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पसीने की बदबू से आती है शर्म? फिटकरी का देसी नुस्खा देगा दिनभर ताजगी, एकदम रहेंगे फ्रेश और कॉन्फिडेंट

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Last Updated:April 01, 2026, 15:26 IST गर्मी के मौसम में पसीना और उससे आने वाली बदबू लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है. ऐसे में महंगे प्रोडक्ट्स के बजाय फिटकरी एक आसान और असरदार देसी उपाय साबित हो सकती है. इसके एंटीबैक्टीरियल गुण बदबू को कम करने और पसीने को नियंत्रित करने में मदद करते हैं. आइए जानते है कुछ आसान टिप्स… गर्मी का मौसम शुरू होते ही लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या ज्यादा पसीना और उससे आने वाली बदबू बन जाती है. यह परेशानी न सिर्फ शारीरिक असहजता पैदा करती है, बल्कि कई बार सामाजिक स्थिति में भी शर्मिंदगी का कारण बन जाती है. ऐसे में लोग महंगे डियोड्रेंट, परफ्यूम और केमिकल प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन इनका असर कुछ समय तक ही रहता है. इसी बीच एक आसान और सस्ता देसी नुस्खा भी है, जो सालों से पसीने और बदबू से राहत दिलाने में मददगार माना जाता रहा है. फिटकरी का इस्तेमाल लंबे समय से घरेलू उपचार के रूप में किया जाता रहा है. आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में फिटकरी को एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुणों के लिए जाना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, पसीने की बदबू का मुख्य कारण शरीर पर पनपने वाले बैक्टीरिया होते हैं. ऐसे में फिटकरी इन बैक्टीरिया को कम करने में सहायक साबित हो सकती है. इस उपाय को अपनाना बेहद आसान है. इसके लिए रोजाना नहाने के पानी में थोड़ा सा फिटकरी पाउडर या उसका छोटा टुकड़ा डालकर घोल लें. जब फिटकरी पानी में पूरी तरह घुल जाए, तो उसी पानी से स्नान करें. खासतौर पर शरीर के उन हिस्सों पर ध्यान दें, जहां पसीना ज्यादा आता है, जैसे अंडरआर्म्स, गर्दन और पैर. नियमित रूप से ऐसा करने पर धीरे-धीरे पसीने की बदबू में कमी महसूस होने लगती है. Add News18 as Preferred Source on Google स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, फिटकरी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा को साफ रखने में मदद करते हैं और बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया को कम करते हैं. साथ ही यह त्वचा के रोमछिद्रों को हल्का टाइट करने में भी सहायक हो सकती है, जिससे पसीना कम निकलता है. हालांकि, यह पसीने को पूरी तरह बंद नहीं करती, बल्कि उसे नियंत्रित करने में मदद करती है. यह एक आसान घरेलू उपाय है, लेकिन इसका इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पानी में बहुत ज्यादा फिटकरी न मिलाएं, क्योंकि इससे त्वचा रूखी हो सकती है. जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है, उन्हें पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए. इसके अलावा, अगर किसी को पहले से स्किन एलर्जी या कोई त्वचा संबंधी समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह लेकर ही इस उपाय को अपनाना बेहतर होगा. अगर किसी व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा पसीना आता है, जिसे मेडिकल भाषा में हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है, या पसीने के साथ तेज बदबू लगातार बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे मामलों में यह किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है. इसलिए घरेलू उपायों के साथ-साथ विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है. First Published : April 01, 2026, 15:26 IST

क्या AC बना रहा आपको कमजोर? सेहत पर कैसे डाल रहा असर, जानें एक्सपर्ट्स से

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Last Updated:April 01, 2026, 14:51 IST Side effects of AC: गर्मी से राहत पाने के लिए एसी का इस्तेमाल आम बात है, लेकिन घंटों एसी की हवा में रहने से आंखों की सेहत को गंभीर नुकसान हो सकता है. ड्राईनेस, जलन और इन्फेक्शन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं. अलीगढ़: जैसे-जैसे गर्मियां अपने चरम की ओर बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे घरों में एसी का उपयोग तेजी से बढ़ता जा रहा है. लोग अपने आराम और ठंडक के लिए एयर कंडीशनर का सहारा लेते हैं, लेकिन इसके लगातार इस्तेमाल से न सिर्फ पर्यावरण बल्कि स्वास्थ्य पर भी कई तरह के प्रभाव पड़ते हैं. आइए जानते हैं एसी के नुकसान. एएमयू के जोग्राफी विभाग की प्रोफेसर सालेहा जमाल ने बताया कि एसी का आपके शरीर पर कैसा असर पड़ता है इसके बारे में बात करें तो एसी बंद कमरे की हवा को बार-बार सर्कुलेट करता है. इस प्रक्रिया में हवा में मौजूद धूल के कण (डस्ट पार्टिकल्स) और परागकण (पोलन) भी लगातार घूमते रहते हैं. ऐसे में जिन लोगों को सांस से जुड़ी समस्याएं हैं, जैसे अस्थमा या अन्य क्रॉनिक पल्मोनरी डिजीज, उनके लिए यह स्थिति परेशानी बढ़ाने वाली हो सकती है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा एसी हवा को ठंडा करने के साथ-साथ कमरे की नमी (मॉइस्चर) भी कम कर देता है. नमी की कमी के कारण आंखों में सूखापन, गले में खराश और सांस की नलियों में ड्रायनेस की समस्या हो सकती है. इससे बचने के लिए कमरे में पानी से भरा खुला बर्तन रखने से नमी को कुछ हद तक बनाए रखा जा सकता है. एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि लगातार ठंडे वातावरण में रहने से शरीर उस तापमान का आदी हो जाता है. ऐसे में जब व्यक्ति अचानक तेज गर्मी में बाहर निकलता है, तो शरीर पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है. इसलिए एसी का तापमान बहुत कम 16-18 डिग्री रखने के बजाय 24-26 डिग्री के बीच रखना अधिक उचित माना जाता है. उन्होंने बताया कि एसी की नियमित सफाई और सर्विसिंग भी बेहद जरूरी है. यदि समय-समय पर इसकी देखभाल नहीं की जाए, तो इसमें बैक्टीरिया और फंगस पनप सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं. अगर पर्यावरण पर इसके प्रभाव की बात करें, तो एसी से निकलने वाली गैसें जैसे क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) और हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) ओजोन परत को नुकसान पहुंचाती हैं और ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देती हैं. इसके अलावा एसी की बाहरी यूनिट गर्म हवा छोड़ती है, जिससे आसपास का तापमान और अधिक बढ़ जाता है. हालांकि, अब नई तकनीकों के माध्यम से इन प्रभावों को कम करने की कोशिश की जा रही है. इन्वर्टर एसी और इको-फ्रेंडली रेफ्रिजरेंट्स वाले एसी का उपयोग करके ऊर्जा की खपत और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है. इस प्रकार, एसी का उपयोग जहां एक ओर आराम देता है, वहीं इसके सही इस्तेमाल और रखरखाव पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है, ताकि स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को सुरक्षित रखा जा सके. About the Author काव्‍या मिश्रा Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें Location : Aligarh,Uttar Pradesh First Published : April 01, 2026, 14:51 IST

कड़वाहट में छिपा है स्वास्थ्य का खजाना, रोजाना करें करेले का सेवन, मोटापा घटाने में मददगार – News18 हिंदी

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X रोजाना करें करेले का सेवन, मोटापा घटाने में मददगार   Benefits of Bitter Gourd: करेला एक ऐसी सब्जी है जो स्वाद में भले कड़वी हो. लेकिन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है. आयुर्वेद में इसे कई बीमारियों के उपचार में उपयोगी बताया गया है. इसमें मौजूद औषधीय गुण अपच, कब्ज, मोटापा, लिवर समस्या, यूरिन इन्फेक्शन, स्किन एलर्जी और किडनी संबंधी दिक्कतों में लाभ पहुंचाते है. बाराबंकी जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अमित वर्मा के अनुसार करेले का जूस पाचन तंत्र को मजबूत करता है और गैस की समस्या से राहत देता है. वजन बढ़ने या कैलोरी असंतुलन की स्थिति में भी करेले का सेवन लाभकारी है. इसके रस का सेवन त्वचा संबंधी समस्याओं और यूरिन इन्फेक्शन में मददगार माना जाता है. हालांकि विशेषज्ञों की सलाह है कि करेले का नियमित सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें, क्योंकि हर व्यक्ति की शारीरिक जरूरत अलग होती है.

कई बीमारियों में लाभकारी है ये हरा पत्ता… दांत, बाल और त्वचा के लिए रामबाण, जानें फायदे

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X कई बीमारियों में लाभकारी है ये हरा पत्ता… दांत, बाल और त्वचा के लिए रामबाण   Neem ke Fayde: नीम को आयुर्वेद में प्राकृतिक औषधि माना गया है जो शरीर की कई समस्याओं में लाभकारी होता है. पेट की दिक्कत, शुगर, त्वचा रोग, डैंड्रफ और संक्रमण जैसी परेशानियों में इसका उपयोग फायदेमंद माना जाता है. आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. हर्ष के अनुसार नीम एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और ब्लड प्यूरीफायर के रूप में काम करता है. नीम की दातून करने से दांत और मसूड़े मजबूत होते है, जबकि पत्तों का काढ़ा पाचन सुधारने और खून साफ करने में मदद करता है. नीम का तेल बालों में लगाने से डैंड्रफ कम होता है और घाव भरने में भी सहायक होता है. मधुमेह के मरीजों के लिए भी नीम उपयोगी बताया गया है. नियमित और सही तरीके से उपयोग करने पर नीम शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है.

सुबह खाली पेट खाएं सिर्फ 1 लहसुन की कली, शरीर में दिखेंगे हैरान करने वाले बदलाव! – News18 हिंदी

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X सुबह खाली पेट खाएं सिर्फ 1 लहसुन की कली, शरीर में दिखेंगे गजब के बदलाव   Raw Garlic Health Benefits: ऋषिकेश के आयुष डॉक्टर राजकुमार बताते हैं कि भारतीय रसोई की शान लहसुन सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाला मसाला नहीं, बल्कि सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. अगर आप अपने दिन की शुरुआत खाली पेट कच्चे लहसुन की एक कली से करते हैं, तो इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जो बदलते मौसम में सर्दी-खांसी और वायरल इन्फेक्शन से बचाने में मदद करती है. इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं, जिससे गैस और अपच जैसी समस्याओं में आराम मिलता है. दिल की सेहत के लिए भी लहसुन रामबाण माना जाता है; इसमें पाया जाने वाला एलिसिन तत्व ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक है. इसके अलावा, यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है, जिससे वजन घटाने में भी मदद मिलती है. बस ध्यान रखें कि इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करें.

Benefits of aloevers I त्वचा, बाल और पाचन के लिए प्राकृतिक उपाय

एलोवेरा

Last Updated:March 30, 2026, 14:26 IST आजकल लोग प्राकृतिक उपचार की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं और ऐसे में एलोवेरा एक बेहतरीन घरेलू उपाय बनकर उभरा है. यह त्वचा, बाल और पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होने के साथ इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करता है. हालांकि इसके उपयोग में सही मात्रा और सावधानी रखना जरूरी है, तभी इसके पूरे लाभ मिल सकते हैं. आज के समय में लोग अपनी सेहत को लेकर काफी जागरूक हो गए हैं. कई लोग दवाइयों की जगह प्राकृतिक और घरेलू उपायों को अपनाना पसंद करते हैं. ऐसे में एलोवेरा एक ऐसा पौधा है, जिसे “प्राकृतिक इलाज का खजाना” कहा जाता है. यह पौधा न सिर्फ आसानी से घर में उगाया जा सकता है, बल्कि इसके उपयोग से कई बीमारियों में राहत भी मिलती है. एलोवेरा का सबसे ज्यादा उपयोग त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता है. इसके जेल को सीधे चेहरे पर लगाने से त्वचा मुलायम और चमकदार बनती है. यह पिंपल्स को कम करने में भी मदद करता है. जिन लोगों की त्वचा सूखी रहती है, उनके लिए एलोवेरा एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर का काम करता है. अगर किसी को सनबर्न या जलन की समस्या हो जाए, तो एलोवेरा जेल लगाने से तुरंत ठंडक मिलती है और त्वचा जल्दी ठीक होती है. एलोवेरा बालों के लिए भी बहुत फायदेमंद है, इसे बालों में लगाने से बाल मजबूत होते हैं और टूटना कम होता है. यह डैंड्रफ को खत्म करने में भी मदद करता है. एलोवेरा जेल को नारियल तेल के साथ मिलाकर बालों में लगाने से बाल घने और चमकदार बनते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google एलोवेरा का जूस पीने से पाचन तंत्र बेहतर होता है. यह कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत देता है. रोजाना सुबह खाली पेट थोड़ी मात्रा में एलोवेरा जूस पीने से पेट साफ रहता है और शरीर हल्का महसूस होता है. हालांकि, एलोवेरा जूस का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा सेवन करने से नुकसान भी हो सकता है. एलोवेरा में कई तरह के विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाते हैं. इसका नियमित सेवन करने से शरीर बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनता है. अगर कहीं कट, छिलन या जलन हो जाए, तो एलोवेरा जेल लगाने से घाव जल्दी भरता है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो संक्रमण को रोकते हैं और दर्द को कम करते हैं. वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि एलोवेरा का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है. इसके ताजे पत्ते से जेल निकालकर सीधे त्वचा या बालों में लगाया जा सकता है. इसके अलावा बाजार में एलोवेरा जूस और जेल भी उपलब्ध होते हैं. अगर आप घर में एलोवेरा उगाना चाहते हैं, तो यह बहुत आसान है. इसे गमले में लगाकर धूप वाली जगह पर रखें और ज्यादा पानी न दें. यह कम देखभाल में भी अच्छी तरह बढ़ता है. वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि एलोवेरा जितना फायदेमंद है, उतनी ही सावधानी भी जरूरी है. इसका सेवन अधिक मात्रा में करने से पेट खराब हो सकता है. गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. First Published : March 30, 2026, 14:26 IST

कई बीमारियों के लिए रामबाण है ये छोटू सा पौधा, बालों से लेकर लिवर तक में फायदेमंद, जानें कैसे करें सेवन – News18 हिंदी

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X कई बीमारियों के लिए रामबाण है ये पौधा, बालों से लेकर लिवर तक में फायदेमंद   Health Tips: आयुर्वेद में भृंगराज को बेहद उपयोगी औषधि माना जाता है, जिसका उपयोग कई प्रकार की बीमारियों के उपचार में किया जाता है. खास बात यह है कि इसका उपयोग शरीर के अंदर और बाहर दोनों तरह से किया जा सकता है. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ विपिन सिंह ने लोकल 18 को बताया कि भृंगराज एक ऐसी औषधीय वनस्पति है, जिसके नियमित और सही उपयोग से शरीर को कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं. यह औषधि सस्ती होने के साथ-साथ आसानी से उपलब्ध भी हो जाती है, खासतौर पर बालों से जुड़ी समस्याओं में भृंगराज को बेहद प्रभावी माना जाता है. इसके उपयोग से बालों का झड़ना कम होता है, बाल मजबूत बनते हैं और समय से पहले सफेद होने की समस्या भी कम हो सकती है. यही कारण है कि आयुर्वेद में भृंगराज को बालों के लिए केशराज यानी बालों का राजा भी कहा जाता है.

गोरखपुर में मोरिंगा सूप के दीवाने हुए लोग, यहां 3 घंटे में बिक रहे 200 ग्लास, कीमत 25 रुपये

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X गोरखपुर में मोरिंगा सूप के दीवाने हुए लोग, यहां 3 घंटे में बिक रहे 200 ग्लास   Moringa Soup: गोरखपुर के रामगढ़ ताल इलाके में राहुल नाम के युवक का छोटा सा स्टॉल लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. यह स्टॉल सुबह 5 से 8 बजे तक सिर्फ तीन घंटे के लिए खुलता है. लेकिन यहां मिलने वाला सहजन (मोरिंगा) सूप और जूस लोगों को खूब पसंद आ रहा है. राहुल ताजे सहजन की फलियों को उबालकर उसमें नमक, काली मिर्च और खास घरेलू मसाले मिलाकर सूप तैयार करते है. इसके अलावा एलोवेरा जूस, लौकी सूप, मूंगफली सूप और शुगर स्पेशल सूप भी उपलब्ध है. सहजन का सूप विटामिन, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है. जो सेहत के लिए लाभकारी माना जाता है. सुबह वॉक करने वाले लोग इसे खास पसंद करते है. एक गिलास की कीमत 25 रुपये है और रोजाना 150 से 200 ग्लास की बिक्री हो जाती है, जिससे यह स्टॉल लोगों के बीच खास बन गया है.

गेंदा के फूल के फायदे: त्वचा, पाचन और सूजन में प्राकृतिक औषधीय लाभ

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Last Updated:March 29, 2026, 16:11 IST गेंदा का फूल केवल पूजा और सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई औषधीय गुणों से भरपूर प्राकृतिक उपचार भी है. त्वचा की समस्याओं से लेकर पाचन सुधारने, सूजन कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तक, गेंदा का उपयोग आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता रहा है. हालांकि, इसका इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी माना गया है. गेंदा का फूल औषधीय गुणों से भरपूर होता है और यह कई बीमारियों में राहत देने का काम करता है. आमतौर पर लोग इसे पूजा-पाठ और सजावट के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि गेंदा एक असरदार औषधि भी है. आयुर्वेद में गेंदा के फूल, पत्तियां और यहां तक कि इसके रस का भी उपयोग कई तरह की समस्याओं के इलाज में किया जाता है. त्वचा से जुड़ी समस्याओं में गेंदा बहुत फायदेमंद है. अगर किसी को खुजली, दाने, फोड़े-फुंसी या जलन की समस्या हो, तो गेंदा के फूल का लेप लगाने से आराम मिलता है. यह त्वचा को ठंडक देता है और जलन को कम करता है. इसके अलावा, गेंदा से बना तेल भी त्वचा को मुलायम और स्वस्थ रखने में मदद करता है. गेंदा का फूल आंखों के लिए भी लाभकारी माना जाता है, अगर आंखों में जलन, लालिमा या सूजन हो, तो गेंदा के फूल को पानी में उबालकर ठंडा करके उससे आंख धोने से राहत मिलती है. हालांकि, आंखों में इस्तेमाल करने से पहले साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. Add News18 as Preferred Source on Google मालती वर्मा बताती है कि पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में भी गेंदा का उपयोग किया जाता है. गेंदा के फूल से बनी चाय या काढ़ा पेट की गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देता है. यह शरीर के अंदर की सफाई करने में भी मदद करता है और पाचन शक्ति को मजबूत बनाता है. गेंदा का उपयोग सूजन और दर्द कम करने में भी किया जाता है. इसके फूल में ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर की सूजन को कम करते हैं. अगर किसी को जोड़ों में दर्द या सूजन की समस्या है, तो गेंदा के तेल से मालिश करने से आराम मिल सकता है. गेंदा का फूल महिलाओं के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसका उपयोग मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं को कम करने के लिए किया जाता है. हालांकि, इसका उपयोग करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है. गेंदा का फूल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं. नियमित रूप से इसका सीमित उपयोग करने से शरीर स्वस्थ रहता है. गांवों और छोटे कस्बों में गेंदा का उपयोग घरेलू इलाज के रूप में काफी समय से किया जा रहा है. यह आसानी से मिलने वाला और सस्ता पौधा है, जिसे लोग अपने घरों में भी उगा सकते हैं. यही वजह है कि यह आम लोगों के लिए एक सुलभ औषधि बन चुका है. मालती वर्मा बताती है गेंदा का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं. किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी या गर्भवती महिला को उसका प्रयोग करने से पहले किसी किसी डॉक्टर या और आयुर्वेदाचार्य के सलाह बिना किसी भी औषधि पौधे का प्रयोग नहीं करना चाहिए. किसी भी औषधि पौधे का प्रयोग केवल 7 दिन तक ही करना चाहिए. First Published : March 29, 2026, 16:11 IST

गन्ने के रस का देसी सिरका: पेट दर्द और बदहजमी का पारंपरिक इलाज

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Last Updated:March 26, 2026, 20:59 IST गाजीपुर के जमानिया क्षेत्र के किशुनीपुर गांव की 75 वर्षीय इंदिरा सनी आज भी गन्ने के रस से देसी सिरका बनाने की पारंपरिक विधि को जीवित रखे हुए हैं. दो से तीन महीने तक धूप में प्राकृतिक किण्वन से तैयार यह सिरका पाचन संबंधी समस्याओं में असरदार माना जाता है. बिना केमिकल के बनने वाला यह देसी नुस्खा पुराने समय में बदहजमी, पेट दर्द और उल्टी जैसी परेशानियों के लिए घरेलू औषधि के रूप में इस्तेमाल होता था. गाजीपुर. आज के दौर में जहां सिरदर्द से लेकर पेट दर्द तक के लिए हम तुरंत अंग्रेजी दवाइयों और एंटीबायोटिक्स की ओर भागते हैं, वहीं हमारे गांवों में आज भी सेहत का खजाना रसोई और परंपराओं में छिपा है. गाजीपुर के जमानिया क्षेत्र के किशुनीपुर  गांव की रहने वाली 75 वर्षीय इंदिरा सनी एक ऐसी ही विलुप्त होती परंपरा को बचाती है. गन्ने के रस से बना देसी सिरका, यह सिरका केवल शरबत नहीं, बल्कि पुराने समय की एक अचूक औषधि भी है.इंदिरासनी बताती हैं कि असली और शुद्ध सिरका बनाना कोई जल्दबाजी का काम नहीं, बल्कि धैर्य की प्रक्रिया है. वह कहती हैं, पहले गन्ने के ताजे रस को मिट्टी के बर्तनों में भरकर 2 से 3 महीने तक कड़ी धूप में रखा जाता था. इस लंबी अवधि के दौरान रस प्राकृतिक रूप से फर्मेंट (किण्वन) होता है. अशुद्धियों को दूर करने के लिए इसे समय-समय पर महीन कपड़े से छाना जाता था, जिससे रस धीरे-धीरे गाढ़ा और तीखा होने लगता था. कढ़ाई का छौंक और औषधीय गुणसिरका तैयार होने का अंतिम चरण सबसे महत्वपूर्ण है, जब रस पूरी तरह फर्मेंट हो जाता है, तब इसे लोहे की कढ़ाई में हल्का गर्म किया जाता है. इंदिरासनी के अनुसार, इसे एक खास तरीके से तड़का दिया जाता है, जिससे न केवल इसका स्वाद बढ़ता है, बल्कि इसके औषधीय गुण भी कई गुना बढ़ जाते हैं. यही वह प्रक्रिया है जो इसे बाज़ार में मिलने वाले सिंथेटिक सिरके से कोसों दूर और गुणकारी बनाती है. पेट की समस्याओं का रामबाण इलाजयह देसी सिरका पुराने समय में हर घर की फर्स्ट एड किट हुआ करता था, इंदिरासनी साझा करती हैं कि बदहजमी, असहनीय पेट दर्द और उल्टी जैसी समस्याओं में यह किसी चमत्कार की तरह काम करता था. अगर किसी का पेट खराब होता या खाना नहीं पचता, तो बस थोड़ी मात्रा में यह सिरका पिला दिया जाता था और एक-दो दिन में मरीज भला-चंगा हो जाता था. आज के आधुनिक जीवन में हम इन पारंपरिक तरीकों से दूर हो गए हैं, लेकिन किशुनीपुर  जैसे गांवों में यह ज्ञान आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Ghazipur,Uttar Pradesh First Published : March 26, 2026, 20:59 IST