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Not every cold treat is ice cream; FSSAI tightens regulations, India’s frozen dessert market surpasses ₹31,000 crore

Not every cold treat is ice cream; FSSAI tightens regulations, India's frozen dessert market surpasses ₹31,000 crore

Hindi News Business Not Every Cold Treat Is Ice Cream; FSSAI Tightens Regulations, India’s Frozen Dessert Market Surpasses ₹31,000 Crore मुंबई6 मिनट पहले कॉपी लिंक मई 2025 में मैग्नम आइसक्रीम कंपनी (क्वालिटी वॉल्स की मूल कंपनी) के सीईओ ने घोषणा की थी कि भारत में पूरे पोर्टफोलियो को डेयरी-बेस्ड प्रोडक्ट्स में बदला जाएगा।- प्रतीकात्मक इमेज गर्मियों में ज्यादातर लोग हाथ में कोई न कोई ‘फ्रोजन ट्रीट’ थामे दिखता है। इस बात की ज्यादा संभावना है कि यह “आइसक्रीम’ नहीं, बल्कि “फ्रोजन डेजर्ट’ हो। दोनों एक जैसे दिखते हैं, पर बनते अलग तरह से हैं। लेबल पर यह जानकारी इतनी बारीक होती है कि शायद ही कोई पढ़ पाए। खाद्य नियामक एफएसएसएआई के मुताबिक, ‘आइसक्रीम’ केवल वही है, जिसमें फैट का स्रोत दूध या डेयरी प्रोडक्ट हो। जिनमें मिल्क फैट की जगह पाम ऑयल या अन्य वेजिटेबल ऑयल/फैट का इस्तेमाल किया गया हो, उन्हें ‘फ्रोजन डेजर्ट’ या ‘फ्रोजन कन्फेक्शन’ के तौर पर बेचना अनिवार्य है। अब बढ़ती जागरूकता की वजह से कंपनियां खुद बदलाव करने लगी हैं। 9 साल में दोगुना हो जाएगा भारत में फ्रोजन डेजर्ट बाजार – आईएमएआरसी 2025 में 30,000 करोड़ के आसपास रहा कुल कारोबार 2034 60,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान (सालाना 7.4% की दर से बढ़ रहा यह कारोबार) … पर डेयरी-आधारित आइसक्रीम मार्केट 4 गुना हो जाएगा 2025 में ₹ 31,276 करोड़ का बाजार 2034 में 1,19,000 लाख करोड़ का होगा (सालाना 16% की वृद्धि दर) नोट: सालाना वृद्धि सीएजीआर 2026-2034 स्रोत: आईएमएआरसी ग्रुप अब डेयरी प्रोडक्ट्स का रुख कर रहे उपभोक्ता ग्लोबल मार्केट रिसर्च फर्म आईएमएआरसी ग्रुप के मुताबिक, भारत में आइसक्रीम बाजार, फ्रोजन डेजर्ट के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा तेज रफ्तार (7.4% बनाम 16%) से बढ़ रहा है। यह बताता है कि उपभोक्ता अब डेयरी प्रोडक्ट्स की ओर लौट रहे हैं। इसी रुझान को देखते देसी-विदेशी कंपनियां आइसक्रीम पर फोकस करने लगी हैं। क्वालिटी वॉल्स इनमें शामिल है। – कुछ देसी-विदेशी ब्रांड्स व्हे प्रोटीन मिलाकर हेल्दी स्नैक बनाने का दावा करते हैं। – विशेषज्ञ इसे ‘हेल्थ हेलो’ कहते है, लोग ज्यादा खाते हैं। आइसक्रीम से सस्ते होते हैं फ्रोजन डेजर्ट, हेल्दी भी कम पहलू – आइसक्रीम – फ्रोजन डेजर्ट फैट का स्रोत – दूध/मक्खन/ क्रीम – पाम ऑयल/वेजिटेबल फैट कानूनी श्रेणी – डेयरी प्रोडक्ट – फ्रोजन कन्फेक्शन कीमत – अपेक्षाकृत ज्यादा – कम (कच्चा माल सस्ता) लेबल – आइसक्रीम (स्पष्ट) – ‘फ्रोजन डेजर्ट’ (बारीक प्रिंट) पोषण – प्रोटीन+कैल्शियम – कम पोषण कई कंपनियां पैकेट के सामने ‘आइसक्रीम’ और पीछे बारीक अक्षरों में ‘फ्रोजन डेजर्ट’ लिखती हैं। यह गैरकानूनी तो नहीं, पर भ्रामक है। आइस्क्रीम में देखें 1. फैट का स्रोत – ‘मिल्क फैट’ लिखा हो तो आइसक्रीम; ‘वेजिटेबल फैट/ऑयल’ हो तो फ्रोजन डेजर्ट। 2. हरा/लाल बिंदु – शाकाहारी/मांसाहारी की पहचान। देखें कि प्रोडक्ट आखिर किस श्रेणी में आता है। 3. सामग्री – घटते वजन के क्रम में होती है। पहले नंबर पर जो है, वही सबसे अधिक होता है। 4. FSSAI नंबर – 14 अंकों का लाइसेंस नंबर अनिवार्य है। 2025 से नई पहल केवल भारत में ‘फ्रोजन डेजर्ट’ बेच रही थी कंपनी मई 2025 में मैग्नम आइसक्रीम कंपनी (क्वालिटी वॉल्स की मूल कंपनी) के सीईओ ने घोषणा की थी कि भारत में पूरे पोर्टफोलियो को डेयरी-बेस्ड प्रोडक्ट्स में बदला जाएगा। कंपनी केवल भारत में वेजिटेबल फैट वाले प्रोडक्ट बेच रही थी, वैश्विक स्तर पर नहीं। माना जा रहा है कि उपभोक्ता जागरूकता और सोशल मीडिया पर दबाव इस फैसले की वजह रही। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Airfare Hike Case; Supreme Court Vs Airlines Ticket Price Regulations

Airfare Hike Case; Supreme Court Vs Airlines Ticket Price Regulations

Hindi News National Airfare Hike Case; Supreme Court Vs Airlines Ticket Price Regulations | Tushar Mehta 2 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि एक ही दिन, एक ही सेक्टर में उड़ान भरने वाली एक एयरलाइन कुछ अलग हवाई किराया लेती है जबकि दूसरी एयरलाइनल अलग किराया लेती है। इसे सही किया जाना चाहिए। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र सरकार से यात्रियों को राहत देने को कहा। इस पर केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार इस समस्या पर बहस नहीं कर रही है। इस मुद्दे को बिना किसी विरोध के मान रही है। 2024 का एक नया कानून लागू हो गया है और उससे जुड़े नियमों पर सलाह-मशविरा चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट सोशल एक्टिविस्ट एस लक्ष्मीनारायणन की दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। उन्होंने मांग की कि देश में एक मजबूत और स्वतंत्र रेगुलेटर बनाया जाए, जो एयरलाइनों के किराए और एक्स्ट्रा चार्जेस पर निगरानी रखे। बेंच ने मामले की सुनवाई 13 जुलाई को तय की। याचिकाकर्ता का दावा- नियम पहले, पालन नहीं हो रहा लक्ष्मीनारायणन के वकील रवींद्र श्रीवास्तव ने कहा कि एयरक्राफ्ट एक्ट 1937 के तहत नियम पहले से ही हैं लेकिन समस्या यह है कि पालन नहीं ​​किया गया। जब तक नए नियम नहीं बन जाते, पुराने नियम जारी रहेंगे। साथ ही कहा गया है कि अगर DGCA को लगता है कि किसी खास स्थिति में, एयरलाइंस बहुत ज्यादा किराया वसूल रही हैं, तो वह निर्देश जारी करेगा। बेंच ने श्रीवास्तव से केंद्र के फाइल किए गए काउंटर-एफिडेविट का जवाब देने को कहा और सॉलिसिटर जनरल की यह बात रिकॉर्ड की कि नई व्यवस्था के तहत नियम बनाने के लिए कंसल्टेशन प्रोसेस चल रहा है। 30 अप्रैल की सुनवाई में सरकार को फटकार लगाई थी इससे पहले 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने एक पिटीशन पर एफिडेविट फाइल न करने के लिए केंद्र की खिंचाई की थी, जिसमें भारत में प्राइवेट एयरलाइन्स के हवाई किराए और सहायक चार्ज में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करने के लिए रेगुलेटरी गाइडलाइंस की मांग की गई थी। कोर्ट ने केंद्र से एक एफिडेविट के साथ एक एप्लिकेशन फाइल करने को कहा था, जिसमें यह बताने के निर्देश दिए गए थे कि एफिडेविट फाइल क्यों नहीं किया गया है। इसके लिए और समय क्यों मांगा गया है। अनियमित हवाई किराए पर पहले भी फटकार लगा चुका सुप्रीम कोर्ट 23 फरवरी 2026: त्योहारों में हवाई किराया बढ़ाने पर जवाब मांगा था- सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में त्योहारों और इमरजेंसी हालातों में प्राइवेट एयरलाइंस के हवाई किराए बढ़ाने को लेकर चिंता जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि यह एक बहुत गंभीर चिंता का विषय है। वरना, हम 32 पिटीशन पर विचार नहीं करते। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि सिविल एविएशन मिनिस्ट्री इस मुद्दे पर विचार कर रही है। पढ़ें पूरी खबर… 17 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, DGCA और AERA से हवाई किराए की मनमानी पर जवाब मांगा- सुप्रीम कोर्ट ने देश में हवाई जहाज के किराए और एक्स्ट्रा टैक्स में होने वाले अचानक उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की जनहित याचिका पर कोर्ट ने केंद्र सरकार, DGCA और एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

AI Content Rules 2026; Social Media Deepfake Labelling Regulations

AI Content Rules 2026; Social Media Deepfake Labelling Regulations

नई दिल्ली14 घंटे पहले कॉपी लिंक अगर कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो एआई की मदद से बनाया गया है, तो उस पर ‘लेबल’ लगाना जरूरी कर दिया गया है। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट को शिकायत मिलने के महज 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। ये नए नियम 20 फरवरी 2026 से लागू हो गए हैं। 10 फरवरी को इसका नोटिफिकेशन जारी हुआ था। पीएम बोले- कंटेंट पर ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ की जरूरत इन नियमों के लागू होने से एक दिन पहले यानी, 19 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने AI समिट में भी लेबल को लेकर सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि जैसे खाने के सामान पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी लेबल होना चाहिए। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि क्या असली है और क्या फैब्रिकेटेड, यानी एआई से बनाया गया है। मेटाडेटा से छेड़छाड़ की तो डिलीट होगा पोस्ट 1. एआई लेबल: वीडियो पर ‘डिजिटल स्टैम्प’ जैसे खाने के पैकेट पर लिखा होता है कि वह ‘शाकाहारी’ है या ‘मांसाहारी’, ठीक वैसे ही अब हर एआई वीडियो, फोटो या ऑडियो पर एक लेबल लगा होगा। मान लीजिए आपने एआई से एक वीडियो बनाया जिसमें कोई नेता भाषण दे रहा है, तो उस वीडियो के कोने में साफ लिखा होना चाहिए- “AI जनरेटेड”। 2. टेक्निकल मार्कर: डिजिटल डीएनए मेटाडेटा को आप उस फाइल का ‘डिजिटल डीएनए’ मान सकते हैं। यह स्क्रीन पर तो नहीं दिखता, लेकिन फाइल की कोडिंग के अंदर छिपा होता है। इसमें यह जानकारी दर्ज होगी कि यह फोटो या वीडियो किस तारीख को बना, किस AI टूल से बना और किस प्लेटफॉर्म पर पहली बार अपलोड हुआ। अगर कोई एआई का इस्तेमाल करके अपराध करता है, तो पुलिस इस ‘टेक्निकल मार्कर’ के जरिए उसके असली सोर्स तक पहुंच सकेगी। 3. छेड़छाड़ पर रोक: मिटाया नहीं जा सकेगा लेबल पहले लोग एआई से बनी फोटो का कोना काटकर या एडिटिंग करके उसका ‘वॉटरमार्क’ हटा देते थे ताकि वह असली लगे। अब सरकार ने इसे गैर-कानूनी बना दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसी तकनीक अपनानी होगी कि अगर कोई उस लेबल या मेटाडेटा को हटाने की कोशिश करे, तो या तो वह कंटेंट ही डिलीट हो जाए। चाइल्ड पोर्नोग्राफी और डीपफेक पर सख्त एक्शन अगर AI का इस्तेमाल चाइल्ड पोर्नोग्राफी, अश्लीलता, धोखाधड़ी, हथियारों से जुड़ी जानकारी या किसी की नकल उतारने के लिए किया जाता है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा। नवंबर में रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था। सचिन तेंदुलकर का डीपफेक वीडियो, जिसमें वे गेमिंग ऐप को प्रमोट करते दिखे थे। 3 घंटे की डेडलाइन, पहले 36 घंटे का समय मिलता था आईटी नियमों में हुए नए बदलाव के बाद अब सोशल मीडिया कंपनियों के पास कार्रवाई के लिए बहुत कम समय होगा। पहले किसी गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने के लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था, जिसे अब घटाकर सिर्फ 3 घंटे कर दिया गया है। यूजर ने गलत जानकारी दी तो प्लेटफॉर्म जिम्मेदार अब जब भी कोई यूजर सोशल मीडिया पर कुछ अपलोड करेगा, तो प्लेटफॉर्म को उससे यह डिक्लेरेशन लेनी होगी कि क्या यह कंटेंट एआई से बनाया गया है। कंपनियों को ऐसे टूल्स तैनात करने होंगे जो यूजर के इस दावे की जांच कर सकें। अगर कोई प्लेटफॉर्म एआई कंटेंट को बिना डिस्क्लोजर के पब्लिश होने देता है, तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार माना जाएगा। केंद्र ने कहा- इससे इंटरनेट ज्यादा भरोसेमंद बनेगा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने साफ कहा कि ये स्टेप ‘ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट’ बनाने के लिए है। यह जनरेटिव AI से आने वाली मिस-इनफॉर्मेशन, इम्पर्सनेशन और इलेक्शन मैनिपुलेशन जैसी रिस्क्स को हैंडल करेगा। इससे इंटरनेट ज्यादा भरोसेमंद बनेगा। सरकार के नोटिफिकेशन में दिए जरूरी सवालों के जवाब… सेक्शन 1: नए नियम और उनके उद्देश्य 1. आईटी संशोधन नियम, 2026 क्या हैं? यह नियम 2021 के आईटी नियमों को मजबूत करते हैं, ताकि एआई द्वारा बनाई गई जानकारी (SGI) और ऑनलाइन होने वाले नुकसानों को रोका जा सके । 2. इन संशोधनों की जरूरत क्यों पड़ी? एआई के जरिए अब असली दिखने वाले डीपफेक बनाना आसान हो गया है । इनसे गलत सूचनाएं फैलने, पहचान चोरी होने और अश्लीलता (NCII) जैसे खतरों को रोकने के लिए ये नियम लाए गए हैं। ये नियम 20 फरवरी, 2026 से पूरे देश में लागू हो चुके हैं । सेक्शन 2: मुख्य परिभाषाएं और दायरा 3. ‘ऑडियो, विजुअल या ऑडियो-विजुअल जानकारी’ का क्या मतलब है? कंप्यूटर के जरिए बनाई या बदली गई कोई भी आवाज, फोटो, ग्राफिक या वीडियो कंटेंट। 4. ‘सिंथेटिकली जनरेटेड इंफॉर्मेशन’ (SGI) क्या है? ऐसी जानकारी जिसे एआई या एल्गोरिदम से बनाया गया हो और वह बिल्कुल असली व्यक्ति या घटना की तरह लगे। जिसे देखकर कोई भी धोखा खा जाए। 5. किन चीजों को SGI नहीं माना जाएगा? फोटो की ब्राइटनेस बढ़ाना, वीडियो कंप्रेस करना या बैकग्राउंड शोर कम करना । या फिर पीपीटी बनाना, डायग्राम बनाना या रिसर्च के लिए काल्पनिक केस स्टडी बनाना । वीडियो में सबटाइटल जोड़ना, अनुवाद करना या ऑडियो को टेक्स्ट में बदलना। वहीं अगर एआई से फर्जी मार्कशीट या सरकारी लेटर बनाया, तो उसे छूट नहीं मिलेगी। 6. क्या ये नियम सिर्फ वीडियो पर लागू हैं? SGI मुख्य रूप से फोटो, वीडियो और ऑडियो पर केंद्रित है। सिर्फ टेक्स्ट SGI नहीं है, लेकिन अगर टेक्स्ट का इस्तेमाल गैर-कानूनी काम में होता है, तो IT नियमों के दायरे में आएगा । सेक्शन 3: यूजर्स और कंपनियों की जिम्मेदारी 7. क्या प्लेटफॉर्म्स पर ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा बनी रहेगी? हां, अगर कंपनियां इन नियमों का पालन करते हुए एआई कंटेंट को हटाती हैं, तो उनकी कानूनी सुरक्षा (धारा 79) बनी रहेगी । यानी, कंपनी पर कार्रवाई नहीं होगी। सेफ हार्बर’ को आसान भाषा में ऐसे समझें: कानूनी ढाल: यह सोशल मीडिया कंपनियों को मिला एक सुरक्षा कवच है, जो कहता है कि अगर किसी यूजर ने प्लेटफॉर्म पर कोई गलत पोस्ट या वीडियो डाला है, तो उसके लिए कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा। शर्तिया सुरक्षा: यह सुरक्षा तभी तक मिलती है जब तक कंपनियां सरकार के नियमों को मानती हैं। अगर वे शिकायत मिलने पर 3 घंटे के भीतर SGI नहीं हटातीं, तो