Thursday, 17 Sep 2026 | 04:15 AM

Trending :

EXCLUSIVE

Delhi BRICS Summit 2026 | Xi Jinping India Visit & Border Dispute Talks

Delhi BRICS Summit 2026 | Xi Jinping India Visit & Border Dispute Talks

नई दिल्ली16 मिनट पहलेलेखक: मुकेश कौशिक कॉपी लिंक तस्वीर प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 2024 में रूस के कजान में हुई मुलाकात की है। दोनों नेता BRICS समिट में शामिल होने पहुंचे थे। भारत में 12-13 सितंबर को 18वां BRICS सम्मेलन होने जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि है। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी भारत आने की तैयारियां चल रही हैं। अगर जिनपिंग भारत आते हैं तो यह करीब 7 साल बाद उनकी भारत यात्रा होगी। इससे पहले वे अक्टूबर 2019 में भारत आए थे। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, चीन की ओर से जिनपिंग के दौरे की अभी औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, दोनों देशों की एडवांस टीमों के दौरे और अन्य तैयारियों से उनके भारत आने की संभावना जताई जा रही है। जिनपिंग के दौरे से पहले भारत और चीन के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत चल रही है। जिनपिंग से बातचीत में सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दा जिनपिंग के भारत दौरे की तैयारियों में LAC पर शांति और सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दों में है। दोनों देश सीमा पर ऐसी व्यवस्था बनाने पर बात कर रहे हैं, जिससे किसी सैन्य घटना या तनाव का असर द्विपक्षीय रिश्तों पर न पड़े। जिनपिंग की संभावित यात्रा से पहले NSA अजीत डोभाल सीमा मुद्दे पर 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता के लिए बीजिंग जा सकते हैं। वहां उनकी चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात हो सकती है। बातचीत में सीमा प्रबंधन, तनाव कम करने और स्थायी शांति के उपायों पर फोकस रहेगा। भारत-चीन रिश्तों में धीरे-धीरे कम हो रहा तनाव पिछले करीब दो साल में भारत और चीन के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं। अक्टूबर 2024: कजान में मोदी-शी की मुलाकात से पहले पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध खत्म करने पर सहमति बनी। 2025: कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू हुई और प्रधानमंत्री मोदी ने चीन जाकर शी जिनपिंग से मुलाकात की। मार्च 2026: भारत ने चीनी निवेश से जुड़े कुछ नियमों में ढील दी। जून 2026: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दिल्ली में अजीत डोभाल से मुलाकात की। जुलाई 2026: विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बीजिंग का दौरा किया। इसके बाद सीमा वार्ता और जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा की तैयारियां आगे बढ़ीं। व्यापार और जरूरी सामान की सप्लाई भी एजेंडे में भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी बातचीत का हिस्सा हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा व्यापार और वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी चर्चा चल रही है। 1 अगस्त से उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के शिपकी ला दर्रों से सीमा व्यापार शुरू हो चुका है। कैलाश मानसरोवर यात्रा भी बहाल है। पुतिन के साथ जिनपिंग भी आए तो अहम होगी मुलाकात BRICS सम्मेलन में पुतिन और जिनपिंग दोनों के आने से भारत के लिए यह कूटनीतिक रूप से अहम बैठक बन सकती है। सम्मेलन के दौरान मोदी-जिनपिंग की संभावित मुलाकात में LAC पर शांति, सीमा विवाद, व्यापार और दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य करने जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। —————————– खबर अपडेट हो रही है…. ट्रम्प का ईरान पर सबसे बड़े आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान:बोले- जो देश मदद करेंगे, उन पर भी एक्शन लेंगे; तेल तस्करी नेटवर्क निशाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौते का मौका गंवा दिया, इसलिए अब उसे आर्थिक तौर पर अलग-थलग किया जाएगा। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Delhi BRICS Summit 2026 | Xi Jinping India Visit & Border Dispute Talks

Delhi BRICS Summit 2026 | Xi Jinping India Visit & Border Dispute Talks

नई दिल्ली32 मिनट पहलेलेखक: मुकेश कौशिक कॉपी लिंक तस्वीर प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 2024 में रूस के कजान में हुई मुलाकात की है। दोनों नेता BRICS समिट में शामिल होने पहुंचे थे। भारत में 12-13 सितंबर को 18वां BRICS सम्मेलन होने जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि है। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी भारत आने की तैयारियां चल रही हैं। अगर जिनपिंग भारत आते हैं तो यह करीब 7 साल बाद उनकी भारत यात्रा होगी। इससे पहले वे अक्टूबर 2019 में भारत आए थे। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, चीन की ओर से जिनपिंग के दौरे की अभी औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, दोनों देशों की एडवांस टीमों के दौरे और अन्य तैयारियों से उनके भारत आने की संभावना जताई जा रही है। जिनपिंग के दौरे से पहले भारत और चीन के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत चल रही है। जिनपिंग से बातचीत में सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दा जिनपिंग के भारत दौरे की तैयारियों में LAC पर शांति और सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दों में है। दोनों देश सीमा पर ऐसी व्यवस्था बनाने पर बात कर रहे हैं, जिससे किसी सैन्य घटना या तनाव का असर द्विपक्षीय रिश्तों पर न पड़े। जिनपिंग की संभावित यात्रा से पहले NSA अजीत डोभाल सीमा मुद्दे पर 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता के लिए बीजिंग जा सकते हैं। वहां उनकी चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात हो सकती है। बातचीत में सीमा प्रबंधन, तनाव कम करने और स्थायी शांति के उपायों पर फोकस रहेगा। भारत-चीन रिश्तों में धीरे-धीरे कम हो रहा तनाव पिछले करीब दो साल में भारत और चीन के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं। अक्टूबर 2024: कजान में मोदी-शी की मुलाकात से पहले पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध खत्म करने पर सहमति बनी। 2025: कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू हुई और प्रधानमंत्री मोदी ने चीन जाकर शी जिनपिंग से मुलाकात की। मार्च 2026: भारत ने चीनी निवेश से जुड़े कुछ नियमों में ढील दी। जून 2026: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दिल्ली में अजीत डोभाल से मुलाकात की। जुलाई 2026: विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बीजिंग का दौरा किया। इसके बाद सीमा वार्ता और जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा की तैयारियां आगे बढ़ीं। व्यापार और जरूरी सामान की सप्लाई भी एजेंडे में भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी बातचीत का हिस्सा हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा व्यापार और वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी चर्चा चल रही है। 1 अगस्त से उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के शिपकी ला दर्रों से सीमा व्यापार शुरू हो चुका है। कैलाश मानसरोवर यात्रा भी बहाल है। पुतिन के साथ जिनपिंग भी आए तो अहम होगी मुलाकात BRICS सम्मेलन में पुतिन और जिनपिंग दोनों के आने से भारत के लिए यह कूटनीतिक रूप से अहम बैठक बन सकती है। सम्मेलन के दौरान मोदी-जिनपिंग की संभावित मुलाकात में LAC पर शांति, सीमा विवाद, व्यापार और दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य करने जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। —————————– खबर अपडेट हो रही है…. ट्रम्प का ईरान पर सबसे बड़े आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान:बोले- जो देश मदद करेंगे, उन पर भी एक्शन लेंगे; तेल तस्करी नेटवर्क निशाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौते का मौका गंवा दिया, इसलिए अब उसे आर्थिक तौर पर अलग-थलग किया जाएगा। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Bangladesh Demands Guarantee Clause in Ganga Water Treaty with India

Bangladesh Demands Guarantee Clause in Ganga Water Treaty with India

दिल्ली/ढाका16 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश, भारत के साथ गंगा जल संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करना चाहता है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। शाहिदुद्दीन ने कहा कि जरूरी हुआ तो बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मंच का रुख भी कर सकता है। दरअसल, बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो जाएगी। इस समझौते के तहत सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे की व्यवस्था की गई है। ऐसे में ढाका गारंटी क्लॉज में न्यूनतम जल प्रवाह की बात शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि सूखे मौसम में जरूरत के मुताबिक पानी उपबल्ध नहीं कराती है। भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि की शर्त के बारे में जानिए जब नदी में भरपूर पानी हो (75,000 क्यूसेक से ज्यादा) – भारत अपने पास 40,000 क्यूसेक पानी रखता है और बाकी का सारा पानी बांग्लादेश को दे दिया जाता है। जब पानी थोड़ा कम हो (70,000 से 75,000 क्यूसेक) – बांग्लादेश को तय 35,000 क्यूसेक पानी मिलता है और बचा हुआ भारत रखता है। जब पानी बहुत कम हो (70,000 क्यूसेक से कम) – जितना भी पानी उपलब्ध होता है, उसे आधा-आधा (50:50) बांट लिया जाता है। यह समझौता 1 जनवरी से 31 मई तक के लिए लागू होता है। इस दौरा गंगा नदी में पानी अपेक्षाकृत कम रहता है। बांग्लादेश को क्यों चाहिए गारंटी बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि में पानी बांटने का फॉर्मूला तो है, लेकिन तय मात्रा में पानी मिलने की कानूनी गारंटी नहीं है। इसलिए वह नई संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ जोड़ने की मांग कर रहा है। गारंटी क्लॉज ऐसा नियम है, जो सुनिश्चित करता है कि नदी के निचले हिस्से में बसे देश को भी जरूरत का पानी मिलता रहे। इसका मतलब है कि अगर नदी में पानी कम भी हो जाए, तब भी उसे एक तय मात्रा में पानी दिया जाएगा। बांग्लादेश चाहता है कि अगर किसी साल पानी कम हो या किसी कारण से समझौते का पालन न हो, तो उसका समाधान कैसे होगा और किसकी क्या जिम्मेदारी होगी, यह भी समझौते में साफ लिखा जाए। बांग्लादेश का कहना है कि 1977 के गंगा जल समझौते में यह व्यवस्था थी, लेकिन 1996 की संधि में इसे शामिल नहीं किया गया। इसलिए वह नई संधि में इस प्रावधान को जोड़ने की मांग कर रहा है। ————————— यह खबर पढ़ें… पाकिस्तान बोला- ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगेंडा: इसमें सिर्फ भारत का पक्ष, हकीकत नहीं ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने डॉक्यूमेंट्री को प्रोपेगेंडा बताया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Bangladesh Demands Guarantee Clause in Ganga Water Treaty with India

Bangladesh Demands Guarantee Clause in Ganga Water Treaty with India

दिल्ली/ढाका5 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश, भारत के साथ गंगा जल संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करना चाहता है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। शाहिदुद्दीन ने कहा कि जरूरी हुआ तो बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मंच का रुख भी कर सकता है। दरअसल, बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो जाएगी। इस समझौते के तहत सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे की व्यवस्था की गई है। ऐसे में ढाका गारंटी क्लॉज में न्यूनतम जल प्रवाह की बात शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि सूखे मौसम में जरूरत के मुताबिक पानी उपबल्ध नहीं कराती है। भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि की शर्त के बारे में जानिए 70 हजार क्यूसेक या उससे कम: दोनों को 50-50% पानी 70 से 75 हजार क्यूसेक: बांग्लादेश को 35 हजार क्यूसेक, बाकी भारत को 75 हजार क्यूसेक या ज्यादा: भारत को 40 हजार क्यूसेक, बाकी बांग्लादेश कोयह समझौता 1 जनवरी से 31 मई तक के लिए लागू होता है। इस दौरा गंगा नदी में पानी अपेक्षाकृत कम रहता है। बांग्लादेश को गारंटी क्यों चाहिए बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि में पानी बांटने का फॉर्मूला तो है, लेकिन तय मात्रा में पानी मिलने की कानूनी गारंटी नहीं है। इसलिए वह नई संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ जोड़ने की मांग कर रहा है। गारंटी क्लॉज ऐसा नियम है, जो सुनिश्चित करता है कि नदी के निचले हिस्से में बसे देश को भी जरूरत का पानी मिलता रहे। इसका मतलब है कि अगर नदी में पानी कम भी हो जाए, तब भी उसे एक तय मात्रा में पानी दिया जाएगा। बांग्लादेश चाहता है कि अगर किसी साल पानी कम हो या किसी कारण से समझौते का पालन न हो, तो उसका समाधान कैसे होगा और किसकी क्या जिम्मेदारी होगी, यह भी समझौते में साफ लिखा जाए। बांग्लादेश का कहना है कि 1977 के गंगा जल समझौते में यह व्यवस्था थी, लेकिन 1996 की संधि में इसे शामिल नहीं किया गया। इसलिए वह नई संधि में इस प्रावधान को जोड़ने की मांग कर रहा है। फरक्का बैराज बनने के बाद शुरू हुआ था विवाद भारत ने सत्तर के दशक में पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज बनाया था। इसका मकसद गंगा के पानी के एक हिस्से को हुगली नदी की तरफ भेजना था, ताकि हुगली में पानी का बहाव बढ़े और कोलकाता बंदरगाह में जमा होने वाली गाद को कम करने में मदद मिले। गाद कम करना इसलिए जरूरी था क्योंकि मिट्टी और कीचड़ जमा होने के कारण बंदरगाह और हुगली नदी की गहराई लगातार घट रही थी। इससे कोलकाता बंदरगाह के ठप होने का खतरा था। समस्या यह थी कि गंगा भारत से निकलकर बांग्लादेश में भी जाती है। इसलिए भारत ने जब पानी का कुछ हिस्सा अपनी तरफ मोड़ दिया तो इससे वहां जाने वाले पानी की मात्रा कम होने लगी। फरक्का बैराज का निर्माण 1962 में शुरू हुआ था। यह 1975 में बनकर तैयार हुआ। इससे बांग्लादेश में कई तरह की समस्याएं बताई गईं- सिंचाई के लिए पानी कम पड़ना खेती प्रभावित होना मछलियों और जलीय जीवन पर असर नदी में गाद बढ़ना खारे पानी का ऊपर की ओर आना नदी और आसपास के पर्यावरण पर असर 1977 में पहली बार दोनों देशों में समझौता फरक्का को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक विवाद चलता रहा। भारत का कहना था कि फरक्का से पानी मोड़ना उसके लिए जरूरी है, जबकि बांग्लादेश लगातार अपने हिस्से के पानी की मांग करता रहा। आखिरकार दोनों देशों ने पानी को लेकर अलग-अलग समझौते किए। 1977 में एक समझौता हुआ, जिसमें पानी के बंटवारे के साथ एक गारंटी क्लॉज भी था। यानी कुछ परिस्थितियों में बांग्लादेश को न्यूनतम मात्रा में पानी मिलने की गारंटी दी गई थी। 1977 का समझौता सिर्फ 5 साल के लिए था और 1982 में खत्म हो गया। इसके बाद 1982 और 1985 के समझौता ज्ञापनों में भी गारंटी क्लॉज नहीं था। बाद में 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच 30 साल के लिए गंगा जल समझौता हुआ। इसमें सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे का फॉर्मूला तय किया गया। इसमें पानी देने की न्यूनतम मात्रा की गारंटी नहीं दी गई। इसके बजाय कहा गया कि दोनों देश तुरंत बातचीत करके आपात स्थिति में पानी के बंटवारे में बदलाव करेंगे। असल दिक्कत यहीं से शुरू हुई कि 1996 के समझौते में ‘पानी कम पड़ने पर क्या करना है’ तो लिखा गया, लेकिन यह साफ नहीं लिखा गया कि उस स्थिति में बांग्लादेश को कम से कम कितना पानी मिलना ही चाहिए। ————————— यह खबर पढ़ें… पाकिस्तान बोला- ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगेंडा: इसमें सिर्फ भारत का पक्ष, हकीकत नहीं ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने डॉक्यूमेंट्री को प्रोपेगेंडा बताया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

बांग्लादेश बोला- पूर्व पीएम शेख हसीना को वापस भेजो:बातचीत के लिए सही माहौल जरूरी, प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा टली

बांग्लादेश बोला- पूर्व पीएम शेख हसीना को वापस भेजो:बातचीत के लिए सही माहौल जरूरी, प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा टली

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित दिल्ली यात्रा फिलहाल टलती नजर आ रही है। दोनों देशों के बीच कई हफ्तों से यात्रा की तारीख को लेकर बातचीत चल रही थी, लेकिन रविवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा हालात में यात्रा के लिए सही माहौल नहीं है। ढाका में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ए.के. शाहिदुल करीम ने कहा कि भारत शेख हसीना बांग्लादेश वापस भेजा जाए। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान 21 अगस्त को पहली बार भारत दौरे पर आने वाले थे। हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बिगड़ा माहौल ढाका में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता करीम ने 5 अगस्त को नई दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस का खास तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हसीना ने भारत की जमीन से राजनीतिक बयान दिए, जिससे यात्रा के लिए बना माहौल खराब हुआ। बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहरा चुकी है। करीम ने कहा कि बांग्लादेश पहले भी इस मुद्दे पर अपना रुख साफ कर चुका है। ढाका चाहता है कि तारिक की यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच सही व्यवस्था बनाया जाए। ढाका ने भारत के सामने रखीं 2 मांगें बांग्लादेश ने भारत के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। करीम ने कहा कि अब ढाका भारत के जवाब का इंतजार कर रहा है। हालांकि, विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में यह साफ नहीं हुआ कि यात्रा की तारीख पर बातचीत किस स्तर पर अटकी है। भारत ने तारि दिल्ली आने का न्योता दिया भारत की ओर से तारिक रहमान को दिल्ली आने का न्योता पहले ही दिया जा चुका है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला जब तारिक के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में ढाका पहुंचे थे, तब उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से यह निमंत्रण दिया था। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने हाल ही में कहा था कि बिम्सटेक के मौजूदा अध्यक्ष होने के नाते तारिक को सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने का भी न्योता मिला है। इससे पहले दोनों देशों के बीच अगस्त के तीसरे हफ्ते में तारिक की दो दिन की दिल्ली यात्रा को लेकर बातचीत की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, तब भी तारीख पर अंतिम फैसला नहीं हुआ था। हाई कमिश्नर से मुलाकात के बाद यात्रा की उम्मीद बढ़ी थी इसी तनाव के बीच भारत के बांग्लादेश में हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने 10 अगस्त को प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। ढाका में पद संभालने के बाद यह तारिक के साथ उनकी पहली औपचारिक मुलाकात थी। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री प्रेस विंग के मुताबिक, दोनों के बीच कई अहम द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत हुई। इस दौरान ढाका ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की उम्मीद भी जताई। मुलाकात के बाद त्रिवेदी ने बातचीत को ‘बहुत अच्छी’ बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश आगे की ओर देख रहे हैं और द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर सकारात्मक सोच है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन लोगों के हित में अच्छे रिश्ते बनाए रखना दोनों की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके कुछ ही घंटों बाद त्रिवेदी नई दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके बाद तारिक की दिल्ली यात्रा को लेकर उम्मीदें बढ़ी थीं। लेकिन कुछ ही दिनों में ढाका का रुख फिर सख्त नजर आने लगा है।

Bangladesh PM Tarique Rahman Delhi Visit Postponed

Bangladesh PM Tarique Rahman Delhi Visit Postponed

ढाकाकुछ ही क्षण पहलेलेखक: मोहम्मद अरिफुल इस्लाम कॉपी लिंक बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान का भारत दौरा फिलहाल टल गया है। ढाका के विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि पहले भारत पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भेजे। इसके बाद ही पीएम रहमान के भारत दौरे की तैयारियां आगे बढ़ेंगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ए.के. शाहिदुल करीम ने कहा कि मौजूदा हालात में यात्रा के लिए सही माहौल नहीं है। बांग्लादेशी प्रधानमंत्री 21 अगस्त को दिल्ली आने वाले थे। इस दौरे को लेकर दोनों देशों में बातचीत चल रही थी। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ए.के. शाहिदुल करीम ने रविवार को ढाका में मीडिया से बात की। हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बिगड़ा माहौल शाहिदुल करीम ने कहा- नई दिल्ली में 5 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने भारत की जमीन से राजनीतिक बयान दिए। इससे यात्रा के लिए बना माहौल खराब हुआ। करीम ने कहा कि बांग्लादेश पहले भी इस मुद्दे पर अपना रुख साफ कर चुका है। हम चाहते हैं कि पीएम तारिक की यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच सही माहौल बना सकें। तारिक के अगस्त के तीसरे हफ्ते में भारत आने की खबरें आई थीं। बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहरा चुकी है। बांग्लादेश ने भारत के सामने 2 मांगें रखीं पहली मांग: भारत शेख हसीना और दूसरे फरार आरोपियों को दोनों देशों के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि के तहत बांग्लादेश वापस भेजे। दूसरी मांग: शाहिद शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामले में आरोपियों को बांग्लादेश को सौंपा जाए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अब बांग्लादेश भारत के जवाब का इंतजार कर रहा है। पीएम रहमान की पार्टी उनकी भारत यात्रा के खिलाफ तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर बांग्लादेश में राजनीतिक विरोध भी हो रहा है। रूलिंग पार्टी BNP के नेताओं ने भारत में शेख हसीना की राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं। 2024 में आंदोलन में बनी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता ने कहा- जब तक शेख हसीना के प्रत्यर्पण और भारत-बांग्लादेश के रिश्तों पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक तारिक रहमान को भारत नहीं जाना चाहिए। NCP बोली कि नई दिल्ली में हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस भारत सरकार के सीधे या परोक्ष समर्थन से हुई। दिल्ली से हसीना के दिए गए बयान को सिर्फ उनकी निजी राय नहीं माना जा सकता। इससे भारत के रुख का भी संकेत मिलता है। भारत ने तारिक को दिल्ली आने का न्योता दिया था भारत की ओर से तारिक रहमान को दिल्ली आने का न्योता पहले ही दिया जा चुका है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला 17 फरवरी को तारिक के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में ढाका पहुंचे थे, तब उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उन्हें निमंत्रण दिया था। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने कहा था कि बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों के अंतरराष्ट्रीय संगठन का अध्यक्ष होने के नाते तारिक को सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने का भी न्योता मिला है। भारतीय हाई कमिश्नर ने पीएम तारिक से मुलाकात की बांग्लादेश में भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने 10 अगस्त को प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। दोनों के बीच कई अहम द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत हुई। इस दौरान ढाका ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की उम्मीद भी जताई। बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान और भारत के बांग्लादेश में हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी हाथ मिलाते हुए। मुलाकात के बाद त्रिवेदी ने कहा कि दोनों देश आगे की ओर देख रहे हैं और द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर सकारात्मक सोच है। इसके कुछ ही घंटों बाद त्रिवेदी नई दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके बाद तारिक की दिल्ली यात्रा को लेकर उम्मीदें बढ़ी थीं। ——————- यह खबर भी पढ़ें… शेख हसीना बोलीं- दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी:2 साल बाद वर्चुअल भाषण दिया, कैमरा ऑफ था; बांग्लादेश सरकार बोली- दिल्ली में बैठकर जहर उगला बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दो साल बाद बुधवार को लोगों को वर्चुअली संबोधित किया। जब हसीना बोल रही थीं, उस दौरान उनका कैमरा बंद था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Bangladesh PM Tariq Rahman India Visit

Bangladesh PM Tariq Rahman India Visit

ढाका1 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान की फाइल फोटो। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान 21 अगस्त को पहली बार भारत दौरे पर आ सकते हैं। यात्रा की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इसे अंतिम रूप देने से पहले दोनों देशों के बीच कुछ अहम मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का है। ढाका से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश चाहता है कि भारत में रह रहीं शेख हसीना को राजनीतिक गतिविधियां चलाने या बांग्लादेश की राजनीति को प्रभावित करने वाले बयान देने की अनुमति न दी जाए। तारिक रहमान ने 17 फरवरी को ढाका में राष्ट्रीय संसद भवन में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। हसीना के बयानों से बांग्लादेश सरकार नाराज शेख हसीना अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद से भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश का आरोप है कि वह भारत से लगातार राजनीतिक बयान दे रही हैं। ढाका का कहना है कि इससे देश की आंतरिक राजनीति प्रभावित हो रही है और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है। बांग्लादेशी अधिकारियों के मुताबिक, भारत की ओर से इस मुद्दे पर कुछ अच्छे संकेत मिले हैं। लेकिन ढाका चाहता है कि भारत का रुख और स्पष्ट हो, ताकि तारिक रहमान की यात्रा से पहले इस मुद्दे को लेकर कोई गलतफहमी न रहे। 5 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बढ़ा तनाव दरअसल इसी महीने 5 तारीख को शेख हसीना ने वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें उन्होंने अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने की दूसरी बरसी पर पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए और बांग्लादेश की राजनीति पर भी अपनी बात रखी। इस पर बांग्लादेश सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई। ढाका का कहना था कि भारत में रहते हुए हसीना का सार्वजनिक रूप से राजनीतिक बयान देना दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस की इजाजत पर फिर बढ़ा तनाव बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार इस घटनाक्रम से ‘नाराज और निराश’ है। मंत्रालय ने आपत्ति जताई कि मानवता के खिलाफ अपराध के एक मामले में मौत की सजा पा चुकी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की अनुमति दी गई। विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने पहले ही भारत को आगाह किया था कि इस तरह के घटनाएं दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। गौरतलब है कि भारत ने शेख हसीना का प्रेस कॉन्फ्रेंस रोकने से इनकार कर दिया था। भारत ने कहा था कि उनका कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था आयोजित कर रही है। इससे सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। BNP के साथ NCP भी यात्रा के खिलाफ तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर बांग्लादेश में राजनीतिक विरोध भी हो रहा है। सत्तारूढ़ BNP के नेताओं ने भारत में शेख हसीना की राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं। वहीं, 2024 में आंदोलन से पैदा हुई नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने भी तारिक रहमान की भारत यात्रा का विरोध किया है। NCP नेता ने कहा कि जब तक शेख हसीना के प्रत्यर्पण और भारत-बांग्लादेश के रिश्तों के नए ढांचे पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक तारिक रहमान को भारत नहीं जाना चाहिए। नाहिद ने यह भी आरोप लगाया कि नई दिल्ली में हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस भारत सरकार के सीधे या परोक्ष समर्थन से हुई। उनके मुताबिक, दिल्ली से हसीना के दिए गए बयान को सिर्फ उनकी निजी राय नहीं माना जा सकता। इससे भारत के रुख का भी संकेत मिलता है। विरोध के बावजूद यात्रा की तैयारियां जारी राजनीतिक विरोध के बावजूद दोनों देशों के बीच तारिक रहमान की यात्रा की तैयारियां चल रही हैं। भारतीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह अगले हफ्ते के बीच में दो दिन के दौरे पर नई दिल्ली आ सकते हैं। यात्रा की तारीख 21 या 22 अगस्त बताई जा रही है। हालांकि, अंतिम कार्यक्रम में एक-दो दिन का बदलाव हो सकता है। भारत ने बिम्सटेक का मौजूदा अध्यक्ष होने के नाते तारिक रहमान को सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी शामिल होने का न्योता दिया है। हालांकि, वह इस सम्मेलन में जाएंगे या नहीं, इसका अभी फैसला नहीं हुआ है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Bangladesh PM Tariq Rahman India Visit

Bangladesh PM Tariq Rahman India Visit

ढाका16 मिनट पहलेलेखक: मोहम्मद अरिफुल इस्लाम कॉपी लिंक इनसेट- बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (बाएं) और करेंट पीएम तारिक रहमान (दाएं)। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान 21 अगस्त को पहली बार भारत दौरे पर आ सकते हैं। यात्रा की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इसे अंतिम रूप देने से पहले दोनों देशों के बीच कुछ अहम मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का है। ढाका से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश चाहता है कि भारत में रह रहीं शेख हसीना को राजनीतिक गतिविधियां चलाने या बांग्लादेश की राजनीति को प्रभावित करने वाले बयान देने की अनुमति न दी जाए। तारिक रहमान ने 17 फरवरी को पीएम पद की शपथ ली। बांग्लादेश में 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री बना। हसीना के बयानों से बांग्लादेश सरकार नाराज शेख हसीना अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद से भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश का आरोप है कि वह भारत से लगातार राजनीतिक बयान दे रही हैं। ढाका का कहना है कि इससे देश की आंतरिक राजनीति प्रभावित हो रही है और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है। बांग्लादेशी अधिकारियों के मुताबिक, भारत की ओर से इस मुद्दे पर कुछ अच्छे संकेत मिले हैं। लेकिन ढाका चाहता है कि भारत का रुख और स्पष्ट हो, ताकि तारिक रहमान की यात्रा से पहले इस मुद्दे को लेकर कोई गलतफहमी न रहे। 5 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बढ़ा तनाव दरअसल इसी महीने 5 तारीख को शेख हसीना ने वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें उन्होंने अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने की दूसरी बरसी पर पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए और बांग्लादेश की राजनीति पर भी अपनी बात रखी। इस पर बांग्लादेश सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई। ढाका का कहना था कि भारत में रहते हुए हसीना का सार्वजनिक रूप से राजनीतिक बयान देना दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकता है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस बारे में भारत को पहले आगाह किया गया था लेकिन फिर भी भारत ने उन्हें यह प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की अनुमति दी। गौरतलब है कि भारत ने शेख हसीना का प्रेस कॉन्फ्रेंस रोकने से इनकार कर दिया था। भारत ने कहा था कि उनका कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था आयोजित कर रही है। इससे सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। शेख हसीना ने 5 अगस्त 2024 को देश छोड़ा था। इसके बाद से वह नजर नहीं आई हैं। यह फुटेज उनके हेलिकॉप्टर में बैठने से पहले की है। पीएम रहमान की पार्टी उनके भारत यात्रा के खिलाफ तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर बांग्लादेश में राजनीतिक विरोध भी हो रहा है। रूलिंग पार्टी BNP के नेताओं ने भारत में शेख हसीना की राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं। वहीं, 2024 में आंदोलन से पैदा हुई नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने भी तारिक रहमान की भारत यात्रा का विरोध किया है। NCP नेता ने कहा कि जब तक शेख हसीना के प्रत्यर्पण और भारत-बांग्लादेश के रिश्तों के नए ढांचे पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक तारिक रहमान को भारत नहीं जाना चाहिए। नाहिद ने यह भी आरोप लगाया कि नई दिल्ली में हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस भारत सरकार के सीधे या परोक्ष समर्थन से हुई। उनके मुताबिक, दिल्ली से हसीना के दिए गए बयान को सिर्फ उनकी निजी राय नहीं माना जा सकता। इससे भारत के रुख का भी संकेत मिलता है। विरोध के बावजूद यात्रा की तैयारियां जारी राजनीतिक विरोध के बावजूद दोनों देशों के बीच तारिक रहमान की यात्रा की तैयारियां चल रही हैं। भारतीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह अगले हफ्ते के बीच में दो दिन के दौरे पर नई दिल्ली आ सकते हैं। यात्रा की तारीख 21 या 22 अगस्त बताई जा रही है। हालांकि, अंतिम कार्यक्रम में एक-दो दिन का बदलाव हो सकता है। भारत ने बिम्सटेक का मौजूदा अध्यक्ष होने के नाते तारिक रहमान को सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी शामिल होने का न्योता दिया है। हालांकि, वह इस सम्मेलन में जाएंगे या नहीं, इसका अभी फैसला नहीं हुआ है। बिजली कटौतियों के बीच भारत से डीजल मांग रहा बांग्लादेश बांग्लादेश में बिजली संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। देश के कई हिस्सों में रोज 8 से 10 घंटे तक बिजली कट रही है। बिजली संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश ने अब भारत से अतिरिक्त डीजल देने की मांग की है। बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद ने पिछले हफ्ते भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी से मुलाकात के दौरान ज्यादा डीजल की मांग रखी थी। महमूद ने पत्रकारों से कहा कि भारत के साथ एक पाइपलाइन है, जिससे बांग्लादेश को डीजल मिलता है। उन्होंने भारत से इसकी सप्लाई बढ़ाने का अनुरोध किया है। भारत और बांग्लादेश के बीच इंडिया-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन 2017 में शुरू हुई थी। दोनों देशों के बीच 15 साल का समझौता है। इसके तहत भारत को हर साल बांग्लादेश को 1.80 लाख मीट्रिक टन डीजल देना है। पश्चिम एशिया में हालिया संकट के दौरान भारत मार्च और अप्रैल में बांग्लादेश को पहले ही 30 हजार टन से ज्यादा डीजल भेज चुका है। ——————– यह खबर भी पढ़ें… शेख हसीना बोलीं- दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी:2 साल बाद वर्चुअल भाषण दिया, कैमरा ऑफ था; बांग्लादेश सरकार बोली- दिल्ली में बैठकर जहर उगला बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दो साल बाद बुधवार को लोगों को वर्चुअली संबोधित किया। जब हसीना बोल रही थीं, उस दौरान उनका कैमरा बंद था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

पाकिस्तानी PM बोले- भारत पानी रोकेगा तो मुंहतोड़ जवाब देंगे:कश्मीर पर रुख कभी नहीं बदलेंगे, मुनीर की लीडरशिप में हमने दुश्मन को हराया

पाकिस्तानी PM बोले- भारत पानी रोकेगा तो मुंहतोड़ जवाब देंगे:कश्मीर पर रुख कभी नहीं बदलेंगे, मुनीर की लीडरशिप में हमने दुश्मन को हराया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर एक बार फिर से भारत को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर कोई समझौता नहीं होगा। अगर इसे रोकने या कम करने की कोशिश हुई तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। प्रधानमंत्री शहबाज ने गुरुवार को इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते कहा कि कश्मीर पर पाकिस्तान का रुख कभी नहीं बदलेगा। अपने भाषण में शहबाज ने एक बार फिर सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ करते हुए दावा किया कि उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने भारत को हराया। फिर दोहराया- ट्रम्प ने कराया था युद्धविराम शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में एक बार फिर दावा किया कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अहम भूमिका रही थी। उन्होंने ट्रम्प की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी पहल से समय रहते युद्धविराम संभव हो सका। हालांकि भारत लगातार यह कहता रहा है कि संघर्ष विराम दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे बातचीत से हुआ था और इसमें किसी तीसरे देश की कोई मध्यस्थता नहीं थी। कश्मीर, फिलिस्तीन और अफगानिस्तान पर भी बोले अपने भाषण में शहबाज शरीफ ने कहा कि कश्मीर पर पाकिस्तान का रुख नहीं बदलेगा और कश्मीरियों की कुर्बानी बेकार नहीं जाने दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान फिलिस्तीन के लोगों के अधिकारों का समर्थन करता रहेगा। अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार से उन्होंने अपील की कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने दे। साथ ही दावा किया कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका भी निभाई है। भारत ने पहलगाम हमले के बाद संधि पर लगाई थी रोक अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। तभी से यह मुद्दा दोनों देशों के बीच तनाव की बड़ी वजह बना हुआ है। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस और भरोसेमंद कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि पर रोक जारी रहेगी। वहीं, पाकिस्तान का दावा है कि यह संधि अब भी कानूनी रूप से प्रभावी है और इसे एकतरफा निलंबित नहीं किया जा सकता। 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों का बंटवारा किया गया था। इसी संधि को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं और हाल के महीनों में यह विवाद फिर से गहरा गया है। गंभीर जल संकट का सामना कर रहा पाकिस्तान रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। खासकर सिंध और बलूचिस्तान में पानी की कमी लगातार बढ़ रही है। सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक- पाकिस्तान की सिंचाई व्यवस्था के अहम हिस्से सुक्कुर बैराज को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। पानी का स्तर लगातार घटने से कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

Bangladesh Power Crisis | Market Shutdown Order & India Aid Request

Bangladesh Power Crisis | Market Shutdown Order & India Aid Request

ढाका2 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश में बिजली संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। देश के कई हिस्सों में रोज 8 से 10 घंटे तक बिजली कट रही है। इसका सबसे ज्यादा असर राजधानी ढाका के बाहर ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रहा है। तेज गर्मी और हीटवेव ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। बिजली की कमी से निपटने के लिए सरकार ने बुधवार को देशभर में शॉपिंग मॉल, बाजार और दुकानों को रात 8 बजे तक बंद करने का आदेश दिया है। व्यापारिक मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रात 8 बजे तक खत्म करने होंगे। सजावटी लाइटों पर रोक लगा दी गई है, जबकि रोशन विज्ञापन बोर्ड शाम 7 बजे तक बंद करने होंगे। अस्पताल और मेडिकल स्टोर को इन पाबंदियों से बाहर रखा गया है। गैस की कमी से 1,500 मेगावाट बिजली कम बनी बांग्लादेश में बिजली संकट की सबसे बड़ी वजह ईंधन की कमी है। खासकर प्राकृतिक गैस की कमी ने बिजली उत्पादन को प्रभावित किया है। देश अपने इस्तेमाल का 90% से ज्यादा तेल और करीब 30% गैस दूसरे देशों से खरीदता है। मौजूदा संकट के पीछे दो बड़ी वजहें बताई जा रही हैं। पहली वजह अमेरिका की कंपनी एक्सेलरेट एनर्जी के LNG टर्मिनल में लगी आग है। 21 जुलाई को हुई इस घटना के बाद टर्मिनल बंद हो गया था। इस हफ्ते की शुरुआत में यहां कुछ काम दोबारा शुरू हुआ, लेकिन तब तक LNG की सप्लाई आधी रह गई थी। दूसरी वजह समुद्र में खराब मौसम है। डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम दो LNG जहाज खराब मौसम के कारण टर्मिनल तक नहीं पहुंच पाए और अपना माल नहीं उतार सके। दूसरे देशों से आने वाली बिजली की सप्लाई भी कम हुई है। इन वजहों से बांग्लादेश में बिजली उत्पादन करीब 1,500 मेगावाट घट गया है। ढाका में हालात संभले, ग्रामीण इलाकों में ज्यादा कटौती बांग्लादेश में बिजली की सप्लाई छह वितरण कंपनियां करती हैं। राजधानी ढाका को फिलहाल उसकी जरूरत के मुताबिक बिजली मिल रही है। लेकिन ढाका के बाहर ग्रामीण इलाकों में करीब 80 बिजली सहकारी समितियां सप्लाई करती हैं। मयमनसिंह, बरिशाल, रंगपुर, सिलहट, राजशाही और खुलना में बिजली संकट का ज्यादा असर है। ज्यादातर इलाकों में रोज 3 से 5 घंटे बिजली कट रही है। वहीं खुलना में लोगों ने 9 से 10 घंटे तक बिजली गुल रहने की शिकायत की है। नाराज लोगों ने बिजली केंद्रों पर हमला किया लगातार बिजली कटने से लोगों में गुस्सा भी बढ़ रहा है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ इलाकों में नाराज लोगों ने बिजली से जुड़ी सुविधाओं पर हमला किया है। इसके बाद बांग्लादेश पल्ली बिजली एसोसिएशन ने बिजली ग्रिड, सबस्टेशन और बिजली दफ्तरों की सुरक्षा के लिए पुलिस से मदद मांगी है। स्थानीय पुलिस स्टेशनों को भेजे गए पत्रों में बिजली केंद्रों पर पुलिस तैनाती और रात में नियमित गश्त की मांग की गई है। सईदपुर, नीलफामारी और कुश्तिया में बिजली से जुड़ी जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की भी खबरें सामने आई हैं। किसान और गारमेंट उद्योग भी परेशान बिजली कटौती का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है। खेती, रेस्टोरेंट और कारखानों का काम भी प्रभावित हो रहा है। किसानों को बिजली की जगह डीजल जनरेटर चलाने के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है। झींगा पालने वाले किसानों की परेशानी और ज्यादा है। बिजली जाने पर पानी में ऑक्सीजन पहुंचाने वाली मशीनें बंद हो जाती हैं। इससे पानी में ऑक्सीजन कम होने लगती है और झींगों के मरने का खतरा बढ़ जाता है। बांग्लादेश दुनिया में झींगा निर्यात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। देश के कपड़ा और गारमेंट उद्योग पर भी बिजली संकट का असर पड़ रहा है। यह सेक्टर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। बिजली बचाने के लिए रात 8 बजे तक बंद होंगी दुकानें सरकार को फिलहाल बिजली संकट से जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम है। इसलिए बिजली की खपत घटाने के लिए कई पाबंदियां लगाई गई हैं। अब शॉपिंग मॉल, बाजार और दुकानों को रात 8 बजे तक बंद करना होगा। व्यापारिक मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी इसी समय तक खत्म करने होंगे। सजावटी लाइटें बंद रहेंगी और रोशन विज्ञापन बोर्ड शाम 7 बजे तक बंद करने होंगे। ऐसा कदम बांग्लादेश में पहले भी उठाया जा चुका है। कुछ महीने पहले अप्रैल में ऊर्जा संकट बढ़ने के दौरान सरकार ने दुकानों और शॉपिंग मॉल को शाम 6 बजे तक बंद करने का आदेश दिया था। भारत से मांगा अतिरिक्त डीजल बिजली संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश ने अब भारत से अतिरिक्त डीजल देने की मांग की है। बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद ने पिछले हफ्ते भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी से मुलाकात के दौरान यह मांग रखी थी। महमूद ने पत्रकारों से कहा कि भारत के साथ एक पाइपलाइन है, जिससे बांग्लादेश को डीजल मिलता है। उन्होंने भारत से इसकी सप्लाई बढ़ाने का अनुरोध किया है। भारत और बांग्लादेश के बीच इंडिया-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन 2017 में शुरू हुई थी। दोनों देशों के बीच 15 साल का समझौता है। इसके तहत भारत को हर साल बांग्लादेश को 1.80 लाख मीट्रिक टन डीजल देना है। मध्य-पूर्व में हालिया संकट के दौरान भारत मार्च और अप्रैल में बांग्लादेश को पहले ही 30 हजार टन से ज्यादा डीजल भेज चुका है। रिश्तों में तनाव के बीच भारत से मदद की मांग डीजल की मांग ऐसे समय आई है, जब भारत और बांग्लादेश के रिश्ते तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना 2024 में ढाका छोड़ने के बाद भारत आई थीं और फिलहाल भारत में हैं। हाल ही में दिल्ली में हसीना ने मीडिया को संबोधित किया था। 2024 में बांग्लादेश छोड़ने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक भाषण था। उनके बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया। इसके बावजूद बिजली संकट के बीच बांग्लादेश ने भारत से ईंधन की सप्लाई बढ़ाने की मांग की है। संकट ने दिखाई दूसरे देशों पर निर्भरता मौजूदा बिजली संकट ने बांग्लादेश की ईंधन और गैस के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता को फिर सामने ला दिया है। LNG की सप्लाई में रुकावट और दूसरे देशों