Sunday, 08 Nov 2026 | 02:30 PM

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Xi Jinping India Visit BRICS 2026

Xi Jinping India Visit BRICS 2026

Hindi News Career Xi Jinping India Visit BRICS 2026 | India US Joint Military Exercise 5 मिनट पहले कॉपी लिंक 1. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आएंगे 11 सितंबर को चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे। नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को BRICS शिखर सम्मेलन होना है। इसमें चीन-रूस समेत 11 देश शामिल होंगे। रूस के राष्ट्रपति पुतिन भी इसमें शामिल होने भारत आ रहे हैं। यदि दोनों प्रमुखों के बीच ये बैठक होती है तो जून 2020 में हुई गलवान हिंसा के बाद दोनों नेताओं की भारत में पहली द्विपक्षीय बातचीत होगी। पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। चीन ने बाद में अपने 4 सैनिकों की मौत की बात मानी थी। BRICS 2026 जनवरी को भारत ने ऑफिशियली 18वें ब्रिक्स (BRICS) 2026 की अध्यक्षता संभाली थी। भारत इस साल चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इससे पहले साल 2012, 2016 और 2021 में भारत ने ब्रिक्स की अध्यक्षता की है। 2026 में ब्रिक्स की स्थापना के 20 साल पूरे हुए हैं। 2009 में ब्रिक्स की पहली समिट रूस में हुई थी। ब्रिक्स के दौरान पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की भी संभावना है। 2. पीएम मोदी ने प्रिंस रहीम आगा खान V से मुलाकात की 10 सितंबर को पीएम मोदी ने नई दिल्ली में जाने-माने समाजसेवी और इस्लामी समाज के 50वें इमाम प्रिंस रहीम आगा खान V से मुलाकात की। पीएम ने हेल्थ सर्विस, एग्रीकल्चर, रूरल डेवलपमेंट और युवाओं व महिलाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्रों में आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क के साथ भारत की साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की। इस्माइली मुस्लिम समुदाय के 50वें वंशानुगत इमाम और आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क के चेयरमैन, प्रिंस रहीम आगा खान V भारत की अपनी पहली यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे हैं। प्रिंस रहीम आगा खान की ये यात्रा सामाजिक विकास और विरासत संरक्षण को बढ़ाने के लिए है। इमाम प्रिंस रहीम ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी मुलाकात की। वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस यात्रा के हिस्से के रूप में, वे अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद की यात्रा भी करेंगे। इस्माइली समुदाय के 50वें इमाम के रूप में पदभार संभालने के बाद प्रिंस रहीम आगा खान V की यह भारत की पहली यात्रा है। स्पोर्ट्स (SPORTS) 3. पैरा आर्चर शीतल देवी ने गोल्ड जीता 9 सितंबर को भारत की स्टार पैरा आर्चर शीतल देवी ने वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में गोल्ड जीता। शीतल ने पैरा कंपाउंड महिला व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में कजाकिस्तान की आइजादा सेइदान को हराया। ये ये सीरीज अहमदाबाद में आयोजित की गई थी और शीतल देवी का ये वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में पहला व्यक्तिगत गोल्ड है। शीतल वर्तमान में मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन और वर्ल्ड नंबर-1 पैरा कंपाउंड आर्चर हैं। प्रतियोगिता की क्वालिफिकेशन में शीतल 698 अंक के सीजन-बेस्ट स्कोर के साथ टॉप रैंकिंग हासिल की। भारत ने सीरीज के फाइनल में 2 गोल्ड और 4 ब्रॉन्ज समेत कुल 6 मेडल जीते हैं। टेस्टिंग (TESTING) 4. ISRO ने CE 20 क्रायोजेनिक इंजन का किया सफल परीक्षण 10 सितंबर को SRO ने CE-20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किया। CE-20 इंजन का उपयोग LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क-3) रॉकेट के ऊपरी हिस्से में किया जाता है। LVM3 का उपयोग भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान समेत विभिन्न महत्वपूर्ण मिशनों के लिए किया जा रहा है। CE-20 इंजन क्रायोजेनिक टेक्नोलॉजी पर आधारित है और इसमें ईंधन के तौर पर लिक्विड हाइड्रोजन (LH2) और लिक्विड ऑक्सीजन (LOX) का उपयोग किया जाता है। CE-20 को ISRO के लिक्विड प्रो पॉल्यूशन सिस्टम सेंटर (LPSC) ने डेवलप किया है। LVM3 भारत का भारी-भरकम लॉन्चिंग मशीन है। ISRO की स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी और इसका मुख्यालय बेंगलुरु, कर्नाटक में स्थित है। ये टेस्टिंग भारत की भारी उपग्रह प्रक्षेपण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। 5. भारत और अमेरिका के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास होगा 10 सितंबर को भारत और अमेरिका के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित होने का ऐलान हुआ। ये इस ‘युद्ध अभ्यास’ का 22वां संस्करण होगा। पहली बार दो अलग-अलग थिएटर राजस्थान के रेगिस्तान और उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में युद्ध अभ्यास किया जाएगा। इस ‘युद्ध अभ्यास’ की शुरुआत 2004 में हुई थी। 2026 का अभ्यास अपनी तरह का विशेष संस्करण होगा। इस अभ्यास का पहला चरण महाजन फील्ड फायरिंग रेंज, बीकानेर, राजस्थान में किया जाएगा। इसके बाद औली, उत्तराखंड के ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में प्रशिक्षण किया जाएगा। इसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और संयुक्त सैन्य क्षमता को मजबूत करना है। अभ्यास में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन ऑपरेशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तथा निगरानी क्षमताओं पर भी जोर रहेगा। यह अभ्यास भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाएगा। आज का इतिहास 1906 में महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की। 1948 में मुस्लिम लीग के अध्यक्ष और प्रमुख नेता मोहम्मद अली जिन्ना का निधन हुआ। ——————— ये खबर भी पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Putin India Visit: Russian Military Aircraft Land at Noida Airport

Putin India Visit: Russian Military Aircraft Land at Noida Airport

21 मिनट पहले कॉपी लिंक रूस का भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान IL-76 नोएडा एयरपोर्ट के रनवे पर उतरा। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से पहले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रूस के 3 सैन्य विमान उतरे हैं। इनमें रूस का भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान IL-76 भी शामिल है। विमानों से रूसी सैन्य अधिकारी भारत पहुंचे हैं। इसी के साथ राष्ट्रपति पुतिन के काफिले की गाड़ियां भी भारत लाई गई हैं। तीनों विमान मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे नोएडा एयरपोर्ट के रनवे पर उतरे थे। बुधवार को भी तीनों विमान एयरपोर्ट पर खड़े रहे। एयरपोर्ट की सुरक्षा टीम के साथ रूसी टीम भी विमानों और सुरक्षा इंतजामों पर नजर रख रही है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहली बार किसी विदेशी विमान ने लैंडिंग की है। इससे पहले विदेशी सैन्य और वीवीआईपी विमानों के लिए दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया जाता रहा है। रूस के तीन एयरक्राफ्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खड़े हैं। तैयारियों का जायजा लेने पहुंची टीम किसी बड़े विदेशी नेता के दौरे से पहले उसकी एडवांस टीम एयरपोर्ट, सुरक्षा व्यवस्था और वीवीआईपी मूवमेंट से जुड़ी तैयारियों का जायजा लेती है। इसी वजह से रूसी टीम भारत आई है। पुतिन का विमान भी नोएडा एयरपोर्ट पर ही उतरेगा या नहीं, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों में इसकी संभावना जताई गई है। IL-76 क्या है? IL-76 रूस का भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान है। इसका इस्तेमाल सैनिकों, सैन्य सामान और दूसरे भारी उपकरणों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए किया जाता है। इस तरह के विमान किसी बड़े सैन्य या वीवीआईपी दौरे से पहले जरूरी सामान और अधिकारियों को पहुंचाने में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। नोएडा एयरपोर्ट पर पहुंची रूसी टीम भी पुतिन के दौरे से पहले सुरक्षा और दूसरी व्यवस्थाओं की तैयारी कर रही है। पुतिन की मोदी से अहम बैठक पुतिन शुक्रवार को भारत पहुंचेंगे। BRICS समिट से पहले उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी। दोनों नेताओं की बातचीत में रक्षा, Su-57 फाइटर जेट, S-400, रूसी तेल, परमाणु ऊर्जा और रुपये-रूबल में कारोबार जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। रक्षा क्षेत्र में सबसे ज्यादा नजर रूस के Su-57 5th जेनरेशन फाइटर के प्रस्ताव पर है। रूस भारत को यह विमान बेचने के साथ भारत में इसके उत्पादन और तकनीकी सहयोग का प्रस्ताव दे रहा है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… रूस से पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 ले सकता है भारत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे। इस दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग से जुड़े दो बड़े प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

India Nuclear Weapons Stockpile Report

India Nuclear Weapons Stockpile Report

नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत ने 23 दिसंबर 2025 को बंगाल की खाड़ी में K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। यह परमाणु हथियार ले जा सकती है। भारत के पास करीब 190 परमाणु हथियार हैं। इनमें से करीब 30 हथियार ऐसे नई मिसाइलों के लिए हैं, जिनका निर्माण अभी चल रहा है। अमेरिका के फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स (FAS) की रिपोर्ट में यह अनुमान सामने आया है। संस्था ने यह आंकड़ा सार्वजनिक स्रोतों, सरकारी जानकारी और सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर तैयार किया है। ऑपरेशन लॉन्चर्स के लिए 160 से अधिक हथियार बुधवार को प्रकाशित ‘इंडियाज न्यूक्लियर वेपन्स-2026’ हैडिंग वाले एक लेख में, एफएएस न्यूक्लियर इंफॉर्मेशन प्रोजेक्ट के निदेशक हंस क्रिस्टेंसन ने कहा कि भारत के पास ऑपरेशन लॉन्चर्स के लिए 160 से अधिक हथियार हैं। लेख में यह भी कहा गया है कि भारत ने हाल के वर्षों में अपने परमाणु भंडार का मॉडरनाईजेशन जारी रखा है। 140 से 225 परमाणु हथियारों के लिए पर्याप्त प्लूटोनियम लेख में कहा गया है, हमारा अनुमान है कि भारत ने 140 से 225 परमाणु हथियारों के लिए पर्याप्त प्लूटोनियम का उत्पादन किया होगा। 190 हथियार तक असेंबल कर लिए होंगे। नए विकसित किए जा रहे वेपन सिस्टम्स के लिए देश का वारहेड भंडार संभवतः और बढ़ेगा। लेख के अनुसार हाल के वर्षों में कई नए वेपन सिस्टम्स को तैनात किया गया है, जबकि मौजूदा न्यूक्लियर कैपेबल एयरक्राफ्ट, लैंड बेस्ड डिलीवरी सिस्टम और सी बेस्ड सिस्टम्स को रिप्लेस करने के लिए और वारहेड्स तैयार किए जा रहे हैं। INS अरिघात पनडुब्बी पानी के अंदर से परमाणु हथियार लॉन्च कर सकती है। 730 किलोग्राम हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम का उत्पादन 2026 की शुरुआत तक, इंटरनेशनल पैनल ऑन फिसाइल मैटेरियल्स ने अनुमान लगाया था कि भारत ने करीब 730 किलोग्राम, (प्लस/माइनस 170 किलोग्राम) हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम का उत्पादन किया है। लेख में कहा गया है, प्रति हथियार करीब चार किलोग्राम प्लूटोनियम मानकर, यह सैद्धांतिक रूप से 140 से 225 परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षणों के बाद पहले उपयोग न करने (नो-फर्स्ट-यूज) की पॉलिसी को अपनाया और इसका पालन करना जारी रखा है। दुनिया के 9 देशों के पास कुल 12,187 परमाणु हथियार SIPRI इयरबुक 2026 के अनुसार फ्रांस, चीन, भारत,पाकिस्तान,उत्तर कोरिया और इजराइल के पास कुल 12,187 परमाणु हथियार हैं। इसमें से 9,745 इस्तेमाल के लिए तैयार हैं। ——————– ये खबर भी पढ़ें: भारत ने पहली बार 12 परमाणु बम तैनात किए:2 साल में देश के एटमी हथियार 180 से बढ़कर 190 हुए; पाकिस्तान से 20 ज्यादा भारत की अग्नि सीरीज और K सीरीज की मिसाइलें परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं। भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार मोर्चे पर तैनात किए हैं। देश का परमाणु हथियारों का भंडार भी 180 से बढ़कर 190 हो गया है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट में यह बताया गया है। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Pakistan Terrorist Vs India; Hafiz Talha Saeed Jihadist Speech Explained

Pakistan Terrorist Vs India; Hafiz Talha Saeed Jihadist Speech Explained

‘भूल गए दिल्ली किसकी थी। हिंद में 500 साल मुसलमान हुक्मरान रहे।’ . ये बयान है आतंकी हाफिज सईद के बेटे तल्हा सईद का। उसने पाकिस्तान के शेखपुरा में सरेआम भारत के खिलाफ जिहाद जारी रखने की बात कही। इसी भाषण में उसने पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर को ‘ईमान और तकवा’ वाला जनरल बताया। आखिर कौन है तल्हा सईद, आसिम मुनीर की इतनी तारीफ क्यों कर रहा और इस वक्त ऐसे बड़बोलेपन के पीछे की पूरी कहानी, आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: तल्हा सईद ने ऐसा क्या बोला, जो सुर्खियों में है? जवाबः सोशल मीडिया पर तल्हा सईद का 2 मिनट 5 सेकेंड का एक वीडियो वायरल है। उसमें कही 3 बातें चर्चा में हैं… दिल्ली में 500 साल मुसलमानों का राजः तल्हा ने कहा, ‘जिस हिंद में मुसलमान 500 साल हुक्मरान रहे। आज वहां किस बुनियाद पर दिल्ली में बैठकर पाकिस्तान के दुश्मन बात करते हैं? क्या वो तारीख भूल गए कि दिल्ली किसका था? ये सारे हिंद के इलाके किसके थे?’ जिहाद करते रहेंगेः तल्हा ने कहा, ‘जब तक हम जिंदा हैं, जब तक दम और खम है। हम ये जिहाद करते रहेंगे। हम ये कुर्बानियां पेश करते रहेंगे।’ आसिम मुनीर की तारीफः तल्हा ने कहा, ‘मैं अल्लाह का शुक्र भी अदा करता हूं कि पाकिस्तान को ऐसा आर्मी चीफ दिया। ऐसा फील्ड मार्शल दिया, जो कुरान के हाफिज हैं और जिहाद को फिर से सजाया। वो जब भी मीटिंग करते हैं, लफ्जो की आग ‘ईमान, तकवा, जिहाद फी सबीलिल्लाह’ (ईमान, धर्मपरायणता और अल्लाह के रास्ते में जिहाद) की याद दिलाते हैं।’ तल्हा सईद पाकिस्तान में सभाएं करके लोगों को लश्कर-ए-तैयबा के मकसद से जोड़ता है। तल्हा की ये तस्वीर भड़काऊ भाषण के वायरल वीडियो से ली गई है। इससे पहले सिंधु जल संधि पर रोक लगाने की वजह से पीएम मोदी को धमकी देते हुए तल्हा ने कहा था, ‘अगर तू पानी बंद करेगा, तो हम तेरी सांस बंद कर देंगे।’ सवाल-2: तल्हा सईद है कौन? जवाबः 26/11 मुंबई आंतकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का बेटा है तल्हा सईद। फिलहाल लाहौर में रहता है। हाफिज के बाद उसे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की कमान मिल सकती है। फिलहाल वो नंबर-2 माना जाता है। 12 साल की उम्र में लश्कर से जुड़ाः तल्हा की पैदाइश 25 अक्टूबर, 1975 की है। 1987 में लश्कर-ए-तैयबा की शुरुआत के साथ आतंकी अब्दुर रहमान मक्की की देखरेख में तल्हा की ट्रेनिंग शुरू हो गई। 2000 के दशक में हाफिज सईद खुद को समाजसेवा और राजनीतिक नरैटिव बनाने लगे, तब लश्कर में तल्हा की जिम्मेदारी बढ़ी। मुंबई आतंकी हमले में भी नामः 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद, हाफिज सईद ने पाकिस्तान की आवाम के सामने दिखाया कि हमले की साजिश उसकी नहीं थी। तब तल्हा ने ही मीडिया में लश्कर का पूरा प्रोपेगैंडा कैंपेन चलाया था। वह सोशल मीडिया का भी एक्सपर्ट है। तल्हा सईद अप्रैल 2026 में पाक पीएम शहबाज शरीफ के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह से मिला था। भारत-अमेरिका में आतंकी घोषितः भारतीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, PoK से भारत के खिलाफ आतंकी साजिशें करना, आतंकियों की भर्ती, फंड जमा करना, हमलों की प्लानिंग, भारत और अफगानिस्तान में आतंकी गतिविधियां, यह सब तल्हा संभालता है। भारत सरकार ने 2022 में उसे आतंकी घोषित किया था। अमेरिका ने भी उसे टेररिस्ट घोषित किया है। हालांकि चीन के वीटो की वजह से UN में ग्लोबल टेररिस्ट घोषित नहीं हो सका। पाकिस्तान की घरेलू राजनीति में भी सक्रियः 2019 में हाफिज सईद के कैद में जाने के बाद तल्हा लाइमलाइट में आया। इसी साल बम ब्लास्ट उसकी जान बची। 2024 में पाकिस्तान चुनाव के दौरान हाफिज सईद ने ‘पाकिस्तान मरकज़ी मुस्लिम लीग’ (PMML) बनाई थी। तब तल्हा लाहौर की NA-127 सीट से उतरा लेकिन पाकिस्तान मुस्लिग लीग- नावज (PML-N) के कैंडिडेट से हार गया। चुनाव में तल्हा को सिर्फ 2024 वोट मिले थे। चुनाव जीतने वाले लतीख खोसा को 1 लाख से ज्यादा वोट मिले थे। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पढ़े-लिखे लड़ाकों की भर्ती शुरू की: रिपोर्ट्स के मुताबिक, तल्हा ने लश्कर में पढ़े-लिखे और कम उम्र के लड़ाकों की भर्ती का हुक्म दिया है। वो पाकिस्तान के मस्जिदों, मदरसों, सभाओं और सोशल मीडिया के जरिए जिहादी प्रोपेगैंडा फैलाता है। ऑनलाइन क्लासेस लेता है और आतंक के साथ-साथ राजनीति के लिए भी लड़के तैयार करता है। जून 2026 में तल्हा PoK के प्रधानमंत्री सरदार अतीक अहमद खान से भी मिला था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरान कश्मीर के मुद्दे पर ही बात हुई थी। सवाल-3: आसिम मुनीर की इतनी तारीफ क्यों कर रहा है तल्हा सईद? जवाबः इसकी 3 बड़ी वजहें हैं… मुनीर की ‘मौलाना जनरल’ वाली इमेज आसिम मुनीर की तालीम किसी मौलाना की तरह हुई है। 7वीं तक मदरसे में पढ़े और कुरान याद की। आर्मी जॉइन करने के बाद भी कुरान दोहराई। भाषणों में वे बार-बार कुरान की आयतों का जिक्र करते हैं। पहलगाम हमले से पहले 16 अप्रैल 2025 को दिए भाषण में उन्होंने मजहबी तौर पर भारत-पाकिस्तान की तुलना की थी, ‘हम हिंदुओं से हर मायने में अलग हैं, चाहे वह मजहब हो या मकसद हो।’ पाकिस्तान में भारत के राजदूत रहे अजय बिसारिया के मुताबिक, ‘मुनीर की लीडरशिप में पाक आर्मी सिर्फ सीमाओं की नहीं, मजहबी सोच की भी हिफाजत कर रही है। वे धार्मिक राष्ट्रवाद को दोहराते हैं। उन्हें मौलानाओं का सपोर्ट है।’ भारत विरोधी और कश्मीर पर कट्टर रुख जब 2019 का पुलवामा आतंकी हमला हुआ, आसिम मुनीर पाकिस्तानी इंटेलिजेंस एजेंसी ISI के चीफ थे। अप्रैल 2025 के भाषण में भी मुनीर ने कहा था, ‘कश्मीर हमारी जुगुलर वेन यानी गले की नस था, है और रहेगा।’ इसके 6 दिन बाद ही पहलगाम हमला हुआ। मुनीर कश्मीर की आजादी, जंग और भारत को मुंह तोड़ जवाब देने की बात कहते हैं। भारत के साथ सुलह करने के सवाल पर मुनीर कहते हैं, ‘जब भारत पाकिस्तान के कॉन्सेप्ट को ही नहीं मानता, तो हम उनके साथ सुलह कैसे कर सकते हैं।’ 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के हमलों में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर मसूद इल्यास कश्मिरी ने सितंबर 2025 में बताया था कि आसिम मुनीर ने पाक आर्मी के जनरलों से कहा था

POK Ground Report; School Hospital Internet Closed

POK Ground Report; School Hospital Internet Closed

श्रीनगर13 मिनट पहलेलेखक: रऊफ डार कॉपी लिंक ‘हम इंडिया के एजेंट नहीं हैं, हम तो अपने हक के लिए लड़ रहे हैं।’ पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर, यानी POK से ये आवाजें ऐसे वक्त में आ रही है, जब वहां इंटरनेट बंद है। स्कूल नहीं खुल रहे, अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा, कामकाज ठप है। लोग राशन और दवाइयों तक के लिए परेशान हैं। 5 जून से यहां जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी, यानी JAAC की अगुवाई में प्रदर्शन चल रहे हैं। विधानसभा में कश्मीरियों के लिए आरक्षित 12 सीटें खत्म करने की मांग है। प्रदर्शन में तीन महीने में 100 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। लोगों का आरोप है कि कई इलाकों में रास्तों और जरूरी सामान की आवाजाही पर पाबंदी है। प्रोटेस्ट शुरू होने के बाद से ही राजधानी मुजफ्फराबाद, रावलकोट, पुंछ और कोटली में इंटरनेट-ब्रॉडबैंड सर्विस बंद कर दी गई। इससे प्रदर्शन की खबरें बाहर नहीं आ रही हैं। दैनिक भास्कर ने PoK में रहने वाले और प्रदर्शन में शामिल लोगों से बात की। चुनिंदा ऑफिसों और होटलों में स्लो इंटरनेट चल रहा है। इसका एक्सेस मिलने के बाद उन्होंने हमें ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड करके भेजे हैं। 1. आदिल हुसैन, पुंछ डिवीजन ‘सेना ने इलाका घेर लिया है, राशन और दवाइयां तक नहीं आ रहीं’ कोटली में रहने वाले आदिल हुसैन ने दावा किया कि पुंछ डिवीजन में हालात ज्यादा खराब हैं। वे कहते हैं, ‘इस इलाके के साथ जिस तरह बर्ताव किया जा रहा है, वह शायद फिलिस्तीन के साथ किए बर्ताव से भी बदतर है। चारों तरफ पुलिस और सेना के जवान मौजूद हैं। वे लोगों पर गोली चला रहे हैं। लगभग हर दिन कोई न कोई मारा जा रहा है।’ इंटरनेट पहले से बंद है। राशन और दवाइयों की सप्लाई भी रोक दी गई है। इस इलाके में आने वाला कोई शख्स परिवार के लिए थोड़ा सा राशन भी नहीं ले जा सकता। उसकी तलाशी ली जाती है। राशन ले लिया जाता है। आदिल आगे कहते हैं, ‘पेट्रोल, डीजल और बाकी जरूरी चीजों की सप्लाई भी रोक दी गई है। पूरे एरिया की घेराबंदी है। सेना का मूवमेंट और जिस तरह वे यहां घुसने की कोशिश कर रहे हैं, उसे देखते हुए डर है कि बहुत लोग मारे जा सकते हैं।’ ‘यहां की पूरी आबादी JAAC के साथ खड़ी है और अपने हक के लिए लड़ रही है। दुनिया को इन हालात को इमरजेंसी की तरह देखना चाहिए। सरकार का भी यहां कंट्रोल नहीं दिख रहा है। लोगों का उनसे भरोसा उठ गया है।’ 2. ख्वाजा मुंतजिर, मुजफ्फराबाद डिवीजन ‘हमारे नेता दो महीने से गायब हैं, लोग डरकर घर में न बैठें’ प्रदर्शन में शामिल ख्वाजा मुंतजिर बताते हैं, ‘पुंछ और मुजफ्फराबाद डिवीजन के लोग लगभग ढाई महीने से सरकारी जबरदस्ती और जुल्म के खिलाफ लड़ रहे हैं। मुजफ्फराबाद से जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेता डॉ. आमिर साहब, दूसरे नेता और हमारे साथी दो महीने से ज्यादा वक्त से लापता हैं। उन्हें सिर्फ इसलिए सजा दी गई क्योंकि उन्होंने लोगों के हक के बारे में बात की।’ ‘वे कैद में हैं। बच्चों, परिवार और रिश्तेदारों से दूर हैं। हमारा फर्ज है कि हम उनके अधूरे मिशन को पूरा करने के लिए आगे बढ़ें। मैं मुजफ्फराबाद डिवीजन के लोगों से अपील है कि वे सेना की मौजूदगी से पैदा डर और धमकी से न डरें। घर से बाहर आएं। जिंदगी और मौत अल्लाह के हाथ में है। जहां जिस समय लिखा है, वहीं होगी।’ PoK में फायरिंग के वीडियो सामने आए हैं। दावा है कि सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोलियां चलाईं। 3. सरदान उमर नजीर कश्मीरी, रावलकोट ‘30 मई तक सरकार ने बात की, फिर हम भारत के एजेंट कैसे हो गए’ आंदोलन के खिलाफ सबसे बड़ा नैरेटिव यही है कि ये पाकिस्तान विरोधी या भारत समर्थित है। JAAC नेता सरदान उमर नजीर कश्मीरी इस आरोप को खारिज करते हैं। वे कहते हैं, ‘रावलकोट में हम लॉन्ग मार्च करने वाले थे, लेकिन उसे टाल दिया। लोग धरने पर बैठे हैं। फौज और पुलिस ने बार-बार ताकत का इस्तेमाल किया। करीब 100 लोग मारे गए। सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया।’ ‘सरकार ने आंदोलन को कमजोर करने और लोगों को इससे दूर करने के लिए हमारे खिलाफ बार-बार प्रोपेगेंडा चलाया कि यह अलगाववादी आंदोलन है। मीडिया ने भी यही नैरेटिव आगे बढ़ाया।’ ‘हम इस प्रोपेगेंडा या मीडिया चैनलों से डरे नहीं हैं। ऐसे चैनल झूठ फैलाते हैं और रावलकोट में बैठे प्रदर्शनकारियों का भारत से रिश्ता होने का दावा करते हैं। अगर ऐसा था, तो 30 मई तक पाकिस्तान सरकार हमारे साथ बैठकर बातचीत क्यों कर रही थी।’ ’30 मई को भी पाकिस्तानी मंत्री हमारे साथ बात कर रहे थे और अचानक पांच दिन बाद आपको याद आया कि जिन लोगों के साथ आप बातचीत कर रहे थे, वे भारतीय एजेंट हैं।’ 2023 से शुरू हुआ आंदोलन, 2024 में टकराव बढ़ा जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी अचानक बना संगठन नहीं है। 2023 में रावलकोट में कारोबारी, सिविल सोसायटी के लोग, छात्र और एक्टिविस्ट साथ आए और एक संगठन बनाया। शुरुआत में इसके प्रदर्शनों का बड़ा मुद्दा गेहूं की बढ़ती कीमतें था। 2024 में आंदोलन बड़ा हुआ। तब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव बढ़ा। तीन प्रदर्शनकारियों और एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई। 2025 में भी विरोध जारी रहा। 2026 में आंदोलन ज्यादा बड़ा हो गया। 5 जून 2026 को पाकिस्तान सरकार ने JAAC पर प्रतिबंध लगाकर उसे आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया। विरोध के बाद भी चुनाव, नवाज शरीफ की पार्टी जीती प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांगों में से एक POK विधानसभा की उन 12 सीटों को खत्म करना है, जो पाकिस्तान से बाहर रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। उनका तर्क है कि इन सीटों के जरिए PoK की राजनीति में ऐसे लोगों को जगह दी जाती है, जो अब PoK में नहीं रहते। POK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें 45 पर सीधे चुनाव होते हैं। बाकी सीटें आरक्षित हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

दुनिया के नए नक्शे पर भारत की आपत्ति:कहा- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख हमारे नक्शे के मुताबिक दिखें, UN में इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन का सपोर्ट किया था

दुनिया के नए नक्शे पर भारत की आपत्ति:कहा- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख हमारे नक्शे के मुताबिक दिखें, UN में इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन का सपोर्ट किया था

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के इक्वल अर्थ मैप को लेकर अपनी स्थति साफ की है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि इस प्रस्ताव का मतलब किसी खास नक्शे को मान्यता देना नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव में देशों की सीमाओं, विवादित इलाकों या जगहों के नाम को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया है। यह प्रस्ताव दुनिया का नक्शा इस तरह दिखाने से जुड़ा है, जिसमें हर देश का क्षेत्रफल उसके वास्तविक आकार के अनुपात में नजर आए। भारत ने अपने बयान में कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत का पूरा क्षेत्र आधिकारिक भारतीय नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर उसका रुख स्पष्ट और अटल है। खबर अपडेट हो रही है…

दुनिया के नए नक्शे पर भारत की आपत्ति:कहा- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख हमारे नक्शे के मुताबिक दिखें, UN में इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन का सपोर्ट किया था

दुनिया के नए नक्शे पर भारत की आपत्ति:कहा- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख हमारे नक्शे के मुताबिक दिखें, UN में इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन का सपोर्ट किया था

भारत ने दुनिया के नए नक्शे को लेकर आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत का पूरा इलाका भारत के आधिकारिक नक्शे के हिसाब से ही दिखना चाहिए। भारत के इलाके को गलत या भ्रामक तरीके से दिखाना उसे मंजूर नहीं है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के उस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया है, जिसमें दुनिया के नक्शे पर देशों और महाद्वीपों का आकार उनके असली क्षेत्रफल के करीब दिखाने की बात कही गई है। हालांकि, भारत ने साफ किया कि इसका मतलब किसी एक खास नक्शे को मंजूरी देना नहीं है। दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को दुनिया के नक्शे को नए तरीके से दिखाने का प्रस्ताव पास किया। इस बदलाव से किसी देश या महाद्वीप का असली क्षेत्रफल नहीं बदलेगा। सिर्फ नक्शे पर उनका आकार पहले से कुछ छोटा या बड़ा नजर आएगा। अभी दुनिया में मर्केटर मैप काफी इस्तेमाल होता है। इसमें नक्शे पर ध्रुवों के पास के इलाके अपने असली आकार से बड़े दिखाई देते हैं। नए तरीके को इक्वल एरिया प्रोजेक्शन कहा गया है। इसमें अफ्रीका पहले से बड़ा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका छोटे नजर आएंगे। एशिया के कुछ हिस्से भी पहले की तुलना में छोटे दिखाई दे सकते हैं। भारत की आपत्ति क्यों है भारत को UN के इस नए नक्शे के तरीके से आपत्ति नहीं है। भारत ने बराबर क्षेत्रफल दिखाने वाले नक्शे के प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया है। उसकी आपत्ति नक्शे में भारत के क्षेत्र को गलत तरीके से दिखाए जाने की संभावना को लेकर है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि यह प्रस्ताव किसी खास नक्शे, नक्शा बनाने के तरीके या देशों की सीमाओं को मंजूरी नहीं देता। इसलिए भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत का पूरा संप्रभु क्षेत्र भारत के आधिकारिक नक्शे के मुताबिक ही दिखाया जाना चाहिए। भारत के क्षेत्र का कोई भी गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार नहीं किया जाएगा। भारत: क्षेत्रफल वही, आकार बड़ा दिख सकता है भारत की वास्तविक जमीन, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं या क्षेत्रफल में कोई बदलाव नहीं होगा। यह बदलाव देशों की सीमाएं बदलने वाला नहीं, बल्कि नक्शे पर पृथ्वी को दिखाने का तरीका बदलने वाला है। भारत का नक्शा देखने में भी थोड़ा अलग दिख सकता है, लेकिन भारत के मामले में बदलाव बहुत बड़ा नहीं होगा। नया नक्शा क्षेत्रफल सही अनुपात में दिखाता है। पुराने नक्शे में भूमध्य रेखा के आसपास के इलाके अपने आकार से छोटे और ध्रुवों के पास के इलाके बड़े दिखते हैं। भारत भूमध्य रेखा से बहुत दूर नहीं है, इसलिए पुराने नक्शे में भी उसका आकार कुछ हद तक छोटा दिखता है। भारत के लिए इसका मतलब क्षेत्रफल: बिल्कुल वही रहेगा। सीमाएं: नहीं बदलेंगी। भारत की आकृति: थोड़ी बदली हुई/कम खिंची हुई दिखाई दे सकती है। दूसरे देशों की तुलना में आकार: भारत कुछ बड़ा दिखाई दे सकता है, खासकर जब उसकी तुलना यूरोप, रूस, कनाडा जैसे ज्यादा उत्तरी देशों से की जाए। अफ्रीका पर असर: सबसे ज्यादा नजर आएगा, क्योंकि उसका वास्तविक आकार पुराने मर्केटर नक्शे की तुलना में बहुत बड़ा दिखाई देगा। मौजूदा नक्शे में आखिर दिक्कत क्या थी? दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले नक्शों में से एक मर्केटर नक्शा है। इसे यूरोपियन मैप मेकर जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था। इसका मकसद समुद्र में जहाजों के रास्ते और दिशा को समझना आसान बनाना था। लेकिन पूरी गोल धरती को सपाट नक्शे पर दिखाने की वजह से इसमें देशों और महाद्वीपों का आकार असल से अलग नजर आने लगता है। जैसे-जैसे कोई इलाका भूमध्य रेखा से दूर जाता है, वह नक्शे पर जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही वजह है कि उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के कई इलाके असल से काफी बड़े नजर आते हैं। ग्रीनलैंड इसका सबसे मशहूर उदाहरण है। मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका के लगभग बराबर दिखाई देता है। लेकिन असल में दोनों के आकार में बहुत बड़ा अंतर है। ग्रीनलैंड का क्षेत्रफल करीब 22 लाख वर्ग किलोमीटर है। यह लगभग डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के बराबर है। वहीं अफ्रीका का क्षेत्रफल करीब 3 करोड़ वर्ग किलोमीटर है। यानी अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है। फिर भी मर्केटर नक्शे को देखकर दोनों का आकार लगभग एक जैसा लग सकता है। यही वह फर्क है जिसे अब कम करने की कोशिश हो रही है। अफ्रीकी देश नक्शा बदलने की मांग क्यों कर रहे थे? अफ्रीकी देशों का कहना है कि बात सिर्फ नक्शे पर किसी देश या महाद्वीप के छोटा-बड़ा दिखने की नहीं है। दुनिया का नक्शा यह भी तय करता है कि हम अलग-अलग हिस्सों को किस नजर से देखते हैं। UN के सामने रखे गए प्रस्ताव में कहा गया था कि मर्केटर नक्शे में अफ्रीका का वास्तविक आकार काफी छोटा नजर आता है। लंबे समय तक ऐसी तस्वीर देखने से लोगों के मन में अफ्रीका के आकार और वैश्विक महत्व को लेकर गलत धारणा बन सकती है। प्रस्ताव में लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि नक्शे में इन क्षेत्रों का छोटा नजर आना उनकी विकास जरूरतों, बुनियादी ढांचे और आर्थिक क्षमता को भी कम करके आंकने की धारणा बना सकता है। अफ्रीकी देश टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे ने कहा कि नक्शे सिर्फ भूगोल समझने का साधन नहीं हैं, बल्कि वे शिक्षा और लोगों की सोच को भी प्रभावित करते हैं। यह प्रस्ताव टोगो ने पेश किया था और इसे अफ्रीकी संघ का समर्थन मिला। फ्रांस भी मर्केटर मैप छोड़ने की तैयारी में UN में मतदान से पहले फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो ने कहा कि उनका देश मर्केटर मैप की जगह ऐसे नक्शों का इस्तेमाल करेगा, जिनमें देशों का वास्तविक क्षेत्रफल ज्यादा सही तरीके से दिखाई दे। फ्रांस अब एकर्ट IV प्रोजेक्शन का इस्तेमाल करेगा। एकर्ट IV नक्शा 1906 में जर्मन कार्टोग्राफर मैक्स एकर्ट-ग्राइफेंडॉर्फ ने बनाया था। उन्होंने दुनिया के नक्शे के छह अलग-अलग डिजाइन तैयार किए थे। इनमें चौथा नक्शा यानी एकर्ट IV क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे सटीक माना गया। एकर्ट IV और

India Nepal Flood Relief | Rescue Expert Forensic Team Support

India Nepal Flood Relief | Rescue Expert Forensic Team Support

नई दिल्ली/काठमांडू6 मिनट पहले कॉपी लिंक नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में इस आपदा से 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। शहरों, सड़कों, पुलों और कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ के कुछ घंटों के भीतर ही भारत ने राहत सामग्री भेजनी शुरू कर दी थी। 3 सितंबर तक भारत पांच खेप में कुल 74 टन राहत सामग्री भेज चुका है, जिसमें करीब 5 टन जरूरी दवाइयां शामिल हैं। भारत की मदद सिर्फ राहत सामग्री तक सीमित नहीं रही। डॉक्टर, पैरामेडिक्स, बचाव दल, सुरंग विशेषज्ञ, बेली ब्रिज और फोरेंसिक एक्सपर्ट भी नेपाल भेजे गए हैं। यानी सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश से लेकर शवों की DNA जांच और पुनर्निर्माण तक भारत कई मोर्चों पर नेपाल की मदद कर रहा है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भी संसद में भारत की सहायता के लिए धन्यवाद दिया है। भारत की मदद से बना अस्पताल बाढ़ पीड़ितों के लिए बना सहारा नेपाल के नुवाकोट में नेपाल-भारत मैत्री भवन बाढ़ के बाद लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है। इस इमारत में आयुर्वेद और वैकल्पिक अस्पताल भी है। भारत सरकार ने 2015 के भूकंप के बाद इस अस्पताल का पुनर्निर्माण कराया था। ऊंचाई पर स्थित होने की वजह से भोटेकोशी बाढ़ में घर छोड़ने को मजबूर सैकड़ों लोगों ने यहां शरण ली है। अस्पताल में 11 डॉक्टर बाढ़ प्रभावित लोगों का इलाज कर रहे हैं। यहां से जिले के अलग-अलग राहत केंद्रों में पहुंचाए गए लोगों को भी मेडिकल मदद दी जा रही है। भारत की मदद से चल रहा अस्पताल लोगों को रहने की जगह, इलाज और दूसरी जरूरी सुविधाएं दे रहा है। जहां पुल बह गए, वहां बेली ब्रिज से फिर जुड़ेंगे रास्ते बाढ़ में कई सड़कें और पुल बहने से दूरदराज के इलाकों का संपर्क टूट गया है। इसे बहाल करने के लिए भारत नेपाल को बेली ब्रिज भेज रहा है। बेली ब्रिज लोहे के हिस्सों से तैयार होने वाला अस्थायी पुल होता है। इसके हिस्सों को प्रभावित इलाके तक ले जाकर मौके पर जोड़ा जा सकता है। इससे स्थायी पुल बनने का इंतजार किए बिना सड़क संपर्क जल्दी बहाल किया जा सकता है। भारतीय दूतावास के मुताबिक, 230 फीट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के उपकरण लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं। सात और बेली ब्रिज लगाने के लिए उपकरण भी जल्द भेजे जाएंगे। इन्हें लगाने के लिए तकनीकी टीमें भी नेपाल पहुंचेंगी। नेपाल में 26 अगस्त को त्रिशूली नदी के ऊपर रसुवा जिले में एक पुल बाढ़ के साथ ही बह गया था। हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में भारतीय एक्सपर्ट बाढ़ के बाद नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे मजदूरों को ढूंढना है। नेपाल सरकार के मुताबिक कई सुरंगों में करीब 900 से ज्यादा कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है। 30 अगस्त को भारतीय सुरंग बचाव विशेषज्ञों की टीम नेपाल पहुंची। टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग के बाढ़ प्रभावित इलाकों में हाइड्रोपावर सुरंगों में कर्मचारियों की तलाश कर रही है। दिल्ली-एनसीआर के ‘रैट माइनर्स’ की टीम ने भी नेपाल के बचाव अभियान में शामिल होने की पेशकश की है। इसी टीम ने 2023 में उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई थी। भारतीय टनल रेस्क्यू टीम नेपाल में लगातार काम कर रही है। शवों के पहचान के लिए DNA जांच में भारत की मदद बाढ़ का पानी घटने के बाद अब नेपाल के सामने एक और बड़ी चुनौती बरामद शवों और लापता लोगों की पहचान करना है। इसके लिए भारत ने 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम नेपाल भेजी है। भारतीय विशेषज्ञ नेपाली टीम के साथ मिलकर DNA सैंपल की जांच कर रहे हैं। काठमांडू घाटी की दो लैब में यह काम किया जा रहा है। इनमें नेपाल पुलिस सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और खुमलटार की नेशनल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी शामिल हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक मंगलवार शाम तक 1,068 शव बरामद किए जा चुके थे। इनमें करीब 400 मामलों में सिर्फ शरीर के कुछ हिस्से मिले हैं। ऐसे मामलों में DNA जांच के जरिए मृतकों की पहचान करना बेहद जरूरी हो गया है। भारतीय टीम शवों के अवशेषों की DNA जांच कर रही है। ताकि शव परिजनों को सौंपे जा सकें। बाढ़ में तबाह स्कूल को भी दोबारा बनाएगा भारत भारत की मदद राहत और बचाव अभियान तक सीमित नहीं है। भारत ने नुवाकोट के बिदुर में बाढ़ से क्षतिग्रस्त त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल को दोबारा बनाने का फैसला भी किया है। यह स्कूल भारत-नेपाल सहयोग के लिहाज से भी अहम है। इसके पुराने भवन का संबंध भारत की विकास सहायता से रहा है। अब नई इमारत भी भारत के हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत बनाई जाएगी। आपदा के समय पड़ोसी देशों के साथ खड़ा रहा है भारत नेपाल में मौजूदा राहत अभियान आपदा के समय दूसरे देशों की मदद करने की भारत की नीति की एक और मिसाल है। 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने ऑपरेशन मैत्री के तहत बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया था। मार्च में म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भी भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत राहत और बचाव कार्यों में मदद की थी। नेपाल में इस बार भी भारत की भूमिका सिर्फ शुरुआती राहत तक सीमित नहीं है। इलाज से लेकर बचाव, सुरंगों में तलाश, टूटे रास्तों को जोड़ने, शवों की पहचान और पुनर्निर्माण तक भारत नेपाल की मदद में हर स्तर पर जुटा है। —————— नेपाल बाढ़ से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… नेपाल बाढ़ में कैसे बचा 40 साल पुराना ‘हरा घर’: मालिक बोला- नींव मजबूत बनाई, नदी किनारे घर था इसलिए ज्यादा ध्यान दिया था नेपाल में 26 अगस्त को त्रिशूली नदी की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। तेज बहाव में गाड़ियां, इमारतें और लोगों के सामान बह गए, लेकिन नुवाकोट जिले में नदी किनारे बना 40 साल पुराना हरा घर लगभग सुरक्षित बच गया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर 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Bank of India Recruitment 2026

Bank of India Recruitment 2026

23 मिनट पहले कॉपी लिंक बैंक ऑफ इंडिया में 205 पदों पर भर्ती निकली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट bankofindia.bank.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : ग्रेजुएशन की डिग्री। एज लिमिट : न्यूनतम : 21 साल अधिकतम : 42 साल सिलेक्शन प्रोसेस : शॉर्टलिस्टिंग ऑनलाइन परीक्षा पर्सनल इंटरव्यू मेरिट लिस्ट डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन फीस : सामान्य/ईडब्ल्यूएस/ओबीसी: 1,180 रुपए एससी/एसटी/पीडब्ल्यूडी: 175 रुपए ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट Bankofindia.co.in पर जाएं। होमपेज पर करियर टैब पर क्लिक करें। अप्लाई ऑनलाइन के लिए आवेदन लिंक पर क्लिक करें। रजिस्ट्रेशन करके फॉर्म भरें। फीस का भुगतान करके फॉर्म सब्मिट कर दें। आगे की जरूरत के लिए प्रिंटआउट लेकर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ———————————————————————————– ये खबर भी पढ़ें पोस्ट ऑफिस में 25,000 से ज्यादा पदों पर भर्ती:रेलवे में 1599 वैकेंसी; इस हफ्ते निकलीं 27 हजार से ज्यादा नौकरियां इस हफ्ते निकली हैं इंडिया पोस्ट ऑफिस और रेलवे सहित कई विभागों में 27,260 पदों पर नौकरियां। अगर आप भी इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो इन 5 नौकरियों की डिटेल्ड जानकारी 5 ग्राफिक्स के जरिए जानिए। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Mohan Bhagwat Toronto Speech | India Tradition Unity In Diversity

Mohan Bhagwat Toronto Speech | India Tradition Unity In Diversity

टोरंटो33 मिनट पहले कॉपी लिंक भागवत टोरंटो में ‘हिंदू विश्व बंधु’ कार्यक्रम में शामिल हुए। RSS प्रमुख मोहन भागवत सोमवार को टोरंटो में ‘हिंदू विश्व बंधु’ कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम में कहा कि मुश्किल वक्त में दूसरों की मदद करना भारत की पुरानी परंपरा रही है। दुनिया में कहीं भी संकट आया और भारत से मदद मांगी गई, तो भारत ने कभी पीछे हटकर इनकार नहीं किया। कई बार भारत ने बिना मदद मांगे भी दूसरों की सहायता की है। भागवत ने कहा- भारत में विविधता एकता के खिलाफ नहीं, बल्कि उसकी खूबसूरती है। देश में अलग-अलग जाति, पंथ, भाषाएं और संस्कृतियां हैं, लेकिन ये सभी एक ही समाज का हिस्सा हैं। उन्होंने विविधता को स्वीकार करने और उसका सम्मान करने की बात कही। उन्होंने कहा कि ‘ये मेरा, वो तुम्हारा’ जैसी सोच से ऊपर उठने की जरूरत है। अलग-अलग रूप और पहचान के बावजूद सभी में एक ही दिव्यता है। इसलिए दूसरों को अलग या पराया मानने के बजाय सभी के साथ भाईचारे और सेवा की भावना रखनी चाहिए। भागवत बोले- भारत ने मुस्लिम-ईसाई, सभी को स्वीकार किया भागवत ने कहा कि हिंदू सभी का सम्मान और स्वीकार करते हैं। दुनिया में कहीं किसी पर अत्याचार हुआ और उसने शरण मांगी, तो उसे भारत में जगह मिली। भारत में मुस्लिम, ईसाई, यहूदी, पारसी और दूसरे समुदाय रहते हैं। लोग सिर्फ शरण लेने ही नहीं, बल्कि ज्ञान हासिल करने के लिए भी भारत आए हैं। उन्होंने कहा कि इंसान को फूल की तरह होना चाहिए। कली फूल बने और अपनी खुशबू पूरे वातावरण में फैलाए। इसी तरह व्यक्ति को विकसित होकर मानवता के लिए समर्पित होना चाहिए। एक हिंदू की सोच यह होनी चाहिए कि मुझे भी आगे बढ़ना है, मुझे सफल होना है, क्योंकि मुझे सेवा करनी है। भागवत के भाषण की 5 बड़ी बातें विविधता एकता की अभिव्यक्ति है: भागवत ने कहा कि भारत में विविधता कभी एकता के लिए समस्या नहीं रही। भारतीय परंपरा सिर्फ ‘विविधता में एकता’ की बात नहीं करती, बल्कि विविधता को ही एकता का हिस्सा मानती है। इसे स्वीकार करना, सम्मान देना और सेलिब्रेट करना चाहिए। अलग-अलग हैं, लेकिन सब एक हैं: उन्होंने कहा कि भारत में कई जातियां, पंथ और भाषाएं हैं। सब कुछ अलग-अलग है, लेकिन “हम यह नहीं कहते कि सभी एक जैसे हैं, हम कहते हैं कि सब एक हैं।” उनके मुताबिक, विविधता प्रकृति का स्वभाव है, जबकि एकता वास्तविकता है। हर चीज में दिव्यता है: भागवत ने कहा कि ईश्वर ने जो कुछ बनाया है, वह अलग-अलग रूप, आकार और रंगों में उसकी सुंदरता और पवित्रता को दिखाता है। हर चीज दिव्य है, इसलिए हर चीज एक है। ‘मेरा-तुम्हारा’ की सोच संकीर्णता है: उन्होंने कहा कि अगर हम सोचते हैं कि “यह मेरा है और वह तुम्हारा है”, तो यह सही नहीं है। दुनिया की हर चीज को अपना मानना चाहिए, लेकिन मालिक के तौर पर नहीं, भाई के तौर पर। शरीर, रंग और रूप अलग होने के बावजूद हर व्यक्ति की गरिमा और महत्व बराबर है। दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है: भागवत ने कहा कि जब हम सभी को एक मानते हैं, तो दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य बन जाता है। यह सोच इंसान को ऐसी खुशी और संतुष्टि देती है जो स्थायी होती है। उन्होंने कहा कि भारत को मिला यह ज्ञान दुनिया के साथ साझा करना भी हमारा कर्तव्य है। कार्यक्रम में 8 प्रांतों से पहुंचे 2,500 से ज्यादा लोग टोरंटो में ‘हिंदू विश्व बंधु’ कार्यक्रम का आयोजन कैनेडियन हिंदूज फॉर आउटरीच, रिलेशंस एंड डायलॉग (CHORD) ने किया था। कार्यक्रम में पूर्व कनाडाई रक्षा मंत्री और अल्बर्टा के पूर्व प्रीमियर जेसन केनी भी मौजूद थे। आयोजकों के मुताबिक, कनाडा के आठ प्रांतों से 2,500 से ज्यादा लोग पहुंचे। मोहन भागवत 17 दिनों के तीन देशों के विदेश दौरे पर हैं और कनाडा उनके दौरे का दूसरा पड़ाव है। वह 25 अगस्त को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। अमेरिका में कार्यक्रमों के बाद अब वे कनाडा पहुंचे हैं। दौरे में अमेरिका और कनाडा के बाद ब्रिटेन भी शामिल है। —————————— भागवत से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… न्यूयॉर्क में भागवत के कार्यक्रम से पहले तिरंगे का अपमान, रिजिजू बोले- RSS या भाजपा की आलोचना करने की आजादी लेकिन देश का अपमान महंगा पड़ेगा केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने न्यूयॉर्क में RSS प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम स्थल के बाहर भारतीय झंडे के अपमान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। रिजिजू ने घटना का वीडियो शेयर करते हुए लिखा- हमने हमेशा कहा है कि RSS, BJP या सरकार की आलोचना करने की आजादी है, लेकिन हमारे झंडे और मेरे देश का अपमान मत करो। यह बहुत महंगा पड़ेगा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…