आगरा में बढ़ती हड्डियों की कमजोरी I युवाओं में ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण

Last Updated:March 18, 2026, 22:06 IST आगरा में हड्डियों की कमजोरी यानी ऑस्टियोपोरोसिस के मामले बढ़ रहे हैं, अब युवाओं में भी इसके लक्षण दिखाई देने लगे हैं. हल्की चोट में फ्रैक्चर, पीठ में दर्द और कद घटना इसके मुख्य संकेत हैं. डॉक्टर आशीष मित्तल के अनुसार, समय पर इलाज और हेल्दी लाइफस्टाइल से इस बीमारी से बचा जा सकता है. आगरा. शहर में ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों की संख्या बढ़ी है, आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि बदलती लाइफस्टाइल और खान पान से कई तरह की बीमारियां शिकार बना लेती है. उन्होंने कहा कि हड्डियों से संबंधित मरीज बढ़े है जिसमें युवाओं कि संख्या भी देखी जा रही है. चिकित्सक ने बताया कि मरीजों में ऑस्टियोपोरोसिस कि शिकायत देखी जा रही है. चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस बीमारी में मरीज कि हड्डियां कमजोर व छिद्रयुक्त होने लगती है. उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियों का घनत्व जिसे डेंसिटी भी कहते है यह कम हो जाता है, जिससे वे पतली, नाजुक और ट्रटने यानि कि फ्रेक्चर के प्रति अत्यधिक संभावना बढ़ जाती है. डॉ. ने कहा कि इसका समय रहने उपचार कराना बेहद जरूरी है. दर्द और बार बार फ्रेक्चर होने पर चिकित्सक से करें सम्पर्कआगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षणों को पहचाना जा सकता है, हालांकि शुरुआत में इसके लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते है. उन्होंने कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं, जिसे अक्सर ‘साइलेंट डिजीज कहते है क्योंकि शुरुआती चरणों में इसका कोई खास लक्षण दिखते नहीं देता है. उन्होंने कहा कि इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में हल्की चोट से फ्रैक्चर होना (विशेषकर कल्हे, कलाई, रीढ) पीठ में तेज दर्द रहना, समय के साथ कद कम होना और झुककर चलना आदि होते है. डॉ. आशीष ने कहा कि ऐसी स्थिति में मरीज को लापरवाही नहीं करनी चाहिए. ऐसे अवस्था में मरीज को तत्काल नज़दीकी हड्डी रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर अपना इलाज शुरू कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि समय रहने इलाज से बीमारी से छुटकारा भी पाया जा सकता है. ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए हेल्दी फ़ूड खाएंआगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस से बचना है तो अपनी जीवन शैली में सुधार करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अनहेल्दी फ़ूड का त्याग कर हेल्दी फ़ूड का इस्तेमाल करना चाहिए. डॉ. आशीष ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए कैल्शियम औरविटामिन डी से भरपूर आहार लें, नियमित रूप से वजन उठाने वाले व्यायाम जैसे चलना, दौड़ना, योगासन आदि करें. डॉ. ने कहा कि युवाओं को धुम्रपान और शराब से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि ये उपाय हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने और फ्रैक्चर के जोखिम को कम करने में मदद करते है. डॉ. आशीष ने कहा कि यदि हड्डियों में कहीं भी लगातार दर्द बना रहता है तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Agra,Uttar Pradesh First Published : March 18, 2026, 22:06 IST
देश में डेढ़ लाख झोलाछाप डर्मेटोलॉजिस्ट, हेयर ट्रांसप्लांट या स्किन के लिए किसी भी डॉक्टर की चेक करें ये डिग्री

X हेयर ट्रांसप्लांट या स्किन के लिए किसी भी डॉक्टर की चेक करें ये डिग्री सोशल मीडिया पर झोलाछाप डॉक्टरों का खतरा बढ़ रहा है! लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा झोलाछाप डॉक्टर देश में हैं, जबकि रजिस्टर्ड डर्मेटोलॉजिस्ट सिर्फ 18000 हैं. ये झोलाछाप डॉक्टर सस्ते में हेयर ट्रांसप्लांट, प्लास्टिक सर्जरी और त्वचा उपचार का झांसा देते हैं, जिससे लोगों के चेहरे बिगड़ रहे हैं और मौतें हो रही हैं. IADVL और APSI ने लोगों से अपील की है कि वे असली और फर्जी डॉक्टर की पहचान करें और रजिस्टर्ड डर्मेटोलॉजिस्ट से ही उपचार कराएं. इसके लिए उन्हें इन बातों का ध्यान रखना होगा.
सर्दियों का सुपरफूड! अलसी, गोंद और ड्राई फ्रूट्स के लड्डू खाएं, जोड़ों के दर्द को कहें अलविदा – News18 हिंदी

X ये खास लड्डू देंगे ताकत, बढ़ाएंगे रोग प्रतिरोधक क्षमता और रखेंगे शरीर को फिट Winter Immunity Laddoo Recipe: सर्दियों के मौसम में शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने के लिए अलसी, गोंद और ड्राई फ्रूट्स से बने लड्डू बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. ये लड्डू इम्युनिटी बढ़ाने, शरीर को ऊर्जा देने और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में सहायक होते हैं. अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड, गोंद में ताकत बढ़ाने वाले तत्व और ड्राई फ्रूट्स में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं. यह देसी नुस्खा खासतौर पर ठंड के मौसम में शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है. नियमित सेवन से कमजोरी दूर होती है और शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर होता है.
पलाश के फूल के फायदे: लू, डायबिटीज और त्वचा रोग में असरदार

Last Updated:March 15, 2026, 19:18 IST फागुन के महीने में तराई क्षेत्र में खिलने वाले टेसू यानी पलाश के फूल सिर्फ खूबसूरती ही नहीं बढ़ाते, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. आयुर्वेद में इसके फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग पेट के कीड़े, डायबिटीज, त्वचा रोग और गर्मी से राहत पाने के लिए किया जाता है. गर्मियों में पलाश के फूलों से बना शरबत शरीर को ठंडक देने के साथ लू से भी बचाने में मदद करता है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में टेसू के पेड़ पाए जाते हैं. फागुन माह में पलाश के फूलों की बहार आ जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में टेसु के फूल के नाम से जाना जाता है. वही अब धीरे-धीरे पलाश के पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है. वहीं आयुर्वेद में पलाश के फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग कई तरह की बीमारियों के इलाज में किया जाता है. पलाश के बीजों में एंटी वर्म यानी कृमिनाशक गुण पाए जाते हैं. इसी वजह से इसका उपयोग पेट के कीड़ों को खत्म करने के लिए किया जाता है. पलाश के बीज का पाउडर नियमित रूप से लेने से पेट के संक्रमण में भी राहत मिल सकती है. इसके अलावा पलाश के फूलों में एस्ट्रिंजेंट गुण मौजूद होता है, जो दस्त जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करता है. पलाश में एंटी हाइपरग्लाइसेमिक गुण भी पाए जाते हैं, जो मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं. इसके सेवन से शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बेहतर बनाने में भी मदद मिलती है. वहीं पलाश के पत्तों में टिक्ता गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में कफ और पित्त को कम करने में सहायक होते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google त्वचा संबंधी रोगों में भी पलाश काफी उपयोगी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, पलाश के बीज का पेस्ट लगाने से एक्जिमा और अन्य स्किन इन्फेक्शन में राहत मिल सकती है. इससे खुजली और त्वचा का रूखापन भी कम होता है. इसके अलावा पलाश के बीज का काढ़ा घाव भरने में भी सहायक माना जाता है. आयुर्वेदिक चिकित्सक देवेंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताएं कि गर्मियों के मौसम में पलाश के फूलों की डिमांड बढ़ जाती है, इसके फूल बहुत ही ठंडे माने जाते हैं. जिस कारण गर्मियों में लोग शरबत बनाकर सेवन करते हैं. इसका सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है साथ में गर्मी में लू जैसी समस्या से छुटकारा मिल जाता है. पलाश के फूलों को अच्छी तरह धूप में सुखाकर पाउडर बना लें और हर सुबह ठंडे पानी के साथ इसका सेवन करें. यह शरीर को हल्का महसूस कराने के साथ-साथ आंतरिक सफाई में मदद करता है. डायबिटीज जैसी समस्या से छुटकारा मिल जाएगा. पलाश का फूल स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है. First Published : March 15, 2026, 19:18 IST
गर्मियों में ठंडक और हाइड्रेशन के लिए गन्ने का जूस – फायदे और सावधानियां

Last Updated:March 12, 2026, 21:14 IST मार्च से बढ़ती गर्मी के बीच गन्ने का जूस बन गया लोगों का पसंदीदा पेय. यह न सिर्फ शरीर को अंदर से ठंडक और ताजगी देता है, बल्कि पाचन, हाइड्रेशन और लिवर की सेहत के लिए भी फायदेमंद है. लेकिन उच्च ब्लड शुगर वाले लोगों को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए. रायबरेली. मार्च की शुरुआत से ही गर्मी का असर दिखाई देने लगा है, तापमान में हो रही लगातार बढ़ोत्तरी से आम जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है. बढ़ी हुई गर्मी के कारण लोगों को बार-बार प्यास लगने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है. गर्मी के मौसम में तेज धूप की वजह से लोगों को थकान सुस्ती महसूस होती है इस दौरान लोग अपने शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए कई तरह के पेय पदार्थ का सेवन करते हैं. जो गर्मी के मौसम में शरीर में हाइड्रेट रखने के साथ ही तरोताजा बनाए रखने में भी कारगर होते हैं. गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट बनाए रखने के साथ ही अंदर से शीतलता प्रदान करने में गन्ने का जूस भी बड़ा ही लाभदायक है. गन्ने के जूस की तासीर ठंडी होती है जो शरीर को अंदर से शीतलता प्रदान करती है. यह आपको गर्मी के मौसम में चलने वाली तेज लू से भी बचाने में कारगर होता है. इन तत्वों से भरपूर रायबरेली जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवगढ़ की आयुष चिकित्सक डॉ. आकांक्षा दीक्षित (एम डी आयुर्वेद नेशनल इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद जयपुर ,राजस्थान) लोकल 18 से बात करते हुए बताती हैं कि गन्ने के जूस में जिंक, आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम, मैंगनीज, मैग्नीशियम सहित कई अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो हमारी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं. अगर आपका पाचन तंत्र कमजोर है, तो आपको गन्ने का रस पीना चाहिए. गन्ने के रस में मौजूद पोटैशियम पेट में पीएच लेवल को संतुलित करता है. गन्ने का रस लोगों को हाइड्रेटेड रखता है और इससे कब्ज की समस्या से आराम मिलता है. इनके लिए फायदा आकांक्षा दीक्षित के मुताबिक जिन लोगों को पीलिया की समस्या हो जाती है, उनके लिए गन्ने का जूस किसी अमृत से कम नहीं होता है, क्योंकि गन्ने के जूस में एंटीऑक्सीडेंट होता है ,जो लीवर को संक्रमित होने से बचाते हैं. आगे की जानकारी देते हुए बताती है कि गन्ने का जूस उन लोगों को भूलकर भी नहीं पीना चाहिए. जिनका ब्लड शुगर लेवल बढ़ा हुआ हो क्योंकि यह उनके लिए नुकसानदायक होता है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Rae Bareli,Uttar Pradesh First Published : March 12, 2026, 21:14 IST
पेट के लिए रामबाण है कच्चा और पका बेल, अंदर की सारी समस्याएं होंगी छूमंतर

X पेट के लिए रामबाण है कच्चा और पका बेल, अंदर की सारी समस्याएं होंगी छूमंतर Raw and ripe Bael: गर्मियों में पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे कब्ज, दस्त, पेट की गर्मी और सूजन आम हो जाती है. आयुर्वेद में बेल (बिल्व) फल को इन समस्याओं के लिए बेहद लाभकारी माना गया है. आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. हर्ष के अनुसार बेल एक ऐसा फल है. जिसे कच्चा और पका दोनों तरह से उपयोग किया जा सकता है. कच्चा बेल कब्ज और पेट साफ करने में मदद करता है, जबकि पका हुआ बेल बार-बार होने वाले लूज मोशन और दस्त में राहत देता है. यह शरीर को ठंडक पहुंचाता है और बढ़े हुए पित्त को संतुलित करता है. बेल का सेवन सूजन कम करने, पाचन सुधारने और लिपिड प्रोफाइल को संतुलित रखने में भी सहायक माना जाता है. बेल की चटनी बनाकर सुबह-शाम एक-एक चम्मच लेने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर में टॉक्सिन्स जमा नहीं होते.
संजीवनी बूटी से कम नहीं गुलाब का फूल, इसमें छुपा है कई बीमारियों का इलाज, जानें औषधीय गुण

X संजीवनी बूटी से कम नहीं गुलाब का फूल, इसमें छुपा है कई बीमारियों का इलाज Health Tips: प्यार और मोहब्बत का प्रतीक माना जाने वाला गुलाब आयुर्वेद में भी बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है. इसकी खुशबू जितनी मन को भाती है, उतने ही इसके औषधीय गुण शरीर को लाभ पहुंचाते हैं. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि आयुर्वेद में गुलाब को शीतल, हृदय के लिए हितकारी और मानसिक शांति देने वाला माना गया है. गुलाब की पंखुड़ियों से गुलाब जल और गुलकंद तैयार किया जाता है, जो कई बीमारियों में लाभकारी साबित होता है. आज के समय में दिल से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. ऐसे में गुलकंद का नियमित सेवन हृदय को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर को ठंडक देते हैं और मानसिक तनाव को कम करते हैं. गुलाब की पंखुड़ियों को सुखाकर उनका पाउडर बनाया जाए, तो यह डिप्रेशन और तनाव जैसी समस्याओं में भी राहत दे सकता है. गुलाब में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है.
बड़ा गुणकारी है ये गूलर का पेड़, पत्ती से लेकर जड़ तक में औषधीय गुण, जानें इसके कमाल के फायदे

X बड़ा गुणकारी है ये गूलर का पेड़, पत्ती से लेकर जड़ तक में औषधीय गुण, जानें Health Tips: विंध्य क्षेत्र की वादियों में कई ऐसी औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. इन्हीं में से एक है गूलर का पेड़, जिसे आयुर्वेद में अत्यंत उपयोगी माना गया है. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह के अनुसार, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गूलर का विशेष रूप से उपयोग किया गया था. गूलर के पत्तों, फलों और तने का सेवन कई प्रकार की बीमारियों में लाभकारी साबित होता है. आयुर्वेद में इसे अंजीर के समान गुणकारी माना गया है. गूलर की शाखाएं मोटी होती हैं और इसके पत्ते दिल के आकार और खुरदरी सतह वाले होते हैं. इसके फल लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर व्यास के होते हैं, जो पकने पर हरे से पीले या लाल रंग में बदल जाते हैं. इस पेड़ पर सालभर फूल और फल लगते हैं, हालांकि जुलाई से दिसंबर के बीच इसकी पैदावार अधिक होती है. इसके पके फलों का सेवन शरीर को ताकत देता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक माना जाता है.
कमजोरी और खून की कमी होगी दूर, नई माताओं के लिए वरदान है ये जंगली जड़ – News18 हिंदी

X कमजोरी और खून की कमी होगी दूर, नई माताओं के लिए वरदान है ये जंगली जड़ Natural Health Tips: आधुनिक चिकित्सा के दौर में भी झारखंड का आदिवासी समाज अपने पारंपरिक ज्ञान और औषधीय पौधों पर अटूट विश्वास रखता है. इसी कड़ी में जंगलों में मिलने वाला सतावर (शतावरी) का पौधा आज भी महिलाओं और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है. स्थानीय आदिवासी महिला नीलम देवी बताती हैं कि सतावर की जड़ें औषधीय गुणों से भरपूर हैं. प्रसव के बाद जिन माताओं में पर्याप्त दूध न बनने की समस्या होती है. उनके लिए यह औषधि चमत्कारिक है. इसके नियमित सेवन से मात्र 2-3 दिनों में सकारात्मक परिणाम दिखने लगते हैं. इसके अलावा यह खून की कमी पुरानी थकान और शारीरिक कमजोरी को दूर कर शरीर में नई ऊर्जा भरता है. सतावर का पाउडर बनाने के लिए इसकी जड़ों को खोदकर निकाला जाता है. फिर दो-तीन दिनों तक छांव में सुखाया जाता है. पूरी तरह सूखने के बाद इसे कूटकर बारीक चूर्ण तैयार किया जाता है. प्रतिदिन एक चम्मच पाउडर सादे पानी के साथ लेने से एक सप्ताह के भीतर शरीर में ताकत का अहसास होने लगता है. आदिवासी समाज का यह समृद्ध ज्ञान आज भी शहर से दूर रहने वाले परिवारों के लिए एक सुलभ और सुरक्षित स्वास्थ्य विकल्प बना हुआ है.
स्वाद के साथ सेहत का खजाना है अमरूद, कई बीमारियों में लाभकारी, पाचन से लेकर ब्लड शुगर तक में लाभकारी

X स्वाद के साथ सेहत का खजाना है अमरूद, पाचन से लेकर ब्लड शुगर तक में लाभकारी Benefits of Guava: प्राकृतिक फलों में अमरूद को आयुर्वेद में बेहद गुणकारी माना गया है. यह सिर्फ स्वादिष्ट फल नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर प्राकृतिक दवा भी है. आयुर्वेद के अनुसार इसके फल और पत्तों का नियमित सेवन पाचन तंत्र को मजबूत करता है और कब्ज, गैस, डायरिया जैसी समस्याओं में लाभ देता है. यह ब्लड शुगर नियंत्रित करने, वजन संतुलित रखने, एनीमिया और त्वचा संबंधी परेशानियों में भी सहायक माना जाता है. आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. अमित वर्मा के अनुसार शुगर मरीज सुबह-शाम इसकी चार पत्तियां चबा सकते है. हालांकि किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूरी है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं.








