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आशा भोसले ने राजस्थानी फिल्मों में भी गाए थे गाने:शब्दों की ट्रेनिंग हुई, डायरेक्टर ने 25 हजार बोलकर 7 हजार दिए फिर भी कुछ नहीं बोलीं

आशा भोसले ने राजस्थानी फिल्मों में भी गाए थे गाने:शब्दों की ट्रेनिंग हुई, डायरेक्टर ने 25 हजार बोलकर 7 हजार दिए फिर भी कुछ नहीं बोलीं

सिंगर आशा भोसले का शुक्रवार को 92 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने कई भाषाओं में गाने गए। इनमें से राजस्थानी भी एक है। उन्होंने अपने करियर में 14 राजस्थानी फिल्मों के 45 गाने गाए। 8 से ज्यादा राजस्थानी भजनों को भी अपनी आवाज दी। वहीं, 2019 में वे जयपुर में हुए एक कार्यक्रम में भी आई थीं। जहां उन्होंने गीतकार प्रसून जोशी के साथ अपने दिल की बात की थी। आशा भोसले को याद करते हुए राजस्थानी एक्टर-डायरेक्टर क्षितिज कुमार ने बताया- मेरी राजस्थानी फिल्म के लिए उन्होंने गाना गाया था। गाने से पहले मुंबई में राजस्थानी शब्दों को लेकर उनकी ट्रेनिंग हुई। इसके लिए मैंने उन्हें सिर्फ 7 हजार रुपए दिए थे, लेकिन उन्होंने बिना रोक टोक के वो ले लिए। जानिए कैसे राजस्थानी फिल्मों में शुरू हुआ आशा भोसले का सफर… राजस्थानी फिल्मों में आशा भोसले की गायकी का श्रेय संगीतकार पंडित शिवराम को जाता है। उन्होंने 1961 में फिल्म ‘बाबासा री लाडली’ में आशाजी से पहली बार राजस्थानी भाषा में पांच गीत गवाए। इनमें ‘ओ रंग रंगीलो आलीजो…’, ‘बोल पंछीड़ा रे…’, ‘सूती थी रंग म्हैल में…’ और महेंद्र कपूर के साथ सुपरहिट डुएट ‘हिवड़ै सूं दूर मत जा….’ गीत गाए। इसके बाद ‘नानीबाई को मायरो’ में भी आशाजी ने अपनी आवाज दी। इसमें “म्हारो छैलभंवर केसरियो बनड़ो…” और “म्हाने चूनड़ी ओढ़ाजा…” जैसे गीत लोकप्रिय हुए। कभी रीजनल के रूप मे नहीं देखा राजस्थानी फिल्म विशेषज्ञ एमडी सोनी ने बताया- उस दौर में आशाजी ने ‘धणी लुगाई’, ‘गणगौर’, ‘गोपीचंद भरथरी’ और ‘ढोला मरवण’ जैसी फिल्मों में भी अपनी गायकी से चार चांद लगाए। राजस्थानी सिनेमा के दूसरे दौर में संगीतकार नारायण दत्त ने फिल्म ‘म्हारी प्यारी चनणा’ (1983) के सभी आठ गीत आशाजी से गवाकर इतिहास रच दिया। इनमें ‘सावण आयो रे…’, ‘चांदड़लो चढ़ आयो गिगनार…’ और ‘झिरमिर झिरमिर रे…’ जैसे गीत श्रोताओं की जुबां पर कई साल तक रहे। आशा भोसले ने कभी राजस्थानी सिनेमा को रीजनल के रूप में नहीं देखा, वे हमेशा अच्छी कंपोजिशन के साथ जुड़ना चाहती थीं। 14 राजस्थानी फिल्मों में 45 गाने गाए इसके बाद ‘थारी म्हारी’, ‘घर में राज लुगायां को’, ‘चूनड़ी’, ‘बेटी हुई पराई रे’, ‘बीनणी होवै तो इसी’ और ‘राधू की लिछमी’ (1996) जैसी फिल्मों में भी उनकी आवाज ने राजस्थानी सिनेमा को समृद्ध किया। कुल मिलाकर 14 फिल्मों में करीब 45 गीतों को आशाजी ने अपनी आवाज दी। फिल्मों के अलावा आशाजी ने राजस्थानी भजनों में भी अपनी विशेष पहचान बनाई। वर्ष 1981 में जारी एलपी रिकॉर्ड ‘म्हारा थे ही धणी हो गोपाल’ को मास्टरपीस माना जाता है, जिसमें गीतकार भरत व्यास के लिखे भजनों को उन्होंने अपनी आवाज दी। गाने के लिए दिए थे सात हजार रुपए राजस्थानी एक्टर-डायरेक्टर क्षितिज कुमार ने बताया- 1996 में आई मेरी राजस्थानी फिल्म राधू की लक्ष्मी का गाना ‘रात ढलती जाए’ आशा जी ने गाया था। आरडी बर्मन साहब की डेथ हो गई थी, उसी समय में आशाजी से मिलने के लिए डेट ले रहा था। एक महीने बाद उनकी तरफ से समय दिया, जब वहां गया तो मैंने इस गाने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पूछा- क्या यह बच्चों का गाना है। मैंने मना कर दिया। हारमोनियम पर गाकर बताया तो वे गाने की कंपोजिशन से बेहद प्रभावित हुईं। इस गाने पर दो घंटे तक हमारी बातचीत चली। मुम्बई में ही इसे रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने एक-एक शब्द की जानकारी ली। घर पर कई दिनों तक राजस्थानी शब्दों की ट्रेनिंग भी हुई। कंपोजिंग पसंद आ जाती तो वह किसी भी इंडस्ट्री को छोटा बड़ा नहीं समझती। रिेकॉडिंग के बाद मुझे कहा- तुम मुम्बई में नए हो, किसी प्रकार की कोई परेशानी हो तो सीधे बताना। अब मैं आपको एक रोचक बात बताता हूं। इस गाने के लिए हमारी 25 हजार पर बात हुई थी, लेकिन मैंने सात हजार रुपए ही दिए। उन्होंने बिना किसी रोक-टोक के वह ले लिए। गाने की दी सहमति, रिकॉर्ड नहीं करने का मलाल वीणा म्यूजिक के डायरेक्टर केसी मालू ने बताया- मैं गाना उनके साथ करना चाहता था। इसी सिलसिले में आशाजी से मिलने भी गया था। उन्होंने राजस्थानी गाने के लिए हामी भी भरी थी, लेकिन मैं ही गाना तैयार नहीं कर पाया। उन्होंने मुझे बताया कि जयपुर से महिपाल और भरत व्यास उनके मित्र थे। आशाजी ने ही मुझे बताया था कि राजस्थानी में आठ भजन उन्होंने गाए थे। मैं यह सुनकर हैरान था। ये भजन भरत व्यास ने लिखे थे। उन्होंने कहा कि आशाजी के हामी भरने के बाद भी मैं काम नहीं कर पाया। मैं उनके लिए गाना बनवा नहीं पाया। इसका आज तक अफसोस रहेगा। उन्होंने कई राजस्थानी फिल्मों में गाने गाए है। जब भी किसी ने गाने के लिए कहा, किसी को उन्होंने कभी मना नहीं किया। हमारी मैग्जीन स्वर सरिता लगातार पढ़ती थीं, उसी आधार पर मेरी मुलाकात हुई थी। ये भी पढ़ें… दोस्तों ने रुपए दिए, घर से भागकर मुंबई गए असरानी:जयपुर में काम किया, अजमेर में कहा था- सिंधी ने कभी भी भीख नहीं मांगी बॉलीवुड के हास्य अभिनेता असरानी का मुंबई में निधन हो गया। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और कला के प्रति गहरी लगन की मिसाल रहा है। उनका असली नाम गोवर्धन असरानी था। वे एक मध्यमवर्गीय सिंधी परिवार से थे। उनके पिता भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान से जयपुर आ बसे और यहां कालीन की दुकान खोली। (पूरी खबर पढ़ें)

Asha Bhosle Childhood Indore Memories

Asha Bhosle Childhood Indore Memories

इंदौर10 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। रविवार दोपहर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। शनिवार शाम उन्हें यहां भर्ती कराया गया था। मध्य प्रदेश से उनका गहरा और भावनात्मक रिश्ता रहा। उनका बचपन इंदौर की छावनी इलाके के मुराई मोहल्ले में बीता, जिसकी यादें वे अक्सर साझा करती थीं। इंदौर की संस्कृति और माहौल का उनके व्यक्तित्व पर गहरा असर रहा। इंदौर निवासी रिश्तेदार मनोज बिनवाले के मुताबिक, आशा ताई को सीहोर के शरबती गेहूं की रोटियां बेहद पसंद थीं और वे कई बार इंदौर से गेहूं मंगवाती थीं। इंदौर के खान-पान से उनका खास लगाव था। सराफा की खाऊ गली के गुलाब जामुन, रबड़ी और दही बड़े उन्हें बेहद पसंद थे। बचपन में वे सराफा चौपाटी जाया करती थीं। आशाजी और लताजी की बचपन की तस्वीर। 17 साल पहले आईं थी इंदौर करीब 17 साल पहले एक कार्यक्रम में इंदौर आईं तो सयाजी होटल में ठहरीं। उन्होंने रिश्तेदारों से घर का खाना मंगवाया था। वे खुद भी नए-नए व्यंजन बनाने की शौकीन थीं। इंदौर में रहने वाले रिश्तेदार मनोज बिनवाले बताते हैं कि बचपन में आशा भोसले, उनकी बहनें लता मंगेशकर और मीना व मां के साथ छावनी से तोपखाना तक करीब 2.5 किमी पैदल चलकर एक समय का भोजन करने जाती थीं। उनके मुताबिक, आशा ताई का इंदौर से लगाव लता मंगेशकर से भी ज्यादा था। वे इंदौर ज्यादा बार आती थीं। कम उम्र में शादी होने के कारण यहां ज्यादा समय नहीं बिता सकीं, लेकिन इंदौर का नमकीन, सराफा के मिष्ठान और सीहोर का शरबती गेहूं उन्हें हमेशा पसंद रहा। बचपन में आशाजी उनकी बहन मीना के साथ। विजयवर्गीय बोले-इंदौर से आत्मीय रिश्ता मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि आशा भोसले की आवाज ने भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और इंदौर से उनका जुड़ाव शहर के लिए गर्व का विषय रहा। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर की नाटक कंपनी के साथ परिवार कुछ समय इंदौर में रहा था। इसी दौरान उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर का जन्म इंदौर में हुआ। 12 हजार से ज्यादा गानों की विरासत आशा भोसले ने 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए। उनके ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दम मारो दम’, ‘चुरा लिया है तुमने’, ‘इन आंखों की मस्ती’ जैसे गीत आज भी लोकप्रिय हैं। उन्होंने गजल, भजन, पॉप और क्लासिकल हर शैली में अपनी पहचान बनाई और ओपी नैयर, आरडी बर्मन, एआर रहमान जैसे संगीतकारों के साथ काम किया। संघर्षों से भरा निजी जीवन 8 सितंबर 1933 को जन्मीं आशा भोसले, पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बेटी और लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। 9 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद उन्होंने परिवार संभालने के लिए गायन शुरू किया। उन्होंने पहला गीत 1943 में मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ में और हिंदी सिनेमा में 1948 की फिल्म ‘चुनरिया’ में गाया। कम उम्र में की गई पहली शादी 11 साल बाद टूट गई। इसके बाद उन्होंने लंबा समय अकेले बिताया और फिर संगीतकार आर.डी. बर्मन से शादी की। गिनीज बुक में नाम है दर्ज आशा भोसले को दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड, पद्म विभूषण, राष्ट्रीय पुरस्कार और कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया। उनका नाम गिनीज बुक में भी दर्ज है। वे ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट होने वाली पहली भारतीय सिंगर भी थीं। यह खबर भी पढ़ें… सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। रविवार दोपहर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्हें शनिवार शाम को यहां भर्ती किया गया था। ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल के डॉ. प्रतीत समदानी ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि आशा भोसले को कई मेडिकल समस्याएं थीं और मल्टी-ऑर्गन फेल्योर यानी उनके कई अंग फेल होने के कारण उनका निधन हुआ। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Asha Bhosle Passes Away at 92

Asha Bhosle Passes Away at 92

16 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय संगीत जगत की सबसे वर्सेटाइल सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने अपनी आवाज से सात दशकों तक फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया। 10 साल की उम्र से करियर शुरू करने वाली आशा ताई को शुरुआती दौर में ‘खराब आवाज’ कहकर स्टूडियो से रिजेक्ट कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साये से बाहर निकलकर उन्होंने संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई और 12,000 से ज्यादा गानों के साथ अपना नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज कराया। आशा भोसले ने शास्त्रीय संगीत से लेकर कैबरे, पॉप और गजल तक हर शैली में अपनी महारत साबित की। दिवंगत गायिका आशा भोसले। महाराष्ट्र के सांगली में जन्म, पिता शास्त्रीय गायक रहे आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। वह प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और थिएटर कलाकार पंडित दीनानाथ मंगेशकर की बेटी थीं। घर में संगीत का माहौल शुरू से ही था। उनके भाई-बहन लता मंगेशकर, मीना खडीकर, उषा मंगेशकर और हृदयनाथ मंगेशकर भी संगीत की दुनिया से ही जुड़े रहे। जब आशा सिर्फ 9 साल की थीं, तब 1942 में उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। पिता के जाने के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आ गया। परिवार को सहारा देने के लिए लता और आशा ने बहुत कम उम्र में गाना और फिल्मों में छोटी भूमिकाएं निभाना शुरू कर दिया था। मराठी फिल्म से बॉलीवुड तक का सफर आशा भोसले ने अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत 1943 में एक मराठी फिल्म ‘माझा बाळ’ के गाने ‘चला चला नव बाड़ा’ से की थी। हिंदी सिनेमा में उन्हें पहला मौका 1948 में फिल्म ‘चुनरिया’ के गाने ‘सावन आया’ से मिला। शुरुआती दौर में आशा को वे गाने मिलते थे जिन्हें प्रमुख गायिकाएं जैसे लता मंगेशकर, शमशाद बेगम या गीता दत्त छोड़ देती थीं। उस समय उन्हें अक्सर फिल्मों में विलेन, डांसर या साइड किरदारों के लिए गाने के लिए बुलाया जाता था। आवाज को खराब बताया, स्टूडियो से रिजेक्शन मिला आज जो आवाज दुनिया भर में पहचानी जाती है, एक समय उसे भी नकारा गया था। 1947 में, जब आशा अपने करियर के शुरुआती दौर में थीं, तब फिल्म ‘जान पहचान’ (संगीतकार: खेमचंद प्रकाश) के एक गाने की रिकॉर्डिंग के लिए वे किशोर कुमार के साथ फेमस स्टूडियो गई थीं। वहां के रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने उनकी आवाज सुनने के बाद कहा था, “यह आवाज नहीं चलेगी, इनका गला खराब है, किसी और को बुलाओ।” उस समय आशा को यह कहकर स्टूडियो से बाहर कर दिया गया था कि उनकी आवाज अच्छी नहीं है। इस घटना से किशोर कुमार काफी दुखी हुए थे। रात के 2 बज चुके थे और दोनों महालक्ष्मी रेलवे स्टेशन पर उदास बैठे थे। तब आशा ने ही किशोर दा को ढांढस बंधाते हुए कहा था कि उनकी आवाज को कोई नहीं रोक सकता। इस रिजेक्शन ने आशा को तोड़ा नहीं, बल्कि और बेहतर बनने की प्रेरणा दी। आरडी बर्मन रहे करियर के बड़े टर्निंग पॉइंट्स 50 और 60 के दशक में बॉलीवुड में लता मंगेशकर, शमशाद बेगम और गीता दत्त का दबदबा था। शमशाद बेगम अपनी खनकदार आवाज और गीता दत्त अपने दर्द भरे और वेस्टर्न अंदाज वाले गानों के लिए मशहूर थीं। जब गीता दत्त अपनी निजी जिंदगी की परेशानियों के चलते रिकॉर्डिंग से दूर होने लगीं, तब ओ.पी. नैयर और एस.डी. बर्मन जैसे संगीतकारों ने आशा भोसले की तरफ रुख किया। 1950 के दशक में नैयर ने आशा की आवाज की खनक को पहचाना। 1954 में फिल्म ‘मंगू’ से शुरू हुआ उनका साथ ‘सीआईडी’ (1956) और ‘नया दौर’ (1957) तक आते-आते ब्लॉकबस्टर साबित हुआ। नया दौर का गाना ‘मांग के साथ तुम्हारा’ और ‘उड़े जब जब जुल्फें तुम्हारी’ ने उन्हें मुख्यधारा की टॉप सिंगर्स में शामिल कर दिया। इसके बाद 1960 और 70 के दशक में संगीतकार आरडी बर्मन (पंचम दा) के साथ उनकी जोड़ी ने संगीत की परिभाषा बदल दी। पंचम दा ने आशा से ‘दम मारो दम’ (हरे रामा हरे कृष्णा) और ‘पिया तू अब तो आजा’ (कारवां) जैसे वेस्टर्न और जैज स्टाइल के गाने गवाए, जिन्होंने आशा को ‘क्वीन ऑफ इंडिपॉप’ बना दिया। जब लता के साये से बाहर आईं आशा आशा भोसले के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी ही बहन लता मंगेशकर के साथ कॉम्पिटिशन करना था। उस दौर में लता जी की आवाज को ‘आदर्श’ माना जाता था। आशा ने चतुराई से अपनी आवाज के साथ प्रयोग किए। उन्होंने महसूस किया कि अगर वह लता जैसी ही शैली अपनाएंगी, तो वह कभी अपनी पहचान नहीं बना पाएंगी। उन्होंने वेस्टर्न टच, मॉड्यूलेशन को अपनी आवाज में पिरोया, जो उस समय किसी अन्य सिंगर के पास नहीं था। उन्होंने गीता दत्त और शमशाद बेगम जैसे सिंगर्स को उनके ही दौर में कड़ी टक्कर दी और बाद में अलका याग्निक, कविता कृष्णमूर्ति और सुनिधि चौहान जैसी पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनीं। जब लोगों को लगा कि वे सिर्फ कैबरे गा सकती हैं, तब 1981 में फिल्म ‘उमराव जान’ आई। संगीतकार खय्याम के निर्देशन में आशा ने ‘दिल चीज क्या है’ और ‘इन आंखों की मस्ती के’ जैसी बेहतरीन गजलें गाकर क्लासिकल गायिकी में भी लता मंगेशकर के बराबर अपनी जगह पक्की कर ली। आशा भोसले का पहला बड़ा सम्मान और वर्ल्ड रिकॉर्ड पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड: उन्हें अपना पहला फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का पुरस्कार 1968 में फिल्म ‘दस लाख’ के गाने ‘गरीबों की सुनो’ के लिए मिला था। कुल फिल्मफेयर अवॉर्ड: उन्होंने कुल 7 बार यह अवॉर्ड जीता। इसके बाद उन्होंने खुद को नॉमिनेशन से अलग कर लिया ताकि नई प्रतिभाओं को मौका मिल सके। 2001 में उन्हें ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से नवाजा गया। नेशनल अवार्ड्स: उन्हें फिल्म ‘उमराव जान’ (1981) और ‘इजाजत’ (1987) के लिए दो बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। पद्म विभूषण: साल 2000 में भारत सरकार ने उन्हें सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान ‘दादा साहब फाल्के अवॉर्ड’ और 2008 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स: साल 2011 में गिनीज बुक ने आधिकारिक तौर पर उन्हें संगीत इतिहास में सबसे अधिक स्टूडियो रिकॉर्डिंग (सर्वाधिक गाने) करने वाली कलाकार के रूप में मान्यता दी।

Swara Vermas Sheesha Tops Billboard India; Haryanvi Singers Club Journey

Swara Vermas Sheesha Tops Billboard India; Haryanvi Singers Club Journey

स्वरा वर्मा साल 2023 के लास्ट में पहला ब्रेक मासूम शर्मा ने दिया और उसके बाद लगातार आगे बढ़ रही हैं हरियाणा के करनाल के असंध की एक साधारण परिवार की बेटी आज देश के सबसे बड़े म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर अपनी आवाज का परचम लहरा रही है। स्वरा वर्मा का ‘शीशा’ गीत बिलबोर्ड इंडिया पर लगातार दूसरे स्थान पर बना हुआ है, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी उतनी ही कठ . कभी उसके घर की आर्थिक हालत ऐसी थी कि उसे पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी, कभी स्टूडियो जाने के लिए दोस्तों से 200 रुपये उधार लेने पड़े, तो कभी लोगों के तानों ने मन तोड़ने की कोशिश की। लेकिन इन सबके बीच स्वरा ने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। क्लबों में छोटी-छोटी रकम पर गाना गाने वाली यह बेटी आज लाखों युवाओं के लिए उम्मीद और हौसले की मिसाल बन चुकी है। स्वरा वर्मा क्लब में जाकर गाना गाती थी सबसे पहले ‘शीशा’ सॉन्ग के बारे में जानिए… बिलबोर्ड इंडिया चार्ट तक पहुंचने वाले ‘शीशा’ गाने के पीछे भी एक दिलचस्प और प्रेरणादायक कहानी है। स्वरा वर्मा बताती हैं कि इस गाने के लेखक मीता रोड, जो मूल रूप से करनाल के ही रहने वाले हैं और इन दिनों अमेरिका में जॉब कर रहे हैं, ने साल 2025 में सोशल मीडिया के जरिए उनसे संपर्क किया था। मीता पहले से ही शायरी और कंटेंट क्रिएशन में एक्टिव थे और उन्होंने स्वरा की आवाज और उनके संघर्ष को देखकर इस गाने के लिए कोलैबोरेशन का प्रस्ताव रखा। शुरुआत में स्वरा को यह एक सामान्य ऑफर लगा, लेकिन जब मीता ने गाने की थीम, बोल और विजन विस्तार से समझाया, तो उन्हें महसूस हुआ कि यह कुछ बड़ा हो सकता है। इसके बाद “शीशा” गाने की ऑडियो करनाल के विक्की तरावड़ी के स्टूडियो में रिकॉर्ड की गई। गाना रिलीज होते ही इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर तेजी से ट्रेंड करने लगा।पहले दिल्ली में और फिर पूरे भारत में यह लोगों की जुबान पर चढ़ गया। गाने की लोकप्रियता को देखते हुए 2026 में इसकी फीचरिंग और वीडियो सोनी म्यूजिक इंडिया द्वारा रिलीज किया गया, जिसके बाद यह सीधा बिलबोर्ड इंडिया चार्ट में पहुंच गया और लगातार दूसरे स्थान पर बना हुआ है। स्वरा के मुताबिक, इस गाने की सफलता में मीता रोड का कॉन्सेप्ट, बोल और इंटरनेशनल सोच के साथ उनकी आवाज का मेल ही सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ। अब जानिए कौन है नेपाली सिंगर स्वरा वर्मा की कहानी… नेपाल से हरियाणा तक एक परिवार की संघर्ष भरी कहानी:स्वरा वर्मा का परिवार मूल रूप से काठमांडू, नेपाल का रहने वाला है। बेहतर भविष्य की तलाश में उनके माता-पिता हरियाणा के करनाल जिले के असंध में आकर बस गए। साल 2004 में यहीं स्वरा का जन्म हुआ। एक छोटे से घर में सीमित संसाधनों के बीच पली-बढ़ी स्वरा ने बचपन से ही अभावों को करीब से देखा। घर की हालत ऐसी थी कि हर दिन एक नई चिंता सामने खड़ी रहती थी। गरीबी के कारण बीच में छोड़ी पढ़ाई, लेकिन नहीं छीना हौसला:परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि स्वरा अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सकीं। घर चलाने की जिम्मेदारी धीरे-धीरे उनके कंधों पर भी आने लगी। मां घर-घर जाकर खाना बनाती थीं और पिता भी कुकिंग का काम करके जैसे-तैसे परिवार का पेट भरते थे। कई बार ऐसा भी समय आता था जब खर्च और जरूरतों के बीच संतुलन बैठाना मुश्किल हो जाता था। ऐसे में स्वरा ने पढ़ाई छोड़कर परिवार का सहारा बनने का फैसला किया- यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन हालात ने उन्हें समय से पहले बड़ा बना दिया। मासूम शर्मा के साथ स्टूडियों में स्वरा वर्मा भाषा बनी चुनौती, तानों ने दी ताकत:घर में नेपाली भाषा बोली जाती थी, जबकि बाहर हरियाणवी माहौल था। शुरुआत में स्वरा को हरियाणवी बोलने और समझने में काफी परेशानी होती थी। लोगों के ताने-“तुमसे हरियाणवी नहीं होगी”, “तुम गाना नहीं गा पाओगी” उनके कानों में गूंजते रहते थे। लेकिन यही ताने उनके लिए प्रेरणा बन गए। उन्होंने ठान लिया कि अब खुद को साबित करना है। दिन-रात मेहनत कर उन्होंने हरियाणवी सीखी और उसी भाषा में अपनी पहचान बना ली। किटी पार्टियों और क्लबों से शुरू हुआ सफर:साल 2020 में स्वरा ने प्राइवेट पार्टियों, किटी पार्टियों और क्लबों में गाना शुरू किया। उस समय उन्हें संगीत की कोई तकनीकी जानकारी नहीं थी। ना सुर की समझ, ना ताल की पहचान। बस गाने का शौक और कुछ करने की जिद थी। छोटी-छोटी जगहों पर गाते हुए उन्हें 1000 से 1500 रुपये मिलते थे, लेकिन उनके लिए यह सिर्फ पैसे नहीं, बल्कि अपने सपनों की पहली सीढ़ी थी। 200 रुपये से शुरू हुआ सफर, मां का भरोसा बना ताकत:स्वरा की जिंदगी का एक भावुक पल वह था, जब पहली बार स्टूडियो जाने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। उन्होंने अपनी मां से किराए के लिए 200 रुपये मांगे। मां ने जैसे-तैसे वह पैसे दिए।शायद उन्हें भी नहीं पता था कि यही 200 रुपये उनकी बेटी की किस्मत बदल देंगे। स्वरा कहती हैं कि वही 200 रुपये उनके करियर की सबसे बड़ी पूंजी थे। दिन-रात मेहनत, एक दिन में 20 गाने तक रिकॉर्ड:संघर्ष के दिनों में स्वरा ने कभी काम से पीछे हटना नहीं सीखा। कई बार वह एक दिन में 15 से 20 गाने तक रिकॉर्ड करती थीं। इसके बदले उन्हें सिर्फ 1000-1500 रुपये मिलते थे। वह रोहतक, दिल्ली और करनाल के अलग-अलग स्टूडियो में जातीं, घंटों काम करतीं और फिर अगले दिन उसी जिद के साथ फिर खड़ी हो जातीं। यह सिलसिला करीब तीन साल तक चला। सोशल मीडिया से मिली राह:सोशल मीडिया के जरिए उनकी मुलाकात दीपक से हुई, जिन्होंने उन्हें सुर और ताल की बारीकियां सिखाईं। इसके बाद असंध के ही प्रदीप पांचाल ने उन्हें स्टूडियो में गाने के तरीके सिखाए। धीरे-धीरे वह समझने लगीं कि संगीत सिर्फ शौक नहीं, बल्कि एक कला है, जिसे सीखना और निखारना जरूरी है। मासूम शर्मा ने दिया पहला ब्रेक:2023 के अंत में जब मासूम शर्मा का फोन आया, तो स्वरा को यकीन ही नहीं हुआ। उन्हें लगा कोई मजाक कर रहा है। लेकिन जब सच्चाई सामने आई, तो उनकी जिंदगी ने नया मोड़ ले लिया। ‘ठेकेदार का

बिलबोर्ड पर छाए हरियाणवी सिंगर भाइयों की कहानी:बैरण सॉन्ग में एनिमेटेड लव स्टोरी दिखाई; कोरोना में गाना शुरू किया, अब मुंबई से भी ऑफर

बिलबोर्ड पर छाए हरियाणवी सिंगर भाइयों की कहानी:बैरण सॉन्ग में एनिमेटेड लव स्टोरी दिखाई; कोरोना में गाना शुरू किया, अब मुंबई से भी ऑफर

हरियाणा में भिवानी जिले का गांव संडवा। इस गांव के रहने वाले दो चचेरे भाई सुमित और अनुज पूरे भारत में छाए हुए हैं। वजह- इनका नया हरियाणवी गाना बैरण। इस गाने में अनुज ने अपनी आवाज दी है, जबकि सुमित ने म्यूजिक कंपोज किया। सुमित भी म्यूजिक कंपोज करने के साथ-साथ सिंगिंग करते हैं। बैरण गाने को यूट्यूब पर अभी तक 67 मिलियन लोग देख चुके हैं। खास बात यह है कि यह गाना बिलबोर्ड इंडिया की लिस्ट में तीन हफ्तों से टॉप पर है। वीडियो में एनिमेटेड लव स्टोरी दिखाई गई है। गाने के बोल हैं- “हो, मन्नै सांभ-सांभ राखे तेरे झांझरा के जोड़े। मेरी गेल रो-रो ये भी छोरी बावले से होरे। मन्नै आए जावै ख्याल तेरे, खाए जावै ख्याल तेरे। जीण कोन्या देती, हाय बैरी तन्हाई मन्नै।” अनुज और सुमित बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही गाना गाने का शौक है। 2019 में जब कोरोना लॉकडाउन लगा तो सिंगिंग में करियर बनाने की ठानी। अपना खुद का यूट्यूब चैनल बनाया। उन्होंने अभी तक 6 गाने रिलीज किए हैं। पहले पांच गाने हिट नहीं हुए। छठे गाने बैरण ने उन्हें बुलंदियों पर पहुंचा दिया। बिलबोर्ड पर गाना रैंक करने के बाद उन्हें मुंबई से कई बड़ी म्यूजिक कंपनियों से ऑफर आए। हालांकि उन्होंने अभी किसी को हां नहीं की। हरियाणा में मासूम शर्मा, केडी से लेकर पंजाबी सिंगर दिलप्रीत ढिल्लों ने भी उन्हें साथ काम करने का ऑफर दिया। पहले सुमित और अनुज के बारे में जानिए…. सुमित के पिता PTI, भाई असिस्टेंट प्रोफेसर सुमित का जन्म 20 अप्रैल 1998 में हुआ। उनके पिता सत्यवान PTI टीचर हैं। उन्होंने अंबाला पॉलिटेक्निक से मैकेनिक ट्रेड में कोर्स किया। उसके बाद हिसार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से एग्रीकल्चर में बीटेक पास की। सुमित भी गाना गाने के साथ म्यूजिक कंपोज करते हैं। उनका छोटा भाई असिस्टेंट प्रोफसर है। अनुज के पिता JBT टीचर अनुज का जन्म 30 अगस्त 2002 को हुआ। इनके पिता राजेंद्र सिंह JBT टीचर हैं। अनुज की एक बड़ी बहन भी है। उन्होंने JRF क्वालीफाई किया हुआ है। अनुज जब तीसरी क्लास में थे तो उन्होंने स्टेज पर ‘यशोमती मैया से बोले नंदलाला’ भजन गया था। इसके बाद स्कूल टाइम में वह अलग-अलग प्रोग्रामों में हिस्सा लेने लगे। अनुज ने आठवीं क्लास में म्यूजिक में करियर बनाने की ठान ली। सरकारी नौकरी की कोशिश की अनुज बताते हैं कि उन्हें सिंगर बनना था। तब परिवार ने कहा कि पढ़ाई बेहद जरूरी है। इसलिए वे उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में MA की। इसके बाद नेट का एग्जाम भी क्रैक किया। सरकारी नौकरी की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद म्यूजिक में ही अपना करियर बनाने की अब जानिए कैसे शुरू हुई सिंगर बनने की कहानी…. कोविड में गाने की शुरुआत, हारमोनियम खरीदा अनुज ने बताया कि 2019 में कोविड आने के दौरान गाने की सही शुरुआत हुई। सुमित और मैंने मिलकर हारमोनियम और कंप्यूटर खरीदा। हालांकि, दोनों को हारमोनियम चलाना नहीं आता था। धीरे-धीरे यूट्यूब से सीखने की कोशिश की, लेकिन प्रॉपर तरीके से नहीं सीख पाए। पहले गाने के 40 हजार दिए, पसंद नहीं आया सुमित ने बताया कि उन्होंने 2019 में एक गाना लिखा था। वे अपने पहले गाने को कंपोज कराना चाहते थे, इसलिए उन्होंने अपने परिवार से 40 हजार रुपए मांगे। उन्होंने हिसार में एक म्यूजिक प्रोड्यूसर से गाना तैयार करवाया, लेकिन उन्हें म्यूजिक पसंद नहीं आया। वे चाहते थे कि उनके लिरिक्स हर दिल तक पहुंचें। वे अपनी भावना को म्यूजिक प्रोड्यूसर तक ठीक से नहीं पहुंचा पाए, जिसकी वजह से मिसकम्युनिकेशन हुआ और गाना बेहतरीन नहीं बन पाया। इसके बाद 5 और गाने रिलीज किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। 28 नवंबर 2024 को पहला गाना रिलीज किया सुमित ने बताया कि 2024 में उन्होंने यूट्यूब पर बंजारा के नाम से चैनल बनाया। इसी ऑफिशल चैनल से अपने गाने रिलीज करने शुरू कर दिए। 28 नवंबर 2024 में ‘सूट्स विद मी’ पहला गाना रिलीज किया। उसके बाद उन्होंने दूसरा गाना ‘डिफरेंट टॉक’, आशिक आवारा, मौज, हाय रै और छठ गाना बैरण रिलीज किया। बैरण गाना लिखने से लेकर एनिमेटेड वीडियो रिलीज करने में डेढ़ साल का समय लगा। उन्होंने बार-बार इसके लिरिक्स बदले। चंडीगढ़ में शूटिंग हुई, लेकिन पसंद नहीं आई अनुज ने बताया कि गाने का वीडियो चंडीगढ़ में शूट किया था, लेकिन पसंद नहीं आया और रिजेक्ट कर दिया। 23 जनवरी 2026 को ऑडियो सॉन्ग रिलीज किया। लोग इस गाने को पसंद करने लगे। उन्होंने सोचा कि इसके वीडियो में कुछ ऐसा करना है, जिसे लोग फील कर पाएं। इसलिए एनिमेटेड वीडियो लगाने का प्लान आया। 13 फरवरी 2026 को एनिमेटेड वीडियो रिलीज किया। 50 हजार में हुआ था गाना तैयार सुमित ने बताया कि अभी तक रिलीज सभी छह गानों में एक स्टोरी दिखाई गई है। उनका म्यूजिक एक सफर दिखाता है। बंजारा जाति में भी यह चीज कॉमन होती है और हमारी म्यूजिक में भी यह बात बड़ा थी, इसीलिए चैनल का नाम बंजारा रखा। 17 मार्च 2026 को बैरण गाना बिलबोर्ड इंडिया की टॉप रैंकिंग में आया। बैरन गाने का म्यूजिक पंचकूला में रोनी ने तैयार किया। 50 हजार में पूरा गाना तैयार हुआ। पहले पांच गाने नहीं चले, लेकिन छठे गाने ने दोनों भाइयों को बुलंदियों तक पहुंचा दिया। पंजाब और बॉलीवुड से भी ऑफर आए अनुज ने बताया कि बिलबोर्ड इंडिया की नंबर वन रैंकिंग में आने के बाद हरियाणा, पंजाब और बॉलीवुड से उन्हें लगातार ऑफर आ रहे हैं। उनकी मुंबई में एक बड़ी कंपनी के साथ भी बातचीत हुई, लेकिन वहां पर ठीक नहीं लगा और इसलिए काम नहीं किया। हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा, केडी, अमित सैनी रोहतकिया की तरफ से भी साथ काम करने के लिए ऑफर आए। पंजाब से दिलप्रीत ढिल्लों की तरफ से भी ऑफर मिला। हरियाणा और पंजाब की इंडस्ट्री से काफी सपोर्ट भी मिल रहा है। लोग ताने मारते थे, कहते- इसमें कुछ नहीं रखा अनुज ने बताया कि कोरोना में लॉकडाउन के दौरान जब उन्होंने गाने बनाना शुरू किया, तो कुछ लोग उनसे कहते थे कि गानों में कुछ नहीं रखा है। माता-पिता को भी यही कहते थे कि बच्चों को पढ़ा-लिखाकर आगे बढ़ाओ, क्योंकि गाने के क्षेत्र में सबको कामयाबी नहीं मिलती, लेकिन उन्हें माता-पिता

हनी सिंह की कॉन्सर्ट में धांसू एंट्री:मुंबई के MMRDA ग्राउंड में नीली रॉल्स रॉयस से पहुंचे; सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ 'बिलियनेर औरा'

हनी सिंह की कॉन्सर्ट में धांसू एंट्री:मुंबई के MMRDA ग्राउंड में नीली रॉल्स रॉयस से पहुंचे; सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ 'बिलियनेर औरा'

यो यो हनी सिंह और विवादों का पुराना नाता है, लेकिन इस बार उनका ड्रामा फैंस के लिए किसी सरप्राइज से कम नहीं था। मुंबई के MMRDA ग्राउंड में आयोजित कॉन्सर्ट में हनी सिंह ने ऐसी एंट्री ली कि सोशल मीडिया पर बिलियनेर औरा ट्रेंड करने लगा। 28 मार्च की रात जब हनी सिंह अपनी लग्जरी कार से उतरे तो नजारा देखने लायक था। जैसे ही स्टेज पर रोशनी जगमगा उठी, बैकग्राउंड में हनी सिंह का सुपरहिट गाना मिलियनेयर बजने लगा। इसी बीच एक गहरे नीले रंग की रॉल्स रॉयस घोस्ट सीरीज (जिसकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपए बताई जा रही है) वेन्यू के अंदर दाखिल हुई। कार रुकते ही सफेद रंग के स्टाइलिश आउटफिट में हनी सिंह बाहर निकले। उनके बाहर आते ही पूरे स्टेज पर आतिशबाजी शुरू हो गई, जिसने माहौल को और भी जादुई बना दिया। हाथ में जाम और फिर शुरू हुआ सुरों का सैलाब एंट्री का सबसे चर्चा वाला पल तब आया जब हनी सिंह कार से उतरकर आगे बढ़े। वहां पहले से ही ट्रे में गिलास लेकर खड़ी एक महिला ने उन्हें ड्रिंक सर्व की। हनी सिंह ने फिल्मी अंदाज में वह गिलास उठाया और सीधे स्टेज की ओर बढ़ गए। हाथ में जाम थामे हनी सिंह ने जैसे ही माइक संभाला, पूरा क्राउड झूम उठा। हिट गानों पर झूमी मुंबई, वायरल हुए वीडियो स्टेज पर पहुंचते ही हनी सिंह ने ब्लू आइज और देसी कलाकार जैसे अपने एवरग्रीन गानों की झड़ी लगा दी। सोशल मीडिया पर उनकी एंट्री के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। फैंस कमेंट्स में लिख रहे हैं एंट्री हो तो ऐसी हो और यो यो इज बैक हालांकि कार के मॉडल को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन जानकारों का मानना है कि यह वही 12 सिलेंडर इंजन वाली लग्जरी मशीन है जो अपनी मैजिक कारपेट राइड के लिए मशहूर है।

हनी सिंह ने फिर विवाद खड़ा किया:बोले- मेरा शो सुपरहिट, बाकियों का जैन-जी लैंग्वेज में 6-7; फैंस बोले- करण औजला को टारगेट किया

हनी सिंह ने फिर विवाद खड़ा किया:बोले- मेरा शो सुपरहिट, बाकियों का जैन-जी लैंग्वेज में 6-7; फैंस बोले- करण औजला को टारगेट किया

पंजाबी रैपर-सिंगर यो यो हनी सिंह ने दूसरे सिंगर्स पर कमेंट कर फिर विवाद खड़ा कर दिया है। दिल्ली के IGI स्टेडियम में माय स्टोरी वर्ल्ड टूर के इंडियन चैप्टर में संडे नाइट के दौरान हनी सिंह ने ये कमेंट किया। हनी सिंह ने कहा- यो यो हनी सिंह का शो होता है सुपरहिट, बाकियों का जेन जी (Gen Z) की लैंग्वेज में सिक्स-सेवन (6-7) है। इस दौरान हनी सिंह ने 6-7 सेवन बोलते हुए आवाज की टोन भी बदली और इशारे भी किए। जिसके बाद फैंस इसे पंजाबी सिंगर करण औजला से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, हनी सिंह ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन अब इंस्टाग्राम पर औजला और हनी सिंह के फैंस एक-दूसरे पर कमेंटबाजी कर रहे हैं। कुछ फैंस बचाव भी कर रहे हैं कि हनी सिंह ने ये बात करण औजला नहीं, बल्कि रैपर बादशाह के लिए कही है। करण औजला भी इन दिनों टूर पर हैं। शनिवार को ही उन्होंने मोहाली में शो किया था। जिसके बाद फैंस ज्यादा संभावना करण औजला से ही जोड़ रहे हैं। हालांकि, औजला का इसको लेकर कोई रिएक्शन नहीं आया है। हनी सिंह के बयान के 2 मतलब निकाले जा रहे हनी और औजला का विवाद क्यों शुरू हुआ हनी सिंह ने कमबैक के बाद कई इंटरव्यू दिए, जिसमें उन्होंने कहा कि आज के पंजाबी कलाकार उनके बनाए रास्ते पर चल रहे हैं। हनी सिंह ने एक बार यह तक कह दिया कि वह आजकल के गानों को बहुत ज्यादा नहीं सुनते। उन्हें लगता है कि म्यूजिक का लेवल गिर गया है। इसके बाद करण औजला ने एक इंटरव्यू में अपनी मेहनत के साथ आज के टाइम के संगीत को सक्सेसफुल बताया था। करण औजला ने कहा था- मैं सबकी रिस्पेक्ट करता हूं, लेकिन म्यूजिक बदल रहा है। अगर आप समय के साथ नहीं बदलेंगे, तो आप पीछे रह जाएंगे। इसके बाद कुछ फैंस ने माना कि करण औजला ने हनी सिंह को जवाब दिया है। इसके बाद फैंस ने माना कि दोनों के बीच कोल्ड वार शुरू हो गई है। फैंस आपस में भिड़े इंस्टाग्राम पर हनी सिंह के कमेंट के बाद उनके व करण औजला के फैंस आपस में भिड़ गए। हनी सिंह के फैंस ने कहा कि हनी सिंह ने ही इंडिया में रैप कल्चर शुरू किया था, इसलिए वह कमबैक के बाद भी टॉप पर हैं। वहीं, करण औजला के फैंस का मानना है कि हनी सिंह अब ‘अप्रासंगिक’ इरेलिवेंट हो रहे हैं। वह जलन की वजह से नए कलाकारों को नीचा दिखा रहे हैं।

Shreya Ghoshal Mocks Punjabi Songs, Style

Shreya Ghoshal Mocks Punjabi Songs, Style

मशहूर सिंगर श्रेया घोषाल पंजाबी गीतों का मजाक उड़ाती हुई। मशहूर बॉलीवुड सिंगर श्रेया घोषाल ने एक पॉडकास्ट में पंजाबी गानों का मजाक उड़ाया है। श्रेया ने कहा कि पंजाबी गानों में कार, बंगला और लड़कियों की बात ही होती है। इसके अलावा श्रेया घोषाल ने हाथ से इशारे कर सिंगरों के स्टाइल का भी मजाक बनाया। . श्रेया ने कहा कि ज्यादातर पॉपुलर गानों का सब्जेक्ट भी एक जैसा ही होता है। श्रेया का यह वीडियो सामने आते ही वह पंजाबियों के टारगेट पर आ गईं। सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल करते हुए पंजाबियों ने कहा कि उनके सॉन्ग नहीं चल रहे तो इसकी वजह से वह ऐसा कह रही हैं। पंजाबियों ने मेहनत कर कार-बंगले बनाए हैं। जब बराबरी नहीं होती तो बदनामी शुरू कर दो। सबसे पहले जानिए, श्रेया घोषाल ने क्या कहा… पॉडकास्ट में श्रेया घोषाल ने कहा- यह कहने के लिए माफ करना, लेकिन कई पंजाबी गाने हैं, जो बहुत अच्छे चल रहे हैं। उनमें वह क्या बोलते हैं, खासकर जो सॉन्ग पॉपुलर हैं। उनमें गाड़ी, बंगला, लड़की और हाथ से इशारे होते हैं। पंजाबी गानों में अक्सर धन-दौलत और अपनी ताकत का प्रदर्शन या दिखावा किया जाता है, जो आज के युवाओं के बीच बहुत प्रचलित है। उन्होंने कहा- ये गाने इसलिए ज्यादा सुने और पसंद किए जाते हैं, क्योंकि इनकी धुन बहुत अच्छी होती है और साथ ही इसमें दिखावे का एक आकर्षण होता है। यह ‘फ्लेक्स कल्चर’ और ‘अच्छी बीट्स’ का मिश्रण कुछ खास मार्केट्स और दर्शकों के बीच बहुत प्रभावशाली तरीके से काम करता है। अब देखिए, लोग कैसे श्रेया को निशाने पर ले रहे… X यूजर आकाशदीप थिंद ने कहा कि पंजाबी दिखावा नहीं करते बल्कि पंजाबी बहुत हार्ड वर्क करते हैं। जब बराबरी न हो तो बदनामी शुरू कर दो। ज्योति नाम की एक यूजर ने लिखा- इन्होंने शायद पंजाबी रोमांटिक गाने नहीं सुने हैं। पंजाबी इंडस्ट्री में बहुत टैलेंट है और गानों में काफी विविधता भी है। इन्हें कुछ भी बोलने से पहले अपना होमवर्क (तैयारी) ठीक से करना चाहिए। भारत आर्मी नाम के X यूजर ने लिखा, “श्रेया घोषाल ने एक बार कहा था – गहरे पानी की मछली हूं राजा, घाट घाट दरिया में घूमी हूं मैं।, जानलेवा जलवा है, देखने में हलवा है, प्यार से परोस दूंगी, लूट ले जरा।” श्रेया के ये विवाद भी चर्चा में रहे… “चिकनी चमेली” गाने को लेकर विवाद फिल्म अग्निनपथ (2012) का आइटम सॉन्ग “चिकनी चमेली” हिट रहा। लेकिन बाद में इस गाने को लेकर चर्चा हुई। श्रेया घोषाल ने एक इंटरव्यू में कहा कि आज के समय में वह ऐसे गाने रिकॉर्ड नहीं करना चाहेंगी, जिनके बोल महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाई करते हों। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उन्हें ट्रोल किया, क्योंकि वह बाद में कॉन्सर्ट में यह गाना गाती भी दिखीं। लाइव कॉन्सर्ट को लेकर सिंगर्स घेरे हाल ही में उन्होंने कुछ सिंगर्स द्वारा कॉन्सर्ट में लिप सिंक (रिकॉर्डेड गाने बजने पर सिर्फ होंठ हिलाना) करने की आलोचना की। उन्होंने इसे “लेजी एक्ट” यानी आलसी काम बताया। श्रेया का मानना था कि अगर दर्शक टिकट खरीदकर आ रहे हैं, तो उन्हें असली लाइव परफॉर्मेंस मिलनी चाहिए। इस बयान से कई बड़े सिंगर्स को लेकर सवाल उठे। करण जौहर के साथ क्रेडिट विवाद हुआ ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ के गाने ‘तुम क्या मिले’ के प्रमोशन के दौरान करण जौहर ने शुरुआती पोस्ट में अरिजीत सिंह का जिक्र किया था, लेकिन श्रेया का नाम नहीं था। इस पर श्रेया के फैंस ने इसे फीमेल सिंगर की अनदेखी बताते हुए सवाल उठाए। इस दौरान श्रेया ने भी इस पर एक फैन के ट्वीट को रीट्वीट कर अपनी मौन सहमति जताई थी, जिसके बाद करण जौहर ने सुधार करते हुए उन्हें क्रेडिट दिया।

रैपर बादशाह पर FIR, गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित:हरियाणा पुलिस बोली- लुक आउट सर्कुलर जारी होगा; सिंगर बोले- बेटा समझकर माफ कर दो

रैपर बादशाह पर FIR, गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित:हरियाणा पुलिस बोली- लुक आउट सर्कुलर जारी होगा; सिंगर बोले- बेटा समझकर माफ कर दो

बॉलीवुड सिंगर-रैपर बादशाह पर न्यू रिलीज सॉन्ग ‘टटीरी’ को लेकर हरियाणा में 3 मामले दर्ज हुए हैं। हरियाणा पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर दी हैं साथ ही लुक आउट सर्कुलर (LOC) करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। पुलिस ने यह भी कहा है कि इस गाने पर रील बनाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। गाने में बादशाह के बोल और लड़कियों के सीन पर आपत्ति जताई गई है। अब पुलिस के एक्शन के बाद इस सॉन्ग को यूट्यूब से भी हटा दिया गया है। 1 मार्च 2026 को रिलीज हुए इस गाने पर करीब 5 मिलियन व्यूज आ चुके थे। उधर, विवाद के बीच बादशाह ने वीडियो जारी कर कहा, “मेरे गाने ‘टटीरी’ के कुछ बोल और सीन से हरियाणा के कुछ लोगों को ठेस पहुंची है। मैं खुद हरियाणा से हूं। मेरा कोई उद्देश्य नहीं था कि मैं हरियाणा के किसी बच्चे या महिला के बारे में ऐसी बेहूदी बात कहूं। मैं हिप-हॉप जॉनर से हूं, जहां बोल हमेशा कॉम्पिटिशन को नीचा दिखाते हैं। एक तरह से ये प्रतिद्वंद्वी के लिए होते हैं। मैंने हमेशा कोशिश की है कि मैं हरियाणा की संस्कृति को आगे लेकर जाऊं। अगर मेरे गाने के उस हिस्से से किसी को बुरा लगा हो, तो मुझे हरियाणा का बेटा समझकर माफ कर दीजिए।” पहले जानिए सॉन्ग को लेकर विवाद क्यों… 14 मार्च को मुंबई में होना था शो इस गाने की शूटिंग जींद के सच्चा खेड़ा, नरवाना और दुबई में हुई। 26 फरवरी को बादशाह इस गाने के प्रमोशन के लिए हरियाणा के कैथल और सोनीपत पहुंचे थे। वहीं, प्रोडक्शन टीम ने 14 मार्च को सिमरन और बादशाह का मुंबई में एक शो भी शेड्यूल किया था। महिला आयोग ने किया तलब विवाद के बीच हरियाणा महिला आयोग ने शुक्रवार को बादशाह को नोटिस जारी किया था। उन्हें 13 मार्च को पानीपत में पेश होने को कहा गया है। इसके अलावा, पंचकूला और जींद में सिंगर के खिलाफ अलग-अलग 3 केस भी दर्ज किए गए। खाप पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं ने भी इस गाने को हरियाणवी संस्कृति के खिलाफ बताते हुए इसे प्रतिबंधित करने की मांग की थी। ————– टटीरी सॉन्ग से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… बादशाह के टटीरी सॉन्ग पर पंचकूला-जींद में FIR:लड़कियों को स्कूल बैग फेंकते दिखाया, गंदे शब्द का इस्तेमाल; महिला आयोग ने रैपर को तलब किया बादशाह संग ‘टटीरी’ सॉन्ग गाने वाली सिमरन की कहानी: पिता हरियाणवी सॉन्ग ‘पानी आली पानी प्यादे’ गाकर फेमस हुए, बेटी बॉक्सिंग में स्टेट चैंपियन रही हरियाणवी सॉन्ग ‘टटीरी’ का रैप वर्जन लाए सिंगर बादशाह:सोनीपत में सरपंचों के वेलकम पर बोले- मासूम शर्मा वाली वीडियो देखी है; साग-मक्के की रोटी खाई

Haryana Boxer Simran Jaglan Gets Big Break With Badshahs Titteri Song

Haryana Boxer Simran Jaglan Gets Big Break With Badshahs Titteri Song

टटीरी सॉन्ग के प्रमोशन के दौरान रैपर बादशाह के साथ सिमरन जागलान। बॉलीवुड रैपर-सिंगर बादशाह ने हरियाणवी फोक सॉन्ग ‘टटीरी’ लॉन्च किया है। इस गाने में कैथल की रहने वाली सिमरन जागलान ने अपनी आवाज दी है। सिमरन, हरियाणवी सिंगर कर्मबीर फौजी की बेटी हैं, जिन्होंने फेमस हरियाणवी सॉन्ग ‘पानी आली पानी प्यादे’ गाया है। . सिमरन एक बॉक्सर भी हैं और स्टेट चैंपियन रह चुकी हैं। अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए वह सिंगिंग भी कर रही हैं। तीन साल पहले बनाए गए ‘टटीरी’ गाने पर बादशाह की नजर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने 1 मार्च को इसका रीमिक्स वर्जन रिलीज किया। इस गाने को अभी तक यूट्यूब पर 2 मिलियन से ज्यादा लोग सुन चुके हैं। गाने की शूटिंग जींद के सच्चा खेड़ा, नरवाना और दुबई में हुई है। 26 फरवरी को बादशाह इस गाने के प्रमोशन के लिए हरियाणा के कैथल और सोनीपत पहुंचे थे। अब 14 मार्च को सिमरन, बादशाह के साथ मुंबई में एक शो करेंगी। टटीरी सॉन्ग में अलका शर्मा, अर्हाना, इशिका, दीपाल, मन्नस्वी और शिवानी समेत अन्य ने डांस किया है। जानिए कौन हैं सिमरन जागलान जिन्होंने बादशाह संग गाना गाया… पिता भी हरियाणवी सिंगर 20 साल की सिमरन जागलान कैथल जिले के पट्‌टी अफगान गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता कर्मबीर फौजी भी हरियाणवी सिंगर हैं। सिमरन चार बेटियों में तीसरे नंबर पर है। सिमरन कैथल के आरकेएसडी कॉलेज में बीए फाइनल ईयर की स्टूडेंट हैं। वह कैथल में ही गुरमीत कोच के पास बॉक्सिंग की प्रैक्टिस करती हैं। वह स्टेट और नेशनल चैंपियन भी रह चुकी हैं। कॉल आई तो विश्वास नहीं हुआ सिमरन ने बताया कि जब मुझे बादशाह के साथ गाने का मौका मिला तो पहले मुझे विश्वास ही नहीं हुआ। मुझे लगा कि शायद कोई प्रैंक कॉल या प्रमोशन कॉल है। बाद में जब पुष्टि हुई तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बादशाह को उनकी ट्रेडिशनल स्टाइल में गाई हुई आवाज पसंद आई। इसी वजह से मुझे ‘टटीरी’ में मौका मिला। 3 साल पहले बनाया था टटीरी गाना सिमरन ने बताया कि करीब तीन साल पहले मैंने अपने पिता की कंपनी में ही ‘टटीरी’ गाना गाया था। वही गाना बादशाह को पसंद आया और उन्होंने इसे रिमिक्स कर मॉडर्न ट्विस्ट दिया। अब 2026 में यह गाना नए रूप में रिलीज हुआ है। मैंने अभी तक करीब 300 फोक सॉन्ग गाए हैं। मैं फोक सॉन्ग और भजन गाती हूं। मैंने सिंगिंग लाइन की शुरुआत अपने पिता के साथ की। मेहनत का फल जरूर मिलता है सिमरन ने कहा कि मैं बॉक्सर हूं। सिंगिंग पिता की प्रेरणा से शुरू हुई। जब भी पिता कहते थे कि गाना गाना है, तो मैं मना नहीं करती थी। मैं कहती हूं कि अगर हम साफ-सुथरा गा रहे हैं और मेहनत कर रहे हैं तो उसका फल एक दिन जरूर मिलता है। मैं अपनी सफलता का सारा श्रेय अपने पिता को देती हूं। अपने बेटी सिमरन और शिवानी जागलान के साथ कर्मबीर फौजी। अब जानिए कर्मबीर फौजी ने क्या कहा… सभी बच्चे बॉक्सिंग करते हैं सिमरन के पिता कर्मबीर फौजी ने बताया कि परिवार के बच्चे बॉक्सिंग खेलते हैं। सिमरन खेलो इंडिया में नेशनल खेल चुकी है। सबसे बड़ी बेटी शीतल भी ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी में मेडल हासिल किया है। शीतल से छोटी शिवानी जागलान ने नेशनल बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीता है। बादशाह के मैनेजर का कॉल आया था कर्मबीर ने कहा कि हमारे पास बादशाह के मैनेजर का कॉल आया था। उन्होंने टटीरी सॉन्ग को लेकर बातचीत की थी। बाद में बादशाह से बात करवाई। जब बादशाह को यह पता चला कि सिमरन हरियाणवी सिंगर कर्मबीर फौजी की बेटी है तो वे और भी ज्यादा खुश हुए। बेटी की आवाज आज बॉलीवुड में गूंज रही है। यह उसके लिए बहुत बड़ा ब्रेक है। फोक सॉन्ग संस्कृति की पहचान उन्होंने कहा कि बेटी सिमरन सिंगिंग और बॉक्सिंग दोनों में अच्छा कर रही है। अब यह बेटी पर ही डिपेंड करेगा कि वो अपना करियर किस तरफ लेकर जाती है। बेटी की बाजू में थोड़ी इंजरी भी है। बेटी से फोक सॉन्ग गवाने का उद्देश्य सिर्फ इतना था कि हमारे पुराने गीत जिंदा रहे, क्येंकि ये हमारी संस्कृति की पहचान हैं। —————————– ये खबर भी पढ़ें :- हरियाणवी सॉन्ग ‘टटीरी’ का रैप वर्जन लाए सिंगर बादशाह:सोनीपत में सरपंचों के वेलकम पर बोले- मासूम शर्मा वाली वीडियो देखी है बॉलीवुड रैपर-सिंगर बादशाह ने हरियाणवी फॉक सॉन्ग टटीरी का रैप वर्जन रिकॉर्ड किया है। इसी सिलसिले में सिंगर अपनी टीम के साथ सोनीपत के गांव असदनपुर-नांदनोर पहुंचे, यहां उन्हें बैल-बुग्गी पर बैठाकर गांव की गलियों में घुमाया गया। सरपंच मुकेश उर्फ बल्लू के घर पर देसी खाना खाया। पढ़ें पूरी खबर…