Thursday, 30 Jul 2026 | 12:16 PM

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Will Making FAQs; Testament Legal Documents List & Process Explained

Will Making FAQs; Testament Legal Documents List & Process Explained

Hindi News Lifestyle Will Making FAQs; Testament Legal Documents List & Process Explained | Vasiyat 38 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक लोग जीवन भर भागदौड़ करते हैं, ताकि अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर सकें और संपत्ति बना सकें। लेकिन इस सबके बीच अक्सर यह तय करना भूल जाते हैं कि उनके बाद इस संपत्ति का क्या होगा? इसका सबसे अच्छा हल है, वसीयत। यह एक कानूनी डॉक्यूमेंट है, जिसमें व्यक्ति ये तय करता है कि उसकी संपत्ति, बैंक बैलेंस, निवेश और अन्य कीमती चीजें उसके बाद किसे मिलेंगी। वसीयत परिवार को विवाद, तनाव और कानूनी झंझटों से भी बचा सकती है। आज ‘आपका पैसा‘ कॉलम में वसीयत की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- वसीयत बनाना क्यों जरूरी है? इसका कंप्लीट प्रोसेस क्या है? एक्सपर्ट: रुद्र विक्रम सिंह, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट सवाल- वसीयत क्या होती है? जवाब- वसीयत एक लिखित कानूनी डॉक्यूमेंट है, जिसमें व्यक्ति ये स्पष्ट निर्देश देता है कि मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति का मालिक कौन होगा। इसमें बैंक बैलेंस, प्रॉपर्टी, निवेश, गहने और अन्य संपत्तियों का बंटवारा तय किया जाता है। सवाल- वसीयत कौन बना सकता है? जवाब- भारत में कोई भी व्यक्ति, जिसकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक है और जो मानसिक रूप से स्वस्थ है, वसीयत बना सकता है। हालांकि, व्यक्ति को यह साबित करने में सक्षम होना चाहिए कि उसने यह डॉक्यूमेंट किसी दबाव, धोखे या लालच के बिना तैयार किया है। सवाल- वसीयत बनाना क्यों जरूरी है? जवाब- इससे व्यक्ति ये तय कर सकता है कि मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति का मालिक कौन होगा। अगर वसीयत न बनाई जाए तो कानून अपने हिसाब से संपत्ति का बंटवारा करता है, जो व्यक्ति की इच्छाओं के खिलाफ भी हो सकता है। इसके अलावा वसीयत से परिवार में विवाद की आशंका कम हो जाती है और कानूनी प्रक्रिया भी सरल हो जाती है। यह खासतौर पर तब और भी जरूरी है, जब परिवार के कई सदस्य संपत्ति के दावेदार हों। इसके सभी फायदे ग्राफिक में देखिए- सवाल- वसीयत कैसे लिखें? जवाब- वसीयत लिखने का कोई तय फॉर्मेट नहीं होता, लेकिन इसमें कुछ नियमों को फॉलो करना जरूरी है। जैसेकि- सबसे पहले व्यक्ति को यह घोषित करना होता है कि वसीयत लिखते समय वह दिमागी रूप से स्वस्थ है और इसे बिना किसी दबाव के लिख रहा है। इसके बाद उसे अपनी सभी संपत्तियों की सूची तैयार करनी होती है। वसीयत के कागज पर यह स्पष्ट रूप से लिखना जरूरी है कि कौन-सी संपत्ति किसे दी जानी है। अगर बच्चे नाबालिग हैं, तो वसीयतनामा पर गार्जियन का नाम लिखना जरूरी है, जो संपत्ति की रक्षा करेगा। बच्चों के बालिग होने पर उन्हें सौंपेगा। इसका पूरा प्रोसेस ग्राफिक से समझिए- सवाल- वसीयत में कौन-कौन सी जानकारी होनी चाहिए? जवाब- वसीयत में आपकी पर्सनल और फाइनेंशियल जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए। इसमें वसीयत लिख रहे व्यक्ति का पूरा नाम, जन्मतिथि, पता और पहचान संबंधी जानकारी होनी चाहिए। यह जानकारी आधार और पैन कार्ड के मुताबिक होनी चाहिए। इसमें अपनी सभी चल और अचल संपत्तियों का विवरण देना जरूरी है, जैसे घर, जमीन, बैंक अकाउंट, निवेश आदि। इसमें और कौन-कौन सी जानकारियां जरूरी हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या वसीयत रजिस्टर कराना जरूरी है? जवाब- भारत में वसीयत को रजिस्टर कराना अनिवार्य नहीं है। आप इसे साधारण कागज पर लिखकर भी कानूनी रूप से वैध बना सकते हैं, बशर्ते सभी आवश्यक शर्तें पूरी की गई हों। हालांकि, वसीयत का रजिस्ट्रेशन करवाने से इसकी प्रामाणिकता बढ़ जाती है और भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में इसे चुनौती देना मुश्किल होता है। रजिस्ट्रेशन से डॉक्यूमेंट्स सुरक्षित रहते हैं और इससे छेड़छाड़ की आशंका कम हो जाती है। सवाल- वसीयत में कौन-कौन से कानूनी शब्द होते हैं? इनका क्या मतलब है? जवाब- इसमें कई महत्वपूर्ण कानूनी शब्द होते हैं। आइए इन्हें एक-एक करके समझते हैं। टेस्टेटर- जो व्यक्ति वसीयत बना रहा है। एग्जीक्यूटर- जो व्यक्ति वसीयत को लागू करेगा। बेनिफिशियरी- जिसे/जिन्हें संपत्ति मिलेगी। कोडोसिल- वसीयत में किया गया बदलाव या सुधार। प्रोबेट- अदालत द्वारा वसीयत की पुष्टि। इंटेस्टेट- अगर किसी व्यक्ति की वसीयत लिखे बिना मृत्यु हो जाती है। सवाल- डिजिटल वसीयत (Digital Will) क्या है? जवाब- डिजिटल वसीयत एक ऐसा डॉक्यूमेंट है, जो अक्सर ऑनलाइन सुरक्षित रखा जाता है। इसमें यह लिखा होता है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति की डिजिटल संपत्तियां किसे मिलेंगी, जैसे- सोशल मीडिया अकाउंट क्रिप्टोकरेंसी क्लाउड फाइल्स ईमेल अकाउंट ऑनलाइन बैंकिंग अकाउंट डिजिटल वॉलेट इसमें यह स्पष्ट किया जाता है कि इन अकाउंट्स का एक्सेस किन लोगों को मिलेगा। यह आधुनिक समय में उतनी ही जरूरी है, जितनी पारंपरिक वसीयत। सवाल- अगर वसीयत न लिखी गई हो तो क्या होगा? जवाब- अगर वसीयत लिखे बिना ही किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसकी संपत्ति का बंटवारा कानून के अनुसार होता है। हिन्दू उत्तराधिकार कानून- हिंदुओं के लिए। इंडियन सक्सेशन एक्ट- ईसाइयों और पारसियों के लिए। शरीयत कानून- मुसलमानों के लिए। इस स्थिति में व्यक्तिगत इच्छाओं का कोई महत्व नहीं दिया जाता और संपत्ति तय कानूनी नियमों के अनुसार बांटी जाती है। सवाल- क्या वसीयत बदली जा सकती है? जवाब- हां, वसीयत को जीवित रहते किसी भी समय बदला जा सकता है। अगर आपकी संपत्ति, पारिवारिक स्थिति या इच्छाओं में बदलाव आता है तो आप नई वसीयत बना सकते हैं। इसमें संशोधन भी किया जा सकता है। नई वसीयत बनाते ही पुरानी अपने आप निरस्त हो जाती है। संशोधन करते समय भी नई वसीयत की तरह ही पूरी प्रक्रिया अपनानी होती है। सवाल- क्या नॉमिनी ही वसीयत का असली मालिक होता है? जवाब- नहीं, नॉमिनी केवल ट्रस्टी होता है, वह असली मालिक नहीं होता है। उसका काम संपत्ति को सुरक्षित रखना और उसे सही वारिस तक पहुंचाना होता है। कानूनी मालिक वही होता है, जिसका नाम वसीयत में बेनीफिशियरी के रूप में लिखा होता है। सवाल- क्या वसीयत को चुनौती दी जा सकती है? जवाब- हां, वसीयत को चुनौती दी जा सकती है, लेकिन यह सिर्फ सीमित परिस्थितियों में होता है, जैसे- अगर दबाव बनाकर वसीयत लिखवाई गई हो। अगर धोखाधड़ी की गई हो। अगर मानसिक अस्थिरता में वसीयत लिखवाई गई हो। अगर गवाह मुकर जाएं। अगर डॉक्यूमेंट्स अस्पष्ट हैं। इसलिए इसे साफ भाषा, सही प्रक्रिया और

Flu Virus Symptoms; Cold Cough Transmission Process

Flu Virus Symptoms; Cold Cough Transmission Process

Hindi News Lifestyle Flu Virus Symptoms; Cold Cough Transmission Process | Treatment & Precautions 3 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक फर्ज करिए, आप ऑफिस में हैं। आपके पास बैठे किसी साथी को लगातार छींक आ रही है। कुछ समय बाद आपको भी गले में खराश, सिरदर्द और बुखार महसूस होने लगता है। इसका कारण इन्फ्लुएंजा यानी फ्लू वायरस हो सकता है, जो हवा के जरिए तेजी से फैलता है। बंद और कम हवादार जगहों में यह खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि बंद कमरे में वायरस लंबे समय तक हवा में तैरते रहते हैं और सक्रिय बने रहते हैं। भारत में हर साल मौसम बदलने के दौरान फ्लू के मामले तेजी से बढ़ते हैं। आमतौर पर यह एक हल्का संक्रमण है। लेकिन लापरवाही बरतने पर गंभीर रूप भी ले सकता है। हालांकि सही जानकारी, समय पर इलाज और कुछ सावधानियां अपनाकर फ्लू से बचा जा सकता है। तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम फ्लू के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- सर्दी-जुकाम-खांसी का वायरस हवा में कैसे ट्रैवल करता है? फ्लू से बचाव के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. अंकित बंसल, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन एंड इनफेक्शियस डिजीज, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- अगर हमारे आसपास कोई छींके या खांसे तो अगले दिन हमें भी सर्दी-जुकाम हो जाता है? ऐसा क्यों? जवाब- एक-दूसरे से संपर्क ही इसका मुख्य कारण है। इसे नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए- जब कोई व्यक्ति छींकता या खांसता है, तो उसके मुंह और नाक से निकले वायरस हवा में फैल जाते हैं। अगर हम उसी एनवायर्नमेंट में सांस लेते हैं या संक्रमित सतह को छूकर आंख, नाक या मुंह को छू लेते हैं, तो वायरस हमारे शरीर में प्रवेश कर सकता है। सर्दी-जुकाम के वायरस बहुत तेजी से फैलते हैं और इनका इन्क्यूबेशन पीरियड (लक्षण उभरने का समय) आमतौर पर 1–3 दिन होता है। इसलिए अक्सर अगले दिन या कुछ ही दिनों में गले में खराश, नाक बहना या छींक जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। सवाल- सर्दी-जुकाम-खांसी का वायरस हवा में कैसे ट्रैवल करता है? जवाब- जब कोई व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है, तो उसके मुंह और नाक से बहुत छोटी-छोटी बूंदें (ड्रॉपलेट्स) और सूक्ष्म कण (एरोसोल) हवा में निकलते हैं। इन वाटर ड्रॉपलेट्स में वायरस मौजूद होता है। हैवी ड्रॉपलेट्स कुछ ही सेकेंड में सतह पर गिर जाती हैं। लेकिन हल्के एरोसोल हवा में कुछ समय तक मौजूद रहते हैं। अगर दूसरा व्यक्ति उसी हवा में सांस लेता है तो वायरस रेस्पिरेटरी सिस्टम में पहुंचकर संक्रमण पैदा कर सकता है। यही वजह है कि भीड़भाड़ और बंद जगहों में संक्रमण तेजी से फैलता है। सवाल- क्या फ्लू वायरस इंफेक्टेड सतह को छूने से भी फ्लू हो सकता है? जवाब- हां, फ्लू वायरस कई घंटों तक दरवाजे के हैंडल, मोबाइल, टेबल या कीबोर्ड जैसी सतहों पर सक्रिय रह सकता है। संक्रमित सतह छूने के बाद बिना हाथ धोए आंख, नाक या मुंह को छूते हैं, तो वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है। सवाल- इसके अलावा और किन-किन तरीकों से फ्लू फैल सकता है? जवाब- फ्लू सिर्फ हवा या छूने से ही नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की कुछ आदतों के जरिए भी फैल सकता है। अक्सर हम इन आदतों पर ध्यान नहीं देते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- क्या किसी फ्लू इन्फेक्टेड व्यक्ति के संपर्क में आने पर 100% फ्लू होता ही है? जवाब- नहीं, ऐसा जरूरी नहीं है। संक्रमण का जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि- आपकी इम्यूनिटी कैसी है? आपने फ्लू वैक्सीन ली है या नहीं? संपर्क कैसा और कितनी देर था? क्या आपने मास्क पहनने या हाथों की साफ-सफाई जैसे सेफ्टी मेजर्स अपनाए थे? मजबूत इम्यूनिटी और सावधानियां संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं। सवाल- क्या ऐसा भी हो सकता है कि किसी को फ्लू हो, लेकिन उसका कोई लक्षण न दिख रहा हो जैसेकि छींक, खांसी, नाक बहना आदि? जवाब- हां, ऐसा संभव है। कई बार व्यक्ति के शरीर में फ्लू वायरस मौजूद होता है, लेकिन कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते हैं। इस दौरान वह स्वस्थ महसूस कर सकता है, फिर भी दूसरों में संक्रमण फैला सकता है। सवाल- फ्लू से बचाव के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? जवाब- फ्लू से बचाव के लिए रोजमर्रा की आदतों में थोड़े से बदलाव बहुत असरदार साबित हो सकते हैं। साफ-सफाई, पर्याप्त दूरी और मजबूत इम्यूनिटी से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- क्या फ्लू का टीका लगवाना उपयोगी होता है? जवाब- हां, यह फ्लू होने के खतरे को कम करता है। अगर संक्रमण हो भी जाए तो बीमारी को गंभीर होने से रोकता है। सवाल- अगर किसी को फ्लू हो जाए तो क्या करना चाहिए? जवाब- फ्लू होने पर शरीर को आराम देना बेहद जरूरी है। सही देखभाल और समय पर सावधानी रखने से रिकवरी तेज होती है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- फ्लू आमतौर पर कितने दिनों में ठीक हो जाता है? जवाब- ज्यादातर मामलों में फ्लू के लक्षण 5-7 दिनों में कम हो सकते हैं। इसके बावजूद थकान और कमजोरी कई दिनों तक बनी रह सकती है। पूरी तरह रिकवरी में 10-15 दिन तक का समय लग सकता है। सवाल- अगर फ्लू का सही समय पर इलाज न किया जाए तो क्या समस्याएं हो सकती हैं? जवाब- इलाज में देरी होने पर फ्लू गंभीर रूप ले सकता है। जैसेकि- तेज बुखार लंबे समय तक बना रह सकता है। शरीर में कमजोरी बढ़ सकती है। कुछ मामलों में संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचकर निमोनिया, सांस लेने में दिक्कत या ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों (जैसे डायबिटिक या अस्थमेटिक लोग) में स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है। इसलिए लक्षण बढ़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सवाल- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाना जरूरी होता है? जवाब- कुछ स्थितियों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। जैसेकि- अगर बुखार 102°F से ज्यादा हो और दो दिन से अधिक समय तक बना रहे। सांस लेने में परेशानी हो। तेज सिरदर्द हो या सीने