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Phone Cut by Fire Brigade, Man Dies, Video Viral

Phone Cut by Fire Brigade, Man Dies, Video Viral

हादसे के वक्त स्थानीय रहवासी और दमकलकर्मी के बीच बातचीत का वीडियो सामने आया है।

हैलो, आपको ये फूटने की आवाज आ रही है? धमाके सुनिए…लेकिन बात पूरी होने से पहले ही फोन कट गया। हताशा में वह व्यक्ति चिल्लाकर बोला- रख दिया फोन उसने, बोला 15 मिनट लगेंगे।

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ये बातचीत इंदौर की स्वर्ण बाग कॉलोनी के रहवासी और फायर ब्रिगेड के कर्मचारी के बीच की है। इस बातचीत का वीडियो अब वायरल है, जिसे सुनकर साफ पता चलता है कि 17 और 18 मार्च की दरमियानी रात का अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता की भी कहानी है, जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया है।

स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि फायर ब्रिगेड आग लगने की घटना के डेढ़ घंटे बाद पहुंची थी, तब तक सब खत्म हो गया था। अगर फायर ब्रिगेड 15 मिनट में पहुंचती तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने भी परिजन ने कहा कि फायर ब्रिगेड देरी से आई थी और कर्मचारियों का बर्ताव बेहद संवेदनहीन था।

बता दें कि 17 और 18 मार्च की दरमियानी रात स्वर्ण बाग कॉलोनी में रहने वाले रबर कारोबारी मनोज पुगलिया के तीन मंजिला मकान में आग लगी। आग लगने की वजह पहले ईवी कार के चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट बताया गया, लेकिन परिवार का कहना है कि उन्होंने कार को चार्ज पर लगाया ही नहीं था। ये हादसा बिजली के पोल में स्पार्किंग की वजह से हुआ।

इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है? आग कैसे लगी? इसकी जांच के लिए सरकार ने एक कमेटी बनाई है। जो ये भी बताएगी कि भविष्य में ऐसी घटना न हो, इसके लिए क्या एहतियात बरते जा सकते हैं। पढ़िए, रिपोर्ट…

परिजन का कहना है कि बिजली के पोल में स्पार्किंग हुई, उसकी वजह से आग लगी। इसका एक वीडियो भी सामने आया है।

फायर ब्रिगेड कर्मचारी बोला- 15 मिनट लगेंगे

इस हादसे का सबूत एक वीडियो क्लिप है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस क्लिप में लपटों से घिरा मकान, उसके भीतर से धमाकों क आवाज और उस वक्त आसपास के लोगों की हताशा और बेबसी सुनाई और दिखाई देती है।

वीडियो में फोन पर एक प्रत्यक्षदर्शी कांपती आवाज में फायर ब्रिगेड कर्मचारी को घटना की भयावहता समझाने की कोशिश कर रहा है। घर के अंदर से गैस सिलेंडर या किसी अन्य उपकरण के फटने की तेज आवाजें आ रही हैं। आग की लपटें तीन मंजिला इमारत को अपनी आगोश में लेकर ऊपर उठ रही हैं।

फोन के दूसरी तरफ मौजूद फायर ब्रिगेड कर्मचारी को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा दिलाने के लिए प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, ‘हैलो… आपको ये फूटने की आवाज आ रही है? धमाके सुनिए…’ लेकिन उसकी बात पूरी होने से पहले ही फोन कट गया।

करंट लगने के डर से कोई पास नहीं गया

इसके बाद वहां खड़े लोग चीखने लगते हैं, ‘पानी डालो, कोई तो कुछ करो।’ लेकिन, घर के पास मौजूद बिजली के तारों और ट्रांसफॉर्मर के कारण कोई भी पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। उन्हें डर था कि पानी डालने पर करंट फैल सकता है, जिससे बचाव कार्य और भी खतरनाक हो सकता है। वे बस इंतजार करते रहे, 15 मिनट में फायर ब्रिगेड के पहुंचने का।

वो 15 मिनट कब डेढ़ घंटे में बदल गए, किसी को पता नहीं चला और जब तक मदद पहुंची, तब तक आठ जिंदगियां जलकर खाक हो चुकी थीं।

इंदौर के तिलक नगर मुक्तिधाम में एकसाथ 7 चिताएं जलीं। एक बच्चे के शव को दफनाया गया था।

इंदौर के तिलक नगर मुक्तिधाम में एकसाथ 7 चिताएं जलीं। एक बच्चे के शव को दफनाया गया था।

बेटा सीएम से बोला- बिजली के खंभे में हुआ शॉर्ट सर्किट

19 मार्च को जब मुख्यमंत्री मोहन यादव पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे, तो मृतक मनोज पुगलिया के बड़े बेटे सौरभ ने मुख्यमंत्री के सामने हाथ जोड़कर, रुंधे गले से जो बताया, वह किसी भी संवेदनशील इंसान को अंदर तक हिला देने के लिए काफी है। सौरभ ने सबसे पहले आग लगने की वजह पर ही सवाल खड़ा कर दिया।

उन्होंने कहा- साहब, आग गाड़ी की चार्जिंग से नहीं, पास के बिजली के खंभे में हुए शॉर्ट सर्किट से लगी थी। पहले एक कार ने आग पकड़ी। फिर वहां खड़ी बाइक और फिर हमारे घर में फैली। इसके बाद सौरभ ने उस रात की प्रशासनिक नाकामी की परतें खोलनी शुरू कीं।

टैंकर खाली थे, फायरकर्मी बोला- खुद बुझा लो आग

सौरभ ने बताया कि फायर ब्रिगेड डेढ़ घंटा लेट आई। उनके टैंकरों में पानी नहीं था। एक ड्राइवर को गली का पता नहीं था, वह कहीं और घुस गया। उनके पास न तो ऊंची इमारतों तक पहुंचने वाली सीढ़ी थी और न ही लोगों को बचाने की नीयत। मैंने उनसे कहा कि आपके पास फायर सेफ्टी जैकेट है, वह मुझे दे दो।

मुझे पता है कि मेरे परिवार के लोग कहां फंसे हो सकते हैं, मैं उन्हें बाहर निकाल लाऊंगा। इस पर एक फायरकर्मी ने झिड़कते हुए कहा, “ज्यादा पता है तो तुम खुद ही पानी डाल लो।”

मनोज पुगलिया के बड़े बेटे सौरभ ने मुख्यमंत्री को उस रात की प्रशासनिक नाकामियां बताईं।

मनोज पुगलिया के बड़े बेटे सौरभ ने मुख्यमंत्री को उस रात की प्रशासनिक नाकामियां बताईं।

मनोज पुगलिया के आखिरी शब्द- वक्त सब कुछ छीन सकता है

कारोबारी मनोज पुगलिया एक जिंदादिल इंसान थे और सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते थे। कौन जानता था कि मौत से कुछ घंटे पहले उन्होंने जो वॉट्सएप स्टेटस लगाए थे, वो ही उनकी जिंदगी के आखिरी शब्द बन जाएंगे। परिजन ने उनके ये स्टेटस सहेजकर रखे हैं।

मनोज पुगलिया एक धार्मिक व्यक्ति थे। उन्होंने हनुमान चालीसा की पंक्तियां और खाटू श्याम जी की कृपा का भी स्टेटस लगाया था।

कौन है इस ‘सामूहिक हत्या’ का जिम्मेदार?

यह अग्निकांड इंदौर के फायर सेफ्टी और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम पर कई गंभीर और सुलगते सवाल खड़े कर गया है…

  • संवेदनशीलता कहां थी: जब एक नागरिक फोन पर लाइव धमाकों की आवाजें सुना रहा था, तो फायर ब्रिगेड ने उसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया और फोन क्यों काट दिया?
  • क्या कोई ‘प्लान बी’ नहीं है: इंदौर जैसे बड़े शहर की तंग गलियों में आग लगने की घटनाएं नई नहीं हैं। क्या फायर ब्रिगेड के पास ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए कोई विशेष योजना, छोटे वाहन या उपकरण नहीं हैं?
  • खाली टैंकर- लापरवाही या अपराध: आग बुझाने के लिए खाली टैंकर लेकर घटनास्थल पर पहुंचना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक आपराधिक कृत्य है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
  • जवाबदेही किसकी: क्या मामले की जांच के लिए बनाई गई कमेटी किसी की जवाबदेही तय कर पाएगी?

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मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

कारोबारी के बेटे का दावा- EV से नहीं लगी आग

इंदौर में हुए EV हादसे ने एक खुशहाल परिवार को कुछ ही मिनटों में तबाह कर दिया। हादसे से बचकर निकले कारोबारी मनोज पुगलिया के बेटे सौमिल ने कहा- जब इलेक्ट्रिक कार में चार्जर ही कनेक्ट नहीं था, तो शॉर्ट सर्किट कैसे हो सकता है? हादसे के वीडियो में दिखाई दे रहा है कि इलेक्ट्रिक पोल के ऊपर शॉर्ट सर्किट से चिंगारियां उठ रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि फायर ब्रिगेड आग लगने की घटना के डेढ़ घंटे बाद पहुंची थी, तब तक सब खत्म हो गया था। अगर फायर ब्रिगेड 15 मिनट में पहुंचती तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने भी परिजन ने कहा कि फायर ब्रिगेड देरी से आई थी और कर्मचारियों का बर्ताव बेहद संवेदनहीन था।

बता दें कि 17 और 18 मार्च की दरमियानी रात स्वर्ण बाग कॉलोनी में रहने वाले रबर कारोबारी मनोज पुगलिया के तीन मंजिला मकान में आग लगी। आग लगने की वजह पहले ईवी कार के चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट बताया गया, लेकिन परिवार का कहना है कि उन्होंने कार को चार्ज पर लगाया ही नहीं था। ये हादसा बिजली के पोल में स्पार्किंग की वजह से हुआ।

इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है? आग कैसे लगी? इसकी जांच के लिए सरकार ने एक कमेटी बनाई है। जो ये भी बताएगी कि भविष्य में ऐसी घटना न हो, इसके लिए क्या एहतियात बरते जा सकते हैं। पढ़िए, रिपोर्ट…

परिजन का कहना है कि बिजली के पोल में स्पार्किंग हुई, उसकी वजह से आग लगी। इसका एक वीडियो भी सामने आया है।

फायर ब्रिगेड कर्मचारी बोला- 15 मिनट लगेंगे

इस हादसे का सबूत एक वीडियो क्लिप है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस क्लिप में लपटों से घिरा मकान, उसके भीतर से धमाकों क आवाज और उस वक्त आसपास के लोगों की हताशा और बेबसी सुनाई और दिखाई देती है।

वीडियो में फोन पर एक प्रत्यक्षदर्शी कांपती आवाज में फायर ब्रिगेड कर्मचारी को घटना की भयावहता समझाने की कोशिश कर रहा है। घर के अंदर से गैस सिलेंडर या किसी अन्य उपकरण के फटने की तेज आवाजें आ रही हैं। आग की लपटें तीन मंजिला इमारत को अपनी आगोश में लेकर ऊपर उठ रही हैं।

फोन के दूसरी तरफ मौजूद फायर ब्रिगेड कर्मचारी को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा दिलाने के लिए प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, ‘हैलो… आपको ये फूटने की आवाज आ रही है? धमाके सुनिए…’ लेकिन उसकी बात पूरी होने से पहले ही फोन कट गया।

करंट लगने के डर से कोई पास नहीं गया

इसके बाद वहां खड़े लोग चीखने लगते हैं, ‘पानी डालो, कोई तो कुछ करो।’ लेकिन, घर के पास मौजूद बिजली के तारों और ट्रांसफॉर्मर के कारण कोई भी पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। उन्हें डर था कि पानी डालने पर करंट फैल सकता है, जिससे बचाव कार्य और भी खतरनाक हो सकता है। वे बस इंतजार करते रहे, 15 मिनट में फायर ब्रिगेड के पहुंचने का।

वो 15 मिनट कब डेढ़ घंटे में बदल गए, किसी को पता नहीं चला और जब तक मदद पहुंची, तब तक आठ जिंदगियां जलकर खाक हो चुकी थीं।

इंदौर के तिलक नगर मुक्तिधाम में एकसाथ 7 चिताएं जलीं। एक बच्चे के शव को दफनाया गया था।

इंदौर के तिलक नगर मुक्तिधाम में एकसाथ 7 चिताएं जलीं। एक बच्चे के शव को दफनाया गया था।

बेटा सीएम से बोला- बिजली के खंभे में हुआ शॉर्ट सर्किट

19 मार्च को जब मुख्यमंत्री मोहन यादव पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे, तो मृतक मनोज पुगलिया के बड़े बेटे सौरभ ने मुख्यमंत्री के सामने हाथ जोड़कर, रुंधे गले से जो बताया, वह किसी भी संवेदनशील इंसान को अंदर तक हिला देने के लिए काफी है। सौरभ ने सबसे पहले आग लगने की वजह पर ही सवाल खड़ा कर दिया।

उन्होंने कहा- साहब, आग गाड़ी की चार्जिंग से नहीं, पास के बिजली के खंभे में हुए शॉर्ट सर्किट से लगी थी। पहले एक कार ने आग पकड़ी। फिर वहां खड़ी बाइक और फिर हमारे घर में फैली। इसके बाद सौरभ ने उस रात की प्रशासनिक नाकामी की परतें खोलनी शुरू कीं।

टैंकर खाली थे, फायरकर्मी बोला- खुद बुझा लो आग

सौरभ ने बताया कि फायर ब्रिगेड डेढ़ घंटा लेट आई। उनके टैंकरों में पानी नहीं था। एक ड्राइवर को गली का पता नहीं था, वह कहीं और घुस गया। उनके पास न तो ऊंची इमारतों तक पहुंचने वाली सीढ़ी थी और न ही लोगों को बचाने की नीयत। मैंने उनसे कहा कि आपके पास फायर सेफ्टी जैकेट है, वह मुझे दे दो।

मुझे पता है कि मेरे परिवार के लोग कहां फंसे हो सकते हैं, मैं उन्हें बाहर निकाल लाऊंगा। इस पर एक फायरकर्मी ने झिड़कते हुए कहा, “ज्यादा पता है तो तुम खुद ही पानी डाल लो।”

मनोज पुगलिया के बड़े बेटे सौरभ ने मुख्यमंत्री को उस रात की प्रशासनिक नाकामियां बताईं।

मनोज पुगलिया के बड़े बेटे सौरभ ने मुख्यमंत्री को उस रात की प्रशासनिक नाकामियां बताईं।

मनोज पुगलिया के आखिरी शब्द- वक्त सब कुछ छीन सकता है

कारोबारी मनोज पुगलिया एक जिंदादिल इंसान थे और सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते थे। कौन जानता था कि मौत से कुछ घंटे पहले उन्होंने जो वॉट्सएप स्टेटस लगाए थे, वो ही उनकी जिंदगी के आखिरी शब्द बन जाएंगे। परिजन ने उनके ये स्टेटस सहेजकर रखे हैं।

मनोज पुगलिया एक धार्मिक व्यक्ति थे। उन्होंने हनुमान चालीसा की पंक्तियां और खाटू श्याम जी की कृपा का भी स्टेटस लगाया था।

कौन है इस ‘सामूहिक हत्या’ का जिम्मेदार?

यह अग्निकांड इंदौर के फायर सेफ्टी और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम पर कई गंभीर और सुलगते सवाल खड़े कर गया है…

  • संवेदनशीलता कहां थी: जब एक नागरिक फोन पर लाइव धमाकों की आवाजें सुना रहा था, तो फायर ब्रिगेड ने उसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया और फोन क्यों काट दिया?
  • क्या कोई ‘प्लान बी’ नहीं है: इंदौर जैसे बड़े शहर की तंग गलियों में आग लगने की घटनाएं नई नहीं हैं। क्या फायर ब्रिगेड के पास ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए कोई विशेष योजना, छोटे वाहन या उपकरण नहीं हैं?
  • खाली टैंकर- लापरवाही या अपराध: आग बुझाने के लिए खाली टैंकर लेकर घटनास्थल पर पहुंचना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक आपराधिक कृत्य है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
  • जवाबदेही किसकी: क्या मामले की जांच के लिए बनाई गई कमेटी किसी की जवाबदेही तय कर पाएगी?

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इंदौर में हुए EV हादसे ने एक खुशहाल परिवार को कुछ ही मिनटों में तबाह कर दिया। हादसे से बचकर निकले कारोबारी मनोज पुगलिया के बेटे सौमिल ने कहा- जब इलेक्ट्रिक कार में चार्जर ही कनेक्ट नहीं था, तो शॉर्ट सर्किट कैसे हो सकता है? हादसे के वीडियो में दिखाई दे रहा है कि इलेक्ट्रिक पोल के ऊपर शॉर्ट सर्किट से चिंगारियां उठ रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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