PM Modi LIVE | Narendra Modi Varanasi Speech Photos Update

वाराणसी16 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 28 अप्रैल को वाराणसी के दो दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं। पिछले 11 साल में वह 53 बार काशी आ चुके हैं। यह उनका 54वां और 2026 का पहला दौरा है। इससे पहले PM मोदी आखिरी बार नवंबर 2025 में आए थे। पीएम काशीवासियों को 6332.08 करोड़ रुपए की 163 परियोजनाओं की सौगात देंगे। मोदी के 1054.69 करोड़ रुपए से 50 परियोजनाओं का लोकार्पण और 5277.39 करोड़ से 113 का शिलान्यास करेंगे। रेल-सड़क सिग्नेचर ब्रिज और कबीरचौरा मंडलीय चिकित्सालय में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की आधारशिला सबसे महत्वपूर्ण हैं। इससे सिर्फ वाराणसी ही नहीं पूर्वांचल और बिहार के मरीजों को विश्व स्तरीय इलाज मिलेगा। वहीं मंगलवार को PM के आने से पहले काशी के चौसठी घाट पर बंगाली महिलाओं ने शंखनाद किया। महिलाओं का कहना है कि बंगाल में चल रहे चुनाव में वे जीत को लेकर आश्वस्त हैं और उसी खुशी में काशी में यह आयोजन किया जा रहा है। भाजपा सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री शाम 4 बजे के बाद स्पेशल विमान से वाराणसी पहुंचेंगे। एयरपोर्ट से सेना के हेलीकॉप्टर से बरेका हेलीपैड पर उतरेंगे। यहां से सभा स्थल बीएलडब्ल्यू ग्राउंड पहुंचेंगे। यहां पीएम नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम पास न होने को लेकर 40 हजार महिलाओं को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री यहां महिलाओं की राय भी इस अधिनियम पर मांगेंगे। पीएम के दौरे के लेकर वाराणसी को सजाया जा रहा है। शहर में पांच पॉइंट प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए चिह्नित किए गए हैं। वाराणसी के चौसठी घाट पर PM के आने से पहले बंगाली महिलाओं ने शंखनाद करके जयकारे लगाए। मंगलवार सुबह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी वाराणसी एयरपोर्ट पहुंचे। PM मोदी से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए… अपडेट्स 38 मिनट पहले कॉपी लिंक वाराणसी में PM मोदी के दो दिन के दौरे को लेकर अपडेट दे रहे रिपोर्टर अमरमणि त्रिपाठी 51 मिनट पहले कॉपी लिंक PM विजिट पर ट्रैफिक एडवाइजारी लागू वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन से पहले ट्रैफिक पुलिस ने शहर में ट्रैफिक एडवाइजारी लागू कर दी है। डायवर्जन मंगलवार को दोपहर 12 बजे से रात 11 बजे तक तथा बुधवार की सुबह 4 बजे से सुबह 10 बजे तक लागू रहेगा। बीएलडब्ल्यू परिसर के अंदर सिनेमा हाल तिराहा, सेंट्रल मार्केट, सूर्य सरोवर, डी-05 रेलवे क्रासिंग, गोमती मार्केट और इंटर कालेज चौराहा समेत कई स्थानों पर वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी। कार्यक्रम स्थल की ओर किसी भी वाहन को जाने की अनुमति नहीं होगी। पढ़िए पूरी खबर 05:30 AM28 अप्रैल 2026 कॉपी लिंक PM मोदी के आने से पहले बंगाली महिलाओं का चौसठी घाट पर शंखनाद वाराणसी में PM मोदी के आने से मंगलवार सुबह बंगाली महिलाएं चौसठी घाट पर पहुंचीं। यहां शंखनाद किया। महिलाओं का कहना है कि बंगाल में चल रहे चुनाव में वे जीत को लेकर आश्वस्त हैं और उसी खुशी में काशी में यह आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के वाराणसी आगमन पर वे भव्य स्वागत करेंगी, शंखनाद करेंगी, पुष्प वर्षा करेंगी और आरती उतारकर उनका अभिनंदन करेंगी। 05:24 AM28 अप्रैल 2026 कॉपी लिंक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पहुंचे वाराणसी, एयरपोर्ट पर स्वागत वाराणसी एयरपोर्ट पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी पहुंच गए हैं। यहां उनका स्वागत भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल ने किया। 05:09 AM28 अप्रैल 2026 कॉपी लिंक एयरपोर्ट से बरेका तक एसपीजी तैनात प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा को लेकर एसपीजी समेत 3000 से अधिक सुरक्षाकर्मी चार लेयर में लगाए गए हैं। जनसभा की इनररिंग में महिलाएं सुरक्षाकर्मी कमान संभालेंगी। इसके अलावा पूरे परिसर को कब्जे में लेकर एसपीजी ने सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और प्रस्तावित रोड मार्गों पर भी टीम तैनात है। प्रधानमंत्री रात में किसी भी विकास परियोजना के निर्माण की हकीकत जानने भी निकल सकते हैं, इसके लिए भी तैयारी की गई है। हालांकि सभा के बाद उनका नाइट स्टे बरेका गेस्ट हाउस में है। 05:08 AM28 अप्रैल 2026 कॉपी लिंक 40 हजार महिलाओं से संवाद करेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 4 बजे असम से बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे और एयरपोर्ट से सेना के हेलीकाप्टर से बीएलडब्लयू मैदान पर आएंगे। पीएम सबसे पहले बीएलडब्ल्यू में काशी के कुछ विशेष करने वाली महिलाओं और प्रबुद्धजन से मुलाकात करेंगे। इसके बाद नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लोकसभा में पास नहीं होने और विपक्ष की भूमिका पर महिलाओं को संबोधित करेंगे। बरेका में जर्मन हैंगर तकनीक से पंडाल तैयार किया जा रहा है। केसरिया रंग से पूरे पंडाल को सजाया गया है। आठों विधानसभाओं को संख्या का लक्ष्य दिया गया है। 05:00 AM28 अप्रैल 2026 कॉपी लिंक वाराणसी को बिहार और कोलकाता से जोड़ने के लिए बनेगा सिग्नेचर ब्रिज सिग्नेचर ब्रिज का यह मॉडल है। वाराणसी दौरे के दौरान PM मोदी सिग्नेचर ब्रिज का भी शिलान्यास करेंगे। बता दें पुरानी GT रोड पर बने राजघाट पुल ( मालवीय पुल या डफरिन ब्रिज) की मियाद खत्म हो चुकी है। ऐसे में नया सिग्नेचर ब्रिज बनाने की कवायद की जा रही है। साल 1887 में बनकर तैयार हुए इस पुल को तत्कालीन अवध और रुहेलखंड रेलवे के इंजीनियरों ने तैयार किया था। यह कोलकता लाइन को मुगलसराय जंकशन जो अब पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंकशन हो गया है, उससे जोड़ता है। 04:56 AM28 अप्रैल 2026 कॉपी लिंक कबीरचौरा अस्पताल में बनेगा मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल वाराणसी के सबसे पुराने श्री शिव प्रसाद गुप्त जिला मंडलीय चिकित्सालय को हाईटेक किया जाएगा। प्रधानमंत्री काशी में दौरे पर इसका शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री इस कैंपस में 315.48 करोड़ से बनने वाले सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की आधारशिला रखेंगे। अस्पताल के एसआईसी डॉ. बृजेश कुमार ने बताया- वाराणसी के कबीरचौरा अस्पताल का 1868 में निर्माण हुआ था। पहले इसे किंग एडवर्ड हॉस्पिटल के नाम से जाना जाता था। अब इसके हाईटेक होने से पूर्वांचल और आस-पास के प्रदेशों के मरीजों को AIIMS जैसी सुविधा एक रुपए की पर्ची में ही मिल जाएगी। 1868 में हुआ था कबीरचौरा अस्पताल का निर्माण। नामा था किंग एडवर्ड हॉस्पिटल। कबीरचौरा अस्पताल में सामने आया मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल का मॉडल। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Oscar Speech on Deathbed, Refused Nehru Docu; First Film Loan

मुंबई27 मिनट पहलेलेखक: अभय पांडेय कॉपी लिंक सत्यजीत रे को 1992 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। एक फिल्ममेकर ने एक फिल्म बनाने की सोची, चूंकि उसमें न एक्शन था, न रोमांस, न गाने, इसलिए कोई भी प्रोड्यूसर पैसा लगाने के लिए राजी नहीं हुआ। तब उन्होंने फिल्म के लिए अपनी सेविंग, LIC पॉलिसी और यहां तक कि बीवी के जेवर भी गिरवी रख दिए और किसी तरह शूटिंग शुरू की। लेकिन बीच में ही पैसे खत्म होने के चलते शूटिंग रुक गई, तब सरकार ने लोन समझकर फिल्म बनाने के लिए पैसा दिया। जिसके चलते फिल्म किसी तरह पूरी हुई। जब फिल्म रिलीज हुई, तो पहले दो हफ्तों में रिस्पॉन्स ठंडा रहा, लेकिन तीसरे हफ्ते से हर रोज फिल्म हाउसफुल होने लगी और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी इस फिल्म से बेहद प्रभावित हुए। फिल्म ने नेशनल अवॉर्ड समेत इंटरनेशनल लेवल पर भी कई अवॉर्ड जीते और इंडियन सिनेमा को नई पहचान दी। यह फिल्म थी पाथेर पांचाली और फिल्ममेकर थे सत्यजीत रे। सत्यजीत रे की आज 34वीं डेथ एनिवर्सरी है। आइए, उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ किस्से जानते हैं। किस्सा-1 इटैलियन फिल्म देखकर फिल्ममेकिंग का फैसला किया सत्यजीत रे का जन्म 2 मई 1921 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ। उनका परिवार साहित्य और कला से जुड़ा था। पिता सुकुमार रे फेमस लेखक और चित्रकार थे। रे जब वे बहुत छोटे थे, उनके पिता का निधन हो गया। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। पिता के निधन के बाद घर की सारी जिम्मेदारी मां पर आ गई। मां ने पूरे घर को संभाला, खर्च चलाया और साथ ही नौकरी भी की। रे ने कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद शांतिनिकेतन में कला का अध्ययन किया था। सत्यजीत रे के पिता और माता की तस्वीर। सत्यजीत रे ने अपने करियर की शुरुआत एडवरटाइजिंग एजेंसी डी.जे. कीमर में ग्राफिक डिजाइनर के तौर पर की थी। उन्होंने बुक कवर डिजाइनर के तौर पर भी काम किया। उन्होंने नेहरू की डिस्कवरी ऑफ इंडिया समेत कई किताबों के कवर बनाए थे। डी.जे. कीमर के लिए सत्यजीत रे द्वारा डिजाइन किया गया एक एड। (सोर्स: सत्यराज रे की किताब ‘माई इयर्स विद अपू’) इसी दौरान उन्हें फिल्मों में दिलचस्पी बढ़ने लगी। 1947 में उन्होंने साथियों के साथ मिलकर एक फिल्म सोसाइटी बनाई, जहां विदेशी फिल्में दिखाई जाती थीं। 1949 में उनकी मुलाकात फ्रेंच डायरेक्टर ज्यां रेनॉए से हुई, जिन्होंने उन्हें फिल्में बनाने के लिए प्रेरित किया। 1950 में वे एक काम के लिए लंदन गए। वहां उन्होंने कई फिल्में देखीं, लेकिन इटैलियन फिल्म बाइसिकल थीव्स का उन पर सबसे गहरा असर हुआ। इस फिल्म को देखने के बाद उन्होंने तय किया कि वे फिल्म डायरेक्टर बनेंगे। ‘पाथेर पांचाली’ में बंगाल के एक गरीब ग्रामीण परिवार की कहानी थी, जिसे मुख्य रूप से दो बच्चों अपू और उसकी बड़ी बहन दुर्गा की नजरों से दिखाया गया है। किस्सा-2 पहली फिल्म के लिए पत्नी के गहने गिरवी रखे सत्यजीत रे के फिल्मी करियर की पहली फिल्म पाथेर पांचाली (1955) थी। यह फिल्म बंगाली लेखक विभूतिभूषण बंद्योपाध्याय के उपन्यास पर आधारित थी। रे इस उपन्यास से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस पर अपनी पहली फिल्म बनाने का फैसला किया। हालांकि, फिल्म बनाना आसान नहीं था। रे ने फिल्म के लिए नई और अनुभवहीन टीम बनाई। फिल्म में बड़े स्टार, गाने और एक्शन नहीं था, इसलिए कोई प्रोड्यूसर पैसा लगाने को तैयार नहीं था। उन्होंने पैसे जुटाने के लिए नौकरी जारी रखी, बीमा पॉलिसी गिरवी रखी। यहां तक अपनी पत्नी ने भी गहने गिरवी रखे। इस तरह लगभग 17,000 रुपए जुटाकर उन्होंने 1952 में फिल्म की शूटिंग शुरू की। शूटिंग के दौरान उन्हें कई तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने शुरुआत में 16mm कैमरे से शूट कर उसे 35mm में बदलने का प्रयोग किया, ताकि खर्च कम हो, लेकिन प्रयोग असफल रहा। फुटेज सही नहीं आया और उन्हें फिर से शुरुआत करनी पड़ी। एक और बड़ी लोकेशन समस्या थी। एक बार तो उन्होंने एक गांव चुना था, जहां फूलों के बीच ट्रेन का सीन शूट करना था, लेकिन दोबारा पहुंचने पर गाय-भैंसों ने सारे फूल खा लिए थे। पूरा सीन खराब हो गया। फिर शूटिंग के बीच में पैसे खत्म हो गए और शूटिंग लगभग एक साल के लिए रुक गई। सत्यजीत रे की फिल्म ‘पाथेर पांचाली’ का शाब्दिक अर्थ ‘छोटे रास्ते का गीत’ होता है। किस्सा-3 घर में बैठ गया उल्लू; सरकार से लोन मिल गया सत्यजीत रे के पाथेर पंचाली बनाने के संघर्ष के दौरान एक बहुत ही दिलचस्प और रहस्यमयी घटना हुई, जिसका जिक्र उनकी किताब ‘माई इयर्स विद अपू’ में है। जैसा आपको बताया पैसे खत्म हो चुके थे और फिल्म की शूटिंग रुक चुकी थी। एक दिन सुबह जब रे जागे, तो उन्होंने अपने कमरे की खिड़की के बाहर एक सफेद-भूरा उल्लू बैठा था और लगातार उनकी तरफ देख रहा था। यह कोई सामान्य बात नहीं थी क्योंकि शहर में इस तरह का सीन बहुत कम देखने को मिलता है। धीरे-धीरे यह खबर आसपास के लोगों तक पहुंच गई। पड़ोसी अपने-अपने घरों से झांककर उस उल्लू को देखने लगे। कुछ लोग उसे भगाने की कोशिश कर रहे थे, कुछ उसे बुलाने के लिए आवाजें निकाल रहे थे, लेकिन सबसे आश्चर्यजनक बात यह थी कि उल्लू बिल्कुल भी नहीं हिला, वह लगातार वहीं बैठा रहा और उसकी नजरें रे पर टिकी रहीं। भारतीय मान्यता के अनुसार, उल्लू को देवी लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। इसलिए लोग मानते हैं कि यदि उल्लू घर के पास दिखाई दे, तो यह धन और सौभाग्य का संकेत होता है। यही कारण था कि पड़ोसियों में उत्सुकता और थोड़ी ईर्ष्या भी थी। रे ने इस घटना को बड़े ध्यान से देखा। सबसे हैरानी की बात यह थी कि वह उल्लू लगातार दो हफ्तों तक वहीं बैठा रहा। हर सुबह जब रे उठते, तो वह उसी जगह, उसी तरह बैठा मिलता जैसे वह खास तौर पर उनके लिए ही आया हो। फिर एक दिन अचानक वह उल्लू गायब हो गया। कोई नहीं जानता कि वह कब और कैसे चला गया, लेकिन उसके जाने के कुछ समय बाद ही रे को एक बहुत
Oscar Speech on Deathbed, Refused Nehru Docu; First Film Loan

मुंबई1 घंटे पहलेलेखक: अभय पांडेय कॉपी लिंक सत्यजीत रे को 1992 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। एक फिल्ममेकर ने एक फिल्म बनाने की सोची, चूंकि उसमें न एक्शन था, न रोमांस, न गाने, इसलिए कोई भी प्रोड्यूसर पैसा लगाने के लिए राजी नहीं हुआ। तब उन्होंने फिल्म के लिए अपनी सेविंग, LIC पॉलिसी और यहां तक कि बीवी के जेवर भी गिरवी रख दिए और किसी तरह शूटिंग शुरू की। लेकिन बीच में ही पैसे खत्म होने के चलते शूटिंग रुक गई, तब सरकार ने लोन समझकर फिल्म बनाने के लिए पैसा दिया। जिसके चलते फिल्म किसी तरह पूरी हुई। जब फिल्म रिलीज हुई, तो पहले दो हफ्तों में रिस्पॉन्स ठंडा रहा, लेकिन तीसरे हफ्ते से हर रोज फिल्म हाउसफुल होने लगी और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी इस फिल्म से बेहद प्रभावित हुए। फिल्म ने नेशनल अवॉर्ड समेत इंटरनेशनल लेवल पर भी कई अवॉर्ड जीते और इंडियन सिनेमा को नई पहचान दी। यह फिल्म थी पाथेर पांचाली और फिल्ममेकर थे सत्यजीत रे। सत्यजीत रे की आज 34वीं डेथ एनिवर्सरी है। आइए, उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ किस्से जानते हैं। किस्सा-1 इटैलियन फिल्म देखकर फिल्ममेकिंग का फैसला किया सत्यजीत रे का जन्म 2 मई 1921 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ। उनका परिवार साहित्य और कला से जुड़ा था। पिता सुकुमार रे फेमस लेखक और चित्रकार थे। रे जब वे बहुत छोटे थे, उनके पिता का निधन हो गया। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। पिता के निधन के बाद घर की सारी जिम्मेदारी मां पर आ गई। मां ने पूरे घर को संभाला, खर्च चलाया और साथ ही नौकरी भी की। रे ने कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद शांतिनिकेतन में कला का अध्ययन किया था। सत्यजीत रे के पिता और माता की तस्वीर। सत्यजीत रे ने अपने करियर की शुरुआत एडवरटाइजिंग एजेंसी डी.जे. कीमर में ग्राफिक डिजाइनर के तौर पर की थी। उन्होंने बुक कवर डिजाइनर के तौर पर भी काम किया। उन्होंने नेहरू की डिस्कवरी ऑफ इंडिया समेत कई किताबों के कवर बनाए थे। डी.जे. कीमर के लिए सत्यजीत रे द्वारा डिजाइन किया गया एक एड। (सोर्स: सत्यराज रे की किताब ‘माई इयर्स विद अपू’) इसी दौरान उन्हें फिल्मों में दिलचस्पी बढ़ने लगी। 1947 में उन्होंने साथियों के साथ मिलकर एक फिल्म सोसाइटी बनाई, जहां विदेशी फिल्में दिखाई जाती थीं। 1949 में उनकी मुलाकात फ्रेंच डायरेक्टर ज्यां रेनॉए से हुई, जिन्होंने उन्हें फिल्में बनाने के लिए प्रेरित किया। 1950 में वे एक काम के लिए लंदन गए। वहां उन्होंने कई फिल्में देखीं, लेकिन इटैलियन फिल्म बाइसिकल थीव्स का उन पर सबसे गहरा असर हुआ। इस फिल्म को देखने के बाद उन्होंने तय किया कि वे फिल्म डायरेक्टर बनेंगे। ‘पाथेर पांचाली’ में बंगाल के एक गरीब ग्रामीण परिवार की कहानी थी, जिसे मुख्य रूप से दो बच्चों अपू और उसकी बड़ी बहन दुर्गा की नजरों से दिखाया गया है। किस्सा-2 पहली फिल्म के लिए पत्नी के गहने गिरवी रखे सत्यजीत रे के फिल्मी करियर की पहली फिल्म पाथेर पांचाली (1955) थी। यह फिल्म बंगाली लेखक विभूतिभूषण बंद्योपाध्याय के उपन्यास पर आधारित थी। रे इस उपन्यास से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस पर अपनी पहली फिल्म बनाने का फैसला किया। हालांकि, फिल्म बनाना आसान नहीं था। रे ने फिल्म के लिए नई और अनुभवहीन टीम बनाई। फिल्म में बड़े स्टार, गाने और एक्शन नहीं था, इसलिए कोई प्रोड्यूसर पैसा लगाने को तैयार नहीं था। उन्होंने पैसे जुटाने के लिए नौकरी जारी रखी, बीमा पॉलिसी गिरवी रखी। यहां तक अपनी पत्नी ने भी गहने गिरवी रखे। इस तरह लगभग 17,000 रुपए जुटाकर उन्होंने 1952 में फिल्म की शूटिंग शुरू की। शूटिंग के दौरान उन्हें कई तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने शुरुआत में 16mm कैमरे से शूट कर उसे 35mm में बदलने का प्रयोग किया, ताकि खर्च कम हो, लेकिन प्रयोग असफल रहा। फुटेज सही नहीं आया और उन्हें फिर से शुरुआत करनी पड़ी। एक और बड़ी लोकेशन समस्या थी। एक बार तो उन्होंने एक गांव चुना था, जहां फूलों के बीच ट्रेन का सीन शूट करना था, लेकिन दोबारा पहुंचने पर गाय-भैंसों ने सारे फूल खा लिए थे। पूरा सीन खराब हो गया। फिर शूटिंग के बीच में पैसे खत्म हो गए और शूटिंग लगभग एक साल के लिए रुक गई। सत्यजीत रे की फिल्म ‘पाथेर पांचाली’ का शाब्दिक अर्थ ‘छोटे रास्ते का गीत’ होता है। किस्सा-3 घर में बैठ गया उल्लू; सरकार से लोन मिल गया सत्यजीत रे के पाथेर पंचाली बनाने के संघर्ष के दौरान एक बहुत ही दिलचस्प और रहस्यमयी घटना हुई, जिसका जिक्र उनकी किताब ‘माई इयर्स विद अपू’ में है। जैसा आपको बताया पैसे खत्म हो चुके थे और फिल्म की शूटिंग रुक चुकी थी। एक दिन सुबह जब रे जागे, तो उन्होंने अपने कमरे की खिड़की के बाहर एक सफेद-भूरा उल्लू बैठा था और लगातार उनकी तरफ देख रहा था। यह कोई सामान्य बात नहीं थी क्योंकि शहर में इस तरह का सीन बहुत कम देखने को मिलता है। धीरे-धीरे यह खबर आसपास के लोगों तक पहुंच गई। पड़ोसी अपने-अपने घरों से झांककर उस उल्लू को देखने लगे। कुछ लोग उसे भगाने की कोशिश कर रहे थे, कुछ उसे बुलाने के लिए आवाजें निकाल रहे थे, लेकिन सबसे आश्चर्यजनक बात यह थी कि उल्लू बिल्कुल भी नहीं हिला, वह लगातार वहीं बैठा रहा और उसकी नजरें रे पर टिकी रहीं। भारतीय मान्यता के अनुसार, उल्लू को देवी लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। इसलिए लोग मानते हैं कि यदि उल्लू घर के पास दिखाई दे, तो यह धन और सौभाग्य का संकेत होता है। यही कारण था कि पड़ोसियों में उत्सुकता और थोड़ी ईर्ष्या भी थी। रे ने इस घटना को बड़े ध्यान से देखा। सबसे हैरानी की बात यह थी कि वह उल्लू लगातार दो हफ्तों तक वहीं बैठा रहा। हर सुबह जब रे उठते, तो वह उसी जगह, उसी तरह बैठा मिलता जैसे वह खास तौर पर उनके लिए ही आया हो। फिर एक दिन अचानक वह उल्लू गायब हो गया। कोई नहीं जानता कि वह कब और कैसे चला गया, लेकिन उसके जाने के कुछ समय बाद ही रे को एक बहुत
Bill Gates Epstein Files Row; India AI Summit Speech

नई दिल्ली2 दिन पहले कॉपी लिंक माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स नई दिल्ली में चल रही AI समिट में अपना मुख्य भाषण नहीं देंगे। गेट्स फाउंडेशन ने इसकी जानकारी दी। फाउंडेशन ने कहा कि यह फैसला काफी सोच-विचार के बाद लिया गया है ताकि समिट का पूरा ध्यान अपनी प्राथमिकताओं पर बना रहे। फाउंडेशन ने बताया कि समिट में बिल गेट्स की जगह अब अंकुर वोरा फाउंडेशन का पक्ष रखेंगे। अंकुर वोरा गेट्स फाउंडेशन के अफ्रीका और भारत कार्यालयों के प्रेसिडेंट हैं। वे आज समिट के एक सत्र में अपनी बात रखेंगे। अंकुर वोरा फाउंडेशन के कामों को लंबे समय से देख रहे हैं। माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर और गेट्स फाउंडेशन के चेयरमैन बिल गेट्स एक्सपो में शामिल होने के लिए 16 फरवरी को भारत आ चुके हैं। एपस्टीन केस से जुड़े दस्तावेजों में नाम आने पर हटे गेट्स बिल गेट्स के समिट से हटने से वजह अमेरिकी अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में आए उनके नाम को बताया जा रहा है। इन गुप्त दस्तावेजों को हाल ही में जारी किया गया है। एपस्टीन पर यौन अपराधों और नाबालिगों की तस्करी के गंभीर आरोप थे। 2019 में आत्महत्या के बाद, उससे जुड़े कई क्लासीफाइड दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं। इन फाइलों में दावा किया गया है कि एपस्टीन और गेट्स के बीच गहरे संबंध थे। एपस्टीन ने गेट्स के एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर्स और अन्य निजी गतिविधियों में मदद की थी। बिल गेट्स ने एक इंटरव्यू में इन मुलाकातों पर अफसोस जताया है। उन्होंने कहा कि मैंने एपस्टीन के साथ जो भी समय बिताया, मुझे उसका पछतावा है और मैं इसके लिए माफी मांगता हूं। एनवीडिया CEO ने भी भारत दौरा टाला इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई और ओपन-एआई के सैम ऑल्टमैन जैसे दिग्गज शामिल हो रहे हैं। इसमें एनवीडिया के CEO जेंसेन हुआंग भी शामिल होने वाले थे, लेकिन उन्होंने कार्यक्रम रद्द कर दिया है। कयास थे कि उनके हटने की वजह बिल गेट्स की मौजूदगी हो सकती है। हालांकि कंपनी ने कोई आधिकारिक कारण नहीं दिया है। PM मोदी ने AI इम्पैक्ट समिट का उद्घाटन किया था PM मोदी ने 16 फरवरी को दुनिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी इवेंट में से एक ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का उद्घाटन किया था। इसके बाद उन्होंने इवेंट में शामिल हुए स्टार्टअप्स के पवेलियंस में जाकर उनके इनोवेशंस की जानकारी ली थी। ये इवेंट 20 फरवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में चलेगा। समिट के साथ-साथ ‘इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026’ का भी आयोजन किया गया है। यहां दुनियाभर की कंपनियों ने अपने लेटेस्ट AI सॉल्यूशंस को दुनिया के सामने पेश किया है। यहां आम लोग देख सकते हैं कि एआई असल जिंदगी में कैसे काम करता है और भविष्य में AI से खेती, सेहत और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में क्या बदलाव लाने वाला है। ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की थीम पर समिट इस समिट की थीम राष्ट्रीय विजन ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’, यानी सभी का कल्याण, सभी का सुख पर आधारित है। इसका उद्देश्य मानवता के लिए AI के वैश्विक सिद्धांत को बढ़ावा देना है। समिट में 110 से ज्यादा देश और 30 अंतरराष्ट्रीय संगठन हिस्सा ले रहे हैं। इसमें लगभग 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और 45 से ज्यादा मंत्री शामिल होने पहुंचे हैं। तीन ‘सूत्रों’ पर टिका है समिट का विजन इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 तीन मुख्य स्तंभों (सूत्रों) पर आधारित है – पीपल (लोग), प्लैनेट (ग्रह) और प्रोग्रेस (प्रगति)। पीपल: ह्यूमन-सेंट्रिक AI को बढ़ावा देना जो लोगों के अधिकारों की रक्षा करे। प्लैनेट: पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ AI विकास सुनिश्चित करना। प्रोग्रेस: समावेशी आर्थिक और तकनीकी प्रगति पर जोर देना, ताकि समाज के हर वर्ग को लाभ मिले। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… मोदी बोले- अगली पीढ़ी के लिए सही AI छोड़ना जरूरी: AI इम्पैक्ट समिट में गूगल CEO पिचाई ने कहा दिल्ली के भारत मंडपम में ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ का आज चौथा दिन है। आज के सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- AI का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए। इस पर किसी की मोनापॉली यानी एकाधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि AI में रफ्तार और पैमाना अकल्पनीय है। हमें इस क्षेत्र में बड़े सपने देखने होंगे, लेकिन जिम्मेदारी के साथ। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
PM Modi LIVE | Narendra Modi AI Impact Summit 2026 Speech Update

Hindi News Business PM Modi LIVE | Narendra Modi AI Impact Summit 2026 Speech Update TATA Google Wipro नई दिल्ली1 दिन पहले कॉपी लिंक इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 का गुरुवार को चौथा दिन है। समिट को आज कई ग्लोबल लीडर्स संबोधित कर रहे हैं। दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के चौथे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने AI के सुरक्षित इस्तेमाल का नया फॉर्मूला दिया। पीएम ने कहा कि जैसे खाने के पैकेट पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ होना चाहिए ताकि फर्क पता चल सके। वहीं, रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने भारत को ‘इंटेलिजेंस युग’ में ले जाने के लिए 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश का बड़ा एलान किया है। समिट को आज नरेंद्र मोदी और मुकेश अंबानी के अलावा गूगल के CEO सुंदर पिचाई और ओपन एआई के सैम ऑल्टमैन जैसे लीडर्स ने संबोधित किया। 16 फरवरी से शुरू समिट 20 फरवरी तक चलेगी। इसमें आज 110 से ज्यादा देश, 20 से ज्यादा देशों के प्रमुख और करीब 100 CEOs और फाउंडर्स शामिल हुए हैं। समिट को आज पीएम नरेंद्र मोदी और रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी के अलावा गूगल के CEO सुंदर पिचाई जैसे लीडर्स ने संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की 5 बड़ी बातें 1. एआई में भय नहीं ‘भाग्य’ और भविष्य: पीएम ने स्पष्ट किया कि दुनिया के कई देशों में जहां एआई को लेकर भय का माहौल है, वहीं भारत इसे अपने ‘भाग्य’ और उज्ज्वल भविष्य के रूप में देख रहा है। भारत इसे अपनी विकास यात्रा का अगला बड़ा टर्निंग पॉइंट मानता है। 2. M.A.N.A.V (मानव) विजन का प्रस्ताव: मोदी ने एआई के लिए एक नया ग्लोबल फ्रेमवर्क दिया। उन्होंने कहा कि एआई Moral (नैतिक), Accountable (जवाबदेह), National Sovereignty (संप्रभुता), Accessible (सुलभ) और Valid (वैध) होना चाहिए, ताकि यह केवल डेटा पॉइंट न बनकर मानवता के कल्याण का जरिया बने। 3. कंटेंट पर ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ की जरूरत: पीएम ने सुझाव दिया कि जैसे खाने के सामान पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी स्पष्ट लेबल होना चाहिए। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि क्या असली है और क्या एआई द्वारा बनाया गया (फैब्रिकेटेड) है। 4. AI को ‘ओपन सोर्स’ बनाएं: भारत ने दुनिया की ‘कॉन्फिडेंशियल’ सोच से अलग हटकर AI कोड को ‘ओपन शेयर’ करने की बात कही। पीएम का मानना है कि जब तकनीक सबके लिए खुली होगी, तभी दुनिया भर के युवा दिमाग उसे बेहतर और सुरक्षित बना पाएंगे। 5. ह्यूमन-सेंट्रिक अप्रोच और नौकरियां: पीएम ने कहा कि AI नौकरियां खत्म नहीं करेगा बल्कि नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि हम ऐसे युग में हैं जहां इंसान और मशीन मिलकर क्रिएट करेंगे। उन्होंने स्किलिंग और रिस्किलिंग को एक ‘मास मूवमेंट’ बनाने पर जोर दिया। अंबानी बोले- डेटा की तरह सस्ता होगा AI रिलायंस चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि जिस तरह जियो ने देश में डेटा सस्ता किया, उसी तरह अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी आम भारतीय तक किफायती दरों पर पहुंचाया जाएगा। इस दिशा में जियो और रिलायंस इंड्स्ट्रीज अगले सात साल में ₹10 लाख करोड़ का निवेश करेंगे। AI से पैदा होने वाली चिंताओं पर अंबानी ने कहा कि एआई वह मंत्र है जो हर यंत्र को तेज, बेहतर और स्मार्ट तरीके से काम करने की शक्ति देता है। मैं एआई को आधुनिक अक्षय पात्र के रूप में देखता हूं, जो अंतहीन पोषण प्रदान कर सकता है। AI नौकरियां नहीं छीनेंगा बल्कि, यह हाई-स्किल काम के नए मौके पैदा करेगा। देश का पहला ‘नेक्स्ट जनरेशन’ डेटा सेंटर बनाएगा टाटा ग्रुप टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा ग्रुप अगली पीढ़ी की एआई ट्रेनिंग और इंफ्रेंस के लिए खास तौर पर तैयार भारत का पहला लार्ज-स्केल ‘AI-ऑप्टिमाइज्ड’ डेटा सेंटर बना रहा है। मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि हमने इसकी पहली 100 मेगावाट क्षमता बनाने के लिए ओपन एआई के साथ साझेदारी की है, जिसे आगे चलकर एक गीगावाट तक बढ़ाया जाएगा। सुंदर पिचाई बोले- अरबों लोगों की जिंदगी बदलेगा AI गूगल भारत में अपने 15 बिलियन डॉलर (1.35 लाख करोड़ रुपए) के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के हिस्से के रूप में एक ‘फुल स्टैक AI हब’ स्थापित कर रहा है। इस हब में गीगावाट स्केल की कंप्यूटिंग और एक नया इंटरनेशनल सब-सी केबल गेटवे होगा। हर किसी के लिए उपयोगी AI बनाने के लिए हमें साहसिक कदम उठाने होंगे, क्योंकि यह अरबों लोगों के जीवन को बेहतर बना सकता है और सबसे कठिन समस्याओं को हल कर सकता है। हमें उन क्षेत्रों की समस्याओं को सुलझाने के लिए भी उतना ही साहसी होना चाहिए जहां अब तक तकनीक की पहुंच नहीं थी। नेमप्लेट पर ‘भारत’: जी-20 के बाद फिर दिखा वही संदेश समिट के प्लेनरी सेशन के दौरान जब प्रधानमंत्री मोदी मंच पर बैठे, तो उनके सामने रखी टेबल पर देश के नाम की नेमप्लेट पर ‘भारत’ लिखा हुआ था। यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम ‘भारत’ इस्तेमाल किया गया हो। इससे पहले 2024 में दिल्ली में हुए जी-20 समिट में भी पीएम की नेमप्लेट पर ‘भारत’ लिखा था। उस समय राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए न्योता पत्र में भी ‘प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया’ की जगह ‘प्रेसिडेंट ऑफ भारत’ लिखा गया था, जिस पर काफी चर्चा हुई थी। ओपनएआई और एंथ्रोपिक के CEO ने ग्रुप फोटो में नहीं पकड़ा हाथ AI कंपनी ओपनएआई और एंथ्रोपिक के बीच का कॉम्पिटिशन एक बार फिर चर्चा में है। आज इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान एक ग्रुप फोटो ली जा रही थी। इस दौरान ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के को-फाउंडर डारियो अमोदेई एक-दूसरे का हाथ नहीं पकड़ा। खबर के अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… अपडेट्स 07:32 AM19 फ़रवरी 2026 कॉपी लिंक पीएम मोदी की स्पीच की 5 बड़ी बातें 1. ‘ब्लैक बॉक्स’ नहीं, ‘ग्लास बॉक्स’ अप्रोच की मांग एआई प्लेटफॉर्म्स को ‘ब्लैक बॉक्स’ (जहां अंदर क्या चल रहा है किसी को पता न हो) के बजाय ‘ग्लास बॉक्स’ की तरह होना चाहिए। इसका मतलब है कि एआई के सेफ्टी रूल्स इतने साफ और पारदर्शी हों कि उन्हें कोई







