नेतन्याहू बोले- ईरान ने बेटे की हत्या की कोशिश की:हमें मिली सिक्योरिटी एशोआराम के लिए नहीं, विपक्ष ने सवाल उठाए थे

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि ईरान ने उनके परिवार को निशाना बनाया और उनके दो बेटों में से एक की हत्या की कोशिश की। उन्होंने यह बात सरकार समर्थक चैनल 14 को फोन पर दिए इंटरव्यू में कही। नेतन्याहू चुनाव से पहले अपने परिवार और दूसरे राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर बात कर रहे थे। नेतन्याहू के दो बेटे याइर और अनवर हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उनके दोनों बेटों में से किसे निशाना बनाया गया था। हत्या की कोशिश कब और कैसे की गई। नेतन्याहू बोले- सुरक्षा कोई ऐशोआराम नहीं है दरअसल इजराइल में कई महीनों से नेतन्याहू के परिवार के सदस्यों और राजनीतिक नेताओं को दी जा रही सुरक्षा पर सवाल उठ रहे थे। इसके बाद इजराइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने नेतन्याहू की पत्नी सारा और उनके दोनों बेटों के लिए सुरक्षा बढ़ाने को मंजूरी दी है। नेतन्याहू ने कहा, उन्हें दी जा रही सुरक्षा कोई ऐशोआराम नहीं है। यह सुरक्षा उन्हें नेतन्याहू के आगामी चुनाव हारने की स्थिति में भी मिलेगी। अवनेर इजराइल में रहते हैं, जबकि याइर पिछले कुछ सालों से ज्यादातर मियामी में रह रहे हैं। याइर दक्षिणपंथी विचारों वाली अपनी टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कथित हत्या की साजिश की जानकारी इजराइल के सुरक्षा अधिकारियों को कई महीनों से थी। हालांकि, सैन्य सेंसर ने इसके प्रकाशन पर रोक लगा दी थी। खबर लगातार अपडेट की जा रही है।
West Bank Palestinian Arrested | Netanyahu Claims Iran Targeted Son

5 घंटे पहले कॉपी लिंक इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि ईरान ने उनके परिवार को निशाना बनाया और उनके दो बेटों में से एक की हत्या की कोशिश की। उन्होंने यह बात सरकार समर्थक चैनल 14 को फोन पर दिए इंटरव्यू में कही। नेतन्याहू चुनाव से पहले अपने परिवार और दूसरे राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर बात कर रहे थे। नेतन्याहू ने कहा, उन्हें दी जा रही सुरक्षा कोई ऐशोआराम नहीं है। नेतन्याहू के दो बेटे याइर और अवनर हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उनके दोनों बेटों में से किसे निशाना बनाया गया था। हत्या की कोशिश कब और कैसे की गई। नेतन्याहू अपने दोनों बेटों याइर और अवनर के साथ। नेतन्याहू अगला चुनाव हारे, तब भी मिलेगी सुरक्षा दरअसल इजराइल में कई महीनों से नेतन्याहू के परिवार के सदस्यों और राजनीतिक नेताओं को दी जा रही सुरक्षा पर सवाल उठ रहे थे। इसके बाद इजराइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने नेतन्याहू की पत्नी सारा और उनके दोनों बेटों के लिए सुरक्षा बढ़ाने को मंजूरी दी है। यह सुरक्षा उन्हें नेतन्याहू के आगामी चुनाव हारने की स्थिति में भी मिलेगी। अगला चुनाव दो महीने में है। अवनर इजराइल में रहते हैं, जबकि याइर पिछले कुछ सालों से ज्यादातर मियामी में रह रहे हैं। याइर दक्षिणपंथी विचारों वाली अपनी टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कथित हत्या की साजिश की जानकारी इजराइल के सुरक्षा अधिकारियों को कई महीनों से थी। हालांकि, सैन्य सेंसर ने इसके प्रकाशन पर रोक लगा दी थी। नेतन्याहू परिवार की सुरक्षा पर विवाद क्या है इजरायल में प्रधानमंत्री और उनके परिवार को सुरक्षा मिलती है। विवाद तब बढ़ा, जब सारा नेतन्याहू और उनके दोनों वयस्क बेटों याएर व अवनर की सुरक्षा लंबे समय तक जारी रखने का फैसला हुआ। जुलाई 2026 में एक मंत्रीस्तरीय समिति ने नेतन्याहू और सारा को जीवनभर, जबकि दोनों बेटों को कम से कम 5 साल सुरक्षा देने का फैसला किया। आलोचकों का कहना है कि सुरक्षा की अवधि पहले से तय करने के बजाय वास्तविक खतरे के आधार पर समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। बड़ा विवाद याइर नेतन्याहू की विदेश में सुरक्षा को लेकर है। वह अमेरिका के मियामी में रहते हैं, फिर भी उन्हें शिन बेट के सुरक्षाकर्मी मिलते हैं। 2018-2023 के बीच याएर, अवनर और सारा की सुरक्षा पर करीब 32 मिलियन शेकेल खर्च होने की जानकारी सामने आई थी। याइर को विदेश में निजी छुट्टियों के दौरान भी सुरक्षा मिलने पर सवाल उठे। आलोचकों का कहना है कि दोनों बेटे वयस्क हैं और विदेश में रहने वाले बेटे की महंगी सुरक्षा का खर्च इजरायली करदाताओं पर पड़ रहा है। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका का ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर बैन: कहा- जो देश बिजनेस करेंगे, उन पर भी कार्रवाई अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। जिनका इस्तेमाल ईरान दूसरे देशों में अपनी आर्थिक गतिविधियों के लिए करता है। इनमें डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी), टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग के क्षेत्र शामिल हैं। अमेरिका इन क्षेत्रों के जरिए ईरान की कमाई और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को रोकना चाहता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Israel Election 2026 | PM Netanyahu Faces Challenge From Gadi Eizenkot

तेल अवीव2 मिनट पहले कॉपी लिंक इजराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट से बड़ी चुनौती मिलती दिख रही है। गुरुवार को सामने आए जमान इजराइल के नए सर्वे में आइजेनकोट की विपक्षी पार्टी यशार को 25 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। वहीं नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 21 सीटों पर सिमट सकती है। यानी यशार ने लिकुड पर 4 सीट की बढ़त बना ली है। पिछले कुछ हफ्तों के ज्यादातर सर्वे में भी यशार आगे रही है, लेकिन अंतर बहुत कम था। कई सर्वे में लिकुड बराबरी पर थी या सिर्फ 1-2 सीट पीछे थी। नए सर्वे में यह अंतर बढ़कर 4 सीट हो गया है। 120 सीटों वाली संसद में बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी यशार के सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद चुनाव के बाद सरकार बनना आसान नहीं होगा। इजराइल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और बहुमत के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है। सर्वे में नेतन्याहू विरोधी दलों के ‘चेंज ब्लॉक’ को 58 सीटें मिलने का अनुमान है। यानी यह गठबंधन बहुमत से सिर्फ 3 सीट दूर नजर आ रहा है। दूसरी ओर नेतन्याहू के समर्थक दलों को कुल 50 सीटें मिलने का अनुमान है। अरब पार्टियों को 12 सीटें मिल सकती हैं। इनमें राम पार्टी और हदाश-ताल को 6-6 सीटें मिलने का अनुमान है। इसका मतलब है कि चुनाव से पहले किसी भी बड़े खेमे के पास सरकार बनाने लायक साफ बहुमत नहीं है। आइजेनकोट बोले- सबसे बड़ी पार्टी के नेता को मौका मिलना चाहिए आइजेनकोट की बढ़त के बीच नेतन्याहू विरोधी खेमे के विपक्षी नेता याइर लैपिड की पार्टी बीयाचद ने कहा है कि वह विपक्षी सरकार बनने के रास्ते में रुकावट नहीं डालेगी। लेकिन जब लैपिड से पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी आइजेनकोट को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन करेगी, तो उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया। बीयाचद में लैपिड दूसरे नंबर के नेता हैं। पार्टी का नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के हाथ में है। वह खुद भी प्रधानमंत्री पद के दावेदार के तौर पर सामने आते रहे हैं। आइजेनकोट ने इससे पहले कहा था कि अगला प्रधानमंत्री उसी व्यक्ति को होना चाहिए जो नेतन्याहू विरोधी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी का नेता हो। उनका यह बयान 2021 से 2022 तक प्रधानमंत्री रहे नफ्ताली बेनेट के कार्यकाल की ओर भी इशारा करता है। उस समय बेनेट की पार्टी के पास नेसेट में सिर्फ 7 सीटें थीं। इसके बावजूद गठबंधन के जरिए वह प्रधानमंत्री बने थे। इसी वजह से उनके प्रधानमंत्री बनने को लेकर उस समय काफी बहस हुई थी। विपक्षी यशार पार्टी के नेता गादी आइजेनकोट। (फाइल फोटो) रिपोर्ट- ईरान इजराइली नेताओं को नुकसान पहुंचा सकता है चैनल 12 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ओर से इजराइली नेताओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों के संकेत मिले हैं। पीएम नेतन्याहू के पास सराकरी सुरक्षा है लेकिन आइजेनकोट को फिलहाल सरकारी सुरक्षा का औपचारिक अधिकार नहीं है। इसी वजह से आइजेनकोट की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। उनकी बढ़ती राजनीतिक ताकत के बीच भी उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता सामने आई है। चुनाव अभियान तेज होने के साथ इजराइल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी ‘शिन बेट’ उन्हें हथियारबंद सुरक्षा देने पर विचार कर रही है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
नेतन्याहू ने गाजा से सेना हटाने की योजना ठुकराई:कहा- हमास के निहत्था होने तक वापसी नहीं होगी; ट्रम्प का 15-पॉइंट गाजा प्लान खारिज किया

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को गाजा से सेना हटाने के प्लान को ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा कि हमास के पूरी तरह निहत्था होने तक इजराइली सेना गाजा से वापस नहीं हटेगी। नेतन्याहू ने साप्ताहिक कैबिनेट बैठक की शुरुआत में उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि इजराइल ने अमेरिकी प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि इजराइल हमास को दिखावटी तौर पर नहीं, बल्कि वास्तव में खत्म करना चाहता है। अमेरिका से बातचीत जारी, कुछ सुझाव मंजूर नेतन्याहू ने कहा कि इस मुद्दे पर अमेरिका से बातचीत चल रही है। उनके मुताबिक, अमेरिका की ओर से कुछ सुझाव दिए गए हैं, जिनमें से कुछ इजराइल को मंजूर हैं और कुछ नहीं। अमेरिका के समर्थन वाला बोर्ड ऑफ पीस युद्ध के बाद गाजा के लिए अपनी योजना आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हमास इस योजना को स्वीकार कर चुका है, लेकिन इजराइली अधिकारियों का आरोप है कि आतंकी संगठन इस प्रक्रिया का इस्तेमाल इजराइल की दोबारा सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए कर रहा है। पिछले महीने ट्रम्प के बोर्ड ऑफ पीस ने हमास और गाजा के दूसरे सशस्त्र संगठनों को पूरी तरह निहत्था करने और इसके साथ इजराइली सेना की वापसी का समझौता घोषित किया था। ट्रम्प ने इसे युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ी सफलता और स्थायी शांति-सुरक्षा की ओर बड़ा कदम बताया था। गाजा प्लान में स्टेप्स में सेना हटाने का प्रस्ताव अमेरिकी प्रस्ताव के तहत हमास अलग-अलग फेज में अपने हथियार गाजा की नई फिलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था को सौंपता। इसके बदले इजराइल गाजा के उस आधे से ज्यादा हिस्से से धीरे-धीरे सेना हटाता, जिस पर अभी उसका नियंत्रण है। प्लान के मुताबिक, इजराइल और हमास को पहले मौजूदा संघर्षविराम से जुड़ी अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करनी होंगी। इसके बाद हमास और दूसरे फिलिस्तीनी गुट गाजा का नागरिक प्रशासन और आंतरिक सुरक्षा राष्ट्रीय समिति को सौंपेंगे। इस समिति का नाम नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा है। इसे संक्रमण के दौरान गाजा का प्रशासन संभालने वाली फिलिस्तीनी तकनीकी समिति के तौर पर बनाया जाना है। योजना में भारी हथियारों, हथियार भंडार, सैन्य ठिकानों और सुरंगों की पहचान कर उन्हें समिति के नियंत्रण में देने की बात कही गई है। इजराइली सैनिकों और फिलिस्तीनी प्रशासन वाले इलाकों के बीच अंतर रखने तथा समझौते की निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाना है। इजराइली सेना तय समयसीमा के तहत चरणों में गाजा से हटेगी। इसके साथ अंतरराष्ट्रीय निगरानी में पुनर्निर्माण और सार्वजनिक सेवाएं बहाल करने का काम शुरू होगा। योजना में फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय और फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के लिए लंबे समय की राजनीतिक प्रक्रिया का भी जिक्र है। नेतन्याहू बोले- मेरे रहते फिलिस्तीनी राज्य नहीं बनेगा नेतन्याहू ने यह भी कहा कि जब तक वह प्रधानमंत्री हैं, गाजा या वेस्ट बैंक में कोई फिलिस्तीनी राज्य नहीं बनेगा। उन्होंने यह बात ट्रम्प के योजना को बड़ी उपलब्धि बताए जाने के एक हफ्ते से ज्यादा समय बाद कही। नेतन्याहू के कार्यालय ने पहले इस योजना पर आपत्ति जताई थी। कार्यालय ने कहा था कि यह ढांचा इजराइल के रुख को नहीं दिखाता, लेकिन तब योजना को सीधे तौर पर खारिज नहीं किया गया था। रविवार को नेतन्याहू ने पहली बार खुले तौर पर योजना को नामंजूर किया। उनके कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इजराइल ने ट्रम्प प्रशासन को अपनी चिंताओं से अवगत करा दिया है। यह ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच सार्वजनिक तौर पर सामने आया एक दुर्लभ मतभेद है। दोनों के बीच साझेदारी को अक्सर तेज बदलावों वाली और अनुमान लगाना मुश्किल साझेदारी के रूप में बताया जाता रहा है। ट्रम्प ने नेतन्याहू से वॉशिंगटन में मुलाकात के बाद कहा था कि इजराइल इस समझौते से बहुत खुश है। उन्होंने कहा था, “इजराइल ने हमारी मदद की है और वह हमारे साथ बहुत अच्छा रहा है।” हालांकि, ट्रम्प ने यह भी माना था कि योजना को लागू करना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा था, “क्या इसमें उतार-चढ़ाव आएंगे? वहां की स्थिति बहुत जटिल है।” एक इजराइली राजनीतिक सूत्र ने यह भी कहा था कि नेतन्याहू की ट्रम्प से मुलाकात में गाजा का मुद्दा नहीं उठा था। हमास ने भी रखी शर्तें हमास ने कहा है कि हथियार सौंपने से पहले इजराइल को अपने हमले रोकने होंगे और पहले हुए संघर्षविराम समझौते की शर्तें पूरी करनी होंगी। संगठन ने कहा कि समझौते की दिशा में पहला कदम इजराइल की ओर से हत्या और हमले रोकने की प्रतिबद्धता होना चाहिए। बातचीत में शामिल हमास के वरिष्ठ अधिकारी गाजी हमद ने कहा कि संगठन मुश्किल और तकलीफदेह समझौते को स्वीकार करने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने तुरंत निहत्था होने की बात स्वीकार नहीं की। हमद ने कहा कि इजराइल को पहले शर्म अल-शेख में हुए शुरुआती संघर्षविराम समझौते का पहला चरण लागू करना होगा। इसमें हमले रोकना, सेना को पहले के ठिकानों पर वापस ले जाना और गाजा में सामान तथा मानवीय सहायता की सप्लाई बढ़ाना शामिल है। हमास के मुताबिक, इसके बाद ही वह अपने हथियार गाजा के प्रशासन के लिए बनी राष्ट्रीय समिति के नियंत्रण में देने पर सहमत होगा। हमास के अनुसार, भारी हथियार सौंपने की शर्त इजराइल की ओर से सभी तरह के हमले रोकना और अपनी सेना हटाना है। हमास के पास अब भी इजराइल पर हमला करने की क्षमता: नेतन्याहू नेतन्याहू ने कहा कि हमास के पास अब भी इजराइल पर हमला करने की क्षमता है। उन्होंने कहा, “वह हमला कर सकता है, लेकिन कई हफ्ते बीत जाने के बाद भी उसने हम पर हमला क्यों नहीं किया? क्योंकि उसे पता है कि ऐसा करने पर हम उसे कितना ताकतवर जवाब देंगे।” उन्होंने ईरान के खिलाफ सहयोग के लिए ट्रम्प की तारीफ की। नेतन्याहू ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रम्प से मेरा बहुत सम्मान है। वह व्हाइट हाउस में हमारे बहुत अच्छे दोस्त हैं।” उन्होंने कहा, “मैं ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अमेरिका के साथ ऐतिहासिक साझेदारी की बहुत सराहना करता हूं। मैं फिर साफ करना चाहता हूं कि समझौता हो या न हो, जब तक मैं प्रधानमंत्री हूं, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।” नेतन्याहू ने कहा, “जो लोग हमें केवल उपदेश देते हैं,
इजराइली पीएम नेतन्याहू आज अमेरिका के लिए रवाना होंगे:जंग के बाद पहली बार ट्रम्प से मुलाकात करेंगे; ईरान-US ने हमले रोके

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सोमवार को अमेरिका रवाना होंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, वह मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात करेंगे। इसी दिन वह दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में भी शामिल होंगे। नेतन्याहू और ट्रम्प की यह मुलाकात फरवरी के बाद पहली आमने-सामने की बैठक होगी। दोनों नेताओं की आखिरी मुलाकात ईरान युद्ध शुरू होने से पहले हुई थी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। इजराइल को आशंका है कि तेहरान अपने हमलों का दायरा बढ़ाकर इजराइल को भी सीधे निशाना बना सकता है। इसी संभावना को देखते हुए इजराइल हाई अलर्ट पर है। इस बीच, ईरान और अमेरिका ने हमले रोक दिए है। दोनों देशों के बीच 3 दिनों से हमले बंद है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज के मुताबिक, ट्रम्प ने कूटनीतिक बातचीक का मौका देने के लिए फिलहाल हमले रोक दिए हैं। वहीं ईरान ने कहा कि अमेरिका की ओर से हमला नहीं होने के बाद उसने भी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई रोक दी है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
World News Updates; US Iran Israel Breaking NewsUNGA Netanyahu Visit Controversy

Hindi News International World News Updates; US Iran Israel Breaking NewsUNGA Netanyahu Visit Controversy | New York Mayor Arrest Statement 5 मिनट पहले कॉपी लिंक न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कहा है कि वे सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए शहर आने वाले इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गिरफ्तारी की कानूनी संभावना पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में शहर के विधि विभाग के साथ बातचीत चल रही है। ममदानी ने कहा कि वे वही करेंगे, जिसकी कानून इजाजत देगा। उन्होंने दोहराया कि उनके मुताबिक नेतन्याहू का स्थान द हेग में है, जहां अंतरराष्ट्रीय अपराधों के आरोपियों पर मुकदमा चलता है। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने नवंबर 2024 में गाजा में कथित युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों में नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। ममदानी ने न्यूयॉर्क टाइम्स के पॉडकास्ट द इंटरव्यू में कहा कि नेतन्याहू युद्ध अपराधों के आरोपी हैं और कई लोग यही मानते हैं। संयुक्त राष्ट्र में इजराइल के राजदूत डैनी डैनन ने ममदानी पर यहूदी विरोधी माहौल को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ममदानी बढ़ते यहूदी विरोध का सामना करने के बजाय इजराइल के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। डैनन ने पुष्टि की कि नेतन्याहू 22 से 28 सितंबर के बीच होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल वीक में संबोधन करेंगे। उन्होंने कहा कि मेयर का रुख इससे कोई फर्क नहीं डालेगा। उन्होंने X पर लिखा कि अगर किसी को गिरफ्तार किया जाना चाहिए तो वह न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी हैं। हाल ही में एक रेडियो इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा था कि उन्हें ममदानी की गिरफ्तारी संबंधी धमकियों की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यूयॉर्क के मेयर हमास का समर्थन करते हैं और अमेरिका से नफरत करते हैं। अमेरिका और इजराइल, दोनों ICC के सदस्य नहीं हैं। अमेरिकी संघीय कानून राज्य और स्थानीय प्रशासन को ICC के अनुरोधों पर सहयोग करने से रोकता है। पिछले साल न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल भी कह चुकी हैं कि मेयर के पास नेतन्याहू को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
World News Updates; US Iran Israel Breaking NewsUNGA Netanyahu Visit Controversy

Hindi News International World News Updates; US Iran Israel Breaking NewsUNGA Netanyahu Visit Controversy | New York Mayor Arrest Statement 22 मिनट पहले कॉपी लिंक न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कहा है कि वे सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए शहर आने वाले इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गिरफ्तारी की कानूनी संभावना पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में शहर के विधि विभाग के साथ बातचीत चल रही है। ममदानी ने कहा कि वे वही करेंगे, जिसकी कानून इजाजत देगा। उन्होंने दोहराया कि उनके मुताबिक नेतन्याहू का स्थान द हेग में है, जहां अंतरराष्ट्रीय अपराधों के आरोपियों पर मुकदमा चलता है। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने नवंबर 2024 में गाजा में कथित युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों में नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। ममदानी ने न्यूयॉर्क टाइम्स के पॉडकास्ट द इंटरव्यू में कहा कि नेतन्याहू युद्ध अपराधों के आरोपी हैं और कई लोग यही मानते हैं। संयुक्त राष्ट्र में इजराइल के राजदूत डैनी डैनन ने ममदानी पर यहूदी विरोधी माहौल को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ममदानी बढ़ते यहूदी विरोध का सामना करने के बजाय इजराइल के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। डैनन ने पुष्टि की कि नेतन्याहू 22 से 28 सितंबर के बीच होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल वीक में संबोधन करेंगे। उन्होंने कहा कि मेयर का रुख इससे कोई फर्क नहीं डालेगा। उन्होंने X पर लिखा कि अगर किसी को गिरफ्तार किया जाना चाहिए तो वह न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी हैं। हाल ही में एक रेडियो इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा था कि उन्हें ममदानी की गिरफ्तारी संबंधी धमकियों की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यूयॉर्क के मेयर हमास का समर्थन करते हैं और अमेरिका से नफरत करते हैं। अमेरिका और इजराइल, दोनों ICC के सदस्य नहीं हैं। अमेरिकी संघीय कानून राज्य और स्थानीय प्रशासन को ICC के अनुरोधों पर सहयोग करने से रोकता है। पिछले साल न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल भी कह चुकी हैं कि मेयर के पास नेतन्याहू को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Trump Wants World Kneel; Dictatorship Pushing World Back: Israeli Historian

11 मिनट पहले कॉपी लिंक चर्चित इतिहासकार युवाल नोआ हरारी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इजराइल के इतिहास में नेतन्याहू से बड़ा इजराइली राष्ट्रवाद का दुश्मन कोई नहीं रहा। उन्होंने देश को अंदर से बांट दिया और लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि ट्रम्प और उनके जैसे नेताओं की सोच यह है कि कमजोर हमेशा ताकतवर के सामने घुटने टेक दे, तभी शांति बनी रहेगी। यह अनैतिक और मूर्खतापूर्ण है क्योंकि इससे हर देश अपनी ऊर्जा सिर्फ हथियारों पर खर्च करेगा। हरारी ने कहा कि दुनिया ट्रम्पवाद और दक्षिणपंथी राजनीति कि ओर तेजी से बढ़ रही है। इसकी राजनीति करने वालों का मानना है कि दुनिया एक दूसरी की मदद करने से नहीं बल्कि ताकत और दबदबे से चलती है। लेकिन यह सोच इंसानी सभ्यता और दुनिया को पीछे धकेल रही है। युवाल नोआ हरारी इजराइल के इतिहासकार, सैन्य मामलों के जानकार, विचारक और विज्ञान लेखक हैं। वे यरुशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर भी हैं। हरारी बोले- सहयोग से ही दुनिया की तरक्की हुई युवाल नोआ हरारी ने कहा कि उनकी सबसे चर्चित किताबें, जैसे सेपियंस और होमोडेयस को ध्यान से देखें तो एक बड़े विचार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। सहयोग यानी कोऑपरेशन। हरारी ने कहा कि इंसानों की असली ताकत यही है कि वे बड़े पैमाने पर और लंबे समय तक मिलकर काम कर सकते हैं। यही वह चीज है जिसने इंसानों को कमजोर जीव से दुनिया की सबसे प्रभावशाली प्रजाति बना दिया। अकेला इंसान न तो शेर से लड़ सकता है और न भालू से, लेकिन करोड़ों लोग मिलकर समाज, देश, कानून, बाजार और तकनीक बना सकते हैं। युवाल नोआ हरारी की मशहूर किताबें- सेपियंस और होमोडेयस। हरारी बोले- ताकत ही सबकुछ होता तो हम आज भी शिकारी होते हरारी का मानना है कि अगर केवल ताकत ही सब कुछ होती, तो इंसान आज भी छोटे-छोटे शिकारी समूहों में जी रहे होते। मानव इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि इंसान लड़ सकता है, बल्कि यह है कि इंसान बड़ी संख्या में एक-दूसरे पर भरोसा कर सकता है। हरारी के मुताबिक सिर्फ डर या हिंसा के दम पर बड़ी सभ्यताएं नहीं चल सकतीं। किसी भी बड़े समाज को चलाने के लिए साझा विश्वास और सहयोग जरूरी होता है। लेकिन ट्रम्पवाद और राष्ट्रवादी सोच इस मामले में अलग राय रखती है। उनका मानना है कि देशों के बीच सहयोग तभी मजबूत हो सकता है, जब लोगों के पास अपनी मजबूत राष्ट्रीय, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान हो। उनके मुताबिक किसी देश को मजबूत बनाने के लिए लोगों का एक जैसी सोच और पहचान से जुड़ा होना जरूरी है। कई बार इसके लिए सख्त सत्ता और मजबूत नेतृत्व की भी जरूरत पड़ती है। हरारी के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रम्प सहयोग में विश्वास नहीं रखते, वे सिर्फ सैन्य ताकत से कमजोर देशों पर दबादबा बनाना चाहते है। हरारी बोले- राष्ट्रवाद को नफरत से बचाना जरूरी है हरारी का कहना है कि राष्ट्रवाद मानव इतिहास की सबसे सफल और सकारात्मक कहानियों में से एक रहा है। उनके मुताबिक राष्ट्रवाद का असली मतलब दूसरे लोगों से नफरत करना नहीं, बल्कि उन लाखों अनजान लोगों के लिए अपनापन महसूस करना है जिन्हें आप व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, फिर भी उनके लिए त्याग करने को तैयार रहते हैं। वे कहते हैं कि राष्ट्र कोई परिवार नहीं होता और न ही छोटा कबीला। छोटे कबीलों में लोग एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं। लेकिन राष्ट्र अलग चीज है। भारत, चीन या इजराइल जैसे देशों में करोड़ों लोग रहते हैं और कोई भी व्यक्ति उनमें से ज्यादातर लोगों को नहीं जानता। फिर भी राष्ट्रवाद लोगों को इस हद तक जोड़ देता है कि वे टैक्स देते हैं ताकि दूसरे नागरिकों को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। जरूरत पड़ने पर लोग देश के लिए अपनी जान तक जोखिम में डाल देते हैं। हरारी मानते हैं कि कई बार राष्ट्रवाद नफरत की तरफ भी मुड़ जाता है, लेकिन यह उसकी मूल पहचान नहीं है। उनके अनुसार राष्ट्रवाद बिना बाहरी लोगों से नफरत किए भी मौजूद रह सकता है, लेकिन अपने लोगों के लिए अपनापन और प्रेम के बिना नहीं। हरारी कहते हैं कि आज जो लोग खुद को राष्ट्रवाद का सबसे बड़ा समर्थक बताते हैं, उनमें से कई राष्ट्र के भीतर ही नफरत फैला रहे हैं। वे बाहरी दुश्मनों से ज्यादा अपने ही समाज को बांट रहे हैं। इजराइल का उदाहरण देते हुए हरारी कहते हैं कि देश के इतिहास में शायद ही किसी नेता ने समाज को उतना बांटा हो जितना बेंजामिन नेतन्याहू ने। युवाल हरारी ने नेतन्याहू पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इजराइल को अंदर से बांट दिया है। उनके मुताबिक, यह इजराइल के लिए बाहरी दुश्मनों से ज्यादा खतरनाक है। दुनिया ताकत के नियम पर चले तो बर्बाद हो जाएगी हरारी ने ट्रम्पवादी सोच की आलोचना करते हुए कहा कि यह दुनिया को ताकत और दबदबे के नजरिए से देखती है। इस सोच के मुताबिक दुनिया में शांति तभी हो सकती है जब कमजोर देश मजबूत देशों की मांग मान लें। वे उदाहरण देते हैं कि अगर अमेरिका, ग्रीनलैंड मांगता है, तो डेनमार्क को अमेरिकी ताकत से डरकर उसे सौंप देना चाहिए। अगर डेनमार्क इनकार करे और संघर्ष हो जाए, तो इस सोच के मुताबिक गलती डेनमार्क की मानी जाएगी, क्योंकि उसने ताकतवर देश की बात नहीं मानी। हरारी कहते हैं कि यह सोच गंभीर समस्या पैदा करती है। अगर दुनिया केवल ताकत के नियम पर चलेगी, तो हर देश खुद को ज्यादा मजबूत बनाने की दौड़ में लग जाएगा। फिर सभी देशों को अपनी अर्थव्यवस्था और संसाधनों का बड़ा हिस्सा सेना और हथियारों पर खर्च करना पड़ेगा। हरारी ने AI को सबसे बड़ा खतरा बताया इसी बीच हरारी ने AI को आने वाले समय में सबसे बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि परमाणु बम सिर्फ एक हथियार है, लेकिन AI खुद फैसले लेने की क्षमता रखता है। उन्होंने चेतावनी दी कि AI इंसानों की तरह प्यार और भावनाएं दिखाना सीख रहा है, जबकि वह असली भावनाओं को समझता नहीं। आने
benjamin netanyahu gym video| prostate cancer| iran-israel| नेतन्याहू को तो देखिए, कैंसर को मात दे जिम में बना रहे डोले, ईरान कैसे न खौफ खाए

Last Updated:May 02, 2026, 13:46 IST Israel PM benjamin netanyahu Gym: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वैसे तो हमेशा ही कुछ न कुछ दिलचस्प चीजें करते रहते हैं लेकिन इस बार उनका जिम से आया वीडियो काफी वायरल हो रहा है. 76 की उम्र में, प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे नेतन्याहू का जिम में पसीना बहाते, सीढ़ियां चढ़ते, नाश्ते में उबले अंडे खाते हुए युवाओं को संदेश काफी कुछ कह रहा है. उन्होंने कहा है कि कसरत करें और कभी हार न मानें. यह वीडियो उनकी रिकवरी और मजबूत इरादे का ईरान को साफ संदेश है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का हाल ही में जारी जिम का वीडियो काफी वायरल हो रहा है. 76 साल की उम्र में प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे नेता जिम में डंबल उठा रहे हैं, डोले बना रहे हैं और सीढ़ियां चढ़ रहे हैं. वे साफ-साफ बता रहे हैं कि वे एकदम फिट हैं और दुश्मनों को कोई मौका नहीं देना चाहते. उनके मजबूत इरादे निश्चित ही ईरान की पेशानी पर बल डालने के लिए काफी हैं. AI Image नेतन्याहू ने इस वीडियो में उबले अंडे खाते हुए युवाओं को संदेश भी दिया है कि कसरत करें और कभी हार न मानें. यह वीडियो उनकी रिकवरी और मजबूत इरादे के अलावा उनके टाइट रूटीन अनुशासन का उदाहरण है. वे नियमित रूप से जिम जाते हैं, वेट ट्रेनिंग और कार्डियो करते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी के बावजूद उनका स्वास्थ्य सामान्य है.जिस कैंसर के होने पर लोग बेड पकड़ लेते हैं, नेतन्याहू का जिम में पसीना बहाना वाकई लोगों को प्रेरित करने वाला है. डॉक्टरों की मानें तो प्रोस्टेट कैंसर से उबरने वाले मरीजों के लिए व्यायाम बेहद जरूरी और फायदेमंद होता है. नियमित एक्सरसाइज मसल स्ट्रेंथ बढ़ाती है, थकान कम करती है और हड्डियों को मजबूत बनाती है. यह दिल की हेल्थ सुधारता है और वजन कंट्रोल रखता है. ADT (हॉर्मोन थेरेपी) के साइड इफेक्ट्स जैसे मसल लॉस और ऑस्टियोपोरोसिस को भी व्यायाम से रोका जा सकता है. कई स्टडी में सक्रिय पुरुषों में रिकरेंस का खतरा कम पाया गया है. Add News18 as Preferred Source on Google एम्स नई दिल्ली की ही कई स्टडीज बताती हैं कि व्यायाम के फायदे प्रोस्टेट ही नहीं बल्कि कई कैंसर सर्वाइवर्स में स्पष्ट हैं. मॉडरेट एक्सरसाइज (सप्ताह में 150-300 मिनट) कैंसर से मौत का खतरा 25-35 फीसदी तक कम कर सकती है. एक्सरसाइज से मूड बेहतर करता है, नींद सुधरती है और क्वालिटी लाइफ बढ़ती है. नेतन्याहू जैसा रूटीन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ कार्डियो रिकवरी में मददगार साबित होता है. हालांकि,एक्सपर्ट कहते हैं कि प्रोस्टेट कैंसर में व्यायाम करते समय सावधानी जरूरी है. डॉक्टर कहते हैं कि हड्डी मेटास्टेसिस वाले मरीजों को हाई इंपैक्ट एक्सरसाइज से बचना चाहिए क्योंकि इससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है. थेरेपी के दौरान थकान या दर्द हो तो व्यायाम की तीव्रता कम रखनी चाहिए. हमेशा डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से ही व्यायाम शुरू करें, जैसा कि नेतन्याहू करते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो प्रोस्टेट कैंसर मरीजों को सप्ताह में कम से कम 2 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और रोजाना मॉडरेट एरोबिक एक्टिविटी करनी चाहिए. वार्म-अप और कूल-डाउन जरूर शामिल करें. नेतन्याहू का संदेश प्रेरणादायक है कि उम्र या बीमारी के बावजूद पॉजिटिव सोच और मेहनत से बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है. नियमित चेकअप के साथ स्वस्थ आदतें अपनाए रखने से बेहतर हेल्थ बनी रहती है. ऐसे में नेतन्याहू का यह वीडियो सिर्फ फिटनेस नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का भी प्रतीक है जो निश्चित रूप से ईरान और उनके प्रतिद्वंद्वियों को उनके फौलादी इरादों का संकेत दे रहा है. नेतन्याहू का प्रोस्टेट कैंसर जैसी बीमारी से लड़कर वापसी करना लाखों लोगों को प्रेरित करता है. डॉक्टरों का मानना है कि व्यायाम दवा की तरह काम करता है, फायदे ज्यादा, नुकसान कम, बशर्ते सही तरीके से किया जाए. स्वस्थ रहने के लिए अनुशासन और डॉक्टरी सलाह सबसे जरूरी है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Netanyahu Trump Secret Meeting: Iran Attack Decision

वॉशिंगटन डीसी14 मिनट पहले कॉपी लिंक तारीख: 11 फरवरी जगह: व्हाइट हाउस, वॉशिंगटन डीसी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सुबह ही व्हाइट हाउस पहुंच चुके थे। वह कई महीनों से अमेरिका पर दबाव डाल रहे थे कि ईरान पर बड़ा हमला किया जाए। हालांकि इस बार की मुलाकात बेहद सीक्रेट थी। उन्हें बिना किसी औपचारिक स्वागत के सीधे अंदर ले जाया गया ताकि मीडिया को कुछ पता न चले। पहले कैबिनेट रूम में बातचीत हुई और फिर उन्हें व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में ले जाया गया, जहां असली बैठक हुई। यह वही जगह है जहां अमेरिका युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बड़े फैसले करता है, लेकिन आमतौर पर यहां विदेशी नेताओं को नहीं लाया जाता। आमतौर पर जब कोई बड़ी मीटिंग होती है, तो ट्रम्प वह टेबल के सबसे आगे यानी ‘हेड’ वाली कुर्सी पर बैठते हैं। वहां से वह सबको देखते हैं और बैठक को लीड करते हैं। लेकिन इस मीटिंग में ट्रम्प टेबल के किनारे (साइड) पर जाकर बैठे, और उनका चेहरा दीवार पर लगी बड़ी स्क्रीन की तरफ था। ट्रम्प-नेतन्याहू आमने-सामने थे। स्क्रीन पर इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया और इजराइली सैन्य अधिकारी जुड़े हुए थे। इससे ऐसा माहौल बनाया गया जैसे नेतन्याहू युद्ध के समय अपने पूरे कमांड के साथ खड़े हैं। इस बैठक में बहुत कम लोग शामिल थे ताकि कोई जानकारी बाहर न जाए। विदेश मंत्री मार्को रूबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ, जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन, ट्रम्प के दामाद जैरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ मौजूद थे। व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स भी वहां थीं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बैठक में नहीं थे क्योंकि वे अजरबैजान में थे और बैठक अचानक तय हुई थी। ईरान पर हमले से पहले सिचुएशनल रूम में राष्ट्रपति ट्रम्प और बाकी अधिकारी। तस्वीर जून 2025 की है। नेतन्याहू बोले- ईरान पर हमला करने का यह सही वक्त नेतन्याहू ने एक घंटे का प्रेजेंटेशन दिया और ट्रम्प को समझाने की कोशिश की कि यह ईरान पर हमला करने का सबसे सही समय है। उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार कमजोर हो चुकी है और अगर अमेरिका और इजराइल मिलकर हमला करें तो ईरान की सैन्य ताकत जल्दी खत्म की जा सकती है। नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान का मिसाइल सिस्टम कुछ ही हफ्तों में तबाह किया जा सकता है और सरकार इतनी कमजोर हो जाएगी कि वह होर्मुज स्ट्रेट को बंद नहीं कर पाएगी। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ईरान के अंदर फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं और अगर इजराइल सीक्रेट तरीके से मदद करे तो ये प्रदर्शन सरकार गिराने तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इराक से कुर्द लड़ाके ईरान में घुसकर एक और मोर्चा खोल सकते हैं जिससे सरकार जल्दी गिर जाएगी। इस दौरान एक वीडियो भी दिखाया गया जिसमें उन संभावित नेताओं को दिखाया गया जो सरकार गिरने के बाद सत्ता संभाल सकते हैं। इसमें रजा पहलवी का नाम भी था, जो ईरान के आखिरी शाह के बेटे हैं और फिलहाल अमेरिका में रहते हैं। नेतन्याहू ने बार-बार कहा कि अभी हमला जरूरी है, क्योंकि देर हुई तो ईरान मजबूत हो जाएगा। उनका कहना था कि कुछ न करने का खतरा, हमला करने से ज्यादा है। ट्रम्प 29 दिसंबर 2025 को फ्लोरिडा में अपने मार-ए-लागो क्लब में इजराइली PM नेतन्याहू से मुलाकात के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे हाथ मिलाते हुए। नेतन्याहू की बातों में आ गए ट्रम्प ट्रम्प इस पेशकश से काफी प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि यह प्लानिंग उन्हें सही लगती है। इससे नेतन्याहू को पता चल गया कि अमेरिका साथ आ सकता है। इसके बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का काम इस प्लानिंग को समझना था। अगले दिन सिचुएशन रूम में सिर्फ अमेरिकी अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें योजना को 4 हिस्सों में बांटा गया। 1. खामेनेई और टॉप लीडरशिप को खत्म करना 2. ईरान की सैन्य ताकत खत्म करना 3. देश में विद्रोह करवाना 4. सरकार बदलकर नई व्यवस्था लाना खुफिया एजेंसियों ने कहा कि पहले दो मकसद हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन बाकी दो असलियत से दूर हैं। CIA चीफ जॉन रैटक्लिफ ने इसे मजाक जैसा बताया और मार्को रूबियो ने इसे बेकार कहा। जब ट्रम्प बैठक में आए तो उन्हें यही रिपोर्ट दी गई। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी वापस आ चुके थे और उन्होंने इस योजना पर गहरी चिंता जताई। जनरल डैन केन ने भी कहा कि इजराइल अक्सर योजनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है क्योंकि उसे अमेरिका की मदद चाहिए होती है। इसके बाद ट्रम्प ने साफ कहा कि अगर सरकार बदलना संभव नहीं भी है तो भी इससे फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि यह इजराइल या ईरान का मामला होगा, लेकिन उनका फैसला इस पर निर्भर नहीं करेगा। उनका ध्यान मुख्य रूप से ईरान के शीर्ष नेताओं को खत्म करने और उसकी सैन्य ताकत को तोड़ने पर था। नेतन्याहू 7 अप्रैल 2025 को व्हाइट हाउस में हुई बैठक के दौरान बोलते हुए। उनके साथ राष्ट्रपति ट्रम्प, उपराष्ट्रपति वेंस, विदेश मंत्री रूबियो और NSA माइकल वॉल्ट्ज भी मौजूद थे। ईरान को कमजोर समझने की भूल कर बैठे ट्रम्प आने वाले दिनों में कई बैठकें हुईं। इन बैठकों में जनरल केन ने चेतावनी दी कि अगर ईरान के खिलाफ बड़ा युद्ध शुरू होता है तो अमेरिका के हथियार तेजी से खत्म हो सकते हैं। खास तौर पर मिसाइल इंटरसेप्टर पहले से ही कम हैं क्योंकि अमेरिका यूक्रेन और इजराइल की मदद करता रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज को सुरक्षित रखना बहुत मुश्किल होगा और अगर ईरान इसे बंद कर देता है तो वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा। लेकिन ट्रम्प को भरोसा था कि युद्ध बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा। उन्हें लगा कि ईरान ज्यादा जवाब नहीं दे पाएगा, जैसा कि पहले जून में हुए हमलों के बाद देखा गया था। जंग शुरू करने का वेंस ने सबसे ज्यादा विरोध किया जनरल केन ने यह कभी नहीं कहा कि जंग गलत है लेकिन वे बार-बार इसके खतरे से आगाह कराते रहे। वह हर प्लानिंग पर पूछते थे कि उसके बाद क्या होगा, लेकिन ट्रम्प अक्सर वही बातों पर







