भीषण गर्मी में लू की मार से बचाने में मदद करेगा ये शरबत, जानें इसे घर पर बनाने की आसान विधि – News18 हिंदी

X भीषण गर्मी में लू की मार से बचाने में मदद करेगा ये शरबत, जानें बनाने की विधि Palash Flower Benefits: गर्मी का मौसम शुरू होते ही गांवों-जंगलों में पलाश (टेसू) के फूल खिलने लगते हैं, जो आग की तरह लाल-नारंगी रंग के नजर आते हैं. ग्रामीण इलाकों में इसे टेसू के नाम से जाना जाता है. आयुर्वेद में पलाश के फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग कई बीमारियों के इलाज में किया जाता है. खास बात ये कि इन फूलों से बनने वाला शरबत गर्मियों में किसी वरदान से कम नहीं माना जाता. पलाश के फूलों का शरबत शरीर को ठंडक देने के साथ कई समस्याओं में राहत देता है. लू और गर्मी से बचाव पलाश का शरबत शरीर को अंदर से ठंडा रखता है. तेज धूप में निकलने पर होने वाली थकान, सिरदर्द और बेचैनी को कम करने में मदद करता है. इसे पीने से लू लगने का खतरा भी कम हो जाता है. यह शरबत पाचन तंत्र को मजबूत करता है. गैस, कब्ज, दस्त और पेट की जलन जैसी समस्याओं में राहत देता है. जिन लोगों को पेट में गर्मी की शिकायत रहती है, उनके लिए यह काफी फायदेमंद माना जाता है.
गर्मी में शरीर को ठंडा रखने वाली 5 पत्तियां | 5 Cooling Leaves for Summer Health Tips

Last Updated:April 05, 2026, 10:57 IST 5 Cooling Leaves for Summer Health Tips: अप्रैल की बढ़ती गर्मी और लू से बचने के लिए शरीर को अंदर से ठंडा रखना अनिवार्य है. इसके लिए 5 हरी पत्तियां—पुदीना, बेल के पत्ते, हरा धनिया, लेमन ग्रास और पान के पत्ते—अत्यंत लाभकारी हैं. पुदीना अपनी ठंडी तासीर से पेट की जलन और एसिडिटी को खत्म करता है, जबकि बेल की पत्तियां पाचन तंत्र को मजबूत कर लू से बचाती हैं. हरा धनिया शरीर को हाइड्रेटेड और डिटॉक्स रखने में मदद करता है. लेमन ग्रास चाय के रूप में ताजगी प्रदान करती है और ब्लोटिंग कम करती है. वहीं, पान के पत्ते पेट की समस्याओं और त्वचा के संक्रमण में राहत देते हैं. इन प्राकृतिक पत्तियों का नियमित सेवन गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान नियंत्रित रखने और बीमारियों से बचने का सबसे आसान और प्रभावी घरेलू उपाय है. गर्मियों की शुरुआत के साथ ही अप्रैल में पारा तेजी से चढ़ने लगा है. ऐसे में शरीर को लू और तपिश से बचाने के लिए खान-पान में बदलाव करना बेहद जरूरी है. इस मौसम में ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जिनकी तासीर ठंडी हो और जो शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करें. खासकर 5 औषधीय हरी पत्तियां गर्मियों में पेट की जलन और त्वचा की समस्याओं के लिए रामबाण मानी जाती हैं. ये पत्तियां न केवल शरीर को अंदरूनी ठंडक देती हैं, बल्कि पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखती हैं. गर्मी के मौसम में पुदीना सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली पत्तियों में से एक है. इसकी तासीर ठंडी होती है, जो शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में मदद करती है. पुदीने की चटनी, छाछ, ड्रिंक्स और सलाद में इसका नियमित सेवन किया जा सकता है. यह पेट की गर्मी, गैस, एसिडिटी और जलन को कम करने में बेहद असरदार है. साथ ही इसे त्वचा पर लगाने से मुंहासे और रैशेज जैसी समस्याओं में भी तुरंत राहत मिलती है. गर्मियों में बेल का शरबत तो लोकप्रिय है ही, लेकिन इसके पत्तों का सेवन भी शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. सुबह खाली पेट 2 से 3 बेल की पत्तियां चबाने से न केवल शरीर को आंतरिक ठंडक मिलती है, बल्कि यह भीषण लू से बचाने में भी सुरक्षा कवच का काम करता है. पाचन तंत्र को दुरुस्त करने के साथ-साथ बेल की पत्तियों की चाय या रस का सेवन कब्ज और एसिडिटी जैसी पुरानी समस्याओं में भी जादुई राहत प्रदान करता है. Add News18 as Preferred Source on Google हरा धनिया भी गर्मी के मौसम में बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसकी तासीर ठंडी होने के कारण इसकी चटनी, चाय या सब्जियों में इसका इस्तेमाल शरीर को अंदरूनी ठंडक देता है. यह न केवल पाचन में सुधार करता है और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है, बल्कि भीषण गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचाने में भी कारगर है. साथ ही, यह शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स कर त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में सहायक होता है. लेमन ग्रास की चाय गर्मियों में काफी फायदेमंद होती है. यह शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ पाचन को भी बेहतर बनाती है. इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर की गर्मी, मानसिक तनाव और ब्लोटिंग (पेट फूलना) जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक होते हैं. इसे न केवल चाय, बल्कि डिटॉक्स वॉटर, सूप और सलाद में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. पान हमारी सांस्कृतिक परंपरा का एक अहम हिस्सा होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भी भरपूर है. इसकी तासीर ठंडी होती है, जो विशेष रूप से भीषण गर्मी में पेट की समस्याओं जैसे गैस, अपच और एसिडिटी से तुरंत राहत प्रदान करती है. गर्मी के दिनों में पान का शेक न केवल स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि शरीर को हाइड्रेट रखने और अंदरूनी ठंडक पहुँचाने में भी मदद करता है. इसके अलावा, पान के पत्तों का पेस्ट त्वचा की जलन और सामान्य संक्रमण (इन्फेक्शन) को दूर करने में भी बेहद लाभकारी साबित होता है. First Published : April 05, 2026, 10:57 IST
गर्मी में भूलकर भी नहीं रखें फ्रिज में ये चीजें, फायदे की जगह हो जाएगा नुकसान, हेल्थ एक्सपर्ट से जानें

Last Updated:April 05, 2026, 07:03 IST Health tips: गर्मी का मौसम शुरू होते ही लोग ठंडी चीजें ज्यादा खाने लगते हैं. घर में रखा फ्रिज इस मौसम में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीज बन जाता है. कई लोग खाने-पीने की लगभग हर चीज फ्रिज में रख देते हैं, ताकि वह ज्यादा समय तक ताजा रहे. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि कुछ चीजें फ्रिज में रखना नुकसानदायक हो सकता है. खरगोन हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. संतोष मौर्य (आयुर्वेद विशेषज्ञ) बताते हैं कि हर चीज को ठंडा रखना जरूरी नहीं होता. कई फल और सब्जियां फ्रिज में रखने से उनके पोषक तत्व कम हो जाते हैं. इससे शरीर को फायदा मिलने की जगह नुकसान हो सकता है. इसलिए गर्मी में खाने की चीजों को सही तरीके से रखना जरूरी है. ब्रेड को भी अक्सर लोग फ्रिज में रख देते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं माना जाता. फ्रिज में रखने से ब्रेड जल्दी सूख जाती है और उसका स्वाद भी खराब हो जाता है. लंबे समय तक ऐसी ब्रेड खाने से पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है. टमाटर को फ्रिज में रखने से उसका स्वाद और प्राकृतिक गुण कम हो जाते हैं. ठंडे तापमान में टमाटर जल्दी खराब भी हो सकता है. इसलिए टमाटर को सामान्य तापमान पर खुले स्थान पर रखना ज्यादा सही माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google केले, आम और पपीता जैसे फलों को भी फ्रिज में रखने से बचना चाहिए. फ्रिज में रखने से ये फल जल्दी काले पड़ जाते हैं और इनमें मौजूद पोषक तत्व कम हो जाते हैं. ऐसे फल सामान्य जगह पर रखने से ज्यादा समय तक अच्छे रहते हैं. तरबूज को भी पूरा का पूरा फ्रिज में रखना सही नहीं माना जाता. इससे उसका स्वाद बदल सकता है. तरबूज काटने के बाद ही फ्रिज में रखें और जल्दी उपयोग करें. इससे शरीर को सही पोषण मिलता है और पेट की समस्या से बचाव होता है. लहसुन, प्याज और आलू जैसी चीजों को भी फ्रिज में रखने से नुकसान हो सकता है. फ्रिज में रखने से इनका स्वाद बदल जाता है और इनमें नमी बढ़ जाती है. इससे ये जल्दी खराब हो सकते हैं और स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है. तेल को भी फ्रिज में रखना सही नहीं माना जाता. ठंडे तापमान में तेल गाढ़ा हो जाता है और उसकी गुणवत्ता बदल सकती है. इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि गर्मी में भी कुछ चीजों को सामान्य तापमान पर ही रखना चाहिए, ताकि शरीर स्वस्थ बना रहे. First Published : April 05, 2026, 07:03 IST
जोधपुर में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत, 8 करोड़ की मशीन से कैंसर ऑपरेशन अब शहर में संभव – News18 हिंदी

X जोधपुर में शुरू हुई रोबोटिक सर्जरी, 8 करोड़ की मशीन से कैंसर ऑपरेशन अब संभव Jodhpur Cancer Robotic Surgery: जोधपुर के विनायका अस्पताल में स्वदेशी रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव आया है. 8 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित इस तकनीक से अब कैंसर सहित कई जटिल ऑपरेशन शहर में ही संभव हो गए हैं. डेढ़ महीने में 13 सफल सर्जरी इसके बेहतर परिणाम का संकेत हैं. अस्पताल ने 8 डॉक्टरों और 12 स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण देकर इस सुविधा को मजबूत बनाया है. डॉ. प्रदीप शर्मा के नेतृत्व में टीम पहले ही 5000 से अधिक कैंसर ऑपरेशन कर चुकी है. अब रोबोटिक तकनीक से मरीजों को कम दर्द, जल्दी रिकवरी और कम खर्च का लाभ मिल रहा है. RGHS योजना से जुड़ने के कारण आम लोगों की पहुंच भी बढ़ी है. इस पहल से मारवाड़ के मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
Health Tips: अगर खाते हैं बैंगन की सब्जी तो हो जाएं सावधान, हो सकता है नुकसान

Last Updated:April 03, 2026, 16:48 IST Health Tips: कई बार होता है कि हम अनजाने में ऐसा खाना खा रहे होते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए सही नहीं होता है. हमें लगता है कि ये हेल्दी सब्जी है, पर असलियत कुछ और ही होती है. अब डॉक्टर की माने तो बैंगन भी ऐसी सब्जी है, जिसे खाने से आपकी सेहत पर गलत असर पड़ सकता है. आइए जानते हैं कैसे… सुल्तानपुर: वैसे तो ज्यादातर सब्जियां सेहत के लिए फायदेमंद बताई जाती हैं. मगर, इन्हीं सब्जियों में कुछ ऐसी सब्जियां भी होती हैं जिनको खाने का नुकसान भी होता है. डॉक्टर भी उनसे परहेज करने के लिए कहते हैं. उन्हीं सब्जियों में से एक है बैंगन. आज हम जानेंगे कि बैगन की सब्जी खाने के क्या नुकसान है और किन लोगों को बैंगन की सब्जी खाने से परहेज करना चाहिए. गर्भावस्था में हो सकता है नुकसान सुल्तानपुर के नगर पालिका स्थित अब्दुल हमीद चिकित्सालय में कार्यरत जनरल फिजिशियन डॉक्टर एसबी सिंह ने लोकल 18 से बात की. उन्होंने कहा कि सबसे पहले बात करें बैंगन की तो वो तासीर में गरम और गैस पैदा करने वाला होता है. यही वजह है कि यह पाचन तंत्र पर दबाव डालता है. जिन लोगों को एसिडिटी, गैस और पेट फूलने की समस्या रहती है, उनके लिए बैंगन का सेवन नुकसानदायक हो सकता है. खासकर गर्भवती महिलाओं को बैंगन खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है. बैंगन में मौजूद फाइटोहॉर्मोन गर्भाशय को उत्तेजित कर सकता है, जिससे गर्भपात और अन्य समस्याएं हो सकती हैं. खासकर शुरुआती महीनों में बैंगन खाने से बचना चाहिए. जोड़ों के दर्द में नुकसानदायक जिन लोगों को आर्थराइटिस या जोड़ों के दर्द की समस्या है उनके लिए भी बैंगन सही नहीं माना जाता है. क्योंकि इसमें सोलानेन नाम का एक तत्व पाया जाता है, जो जोड़ों में सूजन और दर्द को बढ़ा सकता है. इसी वजह से गठिया के मरीजों को बैंगन खाने से परहेज करना चाहिए. बढ़ाता है स्टोनइसके साथ ही बैंगन में ऑक्सलेट्स पाए जाते हैं, जो किडनी स्टोन की समस्या बढ़ा सकते हैं. जिन लोगों को पहले से पथरी की शिकायत है, उन्हें बैंगन का सेवन कम या बिल्कुल नहीं करना चाहिए. ऐसे में जो लोग ज्यादा मात्रा में बैगन कहते हैं उन्हें सावधान होने की जरूरत है क्योंकि उनको किडनी की समस्या हो सकती है और इससे किडनी में बढ़ते हुए स्टोन से काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. About the Author काव्या मिश्रा Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh First Published : April 03, 2026, 16:48 IST
Moringa Benefits: सहजन की पत्तियों से बनी प्राकृतिक औषधि, जो रखे आपको बीमारियों से दूर, ऐसे करें इस्तेमाल

Last Updated:April 03, 2026, 14:44 IST सहजन (मोरिंगा) एक आयुर्वेदिक सुपरफूड है, जिसके पत्तों और टहनियों से तैयार पाउडर सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह इम्यूनिटी बढ़ाने, डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों को नियंत्रित करने के साथ-साथ बाल और त्वचा की सेहत सुधारने में भी मदद करता है. इसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है और लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है. सहजन एक ऐसा पौधा है जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है. इसके फल, जड़ और पत्तियां सभी एक जबरदस्त आयुर्वेदिक औषधि के रूप में काम कर सकती हैं. आमतौर पर सहजन के फल को सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसकी औषधीय गुणों की वजह से इसे दवा के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है. सहजन के पत्ते और टहनियां बेहद खास औषधि के रूप में उपयोग हो सकती हैं. सहजन की पत्तियां ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और वजन घटाने में बेहद लाभदायक होती हैं. इसके अलावा, यह आंखों से संबंधित रोगों, गठिया और सटिका जैसी समस्याओं में भी उपयोगी साबित हो सकती हैं. इस औषधि को घर पर तैयार करना भी बेहद आसान है. सहजन के उत्पाद बनाने वाले किसान राजेश यादव बताते हैं कि इसके लिए सबसे पहले सहजन की पत्तियों और टहनियों को पेड़ से तोड़कर अलग कर लें और फिर धूप में अच्छी तरह सुखा लें. Add News18 as Preferred Source on Google अच्छी तरह से सूखने के बाद अब इसे पाउडर के रूप में तैयार करने की बारी है. इसे पीसकर पाउडर बनाने के लिए आप मिक्सर ग्राइंडर का इस्तेमाल कर सकते हैं. पत्तियों को बारीक पीसने से यह पाउडर अच्छी तरह तैयार हो जाता है. इस तरह आपकी जबरदस्त औषधि बनकर तैयार हो जाती है, जिसे कई तरह के रोगों के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. सहजन के पत्तों से तैयार इस पाउडर के सेवन से शरीर की इम्यूनिटी मजबूत की जा सकती है. सुखाई हुई पत्तियों से बने इस पाउडर में कैल्शियम, आयरन और पोटेशियम की भरपूर मात्रा होती है. इसके अलावा, इसमें कई महत्वपूर्ण विटामिन भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. सहजन की पत्तियों से बने पाउडर का उपयोग बालों के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है. इसका सेवन झड़ते हुए बालों की समस्या को कम कर सकता है. इस पाउडर की खास बात यह है कि इसे बनाने के बाद यह लंबे समय तक खराब नहीं होता और आसानी से लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है. इस पाउडर के सेवन से मलेरिया और टाइफाइड जैसे गंभीर बुखार से लेकर डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है. किसान राजेश यादव बताते हैं कि उनके ओर से तैयार की जाने वाली सहजन की यह औषधि लोगों को बेहद पसंद आती है. आसपास के क्षेत्र और दूर-दराज से लोग इसे खरीदने आते हैं. First Published : April 03, 2026, 14:44 IST
शरीर को फौलादी बना देगी ये दाल, प्रोटीन से लेकर कैल्शियम तक का है भंडार, वजन तेजी से करे कंट्रोल – News18 हिंदी

X शरीर को फौलादी बना देगी ये दाल, प्रोटीन से लेकर कैल्शियम तक का है भंडार Lobia dal khane ke fayde: लोबिया जिसे ब्लैक-आईड पीज भी कहा जाता है. पोषण से भरपूर दाल है जो स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती है. इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और जरूरी विटामिन भरपूर मात्रा में पाए जाते है. इसका नियमित सेवन वजन नियंत्रण में मदद करता है, क्योंकि इसमें कैलोरी कम और फाइबर अधिक होता है. जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है. लोबिया पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है और कब्ज की समस्या से राहत दिलाती है. इसमें मौजूद आयरन और फोलेट खून की कमी दूर करने में सहायक होते है. साथ ही यह खराब कोलेस्ट्रॉल कम कर दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती है. लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स के कारण यह डायबिटीज मरीजों के लिए भी फायदेमंद है. इसके पोषक तत्व हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ त्वचा और बालों के लिए भी लाभकारी माने जाते है.
परीक्षा परिणाम का तनाव और बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य | Child Depression Symptoms & Expert Advice

Last Updated:April 03, 2026, 10:05 IST Child Depression Symptoms & Expert Advice: राजस्थान में बोर्ड परीक्षा परिणामों के बाद बच्चों में बढ़ते आत्महत्या के मामलों ने समाज को झकझोर दिया है. पाली की हालिया घटना के संदर्भ में मनोचिकित्सक डॉ. संजय गहलोत ने माता-पिता को विशेष सलाह दी है. उनका कहना है कि बच्चों के साथ दोस्त जैसा व्यवहार करना और उनके साथ समय बिताना बहुत जरूरी है. आज के दौर में माता-पिता की व्यस्तता और बच्चों से संवाद की कमी उन्हें डिप्रेशन की ओर धकेल रही है. बच्चों की तुलना दूसरों से करना और उन पर ऊंचे अंकों का दबाव बनाना उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक है. डॉ. गहलोत के अनुसार, माता-पिता को बच्चों को यह विश्वास दिलाना चाहिए कि कोई भी परीक्षा जीवन से बड़ी नहीं है. ख़बरें फटाफट Child Depression Symptoms & Expert Advice: एक माता-पिता के लिए दुनिया का सबसे खौफनाक मंजर क्या हो सकता है? शायद वह, जब उन्हें अपने जिगर के टुकड़े की ‘खून से सनी देह’ देखनी पड़े या मासूम को ‘फंदे’ से झूलता देखना पड़े. यह सोचने मात्र से दिल दहल जाता है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि ‘परीक्षा का परिणाम’ अब बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है. हाल ही में पाली में 10वीं के रिजल्ट के बाद एक छात्र द्वारा डिप्रेशन में आकर उठाया गया खौफनाक कदम इसी ओर इशारा करता है. सवाल यह है कि क्या इस मासूम को बचाया जा सकता था? जवाब है-हाँ. अगर माता-पिता समय रहते अपने बच्चे के बदलते हाव-भाव और उसकी ‘खामोश चीख’ को सुन लेते, तो शायद आज वह हमारे बीच होता. लोकल-18 से खास बातचीत में राजस्थान के जाने-माने मनोचिकित्सक डॉ. संजय गहलोत ने कहा कि यह ऐसी स्थितियां हैं जिन्हें समय रहते भांप लिया जाए तो अनहोनी को रोका जा सकता है. अक्सर माता-पिता चाहते हैं कि जो वे स्वयं जीवन में नहीं कर पाए, वह उनका बच्चा करे. इसके कारण बच्चे भारी दबाव महसूस करते हैं. डॉ. गहलोत के अनुसार, बच्चों के व्यवहार में बदलाव अचानक नहीं होता. इसके पीछे कई कारण होते हैं. यदि माता-पिता जागरूक हैं और बच्चों के साथ पर्याप्त समय व्यतीत करते हैं, तो बच्चा अपनी हर छोटी-बड़ी परेशानी पहले अपने परिवार को बताता है. आज के व्यस्त दौर में माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद कम हो गया है, जिससे बच्चे घर में खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं. इम्तिहान जिंदगी का आखिरी मकसद नहींडॉ. संजय गहलोत सलाह देते हैं कि बच्चों को यह समझाना बेहद जरूरी है कि इम्तिहान जिंदगी का आखिरी मकसद नहीं है. परीक्षाएं और पढ़ाई जीवन का एक हिस्सा मात्र हैं. केवल 10वीं और 12वीं की परीक्षा ही भविष्य तय नहीं करती, यह तो बस शुरुआत है. कई बार परिवार का आपसी कलह और माता-पिता के बीच अनबन भी बच्चे को मानसिक रूप से तोड़ देती है. ऐसी स्थिति में बच्चा अपनी बात कहने से डरता है. उसे लगता है कि यदि नंबर अच्छे नहीं आए या वह फेल हो गया, तो वह माता-पिता को क्या मुंह दिखाएगा. माता-पिता द्वारा बच्चों के सामने बहुत ऊंचे आदर्श रख देना और दूसरे बच्चों से उनकी निरंतर तुलना करना डिप्रेशन का सबसे बड़ा कारण बनता है. स्कूल और शिक्षकों की भी अहम जिम्मेदारीसिर्फ घर ही नहीं, स्कूल का वातावरण भी बच्चों पर गहरा प्रभाव डालता है. अच्छे रिजल्ट और स्कूल की रैंकिंग के लिए बच्चों पर अतिरिक्त दबाव डाला जाता है. डॉ. गहलोत का मानना है कि स्कूलों को भी बच्चों की मनोस्थिति समझते हुए काम करना चाहिए. शिक्षकों को चाहिए कि वे बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को नोटिस करें. यदि कोई बच्चा अचानक शांत रहने लगे, अकेला महसूस करे या पढ़ाई से कतराने लगे, तो उसे तुरंत सहायता और परामर्श दिया जाना चाहिए. समय रहते पहचान और सहयोग ही बच्चों को मौत के मुंह से बाहर निकाल सकता है. About the Author vicky Rathore Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें Location : Pali,Pali,Rajasthan First Published : April 03, 2026, 10:05 IST
कन्नौज का मशहूर गुलकंद, देसी गुलाब से किया जाता है तैयार; मुंह में जाते ही घुल जाएगा स्वाद

X कन्नौज का मशहूर गुलकंद, देसी गुलाब से किया जाता है तैयार; जानें खासियत Kannauj Traditional Gulkand: कन्नौज अपनी खुशबूदार इत्र के साथ-साथ पारंपरिक गुलकंद के लिए भी मशहूर है. यहां देसी गुलाब की ताजी पंखुड़ियों से पारंपरिक तरीके से गुलकंद तैयार किया जाता है. सुबह तोड़े गए गुलाब को साफ कर चीनी के साथ मिलाया जाता है और 20-30 दिनों तक धूप में रखा जाता है. जिससे प्राकृतिक खुशबू और स्वाद से भरपूर गुलकंद बनता है. आयुर्वेद के अनुसार गुलकंद गर्मियों में शरीर को ठंडक देता है. पाचन सुधारता है और पेट की समस्याओं में राहत पहुंचाता है. इसे दूध, पान और मिठाइयों में भी इस्तेमाल किया जाता है. स्थानीय व्यापारी निशीष तिवारी बताते है कि यह कारोबार कई परिवारों की आजीविका से जुड़ा है. अब आधुनिक पैकेजिंग और ऑनलाइन बिक्री से कन्नौज का गुलकंद बड़े शहरों तक पहुंच रहा है. जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
हर घर में मिलने वाला यह छोटा सा पौधा जिसकी सूखी लकड़ी में छुपा है सेहत का राज, फायदे जान आप भी हो जाएंगे फैंन

X हर घर में मिलने वाला यह छोटा सा पौधा जिसकी सूखी लकड़ी में छुपा है सेहत का राज तुलसी का पौधा लगभग हर घर में पाया जाता है, जिसकी पत्तियां पूजा-पाठ से लेकर चाय तक में उपयोग की जाती हैं. वहीं इसकी सूखी टहनियों को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन टहनियों का भी उपयोग बेहद लाभकारी हो सकता है. खासकर बदलते मौसम में, जब सर्दी-खांसी और गले की समस्याएं बढ़ जाती हैं, तब तुलसी की सूखी टहनियों से तैयार किया गया घरेलू काढ़ा-मसाला काफी मददगार साबित हो सकता है. यह न केवल स्वाद में बदलाव लाता है, बल्कि शरीर को गर्माहट और सुकून भी देता है.









