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Youtube india unprofessional channels and wrong advice content spread

Youtube india unprofessional channels and wrong advice content spread

नई दिल्ली37 मिनट पहले

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देश में लगभग 2.5 करोड़ एक्टिव यूट्यूब चैनल्स में से महज 30 लाख ही प्रोफेशनल हैं, बाकी करोड़ों चैनलों में से कई बिना नियमन या कमाई के गलत सलाह या कॉपी-पेस्ट वाला कंटेंट फैला रहे हैं।

देश में यूट्यूब के हर महीने करीब 50 करोड़ एक्टिव यूजर्स है। अब यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक डॉक्टर, मैकेनिक, जिम ट्रेनर और कानूनी सलाहकार तक बन चुका है।

यदि इन चैनलों पर बताई गई किसी सलाह से किसी को नुकसान हो जाए तो न्याय पाने का रास्ता इतना पेचीदा है कि अपराधी साफ बच निकलता है। इन्फ्लुएंसर ट्रस्ट रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर 10 में से 7 लोग यूट्यूब की सलाह पर भरोसा करते हैं, जिनमें से 60% उसे बिना क्रॉस-चेक किए सही मान लेते हैं।

14 फरवरी 2005 को यूट्यूब लॉन्च हुआ था। अक्टूबर 2006 में इसे गूगल ने खरीद लिया था।

14 फरवरी 2005 को यूट्यूब लॉन्च हुआ था। अक्टूबर 2006 में इसे गूगल ने खरीद लिया था।

ऐसे केस जब यूट्यूबर्स की गलत सलाह भारी पड़ी

केस-1 : तमिलनाडु के कृष्णगिरी जिले में एक उच्च शिक्षित दंपती यूट्यूब पर ‘होम डिलीवरी’ के वीडियो देखता था। प्रसव के दौरान पति यूट्यूब वीडियो देखकर निर्देश फॉलो कर रहा था। गंभीर रक्तस्राव से स्थिति बिगड़ी, महिला की मौत हो गई।

फरवरी 2026 में मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में कहा- ‘कुछ यूट्यूब चैनल केवल ‘व्यूज’ और ‘सब्सक्राइबर्स’ बढ़ाने के लिए कुछ भी सामग्री परोस रहे हैं। ये समाज के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।’

केस-2 : मो. नासिरुद्दीन अंसारी यूट्यूब पर ‘बाप ऑफ चार्ट’ नाम से चैनल चलाते थे। वे इस प्लेटफॉर्म्स से लोगों को शेयर बाजार में निवेश, खासकर ‘ऑप्शंस ट्रेडिंग’ की सलाह देते थे। सेबी की जांच में सामने आया कि अंसारी खुद शेयर बाजार में 2.89 करोड़ रुपए के घाटे में थे।

सेबी ने अंसारी को निवेशकों से अवैध तरीके से जुटाए गए 17.2 करोड़ रुपए वापस करने का आदेश दिया। लेकिन इसमें भी यूट्यूब की कोई जिम्मेदारी तय नहीं हुई।

केस-3 : साल 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े अजीत मोहन (फेसबुक) बनाम दिल्ली विधानसभा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को केवल ‘बिचौलिया’ नहीं माना जा सकता। उनकी एल्गोरिदम तय करती है कि कौन सी खबर फैलेगी, इसलिए दंगों के दौरान उनकी भूमिका की जांच की जा सकती है।

एक्सपर्ट बोले- यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करें

डिजिटल कानूनों से समृद्ध भारत बुक के लेखक और वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करना चाहिए, तभी इन पर लगाम संभव है।

यूट्यूब/फेसबुक जैसी कंपनियों का तर्क है ‘हम सिर्फ प्लेटफॉर्म दे रहे हैं, कंटेंट तो लोग डाल रहे हैं।’ इंटरमीडिएरी की वजह से उन्हें ‘सेफ हार्बर’ (धारा-79) की सुरक्षा मिलती है यानी यूजर के गलत वीडियो के लिए यूट्यूब को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

गुप्ता कहते हैं कि यह गलत है क्योंकि यूट्यूब बिना किसी रजिस्ट्रेशन के चल रहा है। उसे बिचौलिया नहीं, बल्कि मीडिया कंपनी मानना चाहिए। कंपनी कानून व आयकर कानून के मुताबिक, देश में इनकी व्यापारिक उपस्थिति के आधार पर इन पर आयकर लगाने के सा​थ ही देश का कानून लागू होना चाहिए।

  • डेटा पर जीएसटी: ये कंपनियां भारतीयों के डेटा का इस्तेमाल करके विज्ञापन से मोटा पैसा कमाती हैं। इस डेटा के कारोबार पर जीएसटी लगना चाहिए।
  • यूजर बेस पर टैक्स: टैक्स सिर्फ विज्ञापन आय पर नहीं, ग्लोबल यूजर्स की संख्या के अनुपात में लगाया जाना चाहिए।
  • शिकायत निवारण अफसर: आईटी नियमों के मुताबिक, इन कंपनियों की ​शिकायत व नामांकित अधिकारियों की डिटेल सार्वजनिक होना चाहिए। ताकि पुलिस और कोर्ट को साइबर क्राइम के समाधान में इनसे आवश्यक मदद मिल सके।

यूट्यूब के लिए नियम, जिनमें एक्शन होता है…

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 19: भ्रामक विज्ञापन या गलत दावे पर 10-50 लाख तक का जुर्माना।

IT एक्ट की धारा 66D व 69A: गलत जानकारी फैलाने पर वीडियो ब्लॉक व जेल हो सकती है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) : गलत सलाह से जान को खतरा हो तो धारा 318 में एफआईआर।

खामियां, जो बचा लेती हैं…

डिस्क्लेमर: वीडियो में शैक्षिक उद्देश्य लिखने से ये जानकारी बन जाती है, जवाबदेही खत्म।

विशेषज्ञता की परिभाषा: कानून में इन्फ्लुएंसर के लिए कोई न्यूनतम योग्यता तय नहीं।

धीमी न्यायिक प्रक्रिया: डिजिटल नुकसान के लिए फास्ट ट्रैक कानून नहीं है। छोटे आर्थिक या शारीरिक नुकसान के लिए पीड़ित कोर्ट नहीं जाता।

खबरें और भी हैं…
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देश में यूट्यूब के हर महीने करीब 50 करोड़ एक्टिव यूजर्स है। अब यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक डॉक्टर, मैकेनिक, जिम ट्रेनर और कानूनी सलाहकार तक बन चुका है।

यदि इन चैनलों पर बताई गई किसी सलाह से किसी को नुकसान हो जाए तो न्याय पाने का रास्ता इतना पेचीदा है कि अपराधी साफ बच निकलता है। इन्फ्लुएंसर ट्रस्ट रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर 10 में से 7 लोग यूट्यूब की सलाह पर भरोसा करते हैं, जिनमें से 60% उसे बिना क्रॉस-चेक किए सही मान लेते हैं।

14 फरवरी 2005 को यूट्यूब लॉन्च हुआ था। अक्टूबर 2006 में इसे गूगल ने खरीद लिया था।

14 फरवरी 2005 को यूट्यूब लॉन्च हुआ था। अक्टूबर 2006 में इसे गूगल ने खरीद लिया था।

ऐसे केस जब यूट्यूबर्स की गलत सलाह भारी पड़ी

केस-1 : तमिलनाडु के कृष्णगिरी जिले में एक उच्च शिक्षित दंपती यूट्यूब पर ‘होम डिलीवरी’ के वीडियो देखता था। प्रसव के दौरान पति यूट्यूब वीडियो देखकर निर्देश फॉलो कर रहा था। गंभीर रक्तस्राव से स्थिति बिगड़ी, महिला की मौत हो गई।

फरवरी 2026 में मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में कहा- ‘कुछ यूट्यूब चैनल केवल ‘व्यूज’ और ‘सब्सक्राइबर्स’ बढ़ाने के लिए कुछ भी सामग्री परोस रहे हैं। ये समाज के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।’

केस-2 : मो. नासिरुद्दीन अंसारी यूट्यूब पर ‘बाप ऑफ चार्ट’ नाम से चैनल चलाते थे। वे इस प्लेटफॉर्म्स से लोगों को शेयर बाजार में निवेश, खासकर ‘ऑप्शंस ट्रेडिंग’ की सलाह देते थे। सेबी की जांच में सामने आया कि अंसारी खुद शेयर बाजार में 2.89 करोड़ रुपए के घाटे में थे।

सेबी ने अंसारी को निवेशकों से अवैध तरीके से जुटाए गए 17.2 करोड़ रुपए वापस करने का आदेश दिया। लेकिन इसमें भी यूट्यूब की कोई जिम्मेदारी तय नहीं हुई।

केस-3 : साल 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े अजीत मोहन (फेसबुक) बनाम दिल्ली विधानसभा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को केवल ‘बिचौलिया’ नहीं माना जा सकता। उनकी एल्गोरिदम तय करती है कि कौन सी खबर फैलेगी, इसलिए दंगों के दौरान उनकी भूमिका की जांच की जा सकती है।

एक्सपर्ट बोले- यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करें

डिजिटल कानूनों से समृद्ध भारत बुक के लेखक और वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करना चाहिए, तभी इन पर लगाम संभव है।

यूट्यूब/फेसबुक जैसी कंपनियों का तर्क है ‘हम सिर्फ प्लेटफॉर्म दे रहे हैं, कंटेंट तो लोग डाल रहे हैं।’ इंटरमीडिएरी की वजह से उन्हें ‘सेफ हार्बर’ (धारा-79) की सुरक्षा मिलती है यानी यूजर के गलत वीडियो के लिए यूट्यूब को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

गुप्ता कहते हैं कि यह गलत है क्योंकि यूट्यूब बिना किसी रजिस्ट्रेशन के चल रहा है। उसे बिचौलिया नहीं, बल्कि मीडिया कंपनी मानना चाहिए। कंपनी कानून व आयकर कानून के मुताबिक, देश में इनकी व्यापारिक उपस्थिति के आधार पर इन पर आयकर लगाने के सा​थ ही देश का कानून लागू होना चाहिए।

  • डेटा पर जीएसटी: ये कंपनियां भारतीयों के डेटा का इस्तेमाल करके विज्ञापन से मोटा पैसा कमाती हैं। इस डेटा के कारोबार पर जीएसटी लगना चाहिए।
  • यूजर बेस पर टैक्स: टैक्स सिर्फ विज्ञापन आय पर नहीं, ग्लोबल यूजर्स की संख्या के अनुपात में लगाया जाना चाहिए।
  • शिकायत निवारण अफसर: आईटी नियमों के मुताबिक, इन कंपनियों की ​शिकायत व नामांकित अधिकारियों की डिटेल सार्वजनिक होना चाहिए। ताकि पुलिस और कोर्ट को साइबर क्राइम के समाधान में इनसे आवश्यक मदद मिल सके।

यूट्यूब के लिए नियम, जिनमें एक्शन होता है…

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 19: भ्रामक विज्ञापन या गलत दावे पर 10-50 लाख तक का जुर्माना।

IT एक्ट की धारा 66D व 69A: गलत जानकारी फैलाने पर वीडियो ब्लॉक व जेल हो सकती है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) : गलत सलाह से जान को खतरा हो तो धारा 318 में एफआईआर।

खामियां, जो बचा लेती हैं…

डिस्क्लेमर: वीडियो में शैक्षिक उद्देश्य लिखने से ये जानकारी बन जाती है, जवाबदेही खत्म।

विशेषज्ञता की परिभाषा: कानून में इन्फ्लुएंसर के लिए कोई न्यूनतम योग्यता तय नहीं।

धीमी न्यायिक प्रक्रिया: डिजिटल नुकसान के लिए फास्ट ट्रैक कानून नहीं है। छोटे आर्थिक या शारीरिक नुकसान के लिए पीड़ित कोर्ट नहीं जाता।

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