Wednesday, 24 Jun 2026 | 12:35 PM

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Chhattisgarh Naxal Paparao Confesses Karma-Mandavi Murder Case

Chhattisgarh Naxal Paparao Confesses Karma-Mandavi Murder Case

सरेंडर्ड नक्सली लीडर पापाराव ने दैनिक भास्कर की टीम से खास बातचीत की। बस्तर में नक्सल आतंक का चेहरा रहा पापाराव अब सरेंडर कर चुका है। सरेंडर के बाद दैनिक भास्कर से बातचीत में उसने माना कि रास्ता गलत था। पापाराव ने कहा कि, जिन परिवारों ने अपनों को खोया, उनसे माफी मांगना चाहता हूं। . पापाराव का जन्म सुकमा जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। 17-18 साल की उम्र में नक्सलियों की नजर उस पर पड़ी। एक दिन कुख्यात नक्सली लीडर रमन्ना उसे अपने साथ जंगलों में ले गया। पापाराव करीब 30-31 साल तक नक्सल संगठन से जुड़ा रहा। पार्टी सदस्य से लेकर DKSZCM कैडर तक पहुंचा। पश्चिम बस्तर डिवीजन का इंचार्ज रहा। उस पर 25 लाख रुपए का इनाम घोषित था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 100 से ज्यादा जवानों की शहादत से पापाराव का नाम जुड़ा है। अंबेली और तर्रेम IED ब्लास्ट, टेकलगुडेम और ताड़मेटला जैसी बड़ी वारदातों में पापाराव की भूमिका बताई जाती है। दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान पापाराव ने महेंद्र कर्मा और भीमा मंडावी की हत्या से जुड़े कई खुलासे भी किए। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… बातचीत के दौरान पापाराव ने महेंद्र कर्मा और भीमा मंडावी की हत्या के पीछे की कहानी भी बताई। सवाल- 17-18 साल की उम्र में बंदूक तक कैसे पहुंचे? मजबूरी थी या विचारधारा? जवाब – मेरा घर का सुनम चंद्रय्या है। 5वीं क्लास तक पढ़ा हूं। मैं करीब 17-18 साल का था तब हम पर सरकार का दबाव था। उस समय छत्तीसगढ़ अलग नहीं हुआ था। हम मध्य प्रदेश का हिस्सा थे। तब कांग्रेस की सरकार थी। हमें गांव में मारते पीटते थे। सरकारी काम करवाना, पौधे लगवाना, ठेकेदार जबरदस्ती काम करवाते थे। इसी वजह से दिसंबर 1995 में मुझे नक्सल लीडर रमन्ना ने पार्टी में भर्ती करवाया। फिर उसी ने मेरा नाम पापाराव रखा था। यहीं से मैं चंद्रय्या से पापाराव बना। पार्टी सदस्य से लेकर ACM, DVCM और DKSZCM कैडर तक पहुंचा। करीब 30-31 सालों तक नक्सल संगठन के साथ जुड़कर काम किया। पश्चिम बस्तर डिवीजन का इंचार्ज था। सवाल- नक्सल संगठन में नसबंदी का नियम था, फिर आपके 3 बच्चे कैसे? क्या ये दोहरी नीति नहीं? जवाब- मेरी 2 शादी हुई थी। पहली शादी तब हुई जब मैं गांव में था। नक्सल संगठन में नहीं जुड़ा था। हां ये सच है कि मेरे 3 बच्चे हैं। लेकिन ये तब हुए जब मैं संगठन के साथ नहीं जुड़ा था। जब संगठन के साथ जुड़ा तो बाद में पत्नी को भी साथ ले आया। 2007 में जगरगुंडा में हुई एक मुठभेड़ में वो मारी गई। फिर साल 2009 में मैंने संगठन में ही एक महिला नक्सली उर्मिला से शादी की थी। तब मैंने नसबंदी करवाई थी। उर्मिला भी साल 2025 में एक मुठभेड़ में मारी गई। नक्सल संगठन में सब के लिए एक जैसा ही नियम है। लेकिन CCM, पोलित ब्यूरो के कितने बच्चे हैं, वो नसबंदी करवाए हैं या नहीं ये मैं नहीं जानता। सवाल- 2005 में सलवा जुडूम का दौर चला था। आप लोगों ने एक बार भी नहीं सोचा और अपने ही लोगों का पूरा गांव खाली करवा दिया, ऐसा क्यों? जवाब- 2005 में जुडूम शुरू हुआ। नक्सल संगठन ने, हमने कोई गांव खाली नहीं करवाया था। सरकार और पुलिस ने पूरा गांव जला दिया था। गांव वालों को काफी नुकसान हुआ था। कुछ लोग पार्टी के विरोध में रहते थे, ऐसे लोगों को पार्टी के निर्णय के बाद गांव से बाहर निकाला था। सवाल- IED ब्लास्ट करना, कैंप पर या फिर ऑपरेशन पर निकले जवानों पर हमला करने की प्लानिंग आप लोग कैसे बनाते थे? जवाब- हम पहले रेकी करवाकर ये देखते थे कि कैंप मजबूत है या फिर कच्चा है। जिसके बाद अटैक का प्लान बनाते थे। IED लगाने से पहले फोर्स का मूवमेंट देखते थे, कहां से फोर्स आ-जा रही है। फिर IED लगाकर रखते थे। पुलिस आने वाली है इसकी जानकारी जनता देती थी। कमांडर स्तर के नक्सलियों के पास ही ज्यादा जानकारी होती थी। पूरा मैप होता था। सवाल- पुलिस मानती है कि ताड़मेटला (76), टेकलगुडेम (21), अंबेली (9) और झीरम हमलों के आप जिम्मेदार हैं, इन्हें कैसे अंजाम दिया? जवाब- ताड़मेटला की घटना में मैं नहीं था। पार्टी के किसी काम के सिलसिले में मैं माड़ डिवीजन गया हुआ था। टेकलगुडेम मुठभेड़ में भी मैं शामिल नहीं था। मैं पश्चिम बस्तर का इंचार्ज था। वो वारदात दक्षिण बस्तर डिवीजन में हुई थी। मैं तर्रेम और अंबेली IED ब्लास्ट की घटना में था। तर्रेम में 16 और अंबेली में 9 जवान शहीद हुए थे। पुलिस ने माड़ अभियान चलाया था। लौट रहे थे। हमने प्लानिंग की, प्लानिंग का काम कमांडर लोगों का होता है। बाकी अन्य सभी घटनाओं में मेरा सीधे तौर पर कोई हाथ नहीं था। मैं झीरम हमले में भी नहीं था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 100 से ज्यादा जवानों की शहादत के पीछे इसका नाम जुड़ा है। सवाल- नक्सलियों के पास भारी हथियार और विदेशी गन कैसे पहुंचती थीं? सप्लाई कौन करता था? जवाब- AK-47, SLR जैसे ये सारे हथियार पुलिस जवानों से ही लूटे हुए हैं। हम पुलिस पर हमला करते थे फिर उन्हीं का हथियार लेकर आते थे। ताड़मेटला की घटना के बाद वहां से 76 हथियार लेकर आए। मुरकीनार, रानी बोदली, गीदम पुलिस थाना में हमला कर वहां से हथियार लूटे थे। विदेशी हथियार कहां से आया इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। यह जानकारी सिर्फ केंद्रीय कमेटी के सदस्यों को होती थी। सवाल- सरेंडर से पहले नक्सली संगठन आर्थिक रूप से कितना मजबूत था? करोड़ों कैश और गोल्ड कहां से आते थे? जवाब – नक्सली संगठन आर्थिक रूप से काफी कमजोर था। खाने पीने का सामान आम जनता से लेते थे, कपड़े तक आम जनता हमें देती थी। पश्चिम बस्तर डिवीजन के पास 1 करोड़ से ज्यादा थे। जब मैं सरेंडर के लिए आया तो अपने साथ 10 लाख रुपए लेकर आया था। बाद में पुलिस को ठिकाना बताकर और पैसे की जानकारी दी। यह डंप हम जंगल में एक डिब्बे में डालकर जमीन में दबाकर रखते थे। जिसे अब पुलिस ने बरामद कर लिया है। सवाल- आप लोगों ने बस्तर की धरती में और कितनी IED कहां-कहां पर दबा

UP Lawyer Murder Video; Mirzapur Advocate Rajiv Singh Attack CCTV Footage

UP Lawyer Murder Video; Mirzapur Advocate Rajiv Singh Attack CCTV Footage

नितिन कुमार अवस्थी। मिर्जापुर6 मिनट पहले कॉपी लिंक वारदात CCTV में कैद हो गई। इसमें हमलावर वकील को गोली मारकर भागते हुए दिखाई दे रहा है। मिर्जापुर में शनिवार सुबह 7.15 बजे मॉर्निंग वॉक पर निकले सीनियर वकील की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दो हमलावर बाइक से आए। उन्हें रास्ते में रोका और सीने में तमंचा सटाकर गोली मार दी। खून से लथपथ वकील जमीन पर गिर पड़े। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पूरी वारदात CCTV में रिकॉर्ड हो गई। वकील का नाम राजीव सिंह (45) है। उनकी पत्नी ग्राम प्रधान हैं। वारदात के बाद भागते वक्त हमलावरों की बाइक बंद हो गई। लोग उन्हें पकड़ने दौड़े तो उन्होंने तमंचा तान दिया। डरकर लोग पीछे हट गए। घटना जिला मुख्यालय से 2 किलोमीटर दूर कटरा कोतवाली क्षेत्र के कतवारु का पुरा मोहल्ले की है। एसपी अपर्णा रजत कौशिक ने बताया- चुनावी रंजिश में हत्या की बात सामने आई है। मृतक राजीव सिंह की पत्नी ग्राम प्रधान हैं। हमलावर की पहचान हो गई है। वह भी वकील के गांव में प्रधानी का चुनाव लड़ चुका है। 7 महीने पहले भी हमलावर ने वकील से मारपीट की थी। गिरफ्तारी के लिए टीमें बनाई गई हैं। 5 तस्वीरों में देखिए वारदात सफेद पैंट शर्ट पहने हमलावर ने बाइक से उतरकर वकील को रोका। उनके करीब गया और सीने पर तमंचा सटाकर गोली मार दी। गोली मारने के बाद हमलावर भागकर बाइक के पास पहुंचता है। तमंचे को छिपाने की कोशिश करता है। भागते वक्त बाइक स्टार्ट नहीं होती। हमलावर का साथी करीब एक मिनट तक बाइक स्टार्ट करने की कोशिश करता है। हमलावर साथी को पीछे बैठने की बोलता है और खुद बाइक स्टार्ट करता है।इसके बाद मौके से फरार हो जाता है। आसपास के लोग हमलावरों को पकड़ने दौड़ते हैं तो पीछे बैठा साथी उन पर तमंचा तान देता है। लोग जान बचाने के लिए पीछे हट जाते हैं। CCTV में क्या दिख रहा, जानिए एक मिनट के CCTV में दिख रहा है कि हमलावर बाइक से थे। नीली शर्ट पहने आरोपी बाइक चला रहा था। सफेद पैंट शर्ट के साथ गले में गमछा लटकाए हमलावर पीछे बैठा था। वकील को देखकर हमलावर हाथ में तमंचा लेकर उतरता है। रोककर फायर कर देता है। वारदात के बाद हमलावर और उसके साथी ने भागने की कोशिश की, लेकिन बाइक स्टार्ट नहीं हुई। बाइक चला रहे साथी आरोपी ने 15-16 बार किक मारी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। हमलावर ने उसे पीछे किया और खुद बाइक स्टार्ट करने लगा। लोग हमलावरों को पकड़ने दौड़े तो उन्हें तमंचा दिखाकर धमकाया। हमलावर ने किक मारकर बाइक स्टार्ट की। फिर मौके से दोनों फरार हो गए। तस्वीर सीनियर वकील राजीव सिंह की है। वह मिर्जापुर कोर्ट में प्रैक्टिस करते थे। वकील की पत्नी गांव में प्रधान, परिवार शहर में रहता है मूलरूप से विंध्याचल थाना के देवरी गांव के रहने वाले राजीव सिंह उर्फ रिंकू कटरा कोतवाली में रहते थे। 2011 में यहां जमीन खरीदकर मकान बनवाया था। बच्चों की पढ़ाई की वजह से यहीं रहते थे। यहीं से कोर्ट आते-जाते थे। गांव में पत्नी प्रतिभा सिंह (40) प्रधान हैं। इस वजह से गांव भी आना जाना लगा रहता था। उनके 2 बेटे ओम (18) और सार्थक (12) हैं। एसपी अपर्णा रजत ने बताया- राजीव सुबह घर से मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे। घर से कुछ ही दूरी पर पहुंचे थे, तभी बाइक सवार बदमाश हत्या करके फरार हो गए। आसपास के लोग घायल वकील को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है। आरोपी भी प्रधानी का चुनाव लड़ चुका है एसएसपी ने बताया- मुख्य आरोपी की पहचान हो गई है। मुख्य आरोपी राजेंद्र सोनकर भी वकील के गांव देवरी का रहने वाला है। प्रधानी का चुनाव लड़ चुका है। उसकी राजीव सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह से चुनावी रंजिश चल रही थी। हालांकि, दूसरे आरोपी की अब तक पहचान नहीं हो सकी है। वारदात के बाद पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर लोगों की भीड़ जुट गई। पुलिस ने वकील के पड़ोसियों से घटना की जानकारी ली। रेकी करके आरोपी ने वारदात की पुलिस के मुताबिक, राजेंद्र सोनकर भी कतवारू का पुरा यानी वकील के घर के पास किराए में रहता है। उसे पहले से पता था कि राजीव मॉर्निंग वॉक के लिए हर दिन कितने बजे घर से निकलते हैं। पूरी साजिश रचकर उसने वारदात की। 7 महीने पहले भी वकील पर ताना था तमंचा पड़ोसियों ने बताया- राजेंद्र सोनकर ने करीब 7 महीने पहले भी राजीव सिंह पर बीच रास्ते रोककर हमला किया था। उसने बाइक की डिग्गी से तमंचा निकालकर राजीव सिंह पर तान दिया था और मारपीट की थी। राजीव सिंह ने इस मामले में कटरा कोतवाली में तहरीर भी दी थी, पर पुलिस की ओर से समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई। ———————— दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

manipur violence kuki ukhrul bsf jawan murder

manipur violence kuki ukhrul bsf jawan murder

इंफाल41 मिनट पहले कॉपी लिंक मणिपुर के उखरुल जिले में 7 फरवरी को दो समुदायों के बीच हुए झगड़े के बाद से हिंसा जारी है। मणिपुर के उखरुल जिले में शुक्रवार को पेट्रोलिंग ड्यूटी पर तैनात बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के एक कांस्टेबल की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अधिकारियों के मुताबिक कांस्टेबल मिथुन मंडल को शाम करीब 4:30 बजे गोली लगी। गोली लगने के बाद उन्हें तुरंत इंफाल के अस्पताल ले जाया गया, जहां शाम करीब 6 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। अधिकारियों ने बताया कि मिथुन मंडल पश्चिम बंगाल के भगजन टोला गांव के रहने वाले थे और 170 बटालियन BSF में तैनात थे। फरवरी में दो समुदायों के बीच हुई जातीय झड़पों के बाद कुकी गांव मोंगकोट चेपू और पड़ोसी तांगखुल नागा इलाके में गोलीबारी की घटनाएं होती रही हैं। यहां जारी तनाव के बीच पेट्रोलिंग कर रहे BSF जवान पर यह हमला हुआ है। मणिपुर पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि हमले के पीछे शामिल लोगों को पकड़ने के लिए सुरक्षा बल इलाके में सर्च ऑपरेशन और तलाशी अभियान चला रहे हैं। फिलहाल हमलावरों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। शहीद BSF जवान मिथुन मंडल। CM खेमचंद ने हत्या पर दुख जताया मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने कहा- कांस्टेबल मिथुन मंडल की दुखद शहादत की कड़ी निंदा करता हूं। पश्चिम बंगाल के इस बहादुर बेटे के ड्यूटी के दौरान दिए गए बलिदान को कभी नहीं भुलाया जाएगा। शराब के नशे में हुए झगड़े के बाद हिंसा शुरू हुई हिंसा की शुरुआत 7 फरवरी की शाम उखरुल जिले के लितान सरेइखोंग में शराब के नशे में हुए झगड़े से हुई थी, जिसमें तांगखुल नागा समुदाय के स्टर्लिंग नाम के व्यक्ति के साथ मारपीट हुई थी। इसके बाद उपद्रवियों ने उखरुल जिले के लितान सरेइखोंग गांव में 25 घर और चार सरकारी क्वार्टर में आग लगा दी। हिंसा के बाद पूरे जिले में कर्फ्यू लागू कर दिया गया था। 10 फरवरी की सुबह 11:30 बजे से अगले पांच दिनों के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं। तांगखुल और कुकी जनजातियों के बीच हिंसक झड़प के बाद से इलाके में सुरक्षाबल मौजूद हैं। उखरुल जिले में घरों के साथ चार सरकारी क्वार्टर में भी आग लगा दी थी। हिंसा के बाद से इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। कुकी-मैतेई समुदाय के बीच हिंसा की 3 मुख्य कारण 1. ST (अनुसूचित जनजाति) दर्जे की मांग: 14 अप्रैल 2023 को मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मैतेई समुदाय के लिए ST का दर्जा देने पर सिफारिश भेजने का निर्देश दिया था। इस आदेश के बाद कुकी समुदाय में आक्रोश फैला और हिंसा भड़की। कुकी पहले से ST श्रेणी में है। उन्हें डर है कि अगर मैतेई को भी ST का दर्जा मिला, तो वे पहाड़ी इलाकों में जमीन खरीद सकेंगे और इससे उनका सांस्कृतिक, सामाजिक और भौगोलिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। मणिपुर के इंफाल घाटी में लगभग 10% भूमि क्षेत्र है, जहां मैतेई बहुसंख्यक रहते हैं। बाकी 90% पहाड़ी इलाका कुकी और नगा समुदायों का है। यह क्षेत्र आदिवासी जमीन (Tribal Lands) के अंतर्गत आता है और मैतेई यहां जमीन नहीं खरीद सकते। 2. अलग कुकी प्रशासन की मांग: कुकी समुदाय ‘कुकीलैंड’ या ‘जूमलैंड’ नाम से अलग प्रशासनिक स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं । मैतेई समुदाय और राज्य सरकार इस मांग को राज्य की अखंडता के लिए खतरा मानती है। 3. कुकी पर ड्रग्स तस्करी का आरोप: कुकी समुदाय पर म्यांमार से ड्रग्स की तस्करी का आरोप लगता रहा है। सरकार ने भी कुकी पर अवैध अफीम की खेती की तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाया, जिससे सरकार के प्रति उनका अविश्वास और बढ़ गया। कुकी का मानना है कि उनके समुदाय को बदनाम करने के लिए ऐसे आरोप लगाए जाते हैं। कुकी समुदाय का आरोप है कि मणिपुर सरकार (पूर्व भाजपा सरकार) मैतेई का पक्ष लेती है। वे सुरक्षाबलों और पुलिस पर भी एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हैं। ——————————— मणिपुर हिंसा से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… बम हमले में 2 बच्चों की मौत के बाद हिंसा, प्रदर्शनकारियों का CRPF कैंप पर हमला, जवाबी फायरिंग में 2 की जान गई मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में मोइरांग ट्रोंगलाओबी इलाके में सोमवार देर रात उग्रवादियों ने एक घर में बम फेंक दिया। जिसमें 5 साल के एक लड़के और छह महीने की बच्ची की मौत हो गई। पुलिस ऑफिसर ने बताया कि जब घर में बम फटा, तब बच्चे अपनी मां के साथ बेडरूम में सो रहे थे। मां घायल है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Murena Forest Guard Murder | Tractor Attack; Supreme Court Takes Suo Motu Cognizance

Murena Forest Guard Murder | Tractor Attack; Supreme Court Takes Suo Motu Cognizance

वन रक्षक हरकेश गुर्जर की हत्या करने वाला ट्रैक्टर ड्राइवर विनोद कोरी अभी भी फरार है। मुरैना के अंबाह गेम रेंज में रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने की कोशिश कर रहे वन रक्षक हरकेश गुर्जर (33) की बुधवार सुबह कुचलकर हत्या कर दी गई। चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन रोकने गई वन विभाग की टीम पर हुए इस हमले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान . मृतक के साले गौरव गुर्जर ने बताया कि मेरी आंखों के सामने जीजा के सिर के चीथड़े उड़ गए। उन्होंने तड़प-तड़पकर दम तोड़ा। मैं कुछ नहीं कर सका। मेरी बहन मेरी आंखों के सामने विधवा हो गई। छोटे भांजे-भांजी के सिर से पिता का साया उठ गया। वहीं हरकेश गुर्जर के सहकर्मी और वारदात के प्रत्यक्षदर्शी संदीप गुर्जर ने बताया कि हम रोज की तरह पेट्रोलिंग पर थे। रानपुर तिराहे से ट्रैक्टर आता दिखा तो रेंज ऑफिसर ने उसे रुकवाने को कहा। हरकेश टीम में सबसे फुर्तीला था। वह तेजी से गाड़ी से उतरा और डंडा दिखाते हुए ट्रैक्टर को रोकना चाहा। हम सब गाड़ी से उतर पाते, इसके पहले ही ट्रैक्टर ड्राइवर विनोद कोरी ने हरकेश को टक्कर मार दी। हरकेश के सड़क पर गिरते ही ‘ये ले’ कहते हुए सिर से पहिया निकाल दिया। वारदात को रेंज ऑफिसर वीर कुमार तिर्की, वन रक्षक शत्रुघ्न सिंह, अवधेश कुशवाह, विनोद माहौर और हरकेश के साले गौरव के सामने अंजाम दिया गया। आंखों के सामने अपने दोस्त, सहकर्मी को तड़पकर दम तोड़ते देखकर सब दहशत में आ गए। आरोपी विनोद कोरी की तस्वीरें पेट्रोल पंप के सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई हैं। यहां रेत खाली करने के बाद वह भाग निकला। आरोपी ट्रैक्टर ड्राइवर अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर वन रक्षक की हत्या करने के बाद आरोपी विनोद कोरी वारदात स्थल से एक किमी दूर शिवबैकुंठ पेट्रोल पंप पहुंचा। यहां कपड़े बदले और कर्मचारियों से कहा- पुलिस पीछे लगी है। इसके बाद ट्रॉली से रेत खाली कर 4 किमी दूर दिमनी थाने के सामने से निकल गया। फिर माता बसैया इलाके में ट्रैक्टर छोड़कर फरार हो गया। डीएसपी विजय भदौरिया ने बताया कि रात में भी कई ठिकानों पर दबिश दी गई, पर आरोपी गिरफ्त में नहीं आया है। वन रक्षक हरकेश गुर्जर को जिस ट्रैक्टर से कुचला गया, उसके मालिकों में दो लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें से एक का नाम पवन तोमर है, जो बीजेपी का दिमनी मंडल उपाध्यक्ष हैं। दूसरे का नाम सोनू चौहान है, जो बीजेपी युवा मोर्चा में मंडल का मंत्री है। सहकर्मी बोला- सरकार ने डंडा देकर मौत के सामने भेज दिया संदीप ने कहा- सरकार ने हमारे हथियार भी छीन लिए हैं। हमको डंडा देकर मौत के सामने भेज दिया है। सिर्फ डंडे से हत्यारे माफिया का सामना क्या कोई कर सकता है? कार्रवाई करो तो मरो, नहीं करो तो सरकार का ऊपर से डंडा पड़ता है। कल अगर हथियार होता तो मजाल थी कि वह हरकेश पर ट्रैक्टर चढ़ा जाता। वहीं, उसे मार गिराते। अपनी सुरक्षा करने का तो सभी को अधिकार है। हम 5 साल से निहत्थे हैं। डंडा लेकर ड्यूटी कर रहे हैं। हमारी रेंज में 18 घाट हैं, जो दिमनी से भिंड तक हैं। हमारी 12 बोर की 5 राइफल नगरा थाने में जमा हैं। साले ने कहा- मेरी आंखों के सामने जीजा ने दम तोड़ा हरकेश के साले गौरव गुर्जर इस गश्त में उनके साथ थे। गौरव ने बताया कि वारदात के एक दिन पहले मंगलवार को जीजा हरकेश से मिलने अंबाह गेम रेंज कार्यालय पहुंचा था। रात में वहीं रुक गया। बुधवार सुबह जीजा ने बताया कि अवैध रेत पर कार्रवाई करने जाना है। मैंने कहा कि मैं भी मुरैना निकल जाऊंगा। मैं अपनी गाड़ी से जांच दल के पीछे ही चल रहा था। रानपुर तिराहे के पास वीरपुर कुठियाना तरफ से ट्रैक्टर-ट्रॉली आती दिखाई दी। रोकने के निर्देश मिले तो जीजा हरकेश गाड़ी से उतरे और ड्र्र्राइवर को ट्रैक्टर रोकने का इशारा किया। वह नहीं रुका तो उन्होंने अपने पास का डंडा ड्राइवर को दिखाया। ड्राइवर ने गाड़ी पहले धीमी की, फिर तेजी से जीजा को टक्कर मार दी। जनकपुर गांव में परिजन और रिश्तेदारों ने वन रक्षक हरकेश गुर्जर का अंतिम संस्कार किया। ऐसी घटनाओं पर हलफनामा दाखिल करने के निर्देश अवैध रेत परिवहन को रोकने की कोशिश के दौरान वन रक्षक की हत्या के इस मामले का सुप्रीम कोर्ट में तात्कालिक उल्लेख (अर्जेंट मेंशनिंग) किया गया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने स्वत: संज्ञान लिया। यह मामला उस सुओ मोटू याचिका से जुड़ा है, जो क्षेत्र में अवैध रेत खनन पर लगी है, जिसमें एमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) द्वारा आवेदन दायर किया गया था। सुनवाई के दौरान गुरुवार को न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि इस क्षेत्र में कुछ “अत्यंत गंभीर” घटनाएं सामने आई हैं। पीठ ने मामले का उल्लेख करने वाली अधिवक्ता एओआर रूपाली सैमुअल (जो एमिकस में से एक हैं), से कहा कि वे अन्य घटनाओं का विवरण रिकॉर्ड पर लाने के लिए हलफनामा दाखिल करें और मध्य प्रदेश की ओर से पेश होने वाले वकील को अग्रिम सूचना दें। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़, एसपी समीर सौरभ और डीएफओ हरिश्चंद्र बघेल हरकेश के गांव पहुंचे। यहां उनके पिता कलेक्टर से लिपटकर रो पड़े। 2016 में लगी थी नौकरी, 2025 में मुरैना ट्रांसफर हुआ हरकेश के दोस्त प्रताप गुर्जर ने कहा- वह अच्छा एथलीट था। लोकल से लेकर नेशनल तक 800 और 1500 मीटर दौड़ में बढ़िया प्रदर्शन किया था। नेशनल चैंपियन रहा है। कई अवॉर्ड भी जीते। साल 2016 में वन रक्षक के पद पर सिलेक्ट हुआ था। 26 जून 2016 को पन्ना टाइगर रिजर्व में उसे ज्वाइनिंग मिली थी। 7 अगस्त 2025 को उसका ट्रांसफर मुरैना वन विभाग के गेम रेंज सबलगढ़ के घाट वरोठा में हो गया था। बाद में इसमें संशोधन हुआ और उसे गेम रेंज अंबाह के घाट सांकरी भेज दिया गया। हरकेश के परिवार में पिता रामनिवास गुर्जर, पत्नी लवली, 4 साल की बेटी तन्वी और 2 साल का बेटा तन्मय हैं। बड़ा भाई ऋषिकेश गुर्जर दतिया की इंदरगढ़ तहसील में रीडर है। हरकेश गुर्जर की कुछ महीने पहले ही मुरैना के अंबाह में पोस्टिंग हुई थी। 2021 में रायफलें जमा कराईं, तब

MP Couple Murder | Chhatarpur Jungle Rape & Murder Case

MP Couple Murder | Chhatarpur Jungle Rape & Murder Case

मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि छतरपुर के जंगलों में मिले दो कंकाल ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया था। ये कंकाल 14 दिन से लापता साक्षी और मोनू के थे। शुरू में परिजनों को लगा कि दोनों प्यार के चक्कर में साथ भाग गए होंगे, इसलिए ब . 14 दिन बाद जंगल में दोनों के कंकाल मिले। यह दृश्य इतना भयावह था कि गांववालों और परिजनों के होश उड़ गए। करीब 200 मीटर के दायरे में खोपड़ी और हड्डियां बिखरी पड़ी थीं। कपड़े, सैंडल और बैग के आधार पर दोनों की पहचान की गई। घटना स्थल से सल्फास की गोलियों की खाली शीशियां, इस्तेमाल किए गए दो कंडोम मिले। दोनों के मोबाइल और अन्य सामान गायब थे। फॉरेंसिक जांच ने साफ कर दिया कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि लूट, गैंगरेप और हत्या का मामला है। मोबाइल ट्रेस करने पर मिला सुराग जांच के दौरान पुलिस को अहम सुराग मिला। मृतकों में से एक का मोबाइल पास के गांव में ट्रेस हुआ। यह मोबाइल कामता कुशवाहा नाम के व्यक्ति के पास से बरामद किया गया। पूछताछ में उसने बताया कि यह मोबाइल उसे गांव के ही देवेंद्र राय ने दिया था। उसने यह भी स्वीकार किया कि उसने जंगल में शव देखे थे, लेकिन पुलिस को सूचना नहीं दी। शक की सूई फार्महाउस तक पहुंची इसके बाद पुलिस ने देवेंद्र राय, कामता कुशवाहा सहित कई लोगों से सख्ती से पूछताछ की। धीरे-धीरे मामले की परतें खुलने लगीं। देवेंद्र राय करीब 15 साल से राकेश गोस्वामी के फार्महाउस में काम करता था, जो घटना स्थल के पास ही था। आपत्तिजनक हाल में देवेंद्र ने देखा था जब पुलिस ने देवेंद्र और राकेश से अलग-अलग पूछताछ की तो देवेंद्र ने सच्चाई उगल दी। उसने बताया कि जंगल में उसने एक युवक और युवती को आपत्तिजनक हालत में देखा। उसने इसकी सूचना अपने मालिक राकेश को दी। इसके बाद राकेश लाठी और देवेंद्र कुल्हाड़ी लेकर पहुंचे। दोनों चुपचाप उनके करीब गए, जबकि युवक-युवती को इसका आभास तक नहीं था। मौका मिलते ही राकेश ने युवक के सिर पर लाठी से वार किया, जिससे वह बेहोश हो गया। युवती घबराकर उनसे छोड़ देने की गुहार लगाने लगी, लेकिन आरोपियों के इरादे खतरनाक थे। अधमरी हालत में दोनों को पिलाई सल्फास इसके बाद राकेश और देवेंद्र ने सोचा कि अगर युवती जिंदा बच गई तो वह उन्हें पहचान लेगी। इसी डर से उन्होंने उसका गला दबा दिया, जिससे वह भी बेहोश हो गई। दोनों पीड़ित अधमरी हालत में पड़े थे। अब बचने के लिए आरोपियों ने एक और साजिश रची। राकेश ने देवेंद्र को फार्महाउस से सल्फास की गोलियां लाने को कहा। देवेंद्र वहां से दो डिब्बियां और पानी की बोतल लेकर आया। लूटपाट और सबूत मिटाने की कोशिश आरोपियों ने युवक के पर्स से 2500-2600 रुपए निकाल लिए। पहचान छिपाने के लिए दस्तावेज और फोटो अलग कर दिए। बैग में रखे दो मोबाइल में से एक उन्होंने अपने पास रख लिया। घटना के कुछ दिन बाद ये सामान फार्महाउस में छिपा दिया गया। दोनों आरोपियों को दोहरी उम्रकैद की सजा मिली पुलिस ने राकेश गोस्वामी और उसके ड्राइवर देवेंद्र राय को रेप और हत्या का आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सहित सभी सबूत कोर्ट में पेश किए गए। 30 दिसंबर 2023 को छतरपुर जिला कोर्ट ने दोनों को दोषी करार देते हुए हत्या और रेप के मामले में दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई। ………………. पढ़ें पार्ट वन छात्रा से जंगल में गैंगरेप फिर हत्या: बॉयफ्रेंड के साथ 14 दिन से थी लापता मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज कहानी छतरपुर के एक ऐसे केस की, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया था। कहते हैं, हर प्रेम कहानी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंचती-कुछ रास्ते में ही दम तोड़ देती हैं और पीछे छोड़ जाती हैं ऐसा सच, जिसे सुनकर रूह कांप उठे। पढ़ें पूरी खबर

Amit Jogi Gets Life Sentence in Jaggi Murder Case

Amit Jogi Gets Life Sentence in Jaggi Murder Case

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में शामिल होने का आरोप हो, तो किसी एक आरोपी के साथ जानबूझकर अलग व . अदालत ने यह भी कहा कि जब सभी आरोपियों के खिलाफ एक जैसे सबूत हों, तो किसी एक को बरी कर देना और बाकी को उन्हीं सबूतों के आधार पर दोषी ठहराना सही नहीं है, जब तक कि उसे छोड़ने का कोई ठोस और अलग कारण साबित न हो। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविन्द वर्मा की स्पेशल डिविजनल बेंच ने फैसला सुनाया है। अमित जोगी को IPC की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 1000 रुपए जुर्माने की सजा दी गई। जुर्माना न देने पर 6 महीने अतिरिक्त सजा होगी। अमित की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अमित जोगी की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। जोगी ने आरोप लगाया है कि CBI चार्जशीट के 11 हजार पन्ने पढ़ने के लिए उन्हें सिर्फ 24 घंटे दिए गए और बिना पर्याप्त सुनवाई का मौका दिए उन्हें दोषी ठहराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने बिना ठोस आधार के CBI की अपील स्वीकार कर ली। जग्गी हत्याकांड के बारे में जानिए 4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी। हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया। हाईकोर्ट का आदेश। हत्याकांड के दोषियों की अपील खारिज डिवीजन बेंच ने 2 साल पहले रामावतार जग्गी हत्याकांड के दोषियों की अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें डिवीजन बेंच ने आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामला फिर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया था, जिससे मामले पर विस्तार से सुनवाई हो सके। हत्याकांड के बाद पुलिस की शुरूआती जांच में पक्षपात और असंतोष के आरोप लगने पर राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंपी थी, तब CBI ने अपनी जांच में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे। सतीश जग्गी का आरोप- तत्कालीन राज्य सरकार की प्रायोजित थी हत्या हाईकोर्ट में अपील पर रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी के अमित जोगी की दोषमुक्ति के खिलाफ पेश क्रिमिनल अपील पर उनके अधिवक्ता बीपी शर्मा ने तर्क दिया था। उन्होंने बताया था कि हत्याकांड की साजिश तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से प्रायोजित थी। जब CBI की जांच शुरू हुई, तब सरकार के प्रभाव में सारे सबूतों को मिटा दिया गया था। ऐसे केस में सबूत अहम नहीं हैं, बल्कि षड्यंत्र का पर्दाफाश जरूरी है। लिहाजा इस केस के आरोपियों को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त नहीं किया जा सकता। जानिए कौन थे रामावतार जग्गी कारोबारी बैकग्राउंड वाले रामावतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे, जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ-साथ गए। विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया था। हत्याकांड में 28 लोग पाए गए दोषी जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए थे। 2 CSP, थाना प्रभारी समेत अन्य को हुई थी सजा इस हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाने वालों में 2 तत्कालीन CSP और एक तत्कालीन थाना प्रभारी के अलावा रायपुर मेयर एजाज ढेबर के भाई याहया ढेबर और शूटर चिमन सिंह शामिल हैं। ………………………. इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… 23 साल पुराना जग्गी मर्डर केस फिर खुला:जोगी बोले- 11000 पन्नों का केस, कॉपी तक नहीं; सतीश बोले- ये एक बेटे की लड़ाई 23 साल पुराना जग्गी मर्डर केस फिर खुला, सीबीआई ने 11000 पन्नों की चार्जशीट सौंपी थी। छत्तीसगढ़ के 23 साल पुराने बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर सुनवाई शुरू हो गई है। 2003 में कांग्रेस नेता रामावतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी, जिसमें कई आरोपियों को दोषी ठहराया गया, जबकि अमित जोगी को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया था। पढ़ें पूरी खबर…

Jaggi Murder Case Reopens | CBI 11000-Page Report, Amit Jogi Charged

Jaggi Murder Case Reopens | CBI 11000-Page Report, Amit Jogi Charged

बिलासपुर10 घंटे पहले कॉपी लिंक जग्गी हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी ठहराया है। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी करार दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। CBI के साक्ष्य को स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया गया है। वहीं फैसले पर अमित जोगी ने कहा कि हाईकोर्ट ने पूरी सुनवाई का मौका दिए बिना उन्हें दोषी ठहरा दिया, जो उनके लिए अप्रत्याशित है। उन्होंने कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है। सुनवाई के दौरान सतीश जग्गी ने कोर्ट को बताया कि उनके पिता की हत्या एक राजनीतिक साजिश के तहत कराई गई थी। CBI ने 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की थी, जिसमें हत्या से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य शामिल हैं। इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए अमित जोगी को सरेंडर करने का आदेश दिया। बता दें कि ट्रायल कोर्ट ने पहले उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी किया था, लेकिन बाद में मामला दोबारा खोला गया। विद्याचरण शुक्ल ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बनाया था। (फाइल इमेज) जग्गी हत्याकांड के बारे में जानिए 4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी। हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया। हत्याकांड के दोषियों की अपील खारिज डिवीजन बेंच ने 2 साल पहले रामावतार जग्गी हत्याकांड के दोषियों की अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें डिवीजन बेंच ने आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामला फिर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया था, जिससे मामले पर विस्तार से सुनवाई हो सके। हत्याकांड के बाद पुलिस की शुरूआती जांच में पक्षपात और असंतोष के आरोप लगने पर राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंपी थी, तब CBI ने अपनी जांच में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे। सतीश जग्गी का आरोप- तत्कालीन राज्य सरकार की प्रायोजित थी हत्या हाईकोर्ट में अपील पर रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी के अमित जोगी की दोषमुक्ति के खिलाफ पेश क्रिमिनल अपील पर उनके अधिवक्ता बीपी शर्मा ने तर्क दिया था। उन्होंने बताया था कि हत्याकांड की साजिश तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से प्रायोजित थी। जब CBI की जांच शुरू हुई, तब सरकार के प्रभाव में सारे सबूतों को मिटा दिया गया था। ऐसे केस में सबूत अहम नहीं हैं, बल्कि षड्यंत्र का पर्दाफाश जरूरी है। लिहाजा इस केस के आरोपियों को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त नहीं किया जा सकता। जानिए कौन थे रामावतार जग्गी कारोबारी बैकग्राउंड वाले रामावतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे, जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ-साथ गए। विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया था। हत्याकांड में 28 लोग पाए गए दोषी जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए थे। 2 CSP, थाना प्रभारी समेत अन्य को हुई थी सजा इस हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाने वालों में 2 तत्कालीन CSP और एक तत्कालीन थाना प्रभारी के अलावा रायपुर मेयर एजाज ढेबर के भाई याहया ढेबर और शूटर चिमन सिंह शामिल हैं। ………………………. इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… 23 साल पुराना जग्गी मर्डर केस फिर खुला:जोगी बोले- 11000 पन्नों का केस, कॉपी तक नहीं; सतीश बोले- ये एक बेटे की लड़ाई 23 साल पुराना जग्गी मर्डर केस फिर खुला, सीबीआई ने 11000 पन्नों की चार्जशीट सौंपी थी। छत्तीसगढ़ के 23 साल पुराने बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर सुनवाई शुरू हो गई है। 2003 में कांग्रेस नेता रामावतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी, जिसमें कई आरोपियों को दोषी ठहराया गया, जबकि अमित जोगी को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया था। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

जमीनी विवाद में दो पक्षों में मारपीट, एक की मौत:पांच लोग घायल, मामा-बुआ के परिवार आपस में भीड़े, एक दूसरे पर लाठी-डंडे पत्थर से हमला

जमीनी विवाद में दो पक्षों में मारपीट, एक की मौत:पांच लोग घायल, मामा-बुआ के परिवार आपस में भीड़े, एक दूसरे पर लाठी-डंडे पत्थर से हमला

हरदा जिले के सिराली थाना क्षेत्र के दीपगांव कला में बुधवार सुबह जमीनी विवाद में 65 वर्षीय व्यक्ति की हत्या कर दी गई। इस घटना में दोनों पक्षों के कुल छह लोग घायल हुए हैं। मृतक की पहचान दीपगांव निवासी अमरसिंह कलम (65) के रूप में हुई है। घायलों में अमरसिंह के भाई सूरत सिंह, रामभरोस, आनंद सिंह, हरिसिंह, सतीश राजपूत और दूसरे पक्ष से नारायण राजपूत शामिल हैं। सभी घायलों को उपचार के लिए सिराली के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। इनमें से तीन गंभीर घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया है। मामा-बुआ के परिवार आपस में भीड़े यह विवाद दो एकड़ जमीन पर कब्जे को लेकर मामा और बुआ के परिवारों के बीच हुआ बताया जा रहा है। एएसपी अमित कुमार मिश्रा ने बताया कि ग्राम दीपगांव में दो पक्षों के बीच विवाद की सूचना मिली थी। पुलिस मौके पर पहुंचकर विवाद के कारणों की जांच कर रही है।

इजराइल में फिलिस्तीनी अपराधियों को 90 दिन में फांसी:अपील करने का अधिकार खत्म, मंत्रियों ने संसद में शैंपेन खोल जश्न मनाया

इजराइल में फिलिस्तीनी अपराधियों को 90 दिन में फांसी:अपील करने का अधिकार खत्म, मंत्रियों ने संसद में शैंपेन खोल जश्न मनाया

इजराइल की संसद (नैसेट) ने सोमवार को फिलिस्तीनी अपराधियों को सजा देने वाला बिल पास कर दिया है। इसके तहत वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनियों को इजराइली नागरिकों की हत्या करने या आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने पर सीधे मौत की सजा दी जा सकेगी। इसमें अपील का भी कोई अधिकार नहीं होगा। सजा सुनाए जाने के 90 दिनों के अंदर फांसी दी जाएगी। यह कानून राष्ट्रवादी या आतंकवादी इरादे से की गई हत्याओं पर लागू होगा। हालांकि, अदालत को विशेष कारणों के तहत उम्रकैद की सजा देने का भी अधिकार होगा। यह बिल राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इत्तमार बेन ग्विर ने आगे बढ़ाया था। बिल पास होने के बाद बेन ग्विर और दूसरे सांसदों ने संसद में ही शैंपेन की बोतल खोलकर जश्न मनाया। उन्होंने कहा, “आज इजराइल खेल के नियम बदल रहा है, जो यहूदियों की हत्या करेगा, वह सांस नहीं ले सकेगा।” बेन ग्विर ने पहले धमकी दी थी कि अगर बिल पर वोट नहीं कराया गया तो उनकी पार्टी सरकार से समर्थन वापस ले लेगी। इजराइल में फिलिस्तीनियों और इजराइली यहूदियों के लिए अलग कानून इस बिल की मांग इजराइल के चरमपंथी दक्षिणपंथी गुट लंबे समय से करते आ रहे थे। वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों पर मिलिट्री कानून लागू होता है। इस बिल के जरिए मिलिट्री कोर्ट के नियमों में बदलाव कर दिया गया है, जिससे अब जज बिना सर्वसम्मति के भी मौत की सजा सुना सकेंगे। दूसरी ओर, इजराइली यहूदी बस्ती निवासी जो वेस्ट बैंक में रहते हैं, उनपर इजराइली सिविलियन कानून लागू होता है। इसका मतलब है कि उनका मुकदमा सामान्य इजराइली नागरिक अदालतों में चलता है। इसका नतीजा यह है कि एक ही इलाके में दो लोग एक ही तरह का अपराध करें, तो उन्हें अलग-अलग सजा दी जाएगी। इससे फिलिस्तीनियों के लिए मौत की सजा की आशंका बढ़ जाएगी। इजराइली संगठनों ने बिल को भेदभाव वाला बताया मानवाधिकार संगठनों ने इसे नस्लीय भेदभावपूर्ण और बदला लेने वाली नीति बताया है। इस बिल का विरोध करते हुए इजराइल के मानवाधिकार और नागरिक समाज संगठनों ने कहा कि यह कानून फिलिस्तीनियों के खिलाफ नस्लीय हिंसा को बढ़ावा देंगे। संगठनों ने इसे फिलिस्तीनियों को निशाना बनाने वाला और इजराइलियों को छूट देने वाला बताया। विपक्षी नेता यायर लापिद ने बिल की आलोचना करते हुए इसे हमास के सामने समर्पण बताया। उन्होंने कहा, “हम हमास जैसे नहीं हैं, हम हमास के बिल्कुल उलट हैं।” बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर बिल पास होने के तुरंत बाद इस बिल के खिलाफ इजराइल के सिविल राइट्स संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। साथ ही इसे असंवैधानिक बताते हुए खारिज करने की मांग की है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले इस बिल का विरोध किया था, लेकिन गाजा सीजफायर लागू होने के बाद उन्होंने अपना रुख बदल लिया और अंतिम वोट में इसका समर्थन किया। इजराइल में अब तक सिर्फ दो बार ही मौत की सजा दी गई इजराइल के पूरे इतिहास में केवल दो बार ही मौत की सजा दी गई। पहला मामला 1948 के अरब-इजराइली युद्ध के दौरान का है। इजराइली सेना के कैप्टन मेयर टोबियान्स्की को जासूसी के आरोप में एक सैन्य अदालत में दोषी ठहराया गया और उसी दिन फायरिंग स्क्वाड से गोली मारकर सजा दी गई। बाद में जांच में पता चला कि वे निर्दोष थे। 1950 के दशक में उन्हें मरणोपरांत बरी कर दिया गया और पूरे सैन्य सम्मान के साथ फिर से दफनाया गया। दूसरा मामला 1962 का है, जब होलोकॉस्ट के प्रमुख वास्तुकार एडोल्फ आइचमैन को फांसी दी गई। 1960 में आइचमैन को इजराइली खुफिया एजेंटों ने अर्जेंटीना से पकड़ा था। यरुशलम में लंबे सार्वजनिक मुकदमे के बाद उन्हें नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी पाया गया। इजराइल की सर्वोच्च अदालत ने अपील खारिज कर दी और 31 मई 1962 की रात को उन्हें यरुशलम की जेल में फांसी दी गई। इसके बाद इजराइल में मौत की सजा लगभग पूरी तरह से बंद रही। जर्मनी, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन ने बिल पर चिंता जताई इस बिल को लेकर जर्मनी, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि यह कानून इजराइल के लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र पहले ही वेस्ट बैंक के सैन्य अदालतों की आलोचना कर चुका है। उन्होंने कहा कि यह फिलिस्तीनियों के लिए सही जांच प्रक्रिया और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकारों का उल्लंघन है। यह कानून 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले में शामिल आतंकियों पर लागू नहीं होगा, इसके लिए सरकार एक अलग ट्रिब्यूनल बनाने का प्रस्ताव कर रही है। —————————- ये खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट-अमेरिका की ईरान में घुसकर यूरेनियम जब्त करने की तैयारी: ट्रम्प 10 हजार एक्स्ट्रा सैनिक भेज रहे, अप्रैल तक जंग खत्म करना मकसद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के खिलाफ जमीनी कार्रवाई करने का आदेश दे सकते हैं। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ईरान के पास मौजूद यूरेनियम को अपने कब्जे में लेना चाहते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

Singapore Court Rules Accident, Not Murder

Singapore Court Rules Accident, Not Murder

2 घंटे पहले कॉपी लिंक 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में जुबीन गर्ग की मौत हो गई थी। सिंगापुर की एक अदालत ने असम के फेमस सिंगर जुबीन गर्ग की मौत पर फैसला सुनाया है। बुधवार को वहां की स्टेट कोरोनर कोर्ट ने पुलिस की जांच रिपोर्ट को सही ठहराते हुए कहा कि सिंगर की मौत एक दर्दनाक हादसा थी। इसमें किसी भी तरह की साजिश नहीं पाई गई है। पिछले साल सितंबर में एक आइलैंड के पास जुबीन की डूबने से मौत हो गई थी, जिसके बाद उनकी पत्नी और परिवार ने जांच पर सवाल उठाए थे। अदालत में पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, 52 साल के जुबीन गर्ग घटना के समय भारी नशे में थे। उनकी टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट में ब्लड अल्कोहल की मात्रा 333 मिलीग्राम पाई गई, जो सिंगापुर की कानूनी सीमा (80 मिलीग्राम) से चार गुना से भी ज्यादा थी। जुबीन अपने दोस्तों के साथ लाजरस आइलैंड के पास एक यॉट पर पार्टी कर रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। नशे की वजह से डूबे जुबीन कोरोनर ने कहा कि इतने नशे की वजह से वे सही फैसला नहीं ले पा रहे थे। उन्होंने पहले तो लाइफ जैकेट पहनी थी, लेकिन पहली बार तैरने के बाद उसे उतार दिया। दूसरी बार जब वे पानी में उतरे, तो कैप्टन और दूसरे साथियों के टोकने के बावजूद उन्होंने लाइफ जैकेट पहनने से साफ मना कर दिया था। पत्नी के आरोपों को कोर्ट ने किया खारिज जुबीन की पत्नी ने शक जताया था कि सिंगर को पानी में धक्का दिया गया होगा। इस पर कोरोनर नाखोडा ने साफ किया कि पुलिस ने बहुत बारीकी से जांच की है। ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे लगे कि किसी ने उन्हें मजबूर किया या धक्का दिया। यहां तक कि उन्हें बचाने की कोशिश करने वाले लोगों ने भी पूरी जान लगाई थी। कोर्ट ने कहा कि जुबीन अपनी मर्जी से तैरने के लिए पानी में उतरे थे और डूबने के दौरान किसी ने भी उनका चेहरा जानबूझकर पानी के नीचे नहीं दबाया था। पिछले साल सितंबर में मौत हुई थी यह घटना 19 सितंबर 2025 की है। जुबीन गर्ग सिंगापुर में भारत और सिंगापुर के बीच 60 साल के कूटनीतिक रिश्तों के जश्न में शामिल होने गए थे। उन्हें वहां ‘नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल’ में परफॉर्म करना था। वे असम और पूरे उत्तर-पूर्व भारत के सबसे चहेते गायकों में से एक थे। सिंगर की मौत की खबर मिलते ही उस बड़े आयोजन को रद्द कर दिया गया था। जुबीन अपने दोस्तों के साथ लाजरस आइलैंड के पास एक यॉट पर पार्टी कर रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। भारत में फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मामला दूसरी तरफ गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम के सिंगर जुबीन गर्ग की मौत के मामले की हर दिन सुनवाई के लिए एक विशेष फास्ट-ट्रैक सेशन कोर्ट बनाई है। बक्सा जिले की जिला जज शर्मिला भुइयां इस फास्ट-ट्रैक कोर्ट की अध्यक्षता करेंगी। गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने ये नियुक्ति की है। असम पुलिस की CID की विशेष जांच टीम (SIT) ने इस मामले की जांच की और स्थानीय कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। असम के तिनसुकिया में जन्मे, अभिनेता और निर्देशक रहे जुबीन का जन्म 18 नवंबर 1972 को असम के तिनसुकिया जिले में हुआ था। वे असमिया और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में गायक, संगीतकार, गीतकार, अभिनेता और निर्देशक रहे। उन्होंने असमिया, हिंदी, बांग्ला और अंग्रेजी में गाना गाए। इसके अलावा सिंगर ने बिष्णुप्रिया मणिपुरी, आदि, बोरो, अंग्रेजी, गोलपारिया, कन्नड़, कार्बी, खासी, मलयालम, मराठी, मिसिंग, नेपाली, उड़िया, संस्कृत, सिंधी, तमिल, तेलुगु, तिवा सहित 40 भाषाओं और बोलियों में 38 हजार से ज्यादा गाना गए। जुबीन असम के हाईएस्ट पेड सिंगर थे। ——————————- ये खबर भी पढ़ें जुबीन गर्ग केस की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाई:बक्सा जिला जज अध्यक्षता करेंगी, हर दिन सुना जाएगा मामला गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम के सिंगर जुबीन गर्ग की मौत के मामले की हर दिन सुनवाई के लिए एक विशेष फास्ट-ट्रैक सेशन कोर्ट बनाई है। बक्सा जिले की जिला जज शर्मिला भुइयां इस फास्ट-ट्रैक कोर्ट की अध्यक्षता करेंगी। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…