भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बैंक ऑफ इंडिया (BoI) को 1.15 करोड़ डॉलर यानी करीब 108 करोड़ रुपए चुकाने होंगे। लंदन के हाई कोर्ट ने दुबई की एक कंपनी ‘फायरस्टार डायमंड एफजेडई’ के लिए दी गई पर्सनल लोन गारंटी और उस पर लगे ब्याज से जुड़े मामले में ये फैसला सुनाया है। नीरव बीते 7 सालों से लंदन की जेल में बंद है और भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। दुबई की कंपनी के लिए ली थी पर्सनल गारंटी यह पूरा मामला नीरव मोदी से जुड़ी दुबई की कंपनी फायरस्टार डायमंड एफजेडई को मिले लोन का है। नीरव मोदी ने बैंक ऑफ इंडिया के इस लोन के लिए पर्सनल गारंटी दी थी। बाद में उसने इस गारंटी को कानूनी रूप से अमान्य ठहराने की कोशिश की। हालांकि, लंदन सर्किट कमर्शियल कोर्ट के जस्टिस साइमन टिंकलर ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि अक्टूबर 2025 में नीरव मोदी को भेजा गया डिमांड नोटिस पूरी तरह सही था। भारतीय कानून के तहत गारंटी अमान्य नहीं, मूल रकम के साथ देना होगा ब्याज जस्टिस टिंकलर ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भारतीय कानून के तहत नीरव मोदी की पर्सनल गारंटी शून्य या अप्रभावी नहीं है। इसलिए वह बैंक को 41,05,189 डॉलर (करीब 34.3 करोड़ रुपए) की मूल राशि चुकाने के लिए जिम्मेदार है। इसके साथ ही मार्च 2026 तक इस राशि पर जमा हुआ ब्याज मिलाकर कुल रकम 1.15 करोड़ डॉलर (करीब 108 करोड़ रुपए) हो चुकी है, जो आगे भी बढ़ती रहेगी। पीएनबी के 2 बिलियन डॉलर के घोटाले से अलग है यह मामला बैंक ऑफ इंडिया के केस लड़ने वाली लॉ फर्म ‘फ्लैडगेट एलएलपी’ के मिलन कपाड़िया ने साफ किया कि यह मामला बैंक की कमर्शियल बैंकिंग रिकवरी का है। इसका पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के 2 बिलियन डॉलर (करीब 19,000 करोड़ रुपए) के बड़े धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले से कोई संबंध नहीं है। बैंक ऑफ इंडिया 2018 से ही इस वसूली के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा था। भारत में तीन आपराधिक मामलों में है तलाश नीरव मोदी फिलहाल भारत में तीन बड़े मामलों में वांछित है। पहला, सीबीआई का पीएनबी घोटाला मामला, दूसरा, ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग मामला और तीसरा, सीबीआई जांच में गवाहों और सबूतों के साथ छेड़छाड़ का मामला। अप्रैल 2021 में यूके की तत्कालीन गृह सचिव प्रीति पटेल ने उसके प्रत्यर्पण की मंजूरी दी थी। इसके बाद से नीरव की कई जमानत याचिकाएं और अपीलें खारिज हो चुकी हैं। इस साल मार्च में उसने प्रत्यर्पण रोकने की आखिरी कोशिश भी गंवा दी थी, जिसमें उसने भारत में टॉर्चर होने का खतरा बताया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब उसने फ्रांस स्थित यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECtHR) में गुहार लगाई है, जहां मामला अभी चल रहा है।










































