Sunday, 08 Nov 2026 | 02:43 PM

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रूबियो बोले- भारत-ईरान के बीच ट्रेड डील की जानकारी नहीं:अमेरिकी विदेश मंत्री की चेतावनी- ईरान से ट्रेड करने वाले देशों पर भी प्रतिबंध लगाएंगे

रूबियो बोले- भारत-ईरान के बीच ट्रेड डील की जानकारी नहीं:अमेरिकी विदेश मंत्री की चेतावनी- ईरान से ट्रेड करने वाले देशों पर भी प्रतिबंध लगाएंगे

पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की मुलाकात के बाद अमेरिका ने भारत-ईरान व्यापार संबंधों को लेकर अपनी स्थिति साफ की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच फिलहाल किसी ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है। हालांकि, उन्होंने साथ ही चेतावनी दी कि अगर कोई देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करता है तो उस देश पर भी अमेरिका प्रतिबंध लगा सकता है। रुबियो ने एक इंटरव्यू के दौरान ये बात कही। अमेरिका का ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर बैन दरअसल, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 अहम क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। जिनका इस्तेमाल ईरान दूसरे देशों में अपनी आर्थिक गतिविधियों के लिए करता है। इनमें डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी), टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग सेक्टर शामिल हैं। अमेरिका इन क्षेत्रों के जरिए ईरान की कमाई और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को रोकना चाहता है। यानी अगर कोई देश इन क्षेत्रों में ईरान के साथ ऐसा कारोबार करता है जिससे उसे पैसा या आर्थिक फायदा मिलता है। तो अमेरिका उस देश पर भी प्रतिबंध लगा सकता है या उसे अमेरिकी डॉलर की वित्तीय व्यवस्था से बाहर कर सकता है। SCO में मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात के बाद आया है। दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंध, व्यापार और पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की। मोदी ने कहा था कि भारत ईरान के साथ अपने पुराने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और नए क्षेत्रों को इसमें शामिल करने पर भी जोर दिया गया था। पश्चिम एशिया के तनाव पर बातचीत BRICS और SCO में सहयोग जारी रखेगा भारत मोदी ने कहा था कि भारत BRICS और SCO जैसे मंचों पर ईरान के साथ सहयोग जारी रखेगा। उन्होंने पेजेश्कियन को 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने का न्योता भी दिया।

SCO Summit Bishkek LIVE | PM Modi Meets Putin & President Pezeshkian

SCO Summit Bishkek LIVE | PM Modi Meets Putin & President Pezeshkian

बिश्केक37 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम मोदी ने SCO में कई विश्व नेताओं से मुलाकात की। किर्गिस्तान बिश्केक में हो रहे SCO शिखर सम्मेलन का आज दूसरा दिन है। पीएम मोदी आज समिट को संबोधित कर सकते हैं। कल मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई देशों के नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकात की। बिश्केक में हो रहे SCO शिखर सम्मेलन में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान और ईरान समेत 10 सदस्य देशों के नेता शामिल हो रहे हैं। SCO समिट के पहले दिन की तस्वीरें… SCO समिट में पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने एक-दूसरे को गले लगा लिया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और मोदी एक ही कार में बैठकर नोमैड गेम्स के लिए रवाना हुए। अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान ने मोदी से मुलाकात की। किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जपरोव भी पीएम मोदी से मिले। मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से मुलाकात की। मोदी ने पुतिन को ब्रिक्स समिट में शामिल होने का न्योता दिया पीएम मोदी ने भारत में अगले महीने होने वाली ब्रिक्स समिट के लिए रूस के राष्ट्रपति पुतिन को न्योता दिया था। मोदी ने कहा था- “भारत कुछ दिनों बाद ब्रिक्स समिट का आयोजन कर रहा है। सभी सभी भारतीय आपका और आपके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक हैं।” पुतिन बोले- रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 7 गुना बढ़ी राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी से मुलाकात के बाद कहा- रूस में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या के मामले में भारत टॉप लिस्ट में शामिल है। पिछले कुछ सालों में यह संख्या 7 गुना बढ़कर 40,000 हो गई है। हम नियमित रूप से भारत और रूस के सांस्कृतिक उत्सव आयोजित करते हैं। हमारे बीच पर्यटकों का आना-जाना भी काफी होता है, जिसमें 16% की वृद्धि देखी गई है। पीएम ने प्रवासी भारतीयों से मुलाकात की पीएम मोदी ने किर्गिस्तान में भारत से जुड़े लोगों से मुलाकात की, जिनमें प्रवासी सदस्य, शिक्षाविद, शोधकर्ता, ITEC पूर्व छात्र और योग अभ्यासकर्ता शामिल थे। अगले साल पाकिस्तान को मिल सकती है मेजबानी यह SCO के 25 साल पूरे होने पर आयोजित ऐतिहासिक सम्मेलन है। यूरेशिया की सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से यह साल का सबसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय सम्मेलन माना जा रहा है। समिट के बाद किर्गिस्तान की अध्यक्षता समाप्त होगी और 2026–27 की अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंपे जाने की उम्मीद है। 2027 का SCO शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में प्रस्तावित है। ——————————————- ये खबर भी पढ़ें… किर्गिस्तान में पुतिन-मोदी की मुलाकात, दोनों लीडर गले मिले:PM ने BRICS के लिए न्योता दिया; एक ही कार में बैठकर नोमैड गेम्स सेरेमनी में पहुंचे पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई। यह बैठक करीब 10 मिनट चली। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

SCO Summit Bishkek LIVE | PM Modi Meets Putin & President Pezeshkian

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बिश्केक37 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम मोदी ने SCO में कई विश्व नेताओं से मुलाकात की। किर्गिस्तान बिश्केक में हो रहे SCO शिखर सम्मेलन का आज दूसरा दिन है। पीएम मोदी आज समिट को संबोधित कर सकते हैं। कल मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई देशों के नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकात की। बिश्केक में हो रहे SCO शिखर सम्मेलन में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान और ईरान समेत 10 सदस्य देशों के नेता शामिल हो रहे हैं। SCO समिट के पहले दिन की तस्वीरें… SCO समिट में पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने एक-दूसरे को गले लगा लिया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और मोदी एक ही कार में बैठकर नोमैड गेम्स के लिए रवाना हुए। अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान ने मोदी से मुलाकात की। किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जपरोव भी पीएम मोदी से मिले। मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से मुलाकात की। मोदी ने पुतिन को ब्रिक्स समिट में शामिल होने का न्योता दिया पीएम मोदी ने भारत में अगले महीने होने वाली ब्रिक्स समिट के लिए रूस के राष्ट्रपति पुतिन को न्योता दिया था। मोदी ने कहा था- “भारत कुछ दिनों बाद ब्रिक्स समिट का आयोजन कर रहा है। सभी सभी भारतीय आपका और आपके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक हैं।” पुतिन बोले- रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 7 गुना बढ़ी राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी से मुलाकात के बाद कहा- रूस में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या के मामले में भारत टॉप लिस्ट में शामिल है। पिछले कुछ सालों में यह संख्या 7 गुना बढ़कर 40,000 हो गई है। हम नियमित रूप से भारत और रूस के सांस्कृतिक उत्सव आयोजित करते हैं। हमारे बीच पर्यटकों का आना-जाना भी काफी होता है, जिसमें 16% की वृद्धि देखी गई है। पीएम ने प्रवासी भारतीयों से मुलाकात की पीएम मोदी ने किर्गिस्तान में भारत से जुड़े लोगों से मुलाकात की, जिनमें प्रवासी सदस्य, शिक्षाविद, शोधकर्ता, ITEC पूर्व छात्र और योग अभ्यासकर्ता शामिल थे। अगले साल पाकिस्तान को मिल सकती है मेजबानी यह SCO के 25 साल पूरे होने पर आयोजित ऐतिहासिक सम्मेलन है। यूरेशिया की सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से यह साल का सबसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय सम्मेलन माना जा रहा है। समिट के बाद किर्गिस्तान की अध्यक्षता समाप्त होगी और 2026–27 की अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंपे जाने की उम्मीद है। 2027 का SCO शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में प्रस्तावित है। ——————————————- ये खबर भी पढ़ें… किर्गिस्तान में पुतिन-मोदी की मुलाकात, दोनों लीडर गले मिले:PM ने BRICS के लिए न्योता दिया; एक ही कार में बैठकर नोमैड गेम्स सेरेमनी में पहुंचे पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई। यह बैठक करीब 10 मिनट चली। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी ने छात्रों से बात की:स्टूडेंट्स ने हिंदी में सुनाया कविताएं; मोदी बोले- ये मेरे दिल की भावनाएं जैसी

उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी ने छात्रों से बात की:स्टूडेंट्स ने हिंदी में सुनाया कविताएं; मोदी बोले- ये मेरे दिल की भावनाएं जैसी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के दो दिवसीय दौरे के दौरान ताशकंद स्थित महात्मा गांधी सेंटर का दौरा किया। यहां उज्बेक छात्रों ने हिंदी में उनकी लिखी कविताओं की कुछ पंक्तियां सुनाईं। अपनी कविताएं छात्रों की आवाज में सुनकर मोदी भावुक हो गए और कहा कि हिंदी उनकी मातृभाषा नहीं होने के बावजूद छात्रों ने कविताओं की भावनाओं को बिल्कुल उसी तरह व्यक्त किया, जैसी भावनाएं उनके दिल में थीं। इस दौरान मोदी ने उज्बेकिस्तान में भारत, महात्मा गांधी और तमिल संस्कृति को लेकर बढ़ती रुचि का जिक्र किया और तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में अनुवाद करने का सुझाव दिया। वहीं, उनकी यात्रा के दौरान दोनों देशों के रिश्ते कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक पहुंचे और 11 समझौतों का आदान-प्रदान हुआ। उज्बेकिस्तान में भारतीय संस्कृति का बढ़ा प्रभाव कार्यक्रम में एक उज्बेक इंडोलॉजिस्ट ने कहा कि शायद दुनिया में बहुत कम ऐसे देश होंगे जहां लोगों में भारत को लेकर इतना प्यार है। उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान में लगभग हर नागरिक ‘नमस्ते’ शब्द से परिचित है। यह भी बताया कि उज्बेकिस्तान में भारतीय कला, नृत्य, संगीत, दर्शन और योग को लेकर भी लोगों की रुचि बढ़ रही है। तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में हो अनुवाद PM मोदी ने तमिल साहित्य और ‘तिरुक्कुरल’ का भी जिक्र किया। उन्होंने संस्थान की 80वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए पूछा कि क्या तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में अनुवाद करने की दिशा में काम किया जा सकता है। कार्यक्रम में मौजूद वक्ता ने जवाब दिया कि इसके लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। मोदी ने कहा कि तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में अनुवाद होने से भारतीय दर्शन और विचारों को समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि दुनिया की प्राचीन भाषाओं में मौजूद दार्शनिक विचार यह बताते हैं कि सभ्यता की शुरुआत से ही मानव सोच कितनी गहरी रही है। खबर अपडे़ट हो रही है…

PM Modi, Putin & Jinping Meeting Updates

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बिश्केक9 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम मोदी रविवार रात किर्गिस्तान पहुंचे। 26वां SCO समिट 31 अगस्त से 1 सितंबर को बिशकेक में होगा। इस समिट की मेजबानी किर्गिस्तान करेगा और अध्यक्षता सादिर जापारोव करेंगे। यह SCO के 25 साल पूरे होने पर आयोजित सम्मेलन है। इस बार की थीम है- सतत शांति, विकास और समृद्धि के लिए साथ मिलकर आगे बढ़ना। इस समिट में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान समेत 10 सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे। PM मोदी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। मोदी रविवार शाम को ही उज्बेकिस्तान की 2 दिन की यात्रा पूरी करने के बाद शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) समिट में शामिल होने के लिए किर्गिस्तान रवाना हो गए थे। 2017 में भारत और पाकिस्तान पूर्ण सदस्य बने। फिर 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात करेंगे। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। 4 पॉइंट में जानें भारत के लिए SCO समिट अहम क्यों… खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। शंघाई को-ऑपरेशन समिट (SCO) क्या है… शंघाई को-ऑपरेशन समिट की स्थापना 15 जून 2001 को चीन के शंघाई शहर में हुई थी।शुरुआत में इसके 6 सदस्य देश थे- चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान। आज SCO दुनिया के सबसे बड़े क्षेत्रीय संगठनों में शामिल है, जिसमें 10 पूर्ण सदस्य देश हैं।इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षा, आतंकवाद का विरोध, आर्थिक सहयोग, संपर्क और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाना है। अगले साल पाकिस्तान को मिल सकती है मेजबानी यह SCO के 25 साल पूरे होने पर आयोजित ऐतिहासिक सम्मेलन है। यूरेशिया की सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से यह साल का सबसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय सम्मेलन माना जा रहा है। समिट के बाद किर्गिस्तान की अध्यक्षता समाप्त होगी और 2026–27 की अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंपे जाने की उम्मीद है। 2027 का SCO शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में प्रस्तावित है। 2025 तियानजिन डिक्लरेशन में पहलगाम हमले की निंदा हुई थी तस्वीर 1 सितंबर 2025 की है, जब पुतिन, मोदी और जिनपिंग किसी मुद्दे पर चर्चा करते दिख रहे थे। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद का तियानजिन घोषणा-पत्र में कहा गया था- “सदस्य देशों ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने मृतकों और घायलों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना और सहानुभूति व्यक्त की। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे हमलों के दोषियों, आयोजकों और प्रायोजकों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।” ——————————— पीएम मोदी के उज्बेकिस्तान दौरे से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… PM मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान: यह उन्हें मिला 36वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान उज्बेकिस्तान के दौरे पर गए पीएम मोदी को रविवार को राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने अपने देश के सर्वोच्च राज्य सम्मान ‘ओली दाराजली दोस्लिक’ से सम्मानित किया। उज्बेक भाषा के इस शब्द का मतलब है- उच्च स्तरीय मित्रता। यह पीएम मोदी को मिला 36वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। रविवार रात पीएम उज्बेकिस्तान से रवाना हो किर्गिस्तान पहुंच चुके हैं। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

PM Modi, Putin & Jinping Meeting Updates

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बिश्केक44 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम मोदी रविवार रात किर्गिस्तान पहुंचे। 26वां SCO समिट 31 अगस्त से 1 सितंबर को बिशकेक में होगा। इस समिट की मेजबानी किर्गिस्तान करेगा और अध्यक्षता सादिर जापारोव करेंगे। यह SCO के 25 साल पूरे होने पर आयोजित सम्मेलन है। इस बार की थीम है- सतत शांति, विकास और समृद्धि के लिए साथ मिलकर आगे बढ़ना। इस समिट में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान समेत 10 सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे। PM मोदी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। मोदी रविवार शाम को ही उज्बेकिस्तान की 2 दिन की यात्रा पूरी करने के बाद शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) समिट में शामिल होने के लिए किर्गिस्तान रवाना हो गए थे। 2017 में भारत और पाकिस्तान पूर्ण सदस्य बने। फिर 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात करेंगे। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। 4 पॉइंट में जानें भारत के लिए SCO समिट अहम क्यों… खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। शंघाई को-ऑपरेशन समिट (SCO) क्या है… शंघाई को-ऑपरेशन समिट की स्थापना 15 जून 2001 को चीन के शंघाई शहर में हुई थी।शुरुआत में इसके 6 सदस्य देश थे- चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान। आज SCO दुनिया के सबसे बड़े क्षेत्रीय संगठनों में शामिल है, जिसमें 10 पूर्ण सदस्य देश हैं।इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षा, आतंकवाद का विरोध, आर्थिक सहयोग, संपर्क और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाना है। अगले साल पाकिस्तान को मिल सकती है मेजबानी यह SCO के 25 साल पूरे होने पर आयोजित ऐतिहासिक सम्मेलन है। यूरेशिया की सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से यह साल का सबसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय सम्मेलन माना जा रहा है। समिट के बाद किर्गिस्तान की अध्यक्षता समाप्त होगी और 2026–27 की अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंपे जाने की उम्मीद है। 2027 का SCO शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में प्रस्तावित है। 2025 तियानजिन डिक्लरेशन में पहलगाम हमले की निंदा हुई थी तस्वीर 1 सितंबर 2025 की है, जब पुतिन, मोदी और जिनपिंग किसी मुद्दे पर चर्चा करते दिख रहे थे। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद का तियानजिन घोषणा-पत्र में कहा गया था- “सदस्य देशों ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने मृतकों और घायलों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना और सहानुभूति व्यक्त की। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे हमलों के दोषियों, आयोजकों और प्रायोजकों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।” ——————————— पीएम मोदी के उज्बेकिस्तान दौरे से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… PM मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान: यह उन्हें मिला 36वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान उज्बेकिस्तान के दौरे पर गए पीएम मोदी को रविवार को राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने अपने देश के सर्वोच्च राज्य सम्मान ‘ओली दाराजली दोस्लिक’ से सम्मानित किया। उज्बेक भाषा के इस शब्द का मतलब है- उच्च स्तरीय मित्रता। यह पीएम मोदी को मिला 36वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। रविवार रात पीएम उज्बेकिस्तान से रवाना हो किर्गिस्तान पहुंच चुके हैं। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

PM Modi Uzbekistan Visit | Tashkent Meeting With President Shavkat Mirziyoyev

PM Modi Uzbekistan Visit | Tashkent Meeting With President Shavkat Mirziyoyev

Hindi News National PM Modi Uzbekistan Visit | Tashkent Meeting With President Shavkat Mirziyoyev 4 घंटे पहले कॉपी लिंक पीएम नरेंद्र मोदी दो दिन के उज्बेकिस्तान दौरे पर है। आज पीएम ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी सेंटर जाएंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। इसके बाद किर्गिस्तान के बिश्केक रवाना होंगे। मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा, 4 तस्वीरें ताशकंद में पीएम नरेंद्र मोदी भारतीय समुदाय के लोगों से मिले। इस दौरान कुछ महिलाओं ने पीएम मोदी की कलाई पर राखी बांधी। पीएम मोदी को एयरपोर्ट पर गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया गया। पीएम मोदी ताशकंद एयरपोर्ट से राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ एक ही कार में बैठकर निकले। मोदी उज्बेकिस्तान के सबसे मशहूर यांगी उज्बेकिस्तान पार्क पहुंचे। उन्होंने स्मारक स्तंभ के बाहर तस्वीर खिंचवाई। किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे यह तस्वीर पीएम मोदी के 2022 के उज्बेकिस्तान दौरे की है। तब समरकंद में SCO समिट का आयोजन किया गया था। 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना। SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है। =========== ये खबर भी पढ़ें उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी को महिलाओं ने राखी बांधी, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ एक ही कार में रवाना हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचे। एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने उनका स्वागत किया। दोनों नेता एक ही कार में एयरपोर्ट से होटल पहुंचे। पीएम मोदी ने यहां भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। इस दौरान महिलाओं ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी उज्बेकिस्तान में दो दिन रहेंगे। वे राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

PM Modi Uzbekistan Visit | Tashkent Meeting With President Shavkat Mirziyoyev

PM Modi Uzbekistan Visit | Tashkent Meeting With President Shavkat Mirziyoyev

Hindi News National PM Modi Uzbekistan Visit | Tashkent Meeting With President Shavkat Mirziyoyev 5 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम नरेंद्र मोदी दो दिन के उज्बेकिस्तान दौरे पर है। आज पीएम ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी सेंटर जाएंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। इसके बाद किर्गिस्तान के बिश्केक रवाना होंगे। मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा, 4 तस्वीरें ताशकंद में पीएम नरेंद्र मोदी भारतीय समुदाय के लोगों से मिले। इस दौरान कुछ महिलाओं ने पीएम मोदी की कलाई पर राखी बांधी। पीएम मोदी को एयरपोर्ट पर गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया गया। पीएम मोदी ताशकंद एयरपोर्ट से राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ एक ही कार में बैठकर निकले। मोदी उज्बेकिस्तान के सबसे मशहूर यांगी उज्बेकिस्तान पार्क पहुंचे। उन्होंने स्मारक स्तंभ के बाहर तस्वीर खिंचवाई। किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे यह तस्वीर पीएम मोदी के 2022 के उज्बेकिस्तान दौरे की है। तब समरकंद में SCO समिट का आयोजन किया गया था। 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना। SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है। =========== ये खबर भी पढ़ें उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी को महिलाओं ने राखी बांधी, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ एक ही कार में रवाना हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचे। एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने उनका स्वागत किया। दोनों नेता एक ही कार में एयरपोर्ट से होटल पहुंचे। पीएम मोदी ने यहां भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। इस दौरान महिलाओं ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी उज्बेकिस्तान में दो दिन रहेंगे। वे राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

मोदी 4 साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर रवाना:पहले उज्बेकिस्तान जाएंगे, फिर किर्गिस्तान में SCO समिट में हिस्सा लेंगे; जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात संभव

मोदी 4 साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर रवाना:पहले उज्बेकिस्तान जाएंगे, फिर किर्गिस्तान में SCO समिट में हिस्सा लेंगे; जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात संभव

पीएम मोदी शनिवार सुबह दो देशों के लिए दिल्ली से रवाना हुए। उनका यह चार दिन का दौरा होगा। पहले वे उज्बेकिस्तान जाएंगे फिर किर्गिस्तान का दौरा करेंगे। पीएम चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर जा रहे हैं। वे किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 26वीं समिट में भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई नेताओं के साथ मुलाकात कर सकते हैं। उज्बेकिस्तान दौरा: पीएम की द्विपक्षीय बातचीत, लाल बहादुर स्मारक भी जाएंगे मोदी 29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में रहेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। मोदी ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी सेंटर का भी दौरा कर सकते हैं। किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। उज्बेकिस्तान से जुड़ी 5 खास बातें 1. डबल-लैंडलॉक्ड देश उज्बेकिस्तान समुद्र से पूरी तरह कटा हुआ है। इसके सभी पड़ोसी देश भी लैंडलॉक्ड हैं। दुनिया में ऐसे देशों की संख्या बहुत कम है। 2. समरकंद का गौरवशाली इतिहास करीब 2700 साल पुराना समरकंद कभी सिल्क रूट का प्रमुख शहर था। एशिया और यूरोप के बीच व्यापार करने वाले यहां से गुजरते थे। 3. सोने का बड़ा उत्पादक उज्बेकिस्तान दुनिया का 10वां सबसे बड़ा सोने का उत्पादक देश है। यहां स्थित मुरुंतौ (Muruntau) दुनिया की सबसे बड़ी ओपन-पिट सोने की खदानों में से एक है। 4. बाबर की जन्मभूमि मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का जन्म 1483 में अंदीजान शहर में हुआ था। बाबर बाद में काबुल होते हुए भारत आया और 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई जीतकर मुगल साम्राज्य की नींव रखी। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। ———————————-

PM Modi Central Asia Visit

मोदी 4 साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर रवाना:पहले उज्बेकिस्तान जाएंगे, फिर किर्गिस्तान में SCO समिट में हिस्सा लेंगे; जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात संभव

12 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम मोदी शनिवार सुबह दो देशों के लिए दिल्ली से रवाना हुए। उनका यह चार दिन का दौरा होगा। पहले वे उज्बेकिस्तान जाएंगे फिर किर्गीजस्तान का दौरा करेंगे। पीएम चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर जा रहे हैं। वे किर्गीजस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 26वीं समिट में भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई नेताओं के साथ मुलाकात कर सकते हैं। उज्बेकिस्तान दौरा: पीएम की द्विपक्षीय बातचीत, लाल बहादुर स्मारक भी जाएंगे मोदी 29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में रहेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। मोदी ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी सेंटर का भी दौरा कर सकते हैं। किर्गीजस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गीजस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे यह तस्वीर पीएम मोदी के 2022 के उज्बेकिस्तान दौरे की है। तब समरकंद में SCO समिट का आयोजन किया गया था। 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना। SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है। ———————————- दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔