honey color purity taste minerals health benefits tips

Last Updated:May 22, 2026, 19:51 IST Asli Shahad Ki Pehchan: क्या आप जानते हैं कि शहद का रंग ही उसकी शुद्धता, स्वाद और औषधीय गुणों का असली सर्टिफिकेट है? फूलों के आधार पर बदलने वाला शहद का रंग न सिर्फ असली-नकली का फर्क साफ करता है. बल्कि सेहत के कई राज भी खोलता है. जानिए क्यों हल्का शहद स्वाद में ज्यादा मीठा और गहरा शहद पोषक तत्वों व मिनरल्स के मामले में सबसे पावरफुल माना जाता है. ख़बरें फटाफट समस्तीपुर: शहद को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. लोग इसे स्वाद, ऊर्जा और औषधीय गुणों के कारण नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि शहद का रंग ही उसकी पहचान और गुणवत्ता का बड़ा संकेत होता है. दरअसल मधुमक्खियां जिस फूल के रस यानी नेक्टर को इकट्ठा करती हैं, उसी के अनुसार शहद का रंग, स्वाद और उसकी खासियत तय होती है. यही कारण है कि बाजार में मिलने वाला हर शहद एक जैसा नहीं दिखता. कोई हल्का सफेद या गोल्डन होता है तो कोई गहरा भूरा और एम्बर रंग का नजर आता है. जानकारी के अभाव में लोग इसे सामान्य अंतर समझते हैं, जबकि इसके पीछे फूलों और पौधों की पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया जुड़ी होती है. ऐसे में यह खबर उन लोगों के लिए खास है जो लंबे समय से शहद का उपयोग कर रहे हैं लेकिन उसके रंग के पीछे छिपे संकेतों को अब तक नहीं समझ पाए हैं. कौन सा फूल तैयार करता है कैसा शहदडॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ.राजेंद्र कुमार ने बताया कि मधुमक्खियां अलग-अलग फूलों के रस से विभिन्न प्रकार का शहद तैयार करती हैं. उन्होंने कहा कि अगर लोग रंग के आधार पर शहद को पहचानना सीख जाएं तो वे आसानी से समझ सकते हैं कि यह किस फूल से तैयार हुआ है. वैज्ञानिक के अनुसार लीची और सरसों के फूलों से बनने वाला शहद हल्का सफेद, क्रीम या चमकीला पीला रंग का होता है. सहजन के फूलों से तैयार शहद हल्का गोल्डन या एम्बर दिखाई देता है. वहीं सूरजमुखी का शहद सुनहरे पीले रंग का होता है. नीम और यूकेलिप्टस के फूलों से तैयार शहद हल्का से गहरा भूरा रंग लिए रहता है. वैज्ञानिक ने उदाहरण देते हुए बताया कि जामुन का फल और फूल गहरे रंग के होते हैं, इसलिए उससे बनने वाला शहद भी डार्क ब्राउन या हल्का पर्पल टोन लिए नजर आ सकता है. बहुफूल यानी मल्टीफ्लोरा शहद का रंग हल्के पीले से लेकर गहरे एम्बर तक हो सकता है, क्योंकि इसमें कई फूलों का मिश्रण होता है. रंग से समझें शहद की गुणवत्ता, स्वाद और औषधीय महत्वविशेषज्ञों के मुताबिक शहद का रंग केवल उसकी खूबसूरती नहीं बताता, बल्कि उसके स्वाद, घनत्व और औषधीय गुणों की भी जानकारी देता है. हल्के रंग का शहद स्वाद में मीठा और हल्का माना जाता है. जबकि गहरे रंग का शहद अधिक मजबूत स्वाद और अधिक मिनरल्स वाला माना जाता है. यही कारण है कि कई लोग खास बीमारी या स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष प्रकार का शहद चुनते हैं. उदाहरण के तौर पर लीची और सरसों का शहद ऊर्जा और स्वाद के लिए पसंद किया जाता है. जबकि नीम और जंगल से मिलने वाला गहरा शहद रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपयोगी माना जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर लोग शहद के रंग और उसके स्रोत को समझ लें तो नकली और असली शहद की पहचान करना भी आसान हो जाएगा. यही वजह है कि आजकल लोग सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि शहद के रंग और उसके फूलों की जानकारी को भी महत्व देने लगे हैं. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Samastipur,Bihar
Karan Aujla vs Yo Yo Honey Singh Rivalry Punjabi Music Diss

पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में दो सुपरस्टार यो-यो हनी सिंह और करण औजला के बीच राइवलरी छिड़ गई है। हनी सिंह ने दिल्ली के अपने हालिया कॉन्सर्ट में बिना नाम लिए करण औजला ‘6-7’ बताकर तंज कसा था। हालांकि फैंस समझ गए थे कि यह तंज करण औजला पर ही था। . अब करण औजला ने यो-यो हनी सिंह पर काउंटर अटैक किया। करण औजला ने अपने लाइव शो में बिना नाम लिए कहा, “साड्डा 6-7 नहीं बेबी, 5-7 आ!”। यह 5-7 है ये 6-7 क्या है, ये तो बच्चों वाली बातें हैं। लेवल चेक करो। औजला के हनी सिंह को दिए जवाब पर फैंस ने जमकर शोर मचाया। दरअसल करण औजला का 5-7 सॉन्ग काफी लोकप्रिय हो रहा है और उस गीत के 36 मिलियन व्यूज हैं। जब यो-यो हनी सिंह ने अपने शो में 6-7 का जिक्र किया तो भी लोगों ने इस गाने को ढूंढकर सुना। औजला के जवाब के बाद दोनों सिंगर के फैंस भी आमने-सामने हैं। औजला के फैंस इसे ‘करारा जवाब’ बता रहे हैं, वहीं हनी सिंह के फैंस का कहना है कि इंडस्ट्री में ‘किंग’ का मुकाबला कोई नहीं कर सकता। करण औजला परफॉर्म करते हुए। हनी सिंह और करण औजला ने एक-दूसरे को क्या कहा हनी सिंह- मेरा शो सुपरहिट, बाकी 6-7 यो-यो हनी सिंह अपने माय स्टोरी इंडिया टूर के तहत कुछ दिन पहले दिल्ली कॉन्सर्ट में परफॉर्म कर रहे थे। स्टेज पर बोलते हुए उन्होंने गर्व से कहा कि उनके शो हमेशा ‘सुपरहिट’ होते हैं, जबकि बाकी आर्टिस्ट्स के शो ‘6-7’ ही रह जाते हैं। इस दौरान उन्होंने गंदे इशारे भी किए। ‘6-7’ शब्द Gen-Z स्लैंग में एवरेज परफॉर्मेंस के लिए इस्तेमाल होता है। फैंस ने हनी सिंह के इस कमेंट को करण औजला की तरफ इशारा माना, क्योंकि करण के हाल के गाने और कॉन्सर्ट्स भी जबरदस्त चल रहे हैं और दोनों के बीच इंडस्ट्री में साइलेंट कॉम्पिटिशन की चर्चा पहले से थी। औजला ने कहा- इट्स नॉट 6-7, इट्स 5-7 करण औजला ने इस पर पलटवार अपने हाल के लाइव परफॉर्मेंस पी पॉप कल्चर इंडिया टूर के एक शो में किया। स्टेज पर करण औजला ने बिना किसी का नाम लिए कहा – “इट्स नॉट 6-7, इट्स 5-7 बेबी!”। “साड़ा 6-7 नहीं बेबी, 5-7 आं!”। यह 5-7 है ये 6-7 क्या है ये तो बच्चों वाली बातें हैं। लेवल चेक करो। यह लाइन उनके अपने ही हालिया हिट गाने ‘5-7’ का सीधा रेफरेंस थी। करण औजला शो के दौरान जवाब देते हुए। करण औजला के 5-7’ गाने का सफर करण औजला का गाना ‘5-7’ 18 फरवरी 2026 को रिलीज हुआ था। सिंगर-गीतकार-कंपोजर खुद करण औजला, म्यूजिक MXRCI का और फीचरिंग मॉडल-अभिनेत्री अलंकृता है। गाने की थीम, लिरिक्स और विजुअल्स ने युवाओं को आकर्षित किया। रिलीज के कुछ हफ्तों में ही गाने के 3.65 करोड़ (36.5 मिलियन) से ज्यादा व्यूज पार हो गए हैं। यूट्यूब पर यह वीडियो ट्रेंडिंग लिस्ट में छाया रहा। गाना सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय है। ‘5-7’ वाली लाइन खूब वायरल हो रही है। हनी सिंह के कमेंट के बाद और बढ़ गया। यो यो हनी सिंह व करण औजला। हनी सिंह व करण औजला के बीच हुए विवाद गीत और म्यूजिक को लेकर विवाद: हनी सिंह ने कमबैक के बाद कई इंटरव्यू दिए, जिसमें उन्होंने कहा कि आज के पंजाबी कलाकार उनके बनाए रास्ते पर चल रहे हैं। हनी सिंह ने एक बार यह तक कह दिया कि वह आजकल के गानों को बहुत ज्यादा नहीं सुनते। उन्हें लगता है कि म्यूजिक का लेवल गिर गया है। इसके बाद करण औजला ने एक इंटरव्यू में अपनी मेहनत के साथ आज के टाइम के संगीत को सक्सेसफुल बताया था। करण औजला ने कहा था- मैं सबकी रिस्पेक्ट करता हूं। यो-यो हनी सिंह पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि आज म्यूजिक बदल रहा है। अगर आप समय के साथ नहीं बदलेंगे, तो आप पीछे रह जाएंगे। वहीं से दोनों के बीच वॉर शुरू हुई। हनी सिंह के मैनेजर ने करण औजला पर कसे थे तंज हनी सिंह के मैनेजर ने भी पहले करण औजला पर तंज कसे थे। पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में टॉप पर रहने की होड़ में हनी सिंह (जो 2010 के दशक में ‘इंटरनेशनल’ स्टार बने) और करण औजला (नई जनरेशन का चेहरा) के बीच कॉम्पिटिशन नेचुरल है। हनी सिंह ने हाल के सालों में कमबैक किया है, जबकि करण औजला लगातार हिट गाने दे रहे हैं। दोनों के फैंस अकसर सोशल मीडिया पर बहस करते रहते हैं। करण औजला शो के दौरान परफॉर्मेंस देते हुए।- फाइल पंजाबी म्युजिक इंडस्ट्री में करण औजला के विवादों को जानिए… करण औजला और सिद्धू मूसेवाला से विवाद: पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में उस समय बड़ा विवाद देखने को मिला जब सिंगर करण औजला और सिद्धू मूसेवाला के बीच गीतों के जरिए टकराव शुरू हुआ। दोनों कलाकारों ने अपने-अपने गानों में एक-दूसरे पर निशाना साधा, जिसे फैंस ने “diss war” का नाम दिया। इस राइवलरी के चलते दोनों के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई। करण औजला के गानों में पुराने कलाकारों पर तंज: हाल के सालों में करण औजला के कुछ गानों की लाइनों को लेकर चर्चा हुई कि वे पुराने दौर के कलाकारों पर तंज कस रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स ने इन लाइनों को यो यो हनी सिंह से जोड़कर देखा, हालांकि औजला ने किसी का नाम लेकर कोई टिप्पणी नहीं की। इस मुद्दे को लेकर कोई सीधा विवाद सामने नहीं आया। लेकिन फैंस के बीच तुलना का दौर जारी रहा। करण औजला के गाने लीक होने से मचा बवाल: करण औजला उस समय नाराज हो गए, जब उनके कई अनरिलीज्ड गाने इंटरनेट पर लीक हो गए। इस पर उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कड़ी नाराजगी जताई और इसे कलाकारों के लिए नुकसानदायक बताया। उन्होंने फैंस से अपील की कि वे ऐसे लीक कंटेंट को बढ़ावा न दें। करण औजला के गानों के बोलों पर विवाद: करण औजला के कुछ गानों के बोलों को लेकर भी विवाद सामने आए हैं। आलोचकों का कहना है कि उनके गानों में हिंसा और आक्रामक भाषा का प्रयोग अधिक होता है। हालांकि उनके फैंस इसे उनकी स्टाइल और रियलिस्टिक एक्सप्रेशन बताते हैं। कुछ दिन
खांसी से लेकर पेट की समस्याओं तक, ये चीज़ है आपका नेचुरल इलाज, जानिए कब और कितना लेना फायदेमंद

Last Updated:March 20, 2026, 17:36 IST शहद सिर्फ मिठास बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुधार के लिए भी उपयोगी है. यह पेट, मेटाबॉलिज्म, रोग प्रतिरोधक क्षमता और खांसी जैसी छोटी-बड़ी समस्याओं में असरदार घरेलू उपाय है. सही मात्रा और शुद्ध शहद के सेवन से आप अपने शरीर को अंदर से मजबूत बना सकते हैं. शहद एक ऐसी प्राकृतिक चीज है, जिसे हम सिर्फ मिठास के लिए नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी इस्तेमाल करते हैं. यह न सिर्फ स्वाद बढ़ाता है, बल्कि शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में भी मदद करता है. आज के समय में भले ही कई तरह की आधुनिक दवाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन शहद का महत्व आज भी उतना ही बना हुआ है जितना पहले हुआ करता था. पहले के समय में जब दवाइयों की सुविधा नहीं थी, तब लोग अपने इलाज के लिए पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर रहते थे. शहद उन प्रमुख चीजों में से एक था, जिसका इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों में किया जाता था. गांव के बुजुर्ग राम सिंह बताते है कि हमारे गांवों और पहाड़ी इलाकों में आज भी बुजुर्ग शहद को एक प्राकृतिक दवाई मानते हैं और छोटी-छोटी समस्याओं के लिए इसका उपयोग करते हैं. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और गलत खान-पान के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं आम हो गई हैं. गैस, अपच और पेट में भारीपन जैसी समस्याएं अक्सर देखने को मिलती हैं. ऐसे में शहद एक आसान और असरदार घरेलू उपाय हो सकता है. अगर आप एक गिलास हल्के गर्म पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीते हैं, तो इससे पाचन क्रिया बेहतर होती है और पेट को आराम मिलता है. यह धीरे-धीरे गैस की समस्या को कम करने में मदद करता है और पेट को हल्का महसूस कराता है. Add News18 as Preferred Source on Google आज के समय में बहुत से लोग वजन बढ़ने की समस्या से परेशान हैं. ऐसे में शहद को अपनी दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है. सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है. जब मेटाबॉलिज्म सही तरीके से काम करता है, तो शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगती है. इसके साथ ही यह शरीर को ऊर्जा भी देता है, जिससे आप दिनभर एक्टिव महसूस करते हैं. शहद में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जैसे विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स. ये सभी तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं. अगर आप नियमित रूप से शहद का सेवन करते हैं, तो आपका शरीर बीमारियों से लड़ने में ज्यादा सक्षम हो जाता है. खासकर मौसम बदलने पर होने वाली सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं से बचाव में यह बहुत मददगार होता है. शहद का उपयोग लंबे समय से खांसी और गले की समस्याओं में किया जाता रहा है. अगर गले में खराश हो या लगातार खांसी आ रही हो, तो शहद एक बेहतरीन घरेलू उपाय है.एक चम्मच शहद में थोड़ा सा अदरक का रस मिलाकर लेने से गले को आराम मिलता है और खांसी में राहत मिलती है. यह गले की सूजन को कम करता है और गले को मुलायम बनाता है. शहद के फायदे तभी मिलते हैं, जब वह पूरी तरह से शुद्ध हो. आजकल बाजार में मिलावटी शहद भी बहुत आसानी से मिल जाता है, जिसमें चीनी या अन्य पदार्थ मिलाए जाते हैं.ऐसा शहद न सिर्फ बेअसर होता है, बल्कि शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है. इसलिए हमेशा कोशिश करें कि आप भरोसेमंद जगह से ही शहद खरीदें या फिर प्राकृतिक स्रोत से प्राप्त शहद का ही उपयोग करें. हालांकि शहद बहुत फायदेमंद है, लेकिन इसका अधिक सेवन करना सही नहीं है. इसमें प्राकृतिक शुगर होती है, इसलिए ज्यादा मात्रा में लेने से शरीर में शुगर का स्तर बढ़ सकता है.इसलिए रोजाना एक से दो चम्मच शहद का सेवन पर्याप्त माना जाता है. संतुलन बनाए रखना ही सबसे जरूरी है. First Published : March 20, 2026, 17:36 IST
Honey Singh’s Faith Connection: Neeleshwar Mahadev Temple Haridwar

नीलेश्वर महादेव के मंदिर में शिवलिंग पर दूध और दही अर्पित करते हनी सिंह। उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित प्राचीन नीलेश्वर महादेव मंदिर पंजाबी और बॉलीवुड सिंगर हनी सिंह का फेवरेट है। मंदिर के महंत हरिदास का दावा है कि सिंगर के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव और उनके म्यूजिक कमबैक में इस मंदिर की अहम भूमिका रही है। उनके अनुसार, . महंत बताते हैं कि कठिन दौर के बाद जब हनी सिंह ने यहां साधना और अभिषेक किया, तो उनके भीतर गहरा आध्यात्मिक परिवर्तन देखने को मिला। उनका कहना है कि महादेव की कृपा से सिंगर को मानसिक संतुलन, नई ऊर्जा और जीवन की नई दिशा मिली। महंत हरिदास के अनुसार, नीलेश्वर महादेव मंदिर में उन्हें जो आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा मिली, वैसा अनुभव उन्हें कहीं और नहीं हुआ और यही जुड़ाव उनके जीवन में स्थिरता और सकारात्मकता लेकर आया। हरिद्वार के नीलेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग। पहले 3 पॉइंट्स में नीलेश्वर मंदिर के बारे में जानिए नील पर्वत पर स्थित प्राचीन शिव धाम: हरिद्वार-नजीबाबाद रोड पर चंडी घाट के पास नील पर्वत क्षेत्र में स्थित नीलेश्वर महादेव मंदिर प्राचीन शिव धामों में गिना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यहां स्थित स्वयंभू शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा की जाती है। सुबह-शाम आरती होती है और देश-विदेश से श्रद्धालु यहां जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पौराणिक कथाओं और शिव परंपरा से जुड़ा स्थल: मंदिर के पुजारी राघव भारती के अनुसार, यह स्थान सतयुग काल से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि यहीं से भगवान शिव ने अपनी जटा से वीरभद्र को उत्पन्न कर दक्ष यज्ञ का विध्वंस कराया था। यह भी कहा जाता है कि समुद्र मंथन से निकला विष पीने के बाद भगवान शिव इसी क्षेत्र से नीलकंठ की ओर विश्राम के लिए गए, जिसके कारण पर्वत और गंगा का जल नीला पड़ गया और यह क्षेत्र नील पर्वत व नील गंगा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। विशेष पूजा परंपराएं और मनोकामना पूर्ति की मान्यता: नीलेश्वर महादेव मंदिर में गंगाजल और दूध से अभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि एक लोटा गंगाजल चढ़ाने से तीर्थफल की प्राप्ति होती है, सोमवार को पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जबकि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और पूर्णिमा पर अभिषेक करने से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। श्रद्धालु यहां तन-मन के कष्टों से मुक्ति और आध्यात्मिक शांति की कामना लेकर आते हैं। हनी सिंह कोरोना काल के बाद से लगातार इस मंदिर में आकर अभिषेक करते हैं। अब महंत के अनुसार समझिए हनी सिंह के लिए क्यों खास है मंदिर पहली बार अभिषेक में भावुक हुए हनी सिंह मंदिर के महंत हरिदास के अनुसार, जब हनी सिंह पहली बार नीलेश्वर महादेव मंदिर में अभिषेक करने पहुंचे तो वे बेहद भावुक हो गए थे। महंत बताते हैं कि उन्होंने पंजाबी रैपर से कहा था कि जो श्रद्धालु इस शिवलिंग को अपने हाथों में भर लेते हैं, उनके अवगुण दूर हो जाते हैं। महंत के अनुसार, जैसे ही सिंगर ने शिवलिंग को अपनी भुजाओं में भरा, उनकी आंखों से आंसू बहने लगे और वे गहरे आध्यात्मिक भाव में डूब गए। चार घंटे तक तल्लीन होकर किया अभिषेक महंत बताते हैं कि पहली पूजा के दौरान हनी सिंह लगभग चार से साढ़े चार घंटे तक एक ही आसन पर बैठकर अभिषेक करते रहे। उनके अनुसार, वह दृश्य ऐसा था मानो कोई भक्त लंबे समय बाद अपने आराध्य से मिला हो। महंत का कहना है कि उस साधना के बाद उनके भीतर आध्यात्मिक परिवर्तन स्पष्ट रूप से महसूस किया गया। महंत कहते हैं कि अभिषेक के दौरान हनी सिंह के अंदर दिव्य भक्ति भाव दिखता है। हर 90 दिन में अभिषेक, ऊर्जा का स्रोत मानते हैं महंत हरिदास के अनुसार, हनी सिंह अब हर तीन महीने में मंदिर आकर अभिषेक कराते हैं। उनका कहना है कि सिंगर स्वयं बताते हैं कि यदि यह अभिषेक समय पर न हो तो उनकी ऊर्जा कम होने लगती है, जबकि पूजा के बाद वे स्वयं को अत्यंत ऊर्जावान और सकारात्मक महसूस करते हैं। महादेव भक्ति से आया जीवन में परिवर्तन महंत का दावा है कि कठिन दौर के बाद जब हनी सिंह महादेव की शरण में आए, तो उनके जीवन में स्थिरता और सकारात्मकता आई। उनके अनुसार, आज सिंगर के चेहरे की मुस्कान, उनकी ओजस्वी वाणी और व्यक्तित्व में दिखाई देने वाला संतुलन महादेव की कृपा और जागृत भक्ति का परिणाम है। दुनिया देखी, पर ऐसी शांति कहीं नहीं मिली महंत हरिदास के मुताबिक, हनी सिंह ने उनसे कहा कि उन्होंने दुनिया देखी है, लेकिन नीलेश्वर महादेव मंदिर में बैठकर जो शांति, प्रेम और आध्यात्मिक अनुभव मिलता है, वैसा अनुभव उन्हें कहीं और नहीं हुआ। महंत का कहना है कि यही जुड़ाव उन्हें बार-बार इस धाम की ओर खींच लाता है। 2014 में गायब हुए, इंटरव्यू में बताई बाइपोलर डिसऑर्डर की जंग यो यो हनी सिंह 2014 के आसपास अचानक म्यूजिक इंडस्ट्री और सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए थे। उस समय वे करियर के शिखर पर थे, लेकिन इसके बाद न नए गाने आए, न लाइव शो और न ही मीडिया में उनकी मौजूदगी दिखाई दी। उनकी अनुपस्थिति को लेकर लंबे समय तक तरह-तरह की अटकलें लगती रहीं। बाद में एक इंटरव्यू में हनी सिंह ने खुलासा किया कि वे बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझ रहे थे। उन्होंने बताया कि यह दौर उनके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कठिन था, जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक इलाज और एकांत में रहना पड़ा। इसी चुनौतीपूर्ण दौर के बाद उन्होंने धीरे-धीरे खुद को संभाला और वर्षों बाद नए दृष्टिकोण के साथ संगीत जगत में वापसी की। 2021 में किया कमबैक, छवि पूरी तरह बदली 2021 के आसपास हनी सिंह ने फिर से म्यूजिक इंडस्ट्री में सक्रिय होना शुरू किया। नए गानों, लाइव परफॉर्मेंस और सार्वजनिक उपस्थितियों के जरिए उन्होंने वापसी की। यह वापसी केवल पेशेवर नहीं बल्कि एक बदले हुए व्यक्तित्व के साथ देखी गई। पहले जहां वे विवादों और पार्टी कल्चर से जुड़े नजर आते थे, वहीं अब वे अधिक शांत, संतुलित और आध्यात्मिक झुकाव वाले व्यक्तित्व के रूप में दिखाई देते हैं। महंत भी इस बदलाव को महादेव की भक्ति से जोड़ते हैं। नीलेश्वर







