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Jeffrey Epstein Claimed White House Insider; Hundreds of Messages with Anil Ambani

Jeffrey Epstein Claimed White House Insider; Hundreds of Messages with Anil Ambani

न्यूयॉर्क6 मिनट पहले

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अमेरिका के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने 2017 में उद्योगपति अनिल अंबानी के सामने खुद को डोनाल्ड ट्रम्प के पहले कार्यकाल के व्हाइट हाउस के ‘इनसाइडर’ की तरह पेश किया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बीच दो साल तक सैकड़ों मैसेज और ईमेल हुए।

इनमें एपस्टीन ने ट्रम्प प्रशासन की नियुक्ति व विदेश नीति से जुड़ी जानकारियां साझा कीं, जो बाद में सही भी निकलीं। हालांकि, इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि एपस्टीन की व्हाइट हाउस तक सीधी पहुंच थी।

मैसेज में अनिल अंबानी ने एपस्टीन को लिखा था- ‘भारत के रिश्ते और रक्षा सहयोग के लिए व्हाइट हाउस से डील करने में आपकी गाइडेंस चाहिए।’ जवाब में एपस्टीन ने ‘इनसाइड’ जानकारी देने का वादा किया।

सिग्नल-टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर होती थी बात

न्यूयॉर्क टाइम्स ने जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा जारी मैसेज के रिव्यू के आधार पर बताया कि अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच बातचीत सिग्नल और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर होती थी, जहां अंबानी ‘अरमानी ए’ नाम से सक्रिय थे।

यह संपर्क उस दौर का है जब एपस्टीन नाबालिगों से जुड़े अपराधों में जेल काट चुका था। इनका परिचय दुबई की कंपनी डीपी वर्ल्ड के चेयरमैन सुल्तान अहमद बिन सुलायेम ने कराया था। एपस्टीन ने जब दीपक चोपड़ा से अंबानी के बारे में राय मांगी, तो चोपड़ा ने उन्हें ‘बेहद अमीर, चर्चा में रहने का शौकीन और सेलेब्स के प्रति सजग’ व्यक्ति बताया था।

टाइपो से भरे इन संदेशों में एपस्टीन खुद को असरदार पावर ब्रोकर के रूप में पेश करता दिखा। मार्च 2017 में अनिल अंबानी ने एपस्टीन से पूर्व सीआईए डायरेक्टर डेविड पेट्रेयस के भारत में अमेरिकी राजदूत बनने की संभावना पूछी थी।

एपस्टीन ने जवाब दिया था- वे प्राथमिकता में नहीं हैं। बाद में केनेथ जस्टर राजदूत बने। जुलाई 2017 में एपस्टीन ने यह ‘इनसाइड’ जानकारी भी दी कि जॉन बोल्टन नए सुरक्षा सलाहकार (NSA) होंगे। हालांकि, तब ट्रम्प ने मौजूदा NSA मैकमास्टर का बचाव किया था।

हालांकि, 8 महीने बाद एपस्टीन की बात सच साबित हुई और बोल्टन ने ही पद संभाला। एपस्टीन ने अनिल अंबानी को ट्रम्प के बेहद करीबी लोगों, जैसे स्टीफन बैनन और थॉमस बैरक जूनियर से मिलवाने का प्रस्ताव दिया था। बैरक उस वक्त ट्रम्प की इनॉगरेशन कमेटी के अध्यक्ष थे।

एपस्टीन ने दिग्गजों को यह भरोसा दिलाया कि अंबानी से जुड़ना उनके लिए फायदेमंद होगा। वहीं, अनिल अंबानी ने खुद को भारत में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बताते हुए मैसेज लिखा कि ‘लीडरशिप’ चाहती है कि एपस्टीन उनकी मुलाकात जेरेड कुश्नर और बैनन से कराने में मदद करे।

अनिल अंबानी की अमेरिकी डिफेंस पॉलिसी में दिलचस्पी की वजह यह भी बताई गई है कि 2016 में उन्हें राफेल के पार्ट्स से जुड़ी डील मिली थी। उस वक्त आलोचकों ने भारत सरकार पर अंबानी को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए थे, जिन्हें सरकार ने खारिज किया था।

अंबानी ने लिखा था कि भारत के लिए अमेरिकी राजदूत का चयन उनके लिए बेहद ‘अहम’ है। वे चाहते थे कि पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से निपटने के लिए इस पद पर कोई ‘मजबूत’ व्यक्ति आए।

रिपोर्ट के मुताबिक संदेशों से स्पष्ट है कि अनिल अंबानी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पैठ मजबूत करना चाहते थे। उन्होंने खुद को अटलांटिक काउंसिल के एडवाइजरी बोर्ड में ‘इकलौते भारतीय’ के रूप में पेश किया।

वहीं, एपस्टीन ने उन्हें कार्नेगी एंडोमेंट के विलियम जे. बर्न्स और थॉमस जे. प्रिट्जकर जैसे प्रभावशाली वैश्विक दिग्गजों से मिलवाने का वादा किया। एपस्टीन ने अंबानी को अपने घर डिनर पर बुलाकर बड़े राजनेताओं से नेटवर्किंग का मौका भी दिया।

2019 में जब अनिल अंबानी की कंपनियों पर आर्थिक संकट गहराया और उन्हें कर्ज चुकाने के लिए भाई मुकेश अंबानी की मदद लेनी पड़ी, तब एपस्टीन उन्हें मानसिक रूप से मजबूत रहने की सलाह दे रहा था।

हालांकि एपस्टीन ने संदेशों में लिखा कि उसे पैसे की जरूरत नहीं है, लेकिन एक ईमेल में ‘ट्रांजैक्शन डन’ का जिक्र मिला। रिपोर्ट के अनुसार, 23 मई 2019 को भारत में चुनावी नतीजों के दिन अनिल अंबानी न्यूयॉर्क में एपस्टीन के घर गए थे। इसके कुछ ही हफ्तों बाद एपस्टीन को नाबालिगों की यौन तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।

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अमेरिका के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने 2017 में उद्योगपति अनिल अंबानी के सामने खुद को डोनाल्ड ट्रम्प के पहले कार्यकाल के व्हाइट हाउस के ‘इनसाइडर’ की तरह पेश किया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बीच दो साल तक सैकड़ों मैसेज और ईमेल हुए।

इनमें एपस्टीन ने ट्रम्प प्रशासन की नियुक्ति व विदेश नीति से जुड़ी जानकारियां साझा कीं, जो बाद में सही भी निकलीं। हालांकि, इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि एपस्टीन की व्हाइट हाउस तक सीधी पहुंच थी।

मैसेज में अनिल अंबानी ने एपस्टीन को लिखा था- ‘भारत के रिश्ते और रक्षा सहयोग के लिए व्हाइट हाउस से डील करने में आपकी गाइडेंस चाहिए।’ जवाब में एपस्टीन ने ‘इनसाइड’ जानकारी देने का वादा किया।

सिग्नल-टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर होती थी बात

न्यूयॉर्क टाइम्स ने जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा जारी मैसेज के रिव्यू के आधार पर बताया कि अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच बातचीत सिग्नल और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर होती थी, जहां अंबानी ‘अरमानी ए’ नाम से सक्रिय थे।

यह संपर्क उस दौर का है जब एपस्टीन नाबालिगों से जुड़े अपराधों में जेल काट चुका था। इनका परिचय दुबई की कंपनी डीपी वर्ल्ड के चेयरमैन सुल्तान अहमद बिन सुलायेम ने कराया था। एपस्टीन ने जब दीपक चोपड़ा से अंबानी के बारे में राय मांगी, तो चोपड़ा ने उन्हें ‘बेहद अमीर, चर्चा में रहने का शौकीन और सेलेब्स के प्रति सजग’ व्यक्ति बताया था।

टाइपो से भरे इन संदेशों में एपस्टीन खुद को असरदार पावर ब्रोकर के रूप में पेश करता दिखा। मार्च 2017 में अनिल अंबानी ने एपस्टीन से पूर्व सीआईए डायरेक्टर डेविड पेट्रेयस के भारत में अमेरिकी राजदूत बनने की संभावना पूछी थी।

एपस्टीन ने जवाब दिया था- वे प्राथमिकता में नहीं हैं। बाद में केनेथ जस्टर राजदूत बने। जुलाई 2017 में एपस्टीन ने यह ‘इनसाइड’ जानकारी भी दी कि जॉन बोल्टन नए सुरक्षा सलाहकार (NSA) होंगे। हालांकि, तब ट्रम्प ने मौजूदा NSA मैकमास्टर का बचाव किया था।

हालांकि, 8 महीने बाद एपस्टीन की बात सच साबित हुई और बोल्टन ने ही पद संभाला। एपस्टीन ने अनिल अंबानी को ट्रम्प के बेहद करीबी लोगों, जैसे स्टीफन बैनन और थॉमस बैरक जूनियर से मिलवाने का प्रस्ताव दिया था। बैरक उस वक्त ट्रम्प की इनॉगरेशन कमेटी के अध्यक्ष थे।

एपस्टीन ने दिग्गजों को यह भरोसा दिलाया कि अंबानी से जुड़ना उनके लिए फायदेमंद होगा। वहीं, अनिल अंबानी ने खुद को भारत में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बताते हुए मैसेज लिखा कि ‘लीडरशिप’ चाहती है कि एपस्टीन उनकी मुलाकात जेरेड कुश्नर और बैनन से कराने में मदद करे।

अनिल अंबानी की अमेरिकी डिफेंस पॉलिसी में दिलचस्पी की वजह यह भी बताई गई है कि 2016 में उन्हें राफेल के पार्ट्स से जुड़ी डील मिली थी। उस वक्त आलोचकों ने भारत सरकार पर अंबानी को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए थे, जिन्हें सरकार ने खारिज किया था।

अंबानी ने लिखा था कि भारत के लिए अमेरिकी राजदूत का चयन उनके लिए बेहद ‘अहम’ है। वे चाहते थे कि पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से निपटने के लिए इस पद पर कोई ‘मजबूत’ व्यक्ति आए।

रिपोर्ट के मुताबिक संदेशों से स्पष्ट है कि अनिल अंबानी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पैठ मजबूत करना चाहते थे। उन्होंने खुद को अटलांटिक काउंसिल के एडवाइजरी बोर्ड में ‘इकलौते भारतीय’ के रूप में पेश किया।

वहीं, एपस्टीन ने उन्हें कार्नेगी एंडोमेंट के विलियम जे. बर्न्स और थॉमस जे. प्रिट्जकर जैसे प्रभावशाली वैश्विक दिग्गजों से मिलवाने का वादा किया। एपस्टीन ने अंबानी को अपने घर डिनर पर बुलाकर बड़े राजनेताओं से नेटवर्किंग का मौका भी दिया।

2019 में जब अनिल अंबानी की कंपनियों पर आर्थिक संकट गहराया और उन्हें कर्ज चुकाने के लिए भाई मुकेश अंबानी की मदद लेनी पड़ी, तब एपस्टीन उन्हें मानसिक रूप से मजबूत रहने की सलाह दे रहा था।

हालांकि एपस्टीन ने संदेशों में लिखा कि उसे पैसे की जरूरत नहीं है, लेकिन एक ईमेल में ‘ट्रांजैक्शन डन’ का जिक्र मिला। रिपोर्ट के अनुसार, 23 मई 2019 को भारत में चुनावी नतीजों के दिन अनिल अंबानी न्यूयॉर्क में एपस्टीन के घर गए थे। इसके कुछ ही हफ्तों बाद एपस्टीन को नाबालिगों की यौन तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।

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