Saturday, 22 Aug 2026 | 03:57 PM

Trending :

मांडू में गणगौर पर्व शुरू, मंदिरों में बोए ज्वारे:नगर में गूंज रहे पारंपरिक लोकगीत; 16 दिनों तक चलेगा उत्सव

मांडू में गणगौर पर्व शुरू, मंदिरों में बोए ज्वारे:नगर में गूंज रहे पारंपरिक लोकगीत; 16 दिनों तक चलेगा उत्सव

मांडू और आसपास के ग्रामीण अंचलों में गणगौर पर्व का उल्लास पर है। होली के दो दिन बाद से शुरू हुआ यह 16 दिवसीय अनुष्ठान माता पार्वती (गौरी) और भगवान शिव (ईसर) की भक्ति को समर्पित है। नगर के प्राचीन चतुर्भुज राम मंदिर सहित विभिन्न स्थानों पर महिलाओं ने मिट्टी के पात्रों में ज्वारे (जवारा) बोए हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘बाड़ी’ या ‘खोर’ कहा जाता है। रात 9 बजे जवारा पूजन और मंगल गीत गूंजे प्रतिदिन रात 9 बजे महिलाएं और युवतियां पूर्ण श्रृंगार कर मंदिरों में एकत्रित हो रही हैं। ढोल-थाली की थाप पर ‘गौर-गौर गोमती ईसर पूजे पार्वती’ और ‘जवारे बोवण चाली रे’ जैसे पारंपरिक लोकगीतों के साथ ज्वारों की पूजा की जा रही है। इन गीतों के माध्यम से ईसर-गौरी के विवाह प्रसंगों का वर्णन और अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है। अटूट दांपत्य और हरियाली के प्रतीक ज्वारे मान्यता है कि ये ज्वारे माता पार्वती का प्रतीक हैं। महिलाएं प्रतिदिन नियम से इन ज्वारों को सींचती हैं और कई श्रद्धालु इस दौरान कठिन उपवास भी रखते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि निमाड़ और मालवा की समृद्ध लोक संस्कृति, नृत्य और संगीत का एक अनूठा संगम भी पेश करता है। 16 श्रृंगार और मेहंदी से सजा उत्सव गणगौर के अवसर पर युवतियां और महिलाएं विशेष रूप से मेहंदी लगाकर और रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर बाड़ी पूजन के लिए पहुंच रही हैं। 16 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की प्रार्थना के साथ मनाया जा रहा है। पर्व के अंतिम दिनों में इन ज्वारों का भव्य चल समारोह निकालकर विसर्जन किया जाएगा।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
US President Trump Blasts Journalist Over Rapist Allegations

April 27, 2026/
8:56 am

वॉशिंगटन डीसी32 मिनट पहले कॉपी लिंक ट्रम्प CBC न्यूज के इंटव्यू देते हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक इंटरव्यू के...

इंपैक्ट फीचर:सीकर की शिक्षा नगरी का शिखर-CLC, उत्कृष्ट परिणामों की 31 वर्षों की अविरल परंपरा

April 7, 2026/
3:42 pm

छोटे शहर से राष्ट्रीय पहचान तक की यात्रा, जहां से निकलते हैं टॉपर्स, बनते हैं संस्कारवान नागरिक और गढ़ा जाता...

DC vs KKR Live Score, IPL 2026: Follow Delhi Capitals vs Kolkata Knight Riders IPL matches updates and commentary from Arun Jaitley Stadium. (Picture Credit: X/@IPL)

May 8, 2026/
5:16 pm

आखरी अपडेट:08 मई, 2026, 17:16 IST यादव ने राज्य को एक अभियान युद्धक्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि एक संगठनात्मक...

donald Trumps Gold Card Visa Flops Only One Approved So Far

April 25, 2026/
1:36 am

वाशिंगटन5 मिनट पहले कॉपी लिंक ट्रम्प गोल्ड कार्ड व्यक्ति को अमेरिका में अनलिमिटेड रेसीडेंसी (हमेशा रहने) का अधिकार देगा। अमेरिका...

टीएमसी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी के साथ विलय का बचाव किया, दो-तिहाई नियम का हवाला दिया

June 15, 2026/
4:17 pm

सीएनएन-न्यूज18 से बात करते हुए टीएमसी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी के साथ विलय का बचाव करते हुए...

राजनीति

मांडू में गणगौर पर्व शुरू, मंदिरों में बोए ज्वारे:नगर में गूंज रहे पारंपरिक लोकगीत; 16 दिनों तक चलेगा उत्सव

मांडू में गणगौर पर्व शुरू, मंदिरों में बोए ज्वारे:नगर में गूंज रहे पारंपरिक लोकगीत; 16 दिनों तक चलेगा उत्सव

मांडू और आसपास के ग्रामीण अंचलों में गणगौर पर्व का उल्लास पर है। होली के दो दिन बाद से शुरू हुआ यह 16 दिवसीय अनुष्ठान माता पार्वती (गौरी) और भगवान शिव (ईसर) की भक्ति को समर्पित है। नगर के प्राचीन चतुर्भुज राम मंदिर सहित विभिन्न स्थानों पर महिलाओं ने मिट्टी के पात्रों में ज्वारे (जवारा) बोए हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘बाड़ी’ या ‘खोर’ कहा जाता है। रात 9 बजे जवारा पूजन और मंगल गीत गूंजे प्रतिदिन रात 9 बजे महिलाएं और युवतियां पूर्ण श्रृंगार कर मंदिरों में एकत्रित हो रही हैं। ढोल-थाली की थाप पर ‘गौर-गौर गोमती ईसर पूजे पार्वती’ और ‘जवारे बोवण चाली रे’ जैसे पारंपरिक लोकगीतों के साथ ज्वारों की पूजा की जा रही है। इन गीतों के माध्यम से ईसर-गौरी के विवाह प्रसंगों का वर्णन और अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है। अटूट दांपत्य और हरियाली के प्रतीक ज्वारे मान्यता है कि ये ज्वारे माता पार्वती का प्रतीक हैं। महिलाएं प्रतिदिन नियम से इन ज्वारों को सींचती हैं और कई श्रद्धालु इस दौरान कठिन उपवास भी रखते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि निमाड़ और मालवा की समृद्ध लोक संस्कृति, नृत्य और संगीत का एक अनूठा संगम भी पेश करता है। 16 श्रृंगार और मेहंदी से सजा उत्सव गणगौर के अवसर पर युवतियां और महिलाएं विशेष रूप से मेहंदी लगाकर और रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर बाड़ी पूजन के लिए पहुंच रही हैं। 16 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की प्रार्थना के साथ मनाया जा रहा है। पर्व के अंतिम दिनों में इन ज्वारों का भव्य चल समारोह निकालकर विसर्जन किया जाएगा।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.