सुप्रीम कोर्ट ने इलैयाराजा का केस बॉम्बे हाईकोर्ट ट्रांसफर किया:सोनी के साथ कॉपीराइट मुकदमा चलेगा, विरोधाभास से बचने को अदालत का कदम

संगीत जगत के दिग्गज डॉ. इलैयाराजा के कॉपीराइट विवाद से जुड़ा एक अहम मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां आज एक निर्णायक आदेश सुनाया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने सोनी एंटरटेनमेंट इंडिया द्वारा दायर ट्रांसफर याचिका को मानते हुए इलैयाराजा के साथ चल रहे कॉपीराइट मुकदमे को मद्रास उच्च न्यायालय से बॉम्बे उच्च न्यायालय में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला दो अलग‑अलग मुकदमों के बीच टकराव के रूप में उभरा है। जनवरी 2022 में सोनी म्यूजिक ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक सिविल मुकदमा दायर किया था, जिसमें उन्होंने इलैयाराजा को 536 संगीत रचनाओं का अवैध इस्तेमाल बंद करने के लिए स्थायी रोक की मांग की थी। सोनी का दावा है कि उसने ओरिएंटल रिकॉर्ड्स और इको रिकॉर्डिंग से अधिकार खरीद लिए हैं और इसलिए उसके पास इन गीतों के कॉपीराइट हैं। इसके विपरीत, सितम्बर 2025 में इलैयाराजा ने मद्रास उच्च न्यायालय में एक समान मुकदमा दायर किया, जिसमें सोनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई और उनके अधिकारों को चुनौती दी गई। इस अधिकार विवाद का उद्देश्य यह तय करना है कि वास्तव में कौन इन रचनाओं का कानूनी मालिक है, संगीतकार खुद या कोई तीसरी कंपनी। सोनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि मद्रास में दायर इलैयाराजा का मामला बॉम्बे में पहले दायर मुक़दमे से अलग नहीं है और इससे दोनों न्यायालय अलग‑अलग फैसले दे सकते हैं, जिससे जटिलता और कानूनी विरोधाभास पैदा हो सकता है। इलैयाराजा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायालयिक अधिकारिता पर सवाल उठाते हुए तर्क किया कि मद्रास में मामला होना चाहिए क्योंकि इससे दोनों पक्षों के दावे न्यायसंगत तरीके से सुने जा सकते हैं। बेंच के न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति विनोद के चंद्रन ने अंततः सोनी की याचिका को मंजूर करते हुए कहा कि इस तरह के दोनों मामलों को एक ही न्यायालय में सुनवाई के लिए ट्रांसफर करना जरूरी है ताकि किसी भी तरह के विरोधी निर्णय से बचा जा सके। इस आदेश के तहत अब विवाद बॉम्बे हाईकोर्ट में जारी रहेगा। यह फैसला संगीतकार और म्यूजिक इंडस्ट्री के बीच कॉपीराइट के अधिकारों से जुड़ी बढ़ती कानूनी लड़ाइयों में एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। इलैयाराजा ने एक दशक से अधिक समय से अपने संगीत के अधिकारों की रक्षा के लिए कई मुकदमे लड़े हैं, और सुप्रीम कोर्ट का यह कदम अब आगे की कानूनी प्रक्रिया को एक ही दिशा में सामान्य करने का प्रयास है।
SC Building National Symbol Demand Rejected

Hindi News National SC Building National Symbol Demand Rejected | CJI Says Administrative Matter नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक तस्वीर- फाइल फोटो सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की बिल्डिंग के गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला न्यायिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर विचार का विषय है। यह याचिका बदरवाड़ा वेणुगोपाल उर्फ बरा खतरनाक की तरफ से दायर की गई थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने याचिका पर सुनवाई की। CJI ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नई बिल्डिंग बन रही है और इस मुद्दे पर उस समय विचार किया जा सकता है। याचिकाकर्ता ने मौजूदा भवन पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की मांग की। इस पर कोर्ट ने आश्वासन दिया कि इसके बारे में सोचा जाएगा, लेकिन ऐसे मामलों को याचिका के जरिए नहीं उठाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक प्रतीक में अशोक चक्र के नीचे अशोक स्तंभ का सिंह बना है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे इस मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लिखित अनुरोध करें। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने मई 2025 में इस मुद्दे पर लेटर लिखा था, जिस पर नवंबर 2025 में जवाब मिला था कि सुप्रीम कोर्ट अपना अलग प्रतीक इस्तेमाल करता है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि वह जवाब उनके कार्यकाल से पहले का है और अब इस पर विचार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सचिव जनरल को निर्देश दिया कि इस मामले पर एक नोट तैयार कर सक्षम प्राधिकारी के सामने रखा जाए। याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि अगर गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने के लिए कोई वास्तु या संरचनात्मक व्यवस्था नहीं है, तो जरूरी संस्थागत और तकनीकी कदम उठाए जाएं। यह सब संविधान और राज्य प्रतीक के उपयोग से जुड़े कानूनों के अनुसार किया जाए। याचिका में यह भी मांग की गई थी कि इस प्रक्रिया को तय समय सीमा में लागू किया जाए। इसके लिए करीब 8 सप्ताह का समय सुझाया गया था। यह मांग State Emblem of India (Prohibition of Improper Use) Act, 2005 और State Emblem of India (Regulation of Use) Rules, 2007 के अनुरूप की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के प्रतीक में अशोक चक्र और संस्कृत श्लोक सुप्रीम कोर्ट का आधिकारिक प्रतीक अशोक चक्र के नीचे स्थित अशोक स्तंभ के सिंह को दर्शाता है। इसके नीचे संस्कृत में “यतो धर्मस्ततो जयः” (जहां धर्म है, वहां विजय है) लिखा है। यह प्रतीक 26 जनवरी 1950 को अपनाया गया था, जिस दिन सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई थी। यह सारनाथ के सिंह स्तंभ से प्रेरित है, जो न्याय, धर्म और देश की सर्वोच्च अदालत की अधिकारिता का प्रतीक है। वहीं भारत का राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ स्थित सम्राट अशोक के लायन कैपिटल (सिंह स्तंभ) से लिया गया है। इसमें चार एशियाई शेर पीठ से पीठ मिलाकर खड़े हैं। सामने से केवल तीन शेर दिखाई देते हैं, चौथा पीछे होता है। नीचे एक गोलाकार आधार होता है, जिस पर सिंह, बैल, घोड़े और हाथी की आकृतियां उकेरे गए हैं। इसके बीच में अशोक चक्र होता है और नीचे “सत्यमेव जयते” (सत्य की ही जीत होती है) लिखा होता है। राष्ट्रीय प्रतीक देश की करेंसी और सरकारी दस्तावेजों पर इस्तेमाल होता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
CJI Recuses from Election Panel Appointment

Hindi News National CJI Recuses From Election Panel Appointment | Conflict Of Interest Allegations नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार को चुनाव आयोग नियुक्ति कानून से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। CJI ने कहा, “मुझ पर हितों के टकराव (conflict of interest) का आरोप लग सकता है, इसलिए इस मामले से अलग होना उचित है।” उन्होंने सुझाव दिया कि इस केस को ऐसी बेंच को सौंपा जाए, जिसमें कोई भी जज भविष्य में चीफ जस्टिस बनने की कतार में न हो। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी CJI के साथ बेंच का हिस्सा थे। यह बेंच उन जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें 2023 के उस कानून को चुनौती दी गई है, जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति से CJI को हटा दिया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने भी CJI की इस बात का समर्थन किया। उन्होंने सुझाव दिया कि मामले को ऐसी बेंच के सामने रखा जाए, जिसमें कोई संभावित CJI न हो, ताकि पक्षपात की आशंका न रहे। इस सुझाव को स्वीकार करते हुए CJI ने निर्देश दिया कि यह मामला 7 अप्रैल को दूसरी बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- नियुक्ति एक समिति करेगी पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक समिति करेगी, जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI शामिल होंगे। दिसंबर 2023 को संसद के बनाए नए कानून के अनुसार इस समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल हैं (CJI को हटा दिया गया है)। याचिकाकर्ताओं का दावा निष्पक्षता कम होगी याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CJI को हटाने से नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता कम हो जाती है। संसद के कानून को कांग्रेस नेता जया ठाकुर और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने चुनौती दी है। केंद्र सरकार बोली-स्वतंत्रता केवल न्यायिक सदस्य पर निर्भर नहीं इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस कानून का बचाव करते हुए कहा था कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता केवल समिति में न्यायिक सदस्य (CJI) की मौजूदगी पर निर्भर नहीं करती। कानून मंत्रालय ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि 14 मार्च 2024 को दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति जल्दबाजी में नहीं की गई थी, जैसा कि याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून के तहत नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया था। मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला दिया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और CJI की समिति की सलाह पर होनी चाहिए। अभी यह है स्थिति सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक इस कानून पर रोक नहीं लगाई है। अब इस मामले की सुनवाई दूसरी बेंच करेगी। ————————————————- ये खबर भी पढ़ें: गरीबों के लिए आधी रात तक बैठ सकता हूं- सीजेआई:जस्टिस सूर्यकांत बोले-मैं यहां सबसे छोटे व्यक्ति के लिए हूं; मेरी कोर्ट में लग्जरी केस नहीं CJI जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि गरीबों को न्याय दिलाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, उनके लिए वे आधी रात तक कोर्ट में बैठ सकते हैं। जस्टिस जॉयमाल्या बागची के साथ बेंच में बैठे CJI ने यह टिप्पणी एक याचिका की सुनवाई के दौरान की। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Haldwani Banbhulpura Encroachment | Eid Worries Over Homes

बनभूलपुरा में ईद से पहले छत छिनने का डर दिखा। रमजान के आखिरी दिनों में जहां आमतौर पर खुशियों की तैयारी होती है, वहीं बनभूलपुरा के लोग कह रहे हैं, इस बार हमारी ईद फीकी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद रेलवे भूमि खाली कराने की कार्रवाई की तैयारी ने करीब 27 हजार लोगों के सिर से छत छिनने का . दैनिक भास्कर की टीम ने जब ग्राउंड जीरो पर हालात जानने की कोशिश की तो बनभूलपुरा की तंग गलियों में दो अलग-अलग तस्वीरें दिखीं। एक ओर रमजान की तैयारियां चल रही हैं, घर-घर सेवइयां बन रही हैं, बाजारों में खरीदारी हो रही है और बच्चे ईद को लेकर उत्साहित हैं। वहीं, दूसरी ओर, इन्हीं गलियों में डर, अनिश्चितता, बेचैनी और सन्नाटे का माहौल भी साफ महसूस हो रहा है। जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण 20 मार्च से इलाके में कैंप लगाकर कार्रवाई शुरू करने की तैयारी में हैं। प्रशासन की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विस्थापन की बात कही जा रही है, लेकिन लोगों को इस पर भरोसे से ज्यादा डर महसूस हो रहा है। ईद से पहले बनभूलपुरा की गलियों में सन्नाटा दिखा। ‘ईद के बाद घर रहेगा या नहीं, पता नहीं’ स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहार की तैयारी तो हर साल की तरह हो रही है, लेकिन मन में डर बैठा हुआ है। एक निवासी ने कहा- ईद की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन दिल में डर है कि उसके बाद घर रहेगा भी या नहीं। कई परिवारों का कहना है कि वे पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और पूरा जीवन इसी इलाके से जुड़ा है। ऐसे में सिर्फ मकान नहीं, पूरी जिंदगी उजड़ने का खतरा है। इस बार क्यों अलग है ईद का माहौल इस साल ईद-उल-फितर 30 या 31 मार्च को चांद दिखने के अनुसार मनाई जाएगी। आमतौर पर यह खुशी और मेल-मिलाप का त्योहार होता है, लेकिन बनभूलपुरा में इस बार लोग ‘खुशी से ज्यादा चिंता’ के साथ ईद की तैयारी कर रहे हैं। लोगों के चेहरे पर घर छिनने की चिंता साफ दिखी। कागजों में योजना, जमीन पर सवाल प्रशासन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास की बात कर रहा है, लेकिन लोगों के मन में कई सवाल बने हुए हैं। नया घर कब मिलेगा, कहां मिलेगा और तब तक लोग कहां रहेंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है। वहीं, छोटे दुकानदारों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए रोज़गार खत्म होने का भी डर सता रहा है, जिससे चिंता और अनिश्चितता का माहौल और बढ़ गया है। नींद उड़ी, भविष्य धुंधला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है। रातों की नींद गायब हो गई है, दिनभर चिंता बनी रहती है और बच्चों के भविष्य को लेकर डर सता रहा है। एक बुजुर्ग ने कहा, ईद तो हर साल आती है, लेकिन ऐसा पहली बार है जब खुश होने की हिम्मत नहीं हो रही। ———————— ये खबर भी पढ़ें : बनभूलपुरा जमीन विवाद-SC के आदेश की कॉपी जारी: 50 हजार लोगों के पुनर्वास पर अदालत सख्त, 28 अप्रैल को अगली सुनवाई हल्द्वानी के बनभूलपुरा अतिक्रमण मामले में आज सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सुनवाई के 4 दिन बाद की कॉपी जारी कर दी गई है। कोर्ट ने कहा है कि प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवेदन करने का अवसर दिया जाए और इसके लिए पुनर्वास शिविर आयोजित किए जाएं। (पढ़ें पूरी खबर)
Supreme Court Summons Mamata Over I-PAC Raid Entry

नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को I-PAC के ऑफिस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड के दौरान पश्चिम बंगाल की सीएम के अचानक पहुंचने पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आपने वहां पहुंचकर ठीक नहीं किया। ऐसे असामान्य हालात में केंद्रीय एजेंसी को क्या करना चाहिए। अगर कल कोई और मुख्यमंत्री भी ऐसी छापेमारी में घुस जाए तो क्या ED के पास कोई समाधान नहीं होगा। ED ने सुप्रीम कोर्ट में ममता के I-PAC के कार्यालय और प्रतीक जैन के घर और कार्यालय से लैपटॉप, फोन और कई दस्तावेज ले जाने को सत्ता का गंभीर दुरुपयोग बताया है। एजेंसी ने मुख्यमंत्री और उनके साथ आए अधिकारियों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज करने की मांग भी की है। तस्वीर 8 जनवरी, 2026 की है, जब बंगाल CM ममता ने कोलकाता में ED की छापेमारी के बीच मीडिया को संबोधित किया था। अब पूरे मामले को समझिए 8 जनवरी को ED की टीम ने प्रतीक जैन के कोलकाता के गुलाउडन स्ट्रीट स्थित घर और दूसरी टीम सॉल्टलेक स्थित दफ्तर पर छापा मारा था। प्रतीक जैन ही ममता बनर्जी के लिए पॉलिटिकल स्ट्रैटजी तैयार करते हैं। कार्रवाई सुबह 6 बजे से शुरू हुई थी, लेकिन करीब 11:30 बजे के बाद मामला बढ़ा। सबसे पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर, प्रतीक के आवास पर पहुंचे। कुछ समय बाद सीएम ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके घर पहुंच गईं। ममता वहां कुछ देर रुकीं। जब बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी। इसके बाद वे I-PAC के ऑफिस भी गईं। उन्होंने कहा- गृहमंत्री मेरी पार्टी के दस्तावेज उठवा रहे हैं। ED ने कहा कि पश्चिम बंगाल में 6 और दिल्ली में 4 ठिकानों पर छापेमारी की गई। ममता 8 जनवरी की दोपहर 12 बजे I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पहुंची थीं। कोर्ट रूम LIVE… राज्य सरकार: इस मामले में संवैधानिक ढांचे से जुड़े मूलभूत सवाल हैं, इसलिए दो जजों की बेंच इसे तय नहीं कर सकती। राज्य सरकार: ‘किसी केंद्रीय सरकारी विभाग को राज्य सरकार के खिलाफ याचिका दायर करने की अनुमति देना संघीय ढांचे के लिए खतरनाक होगा। उन्होंने कहा कि CBI, NCB, DRI और SFIO जैसी जांच एजेंसियों को भी स्वतंत्र रूप से मुकदमा दायर करने का वैधानिक अधिकार नहीं है। इसी तरह, राज्य स्तर की एजेंसियां CID, विजिलेंस आयोग और एंटी-करप्शन ब्यूरो के पास भी ऐसे अधिकार नहीं होते। जस्टिस मिश्रा: अगर कोई असामान्य स्थिति पैदा होती है, जैसे कोई मुख्यमंत्री केंद्रीय एजेंसी के काम में बाधा डालता है, तो क्या होगा। अगर अनुच्छेद 226 और 32 के तहत भी याचिका स्वीकार्य नहीं है, तो फिर फैसला कौन करेगा? कोई न कोई रास्ता होना चाहिए, ऐसा शून्य नहीं होना चाहिए। राज्य सरकार: संविधान में उपाय मौजूद हैं और केंद्र सरकार उचित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर सकती है, बजाय इसके कि कोई विभाग खुद स्वतंत्र रूप से याचिका दायर करे। अलग-अलग विभागों को सीधे याचिका दायर करने की अनुमति देने से संघीय ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है। सरकारों के बीच अनियंत्रित मुकदमेबाजी बढ़ सकती है। I-PAC रेड मामला : 2,742 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी है। यह राजनीतिक दलों के लिए बड़े स्तर पर चुनावी अभियानों का काम करती है। कंपनी और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन पर करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। CBI ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी। पूरा मामला ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। आरोप है कि ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक ट्रांसफर हुए। ED ने 28 नवंबर 2020 को इसकी जांच शुरू की थी। 8 जनवरी 2026 को ED ने कोलकाता में I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापा मारा था। ED के अफसरों ने प्रतीक के घर और ऑफिस से कई डॉक्यूमेंट्स जब्त किए। रेड के दौरान फाइलें लेकर चली गईं थी CM ममता सर्च ऑपरेशन के दौरान, CM ममता बनर्जी अन्य TMC नेताओं के साथ I-PAC ऑफिस पहुंचीं। इसके बाद काफी हंगामा हुआ। ममता ऑफिस से कई फाइलें लेकर बाहर निकलीं और मीडिया से बात की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसी पर हद से ज्यादा दखलंदाजी का आरोप लगाया। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि I-PAC पार्टी के चुनाव रणनीतिकार के रूप में काम करता है और विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ED ने गोपनीय चुनाव रणनीति से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए रेड डाली। पश्चिम बंगाल में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। TMC ने ED की कार्रवाई में बाधा डालने के आरोप का खंडन किया। वहीं पश्चिम बंगाल पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ FIR भी दर्ज की। —————————————- ये खबर भी पढ़ें… जहां चुनाव, वहां ED ने फाइलें खोलीं, बंगाल से पहले 3 राज्यों महाराष्ट्र-दिल्ली-झारखंड में यही पैटर्न पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बढ़ती सक्रियता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ED का काम आर्थिक अपराधों की जांच करना, काले धन और मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाना है, लेकिन कई बार उसकी कार्रवाई की टाइमिंग सवालों के घेरे में आ जाती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Harish Rana News: क्या हरीश राणा का लिवर, किडनी और आंख दूसरों के काम आएगा?

नई दिल्ली. गाजियाबाद के 32 वर्षीय हरीश राणा अब इस दुनिया में कुछ ही दिनों और घंटों के मेहमान हैं. हरीश राणा साल 2013 के एक्सीडेंट के बाद से ही वेजिटेटिव स्टेट यानी स्थायी अचेत अवस्था में हैं. सुप्रीम कोर्ट के इच्छा मृ्त्यु के आदेश के बाद पिछले दिनों हरीश राणा को एम्स दिल्ली में पैलिएटिव केयर में भर्ती किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में देश के इतिहास में पहली बार उनके मामले में पैसिव इच्छामृत्यु यानी लाइफ सपोर्ट हटाने की अनुमति दी थी. डॉक्टर्स ने उनके जीवन रक्षक उपकरण, पेट में लगी न्यूट्रिशन ट्यूब और पानी बंद कर दिया है. लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या हरीश के काम कर रहे अंग किडनी, लीवर और आंख किसी दूसरे शख्स को डोनेट किए जा सकते हैं? हालांकि, परिवार ने अंगदान की सहमति दे दी है. लेकिन अंगदान में कई दिक्कतें आ रही हैं? हरीश एम्स में अपनी विदाई की बाट जोह रहे हैं. पिता अशोक राणा के आंसू थम नहीं रहे हैं. धीमे स्वर में वे कहते हैं कि वह अपने मन की व्यथा बता नहीं सकते. उनके पास शब्द नहीं हैं. पिता और मां निर्मला देवी ने स्पष्ट कहा है कि बेटे की यह पीड़ा खत्म हो तो उनके काम करने वाले अंग दान कर दिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि 2 साल पहले ही दादीची देहदान समिति से संपर्क किया था. लेकिन इच्छामृत्यु केस में अंगदान के कानून नहीं हैं. क्योंकि हरीश राणा पूरी तरह ब्रेन डेड नहीं हैं. इसलिए अंगदान फिलहाल संभव नहीं है. लेकिन मंगलवार को एम्स के डॉक्टर्स ने हरीश के किडनी, लीवर, लंग्स, हार्ट, पैंक्रियास, आंतों, कॉर्निया और हार्ट वॉल्व की जांच शुरू कर दी है, जिसकी रिपोर्ट 1-2 दिन में आएगी. पिता अशोक राणा का कहना है कि अगर हरीश की जिंदगी किसी को नई जिंदगी दे सके, तो हम तैयार हैं. अंगदान संभव है, लेकिन कई जटिलताएं भी हैं. हरीश अभी ब्रेन डेड नहीं हैं, सिर्फ वेजिटेटिव स्टेट में हैं. पैसिव इच्छामृत्यु में डॉक्टर्स मौत को जल्दी नहीं करेंगे. सिर्फ प्राकृतिक तरीके से जाने देंगे. यह प्रक्रिया 15 से 30 दिन या उससे ज्यादा भी ले सकती है. इस दौरान अंगों की स्थिति खराब हो सकती है क्योंकि न्यूट्रिशन और पानी बंद है. ट्रांसप्लांट के लिए अंगों को तुरंत निकालना पड़ता है. मौत के कुछ मिनट या घंटों के अंदर. अगर मौत धीरे-धीरे होती है तो अंगों में खून का बहाव रुकने से वे खराब हो जाते हैं. भारत में अंगदान का कानून भारत में THOA एक्ट मुख्य रूप से ब्रेन डेथ के बाद ही आसान है. यहां डोनेशन आफ्टर सर्कुलेटरी डेथ संभव है, लेकिन बहुत कम अस्पतालों में होता है और इसके लिए खास प्रोटोकॉल, तुरंत टीम और NOTTO की मंजूरी चाहिए. एम्स पैलिएटिव केयर टीम का फोकस सिर्फ हरीश को दर्द-मुक्त रखना है न कि अंगों को बचाना. डॉक्टर्स कहते हैं, ‘हम मौत को न तो तेज करेंगे, न रोकेंगे.’ अगर अंग अच्छे रहें तो किडनी-लीवर 2-4 लोगों को नई जिंदगी दे सकते हैं, लेकिन समय और स्थिति के चलते यह आसान नहीं. हरीश केस में आगे क्या होगा? हरीश के शरीर का जांच रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टर्स फैसला लेंगे कि अंग दान के लायक हैं या नहीं. मौत के बाद तुरंत अंग निकालने की तैयारी रखी जा रही है. अगर दान हुआ तो यह देश के लिए मिसाल बनेगा. एक परिवार का दर्द दूसरों की जिंदगी बन सकता है. हरीश राणा का यह केस सिर्फ इच्छामृत्यु नहीं, बल्कि अंगदान की नई राह भी खोल रहा है. परिवार की इच्छा साफ है, लेकिन मेडिकल रियलिटी और कानूनी प्रक्रिया में चुनौतियां बाकी हैं. एम्स डॉक्टर्स और परिवार दोनों मिलकर यह तय करेंगे कि हरीश की अंतिम यात्रा कितने लोगों के लिए उम्मीद की किरण बने.
Supreme Court Directs Centre to Make Paternity Leave Law

नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि अब किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिला को 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश मिलेगा। सिर्फ 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही छुट्टी देना गलत है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 की धारा 60(4) को असंवैधानिक करार दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह पेटरनिटी लीव (पितृत्व अवकाश) को सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट(सामाजिक सुरक्षा लाभ) के रूप में मान्यता देने के लिए कानून बनाए। पेटरनिटी लीव की अवधि माता-पिता और बच्चे की जरूरतों के अनुसार तय होनी चाहिए। हम्सानन्दिनी नंदूरी ने इसे लेकर जनहित याचिका दाखिल की थी जिसमें कहा गया था कि उम्र आधारित प्रतिबंध मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। पेटरनिटी लीव क्या है पेटरनिटी लीव वह समय होता है जो बच्चे के जन्म या गोद लेने के बाद पिता को दिया जाता है, ताकि वह बच्चे की देखभाल कर सके और मां का सहयोग कर सके। यह विचार इस समझ पर आधारित है कि बच्चे की परवरिश माता-पिता दोनों की जिम्मेदारी होती है। इससे महिलाओं को भी काम जारी रखने में मदद मिलती है और घर के कामों का संतुलित बंटवारा होता है। भारत में अभी पेटरनिटी लीव को कानूनन मान्यता नहीं भारत में अभी तक पेटरनिटी लीव को कानूनन मान्यता नहीं मिली है। हालांकि महिलाओं को मेटरनिटी लीव मिलती है। पहले दो बच्चों तक: 26 हफ्ते का वेतन सहित अवकाश दो से अधिक बच्चों पर: 12 हफ्ते का अवकाश इसमें से 8 हफ्ते डिलीवरी से पहले लिए जा सकते हैं ———————————- ये खबर भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट बोला-मैटरनिटी लीव जन्म देने के अधिकारों का हिस्सा:मद्रास हाईकोर्ट का फैसला खारिज; तीसरे बच्चे के लिए छुट्टी देने से इनकार किया था सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के एक आदेश को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने एक सरकारी स्कूल की टीचर को उसके तीसरे बच्चे के जन्म के लिए मैटरनिटी लीव देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि स्टेट पॉलिसी के मुताबिक मैटरनिटी लीव का फायदा केवल दो बच्चों तक ही सीमित है। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
High Court Summons Challenged, Judge Change Sought

Hindi News National Delhi Liquor Policy Case: High Court Summons Challenged, Judge Change Sought नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक 27 फरवरी को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट के बाहर बयान देते समय अरविंद केजरीवाल रोने लगे। मनीष सिसोदिया ने उन्हें ढाढस बंधाया। दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई कर रहे जज को बदलने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है। वहीं सिसोदिया ने हाईकोर्ट के समन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को केजरीवाल, सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को एक्साइज पॉलिसी केस में डिस्चार्ज (रिहा) कर दिया था। इसी दिन CBI ने हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी। 9 मार्च को हाईकोर्ट के जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने CBI की याचिका पर केजरीवाल, सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। CBI की अपील पर अब 16 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। इसी बीच AAP नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जांच अधिकारी के खिलाफ डिपार्टमेंटल एक्शन पर भी रोक 9 मार्च की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की CBI अधिकारियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) मामले में ट्रायल कोर्ट आगे की सुनवाई तब तक टाल दे, जब तक हाईकोर्ट इस मामले पर आगे सुनवाई न कर ले। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एजेंसी फिलहाल डिस्चार्ज आदेश पर रोक नहीं चाहती, लेकिन यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच को प्रभावित न करे। हाईकोर्ट ने एक्साइज पॉलिसी केस की जांच करने वाले CBI ऑफिसर के खिलाफ डिपार्टमेंटल एक्शन लेने के ट्रायल कोर्ट के ऑर्डर पर रोक लगा दी है। 27 फरवरी को कोर्ट से घर पहुंचने पर केजरीवाल अपनी पत्नी सुनिता से गले मिलकर रोने लगे। बरी होने पर केजरीवाल ने कहा था- मैंने सिर्फ ईमानदारी कमाई 27 फरवरी को बरी होने के बाद कोर्ट से बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल भावुक हो गए। उन्होंने कहा- मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है। आज ये साबित हो गया कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी कट्टर ईमानदार हैं। वहीं, कोर्ट के फैसले पर मनीष सिसोदिया ने कहा- हमें एक बार फिर गर्व हो रहा हैं अपने संविधान पर और बी.आर. अंबेडकर पर, जिन्होंने हमें ऐसा संविधान दिया। सच की फिर से जीत हुई है। पूरी खबर पढ़ें… CBI का दावा- केजरीवाल के करीबी ने साउथ ग्रुप से ₹100 करोड़ वसूले सीबीआई का दावा है कि केजरीवाल के करीबी विजय नायर दिल्ली एक्साइज बिजनेस के स्टेकहोल्डर्स के संपर्क में थे। वे शराब नीति में उन्हें फायदा देने के बदले पैसों की मांग करते थे। नायर वो जरिया थे, जिन्होंने केजरीवाल के लिए BRS नेता के. कविता की अध्यक्षता वाले साउथ ग्रुप के लोगों से डील की। नायर ने ही शराब नीति में फायदा देने के बदले में साउथ ग्रुप के लोगों से ₹100 करोड़ वसूले थे। दो अन्य आरोपियों- विनोद चौहान और आशीष माथुर के माध्यम से इन पैसों को गोवा भेजा गया। केजरीवाल के निर्देश पर इस ₹100 करोड़ की रकम में से ₹44.5 करोड़ कैश गोवा विधानसभा चुनाव में खर्च किया या। इसलिए केजरीवाल चुनाव के दौरान गलत तरीके से कमाए पैसों का इस्तेमाल करने के भी जिम्मेदार हैं, क्योंकि इसका फायदा आम आदमी पार्टी को ही मिला है। दो पूर्व विधायकों ने चुनाव में पार्टी से पैसे मिलने का दावा किया था CBI के अनुसार AAP के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने वाले गोवा के दो पूर्व विधायकों ने आरोप लगाया था कि उन्हें एक पार्टी वालंटियर ने चुनाव खर्चों के लिए कैश दिए थे। एजेंसी ने अवैध रुपए लेने और उसके इस्तेमाल के लिए AAP के गोवा प्रभारी दुर्गेश पाठक को भी जिम्मेदार ठहराया है। एजेंसी का दावा है कि शराब नीति के तीन स्टेकहोल्डर्स- शराब निर्माताओं, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं का एक गुट तैयार हुआ था। सभी ने अपने-अपने फायदे के लिए नियमों का उल्लंघन किया। पब्लिक सर्वेंट्स और साजिश में शामिल अन्य आरोपियों को आर्थिक लाभ मिला, लेकिन सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। BJP का पोस्टर- AAP के पाप अभी पाप धुले नहीं हैं BJP ने केजरीवाल-सिसोदिया के बरी होने के कुछ देर बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी किया, जिसमें लिखा है- AAP के पाप अभी पाप धुले नहीं हैं। ————— ये खबर भी पढ़ें… केजरीवाल बोले- कोर्ट का फैसला भाजपा के मुंह पर तमाचा:हमें खत्म करने के लिए मोदी खुद इस केस की मॉनिटरिंग कर रहे थे आम आदमी पार्टी(AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कथित शराब घोटाले में कोर्ट का फैसला भारतीय जनता पार्टी के मुंह पर जोरदार तमाचा है। उन्होंने दिल्ली के जंतर मंतर पर 1 मार्च को एक रैली में कहा कि AAP को खत्म करने के लिए मोदी जी खुद इस केस की मॉनिटरिंग कर रहे थे। उन्होंने मोदी और शाह पर 4 साल तक परेशान करने का आरोप लगाया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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Hindi News National Delhi Liquor Policy Case: High Court Summons Challenged, Judge Change Sought नई दिल्ली3 घंटे पहले कॉपी लिंक 27 फरवरी को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट के बाहर बयान देते समय अरविंद केजरीवाल रोने लगे। मनीष सिसोदिया ने उन्हें ढाढस बंधाया। दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई कर रहे जज को बदलने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है। वहीं सिसोदिया ने हाईकोर्ट के समन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को केजरीवाल, सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को एक्साइज पॉलिसी केस में डिस्चार्ज (रिहा) कर दिया था। इसी दिन CBI ने हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी। 9 मार्च को हाईकोर्ट के जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने CBI की याचिका पर केजरीवाल, सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। CBI की अपील पर अब 16 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। इसी बीच AAP नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जांच अधिकारी के खिलाफ डिपार्टमेंटल एक्शन पर भी रोक 9 मार्च की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की CBI अधिकारियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) मामले में ट्रायल कोर्ट आगे की सुनवाई तब तक टाल दे, जब तक हाईकोर्ट इस मामले पर आगे सुनवाई न कर ले। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एजेंसी फिलहाल डिस्चार्ज आदेश पर रोक नहीं चाहती, लेकिन यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच को प्रभावित न करे। हाईकोर्ट ने एक्साइज पॉलिसी केस की जांच करने वाले CBI ऑफिसर के खिलाफ डिपार्टमेंटल एक्शन लेने के ट्रायल कोर्ट के ऑर्डर पर रोक लगा दी है। 27 फरवरी को कोर्ट से घर पहुंचने पर केजरीवाल अपनी पत्नी सुनिता से गले मिलकर रोने लगे। बरी होने पर केजरीवाल ने कहा था- मैंने सिर्फ ईमानदारी कमाई 27 फरवरी को बरी होने के बाद कोर्ट से बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल भावुक हो गए। उन्होंने कहा- मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है। आज ये साबित हो गया कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी कट्टर ईमानदार हैं। वहीं, कोर्ट के फैसले पर मनीष सिसोदिया ने कहा- हमें एक बार फिर गर्व हो रहा हैं अपने संविधान पर और बी.आर. अंबेडकर पर, जिन्होंने हमें ऐसा संविधान दिया। सच की फिर से जीत हुई है। पूरी खबर पढ़ें… CBI का दावा- केजरीवाल के करीबी ने साउथ ग्रुप से ₹100 करोड़ वसूले सीबीआई का दावा है कि केजरीवाल के करीबी विजय नायर दिल्ली एक्साइज बिजनेस के स्टेकहोल्डर्स के संपर्क में थे। वे शराब नीति में उन्हें फायदा देने के बदले पैसों की मांग करते थे। नायर वो जरिया थे, जिन्होंने केजरीवाल के लिए BRS नेता के. कविता की अध्यक्षता वाले साउथ ग्रुप के लोगों से डील की। नायर ने ही शराब नीति में फायदा देने के बदले में साउथ ग्रुप के लोगों से ₹100 करोड़ वसूले थे। दो अन्य आरोपियों- विनोद चौहान और आशीष माथुर के माध्यम से इन पैसों को गोवा भेजा गया। केजरीवाल के निर्देश पर इस ₹100 करोड़ की रकम में से ₹44.5 करोड़ कैश गोवा विधानसभा चुनाव में खर्च किया या। इसलिए केजरीवाल चुनाव के दौरान गलत तरीके से कमाए पैसों का इस्तेमाल करने के भी जिम्मेदार हैं, क्योंकि इसका फायदा आम आदमी पार्टी को ही मिला है। दो पूर्व विधायकों ने चुनाव में पार्टी से पैसे मिलने का दावा किया था CBI के अनुसार AAP के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने वाले गोवा के दो पूर्व विधायकों ने आरोप लगाया था कि उन्हें एक पार्टी वालंटियर ने चुनाव खर्चों के लिए कैश दिए थे। एजेंसी ने अवैध रुपए लेने और उसके इस्तेमाल के लिए AAP के गोवा प्रभारी दुर्गेश पाठक को भी जिम्मेदार ठहराया है। एजेंसी का दावा है कि शराब नीति के तीन स्टेकहोल्डर्स- शराब निर्माताओं, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं का एक गुट तैयार हुआ था। सभी ने अपने-अपने फायदे के लिए नियमों का उल्लंघन किया। पब्लिक सर्वेंट्स और साजिश में शामिल अन्य आरोपियों को आर्थिक लाभ मिला, लेकिन सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। BJP का पोस्टर- AAP के पाप अभी पाप धुले नहीं हैं BJP ने केजरीवाल-सिसोदिया के बरी होने के कुछ देर बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी किया, जिसमें लिखा है- AAP के पाप अभी पाप धुले नहीं हैं। ————— ये खबर भी पढ़ें… केजरीवाल बोले- कोर्ट का फैसला भाजपा के मुंह पर तमाचा:हमें खत्म करने के लिए मोदी खुद इस केस की मॉनिटरिंग कर रहे थे आम आदमी पार्टी(AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कथित शराब घोटाले में कोर्ट का फैसला भारतीय जनता पार्टी के मुंह पर जोरदार तमाचा है। उन्होंने दिल्ली के जंतर मंतर पर 1 मार्च को एक रैली में कहा कि AAP को खत्म करने के लिए मोदी जी खुद इस केस की मॉनिटरिंग कर रहे थे। उन्होंने मोदी और शाह पर 4 साल तक परेशान करने का आरोप लगाया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
SC Dismisses Shopping Mall Plea on Public Safety; Want Us to Run Country?

Hindi News National SC Dismisses Shopping Mall Plea On Public Safety; Want Us To Run Country? नई दिल्ली4 घंटे पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (13 मार्च) को एक याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि क्या आप चाहते हैं कि हम पूरे देश को चलाएं?। याचिका में देश में सड़कों, पुलों और बिजली की तारों आदि की ठीक से देखभाल करके जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक निर्देश देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि यह याचिका शॉपिंग मॉल जैसी है, जिसमें हर तरह की मांग रख दी गई है। पीठ ने कहा कि ऐसे व्यापक आदेश देना लगभग असंभव है, जब तक कि उठाए गए मुद्दे स्पष्ट और विशेष न हों। इसलिए हम इस याचिका पर सुनवाई नहीं करेंगे। हाईकोर्ट जाने को कहा हालांकि अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहे तो उचित तरीके से नई याचिका बनाकर संबंधित हाईकोर्ट में जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मामले की असल बातों (मेरिट) पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है। CJI ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि आप बहुत व्यापक निर्देश मांग रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि इन निर्देशों का राज्यों के वित्त (पैसों) पर असर पड़ेगा, इसलिए राज्यों की स्थिति समझने के लिए हाईकोर्ट ज्यादा उपयुक्त हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सरकारी लापरवाही के कारण देशभर में लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। याचिका में हर तरह की मांग याचिका में केंद्र सरकार और अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे: सड़कों, पुलों और बिजली की तारों जैसी सार्वजनिक सुविधाओं की नियमित जांच और मरम्मत करें उच्च स्तरीय स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट समिति बनाएं इस समिति में सिविल इंजीनियर, इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ, फोरेंसिक जांचकर्ता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हों यह समिति शहरों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक ढांचे की नियमित सुरक्षा जांच करे 2020 से अब तक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी मौतों का डेटा इकट्ठा कर डिजिटल रूप में सार्वजनिक किया जाए हर जिले की तिमाही रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा की जाए————————-ये खबर भी पढ़ें:सुप्रीम कोर्ट बोला- UCC लागू करने का समय आ गया:संसद फैसला करे; शरियत कानून में सुधार की जल्दबाजी न करें, इससे नुकसान की आशंका सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का समय आ गया है। इस पर फैसला करना कोर्ट के बजाय संसद का काम है। कोर्ट शरियत कानून 1937 की कुछ धाराओं को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इन धाराओं से मुस्लिम महिलाओं के साथ भेदभाव का आरोप था। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









