Thursday, 14 May 2026 | 06:34 AM

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NEET Exam Paper Leak: 10 States, 2-3 Weeks Circulation; No Idea How Many Students Affected

NEET Exam Paper Leak: 10 States, 2-3 Weeks Circulation; No Idea How Many Students Affected

NEET पेपर लीक मामले में सीकर में कंसल्टेंसी का ऑफिस चलाने वाले राकेश मंडावरिया सहित कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-2026) के रद्द होने के पीछे की असली कहानी सामने आ गई है। भास्कर को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से जुड़ा है। . माफिया ने पेपर लीक को छिपाने के लिए इसे ‘गेस पेपर’ का नाम दिया, ताकि जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकी जा सके। ‘गेस पेपर’ में NEET के 120 से ज्यादा सवाल हूबहू मिल गए। यही ‘गेस पेपर’ राजस्थान सहित 10 राज्यों में परीक्षा के 3 सप्ताह पहले सर्कुलेट हो चुका था। अब इस मामले की कमान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने संभाल ली है। मंगलवार रात CBI की टीम जयपुर स्थित स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) मुख्यालय पहुंच गई। उधर, SOG की जांच में सामने आया है कि शुभम खैरनार ने प्रिंटिंग प्रेस से लीक कर पेपर पुणे में बेचा। इसके बाद गुरुग्राम में ये पेपर खरीदा गया था। इसके बाद जयपुर के दो भाइयों दिनेश और मांगीलाल ने सबसे पहले पेपर खरीदा था। आरोपियों ने 26-27 अप्रैल को गुरुग्राम की एक गैंग को 30 लाख रुपए दिए थे। इस मामले में पेपर शेयर करने वाले सीकर के कंसल्टेंट राकेश मंडावरिया सहित अन्य कई लोगों को भी हिरासत में लिया गया है। उनसे अब पूछताछ जारी है। आरोप है कि राकेश ने ये पेपर हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और असम तक बेच दिया। मंगलवार की रात NEET पेपर लीक मामले की जांच के लिए सीबीआई की टीम जयपुर SOG ऑफिस पहुंची। नासिक से लीक, पुणे में पहली बिक्री और फिर 10 राज्यों में जाल जांच में सामने आया है कि शुभम खैरनार ने नासिक (महाराष्ट्र) स्थित प्रिंटिंग प्रेस से पेपर लीक किया था। लीक के बाद उसने साथियों के साथ मिलकर इसे एक ‘गेस पेपर’ का रूप दिया। सबसे पहले पेपर पुणे (महाराष्ट्र) में बेचा गया। धीरे-धीरे यह टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए राजस्थान, दिल्ली, आंध्र प्रदेश और बिहार सहित 10 राज्यों में फैल गया। बाद में यह कई टेलीग्राम ग्रुप पर भी शेयर किया गया। इसे ‘गेस पेपर’ इसलिए कहा गया ताकि कोई इसे असली पेपर समझकर तुरंत शिकायत न कर दे। आरोपी शुभम खैरनार ने प्रिंटिंग प्रेस से पेपरलीक करके गेस पेपर बनाया। पेपरलीक के आरोपी भाइयों में से एक राजनीति से भी जुड़ा है जयपुर के जमवारामगढ़ के आरोपी भाइयों ने सीकर जाकर ये पेपर बेचा था। इससे पहले एक भाई ने सीकर में ही नीट की तैयारी कर रहे अपने बेटे को भी ये पेपर दिया था। सीकर में पेपर को गेस क्वेश्चन बैंक के नाम से अलग-अलग लोगों को दिया गया। इनमें एक कंसल्टेंसी फर्म, हॉस्टल का मालिक भी है। पेपरलीक के आरोपी भाइयों में से एक राजनीति से भी जुड़ा है। जांच में सामने आया है इन भाइयों के परिवार से पिछले साल 4 बच्चे नीट में सिलेक्ट हुए थे। 120 से ज्यादा सवाल हूबहू मिले शुरुआती जांच में लगा कि पेपर केरल से सीकर आया, लेकिन सच यह है कि पेपर राजस्थान में पहले ही आ चुका था। यहां के एक छात्र ने इसे केरल में पढ़ रहे अपने दोस्त को भेजा, जिसने वापस इसे सीकर और झुंझुनूं के छात्रों में सर्कुलेट कर दिया। 4 मई को एक छात्र ने सीकर की कोचिंग के फिजिक्स फैकल्टी को यह पेपर भेजा। फैकल्टी ने जांच की तो होश उड़ गए। बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 35 सवाल (कुल 120+) ओरिजिनल नीट पेपर से हूबहू मिल रहे थे। फिजिक्स फैकल्टी ने पुलिस में शिकायत दी। पुलिस ने उन्हें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी NTA में भी शिकायत करने की राय दी। इसके बाद 5 से 6 मई के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में विद प्रूफ यह शिकायत दी गई। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने इंटेलिजेंस ब्यूरो को इस बारे में बताया। सीकर के कंसल्टेंट राकेश ने दर्जनों स्टूडेंट्स तक पेपर पहुंचाया। सीकर का ‘कंसल्टेंट’ निकला अहम कड़ी पेपर शेयर करने वाला राकेश मंडावरिया सीकर में एक कोचिंग के सामने कंसल्टेंसी ऑफिस चलाता था और काउंसलिंग का काम करता था। राकेश के पास पेपर कई दिन पहले आ गया था। राकेश ने न केवल छात्रों को, बल्कि कई पीजी (PG) संचालकों और कोचिंग फैकल्टी को भी पेपर शेयर किया था। जांच एजेंसियों के लिए अब यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि आखिर कितने छात्रों तक यह पेपर पहुंच चुका है। आरोपी राकेश सीकर के मंडावरिया खंडेला के समर्थपुरा गांव का रहने वाला है। नवोदय विद्यालय के स्टूडेंट रहे राकेश ने 2 साल पहले ही पिपराली रोड पर ऑफिस खोला था। वो NEET तैयारी से संबंधित सलाह देता था। वह विदेश के एमबीबीएस कॉलेजों में भी एडमिशन कराता था। इससे पहले वह दूसरे शहर में काम करता था। पहले कुछ ही स्टूडेंट्स के पास पेपर आया था लेकिन परीक्षा से ठीक एक दिन पहले यह पेपर वाट्सएप और टेलीग्राम पर हजारों स्टूडेंट्स तक पहुंच गया। इन स्टूडेंट्स ने पेपर को कई वॉट्सएप ग्रुप पर भेजा। यहां तक कि कई हॉस्टल और पीजी संचालक के मोबाइल में भी गैस पेपर पहुंच गया जिन्होंने अपने यहां रहने वाले स्टूडेंट्स को भी पेपर शेयर किया था। राकेश ने सीकर स्थित एक कोचिंग के सामने कंसल्टेंसी ऑफिस खोला हुआ है। देहरादून से पकड़ा गया राकेश नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने इंटेलिजेंस ब्यूरो को पूरी घटना बताई। जिस स्टूडेंट ने फिजिक्स फैकेल्टी को पेपर भेजा था, उसकी निशानदेही के आधार पर राकेश मंडावरिया और उसके अन्य साथियों को देहरादून से पकड़ा गया। इसके बाद 8 मई को इस केस में SOG की एंट्री हुई। 8 मई की रात टीम सीकर शहर में उद्योग नगर थाना एरिया में पहुंची। उन्होंने लोकल पुलिस के साथ मिलकर एक दर्जन से ज्यादा स्टूडेंट्स को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। उद्योग नगर पुलिस थाने में 12 मई तक 17 से 18 स्टूडेंट्स से पूछताछ की गई। एसओजी अधिकारियों ने स्टूडेंट्स से पेपर उनके पास आने सहित अन्य सवाल पूछे। हालांकि अब स्टूडेंट्स को छोड़ दिया गया है। जरूरत पड़ने पर अब सीबीआई मामले में उनसे पूछताछ कर सकती है। एसओजी के आईजी अजयपाल लांबा ने मीडिया को पेपर लीक से संबंधित जानकारियां दीं। SOG आईजी