Wednesday, 24 Jun 2026 | 07:31 AM

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Jeffrey Epstein Claimed White House Insider; Hundreds of Messages with Anil Ambani

Jeffrey Epstein Claimed White House Insider; Hundreds of Messages with Anil Ambani

न्यूयॉर्क6 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने 2017 में उद्योगपति अनिल अंबानी के सामने खुद को डोनाल्ड ट्रम्प के पहले कार्यकाल के व्हाइट हाउस के ‘इनसाइडर’ की तरह पेश किया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बीच दो साल तक सैकड़ों मैसेज और ईमेल हुए। इनमें एपस्टीन ने ट्रम्प प्रशासन की नियुक्ति व विदेश नीति से जुड़ी जानकारियां साझा कीं, जो बाद में सही भी निकलीं। हालांकि, इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि एपस्टीन की व्हाइट हाउस तक सीधी पहुंच थी। मैसेज में अनिल अंबानी ने एपस्टीन को लिखा था- ‘भारत के रिश्ते और रक्षा सहयोग के लिए व्हाइट हाउस से डील करने में आपकी गाइडेंस चाहिए।’ जवाब में एपस्टीन ने ‘इनसाइड’ जानकारी देने का वादा किया। सिग्नल-टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर होती थी बात न्यूयॉर्क टाइम्स ने जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा जारी मैसेज के रिव्यू के आधार पर बताया कि अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच बातचीत सिग्नल और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर होती थी, जहां अंबानी ‘अरमानी ए’ नाम से सक्रिय थे। यह संपर्क उस दौर का है जब एपस्टीन नाबालिगों से जुड़े अपराधों में जेल काट चुका था। इनका परिचय दुबई की कंपनी डीपी वर्ल्ड के चेयरमैन सुल्तान अहमद बिन सुलायेम ने कराया था। एपस्टीन ने जब दीपक चोपड़ा से अंबानी के बारे में राय मांगी, तो चोपड़ा ने उन्हें ‘बेहद अमीर, चर्चा में रहने का शौकीन और सेलेब्स के प्रति सजग’ व्यक्ति बताया था। टाइपो से भरे इन संदेशों में एपस्टीन खुद को असरदार पावर ब्रोकर के रूप में पेश करता दिखा। मार्च 2017 में अनिल अंबानी ने एपस्टीन से पूर्व सीआईए डायरेक्टर डेविड पेट्रेयस के भारत में अमेरिकी राजदूत बनने की संभावना पूछी थी। एपस्टीन ने जवाब दिया था- वे प्राथमिकता में नहीं हैं। बाद में केनेथ जस्टर राजदूत बने। जुलाई 2017 में एपस्टीन ने यह ‘इनसाइड’ जानकारी भी दी कि जॉन बोल्टन नए सुरक्षा सलाहकार (NSA) होंगे। हालांकि, तब ट्रम्प ने मौजूदा NSA मैकमास्टर का बचाव किया था। हालांकि, 8 महीने बाद एपस्टीन की बात सच साबित हुई और बोल्टन ने ही पद संभाला। एपस्टीन ने अनिल अंबानी को ट्रम्प के बेहद करीबी लोगों, जैसे स्टीफन बैनन और थॉमस बैरक जूनियर से मिलवाने का प्रस्ताव दिया था। बैरक उस वक्त ट्रम्प की इनॉगरेशन कमेटी के अध्यक्ष थे। एपस्टीन ने दिग्गजों को यह भरोसा दिलाया कि अंबानी से जुड़ना उनके लिए फायदेमंद होगा। वहीं, अनिल अंबानी ने खुद को भारत में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बताते हुए मैसेज लिखा कि ‘लीडरशिप’ चाहती है कि एपस्टीन उनकी मुलाकात जेरेड कुश्नर और बैनन से कराने में मदद करे। अनिल अंबानी की अमेरिकी डिफेंस पॉलिसी में दिलचस्पी की वजह यह भी बताई गई है कि 2016 में उन्हें राफेल के पार्ट्स से जुड़ी डील मिली थी। उस वक्त आलोचकों ने भारत सरकार पर अंबानी को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए थे, जिन्हें सरकार ने खारिज किया था। अंबानी ने लिखा था कि भारत के लिए अमेरिकी राजदूत का चयन उनके लिए बेहद ‘अहम’ है। वे चाहते थे कि पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से निपटने के लिए इस पद पर कोई ‘मजबूत’ व्यक्ति आए। रिपोर्ट के मुताबिक संदेशों से स्पष्ट है कि अनिल अंबानी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पैठ मजबूत करना चाहते थे। उन्होंने खुद को अटलांटिक काउंसिल के एडवाइजरी बोर्ड में ‘इकलौते भारतीय’ के रूप में पेश किया। वहीं, एपस्टीन ने उन्हें कार्नेगी एंडोमेंट के विलियम जे. बर्न्स और थॉमस जे. प्रिट्जकर जैसे प्रभावशाली वैश्विक दिग्गजों से मिलवाने का वादा किया। एपस्टीन ने अंबानी को अपने घर डिनर पर बुलाकर बड़े राजनेताओं से नेटवर्किंग का मौका भी दिया। 2019 में जब अनिल अंबानी की कंपनियों पर आर्थिक संकट गहराया और उन्हें कर्ज चुकाने के लिए भाई मुकेश अंबानी की मदद लेनी पड़ी, तब एपस्टीन उन्हें मानसिक रूप से मजबूत रहने की सलाह दे रहा था। हालांकि एपस्टीन ने संदेशों में लिखा कि उसे पैसे की जरूरत नहीं है, लेकिन एक ईमेल में ‘ट्रांजैक्शन डन’ का जिक्र मिला। रिपोर्ट के अनुसार, 23 मई 2019 को भारत में चुनावी नतीजों के दिन अनिल अंबानी न्यूयॉर्क में एपस्टीन के घर गए थे। इसके कुछ ही हफ्तों बाद एपस्टीन को नाबालिगों की यौन तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Jeffrey Epstein Claimed White House Insider; Hundreds of Messages with Anil Ambani

Jeffrey Epstein Claimed White House Insider; Hundreds of Messages with Anil Ambani

न्यूयॉर्क48 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने 2017 में उद्योगपति अनिल अंबानी के सामने खुद को डोनाल्ड ट्रम्प के पहले कार्यकाल के व्हाइट हाउस के ‘इनसाइडर’ की तरह पेश किया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बीच दो साल तक सैकड़ों मैसेज और ईमेल हुए। इनमें एपस्टीन ने ट्रम्प प्रशासन की नियुक्ति व विदेश नीति से जुड़ी जानकारियां साझा कीं, जो बाद में सही भी निकलीं। हालांकि, इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि एपस्टीन की व्हाइट हाउस तक सीधी पहुंच थी। मैसेज में अनिल अंबानी ने एपस्टीन को लिखा था- ‘भारत के रिश्ते और रक्षा सहयोग के लिए व्हाइट हाउस से डील करने में आपकी गाइडेंस चाहिए।’ जवाब में एपस्टीन ने ‘इनसाइड’ जानकारी देने का वादा किया। सिग्नल-टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर होती थी बात न्यूयॉर्क टाइम्स ने जस्टिस डिपार्टमेंट की तरफ से जारी मैसेज के रिव्यू के आधार पर बताया कि अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच बातचीत सिग्नल और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर होती थी, जहां अंबानी ‘अरमानी ए’ नाम से सक्रिय थे। यह संपर्क उस दौर का है जब एपस्टीन नाबालिगों से जुड़े अपराधों में जेल की सजा काट चुका था। इनका परिचय दुबई की कंपनी डीपी वर्ल्ड के चेयरमैन सुल्तान अहमद बिन सुलायेम ने कराया था। एपस्टीन ने जब दीपक चोपड़ा से अंबानी के बारे में राय मांगी, तो चोपड़ा ने उन्हें ‘बेहद अमीर, चर्चा में रहने का शौकीन और सेलेब्स के प्रति सजग’ व्यक्ति बताया था। सुरक्षा सलाहकार की नियुक्ति पर एपस्टीन की बात सच हुई टाइपो से भरे इन संदेशों में एपस्टीन खुद को असरदार पावर ब्रोकर के रूप में पेश करता दिखा। मार्च 2017 में अनिल अंबानी ने एपस्टीन से पूर्व सीआईए डायरेक्टर डेविड पेट्रेयस के भारत में अमेरिकी राजदूत बनने की संभावना पूछी थी। एपस्टीन ने जवाब दिया था- वे प्राथमिकता में नहीं हैं। बाद में केनेथ जस्टर राजदूत बने। जुलाई 2017 में एपस्टीन ने यह ‘इनसाइड’ जानकारी भी दी कि जॉन बोल्टन नए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) होंगे। हालांकि, तब ट्रम्प ने मौजूदा NSA मैकमास्टर का बचाव किया था। हालांकि, 8 महीने बाद एपस्टीन की बात सच साबित हुई और बोल्टन ने ही पद संभाला। एपस्टीन ने अनिल अंबानी को ट्रम्प के बेहद करीबी लोगों, जैसे स्टीफन बैनन और थॉमस बैरक जूनियर से मिलवाने का प्रस्ताव दिया था। बोल्टन 9 अप्रैल, 2018 को NSA बने और ट्रम्प ने 10 सितंबर 2019 को उन्हें पद से हटा दिया। अंबानी ने खुद को भारत में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बताया बैरक उस वक्त ट्रम्प की इनॉगरेशन कमेटी के अध्यक्ष थे। एपस्टीन ने दिग्गजों को यह भरोसा दिलाया कि अंबानी से जुड़ना उनके लिए फायदेमंद होगा। वहीं, अनिल अंबानी ने खुद को भारत में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बताते हुए मैसेज लिखा कि ‘लीडरशिप’ चाहती है कि एपस्टीन उनकी मुलाकात जेरेड कुश्नर और बैनन से कराने में मदद करे। अनिल अंबानी की अमेरिकी डिफेंस पॉलिसी में दिलचस्पी की वजह यह भी बताई गई है कि 2016 में उन्हें राफेल के पार्ट्स से जुड़ी डील मिली थी। उस वक्त आलोचकों ने भारत सरकार पर अंबानी को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए थे, जिन्हें सरकार ने खारिज किया था। अंबानी ने लिखा था कि भारत के लिए अमेरिकी राजदूत का चयन उनके लिए बेहद ‘अहम’ है। वे चाहते थे कि पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से निपटने के लिए इस पद पर कोई ‘मजबूत’ व्यक्ति आए। एपस्टीन ने अंबानी को घर बुलाकर बड़े नेताओं से मिलवाया रिपोर्ट के मुताबिक संदेशों से स्पष्ट है कि अनिल अंबानी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पैठ मजबूत करना चाहते थे। उन्होंने खुद को अटलांटिक काउंसिल के एडवाइजरी बोर्ड में ‘इकलौते भारतीय’ के रूप में पेश किया। वहीं, एपस्टीन ने उन्हें कार्नेगी एंडोमेंट के विलियम जे. बर्न्स और थॉमस जे. प्रिट्जकर जैसे प्रभावशाली वैश्विक दिग्गजों से मिलवाने का वादा किया। एपस्टीन ने अंबानी को अपने घर डिनर पर बुलाकर बड़े राजनेताओं से नेटवर्किंग का मौका भी दिया। अनिल अंबानी-एपस्टीन के बीच से पैसों के लेनदेन का भी जिक्र 2019 में जब अनिल अंबानी की कंपनियों पर आर्थिक संकट गहराया और उन्हें कर्ज चुकाने के लिए भाई मुकेश अंबानी की मदद लेनी पड़ी, तब एपस्टीन उन्हें मानसिक रूप से मजबूत रहने की सलाह दे रहा था। हालांकि एपस्टीन ने संदेशों में लिखा कि उसे पैसे की जरूरत नहीं है, लेकिन एक ईमेल में ‘ट्रांजैक्शन डन’ का जिक्र मिला। रिपोर्ट के अनुसार, 23 मई 2019 को भारत में चुनावी नतीजों के दिन अनिल अंबानी न्यूयॉर्क में एपस्टीन के घर गए थे। इसके कुछ ही हफ्तों बाद एपस्टीन को नाबालिगों की यौन तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। —————————– एपस्टीन फाइल्स- अनिल अंबानी की चैट सामने आई:दावा- सुनहरे बालों वाली स्वीडिश महिला की पेशकश हुई, अनिल बोले- अरेंज करो अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने एपस्टीन और उद्योगपति अनिल अंबानी के बीच 2017 से 2019 के दौरान हुई बातचीत से जुड़े दस्तावेज जारी किए। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक 9 मार्च 2017 की बातचीत में अनिल ने एपस्टीन से पूछा- क्या सुझाव है? इस पर एपस्टीन ने लिखा- मुलाकात ‘मजेदार’ बनाने के लिए ‘लंबी स्वीडिश ब्लॉन्ड महिला’ बेहतर होगी। इसके बाद अंबानी ने जवाब दिया, ‘इसे अरेंज करो।’ बातचीत तब की है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Instagram Phishing Scam Explained; Fake Messages – OTP Fraud

Instagram Phishing Scam Explained; Fake Messages - OTP Fraud

Hindi News Lifestyle Instagram Phishing Scam Explained; Fake Messages OTP Fraud | Cyber Crime Alert 35 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक आज के समय में इंस्टाग्राम सिर्फ फोटो-वीडियो शेयर करने का प्लेटफॉर्म नहीं है। यह पहचान और कमाई का जरिया भी बन चुका है। यही वजह है कि साइबर अपराधियों की नजर इंस्टाग्राम के आम यूजर्स से लेकर क्रिएटर्स और बिजनेस अकाउंट्स, सभी पर है। बीते कुछ महीनों में इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस स्कैम में साइबर ठग फेक ईमेल या नकली मैसेज भेजकर यूजर्स का अकाउंट हैक करने की कोशिश करते हैं। इन फेक मेल/मैसेज में अक्सर लिखा होता है कि आपका सोशल मीडिया अकाउंट बंद होने वाला है या आपने कोई नियम तोड़ा है। डर के कारण लोग बिना सोचे-समझे भेजे गए लिंक पर क्लिक कर देते हैं। यहीं से स्कैम शुरू होता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को कैसे सुरक्षित रखें। इसलिए आज साइबर लिटरेसी कॉलम में बात इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम की। साथ ही जानेंगे कि- इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम से बचने के लिए कौन-सी सावधानियां बरतनी चाहिए? अगर गलती से फिशिंग लिंक पर क्लिक कर दिया तो क्या करें? एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम क्या है? जवाब- यह एक ऑनलाइन धोखाधड़ी है, जिसमें ठग इंस्टाग्राम के नाम से फर्जी ईमेल, मैसेज या लिंक भेजकर यूजर की लॉगिन डिटेल्स चुराते हैं। इसके बाद अकाउंट हैक कर लेते हैं। सवाल- स्कैमर इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम को कैसे अंजाम देते हैं? जवाब- साइबर अपराधी इस स्कैम में यूजर्स को ऐसे ईमेल या मैसेज भेजते हैं, जो देखने में बिल्कुल ऑफिशियल लगते हैं। इस मैसेज में अक्सर डराने वाली भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, जैसेकि– “आपका अकाउंट कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन कर रहा है।” “अगले 24 घंटों में आपका इंस्टाग्राम अकाउंट बंद कर दिया जाएगा।” “आपका अकाउंट बंद होने वाला है।” “अकाउंट ब्लॉक से बचने के लिए इस लिंक पर जाएं।” इस फेक मैसेज के साथ एक लिंक भी होता है, जो – ऐसा दिखता है जैसे Meta या Instagram की ओर से आया है। यह लिंक असली जैसी दिखने वाली एक नकली वेबसाइट पर लेकर जाता है। यह एक फर्जी लॉगिन पेज होता है। उस पेज पर यूजर अपने क्रेडेंशियल्स दर्ज करता है। फिर वो फर्जी पेज वेरिफिकेशन के लिए OTP मांगता है। OTP डालते ही आपका अकाउंट हैक हो जाता है। स्कैमर्स उसे अपने कंट्रोल में ले लेते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- लोग इतनी आसानी से इस स्कैम के झांसे में कैसे फंस जाते हैं? जवाब- इसके कई कारण हैं। जैसेकि- स्कैमर्स सबसे पहले डर पैदा करते हैं। अकाउंट सस्पेंड होने, पोस्ट हटने या नियमों को उल्लंघन करने जैसे मैसेज देखकर यूजर घबरा जाते हैं। ऊपर से ये ईमेल और मैसेज दिखने में बिल्कुल ऑफिशियल लगते हैं, जिससे शक नहीं होता है। जल्दबाजी में लोग लिंक की जांच नहीं करते और सोचते हैं कि तुरंत लॉगिन करना ही समाधान है। अवेयरनेस की कमी भी एक बड़ी वजह है, जिसके कारण लोग अपनी लॉगिन डिटेल्स खुद ही स्कैमर्स को दे बैठते हैं। सवाल- हैकर्स इंस्टाग्राम अकाउंट को हैक करके क्या-क्या नुकसान पहुंचा सकते हैं? जवाब- हैकर्स पासवर्ड बदलकर अकाउंट पर पूरा कंट्रोल ले सकते हैं और इस तरह के नुकसान पहुंचा सकते हैं– आपका पासवर्ड बदल देना। आपका ईमेल/फोन नंबर हटा देना। आपको आपके ही अकाउंट से बाहर कर देना। अकाउंट रिकवरी का ऑप्शन बदल देना। आर्थिक क्षति पहुंचाना। फॉलोअर्स से ‘इन्वेस्टमेंट’ के नाम पर पैसे मांगना। फर्जी Giveaway या Crypto स्कीम चलाना। आपत्तिजनक या अश्लील पोस्ट डालना। राजनीतिक/विवादित कंटेंट शेयर करना। फर्जी स्टोरी लगाकर बदनाम करना। पर्सनल डेटा चोरी करना। पर्सनल चैट पढ़ना/ब्लैकमेल करना। निजी फोटो/वीडियो यूज करना। आपके नाम से दूसरों को ठगना। दोस्तों को फिशिंग लिंक भेजना। सवाल- क्या इंस्टाग्राम कभी भी ऐसा मैसेज भेजता है कि “24 घंटे के अंदर आपका अकाउंट बंद कर दिया जाएगा?” जवाब- हां, अगर आपका अकाउंट कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन करने की वजह से सस्पेंड किया जाता है तो इंस्टाग्राम इन-एप नोटिफिकेशन या आधिकारिक ईमेल के जरिए इसकी जानकारी देता है। हालांकि, डायरेक्ट मैसेज (DMs) के जरिए ‘24-48 घंटों के अंदर अकाउंट बंद करने की धमकी’ देने वाले ईमेल आमतौर पर फिशिंग स्कैम होते हैं। सवाल- फिशिंग ईमेल आईडी की पहचान कैसे करें? जवाब- इंस्टाग्राम के नाम से आए फेक ईमेल की पहचान करने के लिए सबसे पहले भेजने वाले की ईमेल आईडी ध्यान से जांचें। इंस्टाग्राम/Meta से जुड़े वैध ईमेल डोमेन की लिस्ट नीचे देखिए। notification@facebookmail.com noreply@facebookmail.com @business.fb.com @support.facebook.com @fb.com @meta.com @account.meta.com @internal.metamail.com @go.metamail.com advertise-noreply@facebookmail.com update@em.facebookmail.com @mediapartnerships.fb.com @global.metamail.com अगर मेल इन आधिकारिक डोमेन से नहीं आया है, तो वह फेक हो सकता है। अक्सर फर्जी ईमेल डोमेन में स्पेलिंग में थोड़ा बहुत हेरफेर होता है। इसलिए डोमेन की स्पेलिंग बहुत ध्यान से पढ़ें। ऐसे किसी भी मेल या मैसेज पर भरोसा न करें, जिसमें- पैसों की डिमांड की गई हो। गिफ्ट का लालच दिया गया हो। अकाउंट डिलीट/बैन करने की धमकी दी गई हो। सवाल- क्या इंस्टाग्राम कभी भी मैसेज भेजकर सिक्योरिटी पासवर्ड मांगता है? जवाब- नहीं, इंस्टाग्राम कभी भी मैसेज, ईमेल या कॉल के जरिए आपकी लॉगिन डिटेल्स, ओटीपी या कोई भी सिक्योरिटी डिटेल नहीं मांगता है। सवाल- इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम से बचने के लिए कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए? जवाब- थोड़ी-सी सतर्कता आपके इंस्टाग्राम अकाउंट को सुरक्षित रख सकती है। इसलिए कुछ बुनियादी बातों का खास ख्याल रखें। इसे नीचे दिए गए ग्राफिक से समझिए- सवाल- अगर गलती से फिशिंग लिंक पर क्लिक हो जाए तो क्या करें? जवाब- ऐसे में तुरंत अपना इंस्टाग्राम पासवर्ड बदलें। सभी डिवाइसेज से लॉगआउट करें और टू-स्टेप वेरिफिकेशन ऑन करें। साथ ही ईमेल सिक्योर करें और संदिग्ध एक्टिविटी को इंस्टाग्राम में रिपोर्ट करें। सवाल- इंस्टाग्राम से आए आधिकारिक ईमेल की पुष्टि कैसे करें? जवाब- इंस्टाग्राम से आए आधिकारिक ईमेल की पुष्टि के लिए सीधे इंस्टाग्राम एप खोलें। सेटिंग्स के सिक्योरिटी वाले ऑप्शन पर क्लिक करके ‘Emails from Instagram’ में जाएं। यहां आपको इंस्टाग्राम द्वारा भेजे गए सभी असली ईमेल की लिस्ट मिल जाती है, जिससे पता चल जाता है कि मेल रियल है या फेक। ……………… साइबर लिटरेसी से जड़ी ये खबर भी पढ़िए साइबर लिटरेसी- मैट्रिमोनियल प्लेटफार्म

Doxing Scam Alerts; I4C Indore Teacher VIDEO | Trolling, Threatening Call Messages

Doxing Scam Alerts; I4C Indore Teacher VIDEO | Trolling, Threatening Call Messages

Hindi News Lifestyle Doxing Scam Alerts; I4C Indore Teacher VIDEO | Trolling, Threatening Call Messages Cyber Rules 5 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक हाल ही में इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने ‘डॉक्सिंग स्कैम’ को लेकर लोगाें को अलर्ट किया है। डॉक्सिंग का मतलब होता है, ‘किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी निजी या पहचान संबंधी जानकारी इंटरनेट पर सार्वजनिक करना।’ I4C ने वीडियो में इंदौर की एक घटना का जिक्र किया है, जहां एक स्टूडेंट ने अपने टीचर की पर्सनल जानकारी (जैसे नाम, पता, फोन नंबर और अन्य डिटेल्स) पब्लिक प्लेटफॉर्म्स पर शेयर कर दीं। साथ ही लोगों को उन्हें ऑनलाइन और ऑफलाइन उन्हें परेशान करने के लिए उकसाया। इसके बाद टीचर को ट्रोलिंग, धमकी भरे कॉल्स-मैसेजेस और काफी अपमान का सामना करना पड़ा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई बिना सहमति के किसी की पर्सनल इन्फॉर्मेशन पब्लिक प्लेटफार्म्स पर शेयर कर सकता है। क्या इसके लिए कोई कानून है? चलिए, आज जरूरत की खबर में हम इस बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- क्या किसी व्यक्ति की पर्सनल इन्फॉर्मेशन ऑनलाइन लीक करना कानूनन अपराध है? पर्सनल जानकारी लीक होने के क्या खतरे हो सकते हैं? एक्सपर्ट: रूद्र विक्रम सिंह, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट सवाल- क्या किसी व्यक्ति की पर्सनल इन्फॉर्मेशन ऑनलाइन लीक करना कानूनन अपराध है? जवाब- हां, किसी भी व्यक्ति की पर्सनल इन्फॉर्मेशन उसकी सहमति के बिना ऑनलाइन लीक करना कानूनन अपराध है। यह साइबर क्राइम की कैटेगरी में आता है। ऐसे मामलों में दो धाराएं लागू हो सकती हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66E – प्राइवेसी (निजता) का उल्लंघन। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 72 – गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग। अगर जानकारी लीक करने के साथ बदनाम करना, धमकाना या उत्पीड़न भी शामिल हो, तो मामला और गंभीर हो जाता है। ऐसी स्थिति में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मानहानि, आपराधिक धमकी और उत्पीड़न से जुड़ी धाराएं लागू हो सकती हैं। दोषी पाए जाने पर जुर्माना, कारावास या फिर दोनों हो सकता है। सवाल- पर्सनल इन्फॉर्मेशन लीक करने पर आरोपी पर कानून की कौन सी धारा लागू होती है और इसके लिए कितनी सजा हो सकती है? जवाब- ऐसे मामलों में मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) और भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धाराएं लागू हो सकती हैं। इसे नीचे दिए गए ग्राफिक से समझिए- सवाल- पर्सनल इन्फॉर्मेशन लीक होने के संभावित खतरे क्या हैं? जवाब- इससे आइडेंटिटी की चोरी, आर्थिक नुकसान, मानसिक तनाव और सामाजिक बदनामी जैसे गंभीर रिस्क हो सकते हैं। कई मामलों में लोग ट्रोलिंग, ब्लैकमेलिंग और धमकियों का शिकार भी हो जाते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- अगर किसी की पर्सनल इन्फॉर्मेशन लीक हो जाए, तो उसे तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए? जवाब- ऐसी स्थिति में घबराने की बजाय तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है। सबसे पहले लीक हुई जानकारी के स्क्रीनशॉट और लिंक सुरक्षित रखें, ताकि बाद में सबूत के तौर पर काम आ सकें। जिस प्लेटफॉर्म पर जानकारी शेयर हुई है, उसके एडमिन को तुरंत रिपोर्ट करें और कंटेंट हटाने की मांग करें। अपने सोशल मीडिया और ईमेल अकाउंट्स के पासवर्ड बदलें। साथ ही टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन करें, ताकि आगे इस तरह के दुरुपयोग को रोका जा सके। परिवार और दोस्तों को भी सूचित करें, जिससे वे किसी झांसे में न आएं। जरूरत पड़ने पर साइबर क्राइम पोर्टल या पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- अपने ऑनलाइन डेटा और जानकारी को कैसे सुरक्षित रखें? जवाब- आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया अकाउंट्स हमारी पहचान बन चुके हैं। ऐसे में छोटी-सी लापरवाही भी बैंक फ्रॉड, हैकिंग या डेटा चोरी का कारण बन सकती है। इसलिए कुछ बुनियादी सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है। जैसेकि- सोशल मीडिया के पासवर्ड मजबूत रखें। कभी भी किसी से OTP शेयर न करें। फोन में हमेशा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन रखें। पब्लिक Wi-Fi पर सोशल मीडिया और बैंकिंग एप्स यूज न करें। अनजाने लिंक पर कभी भी क्लिक न करें। मोबाइल फोन और उसमें मौजूद एप्स हमेशा अपडेट रखें। सोशल मीडिया प्राइवेसी सेटिंग्स चेक करें। संदिग्ध कॉल/मैसेज तुरंत ब्लॉक करें। सवाल- कौन सी जानकारी हमें कभी भी ऑनलाइन नहीं शेयर करनी चाहिए? जवाब- ऑनलाइन दुनिया में एक छोटी-सी जानकारी भी साइबर ठगों के लिए बड़ा हथियार बन सकती है। इसलिए कुछ जानकारियां ऐसी हैं, जिन्हें किसी भी कीमत पर ऑनलाइन शेयर नहीं करना चाहिए। जैसेकि- सवाल- कई बार साइबर अपराधी भी धोखे से हमारा पर्सनल डेटा चुरा लेते हैं। इससे बचने के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए? जवाब- साइबर अपराधी अक्सर तकनीकी हैकिंग से ज्यादा सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल करते हैं। सोशल इंजीनियरिंग वह तरीका है, जिसमें अपराधी लोगों को झांसा देकर, डराकर या भरोसा जीतकर उनसे खुद ही उनकी निजी जानकारी, पासवर्ड या ओटीपी हासिल कर लेते हैं। ऐसे में कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि- किसी भी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें। अगर कोई OTP, पासवर्ड या बैंक डिटेल्स मांगे तो समझें वह फ्रॉड है। असली संस्थाएं कभी भी ऐसी जानकारी नहीं मांगती हैं। किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसका URL ध्यान से चेक करें। किसी भी बैंकिंग या सरकारी कामों के लिए हमेशा आधिकारिक एप या वेबसाइट का इस्तेमाल करें। पब्लिक Wi-Fi पर बैंकिंग या पेमेंट करने से बचें। सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी न शेयर करें। सवाल- अगर ऑनलाइन डेटा चोरी होने का शक हो और अभी तक उसका कोई दुरुपयोग न हुआ हो तो क्या हम कोई एहतियातन कदम उठा सकते हैं? जवाब- इससे आप बड़ा नुकसान होने से खुद को बचा सकते हैं। डेटा चोरी के मामलों में फास्ट एक्शन ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। जितनी जल्दी आप सावधानी बरतेंगे, उतना ही फ्रॉड का खतरा कम होगा। सबसे पहले सभी जरूरी अकाउंट्स, जैसे ईमेल, बैंकिंग एप्स और सोशल मीडिया के पासवर्ड तुरंत बदलें। जहां संभव हो, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) ऑन करें, ताकि कोई भी बिना OTP के लॉगिन न कर सके। बैंक अकाउंट और कार्ड ट्रांजैक्शन को नियमित रूप से मॉनिटर करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत बैंक को सूचित करें। डेबिट/क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग अस्थायी रूप से तुरंत ब्लॉक कराएं। फिशिंग या फ्रॉड