टीवी एक्टर और होस्ट करण वाही एक बार फिर ‘खतरों के खिलाड़ी’ में नजर आएंगे। करण इससे पहले सीजन 8 और ‘खतरों के खिलाड़ी: मेड इन इंडिया’ का हिस्सा रह चुके हैं। अब वह तीसरी बार ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ में दिखाई देंगे। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में करण ने बताया कि यह शो सिर्फ एक रियलिटी शो नहीं, बल्कि जिंदगी बदल देने वाला एक्सपीरियंस है। सवाल: तीसरी बार ‘खतरों के खिलाड़ी’ में जा रहे हैं। शो को लेकर कितना एक्साइटमेंट है?
जवाब: शो की बात करें तो पुराना शो भी बहुत डरावना था। अब नया शो कितना डरावना होगा, ये तो हमें भी नहीं पता क्योंकि उन्होंने ज्यादा बताया नहीं है, लेकिन मैं खुद को बहुत लकी मानता हूं कि मुझे तीसरी बार यह शो करने का मौका मिल रहा है। जितना ज्यादा डर लगेगा, उतना ज्यादा मजा आएगा। अब बस उस पल का इंतजार है जब हम केपटाउन जाएंगे और रोहित सर के साथ फिर वही सफर शुरू होगा। सवाल: जब तीसरी बार शो का ऑफर आया, तब पहला रिएक्शन क्या था?
जवाब: मेरा पहला रिएक्शन सीधा ‘हां’ था क्योंकि यह शो सिर्फ शो नहीं है, एक एक्सपीरियंस है। यहां आपके कॉम्पिटिटर्स भी आपको चीयर करते हैं। अगर आप जीतते हैं तो सामने वाला हार जाएगा, लेकिन फिर भी वो आपके लिए उतना ही चीयर करेगा जितना खुद के लिए करते हैं। आज के समय में ऐसा शो दूसरा नहीं है। यहां आपको वो सब करने का मौका मिलता है, जो हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कभी नहीं करते। हम घर पर रह सकते हैं, फोन दूर रख सकते हैं, टीवी नहीं देख सकते, डांस या गाना गा सकते हैं, लेकिन असली जिंदगी में हम चूहों के बीच नहीं बैठते, 100 मंजिला इमारत से नहीं लटकते और ना ही ऐसी खतरनाक छलांग लगाते हैं। अगर आपको ये सब दोबारा करने का मौका मिले, तो डर जरूर लगता है। सवाल: पहली और दूसरी बार शो करने के दौरान सबसे बड़ा डर क्या था?
जवाब: पहली बार तो मुझे कई चीजों से डर लगता था, लेकिन सबसे बड़ा फोबिया जानवरों का था, खासकर डॉग्स का। ‘खतरों के खिलाड़ी’ के बाद वो डर पूरी तरह खत्म हो गया और आज मेरे घर में खुद का डॉग है। दूसरी बार भी हाइट का डर था और सच कहूं तो वह आज भी है, लेकिन यह शो आपको सिखाता है कि ‘माइंड ओवर मैटर’ क्या होता है। सवाल: क्या डर कभी पूरी तरह खत्म हो जाता है?
जवाब: नहीं। यह शो हमेशा आपके सामने एक नया डर ले आता है। अगर कुत्तों का डर खत्म हुआ, तो अब वो शेर या चीता ले आएंगे, लेकिन यही इस शो की खूबसूरती है कि आप खुद को हर बार नए तरीके से टेस्ट करते हैं। सवाल: असल जिंदगी में करियर की शुरुआत के दौरान सबसे बड़ा डर क्या था?
जवाब: अगर डर को जनरल सेंस में देखें, तो डर आज भी है। छोटी-छोटी चीजों का डर रहता है। पहले मुझे अपने पैरेंट्स से डर लगता था, पढ़ाई से डर लगता था, लेकिन अगर काम की बात करूं, तो 20-22 साल पहले दुनिया भी बहुत अलग थी। उस वक्त इंसान बहुत फियरलेस होता है। आप दुनिया के बारे में ज्यादा नहीं सोचते। बस नाम कमाना होता है। लगता है कि सब कर लेंगे, कुछ भी कर लेंगे। उस समय शायद डर कम था, मैं थोड़ा ज्यादा फियरलेस था। अब मैं इसे डर नहीं कहूंगा, लेकिन अब चीजों के बारे में ज्यादा सोचता हूं। ये हर इंसान के साथ होता है। पहले बस यही सोच होती थी कि काम आ रहा है, कुछ भी करो लेकिन काम करो। अब बस यही उम्मीद रहती है कि इतने सालों से लोगों ने मुझे जो प्यार दिया है, वो आगे भी मिलता रहे। मैंने 20-22 साल काम किया है, तो अगर अगले 20-22 साल भी उसी दिल से काम कर पाऊं, वही प्यार और सम्मान मिलता रहे, तो उससे बड़ी बात कुछ नहीं होगी। सवाल: आप अपनी फिटनेस और लाइफस्टाइल को लेकर कितना डिसिप्लिन फॉलो करते हैं? आपका फिटनेस रूटीन कैसा है?
जवाब: मुझे लगता है यह एक एम्बेडेड डिसिप्लिन है। फिटनेस सिर्फ एक्टर्स के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि एक अच्छी जिंदगी जीने के लिए जरूरी है। अच्छा खाना, वर्कआउट, साफ-सुथरी लाइफस्टाइल और शायद थोड़ी अच्छी जेनेटिक्स भी। यह सब पैरेंट्स की वजह से है। सवाल: मेंटल पीस और मेंटल फिटनेस कैसे बनाए रखते हैं?
जवाब: पहले मैं बहुत एक्सटर्नल वैलिडेशन ढूंढता था। कौन क्या सोचता है, सोशल मीडिया पर किसने क्या लिखा। लेकिन अब मैंने यह सब छोड़ दिया है। अब मैं सिर्फ यह सोचता हूं कि मैं खुद अपने बारे में क्या सोचता हूं। मेरे एक्शन मेरे शब्दों से कितना मैच करते हैं। वही मुझे शांति देता है। सवाल: आपने स्पिरिचुअलिटी की तरफ भी काफी झुकाव दिखाया है?
जवाब: स्पिरिचुअलिटी कोई बहुत बड़ी या अलग चीज नहीं है। मैं पहले भी स्पिरिचुअल था, बस अब खुद के साथ ज्यादा अलाइन्ड हूं। जैसे-जैसे आप बड़े होते हैं, आपकी चाहतें बदलती हैं और आप खुद को ज्यादा समझने लगते हैं। मेरे लिए स्पिरिचुअलिटी का मतलब बस खुद के साथ ईमानदार होना है। सवाल: इस बार के कंटेस्टेंट्स को कैसे देखते हैं?
जवाब: मेरे लिए यह शो हमेशा एक बहुत बड़ा सपोर्ट सिस्टम रहा है। ऋत्विक धनजानी मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं और उनकी एनर्जी ऐसी है कि आप उनके आसपास कभी उदास नहीं रह सकते। हम बहुत मस्ती करते हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि इस बार भी हम फिनाले तक साथ पहुंचे और फिर वहीं मुकाबला हो। सवाल: जिंदगी का सबसे बड़ा रिस्क क्या लिया? जवाब: मुंबई आना। सवाल: सबसे खतरनाक अफवाह कौन सी लगी? जवाब: कि मैंने स्पिरिचुअल बनने के बाद काम छोड़ दिया है। सवाल: किसी कंटेस्टेंट के साथ बिना फोन के कहीं रुकना हो, तो कौन होगा? जवाब: ऋत्विक और वो किसी और को होने भी नहीं देगा। सवाल: आखिर में फैंस के लिए क्या कहना चाहेंगे?
जवाब: मैं बस यही कहना चाहता हूं कि ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ जरूर देखिए। आपने इतने सालों से हमें बहुत प्यार दिया है, बस वही प्यार बनाए रखिए। और जो नई ऑडियंस है, जिन्होंने शायद हमारा काम नहीं देखा, उनसे कहना चाहूंगा कि शो देखिए, हमारे साथ हंसिए, हम पर भी हंसिए। रोहित सर हैं, वो हमेशा संभाल लेंगे। सच कहूं तो ‘खतरों के खिलाड़ी’ का नाम आते ही सबसे पहले रोहित शेट्टी का चेहरा याद आता है।













































