Sunday, 08 Nov 2026 | 02:43 PM

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India Post GDS Recruitment 2026

India Post GDS Recruitment 2026

Hindi News Career India Post GDS Recruitment 2026 | Apply Online For 25000+ Vacancies 10 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत सरकार के डाक विभाग ने ग्रामीण डाक सेवक यानी GDS भर्ती 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के लिए 31 अगस्त से आवेदन शुरू होंगे। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट www.indiapost.gov.in पर जाकर अप्लाई कर सकेंगे। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : उम्मीदवारों को भारतीय नागरिक होना चाहिए। किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड/ संस्थान से 10वीं पास। 10वीं में मैथ्स और अंग्रेजी विषयों में पासिंग मार्क्स प्राप्त किये हों। एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 40 साल एससी, एसटी : 5 साल की छूट ओबीसी : 3 साल की छूट पीडब्ल्यूबीडी : 10 साल की छूट फीस : जनरल, ओबीसी : 100 रुपए एससी, एसटी, दिव्यांग : नि:शुल्क सिलेक्शन प्रोसेस : मेरिट बेसिस पर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन सैलरी : ब्रांच पोस्ट मास्टर : 12,000 – 29,380 रुपए प्रतिमाह असिस्टेंट ब्रांच पोस्ट मास्टर : 10,000 – 24,470 रुपए प्रतिमाह अन्य अलाउंस का लाभ भी मिलेगा। जरूरी डॉक्यूमेंट्स : 10वीं की मार्कशीट पहचान पत्र जाति प्रमाण पत्र जहां लागू हो वहां दिव्यांगता प्रमाण पत्र EWS प्रमाण पत्र जन्मतिथि का प्रमाण चिकित्सा प्रमाण पत्र ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट www.indiapost.gov.in पर जाएं। होम पेज पर दिए गए रजिस्ट्रेशन के लिंक पर क्लिक करें। जरूरी डिटेल्स दर्ज करके रजिस्ट्रेशन करें। मांगे गए डाक्यूमेंट्स को अपलोड करें। एप्लीकेशन फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट करें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑनलाइन आवेदन लिंक ये खबर भी पढ़ें टूटे हुए पेड़ के सहारे स्कूल जाने को मजबूर बच्चे:ग्रामीणों ने पेड़ पर बांस और कील ठोककर रास्ता बनाया, बारिश में लकड़ी से बना पुल ढहा राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले की दलोट (दलौद) तहसील के अंतर्गत आने वाले उदयाखेड़ी गांव में स्कूली बच्चों के लिए आने-जाने का कोई पक्का रास्ता या पुल नहीं है। ये बच्चे एक टूटे हुए पेड़ के सहारे स्कूल जाने को मजबूर हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Bangladesh Mecca Defence Pact Strategy; India Vs Islamic NATO | Pakistan Saudi Turkey

Bangladesh Mecca Defence Pact Strategy; India Vs Islamic NATO | Pakistan Saudi Turkey

18 दिन पहले सऊदी, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच मक्का में एक डिफेंस एग्रीमेंट हुआ। इसमें NATO की तरह करार है कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। अब इसमें कुछ और इस्लामिक देशों के शामिल होने की अटकलें लग रही हैं। इनमें सबसे बड़ा . क्या वाकई ‘इस्लामिक NATO’ जॉइन करेगा बांग्लादेश, ये भारत के लिए कितना बड़ा खतरा और सरकार कैसे काउंटर करेगी; आज के एक्सप्लेनर में जानेंगे… सवाल-1: मक्का एग्रीमेंट में बांग्लादेश के शामिल होने की चर्चा क्यों उठी? जवाबः कोई औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन बांग्लादेश के दो मंत्रियों ने बयानों से चर्चा शुरू हुई… बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर 21 अगस्त को बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री बने। उसी रोज उन्होंने कहा, ‘सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के फ्रेमवर्क में शामिल होने को लेकर बांग्लादेश का रुख पॉजिटिव है। ये फैसला बांग्लादेश अपने हितों को ध्यान में रखकर लेगा।’ 21 अगस्त को ही दूसरी विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने भी कहा, ‘हमारा किसी भी पैक्ट में शामिल होना इस बात से तय होगा कि इससे बांग्लादेश के हित सुरक्षित रहेंगे या नहीं। हुमायूं कबीर ने कहा, ‘बांग्लादेश की अब अपनी पहचान है। मिडिल ईस्ट और इसके हिस्सेदार इस्लामिक देश बांग्लादेश की लीडरशिप को मक्का पैक्ट में शामिल होने का न्योता दे रहे हैं। हुमायूं कबीर ने ये भी बताया कि पीएम तारिक रहमान को सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने राजधानी रियाद आने का न्योता दिया है। सवाल-2: तो बांग्लादेश मक्का पैक्ट में शामिल होगा या नहीं? जवाब: सीनियर डिफेंस जर्नलिस्ट मनोज जोशी कहते हैं, ‘अगर ये सुन्नी देशों के बीच का पैक्ट है, तो बांग्लादेश भी इसमें शामिल हो सकता है। अगर इसका मकसद मिडिल ईस्ट की रीजनल सिक्योरिटी है, तो इसमें बांग्लादेश की कोई खास अहमियत नहीं है।’ स्ट्रैटेजिक एनालिस्ट ब्रह्म चेलानी भी कहते हैं, ‘ये पैक्ट 4 सुन्नी देशों का गठबंधन बन सकता है। सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी, BNP के इस्लामिक ताकतों के साथ गहरे रिश्ते रहे हैं। रहमान की विदेश नीति उनकी पार्टी की उसी पुरानी स्ट्रैटेजी की तरफ जाती दिख रही है।’ दरअसल, बांग्लादेश में इस वक्त BNP की सरकार है, जो अपने कट्टर सुन्नी इस्लामिक रुख के लिए जानी जाती है। बीते कुछ समय से ये कट्टर रुख बढ़ रहा है, इसके कुछ संकेत हैं… हुमायूं कबीर ने समझौते के बारे में बयान देते हुए कहा कि मक्का बांग्लादेश के लोगों के दिल में बसा हुआ है। बांग्लादेश के मौजूदा सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान ने मई 2026 में हज से लौटने के बाद दाढ़ी बढ़ा ली है। वो इस्लामिक संदेश देते हैं। वाकर-उज-जमान ने सेना की चार यूनिट्स के नाम इस्लाम के 4 खलीफाओं के नाम पर रखे हैं। पैक्ट में शामिल होने से बांग्लादेश को सऊदी अरब से विदेशी रोजगार, निवेश और तेल मिल सकता है। तुर्किये से डिफेंस टेक्नोलॉजी, हथियार और ट्रेनिंग मिल सकती है। पाकिस्तान इस्लामी मंचों पर राजनीतिक समर्थन दे सकता है। हालांकि बांग्लादेश के पूर्व राजनयिक एम शाहिदुल इस्लाम लिखते हैं, ‘बांग्लादेश को अपने फैसले दूसरों को खुश करने के लिए नहीं लेने चाहिए। मक्का पैक्ट की लागत बहुत ज्यादा है, लेकिन फायदा स्पष्ट नहीं है। समझौते में शामिल दूसरे देश बांग्लादेश जैसे छोटे देश पर दबाव भी बना सकते हैं। बांग्लादेश को पूछना होगा कि क्या उसे भारत-पाकिस्तान या ईरान-सऊदी के संघर्ष से दूर रहने की आजादी होगी।’ सवाल-3: अगर बांग्लादेश मक्का-पैक्ट में शामिल हुआ, तो भारत के लिए क्या खतरा? जवाब: दो बड़े खतरे हैं… 1. साउथ एशिया में भारत का प्रभाव, सिक्योरिटी, आर्थिक रिश्तों पर असर ब्रह्म चेलानी कहते हैं, ‘पैक्ट में बांग्लादेश के शामिल होने से अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और भूमध्य सागर के इलाके में सिक्योरिटी से जुड़ा पूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर बदलेगा ।’ बांग्लादेश से भी भारत के राजनयिक और आर्थिक रिश्ते बदल जाएंगे।’ भारत की घेराबंदी बढ़ सकती है, क्योंकि तारिक रहमान चीन से भी रिश्ते बढ़ा रहे हैं। जून में चीन दौरे पर उन्होंने चीन को ‘सबसे कीमती और भरोसेमंद पार्टनर’ कहा था। मक्का पैक्ट से पाकिस्तान-अमेरिका के रिश्ते भी बेहतर होंगे, क्योंकि ट्रम्प, इसको खिलाफ ईरान के खिलाफ बनने वाला गठबंधन मान रहे हैं और वो इसके समर्थन में हैं। इससे साउथ एशिया में भारत के लिए पाकिस्तान की चुनौती बढ़ेगी।’ तुर्किये भी यूरोप, मिडिल ईस्ट से लेकर साउथ एशिया तक भारत के मुकाबले प्रभाव बढ़ाना चाहता है। तुर्किये एशिया और यूरोप के बीच लैंड-ब्रिज का काम करता है। भारत के ज्यादातर इस्लामिक देशों के साथ आर्थिक रिश्ते हैं। सऊदी अरब और UAE भारत के टॉप-5 ट्रेड पार्टनर्स में हैं। अब इन व्यापारिक रिश्तों पर असर पड़ सकता है। पीएम नरेंद्र मोदी 15 मई को UAE की यात्रा पर गए थे। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीर। 2. पाकिस्तान से जंग हुई, तो मुश्किल बढ़ेगी बांग्लादेश शामिल हुआ, तो सऊदी-पाकिस्तान-तुर्किये को साउथ एशिया में मजबूत पकड़ मिल जाएगी। इनकी पहुंच भारत के पूर्व तक हो जाएगी। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, तुर्किये ने पाकिस्तान को सैन्य मदद- खास तौर पर एडवांस्ड ड्रोन दिए और पाक के समर्थन में बयान भी दिए। ब्रह्म चेलानी के मुताबिक, ‘पैक्ट के चलते आगे कोई जंग हो, तो भारत के लिए जवाबी कार्रवाई मुश्किल हो जाएगी। भारत, पाकिस्तान में कोई एक्शन ले, तो पाकिस्तान, भारत के खिलाफ ये पैक्ट लागू कर सकता है।’ ‘सऊदी का पैसा, तुर्किये की डिफेंस टेक्नोलॉजी, पाकिस्तान और बांग्लादेश की स्ट्रैटेजिक पोजिशन से चौतरफा इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार होता है। इससे उनको डिफेंस रिसर्च, खुफिया जानकारी शेयर करने में भी मदद आएगी।’ पाकिस्तान भारत से संघर्ष में बांग्लादेशी सैन्य ठिकानों का भी इस्तेमाल कर सकता है। सऊदी का पैसा और तुर्किये की टेक्नोलॉजी भी भारत के खिलाफ इस्तेमाल हो सकती है। सवाल-4: भारत इसे कैसे काउंटर करेगा? जवाब: भारत को घेरने का इरादा तो दिखता है, लेकिन लंबे समय तक भारत जैसी इकॉनोमिक पावर का विरोध करना मुमकिन नहीं है। भारत 2 तरह की तैयारी कर सकता है… 1. सऊदी, तुर्किये जैसे देशों से रिश्ते बेहतर करना भारत के पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुनायत कहते हैं, ‘हमें दूसरे देशों से आउटरीच पर जोर देना होगा। सऊदी से हमारे रिश्ते बहुत अच्छे हैं

Delhi BRICS Summit 2026 | Xi Jinping India Visit & Border Dispute Talks

Delhi BRICS Summit 2026 | Xi Jinping India Visit & Border Dispute Talks

नई दिल्ली16 मिनट पहलेलेखक: मुकेश कौशिक कॉपी लिंक तस्वीर प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 2024 में रूस के कजान में हुई मुलाकात की है। दोनों नेता BRICS समिट में शामिल होने पहुंचे थे। भारत में 12-13 सितंबर को 18वां BRICS सम्मेलन होने जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि है। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी भारत आने की तैयारियां चल रही हैं। अगर जिनपिंग भारत आते हैं तो यह करीब 7 साल बाद उनकी भारत यात्रा होगी। इससे पहले वे अक्टूबर 2019 में भारत आए थे। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, चीन की ओर से जिनपिंग के दौरे की अभी औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, दोनों देशों की एडवांस टीमों के दौरे और अन्य तैयारियों से उनके भारत आने की संभावना जताई जा रही है। जिनपिंग के दौरे से पहले भारत और चीन के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत चल रही है। जिनपिंग से बातचीत में सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दा जिनपिंग के भारत दौरे की तैयारियों में LAC पर शांति और सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दों में है। दोनों देश सीमा पर ऐसी व्यवस्था बनाने पर बात कर रहे हैं, जिससे किसी सैन्य घटना या तनाव का असर द्विपक्षीय रिश्तों पर न पड़े। जिनपिंग की संभावित यात्रा से पहले NSA अजीत डोभाल सीमा मुद्दे पर 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता के लिए बीजिंग जा सकते हैं। वहां उनकी चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात हो सकती है। बातचीत में सीमा प्रबंधन, तनाव कम करने और स्थायी शांति के उपायों पर फोकस रहेगा। भारत-चीन रिश्तों में धीरे-धीरे कम हो रहा तनाव पिछले करीब दो साल में भारत और चीन के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं। अक्टूबर 2024: कजान में मोदी-शी की मुलाकात से पहले पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध खत्म करने पर सहमति बनी। 2025: कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू हुई और प्रधानमंत्री मोदी ने चीन जाकर शी जिनपिंग से मुलाकात की। मार्च 2026: भारत ने चीनी निवेश से जुड़े कुछ नियमों में ढील दी। जून 2026: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दिल्ली में अजीत डोभाल से मुलाकात की। जुलाई 2026: विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बीजिंग का दौरा किया। इसके बाद सीमा वार्ता और जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा की तैयारियां आगे बढ़ीं। व्यापार और जरूरी सामान की सप्लाई भी एजेंडे में भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी बातचीत का हिस्सा हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा व्यापार और वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी चर्चा चल रही है। 1 अगस्त से उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के शिपकी ला दर्रों से सीमा व्यापार शुरू हो चुका है। कैलाश मानसरोवर यात्रा भी बहाल है। पुतिन के साथ जिनपिंग भी आए तो अहम होगी मुलाकात BRICS सम्मेलन में पुतिन और जिनपिंग दोनों के आने से भारत के लिए यह कूटनीतिक रूप से अहम बैठक बन सकती है। सम्मेलन के दौरान मोदी-जिनपिंग की संभावित मुलाकात में LAC पर शांति, सीमा विवाद, व्यापार और दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य करने जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। —————————– खबर अपडेट हो रही है…. ट्रम्प का ईरान पर सबसे बड़े आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान:बोले- जो देश मदद करेंगे, उन पर भी एक्शन लेंगे; तेल तस्करी नेटवर्क निशाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौते का मौका गंवा दिया, इसलिए अब उसे आर्थिक तौर पर अलग-थलग किया जाएगा। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Delhi BRICS Summit 2026 | Xi Jinping India Visit & Border Dispute Talks

Delhi BRICS Summit 2026 | Xi Jinping India Visit & Border Dispute Talks

नई दिल्ली32 मिनट पहलेलेखक: मुकेश कौशिक कॉपी लिंक तस्वीर प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 2024 में रूस के कजान में हुई मुलाकात की है। दोनों नेता BRICS समिट में शामिल होने पहुंचे थे। भारत में 12-13 सितंबर को 18वां BRICS सम्मेलन होने जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि है। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी भारत आने की तैयारियां चल रही हैं। अगर जिनपिंग भारत आते हैं तो यह करीब 7 साल बाद उनकी भारत यात्रा होगी। इससे पहले वे अक्टूबर 2019 में भारत आए थे। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, चीन की ओर से जिनपिंग के दौरे की अभी औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, दोनों देशों की एडवांस टीमों के दौरे और अन्य तैयारियों से उनके भारत आने की संभावना जताई जा रही है। जिनपिंग के दौरे से पहले भारत और चीन के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत चल रही है। जिनपिंग से बातचीत में सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दा जिनपिंग के भारत दौरे की तैयारियों में LAC पर शांति और सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दों में है। दोनों देश सीमा पर ऐसी व्यवस्था बनाने पर बात कर रहे हैं, जिससे किसी सैन्य घटना या तनाव का असर द्विपक्षीय रिश्तों पर न पड़े। जिनपिंग की संभावित यात्रा से पहले NSA अजीत डोभाल सीमा मुद्दे पर 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता के लिए बीजिंग जा सकते हैं। वहां उनकी चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात हो सकती है। बातचीत में सीमा प्रबंधन, तनाव कम करने और स्थायी शांति के उपायों पर फोकस रहेगा। भारत-चीन रिश्तों में धीरे-धीरे कम हो रहा तनाव पिछले करीब दो साल में भारत और चीन के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं। अक्टूबर 2024: कजान में मोदी-शी की मुलाकात से पहले पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध खत्म करने पर सहमति बनी। 2025: कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू हुई और प्रधानमंत्री मोदी ने चीन जाकर शी जिनपिंग से मुलाकात की। मार्च 2026: भारत ने चीनी निवेश से जुड़े कुछ नियमों में ढील दी। जून 2026: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दिल्ली में अजीत डोभाल से मुलाकात की। जुलाई 2026: विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बीजिंग का दौरा किया। इसके बाद सीमा वार्ता और जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा की तैयारियां आगे बढ़ीं। व्यापार और जरूरी सामान की सप्लाई भी एजेंडे में भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी बातचीत का हिस्सा हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा व्यापार और वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी चर्चा चल रही है। 1 अगस्त से उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के शिपकी ला दर्रों से सीमा व्यापार शुरू हो चुका है। कैलाश मानसरोवर यात्रा भी बहाल है। पुतिन के साथ जिनपिंग भी आए तो अहम होगी मुलाकात BRICS सम्मेलन में पुतिन और जिनपिंग दोनों के आने से भारत के लिए यह कूटनीतिक रूप से अहम बैठक बन सकती है। सम्मेलन के दौरान मोदी-जिनपिंग की संभावित मुलाकात में LAC पर शांति, सीमा विवाद, व्यापार और दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य करने जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। —————————– खबर अपडेट हो रही है…. ट्रम्प का ईरान पर सबसे बड़े आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान:बोले- जो देश मदद करेंगे, उन पर भी एक्शन लेंगे; तेल तस्करी नेटवर्क निशाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौते का मौका गंवा दिया, इसलिए अब उसे आर्थिक तौर पर अलग-थलग किया जाएगा। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Bangladesh Demands Guarantee Clause in Ganga Water Treaty with India

Bangladesh Demands Guarantee Clause in Ganga Water Treaty with India

दिल्ली/ढाका16 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश, भारत के साथ गंगा जल संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करना चाहता है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। शाहिदुद्दीन ने कहा कि जरूरी हुआ तो बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मंच का रुख भी कर सकता है। दरअसल, बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो जाएगी। इस समझौते के तहत सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे की व्यवस्था की गई है। ऐसे में ढाका गारंटी क्लॉज में न्यूनतम जल प्रवाह की बात शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि सूखे मौसम में जरूरत के मुताबिक पानी उपबल्ध नहीं कराती है। भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि की शर्त के बारे में जानिए जब नदी में भरपूर पानी हो (75,000 क्यूसेक से ज्यादा) – भारत अपने पास 40,000 क्यूसेक पानी रखता है और बाकी का सारा पानी बांग्लादेश को दे दिया जाता है। जब पानी थोड़ा कम हो (70,000 से 75,000 क्यूसेक) – बांग्लादेश को तय 35,000 क्यूसेक पानी मिलता है और बचा हुआ भारत रखता है। जब पानी बहुत कम हो (70,000 क्यूसेक से कम) – जितना भी पानी उपलब्ध होता है, उसे आधा-आधा (50:50) बांट लिया जाता है। यह समझौता 1 जनवरी से 31 मई तक के लिए लागू होता है। इस दौरा गंगा नदी में पानी अपेक्षाकृत कम रहता है। बांग्लादेश को क्यों चाहिए गारंटी बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि में पानी बांटने का फॉर्मूला तो है, लेकिन तय मात्रा में पानी मिलने की कानूनी गारंटी नहीं है। इसलिए वह नई संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ जोड़ने की मांग कर रहा है। गारंटी क्लॉज ऐसा नियम है, जो सुनिश्चित करता है कि नदी के निचले हिस्से में बसे देश को भी जरूरत का पानी मिलता रहे। इसका मतलब है कि अगर नदी में पानी कम भी हो जाए, तब भी उसे एक तय मात्रा में पानी दिया जाएगा। बांग्लादेश चाहता है कि अगर किसी साल पानी कम हो या किसी कारण से समझौते का पालन न हो, तो उसका समाधान कैसे होगा और किसकी क्या जिम्मेदारी होगी, यह भी समझौते में साफ लिखा जाए। बांग्लादेश का कहना है कि 1977 के गंगा जल समझौते में यह व्यवस्था थी, लेकिन 1996 की संधि में इसे शामिल नहीं किया गया। इसलिए वह नई संधि में इस प्रावधान को जोड़ने की मांग कर रहा है। ————————— यह खबर पढ़ें… पाकिस्तान बोला- ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगेंडा: इसमें सिर्फ भारत का पक्ष, हकीकत नहीं ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने डॉक्यूमेंट्री को प्रोपेगेंडा बताया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Bangladesh Demands Guarantee Clause in Ganga Water Treaty with India

Bangladesh Demands Guarantee Clause in Ganga Water Treaty with India

दिल्ली/ढाका5 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश, भारत के साथ गंगा जल संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करना चाहता है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। शाहिदुद्दीन ने कहा कि जरूरी हुआ तो बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मंच का रुख भी कर सकता है। दरअसल, बांग्लादेश के साथ गंगा जल संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो जाएगी। इस समझौते के तहत सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे की व्यवस्था की गई है। ऐसे में ढाका गारंटी क्लॉज में न्यूनतम जल प्रवाह की बात शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि सूखे मौसम में जरूरत के मुताबिक पानी उपबल्ध नहीं कराती है। भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि की शर्त के बारे में जानिए 70 हजार क्यूसेक या उससे कम: दोनों को 50-50% पानी 70 से 75 हजार क्यूसेक: बांग्लादेश को 35 हजार क्यूसेक, बाकी भारत को 75 हजार क्यूसेक या ज्यादा: भारत को 40 हजार क्यूसेक, बाकी बांग्लादेश कोयह समझौता 1 जनवरी से 31 मई तक के लिए लागू होता है। इस दौरा गंगा नदी में पानी अपेक्षाकृत कम रहता है। बांग्लादेश को गारंटी क्यों चाहिए बांग्लादेश का कहना है कि मौजूदा संधि में पानी बांटने का फॉर्मूला तो है, लेकिन तय मात्रा में पानी मिलने की कानूनी गारंटी नहीं है। इसलिए वह नई संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ जोड़ने की मांग कर रहा है। गारंटी क्लॉज ऐसा नियम है, जो सुनिश्चित करता है कि नदी के निचले हिस्से में बसे देश को भी जरूरत का पानी मिलता रहे। इसका मतलब है कि अगर नदी में पानी कम भी हो जाए, तब भी उसे एक तय मात्रा में पानी दिया जाएगा। बांग्लादेश चाहता है कि अगर किसी साल पानी कम हो या किसी कारण से समझौते का पालन न हो, तो उसका समाधान कैसे होगा और किसकी क्या जिम्मेदारी होगी, यह भी समझौते में साफ लिखा जाए। बांग्लादेश का कहना है कि 1977 के गंगा जल समझौते में यह व्यवस्था थी, लेकिन 1996 की संधि में इसे शामिल नहीं किया गया। इसलिए वह नई संधि में इस प्रावधान को जोड़ने की मांग कर रहा है। फरक्का बैराज बनने के बाद शुरू हुआ था विवाद भारत ने सत्तर के दशक में पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज बनाया था। इसका मकसद गंगा के पानी के एक हिस्से को हुगली नदी की तरफ भेजना था, ताकि हुगली में पानी का बहाव बढ़े और कोलकाता बंदरगाह में जमा होने वाली गाद को कम करने में मदद मिले। गाद कम करना इसलिए जरूरी था क्योंकि मिट्टी और कीचड़ जमा होने के कारण बंदरगाह और हुगली नदी की गहराई लगातार घट रही थी। इससे कोलकाता बंदरगाह के ठप होने का खतरा था। समस्या यह थी कि गंगा भारत से निकलकर बांग्लादेश में भी जाती है। इसलिए भारत ने जब पानी का कुछ हिस्सा अपनी तरफ मोड़ दिया तो इससे वहां जाने वाले पानी की मात्रा कम होने लगी। फरक्का बैराज का निर्माण 1962 में शुरू हुआ था। यह 1975 में बनकर तैयार हुआ। इससे बांग्लादेश में कई तरह की समस्याएं बताई गईं- सिंचाई के लिए पानी कम पड़ना खेती प्रभावित होना मछलियों और जलीय जीवन पर असर नदी में गाद बढ़ना खारे पानी का ऊपर की ओर आना नदी और आसपास के पर्यावरण पर असर 1977 में पहली बार दोनों देशों में समझौता फरक्का को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक विवाद चलता रहा। भारत का कहना था कि फरक्का से पानी मोड़ना उसके लिए जरूरी है, जबकि बांग्लादेश लगातार अपने हिस्से के पानी की मांग करता रहा। आखिरकार दोनों देशों ने पानी को लेकर अलग-अलग समझौते किए। 1977 में एक समझौता हुआ, जिसमें पानी के बंटवारे के साथ एक गारंटी क्लॉज भी था। यानी कुछ परिस्थितियों में बांग्लादेश को न्यूनतम मात्रा में पानी मिलने की गारंटी दी गई थी। 1977 का समझौता सिर्फ 5 साल के लिए था और 1982 में खत्म हो गया। इसके बाद 1982 और 1985 के समझौता ज्ञापनों में भी गारंटी क्लॉज नहीं था। बाद में 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच 30 साल के लिए गंगा जल समझौता हुआ। इसमें सूखे के मौसम में गंगा के पानी के बंटवारे का फॉर्मूला तय किया गया। इसमें पानी देने की न्यूनतम मात्रा की गारंटी नहीं दी गई। इसके बजाय कहा गया कि दोनों देश तुरंत बातचीत करके आपात स्थिति में पानी के बंटवारे में बदलाव करेंगे। असल दिक्कत यहीं से शुरू हुई कि 1996 के समझौते में ‘पानी कम पड़ने पर क्या करना है’ तो लिखा गया, लेकिन यह साफ नहीं लिखा गया कि उस स्थिति में बांग्लादेश को कम से कम कितना पानी मिलना ही चाहिए। ————————— यह खबर पढ़ें… पाकिस्तान बोला- ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगेंडा: इसमें सिर्फ भारत का पक्ष, हकीकत नहीं ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने डॉक्यूमेंट्री को प्रोपेगेंडा बताया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

बांग्लादेश बोला- पूर्व पीएम शेख हसीना को वापस भेजो:बातचीत के लिए सही माहौल जरूरी, प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा टली

बांग्लादेश बोला- पूर्व पीएम शेख हसीना को वापस भेजो:बातचीत के लिए सही माहौल जरूरी, प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा टली

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित दिल्ली यात्रा फिलहाल टलती नजर आ रही है। दोनों देशों के बीच कई हफ्तों से यात्रा की तारीख को लेकर बातचीत चल रही थी, लेकिन रविवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा हालात में यात्रा के लिए सही माहौल नहीं है। ढाका में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ए.के. शाहिदुल करीम ने कहा कि भारत शेख हसीना बांग्लादेश वापस भेजा जाए। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान 21 अगस्त को पहली बार भारत दौरे पर आने वाले थे। हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बिगड़ा माहौल ढाका में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता करीम ने 5 अगस्त को नई दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस का खास तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हसीना ने भारत की जमीन से राजनीतिक बयान दिए, जिससे यात्रा के लिए बना माहौल खराब हुआ। बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहरा चुकी है। करीम ने कहा कि बांग्लादेश पहले भी इस मुद्दे पर अपना रुख साफ कर चुका है। ढाका चाहता है कि तारिक की यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच सही व्यवस्था बनाया जाए। ढाका ने भारत के सामने रखीं 2 मांगें बांग्लादेश ने भारत के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। करीम ने कहा कि अब ढाका भारत के जवाब का इंतजार कर रहा है। हालांकि, विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में यह साफ नहीं हुआ कि यात्रा की तारीख पर बातचीत किस स्तर पर अटकी है। भारत ने तारि दिल्ली आने का न्योता दिया भारत की ओर से तारिक रहमान को दिल्ली आने का न्योता पहले ही दिया जा चुका है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला जब तारिक के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में ढाका पहुंचे थे, तब उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से यह निमंत्रण दिया था। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने हाल ही में कहा था कि बिम्सटेक के मौजूदा अध्यक्ष होने के नाते तारिक को सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने का भी न्योता मिला है। इससे पहले दोनों देशों के बीच अगस्त के तीसरे हफ्ते में तारिक की दो दिन की दिल्ली यात्रा को लेकर बातचीत की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, तब भी तारीख पर अंतिम फैसला नहीं हुआ था। हाई कमिश्नर से मुलाकात के बाद यात्रा की उम्मीद बढ़ी थी इसी तनाव के बीच भारत के बांग्लादेश में हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने 10 अगस्त को प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। ढाका में पद संभालने के बाद यह तारिक के साथ उनकी पहली औपचारिक मुलाकात थी। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री प्रेस विंग के मुताबिक, दोनों के बीच कई अहम द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत हुई। इस दौरान ढाका ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की उम्मीद भी जताई। मुलाकात के बाद त्रिवेदी ने बातचीत को ‘बहुत अच्छी’ बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश आगे की ओर देख रहे हैं और द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर सकारात्मक सोच है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन लोगों के हित में अच्छे रिश्ते बनाए रखना दोनों की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके कुछ ही घंटों बाद त्रिवेदी नई दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके बाद तारिक की दिल्ली यात्रा को लेकर उम्मीदें बढ़ी थीं। लेकिन कुछ ही दिनों में ढाका का रुख फिर सख्त नजर आने लगा है।

Bangladesh PM Tarique Rahman Delhi Visit Postponed

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ढाकाकुछ ही क्षण पहलेलेखक: मोहम्मद अरिफुल इस्लाम कॉपी लिंक बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान का भारत दौरा फिलहाल टल गया है। ढाका के विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि पहले भारत पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भेजे। इसके बाद ही पीएम रहमान के भारत दौरे की तैयारियां आगे बढ़ेंगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ए.के. शाहिदुल करीम ने कहा कि मौजूदा हालात में यात्रा के लिए सही माहौल नहीं है। बांग्लादेशी प्रधानमंत्री 21 अगस्त को दिल्ली आने वाले थे। इस दौरे को लेकर दोनों देशों में बातचीत चल रही थी। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ए.के. शाहिदुल करीम ने रविवार को ढाका में मीडिया से बात की। हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बिगड़ा माहौल शाहिदुल करीम ने कहा- नई दिल्ली में 5 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने भारत की जमीन से राजनीतिक बयान दिए। इससे यात्रा के लिए बना माहौल खराब हुआ। करीम ने कहा कि बांग्लादेश पहले भी इस मुद्दे पर अपना रुख साफ कर चुका है। हम चाहते हैं कि पीएम तारिक की यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच सही माहौल बना सकें। तारिक के अगस्त के तीसरे हफ्ते में भारत आने की खबरें आई थीं। बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहरा चुकी है। बांग्लादेश ने भारत के सामने 2 मांगें रखीं पहली मांग: भारत शेख हसीना और दूसरे फरार आरोपियों को दोनों देशों के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि के तहत बांग्लादेश वापस भेजे। दूसरी मांग: शाहिद शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामले में आरोपियों को बांग्लादेश को सौंपा जाए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अब बांग्लादेश भारत के जवाब का इंतजार कर रहा है। पीएम रहमान की पार्टी उनकी भारत यात्रा के खिलाफ तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर बांग्लादेश में राजनीतिक विरोध भी हो रहा है। रूलिंग पार्टी BNP के नेताओं ने भारत में शेख हसीना की राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं। 2024 में आंदोलन में बनी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता ने कहा- जब तक शेख हसीना के प्रत्यर्पण और भारत-बांग्लादेश के रिश्तों पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक तारिक रहमान को भारत नहीं जाना चाहिए। NCP बोली कि नई दिल्ली में हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस भारत सरकार के सीधे या परोक्ष समर्थन से हुई। दिल्ली से हसीना के दिए गए बयान को सिर्फ उनकी निजी राय नहीं माना जा सकता। इससे भारत के रुख का भी संकेत मिलता है। भारत ने तारिक को दिल्ली आने का न्योता दिया था भारत की ओर से तारिक रहमान को दिल्ली आने का न्योता पहले ही दिया जा चुका है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला 17 फरवरी को तारिक के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में ढाका पहुंचे थे, तब उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उन्हें निमंत्रण दिया था। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने कहा था कि बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों के अंतरराष्ट्रीय संगठन का अध्यक्ष होने के नाते तारिक को सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने का भी न्योता मिला है। भारतीय हाई कमिश्नर ने पीएम तारिक से मुलाकात की बांग्लादेश में भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने 10 अगस्त को प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। दोनों के बीच कई अहम द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत हुई। इस दौरान ढाका ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की उम्मीद भी जताई। बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान और भारत के बांग्लादेश में हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी हाथ मिलाते हुए। मुलाकात के बाद त्रिवेदी ने कहा कि दोनों देश आगे की ओर देख रहे हैं और द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर सकारात्मक सोच है। इसके कुछ ही घंटों बाद त्रिवेदी नई दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके बाद तारिक की दिल्ली यात्रा को लेकर उम्मीदें बढ़ी थीं। ——————- यह खबर भी पढ़ें… शेख हसीना बोलीं- दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी:2 साल बाद वर्चुअल भाषण दिया, कैमरा ऑफ था; बांग्लादेश सरकार बोली- दिल्ली में बैठकर जहर उगला बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दो साल बाद बुधवार को लोगों को वर्चुअली संबोधित किया। जब हसीना बोल रही थीं, उस दौरान उनका कैमरा बंद था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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ढाका1 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान की फाइल फोटो। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान 21 अगस्त को पहली बार भारत दौरे पर आ सकते हैं। यात्रा की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इसे अंतिम रूप देने से पहले दोनों देशों के बीच कुछ अहम मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का है। ढाका से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश चाहता है कि भारत में रह रहीं शेख हसीना को राजनीतिक गतिविधियां चलाने या बांग्लादेश की राजनीति को प्रभावित करने वाले बयान देने की अनुमति न दी जाए। तारिक रहमान ने 17 फरवरी को ढाका में राष्ट्रीय संसद भवन में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। हसीना के बयानों से बांग्लादेश सरकार नाराज शेख हसीना अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद से भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश का आरोप है कि वह भारत से लगातार राजनीतिक बयान दे रही हैं। ढाका का कहना है कि इससे देश की आंतरिक राजनीति प्रभावित हो रही है और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है। बांग्लादेशी अधिकारियों के मुताबिक, भारत की ओर से इस मुद्दे पर कुछ अच्छे संकेत मिले हैं। लेकिन ढाका चाहता है कि भारत का रुख और स्पष्ट हो, ताकि तारिक रहमान की यात्रा से पहले इस मुद्दे को लेकर कोई गलतफहमी न रहे। 5 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बढ़ा तनाव दरअसल इसी महीने 5 तारीख को शेख हसीना ने वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें उन्होंने अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने की दूसरी बरसी पर पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए और बांग्लादेश की राजनीति पर भी अपनी बात रखी। इस पर बांग्लादेश सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई। ढाका का कहना था कि भारत में रहते हुए हसीना का सार्वजनिक रूप से राजनीतिक बयान देना दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस की इजाजत पर फिर बढ़ा तनाव बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार इस घटनाक्रम से ‘नाराज और निराश’ है। मंत्रालय ने आपत्ति जताई कि मानवता के खिलाफ अपराध के एक मामले में मौत की सजा पा चुकी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की अनुमति दी गई। विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने पहले ही भारत को आगाह किया था कि इस तरह के घटनाएं दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। गौरतलब है कि भारत ने शेख हसीना का प्रेस कॉन्फ्रेंस रोकने से इनकार कर दिया था। भारत ने कहा था कि उनका कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था आयोजित कर रही है। इससे सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। BNP के साथ NCP भी यात्रा के खिलाफ तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर बांग्लादेश में राजनीतिक विरोध भी हो रहा है। सत्तारूढ़ BNP के नेताओं ने भारत में शेख हसीना की राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं। वहीं, 2024 में आंदोलन से पैदा हुई नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने भी तारिक रहमान की भारत यात्रा का विरोध किया है। NCP नेता ने कहा कि जब तक शेख हसीना के प्रत्यर्पण और भारत-बांग्लादेश के रिश्तों के नए ढांचे पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक तारिक रहमान को भारत नहीं जाना चाहिए। नाहिद ने यह भी आरोप लगाया कि नई दिल्ली में हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस भारत सरकार के सीधे या परोक्ष समर्थन से हुई। उनके मुताबिक, दिल्ली से हसीना के दिए गए बयान को सिर्फ उनकी निजी राय नहीं माना जा सकता। इससे भारत के रुख का भी संकेत मिलता है। विरोध के बावजूद यात्रा की तैयारियां जारी राजनीतिक विरोध के बावजूद दोनों देशों के बीच तारिक रहमान की यात्रा की तैयारियां चल रही हैं। भारतीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह अगले हफ्ते के बीच में दो दिन के दौरे पर नई दिल्ली आ सकते हैं। यात्रा की तारीख 21 या 22 अगस्त बताई जा रही है। हालांकि, अंतिम कार्यक्रम में एक-दो दिन का बदलाव हो सकता है। भारत ने बिम्सटेक का मौजूदा अध्यक्ष होने के नाते तारिक रहमान को सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी शामिल होने का न्योता दिया है। हालांकि, वह इस सम्मेलन में जाएंगे या नहीं, इसका अभी फैसला नहीं हुआ है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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ढाका16 मिनट पहलेलेखक: मोहम्मद अरिफुल इस्लाम कॉपी लिंक इनसेट- बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (बाएं) और करेंट पीएम तारिक रहमान (दाएं)। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान 21 अगस्त को पहली बार भारत दौरे पर आ सकते हैं। यात्रा की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इसे अंतिम रूप देने से पहले दोनों देशों के बीच कुछ अहम मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का है। ढाका से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश चाहता है कि भारत में रह रहीं शेख हसीना को राजनीतिक गतिविधियां चलाने या बांग्लादेश की राजनीति को प्रभावित करने वाले बयान देने की अनुमति न दी जाए। तारिक रहमान ने 17 फरवरी को पीएम पद की शपथ ली। बांग्लादेश में 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री बना। हसीना के बयानों से बांग्लादेश सरकार नाराज शेख हसीना अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद से भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश का आरोप है कि वह भारत से लगातार राजनीतिक बयान दे रही हैं। ढाका का कहना है कि इससे देश की आंतरिक राजनीति प्रभावित हो रही है और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है। बांग्लादेशी अधिकारियों के मुताबिक, भारत की ओर से इस मुद्दे पर कुछ अच्छे संकेत मिले हैं। लेकिन ढाका चाहता है कि भारत का रुख और स्पष्ट हो, ताकि तारिक रहमान की यात्रा से पहले इस मुद्दे को लेकर कोई गलतफहमी न रहे। 5 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बढ़ा तनाव दरअसल इसी महीने 5 तारीख को शेख हसीना ने वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें उन्होंने अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने की दूसरी बरसी पर पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए और बांग्लादेश की राजनीति पर भी अपनी बात रखी। इस पर बांग्लादेश सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई। ढाका का कहना था कि भारत में रहते हुए हसीना का सार्वजनिक रूप से राजनीतिक बयान देना दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकता है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस बारे में भारत को पहले आगाह किया गया था लेकिन फिर भी भारत ने उन्हें यह प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की अनुमति दी। गौरतलब है कि भारत ने शेख हसीना का प्रेस कॉन्फ्रेंस रोकने से इनकार कर दिया था। भारत ने कहा था कि उनका कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था आयोजित कर रही है। इससे सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। शेख हसीना ने 5 अगस्त 2024 को देश छोड़ा था। इसके बाद से वह नजर नहीं आई हैं। यह फुटेज उनके हेलिकॉप्टर में बैठने से पहले की है। पीएम रहमान की पार्टी उनके भारत यात्रा के खिलाफ तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर बांग्लादेश में राजनीतिक विरोध भी हो रहा है। रूलिंग पार्टी BNP के नेताओं ने भारत में शेख हसीना की राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं। वहीं, 2024 में आंदोलन से पैदा हुई नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने भी तारिक रहमान की भारत यात्रा का विरोध किया है। NCP नेता ने कहा कि जब तक शेख हसीना के प्रत्यर्पण और भारत-बांग्लादेश के रिश्तों के नए ढांचे पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक तारिक रहमान को भारत नहीं जाना चाहिए। नाहिद ने यह भी आरोप लगाया कि नई दिल्ली में हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस भारत सरकार के सीधे या परोक्ष समर्थन से हुई। उनके मुताबिक, दिल्ली से हसीना के दिए गए बयान को सिर्फ उनकी निजी राय नहीं माना जा सकता। इससे भारत के रुख का भी संकेत मिलता है। विरोध के बावजूद यात्रा की तैयारियां जारी राजनीतिक विरोध के बावजूद दोनों देशों के बीच तारिक रहमान की यात्रा की तैयारियां चल रही हैं। भारतीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह अगले हफ्ते के बीच में दो दिन के दौरे पर नई दिल्ली आ सकते हैं। यात्रा की तारीख 21 या 22 अगस्त बताई जा रही है। हालांकि, अंतिम कार्यक्रम में एक-दो दिन का बदलाव हो सकता है। भारत ने बिम्सटेक का मौजूदा अध्यक्ष होने के नाते तारिक रहमान को सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी शामिल होने का न्योता दिया है। हालांकि, वह इस सम्मेलन में जाएंगे या नहीं, इसका अभी फैसला नहीं हुआ है। बिजली कटौतियों के बीच भारत से डीजल मांग रहा बांग्लादेश बांग्लादेश में बिजली संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। देश के कई हिस्सों में रोज 8 से 10 घंटे तक बिजली कट रही है। बिजली संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश ने अब भारत से अतिरिक्त डीजल देने की मांग की है। बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद ने पिछले हफ्ते भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी से मुलाकात के दौरान ज्यादा डीजल की मांग रखी थी। महमूद ने पत्रकारों से कहा कि भारत के साथ एक पाइपलाइन है, जिससे बांग्लादेश को डीजल मिलता है। उन्होंने भारत से इसकी सप्लाई बढ़ाने का अनुरोध किया है। भारत और बांग्लादेश के बीच इंडिया-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन 2017 में शुरू हुई थी। दोनों देशों के बीच 15 साल का समझौता है। इसके तहत भारत को हर साल बांग्लादेश को 1.80 लाख मीट्रिक टन डीजल देना है। पश्चिम एशिया में हालिया संकट के दौरान भारत मार्च और अप्रैल में बांग्लादेश को पहले ही 30 हजार टन से ज्यादा डीजल भेज चुका है। ——————– यह खबर भी पढ़ें… शेख हसीना बोलीं- दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी:2 साल बाद वर्चुअल भाषण दिया, कैमरा ऑफ था; बांग्लादेश सरकार बोली- दिल्ली में बैठकर जहर उगला बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दो साल बाद बुधवार को लोगों को वर्चुअली संबोधित किया। जब हसीना बोल रही थीं, उस दौरान उनका कैमरा बंद था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…