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CJI Recuses from Election Panel Appointment

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नई दिल्ली1 घंटे पहले

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भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार को चुनाव आयोग नियुक्ति कानून से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। CJI ने कहा, “मुझ पर हितों के टकराव (conflict of interest) का आरोप लग सकता है, इसलिए इस मामले से अलग होना उचित है।”

उन्होंने सुझाव दिया कि इस केस को ऐसी बेंच को सौंपा जाए, जिसमें कोई भी जज भविष्य में चीफ जस्टिस बनने की कतार में न हो। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी CJI के साथ बेंच का हिस्सा थे।

यह बेंच उन जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें 2023 के उस कानून को चुनौती दी गई है, जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति से CJI को हटा दिया गया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने भी CJI की इस बात का समर्थन किया। उन्होंने सुझाव दिया कि मामले को ऐसी बेंच के सामने रखा जाए, जिसमें कोई संभावित CJI न हो, ताकि पक्षपात की आशंका न रहे। इस सुझाव को स्वीकार करते हुए CJI ने निर्देश दिया कि यह मामला 7 अप्रैल को दूसरी बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- नियुक्ति एक समिति करेगी

पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक समिति करेगी, जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI शामिल होंगे। दिसंबर 2023 को संसद के बनाए नए कानून के अनुसार इस समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल हैं (CJI को हटा दिया गया है)।

याचिकाकर्ताओं का दावा निष्पक्षता कम होगी

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CJI को हटाने से नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता कम हो जाती है। संसद के कानून को कांग्रेस नेता जया ठाकुर और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने चुनौती दी है।

केंद्र सरकार बोली-स्वतंत्रता केवल न्यायिक सदस्य पर निर्भर नहीं

इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस कानून का बचाव करते हुए कहा था कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता केवल समिति में न्यायिक सदस्य (CJI) की मौजूदगी पर निर्भर नहीं करती।

कानून मंत्रालय ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि 14 मार्च 2024 को दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति जल्दबाजी में नहीं की गई थी, जैसा कि याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून के तहत नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया था।

मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला दिया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और CJI की समिति की सलाह पर होनी चाहिए।

अभी यह है स्थिति

  • सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक इस कानून पर रोक नहीं लगाई है।
  • अब इस मामले की सुनवाई दूसरी बेंच करेगी।

————————————————- ये खबर भी पढ़ें:

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CJI जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि गरीबों को न्याय दिलाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, उनके लिए वे आधी रात तक कोर्ट में बैठ सकते हैं।

जस्टिस जॉयमाल्या बागची के साथ बेंच में बैठे CJI ने यह टिप्पणी एक याचिका की सुनवाई के दौरान की। पढ़ें पूरी खबर…

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उन्होंने सुझाव दिया कि इस केस को ऐसी बेंच को सौंपा जाए, जिसमें कोई भी जज भविष्य में चीफ जस्टिस बनने की कतार में न हो। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी CJI के साथ बेंच का हिस्सा थे।

यह बेंच उन जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें 2023 के उस कानून को चुनौती दी गई है, जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति से CJI को हटा दिया गया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने भी CJI की इस बात का समर्थन किया। उन्होंने सुझाव दिया कि मामले को ऐसी बेंच के सामने रखा जाए, जिसमें कोई संभावित CJI न हो, ताकि पक्षपात की आशंका न रहे। इस सुझाव को स्वीकार करते हुए CJI ने निर्देश दिया कि यह मामला 7 अप्रैल को दूसरी बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- नियुक्ति एक समिति करेगी

पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक समिति करेगी, जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI शामिल होंगे। दिसंबर 2023 को संसद के बनाए नए कानून के अनुसार इस समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल हैं (CJI को हटा दिया गया है)।

याचिकाकर्ताओं का दावा निष्पक्षता कम होगी

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CJI को हटाने से नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता कम हो जाती है। संसद के कानून को कांग्रेस नेता जया ठाकुर और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने चुनौती दी है।

केंद्र सरकार बोली-स्वतंत्रता केवल न्यायिक सदस्य पर निर्भर नहीं

इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस कानून का बचाव करते हुए कहा था कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता केवल समिति में न्यायिक सदस्य (CJI) की मौजूदगी पर निर्भर नहीं करती।

कानून मंत्रालय ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि 14 मार्च 2024 को दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति जल्दबाजी में नहीं की गई थी, जैसा कि याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून के तहत नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया था।

मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला दिया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और CJI की समिति की सलाह पर होनी चाहिए।

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  • अब इस मामले की सुनवाई दूसरी बेंच करेगी।

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