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- SC Dismisses Shopping Mall Plea On Public Safety; Want Us To Run Country?
नई दिल्ली4 घंटे पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (13 मार्च) को एक याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि क्या आप चाहते हैं कि हम पूरे देश को चलाएं?। याचिका में देश में सड़कों, पुलों और बिजली की तारों आदि की ठीक से देखभाल करके जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक निर्देश देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि यह याचिका शॉपिंग मॉल जैसी है, जिसमें हर तरह की मांग रख दी गई है।
पीठ ने कहा कि ऐसे व्यापक आदेश देना लगभग असंभव है, जब तक कि उठाए गए मुद्दे स्पष्ट और विशेष न हों। इसलिए हम इस याचिका पर सुनवाई नहीं करेंगे।

हाईकोर्ट जाने को कहा
हालांकि अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहे तो उचित तरीके से नई याचिका बनाकर संबंधित हाईकोर्ट में जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मामले की असल बातों (मेरिट) पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है।
CJI ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि आप बहुत व्यापक निर्देश मांग रहे हैं।
कोर्ट ने कहा कि इन निर्देशों का राज्यों के वित्त (पैसों) पर असर पड़ेगा, इसलिए राज्यों की स्थिति समझने के लिए हाईकोर्ट ज्यादा उपयुक्त हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सरकारी लापरवाही के कारण देशभर में लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।
याचिका में हर तरह की मांग
याचिका में केंद्र सरकार और अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे:
- सड़कों, पुलों और बिजली की तारों जैसी सार्वजनिक सुविधाओं की नियमित जांच और मरम्मत करें
- उच्च स्तरीय स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट समिति बनाएं
- इस समिति में सिविल इंजीनियर, इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ, फोरेंसिक जांचकर्ता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हों
- यह समिति शहरों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक ढांचे की नियमित सुरक्षा जांच करे
- 2020 से अब तक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी मौतों का डेटा इकट्ठा कर डिजिटल रूप में सार्वजनिक किया जाए
- हर जिले की तिमाही रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा की जाए————————-ये खबर भी पढ़ें:सुप्रीम कोर्ट बोला- UCC लागू करने का समय आ गया:संसद फैसला करे; शरियत कानून में सुधार की जल्दबाजी न करें, इससे नुकसान की आशंका

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का समय आ गया है। इस पर फैसला करना कोर्ट के बजाय संसद का काम है।
कोर्ट शरियत कानून 1937 की कुछ धाराओं को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इन धाराओं से मुस्लिम महिलाओं के साथ भेदभाव का आरोप था। पढ़ें पूरी खबर…















































