Saturday, 01 Aug 2026 | 10:29 AM

Trending :

India to Get 100 Industrial Parks

India to Get 100 Industrial Parks

नई दिल्ली16 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को ‘भव्य (भारत औद्योगिक विकास योजना) योजना’ के दिशा-निर्देश लॉन्च कर दिए हैं। जिसके तहत सरकार देश भर में 100 इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की तैयारी कर रही है। इस योजना के लिए ₹33,660 करोड़ का वित्तीय परिव्यय यानी फाइनेंशियल आउटले तय किया गया है, जो राज्य सरकारों के साथ साझेदारी में प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क के जरिए मैन्युफैक्चरिंग और इन्वेस्टमेंट हब बनाएगी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्रीय कैबिनेट ने करीब दो महीने पहले इस योजना को मंजूरी दी थी। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि राज्य सरकारें औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध कराएंगी। अगले 4 महीनों में राज्यों से मांगे आवेदन, पहले फेज में 20 पार्कों की अर्जी आएगी केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि पहले दो महीनों में 20 इंडस्ट्रियल पार्कों के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। इसके बाद के दो महीनों में अन्य 30 पार्कों के लिए आवेदन लिए जाएंगे, जबकि बचे हुए 50 पार्कों को अगले फेज में शामिल किया जाएगा। सरकार अगले चार महीनों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) से आवेदन आमंत्रित कर रही है। केंद्र सरकार की योजना शुरुआत में 50 इंडस्ट्रियल पार्कों के लिए आवेदन हासिल करने की है, ताकि देश भर में इस योजना को तेजी से लागू किया जा सके। नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत होगा विकास इस योजना का उद्देश्य पहले से स्वीकृत जमीन, तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटीग्रेटेड सर्विसेज के साथ निवेश के लिए तैयार इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम बनाना है। इससे उद्योगों को अपना कामकाज जल्दी शुरू करने में मदद मिलेगी। इन पार्कों का विकास नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (NICDP) के स्ट्रक्चर के तहत राज्यों और प्राइवेट सेक्टर के प्लेयर्स के साथ मिलकर किया जाएगा। इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रति एकड़ ₹1 करोड़ तक की वित्तीय सहायता सरकार द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इन इंडस्ट्रियल पार्कों का आकार 100 से 1,000 एकड़ के बीच होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए सरकार प्रति एकड़ ₹1 करोड़ तक की वित्तीय सहायता देगी। इस सहायता के तहत आंतरिक सड़कें, अंडरग्राउंड यूटिलिटीज, ड्रेनेज सिस्टम, कॉमन ट्रीटमेंट फैसिलिटीज, वेयरहाउसिंग, टेस्टिंग लैब्स और श्रमिकों के लिए आवास की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पहाड़ी राज्यों के लिए 25 एकड़ जमीन पर भी इंडस्ट्रियल पार्क को मंजूरी दी जा सकती है। कनेक्टिविटी सुधारने के लिए बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को भी सपोर्ट केंद्र सरकार ने मौजूदा ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के साथ कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए प्रोजेक्ट कॉस्ट के 25 प्रतिशत तक बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट का प्रस्ताव भी दिया है। इस योजना के तहत प्रोजेक्ट का चयन एक चैलेंज-बेस्ड प्रोसेस के जरिए किया जाएगा, जो निवेश के लिए तैयार और रिफॉर्म-ओरिएंटेड प्रस्तावों पर केंद्रित होगा। राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और हरियाणा ने जताई रुचि केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो राज्य जमीन, पानी और बिजली जैसी बेहतर सुविधाएं देंगे, वे निवेशकों को ज्यादा आकर्षित कर सकते हैं। राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और हरियाणा ने इस योजना में रुचि दिखाई है। राज्यों के पास प्राइवेट सेक्टर के प्लेयर्स के साथ साझेदारी करके प्रस्ताव सौंपने का भी प्रावधान है, जिसके तहत केंद्र सरकार ₹50 लाख प्रति एकड़ की सहायता प्रदान करेगी। राज्यों को सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम बनाने के निर्देश जल्दी मंजूरी सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को स्पेशल पर्पज व्हीकल्स (SPVs) स्थापित करने, प्लानिंग अथॉरिटीज को नोटिफाई करने और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम बनाने के लिए कहा गया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने उम्मीद जताई है कि अगले तीन सालों में ये 50 पार्क पूरी तरह चालू (ऑपरेशनलाइज्ड) हो जाएंगे। पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत होगा काम ये इंडस्ट्रियल पार्क पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं। इनका फोकस मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, कुशल लास्ट-माइल एक्सेस और इंटीग्रेटेड अंडरग्राउंड यूटिलिटी कॉरिडोर्स पर होगा, ताकि मेंटेनेंस से जुड़ी बाधाओं को कम किया जा सके। सरकार ने कहा कि इन पार्कों में ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल रिसोर्स के उपयोग के प्रावधान भी शामिल होंगे। DPIIT के तहत NICDC संभालेगी जिम्मेदारी मार्च में जारी एक बयान के अनुसार, डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) के तहत नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NICDC) इस योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी संभालेगी। NICDC वर्तमान में 13 राज्यों में 20 इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स को लागू कर रही है और टेक्सटाइल मिनिस्ट्री के तहत सात पीएम मित्रा (PM MITRA) पार्कों के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी के रूप में भी काम कर रही है। क्लस्टर-बेस्ड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा सरकार का कहना है कि इस योजना से क्लस्टर-बेस्ड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे मैन्युफैक्चरर्स, सप्लायर्स और सर्विस प्रोवाइडर्स को एक-दूसरे के करीब काम करने का मौका मिलेगा, जिससे घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। क्या है प्लग-एंड-प्ले मॉडल और NICDC प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क: इसका मतलब है कि उद्योगों को जमीन, बिजली, पानी, सड़क और अन्य जरूरी मंजूरियों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। सरकार पहले से ही सारा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करके देगी, कंपनियों को बस अपनी मशीनें लगानी हैं और प्रोडक्शन शुरू करना है। इससे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिलता है। NICDC क्या है?: नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन भारत में औद्योगिक गलियारों के विकास की देखरेख करने वाली नोडल एजेंसी है। यह देश के लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए काम करती है। ये खबर भी पढ़ें… पेट्रोल 87 पैसे, डीजल 91 पैसे और महंगा: 9 दिन में दो बार बढ़ोतरी हो चुकी; पाकिस्तान में पेट्रोल 6 और डीजल 6.80 रुपए सस्ता देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर ₹99.51 प्रति लीटर पहुंच गया है। डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है। इसके दाम ₹92.49 पर पहुंच गए हैं। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में CNG की कीमतें ₹1 किलो बढ़ गई हैं। इस बदलाव के बाद दिल्ली में CNG अब ₹81.09 प्रति किलो मिलेगी। पिछले 9 दिन में यह तीसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले सरकार ने 15 मई को CNG के दाम ₹2 और फिर 18 मई को ₹1 बढ़ाए थे। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें

India Women Cricket Team Departs for T20 World Cup England 2026

India Women Cricket Team Departs for T20 World Cup England 2026

मुंबई13 मिनट पहले कॉपी लिंक इंग्लैंड के लिए रवाना होने से पहले टीम इंडिया को तिलक लगाता होटल स्टाफ। भारतीय महिला क्रिकेट टीम शनिवार को टी-20 वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने के लिए मुंबई से इंग्लैंड रवाना हो गई। फैंस ने ढोल-नगाड़ों के बीच प्लेयर्स को तिलक लगाकर खिलाड़ियों को विदाई दी। टीम हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में उतर रही है, जिन्होंने पिछले साल भारत को पहली बार विमेंस वनडे वर्ल्ड कप जिताया था। उस टीम की 11 प्लेयर्स स्क्वॉड का हिस्सा हैं। यह टीम वर्ल्ड कप से पहले इंग्लैंड के खिलाफ 3 मैचों की टी-20 सीरीज खेलेगी। जो लिमिटेड ओवर के ICC टूर्नामेंट की तैयारियों के लिहाज से अहम है। यह सीरीज 28 मार्च से शुरू हो रही है। मुंबई एयरपोर्ट में भारतीय महिला टीम की बस। मुंबई एयरपोर्ट में टीम बस से उतरतीं खिलाड़ी। टीम बस से उतरते हुए विकेटकीपर ऋचा घोष। टी-20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय महिला टीम हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, जेमिमा रोड्रिग्स, दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष (विकेटकीपर), भारती फुलमाली, श्री चरणी, यस्तिका भाटिया, नंदनी शर्मा, अरुंधति रेड्डी, क्रांति गौड़, रेणुका सिंह ठाकुर, श्रेयांका पाटिल और राधा यादव। भारत का पहला मैच पाकिस्तान से होगा भारत का पहला मैच पाकिस्तान से 14 जून को एजबेस्टन में खेला जाएगा। उसके बाद टीम इंडिया नीदरलैंड, साउथ अफ्रीका, बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया से खेलेगी। टूर्नामेंट में 12 टीमों को 6-6 के दो ग्रुपों में बांटा गया है। हर ग्रुप से 2 टीमों सेमीफाइनल में प्रवेश करेंगी। ऑस्ट्रेलिया सबसे सफल टीम रही विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप के इतिहास में ऑस्ट्रेलिया सबसे सफल टीम रही है। ऑस्ट्रेलिया ने अब तक रिकॉर्ड छह बार खिताब अपने नाम किया है और कई बार फाइनल तक पहुंचकर अपनी बादशाहत साबित की है। इसके अलावा इंग्लैंड ने 2009 में पहला एडिशन जीतकर इतिहास रचा, जबकि वेस्टइंडीज ने 2016 में खिताब जीता था। ——————————————— विमेंस क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… क्रांति की संघर्ष और सफलता की कहानी, पंड्या रोल मॉडल; लगातार दूसरा वर्ल्ड कप खेलेंगी मध्यप्रदेश के छोटे से गांव से निकलकर भारतीय विमेंस क्रिकेट टीम तक पहुंचने वाली तेज गेंदबाज क्रांति की कहानी संघर्ष, मेहनत और जुनून की मिसाल है। टेनिस बॉल क्रिकेट से शुरुआत करने वाली क्रांति लगातार दूसरे वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही हैं। उन्होंने अपने संघर्ष, परिवार के सपोर्ट, टीम के माहौल, रोल मॉडल हार्दिक पंड्या और गांव की लड़कियों में आए बदलाव पर दैनिक भास्कर से बात की। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

India Women Cricket Team Departs for T20 World Cup England 2026

India Women Cricket Team Departs for T20 World Cup England 2026

मुंबई29 मिनट पहले कॉपी लिंक इंग्लैंड के लिए रवाना होने से पहले टीम इंडिया को तिलक लगाता होटल स्टाफ। भारतीय महिला क्रिकेट टीम शनिवार को टी-20 वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने के लिए मुंबई से इंग्लैंड रवाना हो गई। फैंस ने ढोल-नगाड़ों के बीच प्लेयर्स को तिलक लगाकर खिलाड़ियों को विदाई दी। टीम हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में उतर रही है, जिन्होंने पिछले साल भारत को पहली बार विमेंस वनडे वर्ल्ड कप जिताया था। उस टीम की 11 प्लेयर्स स्क्वॉड का हिस्सा हैं। यह टीम वर्ल्ड कप से पहले इंग्लैंड के खिलाफ 3 मैचों की टी-20 सीरीज खेलेगी। जो लिमिटेड ओवर के ICC टूर्नामेंट की तैयारियों के लिहाज से अहम है। यह सीरीज 28 मार्च से शुरू हो रही है। मुंबई एयरपोर्ट में भारतीय महिला टीम की बस। मुंबई एयरपोर्ट में टीम बस से उतरतीं खिलाड़ी। टीम बस से उतरते हुए विकेटकीपर ऋचा घोष। टी-20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय महिला टीम हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, जेमिमा रोड्रिग्स, दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष (विकेटकीपर), भारती फुलमाली, श्री चरणी, यस्तिका भाटिया, नंदनी शर्मा, अरुंधति रेड्डी, क्रांति गौड़, रेणुका सिंह ठाकुर, श्रेयांका पाटिल और राधा यादव। भारत का पहला मैच पाकिस्तान से होगा भारत का पहला मैच पाकिस्तान से 14 जून को एजबेस्टन में खेला जाएगा। उसके बाद टीम इंडिया नीदरलैंड, साउथ अफ्रीका, बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया से खेलेगी। टूर्नामेंट में 12 टीमों को 6-6 के दो ग्रुपों में बांटा गया है। हर ग्रुप से 2 टीमों सेमीफाइनल में प्रवेश करेंगी। ऑस्ट्रेलिया सबसे सफल टीम रही विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप के इतिहास में ऑस्ट्रेलिया सबसे सफल टीम रही है। ऑस्ट्रेलिया ने अब तक रिकॉर्ड छह बार खिताब अपने नाम किया है और कई बार फाइनल तक पहुंचकर अपनी बादशाहत साबित की है। इसके अलावा इंग्लैंड ने 2009 में पहला एडिशन जीतकर इतिहास रचा, जबकि वेस्टइंडीज ने 2016 में खिताब जीता था। ——————————————— विमेंस क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… क्रांति की संघर्ष और सफलता की कहानी, पंड्या रोल मॉडल; लगातार दूसरा वर्ल्ड कप खेलेंगी मध्यप्रदेश के छोटे से गांव से निकलकर भारतीय विमेंस क्रिकेट टीम तक पहुंचने वाली तेज गेंदबाज क्रांति की कहानी संघर्ष, मेहनत और जुनून की मिसाल है। टेनिस बॉल क्रिकेट से शुरुआत करने वाली क्रांति लगातार दूसरे वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही हैं। उन्होंने अपने संघर्ष, परिवार के सपोर्ट, टीम के माहौल, रोल मॉडल हार्दिक पंड्या और गांव की लड़कियों में आए बदलाव पर दैनिक भास्कर से बात की। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Crude Oil Prices Jump Amid Middle East Crisis; Petrol, Diesel Rates Rise in India

Crude Oil Prices Jump Amid Middle East Crisis; Petrol, Diesel Rates Rise in India

Hindi News Business Crude Oil Prices Jump Amid Middle East Crisis; Petrol, Diesel Rates Rise In India नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर ₹99.51 प्रति लीटर पहुंच गया है। डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है। इसके दाम ₹92.49 पर पहुंच गए हैं। 10 दिन में तीसरी बार बढ़ीं कीमतें यह 10 दिन में ईंधन की कीमतों में तीसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले इसी हफ्ते पेट्रोल और डीजल के दामों में एवरेज 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। वहीं, उसके कुछ दिन पहले भी कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। यहाँ आपके द्वारा दिए गए डेटा के आधार पर पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों, पुरानी कीमतों और अंतर (बढ़ोतरी) को दर्शाने वाली टेबल दी गई है: पेट्रोल की कीमतों में बदलाव शहर नए दाम पुरानी कीमतें अंतर (बढ़ोतरी) दिल्ली 99.51 98.64 +0.87 कोलकाता 110.64 109.70 +0.94 मुंबई 108.49 107.59 +0.90 चेन्नई 105.31 104.49 +0.82 डीजल की कीमतों में बदलाव शहर नए दाम पुरानी कीमतें अंतर (बढ़ोतरी) दिल्ली 92.49 91.58 +0.91 कोलकाता 97.02 96.07 +0.95 मुंबई 95.02 94.08 +0.94 चेन्नई 96.98 96.11 +0.87 अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं… मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे। खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी। बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। बेस प्राइस से चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ यानी डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं, जिसे हम आसान भाषा में समझ सकते हैं: 1. कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है। 2. रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है। 3. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देशभर में सभी राज्यों के लिए समान होती है। 4. डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है। 5. राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसीलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जाती 2024 से दाम नहीं बदले थे, चुनाव से पहले कटौती हुई थी देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मार्च 2024 से स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले सरकार ने कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती कर जनता को राहत दी थी। हालांकि, तकनीकी रूप से भारत में ईंधन की कीमतें विनियमित हैं और कंपनियां अंतरराष्ट्रीय क्रूड की 15 दिनों की औसत कीमत के आधार पर हर दिन रेट बदल सकती हैं, लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण इन्हें लंबे समय तक नहीं बदला गया। तेल कंपनियों को हर महीने 30 हजार करोड़ का घाटा हो रहा था सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं । पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है । पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटाई थी इससे पहले सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए की कटौती की थी। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर ₹3 रुपए, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई थी। केंद्र सरकार की ओर से एक लीटर पेट्रोल पर कुल 21.90 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी। स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्टूटी घटने के बाद यह 11.90 रुपए रह गई थी। इसी तरह, एक लीटर डीजल पर कुल सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी 17.8 रुपए से घटकर 7.8 रुपए पर आ गई थी। सरकार का ये फैसला पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए था। इस निर्णय की वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे। पूरी खबर पढ़ें… पीएम मोदी ने कहा था- ईंधन का इस्तेमाल कम करें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के सावधानीपूर्वक उपयोग का सुझाव दिया था। पीएम ने कहा था कि आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए। हमें आयातित पेट्रो उत्पादों का उपयोग केवल जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए। इससे न केवल विदेशी मुद्रा बचेगी,

विजय शंकर ने IPL और डोमेस्टिक से संन्यास लिया:बोले- क्रिकेट ही मेरी जिंदगी: 2019 वर्ल्ड कप में पहली गेंद पर विकेट लिया था

विजय शंकर ने IPL और डोमेस्टिक से संन्यास लिया:बोले- क्रिकेट ही मेरी जिंदगी: 2019 वर्ल्ड कप में पहली गेंद पर विकेट लिया था

भारतीय क्रिकेटर विजय शंकर ने घरेलू क्रिकेट और IPL से संन्यास लेने का ऐलान किया है। शुक्रवार को उन्होंने X पर एक भावुक पोस्ट डाला। 25 साल लंबे करियर के बाद उन्होंने बीसीसीआई, परिवार और साथ देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया। पेसर ऑलराउंडर विजय ने साफ किया है कि वे पूरी तरह क्रिकेट नहीं छोड़ रहे हैं और नए विकल्प के साथ क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे। विजय बोले- ‘क्रिकेट ही मेरी जिंदगी है’ विजय ने लिखा कि क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जिंदगी रही है। उन्होंने नागपुर में भारत के 500वें वनडे मैच में आखिरी ओवर फेंकने और 2019 वर्ल्ड कप में पहली गेंद पर विकेट लेने को सबसे यादगार पल बताया। विजय ने बताया कि करियर के दौरान उन्हें भारी नफरत और आलोचना का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा इसे नजरअंदाज कर आगे बढ़ना चुना। उन्होंने BCCI, IPL टीमों और अपनी घरेलू टीम तमिलनाडू क्रिकेट को धन्यवाद कहा। उन्होंने भारतीय टीम के लिए खेलने को सबसे गर्व भरा पल बताया है। फर्स्ट क्लास में 9 हजार रन, 150+ विकेट लिए तमिलनाडू के विजय ने 10 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरु किया था। उन्होंने अंडर-13 से लेकर सीनियर टीम तक अपना ज्यादातर क्रिकेट तमिलनाडु के लिए खेला। उन्होंने 77 फर्स्ट क्लास मैच में 4253 रन बनाए और 43 विकेट लिए। लिस्ट ए में 112 मैचों में 2790 रन और 73 विकेट, जबकि 159 टी20 मैचों में 2583 रन और 38 विकेट उनके नाम रहे। भारत के लिए दूसरे ही टी20 में ‘मैन ऑफ द मैच’ बने विजय को 2018 में निदहास टी20 ट्रॉफी के लिए भारतीय टीम में चुना गया। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया, जबकि दूसरे ही टी20 में बांग्लादेश के खिलाफ 2 विकेट लेने के लिए मैन ऑफ द मैच चुने गए। विजय ने जनवरी 2019 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे डेब्यू किया। उन्होंने 12 वनडे और 9 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। भारत के लिए 2019 वर्ल्ड कप खेले विजय को 2019 वर्ल्ड कप में नंबर-4 बल्लेबाज और उपयोगी मीडियम पेसर के तौर पर चुना गया। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ टूर्नामेंट की पहली ही गेंद पर इमाम उल हक का विकेट लिया। आईपीएल में उनका सफर 2013 में चेन्नई सुपर किंग्स से शुरू हुआ। उन्होंने गुजरात टाइटंस, सनराइजर्स हैदराबाद, दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेला। 2022 में गुजरात टाइटंस की ट्रॉफी जीत वाली टीम का हिस्सा रहे। उन्होंने 2023 में 301 रन बनाए, जो उनका बेस्ट सीजन रहा। ——————————— स्पोर्ट्स की ये खबर भी पढ़ें… ऑस्ट्रेलिया वनडे सीरीज के लिए पाकिस्तान टीम घोषित:बाबर-शादाब और नसीम की वापसी; रिजवान सहित 6 खिलाड़ियों को बाहर किया गया पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज के लिए 16 सदस्यीय टीम घोषित कर दी है। टीम में सीनियर बल्लेबाज बाबर आजम, ऑलराउंडर शादाब खान और तेज गेंदबाज नसीम शाह की वापसी हुई है। यह तीनों खिलाड़ी बांग्लादेश दौरे वाली व्हाइट बॉल टीम में शामिल नहीं थे। सीरीज 30 मई से रावलपिंडी में शुरू होगी। पुरी खबर पढ़ें..

क्रिकेटर विजय शंकर ने IPL और डोमेस्टिक से संन्यास लिया:बोले- क्रिकेट ही मेरी जिंदगी: 2019 वर्ल्ड कप में पहली गेंद पर विकेट लिया था

क्रिकेटर विजय शंकर ने IPL और डोमेस्टिक से संन्यास लिया:बोले- क्रिकेट ही मेरी जिंदगी: 2019 वर्ल्ड कप में पहली गेंद पर विकेट लिया था

भारतीय क्रिकेटर विजय शंकर ने घरेलू क्रिकेट और IPL से संन्यास लेने का ऐलान किया है। शुक्रवार को उन्होंने X पर एक भावुक पोस्ट डाला। 25 साल लंबे करियर के बाद उन्होंने बीसीसीआई, परिवार और साथ देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया। पेसर ऑलराउंडर विजय ने साफ किया है कि वे पूरी तरह क्रिकेट नहीं छोड़ रहे हैं और नए विकल्प के साथ क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे। विजय बोले- ‘क्रिकेट ही मेरी जिंदगी है’ विजय ने लिखा कि क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जिंदगी रही है। उन्होंने नागपुर में भारत के 500वें वनडे मैच में आखिरी ओवर फेंकने और 2019 वर्ल्ड कप में पहली गेंद पर विकेट लेने को सबसे यादगार पल बताया। उन्होंने BCCI, IPL टीमों और अपनी घरेलू टीम तमिलनाडू क्रिकेट को धन्यवाद कहा। उन्होंने भारतीय टीम के लिए खेलने को सबसे गर्व भरा पल बताया है। फर्स्ट क्लास में 9 हजार रन, 150+ विकेट लिए तमिलनाडू के विजय ने 10 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरु किया था। उन्होंने अंडर-13 से लेकर सीनियर टीम तक अपना ज्यादातर क्रिकेट तमिलनाडु के लिए खेला। उन्होंने 77 फर्स्ट क्लास मैच में 4253 रन बनाए और 43 विकेट लिए। लिस्ट ए में 112 मैचों में 2790 रन और 73 विकेट, जबकि 159 टी20 मैचों में 2583 रन और 38 विकेट उनके नाम रहे। भारत के लिए दूसरे ही टी20 में ‘मैन ऑफ द मैच’ बने विजय को 2018 में निदहास टी20 ट्रॉफी के लिए भारतीय टीम में चुना गया। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया, जबकि दूसरे ही टी20 में बांग्लादेश के खिलाफ 2 विकेट लेने के लिए मैन ऑफ द मैच चुने गए। विजय ने जनवरी 2019 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे डेब्यू किया। उन्होंने 12 वनडे और 9 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। उन्होंने करियर के दौरान मिली नफरत और आलोचना पर कहा कि उन्होंने हमेशा इसे नजरअंदाज कर आगे बढ़ना चुना। भारत के लिए 2019 वर्ल्ड कप खेले विजय को 2019 वर्ल्ड कप में नंबर-4 बल्लेबाज और उपयोगी मीडियम पेसर के तौर पर चुना गया। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ टूर्नामेंट की पहली ही गेंद पर इमाम उल हक का विकेट लिया। आईपीएल में उनका सफर 2013 में चेन्नई सुपर किंग्स से शुरू हुआ। उन्होंने गुजरात टाइटंस, सनराइजर्स हैदराबाद, दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेला। 2022 में गुजरात टाइटंस की ट्रॉफी जीत वाली टीम का हिस्सा रहे। उन्होंने 2023 में 301 रन बनाए, जो उनका बेस्ट सीजन रहा। ——————————— स्पोर्ट्स की ये खबर भी पढ़ें… ऑस्ट्रेलिया वनडे सीरीज के लिए पाकिस्तान टीम घोषित:बाबर-शादाब और नसीम की वापसी; रिजवान सहित 6 खिलाड़ियों को बाहर किया गया पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज के लिए 16 सदस्यीय टीम घोषित कर दी है। टीम में सीनियर बल्लेबाज बाबर आजम, ऑलराउंडर शादाब खान और तेज गेंदबाज नसीम शाह की वापसी हुई है। यह तीनों खिलाड़ी बांग्लादेश दौरे वाली व्हाइट बॉल टीम में शामिल नहीं थे। सीरीज 30 मई से रावलपिंडी में शुरू होगी। पुरी खबर पढ़ें..

India & South Korea to Develop Laser Weapon System

India & South Korea to Develop Laser Weapon System

Hindi News Career India & South Korea To Develop Laser Weapon System | Pragati Military Exercise 12 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 1. भारत और साउथ कोरिया के बीच MoU साइन 20 मई को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने साउथ कोरिया की राजधानी सियोल में रक्षामंत्री अहं ग्यु-बैक के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस वार्ता में भारत और साउथ कोरिया ने रक्षा और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए MoU पर साइन किया। इस MoU में सेल्फ प्रोपेल्ड एयर डिफेंस सिस्टम और एनर्जी एंड लेजर वेपन सिस्टम को लेकर समझौते हुए। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की ये 3 दिनों की यात्रा इंडो-पेसिफिक सिक्योरिटी और समुद्री स्थिरता में सहयोग बढ़ाने के लिए है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सियोल में भारत-कोरिया डिफेंस इंडस्ट्री बिजनेस समिट की अध्यक्षता की। नेशनल (NATIONAL) 2. मेघालय में 13 देशों का सैन्य अभ्यास PRAGATI शुरू 20 मई को मेघालय में 13 देशों का संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘PRAGATI’ शुरू हुआ। PRAGATI का पूरा नाम ‘पार्टनरशिप ऑफ रीजनल आर्मीज फॉर ग्रोथ एंड ट्रांसफॉर्मेशन इन द इंडियन ओशियन रीजन’ है। PRAGATI सैन्य अभ्यास मेघालय के उमरोई सैन्य स्टेशन में शुरू हुआ है और ये 30 मई तक चलेगा। सैन्य अभ्यास में भारत के अलावा 12 मित्र देश- भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम शामिल हैं। सैन्य अभ्यास PRAGATI का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद विरोधी अभियानों और आपदा के समय बेहतर प्रबंधन में आपसी समन्वय को बढ़ाना है। इस सैन्य अभ्यास में जंगल वॉरफेयर, हेलीबोर्न ऑपरेशन्स और फील्ड एक्ससाइज की जाएगी। सैन्य अभ्यास PRAGATI में सभी सेनाएं अपने आधुनिक वॉर सिस्टम और टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन भी करेंगी। 3. भारत और UAE का द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर पहुंचा 20 मई को भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया। UAE अब भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया है। भारत और UAE ने 2032 तक 200 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य रखा है। भारत में UAE के राजदूत अब्दुलनासेर अल्सहाली ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी। दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) भी लागू हुआ। भारत और UAE के बीच नॉन ऑइल ट्रेड यानी तेल के अलावा भी व्यापार में भारी बढ़त आई है। भारत UAE से पेट्रोलियम, सोना और कीमती रत्न आयात करता है। पीएम मोदी ने 15 मई को UAE के दौरे में ऊर्जा क्षेत्र सहित कई रणनीतिक समझौतों पर साइन किए थे। 4. लद्दाख ने पर्यटन क्षेत्र को इंडस्ट्री का दर्जा दिया 21 मई को लद्दाख सरकार ने लद्दाख हॉस्पिटैलिटी सेक्‍टर को इंडस्ट्री का दर्जा देने का ऐलान किया। लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने पर्यटन विभाग के साथ रजिस्टर्ड होटलों और गेस्ट हाउसों को ‘उद्योग’ का दर्जा देने की मंजूरी दी। ये आदेश 1 जून, 2026 से पूरे केंद्र शासित प्रदेश में आधिकारिक रूप से प्रभावी होगा। इस फैसले से लद्दाख के 1,257 रजिस्टर्ड होटल और गेस्ट हाउस को सीधा फायदा मिलेगा। इसमें से लेह में 1,078 और कारगिल में 179 होटल और गेस्ट हाउस हैं। इंडस्ट्रियल सेक्टर होने के बाद होटल और गेस्ट हाउस मालिकों को इंडस्ट्रियल रेट्स पर बिजली और पानी की सुविधा मिल सकेगी। इंडस्ट्रियल सेक्टर में आने से इस सेक्टर से जुड़े बिजनेस को अब इंडस्ट्रियल सब्सिडी और टैक्स में फायदा मिलेगा। लद्दाख के टूरिज्म एंड कल्चर डिपार्टमेंट को इस योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल विभाग नॉमिनेट किया गया है। लद्दाख 31 अक्टूबर 2019 को भारत का केंद्र शासित प्रदेश बना। शुरुआत में इसमें केवल 2 जिले, लेह और कारगिल थे। 27 अप्रैल को 5 नए जिले जंस्कार, द्रास, शाम, नुब्रा और चांगथांग बनाए गए। लद्दाख के इंडस्ट्रियल सेक्टर में आने से होमस्टे और छोटे पर्यटन का विस्तार करना आसान होगा। बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए अब बैंकों से लोन लेना आसान होगा। लद्दाख इंडस्ट्री में आने के बाद प्रॉपर्टी टैक्स में भी पूरी तरह छूट दी जाएगी। निधन (DEATH) 5. केरलम के सीनियर जर्नलिस्ट के.जी. परमेश्वरन नायर का निधन 20 मई को केरलम के सीनियर जर्नलिस्ट के.जी. परमेश्वरन नायर का निधन हो गया। वे 94 साल के थे। नायर 35 सालों तक ‘केरल कौमुदी’ दैनिक समाचार पत्र से जुड़े रहे। केरल कौमुदी में शामिल होने से पहले नायर ने कौमुदी वीकली के साथ करियर शुरू किया था। नायर को केरलम विधानसभा की बेहतरीन रिपोर्टिंग और राजनीतिक पत्रकारिता के लिए जाना जाता था। नायर तिरुवनंतपुरम प्रेस क्लब के अध्यक्ष भी रहे और पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए 13 प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित हुए। नायर को स्वदेशाभिमानी रामकृष्ण पिल्लई अवार्ड और सर्वश्रेष्ठ विधायी रिपोर्टिंग के लिए जी. कार्तिकेयन मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित किया गया था। नायर को ये दो प्रमुख पुरस्कार भारत के पूर्व राष्ट्रपतियों डॉ. के.आर. नारायणन और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने व्यक्तिगत रूप से दिए थे। जर्नलिस्ट के.जी. परमेश्वरन नायर ने ‘केरल नियमसभा:’ और ‘चरित्रवुम धर्मवुम’ (केरल विधानसभा: इतिहास और कर्तव्य) समेत कई किताबें लिखीं। 6. केरलम ने देश का पहला AI पोर्टफोलियो बनाने की घोषणा की 20 मई को केरलम सरकार ने ‘AI फॉर गवर्नेंस’ के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पोर्टफोलियो बनाने की घोषणा की है। ये भारत का पहला AI गवर्नेंस इनिशिएटिव होगा। सरकार ने ‘इंडिया AI मिशन’ और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEITy) के तहत राज्य में दो AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (AI-CoEs) बनाने की घोषणा की। राज्य के उद्योग मंत्री पी. के. कुन्हालीकुट्टी को भारत के पहले AI इनिशिएटिव का कार्यभार सौंपा गया है। पहला AI सेंटर ‘बायो-AI’ पर फोकस करेगा। केरल स्टार्टअप मिशन इसे कोच्चि के डिजिटल हब में स्थापित करेगा। दूसरा AI सेंटर जनरल-पर्पज AI सेंटर डिजिटल यूनिवर्सिटी तिरुवनंतपुरम में काम करेगा। दोनों प्रोजेक्ट्स को इंडिया AI मिशन के ‘स्टार्टअप फाइनेंसिंग पिलर’ के तहत मंजूरी मिली है। हर सेंटर के लिए 20 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है। बायो-AI सेंटर ‘नेचर मीट्स कंप्यूट’ थीम पर काम करेगा। इसमें केरल की जैव विविधता, आयुर्वेदिक ज्ञान और जीनोमिक्स रिसर्च को AI टेक्नोलॉजी से जोड़ा जाएगा। AI टूल्स के जरिए 40 हजार से ज्यादा मसाला किसानों की मदद करने और उनकी आय 20% तक बढ़ाने

Maruti Suzuki India Car Price Hike

Maruti Suzuki India Car Price Hike

Hindi News Tech auto Maruti Suzuki India Car Price Hike | New Rates From June 2026 Due To Rising Input Cost नई दिल्ली34 मिनट पहले कॉपी लिंक देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने अपने पैसेंजर व्हीकल्स (PV) की कीमतों में ₹30,000 तक की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। कंपनी की ओर से बढ़ाई गई ये नई कीमतें जून 2026 से प्रभावी होंगी। लगातार बढ़ रही इनपुट कॉस्ट यानी लागत के कारण कंपनी ने यह फैसला किया है। मारुति के अनुसार, पोर्टफोलियो के सभी मॉडल्स पर कीमतों में यह बढ़ोतरी लागू होगी। हालांकि, किस कार के दाम कितने बढ़ेंगे, यह उसके मॉडल और वेरिएंट पर निर्भर करेगा। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में यह जानकारी दी है। एरिना-नेक्सा के सभी मॉडल्स के प्राइस बढ़ेंगे कंपनी अपने वाहनों की बिक्री दो अलग-अलग डीलरशिप चैनल्स के जरिए करती है, जिनमें एरिना और नेक्सा शामिल हैं। जून से इन दोनों ही चैनल्स से बिकने वाली कारें महंगी हो जाएंगी। एरिना मॉडल्स: इसके तहत आने वाली ऑल्टो K10, एस-प्रेसो, सेलेरियो, वैगनआर, ईको, स्विफ्ट, डिजायर, अर्टिगा, ब्रेजा और विक्टोरिस की कीमतों में बदलाव होगा। नेक्सा मॉडल्स: प्रीमियम चैनल नेक्सा के तहत बिकने वाली बलेनो, फ्रॉन्क्स, ग्रैंड विटारा, जिम्नी, XL6, इन्विक्टो और हाल ही में लॉन्च की गई इलेक्ट्रिक कार- ई विटारा के दाम भी बढ़ जाएंगे। कंपनी के लागत कम करने के प्रयास विफल ब्रेजा बनाने वाली इस कंपनी ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से लागत के प्रभाव को कम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। कंपनी ने इसके लिए कई कॉस्ट रिडक्शन (लागत कटौती) उपाय भी अपनाए, ताकि ग्राहकों पर इसका बोझ न पड़े। हालांकि, बाजार में महंगाई का दबाव काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है और प्रतिकूल लागत माहौल लगातार बना हुआ है। ग्राहकों पर कम से कम असर डालने की कोशिश कंपनी ने अपनी फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के कारण बढ़ी हुई लागत का एक हिस्सा बाजार पर डालना अब जरूरी हो गया था। इसके बावजूद कंपनी ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि इस प्राइस हाइक का आम ग्राहकों पर कम से कम असर पड़े। 1 साल से ज्यादा समय बाद बढ़ रहे हैं दाम मारुति सुजुकी ने इससे पहले आखिरी बार अप्रैल 2025 में अपनी कारों की कीमतें बढ़ाई थीं। उस समय कंपनी ने अलग-अलग मॉडल्स के दाम में ₹62,000 तक की बढ़ोतरी की थी। अब करीब 1 साल से भी ज्यादा समय के अंतराल के बाद कंपनी ने दोबारा कीमतें बढ़ाने की घोषणा की है। इस बीच मास-मार्केट और लग्जरी सेगमेंट की कई अन्य कार कंपनियां जनवरी 2026 में ही अपने वाहनों के दाम बढ़ा चुकी हैं चौथी तिमाही में मुनाफा ₹3,659 करोड़ रहा मारुति सुजुकी इंडिया ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 52,946 करोड़ रुपए की कुल कमाई की। यह पिछले साल के मुकाबले 25% बढ़ी है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने 42,431 करोड़ रुपए की कमाई की थी। इसी तिमाही में कंपनी ने 6.76 लाख कारें बेचीं। कुल कमाई में से सैलरी, टैक्स, कच्चे माल की कीमत जैसे खर्चे निकाल दें तो कंपनी के पास 3,659 करोड़ रुपए शुद्ध मुनाफे (नेट प्रॉफिट) के रूप में बचे। यह 2025 की जनवरी-मार्च तिमाही से 6.44% कम रहा है। पिछले साल कंपनी को 3,911 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। रेवेन्यू 28.20% बढ़कर ₹52,462 करोड़ रहा चौथी तिमाही में कंपनी को प्रोडक्ट और सर्विस बेचकर 52,462 करोड़ रुपए का राजस्व यानी रेवेन्यू हासिल हुआ। सालाना आधार पर यह 28.20% बढ़ा है। जनवरी-मार्च 2025 में कंपनी ने 40,920 करोड़ रुपए का रेवेन्यू जनरेट किया था। चौथी तिमाही में गाड़ियों की बिक्री 11.8% बढ़ी चौथी तिमाही में मारुति सुजुकी ने कुल 6,76,209 गाड़ियां बेचीं। घरेलू मार्केट में कंपनी की सेल इस दौरान सालाना आधार पर 3.7% बढ़ी, जबकि एक्सपोर्ट 61.3% ज्यादा रहा। इसके चलते कंपनी की सालाना आधार पर ओवरऑल सेल्स ग्रोथ 11.8% रही। डोमेस्टिक मार्केट में कंपनी ने 5,38,994 गाड़ियां बेचीं, जबकि 1,37,215 गाड़ियों को एक्सपोर्ट किया। यह कंपनी का ऑल-टाइम-हाई एक्सपोर्ट है। 1982 में बनी थी मारुति सुजुकी इंडिया मारुति सुजुकी की स्थापना 24 फरवरी 1981 को भारत सरकार के स्वामित्व में मारुति इंडस्ट्रीज लिमिटेड रूप में हुई थी। 1982 में कंपनी ने जापान की सुजुकी कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर जॉइंट वेंचर ‘मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड’ बनाई। भारतीयों के लिए पहली बजट कार 1983 में मारुति 800 लॉन्च हुई। 47,500 रुपए की एक्स शोरूम कीमत पर कंपनी ने देश के एक बड़े तबके को कार खरीदने के लिए सक्षम बनाया था। मारुति सुजुकी पिछले 40 साल में देश में 3 करोड़ से ज्यादा गाड़ियां बेच चुकी है। रेगुलेटरी फाइलिंग और इनपुट कॉस्ट क्या होती है? रेगुलेटरी फाइलिंग: शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे अपने किसी भी बड़े बिजनेस फैसले, मुनाफे, नुकसान या कीमतों में बदलाव की जानकारी ‘सेबी’ या स्टॉक एक्सचेंज को दें। इसी आधिकारिक दस्तावेज को रेगुलेटरी फाइलिंग कहते हैं। इनपुट कॉस्ट: किसी भी कार को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (जैसे स्टील, प्लास्टिक, एल्युमिनियम, रबर और इलेक्ट्रॉनिक्स) की कुल लागत को इनपुट कॉस्ट कहा जाता है। जब अंतरराष्ट्रीय या घरेलू बाजार में ये चीजें महंगी होती हैं, तो गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट भी बढ़ जाती है। ये खबर भी पढ़ें… ओप्पो रेनो 15 प्रो मिनी रिव्यू: छोटे साइज के फोन में 200MP कैमरा और 6200mAh बैटरी; जानें सभी फीचर्स ओप्पो ने मार्केट में अपनी नई रेनो 15 सीरीज के साथ कॉम्पैक्ट फ्लैगशिप रेनो 15 प्रो मिनी पेश किया है, जिसमें प्रीमियम डिजाइन और जबरदस्त पावर है. इसमें 6.32 इंच की 1.5K एमोलेड डिस्प्ले और फ्लैगशिप डाइमेंसिटी 8450 प्रोसेसर दिया गया है जो गेमिंग और मल्टीटास्किंग को बेहद स्मूथ बनाता है। इसके 12GB रैम और 256GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत ₹62,999 जबकि 512GB मॉडल की कीमत ₹67,999 है। चलिए जानते हैं इसमें और क्या खास है… पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

देश का प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विज्ञापन घट रहे हैं, खर्च बढ़ रहा है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की वजह से रेडियो की कमाई पर असर पड़ रहा है। ऐसे में रेडियो कंपनियां सरकार से नियमों में कुछ बड़े बदलाव चाहती हैं। इंडस्ट्री एक्स्पर्ट्स का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में और FM स्टेशन बंद हो सकते हैं। वहीं सही फैसले होने पर सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है और नए रोजगार के साथ स्थानीय कंटेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। रेडियो कंपनियों की सरकार से 5 बड़ी अपेक्षाएं 1. FM रेडियो को न्यूज प्रसारण की अनुमति मिले भारत में प्राइवेट FM रेडियो चैनलों को स्वतंत्र रूप से न्यूज प्रसारण की इजाजत नहीं है। रेडियो कंपनियों का कहना है कि सिर्फ गानों के भरोसे अब ग्लोबल म्यूजिक और स्ट्रीमिंग ऐप्स से मुकाबला करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में न्यूज का प्रसारण रेडियो को नई पहचान दे सकता है। कंपनियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना किसी कंट्रोल के लाखों लोग न्यूज कंटेंट बना रहे हैं, जबकि FM रेडियो पहले से तय नियमों के तहत काम करता है। 2. 2030 के बाद लाइसेंस रिन्यूअल बाजार के हिसाब से हो रेडियो कंपनियों का कहना है कि पुराना ऑक्शन मॉडल अब मौजूदा बाजार के हिसाब से फिट नहीं बैठता। विज्ञापन बाजार बदल चुका है, इसलिए 2030 के बाद FM फेज-3 लाइसेंस का रिन्यूअल बाजार के हिसाब से तय कीमतों पर किया जाना चाहिए। 3. एनुअल लाइसेंस फीस खत्म हो रेडियो सेक्टर का कहना है कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। ऐसे में कंटेंट, टेक्नोलॉजी और नए शहरों में विस्तार के लिए निवेश करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए एनुअल लाइसेंस फीस खत्म करने की मांग की गई है। 4. GST 18% से घटाकर 5% किया जाए रेडियो कंपनियों की मांग है कि FM सेक्टर पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% किया जाए। कंपनियों का कहना है कि इससे रेडियो को दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले टिके रहने में मदद मिलेगी। 5. स्मार्टफोन में FM फीचर जरूरी हो आजकल आने वाले ज्यादातर स्मार्टफोन में FM रेडियो फीचर नहीं होता। इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार मोबाइल कंपनियों के लिए FM रिसीवर एक्टिव रखना अनिवार्य करे। रेडियो कंपनियों का कहना है कि आपदा के समय, नेटवर्क फेल होने पर या इमरजेंसी जैसी स्थिति में रेडियो सबसे भरोसेमंद माध्यम साबित हुआ है। कॉपीराइट-डिजिटल स्ट्रीमिंग मुद्दों पर भी राहत की मांग रेडियो सेक्टर, कॉपीराइट मुद्दों का हल निकलने का लंबे समय से इंतजार कर रहा है। साथ ही FM के प्रसारण को मौजूदा रॉयल्टी व्यवस्था के तहत डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग यानी साइमलकास्ट (एक साथ प्रसारण) की अनुमति देने की मांग भी है। इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, बड़े शहरों में बंद हो रहे FM स्टेशन देश के कई बड़े शहरों में अब FM रेडियो स्टेशनों पर संकट साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में HT मीडिया ग्रुप ने मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में अपने कुछ FM रेडियो लाइसेंस सरेंडर करने का फैसला किया है। इससे पहले TV टुडे नेटवर्क भी कई शहरों में अपने रेडियो ऑपरेशन बंद कर चुका है और Red FM ने भी मुंबई में अपना एक स्टेशन बंद किया था। FM स्टेशनों के बंद होने का असर रोजगार पर भी पड़ा है। इंडस्ट्री से जुड़े हजारों लोगों की नौकरियों पर इसका असर हुआ है। साथ ही सरकार की कमाई भी प्रभावित हुई है, क्योंकि DTH के बाद FM रेडियो ऐसा मीडिया सेक्टर है जो सरकार को लाइसेंस फीस देता है। जानकारों का कहना है कि कभी देश के सबसे बड़े मीडिया माध्यमों में गिने जाने वाला प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर अब लगातार दबाव में है। रेडियो कंपनियों का मानना है कि ज्यादा फीस, नीतियों में देरी और लगातार पाबंदियों की वजह से सेक्टर की आर्थिक हालत कमजोर होती गई। AROI के मुताबिक, देश का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन रेडियो इंडस्ट्री अभी भी संघर्ष कर रही है। रेडियो कंपनियों के मुताबिक, उनकी कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। इसमें GST, एनुअल लाइसेंस फीस, टावर और स्पेक्ट्रम चार्ज जैसे खर्च शामिल हैं। ऐसे में कंपनियों के पास कंटेंट, टेक्नोलॉजी और विस्तार पर निवेश के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचते। रेडियो सेक्टर की चुनौतियां अब विज्ञापन बाजार में भी असर दिखाने लगी हैं। देशभर में FM स्टेशनों की संख्या बढ़ी, लेकिन इंडस्ट्री की कमाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाई। कंपनियों का कहना है कि अगर समय रहते जरूरी बदलाव नहीं हुए, तो आने वाले समय में रेडियो सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जिस रेडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम के जरिए देश से संवाद का मजबूत माध्यम बनाया, क्या उसी रेडियो इंडस्ट्री की ‘मन की बात’ अब सरकार तक पहुंच पाएगी?

रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

देश का प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विज्ञापन घट रहे हैं, खर्च बढ़ रहा है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की वजह से रेडियो की कमाई पर असर पड़ रहा है। ऐसे में रेडियो कंपनियां सरकार से नियमों में कुछ बड़े बदलाव चाहती हैं। इंडस्ट्री एक्स्पर्ट्स का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में और FM स्टेशन बंद हो सकते हैं। वहीं सही फैसले होने पर सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है और नए रोजगार के साथ स्थानीय कंटेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। रेडियो कंपनियों की सरकार से 5 बड़ी अपेक्षाएं 1. FM रेडियो को न्यूज प्रसारण की अनुमति मिले भारत में प्राइवेट FM रेडियो चैनलों को स्वतंत्र रूप से न्यूज प्रसारण की इजाजत नहीं है। रेडियो कंपनियों का कहना है कि सिर्फ गानों के भरोसे अब ग्लोबल म्यूजिक और स्ट्रीमिंग ऐप्स से मुकाबला करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में न्यूज का प्रसारण रेडियो को नई पहचान दे सकता है। कंपनियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना किसी कंट्रोल के लाखों लोग न्यूज कंटेंट बना रहे हैं, जबकि FM रेडियो पहले से तय नियमों के तहत काम करता है। 2. 2030 के बाद लाइसेंस रिन्यूअल बाजार के हिसाब से हो रेडियो कंपनियों का कहना है कि पुराना ऑक्शन मॉडल अब मौजूदा बाजार के हिसाब से फिट नहीं बैठता। विज्ञापन बाजार बदल चुका है, इसलिए 2030 के बाद FM फेज-3 लाइसेंस का रिन्यूअल बाजार के हिसाब से तय कीमतों पर किया जाना चाहिए। 3. एनुअल लाइसेंस फीस खत्म हो रेडियो सेक्टर का कहना है कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। ऐसे में कंटेंट, टेक्नोलॉजी और नए शहरों में विस्तार के लिए निवेश करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए एनुअल लाइसेंस फीस खत्म करने की मांग की गई है। 4. GST 18% से घटाकर 5% किया जाए रेडियो कंपनियों की मांग है कि FM सेक्टर पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% किया जाए। कंपनियों का कहना है कि इससे रेडियो को दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले टिके रहने में मदद मिलेगी। 5. स्मार्टफोन में FM फीचर जरूरी हो आजकल आने वाले ज्यादातर स्मार्टफोन में FM रेडियो फीचर नहीं होता। इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार मोबाइल कंपनियों के लिए FM रिसीवर एक्टिव रखना अनिवार्य करे। रेडियो कंपनियों का कहना है कि आपदा के समय, नेटवर्क फेल होने पर या इमरजेंसी जैसी स्थिति में रेडियो सबसे भरोसेमंद माध्यम साबित हुआ है। कॉपीराइट-डिजिटल स्ट्रीमिंग मुद्दों पर भी राहत की मांग रेडियो सेक्टर, कॉपीराइट मुद्दों का हल निकलने का लंबे समय से इंतजार कर रहा है। साथ ही FM के प्रसारण को मौजूदा रॉयल्टी व्यवस्था के तहत डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग यानी साइमलकास्ट (एक साथ प्रसारण) की अनुमति देने की मांग भी है। इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, बड़े शहरों में बंद हो रहे FM स्टेशन देश के कई बड़े शहरों में अब FM रेडियो स्टेशनों पर संकट साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में HT मीडिया ग्रुप ने मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में अपने कुछ FM रेडियो लाइसेंस सरेंडर करने का फैसला किया है। इससे पहले TV टुडे नेटवर्क भी कई शहरों में अपने रेडियो ऑपरेशन बंद कर चुका है और Red FM ने भी मुंबई में अपना एक स्टेशन बंद किया था। FM स्टेशनों के बंद होने का असर रोजगार पर भी पड़ा है। इंडस्ट्री से जुड़े हजारों लोगों की नौकरियों पर इसका असर हुआ है। साथ ही सरकार की कमाई भी प्रभावित हुई है, क्योंकि DTH के बाद FM रेडियो ऐसा मीडिया सेक्टर है जो सरकार को लाइसेंस फीस देता है। जानकारों का कहना है कि कभी देश के सबसे बड़े मीडिया माध्यमों में गिने जाने वाला प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर अब लगातार दबाव में है। रेडियो कंपनियों का मानना है कि ज्यादा फीस, नीतियों में देरी और लगातार पाबंदियों की वजह से सेक्टर की आर्थिक हालत कमजोर होती गई। AROI के मुताबिक, देश का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन रेडियो इंडस्ट्री अभी भी संघर्ष कर रही है। रेडियो कंपनियों के मुताबिक, उनकी कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। इसमें GST, एनुअल लाइसेंस फीस, टावर और स्पेक्ट्रम चार्ज जैसे खर्च शामिल हैं। ऐसे में कंपनियों के पास कंटेंट, टेक्नोलॉजी और विस्तार पर निवेश के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचते। रेडियो सेक्टर की चुनौतियां अब विज्ञापन बाजार में भी असर दिखाने लगी हैं। देशभर में FM स्टेशनों की संख्या बढ़ी, लेकिन इंडस्ट्री की कमाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाई। कंपनियों का कहना है कि अगर समय रहते जरूरी बदलाव नहीं हुए, तो आने वाले समय में रेडियो सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जिस रेडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम के जरिए देश से संवाद का मजबूत माध्यम बनाया, क्या उसी रेडियो इंडस्ट्री की ‘मन की बात’ अब सरकार तक पहुंच पाएगी?