Khabar Hatke AI-Beds Alert Doctors Before Death

एक युवक अपनी बहन के काटने पर रेबीज का इंजेक्शन लेने डॉक्टर के पास पहुंच गया। वहीं यूपी के एक सरकारी हॉस्पिटल में AI बेड लगेंगे जो मौत से पहले डॉक्टर को अलर्ट भेज देंगे। इधर एक शख्स लोगों का दुख सुनने और उनके साथ रोने का बिजनेस कर रहा है। . आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…
Pakistan Tops List, Afghanistan Improves, India Sees 43% Drop

Hindi News National Global Terrorism Index 2026: Pakistan Tops List, Afghanistan Improves, India Sees 43% Drop नई दिल्ली38 मिनट पहले कॉपी लिंक AI Generated भारत में पिछले एक साल में आतंकी घटनाओं में 43% की कमी दर्ज की गई है। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 की सूची में भारत 13वें स्थान पर आ गया है। पिछले साल के मुकाबले भारत दो प्वाइंट नीचे आ गया है। इससे पहले भारत 11वें स्थान पर था। वहीं, सूची के अनुसार दक्षिण एशिया लगातार दसवें वर्ष आतंकवाद से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र बना हुआ है। पहली बार पाकिस्तान इस लिस्ट में टॉप पर है और आतंकवाद से सबसे अधिक प्रभावित देश बन गया है। अफगानिस्तान में हालात में सुधार हुआ है और यह अब शीर्ष दस देशों की सूची से बाहर आ गया है। दुनियाभर में 2025 में आतंकवाद से होने वाली मौतों में 28% की कमी आई है। आतंकी हमलों की संख्या भी लगभग 22% गिरकर 2,944 हो गई है। कुल मिलाकर इस साल 81 देशों में स्थिति सुधरी है, जबकि 19 देशों में स्थिति खराब हुई। पश्चिम देशों में मौतें में 280% की बढ़ोतरी पश्चिमी देशों में आतंकवाद से होने वाली मौतों में लगभग 280% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। साथ ही यूरोपियन यूनियन की रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में 14 ईयू देशों में कुल 58 आतंकी हमले दर्ज हुए। इनमें फ्रांस (14 हमले) और जर्मनी (6 हमले) प्रमुख रहे। इसके अलावा 20 ईयू देशों में आतंकवाद से जुड़े मामलों में 449 लोगों की गिरफ्तारी हुई। ब्रिटेन में 3000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं। 6 फैक्टर प्रोपोगेंडा से युवाओं को एक हफ्ते में बना रहे कट्टरपंथी हिंसा को लेकर डर करते हैं खत्म- चरमपंथी विचारधारा को ‘कूल’ या आधुनिक बनाकर पेश करते हैं। हिंसक घटनाओं को मजाकिया मीम्स में बदल दिया जाता है, जिससे युवाओं के मन में हिंसा का डर खत्म हो जाता है । गेमिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग- डिस्कॉर्ड, ट्विच, रॉबलॉक्स और फोर्टनाइट जैसे गेमिंग प्लेटफॉर्म पर अलग-थलग महसूस करने वाले किशोरों के साथ दोस्ती करते हैं और दिनों या घंटों के भीतर उनका विश्वास जीत लेते हैं। गेमिफिकेशन- आतंकवाद को एक खेल की तरह पेश किया जा रहा है। ऑनलाइन समूहों में किल काउंट (मौतों की संख्या) के लिए स्कोरबोर्ड बनाए जाते हैं, जो युवाओं को हिंसा के लिए प्रेरित करते हैं। फनल रणनीति- कट्टरपंथी नेटवर्क पहले सोशल मीडिया पर युवाओं को पहचानते हैं और फिर उन्हें टेलीग्राम या सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड चैट रूम में ले जाते हैं। यहां उनका ब्रेनवॉश किया जाता है। किशोरों की संवेदनशीलता- किशोरों के मस्तिष्क का आवेग नियंत्रण के लिए जिम्मेदार हिस्सा विकसित नहीं होता। वे प्रोपेगेंडा से प्रभावित हो बिना सोचे समझे हिंसक कदम उठा लेते हैं। भर्ती का नया तरीका- अब भर्ती के लिए बड़े नेता की जरूरत नहीं पड़ती। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर युवा खुद अपने साथियों को कट्टरपंथी बना रहे हैं। ——— ये खबर भी पढ़ें… देश की पहली आतंकवाद-विरोधी नीति ‘प्रहार’ जारी:कहा- आतंकी इंटरनेट के जरिए भर्तियां और जिहाद का महिमामंडन करते हैं गृह मंत्रालय ने 23 फरवरी को भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति जारी की। इसका नाम है प्रहार- PRAHAAR। आठ पेज की इस नीति में आतंकी हमलों को रोकने पर खास जोर दिया गया है। साथ ही खतरे के मुताबिक तेज और संतुलित कार्रवाई की बात कही गई है। केंद्र ने पहले पेज पर इंट्रोडक्शन और PRAHAAR का फुल फॉर्म बताया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Pakistan Tops List, Afghanistan Improves, India Sees 43% Drop

Hindi News National Global Terrorism Index 2026: Pakistan Tops List, Afghanistan Improves, India Sees 43% Drop नई दिल्ली43 मिनट पहले कॉपी लिंक फोटो- AI जनरेटेड भारत में पिछले एक साल में आतंकी घटनाओं में 43% की कमी दर्ज की गई है। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 की सूची में भारत 13वें स्थान पर आ गया है। पिछले साल के मुकाबले भारत दो पॉइंट नीचे आ गया है। इससे पहले भारत 11वें स्थान पर था। वहीं, सूची के अनुसार दक्षिण एशिया लगातार दसवें वर्ष आतंकवाद से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र बना हुआ है। पहली बार पाकिस्तान इस लिस्ट में टॉप पर है और आतंकवाद से सबसे अधिक प्रभावित देश बन गया है। अफगानिस्तान में हालात में सुधार है और यह अब टॉप 10 देशों की लिस्ट से बाहर आ गया है। दुनियाभर में 2025 में आतंकवाद से होने वाली मौतों में 28% की कमी आई है। आतंकी हमलों की संख्या भी लगभग 22% गिरकर 2,944 हो गई है। कुल मिलाकर इस साल 81 देशों में स्थिति सुधरी है, जबकि 19 देशों में स्थिति खराब हुई है। पश्चिम देशों में मौतें में 280% की बढ़ोतरी पश्चिमी देशों में आतंकवाद से होने वाली मौतों में लगभग 280% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। साथ ही यूरोपियन यूनियन की रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में 14 यूरोपीय यूनियन (ईयू) देशों में कुल 58 आतंकी हमले दर्ज हुए। इनमें फ्रांस (14 हमले) और जर्मनी (6 हमले) प्रमुख रहे। इसके अलावा 20 ईयू देशों में आतंकवाद से जुड़े मामलों में 449 लोगों की गिरफ्तारी हुई। ब्रिटेन में 3000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं। 6 फैक्टर प्रोपेगेंडा से युवाओं को एक हफ्ते में बना रहे कट्टरपंथी हिंसा को लेकर डर खत्म करते हैं- चरमपंथी विचारधारा को ‘कूल’ या आधुनिक बनाकर पेश करते हैं। हिंसक घटनाओं को मजाकिया मीम्स में बदल दिया जाता है, जिससे युवाओं के मन में हिंसा का डर खत्म हो जाता है । गेमिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल- डिस्कॉर्ड, ट्विच, रॉबलॉक्स और फोर्टनाइट जैसे गेमिंग प्लेटफॉर्म पर अलग-थलग महसूस करने वाले किशोरों के साथ दोस्ती करते हैं और दिनों या घंटों के भीतर उनका विश्वास जीत लेते हैं। गेमिफिकेशन- आतंकवाद को एक खेल की तरह पेश किया जा रहा है। ऑनलाइन समूहों में किल काउंट (मौतों की संख्या) के लिए स्कोरबोर्ड बनाए जाते हैं, जो युवाओं को हिंसा के लिए प्रेरित करते हैं। फनल स्ट्रैटजी- कट्टरपंथी नेटवर्क पहले सोशल मीडिया पर युवाओं को पहचानते हैं और फिर उन्हें टेलीग्राम या सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड चैट रूम में ले जाते हैं। यहां उनका ब्रेनवॉश किया जाता है। किशोरों की संवेदनशीलता- किशोरों के मस्तिष्क का आवेग नियंत्रण के लिए जिम्मेदार हिस्सा विकसित नहीं होता। वे प्रोपेगेंडा से प्रभावित हो बिना सोचे समझे हिंसक कदम उठा लेते हैं। भर्ती का नया तरीका- अब भर्ती के लिए बड़े नेता की जरूरत नहीं पड़ती। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर युवा खुद अपने साथियों को कट्टरपंथी बना रहे हैं। ————— ये खबर भी पढ़ें… देश की पहली आतंकवाद-विरोधी नीति ‘प्रहार’ जारी:कहा- आतंकी इंटरनेट के जरिए भर्तियां और जिहाद का महिमामंडन करते हैं गृह मंत्रालय ने 23 फरवरी को भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति जारी की। इसका नाम है प्रहार- PRAHAAR। आठ पेज की इस नीति में आतंकी हमलों को रोकने पर खास जोर दिया गया है। साथ ही खतरे के मुताबिक तेज और संतुलित कार्रवाई की बात कही गई है। केंद्र ने पहले पेज पर इंट्रोडक्शन और PRAHAAR का फुल फॉर्म बताया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Global Oil Supply Hike | India Petrol-Diesel Prices Stable

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक ट्रम्प प्रशासन ने ईरानी तेल की खरीद पर प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट दी है। ये छूट केवल समुद्र में मौजूद ईरानी तेल के टैंकरों की खरीद के लिए है। अमेरिकी ट्रेजरी मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट ने इसकी घोषणा की। ट्रेजरी विभाग की वेबसाइट के मुताबिक यह छूट 20 मार्च से 19 अप्रैल के लिए है। ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई बढ़ाने और कीमतों को काबू में रखने के लिए ऐसा किया गया है। अमेरिका-इजराइल की ईरान के साथ चल रही जंग की वजह से क्रूड की कीमतें 110 डॉलर के पार निकल गई है। 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले ये 70 डॉलर के करीब थी। स्कॉट बेसेंट ने कहा कि दुनिया के लिए इस मौजूदा सप्लाई को अस्थायी रूप से खोलकर ग्लोबल मार्केट में लगभग 14 करोड़ बैरल तेल तेजी से आएगा। इससे दुनियाभर में ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ेगी और सप्लाई पर जो अस्थायी दबाव बना है, उसे कम करने में मदद मिलेगी। रूसी तेल की खरीद पर दूसरी बार प्रतिबंध हटाया ट्रम्प प्रशासन ने गुरुवार को एक नया ‘जनरल लाइसेंस’ जारी किया है, जिसके तहत उन रूसी टैंकरों से तेल बेचने की इजाजत दी गई है जो 12 मार्च तक लोड हो चुके थे। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के मुताबिक, यह छूट 11 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह नया लाइसेंस 12 मार्च को जारी किए गए पिछले 30 दिनों के ‘सेंक्शंस वेवर’ की जगह लेगा। युद्ध के कारण 120 डॉलर तक पहुंच गई थी तेल की कीमतें अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ब्रेंट क्रूड आज 112 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। बीते दिनों ये 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। तेल की कीमतों के बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है। अब नीचे सवाल-जवाब में इस फैसले की वजह और असर… सवाल 1: अमेरिका ने अचानक ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील क्यों दी? जवाब: ईरान के साथ युद्ध शुरू हुए तीन हफ्ते हो चुके हैं। इस दौरान मिडिल-ईस्ट में तनाव और स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के बंद होने से ग्लोबल सप्लाई चेन ठप हो गई है। कच्चे तेल की कीमतें 3.5 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। इस ‘एनर्जी क्राइसिस’ से निपटने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने यह कदम उठाया है। सवाल 2: क्या यह अमेरिका का ईरान के प्रति नरम रुख है? जवाब: बिल्कुल नहीं। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का कहना है कि यह एक सोची-समझी रणनीति है। उन्होंने X पर लिखा, “हम तेहरान के खिलाफ ही ईरानी बैरल का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि कीमतें कम रखी जा सकें।” अमेरिका का तर्क है कि यह तेल वैसे भी चोरी-छिपे चीन को बेचा जाता, इससे बेहतर है कि इसे वियतनाम या थाईलैंड जैसे अमेरिकी सहयोगी देश खरीद लें। सवाल 3: इस तेल की बिक्री से होने वाली कमाई का ईरान क्या करेगा? जवाब: अमेरिका ने साफ किया है कि ईरान के लिए इस कमाई को हासिल करना बहुत मुश्किल होगा। बेसेंट के मुताबिक, अमेरिका अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा ताकि ईरान इस पैसे का इस्तेमाल न कर सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतें 33% तक बढ़ चुकी हैं, ऐसे में ईरान को कुछ न कुछ आर्थिक फायदा तो जरूर होगा। सवाल 4: क्या 14 करोड़ बैरल तेल दुनिया की जरूरत के लिए काफी है? जवाब: यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के अनुसार, 14 करोड़ बैरल तेल पूरी दुनिया की सिर्फ डेढ़ दिन की खपत के बराबर है। यूरेशिया ग्रुप के एनालिस्ट ग्रेगरी ब्रू का कहना है कि यह स्टॉक बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। इसके बाद अमेरिका के पास या तो ईरान पर से पूरी तरह बैन हटाने का विकल्प बचेगा या फिर कोई और कड़ा रास्ता चुनना होगा। सवाल 5: ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ क्या है और इसमें तेल का क्या रोल है? जवाब: यह ट्रम्प प्रशासन का ईरान के खिलाफ सैन्य और आर्थिक अभियान है। एक तरफ अमेरिका ईरान के सैन्य ठिकानों को तबाह कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह नहीं चाहता कि इसकी वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा जाए। तेल की सप्लाई सुनिश्चित करना इस ऑपरेशन का एक अहम हिस्सा है ताकि अमेरिकी वोटर्स और सहयोगी देशों पर महंगाई का बोझ न पड़े। सवाल 6: स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को लेकर ट्रंप का क्या स्टैंड है? जवाब: दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जिसे ईरान ने लगभग बंद कर रखा है। ट्रम्प ने इसे लेकर कहा कि एक समय के बाद यह अपने आप खुल जाएगा। वह फिलहाल सैन्य उद्देश्यों को पूरा करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और तेल की कमी को अस्थायी दर्द मान रहे हैं। सवाल 7: आगे क्या होगा? एक्सपर्ट्स की क्या राय है? जवाब: विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के पास अब बहुत कम विकल्प बचे हैं। पूर्व अधिकारी लैंडन डेरेंट्ज़ के मुताबिक, स्थिति बहुत गंभीर है। अब या तो अमेरिका को किसी भी तरह स्ट्रैट ऑफ होर्मुज खुलवाना होगा या फिर और भी गंभीर आर्थिक परिणामों के लिए तैयार रहना होगा। नॉलेज बॉक्स: ‘सेंक्शंस वेवर’ क्या होता है? जब एक देश दूसरे पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाता है, तो कुछ खास स्थितियों में व्यापार जारी रखने के लिए जो कानूनी छूट दी जाती है, उसे ‘वेवर’ कहते हैं। अमेरिका अक्सर अपनी जरूरत और ग्लोबल मार्केट के संतुलन के लिए ईरान और रूस जैसे देशों पर ऐसे अस्थायी वेवर जारी करता रहता है। भारत
देशभर में ईद-उल-फित्र आज:राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी ने बधाई दी; अजमेर शरीफ दरगाह में जन्नती दरवाजा खोला गया

देशभर में आज ईद मनाई जा रही है। मस्जिदों में ईद की नमाज पढ़ने के लिए लोग इकट्ठे हो रहे हैं। ईद-उल-फित्र के मौके पर राजस्थान के अजमेर में ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह शरीफ में सुबह 5 बजे दरगाह का ‘जन्नती दरवाजा’ खोला गया। इधर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी X पोस्ट के जरिए ईद की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा- सभी देशवासियों, विशेषकर मुस्लिम बहनों और भाइयों को हार्दिक बधाई। यह त्योहार आत्मसंयम, सेवा, परोपकार एवं वंचित वर्गों के प्रति दया का भाव रखने की सीख देता है। पीएम मोदी ने भी देशवासियों को ईद की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने X पर लिखा- ईद-उल-फितर की हार्दिक शुभकामनाएं। कामना है कि यह दिन चारों ओर भाईचारे और सद्भावना को और अधिक बढ़ाए। सभी लोग सुखी और स्वस्थ रहें। देशभर में ईद के जश्न से जुड़े अपडेट्स के लिए ब्लॉग से गुजर जाइए….
India Defence Budget Report: 6th Gen Fighter Jets

नई दिल्ली15 घंटे पहले कॉपी लिंक ईरान जंग के बीच भारत अब ‘नॉन-कंटैक्ट वारफेयर’ यानी बिना आमने-सामने आए लड़ी जाने वाली जंग के लिए खुद को तैयार कर रहा है। सरकार अपनी सैन्य शक्ति को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक ढालने के लिए सबसे बेहतर रक्षा तकनीकों पर तेजी से काम कर रही है। भारत ने न केवल 5th जेनरेशन(AMCA), बल्कि अब आधिकारिक तौर पर 6th जेनरेशन के फाइटर जेट्स के डिजाइन पर भी काम शुरू कर दिया है। साथ ही स्वदेशी एस-400 (LRSAM) जैसी लंबी दूरी की मिसाइल सिक्योरिटी सिस्टम, ड्रोन को तबाह करने वाले ‘अनंत शस्त्र’ (QRSAM) पर भी युद्धस्तर पर काम शुरू हो चुका है। संसद में पेश की गई रक्षा समिति की रिपोर्ट्स में इसका खुलासा हुआ है। भारत फाइटर जेट्स के लिए शक्तिशाली स्वदेशी इंजन, नौसेना के लिए अभेद सुरक्षा कवच और AI व साइबर डिफेंस जैसे प्रोजेक्ट्स डेवलप कर रहा है। इसके अलावा अस्त्र, नाग और ध्रुवास्त्र जैसी मिसाइलों के मार्क-II वेरिएंट पर काम हो रहा है। उड़ते हुए कमांड सेंटर की तरह काम कर सकेगा ‘6th जेन’ विमान देश का रक्षा दृष्टिकोण अब ‘नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर’ की चुनौतियों को देखते हुए आक्रामक और रक्षात्मक प्रौद्योगिकियों के बीच एक सटीक संतुलन बनाने पर केंद्रित है। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अपनी क्षमताओं को साबित किया था। अब 5th जेनरेशन के विमानों और 6th जेनरेशन की सोच (जैसे हाइपरसोनिक स्पीड और सी4आईएसआर सिस्टम) के साथ भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए पूरी तरह तैयार है। डिफेंस इन्वेस्टेमेंट के लिए 2 लाख करोड़ से ज्यादा आवंटित देश को मॉडर्न वॉरफेयर में सक्षम बनाने के लिए सरकार ने इसके लिए भारी-भरकम बजट का प्रावधान किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए डिफेंस इन्वेस्टमेंट में खर्च के लिए में 2,19,306.47 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। यह पिछले वर्ष के बजट अनुमान से 21.84% अधिक है। इसका बड़ा हिस्सा केवल सशस्त्र बलों के मॉडर्नाइजेशन और नए हथियारों की खरीद के लिए सुरक्षित रखा गया है। ये टारगेट्स प्राइयॉरिटी पर… AI-साइबर डिफेंस: डीआरडीओ के बजट का बड़ा हिस्सा एआई हथियारों, साइबर सुरक्षा को बेहतर बनाने, दुश्मन के ऐसे ही हमलों को रोकने की तकनीक पर खर्च होगा। नौसेना का सुरक्षा कवच: समुद्र में दुश्मनों के हमलों को नाकाम करने के लिए ‘एडवांस्ड टॉरपीडो डिफेंस सिस्टम’ व ‘एंटी-ड्रोन सिस्टम’ तैयार किया जा रहा है। ‘इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर’ सिस्टम पर भी जोर। अनंत शस्त्र: यह एक ‘क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल’ सिस्टम है। यह विशेष रूप से दुश्मन के कई ड्रोन्स और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों को पलक झपकते ही नष्ट करने के लिए तैयार की गई है। स्वदेशी S-400: रूस की S-400 की तर्ज पर भारत खुद का ‘लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल’ सिस्टम विकसित कर रहा है। यह लंबी दूरी तक दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम होगा। इसका उद्देश्य देश को दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों और लड़ाकू विमानों से सुरक्षित करना है। 5th जेनरेशन के विमान: स्वदेशी 5th जेनरेशन के विमान ‘एएमसीए’ (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) का डिजाइन तैयार हो चुका है। संसदीय रिपोर्ट के अनुसार, अब यह ड्राइंग बोर्ड से निकलकर विकास के चरण में है। वर्तमान में इसके निर्माण की जिम्मेदारी तय करने पर विचार चल रहा है। रक्षा बजट में 10 साल में सबसे बड़ा इजाफा, फाइटर जेट्स और इंजनों के लिए 64 हजार करोड़ 1 फरवरी को पेश हुए बजट पर ऑपरेशन सिंदूर का साफ असर दिखा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा बजट में पिछले 10 सालों का सबसे बड़ा इजाफा किया है। उन्होंने तीनों सेनाओं के लिए कुल 7.84 लाख करोड़ रुपए दिए हैं। यह 2025-26 के मुकाबले करीब 1 लाख करोड़ रुपए ज्यादा है। यानी कुल 15% की बढ़ोतरी हुई है। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। सरकार के मुताबिक 6 मई से शुरू हुआ यह ऑपरेशन आज भी चल रहा है। माना जा रहा है कि इसी के चलते डिफेंस बजट में बढोतरी की गई है। ———— रक्षा से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… 5वीं पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान के मॉडल को मंजूरी:बनाने में निजी कंपनियां मदद करेंगी भारत में बनने वाले 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के प्रोडक्शन मॉडल को मंजूरी मिल गई है। केंद्र सरकार ने पिछले साल 27 मई को यह जानकारी दी थी। रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि एयरक्राफ्ट को बनाने के लिए सरकारी के साथ निजी कंपनियों को भी बोली लगाने का मौका दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Air India Delhi-Canada Flight Diverted After 9 Hours; Wrong Boeing Sent

नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक एअर इंडिया ने इस घटना को ऑपरेशनल इश्यू बताया है। तस्वीर- फाइल फोटो। भारतीय एयरलाइंस कंपनी एअर इंडिया की एक बार फिर बड़ी चूक सामने आई है, जिसके कारण दिल्ली से कनाडा के वैंकूवर जा रही फ्लाइट AI-185 को उड़ान भरने के करीब 7 घंटे बाद वापस दिल्ली लौटना पड़ा। दरअसल, एअर इंडिया ने यात्रियों को गलती से बोइंग 777-200 LR फ्लाइट में भेज दिया था, जबकि कनाडा में उसे केवल बोइंग 777-300 ER भेजने की इजाजत है। एविएशन नियमों के तहत अलग-अलग देशों में अलग-अलग विमान मॉडल के लिए इजाजत होती है। कनाडा ने एअर इंडिया को सिर्फ B777-300 ER के लिए मंजूरी दी है, न कि LR वर्जन के लिए। गलती का पता तब चला जब विमान करीब 4 घंटे उड़ान भरकर चीन के कुनमिंग एयरस्पेस में पहुंच चुका था। इसके बाद तुरंत विमान को वापस बुला लिया गया। फ्लाइट ने गुरुवार सुबह 11:34 बजे दिल्ली से उड़ान भरी थी और शाम 7:19 बजे वापस दिल्ली लैंड किया। विमान में दिल्ली से कनाडा जाने वाले 300 से ज्यादा यात्री मौजूद थे। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24.com के अनुसार, विमान ने चीन के एयरस्पेस से दिल्ली के लिए यू-टर्न लिया। हर घंटे 9 टन फ्यूल खर्च, करीब ₹60 लाख नुकसान का अनुमान एअर इंडिया ने इस घटना को ऑपरेशनल इश्यू बताया और कहा कि सभी यात्री और क्रू सुरक्षित हैं। यात्रियों को होटल की सुविधा दी गई और उन्हें अगली सुबह यानी 20 मार्च को दूसरी फ्लाइट से वैंकूवर के लिए रवाना किया गया। सूत्रों के मुताबिक, इस गलती को गंभीरता से लिया गया है और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है। जानकारी के अनुसार, एक बोइंग 777 विमान हर घंटे करीब 8-9 टन फ्यूल खर्च करता है, ऐसे में यह गलती एयरलाइन के लिए काफी महंगी साबित हुई है। बोइंग 777 जैसे बड़े विमान के लिए, 8 टन (8,000 किलोग्राम) जेट ईंधन की कीमत मौजूदा दरों के आधार पर लगभग ₹7 लाख से ₹9 लाख के बीच हो सकती है। ऐसे में 7 घंटे हवा में रहने के दौरान एअर इंडिया फ्लाइट में करीब 60 लाख रुपए का फ्यूल खर्च हुआ। फायर अलर्ट के बाद एअर इंडिया की न्यूयॉर्क-मुंबई फ्लाइट मदीना डायवर्ट इधर एअर इंडिया की न्यूयॉर्क से मुंबई आ रही फ्लाइट AI-116 को गुरुवार दोपहर सऊदी अरब के मदीना में डायवर्ट करना पड़ा। कॉकपिट में कार्गो सेक्शन में आग लगने का अलर्ट मिलने के बाद एहतियातन यह फैसला लिया गया। एयरलाइन के मुताबिक, बोइंग 777 विमान ने मदीना एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। हालांकि, लैंडिंग के बाद की जांच में यह अलर्ट गलत निकला और किसी तरह की आग नहीं पाई गई। जांच पूरी होने के बाद विमान को दोबारा ऑपरेशन के लिए क्लियर कर दिया गया। यह फ्लाइट मुंबई के लिए रवाना हो गई। एअर इंडिया ने कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई और किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई। 13 फरवरी- DGCA ने एअर इंडिया पर ₹1 करोड़ जुर्माना लगाया भारत के नागरिक उड्डयन नियामक (DGCA) ने 13 फरवरी को बताया था कि उसने एअर इंडिया पर 1.10 लाख डॉलर (करीब 1 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई एक एयरबस विमान को बिना ‘एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट’ (विमानल उड़ाए जाने योग्य है या फिटनेस सर्टिफिकेट) के 8 बार उड़ाए जाने के कारण की गई। DGCA ने एक गोपनीय आदेश में कहा कि इस चूक से देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन पर जनता का भरोसा और कम हुआ है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार मामला 26 नवंबर 2025 का है, जब एअर इंडिया ने खुद DGCA को इस चूक की जानकारी दी थी। कंपनी ने बताया था कि उनके एक एयरबस A320 नियो विमान का एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट एक्सपायर हो चुका था। फिर भी उसे 24 और 25 नवंबर को 8 रेवेन्यू सेक्टर्स (व्यावसायिक उड़ानों) में इस्तेमाल किया गया। इसके बाद 2 दिसंबर को DGCA ने मामले की जांच शुरू की थी। ———————————— एयरलाइंस से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… एअर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट का लैंडिंग के दौरान पहिया निकला:नोज गियर टूटा; थाइलैंड में हार्ड लैंडिंग, 133 लोग सवार थे थाईलैंड में एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट 18 मार्च की दोपहर लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हो गई। विमान के रनवे पर उतरते ही उसका नोज गियर टूट गया और आगे का पहिया अलग हो गया। फ्लाइट हैदराबाद से फुकेट जा रही थी। थाई अखबार द नेशन के मुताबिक घटना के बाद कुछ समय के लिए रनवे बंद करना पड़ा, हालांकि विमान में सवार सभी 133 यात्री सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए। पूरी खबर पढ़ें… एअर इंडिया-इंडिगो के बाद अकासा की भी टिकटें महंगी: घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर ₹1300 तक फ्यूल सरचार्ज लगेगा एअर इंडिया-इंडिगो के बाद अकासा एयर की फ्लाइट्स टिकट भी महंगी हो गई हैं। एयरलाइन कंपनी ने 15 मार्च से सभी घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर फ्यूल सरचार्ज लगाने की घोषणा की है। अकासा एयर ने कहा कि 15 मार्च को रात 12:01 बजे के बाद बुक किए जाने वाले टिकटों पर 199 रुपए से लेकर 1,300 रुपए तक का एडिशनल सरचार्ज वसूला जाएगा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
जोमैटो से खाना मंगवाना महंगा हुआ:प्लेटफॉर्म फीस 19% बढ़ाई, हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय अब ₹14.90 देने होंगे

फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो से खाना ऑर्डर करना अब महंगा हो गया है। कंपनी ने आज 20 मार्च से ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 19% बढ़ोतरी की है। यूजर्स को हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय अब ₹14.90 यानी ₹2.40 ज्यादा प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। प्लेटफॉर्म फीस हर एक फूड ऑर्डर पर लागू होने वाला ऐडिशनल चार्ज हैं। ये GST, रेस्तरां चार्ज और डिलीवरी फीस से अलग है। जोमैटो रोजाना 20 से 25 लाख ऑर्डर डिलीवर करता है। स्विगी के करीब पहुंचे प्लेटफॉर्म फीस के दाम जोमैटो की मुख्य प्रतिद्वंदी कंपनी स्विगी अभी टैक्स समेत लगभग ₹14.99 प्लेटफॉर्म फीस वसूल रही है। आमतौर पर देखा गया है कि जब भी इन दोनों में से कोई एक कंपनी फीस बढ़ाती है, तो दूसरी कंपनी भी जल्द ही अपने दाम बढ़ा देती है। प्लेटफॉर्म फीस 7 महीने में दूसरी बार बढ़ाई कंपनी ने 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई है। इससे पहले सितंबर-2025 में 20% का इजाफा किया गया था। अगस्त 2023 में जोमैटो ने अपना मार्जिन बढ़ाने और प्रॉफिटेबल बनने के लिए पहली बार 2 रुपए का प्लेटफॉर्म शुल्क शुरू किया था। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ऑपरेशनल कॉस्ट बनी वजह दामों में इस बढ़ोतरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। तेल महंगा होने से डिलीवरी पार्टनर्स का खर्च बढ़ता है और कंपनी के लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन्स पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा, जोमैटो अपनी प्रॉफिटेबिलिटी (मुनाफा) सुधारने के लिए भी समय-समय पर प्लेटफॉर्म फीस में बदलाव करती रहती है। दीपिंदर ने 2008 में बनाई थी फूडीबे ये खबर भी पढ़ें… प्रीमियम पेट्रोल ₹2.35 प्रति लीटर तक महंगा हुआ: भोपाल में दाम 117 रुपए प्रति लीटर तक हुए, सामान्य पेट्रोल पुरानी कीमत पर ही मिलेगा सरकारी तेल कंपनियों ने आज यानी 20 मार्च को स्पीड और पावर जैसे प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें ₹2.09-₹2.35 प्रति लीटर तक बढ़ा दी है। भोपाल में इसकी कीमत बढ़कर करीब 117 रुपए पहुंच गई है। सामान्य पेट्रोल की कीमत में बदलाव नहीं हुआ है। पूरी खबर पढ़ें…
जोमैटो से खाना मंगवाना ₹2.40 महंगा हुआ:प्लेटफॉर्म फीस 19% बढ़ाई, अब ₹14.90; कच्चे तेल के दाम बढ़ने का असर

फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो से खाना ऑर्डर करने पर अब आपको ₹2.40 ज्यादा देनें होंगे। कंपनी ने शुक्रवार सेऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस में 19% बढ़ोतरी की है। यूजर्स को अब हर ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय ₹14.90 प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। GST जोड़ने के बाद यह राशि और बढ़ जाएगी। जोमैटो के एप पर नई दरें लागू कर दी गई हैं। प्लेटफॉर्म फीस हर एक फूड ऑर्डर पर लागू होने वाला ऐडिशनल चार्ज हैं। ये GST, रेस्तरां चार्ज और डिलीवरी फीस से अलग है। ये प्लेटफॉर्म प्रति दिन 20 से 25 लाख ऑर्डर डिलीवर करता है। स्विगी के करीब पहुंचे प्लेटफॉर्म फीस के दाम जोमैटो की मुख्य प्रतिद्वंदी कंपनी स्विगी अभी टैक्स समेत लगभग ₹14.99 प्लेटफॉर्म फीस वसूल रही है। आमतौर पर देखा गया है कि जब भी इन दोनों में से कोई एक कंपनी फीस बढ़ाती है, तो दूसरी कंपनी भी जल्द ही अपने दाम बढ़ा देती है। जोमैटो ने 2 रुपए से की थी प्लेटफॉर्म फीस की शुरुआत कंपनी ने 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई है। इससे पहले सितंबर-2025 में 20% का इजाफा किया गया था। अगस्त 2023 में जोमैटो ने अपना मार्जिन बढ़ाने और प्रॉफिटेबल बनने के लिए पहली बार 2 रुपए का प्लेटफॉर्म शुल्क शुरू किया था। कंपनी ने बाद में इसे बढ़ाकर 3 रुपए कर दिया और 1 जनवरी 2024 को 4 रुपए कर दिया। फिर इसे धीरे-धारी बढ़ाकर 7 रुपए कर दिया था। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ऑपरेशनल कॉस्ट बनी वजह दामों में इस बढ़ोतरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। तेल महंगा होने से डिलीवरी पार्टनर्स का खर्च बढ़ता है और कंपनी के लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन्स पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा, जोमैटो अपनी प्रॉफिटेबिलिटी (मुनाफा) सुधारने के लिए भी समय-समय पर प्लेटफॉर्म फीस में बदलाव करती रहती है। दीपिंदर ने 2008 में बनाई थी फूडीबे
India Bans 8400 Betting & Casino Platforms

नई दिल्ली5 मिनट पहले कॉपी लिंक सरकार ने अवैध ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 300 वेबसाइट्स-एप्स को ब्लॉक किया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक अब तक कुल 8400 ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाया जा चुका है। इनमें से करीब 4900 वेबसाइट्स ऑनलाइन गेमिंग एक्ट लागू होने के बाद ब्लॉक की गई हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक जिन प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की गई है, वे मुख्य रूप से अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए से जुड़े थे। इनके जरिए बड़े स्तर पर अवैध लेनदेन और जुए को बढ़ावा मिल रहा था। इसे रोकने के लिए आईटी एक्ट और अन्य संबंधित कानूनों के तहत लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। ऑनलाइन गेमिंग एक्ट लागू होने के बाद इस तरह के प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई में तेजी आई है। सरकार का दावा है कि यह कदम डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। ऑनलाइन गेमिंग बिल के बारे में जानें… प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 के तहत देश में रियल मनी गेमिंग पर बैन लगाया जाएगा। यह बिल 20 अगस्त को लोकसभा और 21 अगस्त को राज्यसभा से पास हुआ था। 22 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बना और 1 अक्टूबर से लागू किया गया। ऑनलाइन गेमिंग कानून में 4 सख्त नियम इस कानून में कहा गया है कि चाहे ये गेम्स स्किल बेस्ड हों या चांस बेस्ड दोनों पर रोक है। रियल-मनी गेम्स पर रोक: कोई भी मनी बेस्ड गेम ऑफर करना, चलाना, प्रचार करना गैरकानूनी है। ऑनलाइन गेम खेलने वालों को कोई सजा नहीं होगी। सजा और जुर्माना: अगर कोई रियल-मनी गेम ऑफर करता है या उसका प्रचार करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। विज्ञापन चलाने वालों को 2 साल की जेल और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। रेगुलेटरी अथॉरिटी: एक खास अथॉरिटी बनाई जाएगी, जो गेमिंग इंडस्ट्री को रेगुलेट करेगी, गेम्स को रजिस्टर करेगी और ये तय करेगी कि कौन सा गेम रियल-मनी गेम है। ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा: पबजी और फ्री फायर जैसे ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स को सपोर्ट किया जाएगा। ये गेम्स बिना पैसे वाले होते हैं इसलिए इन्हें बढ़ावा मिले। ऑनलाइन गेमिंग मार्केट में 86% रेवेन्यू रियल मनी फॉर्मेट से थी भारत में ऑनलाइन गेमिंग मार्केट अभी करीब 32,000 करोड़ रुपए का है। इसमें से 86% रेवेन्यू रियल मनी फॉर्मेट से आता था। 2029 तक इसके करीब 80 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद थी। लेकिन अब इन्होंने रियल मनी गेम्स बंद कर दिए हैं। इंडस्ट्री के लोग कह रहे हैं कि सरकार के इस कदम से 2 लाख नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। सरकार को हर साल करीब 20 हजार रुपए के टैक्स का नुकसान भी हो सकता है। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… ऑनलाइन गेमिंग रेगुलेशन पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- मनी गेमिंग ऐप्स का टेरर फाइनेंस से लिंक केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर बताया कि अनरेगुलेटेड ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स का टेरर फाइनेंस और मनी लॉन्ड्रिंग से लिंक है। इसलिए इन्हें रेगुलेट करने के लिए कानून बनाना जरूरी था। केंद्र ने बताया कि ऑनलाइन पैसों वाले गेम तेजी से बढ़ रहे हैं और इससे धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और कुछ मामलों में आतंकवाद को फंडिंग हो रही है, जो नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…







