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Airfare Hike Case; Supreme Court Vs Airlines Ticket Price Regulations

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  • Airfare Hike Case; Supreme Court Vs Airlines Ticket Price Regulations | Tushar Mehta

2 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि एक ही दिन, एक ही सेक्टर में उड़ान भरने वाली एक एयरलाइन कुछ अलग हवाई किराया लेती है जबकि दूसरी एयरलाइनल अलग किराया लेती है। इसे सही किया जाना चाहिए। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र सरकार से यात्रियों को राहत देने को कहा।

इस पर केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार इस समस्या पर बहस नहीं कर रही है। इस मुद्दे को बिना किसी विरोध के मान रही है। 2024 का एक नया कानून लागू हो गया है और उससे जुड़े नियमों पर सलाह-मशविरा चल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट सोशल एक्टिविस्ट एस लक्ष्मीनारायणन की दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। उन्होंने मांग की कि देश में एक मजबूत और स्वतंत्र रेगुलेटर बनाया जाए, जो एयरलाइनों के किराए और एक्स्ट्रा चार्जेस पर निगरानी रखे। बेंच ने मामले की सुनवाई 13 जुलाई को तय की।

याचिकाकर्ता का दावा- नियम पहले, पालन नहीं हो रहा

लक्ष्मीनारायणन के वकील रवींद्र श्रीवास्तव ने कहा कि एयरक्राफ्ट एक्ट 1937 के तहत नियम पहले से ही हैं लेकिन समस्या यह है कि पालन नहीं ​​किया गया। जब तक नए नियम नहीं बन जाते, पुराने नियम जारी रहेंगे। साथ ही कहा गया है कि अगर DGCA को लगता है कि किसी खास स्थिति में, एयरलाइंस बहुत ज्यादा किराया वसूल रही हैं, तो वह निर्देश जारी करेगा।

बेंच ने श्रीवास्तव से केंद्र के फाइल किए गए काउंटर-एफिडेविट का जवाब देने को कहा और सॉलिसिटर जनरल की यह बात रिकॉर्ड की कि नई व्यवस्था के तहत नियम बनाने के लिए कंसल्टेशन प्रोसेस चल रहा है।

30 अप्रैल की सुनवाई में सरकार को फटकार लगाई थी

इससे पहले 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने एक पिटीशन पर एफिडेविट फाइल न करने के लिए केंद्र की खिंचाई की थी, जिसमें भारत में प्राइवेट एयरलाइन्स के हवाई किराए और सहायक चार्ज में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करने के लिए रेगुलेटरी गाइडलाइंस की मांग की गई थी।

कोर्ट ने केंद्र से एक एफिडेविट के साथ एक एप्लिकेशन फाइल करने को कहा था, जिसमें यह बताने के निर्देश दिए गए थे कि एफिडेविट फाइल क्यों नहीं किया गया है। इसके लिए और समय क्यों मांगा गया है।

अनियमित हवाई किराए पर पहले भी फटकार लगा चुका सुप्रीम कोर्ट

  • 23 फरवरी 2026: त्योहारों में हवाई किराया बढ़ाने पर जवाब मांगा था- सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में त्योहारों और इमरजेंसी हालातों में प्राइवेट एयरलाइंस के हवाई किराए बढ़ाने को लेकर चिंता जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि यह एक बहुत गंभीर चिंता का विषय है। वरना, हम 32 पिटीशन पर विचार नहीं करते। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि सिविल एविएशन मिनिस्ट्री इस मुद्दे पर विचार कर रही है। पढ़ें पूरी खबर…
  • 17 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, DGCA और AERA से हवाई किराए की मनमानी पर जवाब मांगा- सुप्रीम कोर्ट ने देश में हवाई जहाज के किराए और एक्स्ट्रा टैक्स में होने वाले अचानक उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की जनहित याचिका पर कोर्ट ने केंद्र सरकार, DGCA और एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा। पढ़ें पूरी खबर…

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इस पर केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार इस समस्या पर बहस नहीं कर रही है। इस मुद्दे को बिना किसी विरोध के मान रही है। 2024 का एक नया कानून लागू हो गया है और उससे जुड़े नियमों पर सलाह-मशविरा चल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट सोशल एक्टिविस्ट एस लक्ष्मीनारायणन की दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। उन्होंने मांग की कि देश में एक मजबूत और स्वतंत्र रेगुलेटर बनाया जाए, जो एयरलाइनों के किराए और एक्स्ट्रा चार्जेस पर निगरानी रखे। बेंच ने मामले की सुनवाई 13 जुलाई को तय की।

याचिकाकर्ता का दावा- नियम पहले, पालन नहीं हो रहा

लक्ष्मीनारायणन के वकील रवींद्र श्रीवास्तव ने कहा कि एयरक्राफ्ट एक्ट 1937 के तहत नियम पहले से ही हैं लेकिन समस्या यह है कि पालन नहीं ​​किया गया। जब तक नए नियम नहीं बन जाते, पुराने नियम जारी रहेंगे। साथ ही कहा गया है कि अगर DGCA को लगता है कि किसी खास स्थिति में, एयरलाइंस बहुत ज्यादा किराया वसूल रही हैं, तो वह निर्देश जारी करेगा।

बेंच ने श्रीवास्तव से केंद्र के फाइल किए गए काउंटर-एफिडेविट का जवाब देने को कहा और सॉलिसिटर जनरल की यह बात रिकॉर्ड की कि नई व्यवस्था के तहत नियम बनाने के लिए कंसल्टेशन प्रोसेस चल रहा है।

30 अप्रैल की सुनवाई में सरकार को फटकार लगाई थी

इससे पहले 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने एक पिटीशन पर एफिडेविट फाइल न करने के लिए केंद्र की खिंचाई की थी, जिसमें भारत में प्राइवेट एयरलाइन्स के हवाई किराए और सहायक चार्ज में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करने के लिए रेगुलेटरी गाइडलाइंस की मांग की गई थी।

कोर्ट ने केंद्र से एक एफिडेविट के साथ एक एप्लिकेशन फाइल करने को कहा था, जिसमें यह बताने के निर्देश दिए गए थे कि एफिडेविट फाइल क्यों नहीं किया गया है। इसके लिए और समय क्यों मांगा गया है।

अनियमित हवाई किराए पर पहले भी फटकार लगा चुका सुप्रीम कोर्ट

  • 23 फरवरी 2026: त्योहारों में हवाई किराया बढ़ाने पर जवाब मांगा था- सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में त्योहारों और इमरजेंसी हालातों में प्राइवेट एयरलाइंस के हवाई किराए बढ़ाने को लेकर चिंता जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि यह एक बहुत गंभीर चिंता का विषय है। वरना, हम 32 पिटीशन पर विचार नहीं करते। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि सिविल एविएशन मिनिस्ट्री इस मुद्दे पर विचार कर रही है। पढ़ें पूरी खबर…
  • 17 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, DGCA और AERA से हवाई किराए की मनमानी पर जवाब मांगा- सुप्रीम कोर्ट ने देश में हवाई जहाज के किराए और एक्स्ट्रा टैक्स में होने वाले अचानक उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की जनहित याचिका पर कोर्ट ने केंद्र सरकार, DGCA और एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा। पढ़ें पूरी खबर…

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