लिव-इन में रहने के बाद रेप का आरोप गलत:एमपी हाईकोर्ट ने व्यापारी को किया बरी; कहा- सहमति से बने संबंधों में FIR उचित नहीं

दो वयस्क महिला-पुरुष यदि अपनी मर्जी से लिव-इन में रहते हैं। आपसी सहमति से संबंध बनाते हैं, लेकिन बाद में विवाद होने पर यदि महिला रेप की शिकायत दर्ज कराती है तो यह उचित नहीं है। यह कहते हुए एमपी हाईकोर्ट ने रेप केस में फंसे कटनी के कपड़ा व्यापारी को राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ थाने में दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया। कोर्ट ने यह फैसला 17 मार्च को सुनाया। मामला कटनी के कपड़ा व्यापारी मुकेश ठाकुरानी से जुड़ा है। इनके खिलाफ एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी ने वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी दी और तलवार के बल पर रेप किया। पत्नी से हुआ विवाद, फिर युवती आई जिंदगी में कटनी के माधव नगर निवासी मुकेश ठाकुरानी (35) कपड़ा व्यवसायी हैं। वर्ष 2003 में उनका विवाह हुआ। उनके दो बच्चे हैं। 5 मई 2019 को किसी बात को लेकर पत्नी से विवाद हो गया, जिसके बाद पत्नी बच्चों को लेकर मायके चली गई और पति के खिलाफ दहेज व भरण-पोषण का केस दर्ज कर दिया। इसी बीच 10 मई 2019 को कोर्ट के काम के दौरान मुकेश की मुलाकात कटनी में रहने वाली 24 वर्षीय युवती से हुई। वह भी अपने पति के खिलाफ चल रहे मुकदमे के सिलसिले में कोर्ट आती थी। कोर्ट में दोनों की अकसर बातचीत होने लगी। युवती ने बताया कि उसका पति उसे परेशान करता है, जिसके खिलाफ उसने शिकायत दर्ज कराई है। मुकेश के वैवाहिक विवाद की जानकारी मिलने पर वह उसके और करीब आ गई। दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई। युवती का कहना था कि अब सरकार भी लिव-इन रिलेशन को मान्यता देती है, इसलिए वे साथ रह सकते हैं। आगे चलकर दोनों अपने-अपने जीवन साथियों से तलाक लेकर शादी कर सकते हैं। इसके बाद दोनों गोवा, भेड़ाघाट और मैहर घूमने भी गए। लिव-इन की शुरुआत ठीक, फिर बढ़ा विवाद और बिगड़े रिश्ते मुकेश युवती के साथ लिव-इन में रहने को तैयार हो गया। 1 सितंबर 2019 को युवती अपनी मां और दो साल की बेटी के साथ मुकेश के घर आकर रहने लगी। शुरुआती कुछ दिन ठीक रहे, लेकिन समय बीतने के साथ दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। इसी दौरान घर से लगातार नकदी और जेवरात गायब होने लगे। इस बारे में पूछने पर मुकेश और युवती के बीच विवाद बढ़ने लगा। याचिकाकर्ता के अनुसार, घर से करीब 15 लाख रुपए कैश और सोना गायब हो गया। जब इस संबंध में युवती से पूछताछ की गई तो उसने विवाद करना शुरू कर दिया। युवती ने मार्च 2020 में यह कहते हुए मुकेश का घर छोड़ दिया कि अब वह उसे जेल भिजवाएगी। एफआईआर के बाद अगले ही दिन गिरफ्तारी, जेल भेजा गया मुकेश का घर छोड़कर युवती अपने पति के घर लौट गई। 25 जुलाई 2020 को उसने कटनी के महिला थाने में मुकेश ठाकुरानी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2)(n), 377, 294 और 506 के तहत एफआईआर दर्ज करवाई। युवती ने आरोप लगाया कि मुकेश ने उसका वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी दी और उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने यह भी कहा कि शादी का झांसा देकर मुकेश ने कई बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। साथ ही नाबालिग बेटी को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर उसके साथ जबरन यौन और अप्राकृतिक कृत्य किए। पुलिस ने अगले दिन 26 जुलाई 2020 को उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से मुकेश को जेल भेज दिया गया। 20 अगस्त 2020 को 25 दिन तक कटनी जेल में रहने के बाद मुकेश को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। लिव-इन के बाद दुष्कर्म का आरोप, हाईकोर्ट में दी चुनौती मर्जी से लिव-इन रिलेशन में रहने के बावजूद युवती ने कपड़ा व्यापारी पर दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में शिकायत दर्ज कराई थी। इसे चुनौती देते हुए व्यापारी ने हाईकोर्ट में कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं। पुलिस जांच में भी सामने आया कि मुकेश के मोबाइल में ऐसा कोई वीडियो नहीं मिला, जिसके आधार पर वह युवती को ब्लैकमेल कर रहा हो। इसके अलावा, घर की तलाशी के दौरान भी कोई तलवार बरामद नहीं हुई। सीनियर वकील बोले- संबंध सहमति से, आरोप निराधार याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में सीनियर एडवोकेट मनीष दत्त उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच संबंध सहमति से थे। पीड़िता एक विवाहित महिला है, जिसकी एक बच्ची है और वह अपने पति से अलग रह रही है। वह इस तथ्य से भली-भांति अवगत थी कि तलाक मिलने तक वह दूसरा विवाह नहीं कर सकती, जैसा कि उसके सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज बयान से स्पष्ट है। आपत्तिजनक स्थिति में अश्लील वीडियो बनाए जाने के आरोप के संबंध में साइबर सेल को कोई भी सबूत नहीं मिला, जो पुलिस द्वारा दायर आरोप पत्र से भी स्पष्ट है। इसलिए युवती का यह आरोप कि पत्नी को तलाक देने के झूठे आश्वासन पर उसे रिश्ते में फंसाया गया, असत्य है। डेढ़ साल तक रहे शारीरिक संबंध, दोनों थे विवाहित याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट मनीष दत्त ने कोर्ट को बताया कि युवती और उसके पति ने समाज में अपनी छवि बचाने के लिए दोबारा साथ आकर झूठी एफआईआर दर्ज कराई है। याचिकाकर्ता के विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप झूठे और निराधार हैं। विशेष रूप से यह तथ्य सामने आया कि पहले से विवाहित दो व्यक्तियों के बीच आपसी सहमति से संबंध बने थे, जिनमें समय के साथ दरार आ गई और वे स्वतः समाप्त हो गए। यह स्थिति याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आधार नहीं हो सकती। विवाह का आश्वासन अवास्तविक, आरोप निराधार कोर्ट को बताया गया कि विवाह के आश्वासन का आरोप भी निराधार है, क्योंकि युवती पहले से विवाहित थी और उसका एक बच्चा भी था, इसलिए ऐसा वादा स्वाभाविक रूप से अवास्तविक था। साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत जबरदस्ती या चोट पहुंचाने की धमकी के संबंध में भी कोई ठोस सबूत नहीं मिला। कोर्ट ने पाया- आरोप सही नहीं, एफआईआर रद्द सीनियर एडवोकेट मनीष दत्त ने बताया कि जस्टिस बी.पी. शर्मा की कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि
Phone Cut by Fire Brigade, Man Dies, Video Viral

हादसे के वक्त स्थानीय रहवासी और दमकलकर्मी के बीच बातचीत का वीडियो सामने आया है। हैलो, आपको ये फूटने की आवाज आ रही है? धमाके सुनिए…लेकिन बात पूरी होने से पहले ही फोन कट गया। हताशा में वह व्यक्ति चिल्लाकर बोला- रख दिया फोन उसने, बोला 15 मिनट लगेंगे। . ये बातचीत इंदौर की स्वर्ण बाग कॉलोनी के रहवासी और फायर ब्रिगेड के कर्मचारी के बीच की है। इस बातचीत का वीडियो अब वायरल है, जिसे सुनकर साफ पता चलता है कि 17 और 18 मार्च की दरमियानी रात का अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता की भी कहानी है, जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया है। स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि फायर ब्रिगेड आग लगने की घटना के डेढ़ घंटे बाद पहुंची थी, तब तक सब खत्म हो गया था। अगर फायर ब्रिगेड 15 मिनट में पहुंचती तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने भी परिजन ने कहा कि फायर ब्रिगेड देरी से आई थी और कर्मचारियों का बर्ताव बेहद संवेदनहीन था। बता दें कि 17 और 18 मार्च की दरमियानी रात स्वर्ण बाग कॉलोनी में रहने वाले रबर कारोबारी मनोज पुगलिया के तीन मंजिला मकान में आग लगी। आग लगने की वजह पहले ईवी कार के चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट बताया गया, लेकिन परिवार का कहना है कि उन्होंने कार को चार्ज पर लगाया ही नहीं था। ये हादसा बिजली के पोल में स्पार्किंग की वजह से हुआ। इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है? आग कैसे लगी? इसकी जांच के लिए सरकार ने एक कमेटी बनाई है। जो ये भी बताएगी कि भविष्य में ऐसी घटना न हो, इसके लिए क्या एहतियात बरते जा सकते हैं। पढ़िए, रिपोर्ट… परिजन का कहना है कि बिजली के पोल में स्पार्किंग हुई, उसकी वजह से आग लगी। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। फायर ब्रिगेड कर्मचारी बोला- 15 मिनट लगेंगे इस हादसे का सबूत एक वीडियो क्लिप है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस क्लिप में लपटों से घिरा मकान, उसके भीतर से धमाकों क आवाज और उस वक्त आसपास के लोगों की हताशा और बेबसी सुनाई और दिखाई देती है। वीडियो में फोन पर एक प्रत्यक्षदर्शी कांपती आवाज में फायर ब्रिगेड कर्मचारी को घटना की भयावहता समझाने की कोशिश कर रहा है। घर के अंदर से गैस सिलेंडर या किसी अन्य उपकरण के फटने की तेज आवाजें आ रही हैं। आग की लपटें तीन मंजिला इमारत को अपनी आगोश में लेकर ऊपर उठ रही हैं। फोन के दूसरी तरफ मौजूद फायर ब्रिगेड कर्मचारी को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा दिलाने के लिए प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, ‘हैलो… आपको ये फूटने की आवाज आ रही है? धमाके सुनिए…’ लेकिन उसकी बात पूरी होने से पहले ही फोन कट गया। करंट लगने के डर से कोई पास नहीं गया इसके बाद वहां खड़े लोग चीखने लगते हैं, ‘पानी डालो, कोई तो कुछ करो।’ लेकिन, घर के पास मौजूद बिजली के तारों और ट्रांसफॉर्मर के कारण कोई भी पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। उन्हें डर था कि पानी डालने पर करंट फैल सकता है, जिससे बचाव कार्य और भी खतरनाक हो सकता है। वे बस इंतजार करते रहे, 15 मिनट में फायर ब्रिगेड के पहुंचने का। वो 15 मिनट कब डेढ़ घंटे में बदल गए, किसी को पता नहीं चला और जब तक मदद पहुंची, तब तक आठ जिंदगियां जलकर खाक हो चुकी थीं। इंदौर के तिलक नगर मुक्तिधाम में एकसाथ 7 चिताएं जलीं। एक बच्चे के शव को दफनाया गया था। बेटा सीएम से बोला- बिजली के खंभे में हुआ शॉर्ट सर्किट 19 मार्च को जब मुख्यमंत्री मोहन यादव पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे, तो मृतक मनोज पुगलिया के बड़े बेटे सौरभ ने मुख्यमंत्री के सामने हाथ जोड़कर, रुंधे गले से जो बताया, वह किसी भी संवेदनशील इंसान को अंदर तक हिला देने के लिए काफी है। सौरभ ने सबसे पहले आग लगने की वजह पर ही सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा- साहब, आग गाड़ी की चार्जिंग से नहीं, पास के बिजली के खंभे में हुए शॉर्ट सर्किट से लगी थी। पहले एक कार ने आग पकड़ी। फिर वहां खड़ी बाइक और फिर हमारे घर में फैली। इसके बाद सौरभ ने उस रात की प्रशासनिक नाकामी की परतें खोलनी शुरू कीं। टैंकर खाली थे, फायरकर्मी बोला- खुद बुझा लो आग सौरभ ने बताया कि फायर ब्रिगेड डेढ़ घंटा लेट आई। उनके टैंकरों में पानी नहीं था। एक ड्राइवर को गली का पता नहीं था, वह कहीं और घुस गया। उनके पास न तो ऊंची इमारतों तक पहुंचने वाली सीढ़ी थी और न ही लोगों को बचाने की नीयत। मैंने उनसे कहा कि आपके पास फायर सेफ्टी जैकेट है, वह मुझे दे दो। मुझे पता है कि मेरे परिवार के लोग कहां फंसे हो सकते हैं, मैं उन्हें बाहर निकाल लाऊंगा। इस पर एक फायरकर्मी ने झिड़कते हुए कहा, “ज्यादा पता है तो तुम खुद ही पानी डाल लो।” मनोज पुगलिया के बड़े बेटे सौरभ ने मुख्यमंत्री को उस रात की प्रशासनिक नाकामियां बताईं। मनोज पुगलिया के आखिरी शब्द- वक्त सब कुछ छीन सकता है कारोबारी मनोज पुगलिया एक जिंदादिल इंसान थे और सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते थे। कौन जानता था कि मौत से कुछ घंटे पहले उन्होंने जो वॉट्सएप स्टेटस लगाए थे, वो ही उनकी जिंदगी के आखिरी शब्द बन जाएंगे। परिजन ने उनके ये स्टेटस सहेजकर रखे हैं। मनोज पुगलिया एक धार्मिक व्यक्ति थे। उन्होंने हनुमान चालीसा की पंक्तियां और खाटू श्याम जी की कृपा का भी स्टेटस लगाया था। कौन है इस ‘सामूहिक हत्या’ का जिम्मेदार? यह अग्निकांड इंदौर के फायर सेफ्टी और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम पर कई गंभीर और सुलगते सवाल खड़े कर गया है… संवेदनशीलता कहां थी: जब एक नागरिक फोन पर लाइव धमाकों की आवाजें सुना रहा था, तो फायर ब्रिगेड ने उसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया और फोन क्यों काट दिया? क्या कोई ‘प्लान बी’ नहीं है: इंदौर जैसे बड़े शहर की तंग गलियों में आग लगने की घटनाएं नई नहीं हैं। क्या फायर ब्रिगेड के पास ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए कोई विशेष योजना, छोटे वाहन या
मांडू में गणगौर पर्व शुरू, मंदिरों में बोए ज्वारे:नगर में गूंज रहे पारंपरिक लोकगीत; 16 दिनों तक चलेगा उत्सव

मांडू और आसपास के ग्रामीण अंचलों में गणगौर पर्व का उल्लास पर है। होली के दो दिन बाद से शुरू हुआ यह 16 दिवसीय अनुष्ठान माता पार्वती (गौरी) और भगवान शिव (ईसर) की भक्ति को समर्पित है। नगर के प्राचीन चतुर्भुज राम मंदिर सहित विभिन्न स्थानों पर महिलाओं ने मिट्टी के पात्रों में ज्वारे (जवारा) बोए हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘बाड़ी’ या ‘खोर’ कहा जाता है। रात 9 बजे जवारा पूजन और मंगल गीत गूंजे प्रतिदिन रात 9 बजे महिलाएं और युवतियां पूर्ण श्रृंगार कर मंदिरों में एकत्रित हो रही हैं। ढोल-थाली की थाप पर ‘गौर-गौर गोमती ईसर पूजे पार्वती’ और ‘जवारे बोवण चाली रे’ जैसे पारंपरिक लोकगीतों के साथ ज्वारों की पूजा की जा रही है। इन गीतों के माध्यम से ईसर-गौरी के विवाह प्रसंगों का वर्णन और अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है। अटूट दांपत्य और हरियाली के प्रतीक ज्वारे मान्यता है कि ये ज्वारे माता पार्वती का प्रतीक हैं। महिलाएं प्रतिदिन नियम से इन ज्वारों को सींचती हैं और कई श्रद्धालु इस दौरान कठिन उपवास भी रखते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि निमाड़ और मालवा की समृद्ध लोक संस्कृति, नृत्य और संगीत का एक अनूठा संगम भी पेश करता है। 16 श्रृंगार और मेहंदी से सजा उत्सव गणगौर के अवसर पर युवतियां और महिलाएं विशेष रूप से मेहंदी लगाकर और रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर बाड़ी पूजन के लिए पहुंच रही हैं। 16 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की प्रार्थना के साथ मनाया जा रहा है। पर्व के अंतिम दिनों में इन ज्वारों का भव्य चल समारोह निकालकर विसर्जन किया जाएगा।
नदी में मिला चार दिन से लापता बुजुर्ग का शव:मैहर के गुढ़वा में घर से बिना बताए निकले; मानसिक रूप से अस्वस्थ थे

मैहर जिले के गुढ़वा गांव में गुरुवार सुबह एक बुजुर्ग का शव नदी में मिला। मृतक की पहचान 75 वर्षीय रामस्वरूप पटेल के रूप में हुई है, जो पिछले चार दिनों से लापता थे। परिजनों ने 18 मार्च को रामनगर थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मानसिक अस्वस्थता के चलते घर से निकले थे परिजनों ने बताया कि रामस्वरूप पिछले एक वर्ष से मानसिक रूप से अस्वस्थ चल रहे थे। वे अक्सर बाणसागर डूब क्षेत्र में स्थित अपने पुराने पुश्तैनी मकान पर जाने की जिद करते थे। 16 मार्च की शाम को वे बिना बताए घर से कहीं चले गए थे, जिसके बाद काफी तलाश करने पर भी उनका कोई सुराग नहीं लगा था। मगरमच्छ के हमले की थी आशंका परिजनों ने पुलिस को दी सूचना में आशंका जताई थी कि बुजुर्ग नदी की ओर गए होंगे और वहां मगरमच्छों का शिकार हो गए होंगे। हालांकि, गुरुवार सुबह 7 बजे जब शव नदी में मिला, तो प्रारंभिक जांच में शरीर पर किसी जलीय जीव के हमले के निशान नहीं पाए गए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पंचनामा तैयार किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार, जांच में जुटी पुलिस रामनगर थाना पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल मर्ग कायम कर मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।
धार में जर्जर स्कूल भवन की छत गिरी:सोनगढ़ गांव में 5 बच्चे घायल, 2 साल से जर्जर स्थिति में है ब्लिडिंग

धार जिले के राजगढ़ क्षेत्र के ग्राम सोनगढ़ स्थित शासकीय स्कूल प्रांगण में गुरुवार को अफरा-तफरी मच गई, जब बच्चों के क्रिकेट खेलते समय स्कूल भवन की जर्जर छत अचानक गिर गई। हादसे में करीब 5 बच्चे मलबे की चपेट में आए और उन्हें हल्की चोटें आईं। छत गिरने की आवाज सुनते ही ग्रामीणों की भीड़ मौके पर पहुंची। उन्होंने फंसे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला और तुरंत निजी अस्पताल ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद बच्चों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है। 15 वर्षीय कालू को कमर में और 9 वर्षीय बालू को पैर में चोट लगी, जबकि अन्य तीन बच्चों को मामूली चोटें आईं। स्कूल भवन की हालत जर्जर थी सूत्रों के अनुसार, सोनगढ़ का यह शासकीय स्कूल भवन पिछले 2 साल से जर्जर स्थिति में था। बावजूद इसके परिसर में बच्चों का आना-जाना बना हुआ था, जिससे ऐसे हादसे का खतरा लगातार बना था। हालांकि स्कूल में कक्षाओं का संचालन नहीं हो रहा था, लेकिन बच्चों के खेलने के दौरान यह हादसा हुआ। ग्रामीणों और स्थानीय प्रशासन ने इस घटना के बाद सुरक्षा और मरम्मत के लिए जल्द कार्रवाई करने की बात कही है।
दमोह में हवा-आंधी के साथ झमाझम बारिश:तेंदूखेड़ा ब्लॉक में आधे घंटे बरसे बादल; गेहूं-चना की कटाई कर रहे किसान चिंतित

दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक में गुरुवार रात करीब 8:30 बजे तेज आंधी और आधे घंटे तक झमाझम बारिश हुई। इस बेमौसम वर्षा से जहां तापमान में गिरावट दर्ज की गई, वहीं खेतों में कटाई के लिए तैयार खड़ी रबी फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है। आंधी के कारण क्षेत्र के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी पूरी तरह बाधित रही। खेतों में कटी रखी फसलें भीगी वर्तमान में क्षेत्र में गेहूं, चना और मसूर की कटाई का कार्य चरम पर है। किसान कमल नारायण यादव और राजकुमार लोधी के अनुसार, कई किसानों ने फसल काटकर खेतों में ही रखी है, जो इस बारिश में भीग गई है। किसानों का कहना है कि यदि बादल छाए रहते हैं और दोबारा बारिश होती है, तो अनाज की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। तेजगढ़ और तेंदूखेड़ा में आधे घंटे बरसात गुरुवार शाम पहले तेजगढ़ में धूलभरी आंधी चली, जिसके बाद तेंदूखेड़ा मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में तेज बारिश शुरू हुई। सड़कों पर पानी भरने से आवागमन में असुविधा हुई, हालांकि उमस भरी गर्मी से लोगों को फौरी राहत मिली है। किसानों ने इस स्थिति को ‘आफत की बारिश’ करार दिया है क्योंकि कटाई का सीजन अंतिम दौर में है। आंधी से चरमराई बिजली व्यवस्था, जनजीवन प्रभावित बारिश से पहले चली तेज आंधी के कारण विद्युत लाइनों में फॉल्ट आने से तेंदूखेड़ा ब्लॉक की बिजली व्यवस्था ठप हो गई। रात के समय अचानक हुई इस बारिश ने खलिहानों में रखे अनाज को सुरक्षित करने की जद्दोजहद बढ़ा दी है। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि इस समय की बारिश से कटी हुई फसलों में चमक कम होने और दाने काले पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
बैतूल में ईद उल फितर शनिवार को मनाई जाएगी:शहर की 10 मस्जिदों और ईदगाह पर नमाज का समय तय

बैतूल में ईद उल फितर का पर्व शनिवार को मनाया जाएगा। गुरुवार को चांद नजर नहीं आने के बाद 30 रोजे पूरे होने के साथ यह फैसला लिया गया है। इससे पहले गुरुवार को चांद दिखने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सऊदी अरब में भी पहले दिन चांद नहीं दिखा था, जिसके चलते वहां शुक्रवार को ईद मनाए जाने की संभावना है। आमतौर पर सऊदी अरब में भारत से एक दिन पहले ईद मनाई जाती है। इस बीच, बैतूल में अंजुमन इस्लामिया कमेटी ने शहर की सभी मस्जिदों के इमामों और जिम्मेदारों के साथ बैठक की। इस बैठक में ईद की नमाज के समय निर्धारित किए गए हैं। जारी सूची के अनुसार, विभिन्न मस्जिदों और ईदगाह पर नमाज का समय इस प्रकार है: ईदगाह सदर में सुबह 8:30 बजे, जामा मस्जिद कोठी बाजार में 9:00 बजे, हसनैन मस्जिद में 9:15 बजे, गोसिया रहमानिया मस्जिद में 9:00 बजे, सदर मस्जिद में 9:30 बजे, गंज मस्जिद में 9:00 बजे, गंज कोतवाली मस्जिद में 8:45 बजे, दरअसल फ्लाट मस्जिद में 9:15 बजे, अहल-ए-हदीस मस्जिद में 7:30 बजे, कादिरशाह मस्जिद चक्कर रोड में 9:00 बजे और मदीना मस्जिद मुर्गी चौक में 9:00 बजे नमाज अदा की जाएगी। कमेटी ने सभी लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित समय पर ही नमाज अदा करें और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। कमेटी कल शुक्रवार चांद दिखने के बाद पृथक से ईद का त्यौहार मनाए जाने की घोषणा करेगी।
Rewa Collector Fines Mine Operator Rs 1.68 Crore

मऊगंज कलेक्टर संजय कुमार जैन ने अवैध उत्खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। स्वीकृत खनन क्षेत्र से बाहर बोल्डर पत्थर का उत्खनन करने के मामले में एक संचालक पर 1.68 करोड़ रुपए का अर्थदण्ड और पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि जमा करने का आदेश दिया गया है। . यह कार्रवाई खनिज नियमों के उल्लंघन पर की गई है। कलेक्टर ने सोनभद्र जिला के ओबरा निवासी आशीष कुमार सिंह को कुल 1 करोड़ 68 लाख 1 हजार रुपये की अर्थशास्ति एवं पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं। आशीष कुमार सिंह को ग्राम सरदमन, तहसील हनुमना में क्रेशर आधारित पत्थर खनन की अनुमति मिली थी। हालांकि, जांच में यह सामने आया कि उत्खनन निर्धारित स्वीकृत सीमा से बाहर किया गया था। कलेक्टर के आदेशानुसार, इसमें 84 लाख रुपए अर्थशास्ति राशि, 84 लाख रुपए पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि और 1 हजार रुपए प्रशमन शुल्क शामिल हैं। यह कुल 1.68 करोड़ रुपए की राशि 15 दिवस के भीतर जमा करनी होगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समयावधि में राशि जमा नहीं की जाती है, तो भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत वसूली की कार्रवाई की जाएगी। इस कदम को अवैध खनन के विरुद्ध प्रशासन की सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।
विदिशा में महिला ने खाया जहर:मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत, चार बच्चों की मां थी

विदिशा के त्योंदा थाना क्षेत्र के ग्राम घटेरा में 30 वर्षीय महिला शकुन रैकवार ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। गंभीर हालत में उसे विदिशा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां गुरुवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। महिला अपने पीछे चार छोटे बच्चे छोड़ गई है। जानकारी के अनुसार, शकुन रैकवार ने बुधवार शाम को जहरीला पदार्थ खाया था। घटना के समय उसका पति राजकुमार काम पर गया हुआ था। घर लौटने पर बच्चों ने बताया कि मां ने कुछ खा लिया है, जिसके बाद वह तुरंत पत्नी को अस्पताल लेकर गया। अस्पताल से मेडिकल कॉलेज रेफर पहले शकुन को त्योंदा अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उसे विदिशा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान गुरुवार को उसकी मौत हो गई। चार बच्चों की मां थी मृतका शकुन रैकवार अपने पीछे चार छोटे बच्चे छोड़ गई हैं, जिनमें एक दो महीने की बच्ची भी शामिल है। परिजनों का कहना है कि महिला ने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। त्योंदा पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है।
सामाजिक न्याय की मांग पर राष्ट्रपति-मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा:मऊगंज में हजारों लोग हुए रैली में शामिल; उग्र आंदोलन की चेतावनी

मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में गुरुवार को सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर व्यापक जनआंदोलन हुआ। ओबीसी, एससी और एसटी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले हजारों लोग सड़कों पर उतरे और विशाल रैली निकाली। दोपहर लगभग 2 बजे चाक मोड़ से शुरू हुई रैली शाम 5 बजे कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची, जहां प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। रैली में शामिल लोगों ने उच्च शिक्षा में समान अवसर, आरक्षण व्यवस्था को सशक्त बनाने और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर सरकार से प्रभावी कदम उठाने की मांग की। आंदोलनकारियों ने कहा कि प्रस्तावित यूजीसी कानून 2026 शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने के साथ वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा में भूमिका निभा सकता है। कई संगठनों के प्रतिनिधि रहे मौजूद इस आंदोलन में कुंवर सिंह, रामायण साकेत, राजेश यादव, अमरनाथ पटेल समेत कई सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बड़ी संख्या में जुटे जनसमुदाय ने सामाजिक समानता, संवैधानिक अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की। पूरे आयोजन के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था भी मुस्तैद रही। कलेक्ट्रेट कार्यालय में प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। इसे मऊगंज तहसीलदार बीके पटेल ने प्राप्त किया। ज्ञापन में ओबीसी जनगणना, बैकलॉग पदों की शीघ्र पूर्ति, निजी संस्थानों में आरक्षण, पदोन्नति में आरक्षण बहाली, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, साक्षात्कार प्रक्रिया समाप्त करने, क्रीमीलेयर व्यवस्था खत्म करने और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने जैसी प्रमुख मांगें शामिल थीं। मांगें नहीं मानने पर करेंगे उग्र आंदोलन आंदोलनकारियों ने कहा कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा। शाम लगभग 5 बजे ज्ञापन सौंपने के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ, लेकिन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।









