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Haldwani Banbhulpura Encroachment | Eid Worries Over Homes

Haldwani Banbhulpura Encroachment | Eid Worries Over Homes

बनभूलपुरा में ईद से पहले छत छिनने का डर दिखा।

रमजान के आखिरी दिनों में जहां आमतौर पर खुशियों की तैयारी होती है, वहीं बनभूलपुरा के लोग कह रहे हैं, इस बार हमारी ईद फीकी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद रेलवे भूमि खाली कराने की कार्रवाई की तैयारी ने करीब 27 हजार लोगों के सिर से छत छिनने का

.

दैनिक भास्कर की टीम ने जब ग्राउंड जीरो पर हालात जानने की कोशिश की तो बनभूलपुरा की तंग गलियों में दो अलग-अलग तस्वीरें दिखीं। एक ओर रमजान की तैयारियां चल रही हैं, घर-घर सेवइयां बन रही हैं, बाजारों में खरीदारी हो रही है और बच्चे ईद को लेकर उत्साहित हैं। वहीं, दूसरी ओर, इन्हीं गलियों में डर, अनिश्चितता, बेचैनी और सन्नाटे का माहौल भी साफ महसूस हो रहा है।

जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण 20 मार्च से इलाके में कैंप लगाकर कार्रवाई शुरू करने की तैयारी में हैं। प्रशासन की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विस्थापन की बात कही जा रही है, लेकिन लोगों को इस पर भरोसे से ज्यादा डर महसूस हो रहा है।

ईद से पहले बनभूलपुरा की गलियों में सन्नाटा दिखा।

‘ईद के बाद घर रहेगा या नहीं, पता नहीं’

स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहार की तैयारी तो हर साल की तरह हो रही है, लेकिन मन में डर बैठा हुआ है। एक निवासी ने कहा- ईद की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन दिल में डर है कि उसके बाद घर रहेगा भी या नहीं।

कई परिवारों का कहना है कि वे पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और पूरा जीवन इसी इलाके से जुड़ा है। ऐसे में सिर्फ मकान नहीं, पूरी जिंदगी उजड़ने का खतरा है।

इस बार क्यों अलग है ईद का माहौल

इस साल ईद-उल-फितर 30 या 31 मार्च को चांद दिखने के अनुसार मनाई जाएगी। आमतौर पर यह खुशी और मेल-मिलाप का त्योहार होता है, लेकिन बनभूलपुरा में इस बार लोग ‘खुशी से ज्यादा चिंता’ के साथ ईद की तैयारी कर रहे हैं।

लोगों के चेहरे पर घर छिनने की चिंता साफ दिखी।

लोगों के चेहरे पर घर छिनने की चिंता साफ दिखी।

कागजों में योजना, जमीन पर सवाल

प्रशासन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास की बात कर रहा है, लेकिन लोगों के मन में कई सवाल बने हुए हैं। नया घर कब मिलेगा, कहां मिलेगा और तब तक लोग कहां रहेंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है। वहीं, छोटे दुकानदारों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए रोज़गार खत्म होने का भी डर सता रहा है, जिससे चिंता और अनिश्चितता का माहौल और बढ़ गया है।

नींद उड़ी, भविष्य धुंधला

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है। रातों की नींद गायब हो गई है, दिनभर चिंता बनी रहती है और बच्चों के भविष्य को लेकर डर सता रहा है। एक बुजुर्ग ने कहा, ईद तो हर साल आती है, लेकिन ऐसा पहली बार है जब खुश होने की हिम्मत नहीं हो रही।

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ये खबर भी पढ़ें :

बनभूलपुरा जमीन विवाद-SC के आदेश की कॉपी जारी: 50 हजार लोगों के पुनर्वास पर अदालत सख्त, 28 अप्रैल को अगली सुनवाई

हल्द्वानी के बनभूलपुरा अतिक्रमण मामले में आज सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सुनवाई के 4 दिन बाद की कॉपी जारी कर दी गई है। कोर्ट ने कहा है कि प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवेदन करने का अवसर दिया जाए और इसके लिए पुनर्वास शिविर आयोजित किए जाएं। (पढ़ें पूरी खबर)

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स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहार की तैयारी तो हर साल की तरह हो रही है, लेकिन मन में डर बैठा हुआ है। एक निवासी ने कहा- ईद की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन दिल में डर है कि उसके बाद घर रहेगा भी या नहीं।

कई परिवारों का कहना है कि वे पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और पूरा जीवन इसी इलाके से जुड़ा है। ऐसे में सिर्फ मकान नहीं, पूरी जिंदगी उजड़ने का खतरा है।

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