95% पानी होता है. इससे यह शरीर में ठंडक प्रदान करता है और डिटॉक्स करता है. इसके साथ ही शरीर के विषाक्त पदार्थों को भी बाहर करने का काम करता है. शरीर को डिटॉक्स करने से ठंडक मिलती है और यह ठंडक प्रदान करने में काफी कारगर सिद्ध होता है. सफेद कद्दू एक ऐसा औषधि फल होता है जो जूस के सेवन करने पर लोगों के मन को साथ बनता है और दिमाग चलने की प्रक्रिया को भी नियंत्रित करता है इसके साथ ही संतुलन की गुण होने की वजह से या दिमाग को तेज और प्रखर बनाने का काम करता है इसमें कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो माइंड को शार्प करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google सफेद कद्दू में कैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने में काफी मदद करते हैं. इसमें विटामिन, मिनरल, विटामिन सी, बी कॉम्प्लेक्स, नियासिन, थियामिन, राइबोफ्लेविन, आयरन, कैल्शियम, जिंक, पोटैशियम, मैग्नीशियम, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, डाइटरी फाइबर आदि भरपूर होते हैं. सफेद कद्दू को ऐश गार्ड भी कहा जाता है. इसे खाने से शरीर में ऊर्जा आती है. यह धड़कनों को शांत रखता है. और इसमें विटामिन बी3 होने के कारण ये फूड को इस्तेमाल किए जाने वाले एनर्जी में बदल कर एनर्जी मेटाबॉलिज्म में मुख्य भूमिका निभाता है.जिसे शरीर में एनर्जी का लेवल बढ़ जाता है और थकान दूर होती है इसके साथ या स्ट्रेस कम करने मेंभी काफी मदद करता है. जिन लोगों को एनीमिया, शारीरिक कमजोरी है उनको सफेद कद्दू का सेवन करना चाहिए सफेद कद्दू के यदि जूस को नियमित रूप से किया जाए तो शरीर में रक्त की कमी दूर हो जाएगी और एनीमिया से लोगों को काफी राहत मिलेगी इसके साथ ही जिन लोगों को एनीमिया हुआ है उनमें एनर्जी लेवल को बढ़ जाएगा और थकान दूर हो जाएगी. सफेद कद्दू में शरीर को शांत रखने और शीतलता प्रदान करने की क्षमता होती है ऐसे में जिन लोगों को सर्दी और जुकाम की समस्या होती है उन लोगों को इसके जूस का सेवन करने से बचना चाहिए यदि वह इसका सेवन कर रहे हैं तो काली मिर्च और शहद मिलाकर सफेद कद्दू के जूस का सेवन करें. ऐसा करने से कूलिंग इफेक्ट काफी हद तक कम हो जाता है. अगर आप सफेद कद्दू का जूस बनाना चाहते हैं तो आपको जूस बनाने के लिए एक सफेद कद्दू को काट लें. मिक्सी में डालकर इसे ब्लेंड कर लें. इसे एक गिलास में छान लें. इसमें नींबू का रस, चुटकी भर काली मिर्च पाउडर, नमक स्वादानुसार डालें, मिलाएं और पी जाएं. या आपके लिए काफी फायदेमंद होगा. First Published : March 22, 2026, 08:45 IST
Ladyfinger benefits : शुगर कैसे कंट्रोल करती है भिंडी, पेट भी रखे हल्का…99% लोग नहीं जानते इसके ये वाले फायदे

Last Updated:March 21, 2026, 22:58 IST Ladyfinger health benefits : भिंडी न केवल स्वाद की रानी है, बल्कि सेहत का भी खजाना है. अक्सर लोग इसे साधारण सब्जी समझते हैं, लेकिन असल में भिंडी पोषक तत्वों का पावरहाउस है. अगर सही तरीके से इसका सेवन किया जाए, तो कई गंभीर रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है. भिंडी में कैलोरी कम होती है, इसलिए यह हेल्दी डाइट का अहम हिस्सा बन जा सकती है. लोकल 18 से बलिया की चिकित्सक डॉ. वंदना तिवारी बताती हैं कि भिंडी प्राकृतिक रेचक की तरह काम करती है. गर्भावस्था में इसका फोलेट भ्रूण के विकास में काफी मददगार माना जाता है. भिंडी कोई आम सब्जी नहीं, बल्कि फाइबर, विटामिन K, फोलेट और एंटीऑक्सीडेंट जैसे तमाम गुणों से भरपूर होती है. ये सभी तत्व शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं और कई जरूरी कार्यों को संतुलित रखते हैं. भिंडी में कैलोरी कम होती है, इसलिए यह हेल्दी डाइट का अहम हिस्सा बन जा सकती है. भिंडी हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है. शुगर रोगियों के लिए भिंडी बेहद फायदेमंद मानी जाती है. इसमें फाइबर और म्यूसीलेज नामक तत्व पाए जाते हैं, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं. इसके नियमित सेवन से शुगर लेवल संतुलित रहता है और शरीर में अचानक बढ़ने वाले ग्लूकोज को नियंत्रित करने में सहायक होता है. भिंडी पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी अहम भूमिका निभा सकती है. इसका उच्च फाइबर कब्ज, गैस और पेट से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है. यह एक प्राकृतिक रेचक की तरह काम करती है, जिससे पेट साफ रहता है. इसी के चलते पाचन प्रक्रिया भी बेहतर हो जाती है. इसको रोजाना सीमित मात्रा में खाने से पेट हल्का और स्वस्थ रहता हैं. Add News18 as Preferred Source on Google राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के मुताबिक, भिंडी में पेक्टिन होते हैं, जो खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम करता है. भिंडी ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी सहायक है, जिससे हृदय लंबे समय तक निरोग रहता है. अगर आप वजन घटाने के लिए तरकीब खोज रहे हैं, तो आपके लिए भिंडी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है. भिंडी में कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर पाए जाते हैं, ऐसा होने के कारण हो यह पेट को लंबे समय तक भरा रखती है. इससे बार-बार भूख नहीं लगती है और अनहेल्दी खाने से बचाव होता हैं. भिंडी वेट लॉस करने में बहुत उपयोगी है. भिंडी हड्डियों, त्वचा और आंखों के लिए भी बेहद लाभकारी और गुणकारी है. इसमें विटामिन K पाया जाता हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है, जबकि एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन A त्वचा को चमकदार और आंखों की रोशनी को बेहतर बनाए रखते हैं. गर्भावस्था में इसका फोलेट भ्रूण के विकास में काफी मददगार माना जाता है. इसे आप बगैर मसालेदार सब्जी, सलाद या भिंडी के पानी के रूप में सेवन कर सकते हैं. रात में भिंडी भिगोकर सुबह उसका पानी पीना खासतौर पर बेहद लाभकारी और फायदेमंद माना जाता हैं. लेकिन इसका अत्यधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए संतुलित मात्रा में ही खाएं. अगर आप किसी गंभीर रोग से ग्रस्त हैं तो बगैर आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लिए इसका सेवन न करें. First Published : March 21, 2026, 22:58 IST
सिर्फ फल ही नहीं, इस पेड़ की पत्तियों में भी छिपे हैं औषधीय गुण! कई गंभीर बीमारियों में कारगर

Last Updated:March 21, 2026, 17:58 IST Health News: आयुर्वेद में एक फल की पत्तियों को काफी फायदेमंद माना गया है. इसका नियमित सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. अमरूद में बहुत सारे विटामिन पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और शरीर को कई बीमारियों से बचाते हैं. बाराबंकी: अमरूद एक स्वादिष्ट और पौष्टिक फल है, जिसे बच्चे से लेकर बड़े तक सभी पसंद करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अमरूद सिर्फ फल ही नहीं, बल्कि इसके पत्ते और छाल भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. आयुर्वेद में अमरूद को सेहत का खजाना माना गया है. इसका नियमित सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. अमरूद में बहुत सारे विटामिन पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और शरीर को कई बीमारियों से बचाते हैं. इसके पत्तों का उपयोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, अमरूद के फल, पत्ते, छाल हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद माने गए हैं. ये हमें ब्लड शुगर, डाइजेशन, पाचन, कब्ज, मोटापा, एनीमिया और स्किन संबंधित कई बीमारियों से छुटकारा दिलाते हैं. कब्ज और गैस से छुटकाराआयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर अमित वर्मा एमडी मेडिसिन ने बताया कि अमरूद का फल और पेड़ हमारे देश में सब जगह पाया जाता है. इसमे बहुत सारे औषधीय गुण पाए जाते हैं. जिन लोगों को पाचन की समस्या रहती है या कब्ज व गैस बनती है, उन्हें अमरूद के फल का सेवन करना चाहिए. इससे काफी फायदा होता है. साथ ही जिनका पेट खराब रहता है, अधिक दर्द होता है या डायरिया की समस्या है, उन लोगों को भी इसके फल का इस्तेमाल करना चाहिए. सुबह-शाम चार पत्तियां चबाने के फायदेवहीं अगर किसी को ब्लड शुगर है, डाइजेशन की समस्या है, उन लोगों को अमरूद का इस्तेमाल करना चाहिए. वहीं जिन लोगों का वजन बढ़ रहा है या स्किन समस्या, एनीमिया की कमी हो रही है, वहां पर इसकी पत्तियों को पीसकर इस्तेमाल करना चाहिए. ये बहुत ही फायदेमंद माना जाता है. वहीं जिन्हें शुगर की समस्या है, उन्हें सुबह-शाम चार पत्तियां चबा-चबाकर खानी चाहिए. इससे बहुत ही फायदा होता है. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. Location : Bara Banki,Uttar Pradesh First Published : March 21, 2026, 17:58 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
green vs yellow kiwi benefits | which kiwi is better for health | हरी और पीली कीवी में फर्क | सेहत के लिए कौन सी कीवी ज्यादा फायदेमंद है |

Last Updated:March 20, 2026, 20:00 IST Green vs Yellow Which Kiwi is Better for Health: कीवी को विटामिन्स का पावरहाउस माना जाता है, लेकिन बाजार में मिलने वाली हरी और पीली (गोल्डन) कीवी में चुनाव करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. बाहर से देखने में एक जैसी लगने वाली इन दोनों कीवी के स्वाद, बनावट और पोषण में काफी अंतर होता है. जहां हरी कीवी अपने खास खट्टे-मीठे स्वाद और फाइबर के लिए जानी जाती है, वहीं पीली कीवी अपनी मिठास और भारी मात्रा में विटामिन C के लिए मशहूर है. अगर आप अपनी डाइट में सही कीवी शामिल करना चाहते हैं, तो इनके बीच का यह बारीक फर्क समझना आपके लिए बहुत जरूरी है. हरी और पीली कीवी दोनों ही सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं, लेकिन अक्सर लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि आखिर खरीदें कौन सी. बाहर से दिखने में भले ये फल एक जैसे लगें, लेकिन इनके स्वाद, पोषक तत्व और शरीर पर असर में थोड़ा अंतर होता है. अगर आप भी हेल्थ को ध्यान में रखकर सही विकल्प चुनना चाहते हैं, तो दोनों कीवी के बीच का फर्क जानना बेहद जरूरी है. डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि हरी कीवी का स्वाद हल्का खट्टा और ताजगी भरा होता है, जो इसे गर्मियों में बेहद रिफ्रेशिंग बनाता है. इसमें विटामिन C भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है. इसके अलावा इसमें फाइबर भी अच्छा होता है, जो पाचन को दुरुस्त रखता है. अगर आपको हल्का खट्टा स्वाद पसंद है और पेट से जुड़ी दिक्कतें रहती हैं, तो हरी कीवी आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकती है. वहीं पीली कीवी, जिसे गोल्डन कीवी भी कहा जाता है, स्वाद में ज्यादा मीठी और जूसी होती है. इसमें विटामिन C की मात्रा हरी कीवी से भी ज्यादा होती है, जो स्किन को ग्लोइंग बनाने और शरीर को इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है. इसका टेक्सचर मुलायम होता है, जिससे इसे खाना आसान लगता है. जो लोग खट्टा कम और मीठा ज्यादा पसंद करते हैं, उनके लिए पीली कीवी बेहतर चॉइस हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google अगर पोषण की बात करें तो दोनों ही कीवी में एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं. हरी कीवी में जहां फाइबर ज्यादा होता है, वहीं पीली कीवी में विटामिन और मिनरल्स की क्वालिटी थोड़ी ज्यादा मानी जाती है. इसलिए अगर आपका फोकस पाचन पर है तो हरी कीवी चुनें, और अगर स्किन और इम्युनिटी पर ध्यान देना है तो पीली कीवी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है. वजन घटाने वालों के लिए भी कीवी एक शानदार फल है. हरी कीवी में फाइबर ज्यादा होने के कारण यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराती है, जिससे ओवरईटिंग से बचा जा सकता है. वहीं पीली कीवी मीठी जरूर होती है, लेकिन इसमें कैलोरी ज्यादा नहीं होती, इसलिए यह भी डाइट में शामिल की जा सकती है. बस मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है ताकि बैलेंस बना रहे. स्किन के लिए अगर आप खास तौर पर कुछ ढूंढ रहे हैं, तो पीली कीवी आपको बेहतर रिजल्ट दे सकती है. इसमें मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन को अंदर से हेल्दी बनाते हैं और टैनिंग कम करने में मदद करते हैं. हालांकि हरी कीवी भी स्किन के लिए फायदेमंद है, लेकिन पीली कीवी का असर थोड़ा जल्दी दिख सकता है. इसलिए ग्लोइंग स्किन के लिए इसे डाइट में शामिल करना अच्छा रहेगा. खरीदते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. कीवी हमेशा हल्की सॉफ्ट होनी चाहिए, बहुत ज्यादा सख्त या बहुत ज्यादा गली हुई नहीं होनी चाहिए. हरी कीवी की स्किन पर हल्के बाल होते हैं, जबकि पीली कीवी की स्किन स्मूद होती है. इन छोटे-छोटे अंतर को पहचानकर आप सही और ताजी कीवी खरीद सकते हैं, जिससे आपको पूरा पोषण मिल सके. First Published : March 20, 2026, 20:00 IST
किचन में छुपा है सेहत का खजाना! रिसर्च में खुलासा, जानें काली मिर्च, अश्वगंधा और गिलोय के चौंकाने वाले फायदे

Last Updated:March 20, 2026, 19:45 IST Health Tips: डॉ. अभय बताते है कि आयुर्वेद केवल इलाज ही नहीं, बल्कि एक स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है. किचन में मौजूद ये साधारण चीजें अगर सही तरीके से इस्तेमाल की जाएं, तो यह शरीर को बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. वर्तमान समय में जहां ज्यादातर लोग छोटी-बड़ी बीमारियों के लिए एलोपैथिक दवाओं का उपयोग करते है. वहीं एक बड़ा वर्ग आयुर्वेदिक तरीकों को अपनाकर स्वस्थ रहने का प्रयास कर रहा है. गोरखपुर यूनिवर्सिटी के बॉटनी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभय की रिसर्च में यह सामने आया है कि किचन में मौजूद कई साधारण चीजें गंभीर बीमारियों से बचाव और इलाज में कारगर साबित हो सकती है. डॉ. अभय के अनुसार, काली मिर्च गले से जुड़ी समस्याओं में अत्यधिक फायदेमंद है. इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण गले की खराश, खांसी और संक्रमण को कम करने में मदद करते है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में इसका सेवन गले को साफ और मजबूत बनाए रखता है. अश्वगंधा से पैरालाइज मरीजों को राहतरिसर्च में यह भी पाया गया है कि अश्वगंधा का सेवन पैरालाइज (लकवा) के मरीजों के लिए लाभकारी हो सकता है. यह जड़ी-बूटी नसों को मजबूत करने और शरीर की रिकवरी प्रक्रिया को तेज करने में मदद करती है. आयुर्वेद में इसे एक शक्तिवर्धक औषधि के रूप में जाना जाता है. गिलोय को आयुर्वेद में ‘अमृता’ कहा जाता है. जिसका अर्थ है अमरता देने वाली. डॉ. अभय बताते है कि गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बढ़ाने में अत्यधिक असरदार है. बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए इसका सेवन फायदेमंद माना जाता है. दालचीनी भी कई बीमारियों में कारगर साबित होती है. यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने, पाचन सुधारने और संक्रमण से लड़ने में मदद करती है. रोजाना सीमित मात्रा में इसका उपयोग शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाता है. डॉ. अभय की रिसर्च के मुताबिक आयुर्वेदिक चीजों का सही और संतुलित उपयोग कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम कर सकता है. हालांकि, विशेषज्ञ सलाह के बिना किसी भी चीज का अधिक सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है. डॉ. अभय बताते है कि आयुर्वेद केवल इलाज ही नहीं, बल्कि एक स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है. किचन में मौजूद ये साधारण चीजें अगर सही तरीके से इस्तेमाल की जाएं, तो यह शरीर को बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. Location : Gorakhpur,Gorakhpur,Uttar Pradesh First Published : March 20, 2026, 19:45 IST
मार्च-अप्रैल में बीमारियों से बचने के उपाय: डॉ. परिनीता कौर के सुझाव

मार्च-अप्रैल में लोग सबसे ज्यादा बीमार पड़ते हैं. हर दिन बदलता मौसम इसका एक बड़ा कारण है. ऐसे में अगर आप एयर-कंडीशन्ड ऑफिस से अचानक तेज गर्मी में निकलते हैं तो बीमार होने की संभावना और बढ़ जाती है. यह भले ही हमारी दिनचर्या का हिस्सा लग सकता है, लेकिन हमारा शरीर इसे अलग तरीके से महसूस करता है. तापमान में यह अचानक बदलाव शरीर पर एक तरह का “दोहरा थर्मल शॉक” डालता है, जिससे शरीर पर हल्का लेकिन असरदार दबाव पड़ता है. डॉ. परिनीता कौर, एसोसिएट डायरेक्टर एवं यूनिट हेड – इंटरनल मेडिसिन, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, द्वारका बताती हैं कि हमारा शरीर अपने अंदर का तापमान संतुलित रखने की कोशिश करता है, जिसे थर्मोरेगुलेशन कहा जाता है. जब हम लंबे समय तक एसी में रहते हैं, तो शरीर ठंडे माहौल के अनुसार खुद को ढाल लेता है, जिससे पसीना कम आता है और शरीर की कुछ प्रक्रियाएं धीमी हो जाती हैं. फिर जैसे ही हम बाहर तेज गर्मी में जाते हैं, शरीर को अचानक सक्रिय होना पड़ता है जिससे पसीना आना शुरू होता है, त्वचा में रक्त संचार बढ़ता है और शरीर खुद को ठंडा करने की कोशिश करता है. यह बदलाव हमेशा आसान नहीं होता. टेंपरेचर में बदलाव का असर इसका सबसे आम असर थकान के रूप में दिखता है. शरीर को खुद को ढालने में ज्यादा ऊर्जा लगती है, जिससे बिना ज्यादा काम किए भी थकान महसूस होती है. सिरदर्द भी एक सामान्य समस्या है, जो अक्सर डिहाइड्रेशन या तापमान में अचानक बदलाव से होता है. समय के साथ यह स्थिति काम करने की क्षमता और पूरे सेहत पर भी असर डाल सकती है. रेस्टिरेटरी सिस्टम की गड़बड़ी रेस्पिरेटरी सिस्टम भी इससे प्रभावित होता है. एसी वाले कमरों में नमी कम होती है, जिससे नाक और गला सूख जाता है. इससे एलर्जी, जलन और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसके तुरंत बाद जब हम गर्म और नमी भरी हवा में जाते हैं, तो यह समस्या और बढ़ सकती है, जिससे खांसी, गले में परेशानी या साइनस की दिक्कत हो सकती है. स्किन प्रॉब्लमत्वचा पर भी इसका असर पड़ता है. एसी में ज्यादा समय बिताने से त्वचा की नमी कम हो जाती है, जिससे सूखापन और संवेदनशीलता बढ़ती है. बाहर की गर्मी, प्रदूषण और धूप के संपर्क में आने पर त्वचा में जलन, टैनिंग या पिंपल्स हो सकते हैं. बार-बार होने वाला यह बदलाव त्वचा की सुरक्षा परत को कमजोर कर देता है. इन लोगों के लिए ज्यादा खतराटेंपरेचर में यह असंतुलन हल्के डिहाइड्रेशन का कारण बन सकता है, जो लंबे समय में ऊर्जा, ध्यान और किडनी के काम पर असर डाल सकता है. इसके साथ ही जिन लोगों को पहले से माइग्रेन, अस्थमा या दिल से जुड़ी समस्याएं हैं, उनके लिए यह तापमान बदलाव ट्रिगर बन सकता है. इससे रक्त वाहिकाओं में बदलाव आता है, सांस लेने में फर्क पड़ता है और लक्षण बढ़ सकते हैं. तो इससे बचाव कैसे किया जाए? सबसे जरूरी है धीरे-धीरे बदलाव को अपनाना और कुछ आदतों में सुधार करना. एसी का तापमान बहुत कम न रखें, बल्कि सामान्य स्तर पर रखें ताकि शरीर को ढलने में आसानी हो. दिनभर पर्याप्त पानी पीते रहें, भले ही प्यास न लगे. बाहर जाते समय हल्का दुपट्टा या जैकेट पहनना अचानक बदलाव को कम कर सकता है. इसके अलावा, त्वचा की देखभाल, मॉइस्चराइज़र का इस्तेमाल और इनडोर हवा की गुणवत्ता का ध्यान रखना भी जरूरी है. Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.









