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ईरान ने ट्रम्प का 48 घंटे का अल्टीमेटम ठुकराया:कहा- बेबस और घबराकर धमकी दे रहे, तुम्हारे लिए नरक के दरवाजे खोल देंगे

ईरान ने ट्रम्प का 48 घंटे का अल्टीमेटम ठुकराया:कहा- बेबस और घबराकर धमकी दे रहे, तुम्हारे लिए नरक के दरवाजे खोल देंगे

ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 48 घंटे में होर्मुज खोलने के अल्टीमेटम को ठुकरा दिया है। ईरानी सेना ने कहा है कि अमेरिका बेबस और घबराकर धमकियां दे रहा है। ईरान के केंद्रीय सैन्य मुख्यालय खातम अल-अनबिया के जनरल अली अब्दोल्लाही अलीअबादी ने ट्रम्प की चेतावनी को मूर्खतापूर्ण कार्रवाई बताया और इसे सिरे से खारिज कर दिया। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की धमकियों का मतलब है कि “तुम्हारे लिए भी नरक के दरवाजे खोल दिए जाएंगे।” इससे पहले ट्रम्प ने ईरान को 48 घंटे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने या समझौता करने का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने कहा था कि समय खत्म हो रहा है और ऐसा नहीं होने पर ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया जाएगा। ट्रम्प अब तक होर्मुज खोलने के लिए ईरान को तीन बार अल्टीमेटम दे चुके हैं, जिससे इस मुद्दे पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान बोला- बुशहर न्यूक्लियर साइट पर 4 बार हमला हुआ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका और इजराइल ने बुशहर न्यूक्लियर साइट पर चार बार हमला किया है। उन्होंने कहा कि इन हमलों से न केवल ईरान बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि न्यूक्लियर साइट के पास हमले बेहद जोखिम भरे हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के जापोरिज्जिया न्यूक्लियर प्लांट को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो चिंता दिखाई जाती है, वैसी संवेदनशीलता बुशेहर के मामले में नहीं दिख रही है। अराघची ने यह भी कहा कि पेट्रोकेमिकल ठिकानों पर हमले इस बात का संकेत हैं कि रणनीतिक ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे हमलों से पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती है। ईरान जंग से जुड़ी 4 तस्वीरें… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Trump Sons Defense Firm | Middle East Drone Demos

Trump Sons Defense Firm | Middle East Drone Demos

1 घंटे पहले कॉपी लिंक एरिक ट्रम्प (बाएं) और डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर (दाएं) अपनी क्रिप्टोकरेंसी कंपनी के शेयर बाजार में लिस्टिंग के मौके पर। यह तस्वीर सितंबर 2025 की है। अमेरिका में एक ड्रोन स्टार्टअप को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें राष्ट्रपति ट्रम्प के बेटे एरिक ट्रम्प और डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर जुड़े हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लोरिडा की पावरस कंपनी मिडिल ईस्ट के देशों को अपने ड्रोन सिस्टम बेचने की कोशिश कर रही है। ट्रम्प के बेटे एरिक ट्रम्प और डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर फरवरी के अंत में इस कंपनी से सलाहकार के तौर पर जुड़े थे, ये वही समय था जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया था। हालांकि दोनों को कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी मिलने की उम्मीद है। पावरस से जुड़े अधिकारियों ने अबू धाबी में अधिकारियों से मुलाकात की है। बातचीत इस बात पर हुई कि UAE को हथियार और ड्रोन डिफेंस सिस्टम बेचे जा सकते हैं, क्योंकि वह ईरान के खिलाफ अपने डिफेंस को और मजबूत करना चाहता है। इस घटना के बाद आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रपति के परिवार के लोग युद्ध से फायदा कमा रहे हैं। फ्लोरिडा की कंपनी Powerus खाड़ी के कई देशों में अपनी तकनीक बेचने की कोशिश कर रही है। पावरस के सह-संस्थापक ब्रेट वेलिकोविच ने बताया कि उनकी टीम खाड़ी के कई देशों में ड्रोन डेमो दिखा रही है, ताकि यह समझाया जा सके कि उनके इंटरसेप्टर ड्रोन ईरानी हमलों से बचाव में कैसे मदद कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि किन देशों में यह प्रदर्शन किया जा रहा है। वेलिकोविच ने कहा कि अमेरिका को चीन और रूस जैसे देशों से मुकाबले के लिए तेजी से ड्रोन तकनीक विकसित करनी होगी, नहीं तो वह पीछे रह जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। एंटी-ड्रोन सिस्टम की बढ़ रही मांग इस पूरे मामले से यह साफ होता है कि ईरान युद्ध के चलते ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम की मांग बढ़ रही है। ईरान सस्ते ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी महंगे मिसाइल सिस्टम से उन्हें गिराने की कोशिश करते हैं। इससे लागत का बड़ा अंतर पैदा हो रहा है। यही वजह है कि सस्ते और असरदार एंटी-ड्रोन सिस्टम बनाने वाली कंपनियों के लिए बड़ा मौका बन रहा है। पावरस ने हाल ही में ‘गार्डियन-1’ नाम का एक इंटरसेप्टर लॉन्च किया है, जो खास तौर पर आत्मघाती ड्रोन, जैसे ईरान के शाहेद-136 को गिराने के लिए बनाया गया है। पावरस की 1.1 अरब डॉलर के फंड पर नजर दि गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, पावरस की नजर पेंटागन द्वारा ड्रोन निर्माण के लिए रखे गए 1.1 अरब डॉलर के फंड पर है। यह फंड अमेरिका में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिए रखा गया है। इस कंपनी का कहना है कि यह समय तेजी से तकनीक विकसित करने का है, क्योंकि दुनिया एक तरह की हथियारों की दौड़ में है। पावरस के साथ कुछ पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारी भी जुड़े हैं। इनमें जनरल चार्ल्स क्यू. ब्राउन और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल कीथ केलॉग जैसे नाम शामिल हैं, जो कंपनी को रणनीतिक सलाह दे रहे हैं। पावरस कंपनी शुरुआत में खेती और जंगल की आग बुझाने जैसे कामों के लिए ड्रोन बना रही थी। अब यह तेजी से सैन्य उपयोग के लिए भी ड्रोन तैयार कर रही है। शेयर मार्केट में लिस्ट होने की तैयारी कर रही पावरस पावरस कंपनी जल्द ही शेयर बाजार में लिस्ट होने की तैयारी कर रही है। इसके लिए वह एक नैस्डैक में लिस्टेड कंपनी के साथ मर्ज करने जा रही है। इस बिजनेस में ट्रम्प जूनियर और एरिक ट्रम्प ने निवेश किया है। दोनों भाई ड्रोन सेक्टर में सक्रिय निवेशक हैं और अमेरिकन वेंचर्स नाम के फंड से जुड़े हैं, जिसने ड्रोन कंपनियों में करीब 1 अरब डॉलर का निवेश किया हुआ है। वे ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एरिक ट्रम्प ने इस निवेश का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें उन कंपनियों में निवेश करने पर गर्व है, जिन पर उन्हें भरोसा है। उनके मुताबिक, ड्रोन भविष्य की बड़ी तकनीक है। विपक्षी नेता ने रक्षा मंत्री को शिकायती चिट्ठी लिखी पूर्व अमेरिकी एथिक्स अधिकारी रिचर्ड पेंटर ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के परिवार के लोग युद्ध से फायदा कमाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा- यह पहली बार हो सकता है जब किसी राष्ट्रपति का परिवार युद्ध से इतना पैसा कमाए। पेंटर ने कहा कि खाड़ी देशों पर दबाव हो सकता है कि वे राष्ट्रपति के परिवार से जुड़ी कंपनी से खरीदारी करें, ताकि उन्हें अमेरिकी समर्थन मिलता रहे। उन्होंने कहा कि ट्रम्प के बेटों की कंपनी ऐसे समय में बिजनेस कर रही है, जब उनके पिता के फैसलों से ही युद्ध की स्थिति बनी। इससे हितों के टकराव का मुद्दा उठ रहा है। ट्रम्प जूनियर के इन निवेशों पर विपक्षी नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को चिट्ठी लिखकर पूछा है कि क्या इन कंपनियों को सरकारी ठेके सही तरीके से दिए जा रहे हैं, या फिर राष्ट्रपति के परिवार को फायदा पहुंचाया जा रहा है। रिचर्ड पेंटर ने X पर पोस्ट कर ट्रम्प परिवार को ‘युद्ध से फायदा कमाने वाला’ बताया। क्या करती है पॉवरस कंपनी पॉवरस की स्थापना 2025 में की गई थी। यह कंपनी पूर्व सैन्य अधिकारियों और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों ने शुरू की है। शुरुआत से ही इसका फोकस एडवांस ड्रोन और ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी पर रहा है। यह कंपनी आधुनिक ड्रोन, ऑटोनॉमस सिस्टम और सुरक्षा से जुड़े उपकरण बनाती है। इसके ड्रोन सेना, निगरानी, बॉर्डर सुरक्षा और आपदा राहत जैसे कामों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। कंपनी के को-फाउंडर ब्रेट वेलिकोविच हैं, जो अमेरिकी सेना से जुड़े रहे हैं। कंपनी अलग-अलग यूनिट्स के जरिए काम करती है, जो एयर, डिफेंस और समुद्री ड्रोन सिस्टम पर फोकस करती हैं। पॉवरस को अब तक करीब 50 से 60 मिलियन डॉलर का निवेश मिल चुका है। कंपनी में एरिक ट्रम्प और डोनाल्ड ट्रम्प जैसे बड़े नाम भी निवेशक के रूप में जुड़े हैं। कंपनी अभी नई है, इसलिए इसकी कमाई (रेवेन्यू) से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं है। फिलहाल कंपनी

Iran Missile Downs US Jet

Iran Missile Downs US Jet

वॉशिंगटन डीसी/तेहरान15 मिनट पहले कॉपी लिंक रिप्रेजेंटेटिव वीडियो ईरान जंग के एक महीने पूरे होने के बाद ट्रम्प ने 2 अप्रैल को अमेरिकी जनता को संबोधित किया। अपने 19 मिनट के भाषण में उन्होंने यह दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की हवाई सेना को तबाह कर दिया है और उनके पास जवाब देने की क्षमता नहीं बची है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर कब्जा हो चुका है। उनके विमान तेहरान के ऊपर उड़ रहे हैं और ईरान अब कुछ नहीं कर पा रहा है। ट्रम्प ही नहीं, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कुछ ऐसे ही दावे किए। लेकिन अब हालात कुछ और कहानी बयां कर रहे हैं। पिछले 24 घंटों में अमेरिका के दो सैन्य विमान और सर्च ऑपरेशन में लगे दो ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर ईरान के हमले का शिकार हुए। न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, 23 साल से ज्यादा समय में पहली बार ऐसा हुआ है कि अमेरिकी लड़ाकू विमान दुश्मन की गोलीबारी में गिराए गए हैं। इससे पहले 2003 में इराक युद्ध के दौरान ऐसा हुआ था। ईरान ने शुक्रवार को अमेरिकी एयरक्राफ्ट A-10 पर हमला किया। यह फुटेज IRGC ने जारी की है। ईरान युद्ध में अमेरिका के 7 विमान तबाह 2 मार्च: कुवैत में ‘फ्रेंडली फायर’ में 3 F-15 गिरे, सभी 6 क्रू मेंबर सुरक्षित निकले। 12 मार्च: इराक में KC-135 टैंकर क्रैश, 6 अमेरिकी एयरक्रू की मौत। 27 मार्च: सऊदी के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर E-3 सेंट्री नष्ट हुआ, एक टैंकर विमान को भी नुकसान हुआ। 3 अप्रैल: F-15 और A-10 नष्ट हुए, पहली बार दुश्मन की फायरिंग में अमेरिकी विमान गिरे। 24 घंटे में 2 अमेरिकी जेट्स गिराए, 2 रेस्क्यू हेलिकॉप्टर पर अटैक ईरानी मीडिया के मुताबिक सबसे पहले अमेरिकी F-15E फाइटर जेट को मार गिराया गया। यह ईरान के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में उड़ान भर रहा था। F-15E फाइटर जेट के क्रू को ढूंढने के लिए अमेरिकी विमान A-10 अटैक एयरक्राफ्ट पहुंचा तो उस पर भी हमला हुआ। A-10 हमले के बाद कुवैत के हवाई क्षेत्र तक पहुंच गया, जहां पायलट ने सुरक्षित तरीके से इजेक्ट किया। पायलट सुरक्षित है, हालांकि विमान कुवैत में क्रैश हो गया। CBS के अनुसार, F-15E में दो क्रू मेंबर थे। इनमें से एक को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि दूसरा लापता है। ईरानी सरकारी मीडिया का कहना है कि पैराशूट के जरिए बाहर निकला यह क्रू सदस्य देश के दक्षिणी हिस्से में उतरने का अनुमान है। वहीं, F-15E फाइटर जेट के रेस्क्यू के लिए 2 ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर भेजे गए थे। उन पर भी हमला हुआ। हालांकि, इन पर मौजूद सभी अमेरिकी सैनिक सुरक्षित बताए जा रहे हैं। ईरान ने जो तस्वीरें जारी की हैं कि उनके आधार पर एक्सपर्ट्स इस प्लेन को F-15E बता रहे हैं। ईरान की रणनीति नहीं समझ पा रहा अमेरिका एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका को ईरान के आसमान में बढ़त जरूर है, लेकिन पूरी तरह कंट्रोल नहीं है। ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। अब सवाल यह है कि कमजोर एयर डिफेंस होने के बावजूद ईरान ने इतने एडवांस अमेरिकी विमानों को कैसे निशाना बनाया? इसका जवाब है ईरान की ‘असिमेट्रिक वॉरफेयर’ यानी अलग तरीके से युद्ध लड़ने की रणनीति। ईरान जानता है कि सीधे युद्ध में अमेरिका से मुकाबला करना मुश्किल है, इसलिए कम संसाधनों में ज्यादा नुकसान पहुंचाने की रणनीति अपना रहा है। वह अक्सर अमेरिका पर चौंकाने वाले हमले कर रहा है। यही वजह है कि जंग शुरू होने के 35 दिन बाद भी अमेरिका अभी भी ईरान की रणनीति को पूरी तरह समझ नहीं पाया है। एक्सपर्ट का मानना है कि अमेरिकी विमानों और हेलिकॉप्टर पर हमले के पीछे मजीद एयर डिफेंस सिस्टम या कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल (शोल्डर-फायर मिसाइल) हो सकती हैं। माना जा रहा है कि अमेरिकी विमान कम ऊंचाई पर उड़ रहे थे, इसलिए वे इन मिसाइलों की रेंज में आ गए। मजीद एयर डिफेंस 6km दूरी तक निशाना लगा सकता है मजिद सिस्टम ईरान ने 2021 के आसपास इस्तेमाल करना शुरू किया था। इसे कम ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रडार पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि इंफ्रारेड तकनीक का इस्तेमाल करता है। मजीद रडार सिग्नल नहीं देता, इसलिए विमान इसे पहले से पकड़ नहीं पाते। इसकी मार करने की दूरी करीब 8 किलोमीटर और ऊंचाई 6 किलोमीटर तक है। इस वजह से यह उन हालात में ज्यादा कारगर होता है, जहां दुश्मन के विमान या ड्रोन को किसी खास इलाके के ऊपर आना पड़ता है। यह एकसाथ कई टारगेट पर नजर रख सकता है और इसमें एकसाथ 8 मिसाइल तैयार रहती हैं। यह सिस्टम आमतौर पर मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लगाया जाता है, यानी इसे जरूरत के हिसाब से एक जगह से दूसरी जगह जल्दी शिफ्ट किया जा सकता है। इससे दुश्मन के लिए इसकी सही लोकेशन पता लगाना मुश्किल हो जाता है। मोबाइल डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल एक्सपर्ट्स का कहना है अमेरिकी हमले में नुकसान पहुंचने के बाद ईरान ने अपनी रणनीति बदली है। पहले वह स्थिर एयर डिफेंस सिस्टम इस्तेमाल करता था, लेकिन अब उसने मोबाइल सिस्टम अपनाए हैं। अब उसके कई मिसाइल लॉन्चर भूमिगत ठिकानों, सुरंगों और कठिन इलाकों में छिपे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगातार हमलों के बावजूद उसके करीब आधे मिसाइल लॉन्चर अभी भी सुरक्षित हैं। इसके अलावा, मोबाइल लॉन्चर तेजी से जगह बदल सकते हैं। इसे ‘फायर करो और तुरंत हट जाओ’ रणनीति कहा जाता है, जिससे उन्हें निशाना बनाना मुश्किल हो जाता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान चीन के HQ-9B जैसे उन्नत मिसाइल सिस्टम का भी इस्तेमाल कर सकता है, जिसमें रडार और इंफ्रारेड दोनों तकनीक होती हैं। ———————————- ईरान जंग से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… दावा-ईरान ने हीट ट्रैकिंग मिसाइल से अमेरिकी F-35 को गिराया:यह दुनिया का सबसे एडवांस फाइटर जेट, लेकिन ईरानी खतरे का अंदाजा नहीं लगा पाया ईरान ने 19 मार्च को दुनिया के सबसे एडवांस अमेरिकी फाइटर जेट F-35 को गिराने का दावा किया। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने

US Israel vs Iran War Live Updates F-35 Jets Trump Netanyahu

US Israel vs Iran War Live Updates F-35 Jets Trump Netanyahu

तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी9 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी C-130 हरक्यूलिस विमान पायलट की तलाश के दौरान फ्लेयर्स छोड़ते हुए। अमेरिका ईरान में गिराए गए अपने फाइटर जेट के पायलट की तलाश में लगा हुआ है। इस मिशन के लिए C-130 हरक्यूलिस जैसे बड़े विमान का इस्तेमाल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें यह विमान ईरान के ऊपर बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हुए फ्लेयर्स छोड़ रहा है। विमान से फ्लेयर छोड़ने का मतलब है कि फाइटर जेट खुद को मिसाइलों से बचाने के लिए पीछे की तरफ गर्म फ्लेयर्स छोड़ते हैं। मिसाइल विमान के इंजन की गर्मी की जगह इन फ्लेयर्स को अपना टारगेट समझ लेती है और उन पर हमला कर देती है, जबकि असली विमान बच जाता है। इसी बीच इजराइल के एक अधिकारी ने दावा किया है कि अमेरिकी जेट के एक पायलट को ईरान के अंदर से जिंदा बचा लिया गया है। दूसरे पायलट की तलाश अभी भी जारी है। हालांकि इस दावे की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले ईरान ने दावा किया था कि उसने अमेरिकी F-35 फाइटर जेट गिराया है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वह F-15E विमान हो सकता है। ईरान में अमेरिकी पायलट को पकड़ने पर ₹55 का लाख इनाम ईरान ने अमेरिकी फाइटर जेट के पायलट को पकड़ने पर 10 बिलियन ईरानी तोमान (लगभग 55 लाख रुपए) के इनाम का ऐलान किया है। ईरान के सरकारी मीडिया IRIB के एक एंकर ने नागरिकों से अपील की है कि वे अमेरिकी पायलट को जिंदा पकड़कर सरकारी अधिकारी या सेना को सौंपे। ईरान जंग से जुड़ी 4 तस्वीरें… ईरान ने शुक्रवार को उत्तरी इजराइल के शहर किरयात अता पर मिसाइल हमला किया, जिससे कई गाड़ियां जल गईं और आसपास की इमारतों को नुकसान पहुंचा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुक्रवार को ईरान की एक मिसाइल तकनीकी खराबी के कारण तेहरान में गिर गई। इजराइल के पेटाह टिकवा शहर पर शुक्रवार को ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल के हमले का वीडियो। ईरान ने शुक्रवार रात इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल अटैक किए। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… लाइव अपडेट्स 9 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी सांसद बोले- संसद की मंजूरी के बिना युद्ध फंडिंग का समर्थन नहीं अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद जॉन कर्टिस ने कहा है कि वह ईरान के खिलाफ ट्रम्प की कार्रवाई का समर्थन करते हैं, लेकिन आगे के सैन्य अभियानों के लिए फंडिंग तभी देंगे जब संसद औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा करे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, “मैं सैन्य तैयारी बनाए रखने और हथियारों के भंडार को भरने का समर्थन करता हूं, लेकिन युद्ध घोषणा के बिना आगे के सैन्य अभियानों के लिए फंडिंग का समर्थन नहीं कर सकता।” अमेरिकी संविधान के अनुसार, युद्ध घोषित करने का अधिकार संसद के पास है। हालांकि, पिछले कई वर्षों में अमेरिकी राष्ट्रपति बिना औपचारिक घोषणा या संसद की मंजूरी के भी सैन्य कार्रवाई करते रहे हैं। 22 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी विमानों को गिराने के बाद ईरान में जश्न ईरान में अमेरिकी विमानों को गिराने के दावों के बाद सड़कों पर जश्न का माहौल देखा जा रहा है। ईरान में इन घटनाओं को लेकर काफी गर्व और उत्साह का माहौल है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वे शुरुआत से ही ऐसे कदमों का वादा कर रहे थे और उनके पास ऐसी क्षमताएं हैं जो अभी तक पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि आज की घटनाओं से यह साफ हो गया है। ईरान ने आगे और हमले करने की भी बात कही है और कहा है कि अमेरिका ने उनकी सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) की ताकत को कम आंका है। 33 मिनट पहले कॉपी लिंक इराकी समूह का दावा- अमेरिकी ठिकानों पर एक दिन में 19 हमले इराक के सशस्त्र संगठन इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने पिछले एक दिन में इराक और आसपास के क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर 19 हमले किए हैं। समूह के अनुसार, इन हमलों में कई दर्जन ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन दावों को लेकर अभी तक अमेरिकी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। 44 मिनट पहले कॉपी लिंक इजराइली वायुसेना ने हिजबुल्लाह के रॉकेट लॉन्चर पर हमला किया इजराइल की वायुसेना ने लेबनान में हिजबुल्लाह के एक रॉकेट लॉन्चर को निशाना बनाकर हमला किया। इजराइली सेना (IDF) के अनुसार, इस लॉन्चर का इस्तेमाल कुछ ही मिनट पहले उत्तरी इजराइल पर रॉकेट दागने के लिए किया गया था। सेना ने बताया कि हमले के कुछ ही मिनटों बाद इस लॉन्चर को बमबारी कर नष्ट कर दिया गया। IDF के मुताबिक, हिजबुल्लाह की ओर से किए गए रॉकेट हमले में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। 53 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरानी पुल पर हमले में 13 लोगों की मौत ईरान में तेहरान और कराज के बीच स्थित B1 पुल पर हुए हमले में अब मरने वालों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान में शाहिद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी पर भी हवाई हमला किया गया। पिछले कुछ दिनों में कई आम नागरिकों से जुड़े संस्थानों को नुकसान पहुंचा है या वे पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। इसके अलावा, तेहरान में वैक्सीन बनाने वाले पाश्चर इंस्टीट्यूट पर भी 24 घंटे पहले हमला हुआ था। 02:35 AM4 अप्रैल 2026 कॉपी लिंक ईरानी मिसाइल हमले से इजराइल के कई इलाकों में नुकसान ईरानी मिसाइल हमले के बाद इजराइल में नुकसान और अफरा-तफरी की खबरें सामने आई हैं। इजराइल की वल्ला न्यूज एजेंसी के अनुसार, तेल अवीव के पास बनी ब्राक इलाके में कांच के टुकड़ों से एक व्यक्ति घायल हो गया। साथ ही, इंटरसेप्ट किए गए ईरानी मिसाइल के टुकड़े 17 अलग-अलग जगहों पर गिरे। एजेंसी ने बताया कि रोश हआयिन के एक रिहायशी इलाके में भी मिसाइल का असर हुआ, जिससे काफी नुकसान हुआ और वहां बिजली भी चली गई। वहीं, एक किंडरगार्टन (बच्चों के स्कूल) के पास भी मलबा मिला है। 02:25 AM4 अप्रैल 2026 कॉपी लिंक पायलट की तलाश के लिए 2 ऑपरेशन चला रहा

World News Updates; Trump Pakistan China

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15 मिनट पहले कॉपी लिंक फाइल फोटो। अफगानिस्तान के काबुल में शुक्रवार देर शाम भूकंप से 8 लोगों की मौत हो गई। 6.3 तीव्रता के इस भूकंप के झटके पाकिस्तान के कई हिस्सों में भी महसूस किए गए, हालांकि वहां किसी नुकसान की खबर नहीं है। पाकिस्तान मौसम विभाग के अनुसार, भूकंप रात 9:13 बजे दर्ज किया गया। इसका केंद्र अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में था और गहराई जमीन से 190 किलोमीटर अंदर थी। भूकंप के झटके खैबर पख्तूनख्वा, इस्लामाबाद, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पंजाब के कुछ हिस्सों में महसूस किए गए। इससे पहले अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ में 3 नवंबर 2025 को 6.3 तीव्रता के भूकंप में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई थी। सैकड़ों लोग घायल हो गए थे। भूकंप से शहर की ऐतिहासिक ब्लू मस्जिद को भी नुकसान पहुंचा था। यह मस्जिद मजार-ए-शरीफ का प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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7 घंटे पहले कॉपी लिंक फाइल फोटो। अफगानिस्तान के काबुल में शुक्रवार देर शाम भूकंप से 8 लोगों की मौत हो गई। 6.3 तीव्रता के इस भूकंप के झटके पाकिस्तान के कई हिस्सों में भी महसूस किए गए, हालांकि वहां किसी नुकसान की खबर नहीं है। पाकिस्तान मौसम विभाग के अनुसार, भूकंप रात 9:13 बजे दर्ज किया गया। इसका केंद्र अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में था और गहराई जमीन से 190 किलोमीटर अंदर थी। भूकंप के झटके खैबर पख्तूनख्वा, इस्लामाबाद, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पंजाब के कुछ हिस्सों में महसूस किए गए। इससे पहले अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ में 3 नवंबर 2025 को 6.3 तीव्रता के भूकंप में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई थी। सैकड़ों लोग घायल हो गए थे। भूकंप से शहर की ऐतिहासिक ब्लू मस्जिद को भी नुकसान पहुंचा था। यह मस्जिद मजार-ए-शरीफ का प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

World News Updates; Trump Pakistan China

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36 मिनट पहले कॉपी लिंक म्यांमार में सेना प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग को राष्ट्रपति चुन लिया गया है। संसद में हुए वोट में उन्हें जीत मिली, जहां ज्यादातर सांसद सेना समर्थक थे। इससे 2021 में तख्तापलट के बाद देश पर उनकी पकड़ और मजबूत हो गई है। 69 साल के ह्लाइंग 2011 से म्यांमार की सेना के प्रमुख रहे हैं। उन्होंने 2021 में आंग सान सूची की चुनी हुई सरकार को हटाकर सत्ता पर कब्जा कर लिया था और उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जो बाद में सशस्त्र संघर्ष में बदल गए। हाल ही में दिसंबर और जनवरी में चुनाव कराए गए थे, जिसमें सेना समर्थित पार्टी को जीत मिली। विपक्ष और पश्चिमी देशों ने इन चुनावों को निष्पक्ष नहीं बताया और कहा कि यह सिर्फ सेना के शासन को बनाए रखने का तरीका है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिन आंग ह्लाइंग पहले से ही राष्ट्रपति बनना चाहते थे। यह उनका पुराना सपना था। राष्ट्रपति बनने के लिए उन्हें सेना की जिम्मेदारी किसी और को देनी थी, इसलिए उन्होंने अपने भरोसेमंद व्यक्ति ये विन ऊ को सेना का नया प्रमुख बना दिया। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में आत्मघाती कार बम हमला, 5 नागरिकों की मौत, एक पुलिसकर्मी समेत 13 घायल पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में पुलिस स्टेशन पर आत्मघाती कार बम हमला हुआ। हमले में 5 लोगों की मौत हो गई। जबकि 13 लोग घायल हुए हैं, इनमें एक पुलिसकर्मी भी शामिल है। डॉन के मुताबिक विस्फोटकों से भरी कार पुलिस स्टेशन के पिछले हिस्से से टकराई, जिससे जोरदार धमाका हुआ। इसके बाद कुछ देर तक फायरिंग भी हुई। धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पुलिस स्टेशन का सेंट्री पोस्ट पूरी तरह नष्ट हो गया और इमारत का बड़ा हिस्सा मलबे में बदल गया। आसपास के कई घरों को भी भारी नुकसान पहुंचा और कुछ मकान ढह गए, जिससे कई लोग मलबे में दब गए। मृतकों में एक ही परिवार के चार सदस्य शामिल हैं। सभी घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। पाकिस्तान के डिस्ट्रिक्ट इमरजेंसी ऑफिसर बख्तुल्लाह वजीर ने बताया कि ‘राहत और बचाव कार्य जारी है। हालांकि, लगातार बारिश के कारण ऑपरेशन में दिक्कतें आईं है। फायरिंग रुकने के बाद ही रेस्क्यू टीमों ने मलबा हटाना शुरू किया।’ सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेरकर क्लियरेंस ऑपरेशन शुरू कर दिया है। वहीं, हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

ट्रम्प बोले-फ्रांसीसी राष्ट्रपति पत्नी के थप्पड़ से उबर रहे:वाइफ का उनसे बर्ताव खराब; मैक्रों का जवाब- अमेरिकी राष्ट्रपति गंभीर हो जाएं

ट्रम्प बोले-फ्रांसीसी राष्ट्रपति पत्नी के थप्पड़ से उबर रहे:वाइफ का उनसे बर्ताव खराब; मैक्रों का जवाब- अमेरिकी राष्ट्रपति गंभीर हो जाएं

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक बार फिर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर उनकी पत्नी को लेकर तंज कसा है। ट्रम्प ने कहा कि मैक्रों अब भी जबड़े पर पड़े थप्पड़ से उबर रहे हैं। उनकी पत्नी उनके साथ बहुत खराब व्यवहार करती हैं। ट्रम्प ने मैक्रों पर यह टिप्पणी बुधवार को एक प्राइवेट लंच के दौरान की। ट्रम्प का यह वीडियो कुछ समय के लिए व्हाइट हाउस के यूट्यूब चैनल पर दिखा, लेकिन बाद में हटा दिया गया। मैक्रों पिछले साल 25 मई को वियतनाम दौरे पर पहुंचे थे। इसी दौरान हनोई के नोई बाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उनकी पत्नी उन्हें थप्पड़ मारती दिखी थीं। ट्रम्प ने यह टिप्पणी उसी घटना को जोड़कर की थी। हालांकि, मैक्रों ने उस वीडियो को लेकर सफाई देते हुए कहा था कि मीडिया ने गलत अंदाजा लगाया था। ट्रम्प के मजाक उड़ाने का वीडियो देखिए मैक्रों का जवाब- ट्रम्प को गंभीर होने की जरूरत ट्रम्प के मजाक के कुछ घंटों बाद मैक्रों ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, “हमें गंभीर रहना चाहिए। एक दिन कुछ और, अगले दिन कुछ और नहीं कहना चाहिए। बेहतर है कि हर दिन बयान देने के बजाय हालात को शांत करें और स्थायी शांति पर ध्यान दें।” ईरान जंग में साथ न देने से ट्रम्प नाराज ट्रम्प फ्रांस से ईरान के खिलाफ जंग में साथ न देने को लेकर नाराज चल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने लंच के दौरान कहा कि उन्होंने मैक्रों से खाड़ी क्षेत्र में मदद मांगी थी और जहाज भेजने को कहा था। ट्रम्प ने मैक्रों के जवाब की नकल करते हुए कहा कि उन्होंने मना कर दिया और कहा, “नहीं, हम ऐसा नहीं कर सकते, डोनाल्ड। हम यह काम युद्ध जीतने के बाद करेंगे।” इस पर ट्रम्प ने जवाब दिया, “मुझे बाद में मदद नहीं चाहिए।” ट्रम्प ने फिर से NATO को कमजोर संगठन कहा ट्रम्प ने इस मौके पर NATO की भी आलोचना की और उसे “पेपर टाइगर” यानी कमजोर संगठन बताया। उन्होंने कहा कि अगर बड़ा युद्ध हुआ तो NATO काम नहीं आएगा। ट्रम्प NATO देशों से नाराज चल रहे हैं। उनका कहना है कि कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी और समुद्री मदद देने से भी पीछे हट गए। ट्रम्प ने यहां तक कहा कि वह अमेरिका को नाटो से बाहर निकालने पर भी विचार कर रहे हैं और इस गठबंधन को कमजोर बताया। मैक्रों की पत्नी ब्रिगिट के बारे में जानिए… मैक्रों से 24 साल बड़ी हैं उनकी पत्नी ब्रिगिट साल 1992 में जब इमैनुएल मैक्रों 15 साल के थे, उनकी मुलाकात ब्रिगिट ट्रोन्यू से हुई थी। ब्रिगिट तब 39 साल की थीं और उत्तरी फ्रांस के अमिएंस में ला प्रोविडेंस हाई स्कूल में फ्रेंच और ड्रामा की टीचर थीं। इमैनुएल उस स्कूल में पढ़ते थे। ब्रिगिट की बेटी मैक्रों की क्लासमेट थी। दोनों अच्छे दोस्त थे और अक्सर साथ दिखाई देते थे। ऐसे में कई लोग दोनों को गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड समझते थे। लेकिन मैक्रों को उनकी क्लासमेट नहीं बल्कि उसकी टीचर मां पसंद थीं। इमैनुएल स्कूल के ड्रामा क्लब में शामिल हुए, जहां ब्रिगिट ड्रामा सिखाती थीं। दोनों ने एक साथ एक नाटक पर काम किया, जिसमें इमैनुएल ने स्क्रिप्ट लिखने में मदद की। यहीं से उनकी नजदीकी शुरू हुई। पिता ने स्कूल छुड़वाया, फिर भी प्यार बरकरार रहा इमैनुएल ने बाद में बताया कि उन्हें तब ही ब्रिगिट से प्यार हो गया था। इमैनुएल और ब्रिगिट के बीच बढ़ती नजदीकी की चर्चा स्कूल में हो गई। इमैनुएल के माता-पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे। उन्होंने इमैनुएल को पेरिस भेज दिया, ताकि वह ब्रिगिट से दूर रहें। उन्होंने ब्रिगिट को धमकी भी दी कि जब तक उनका बेटा बालिग नहीं हो जाता, तब तक वह उनसे दूर रहे। मैक्रों ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उसी समय मैंने ठान लिया था कि मुझे सफल होना है। मैं अपने माता-पिता को साबित करना चाहता था कि मैंने अपनी टीचर से प्यार करके कोई गलती नहीं की थी। पेरिस में पढ़ाई के दौरान इमैनुएल ने ब्रिगिट से संपर्क बनाए रखा। उन्होंने पत्र लिखे और फोन पर बात की। इमैनुएल ने बाद में एक इंटरव्यू में कहा- मैंने ब्रिगिट से कहा था कि मैं किसी भी हाल में उनसे शादी करूंगा। मैक्रों से मुलाकात के 14 साल बाद पति को तलाक दिया ब्रिगिट के पति एक बैंकर आंद्रे-लुई औजिए थे। ब्रिगिट ने 2006 में अपने पति से तलाक ले लिया। इसके एक साल बाद 2007 में दोनों ने फ्रांस के तटीय शहर ले टौके में शादी की। उस वक्त इमैनुएल की उम्र 29 साल और ब्रिगिट 54 की थीं। इमैनुएल ने अपने शादी के भाषण में ब्रिगिट के बच्चों को धन्यवाद दिया कि उन्होंने उन्हें स्वीकार किया। इमैनुएल ने कभी अपने बच्चों की इच्छा नहीं जताई और वह ब्रिगिट के बच्चों और उनके पोते-पोतियों के साथ पारिवारिक जीवन जीते हैं। शादी के बाद, ब्रिगिट ने इमैनुएल के करियर में अहम भूमिका निभाई। वह उनकी सलाहकार रही हैं और उनके राजनीतिक अभियानों में सक्रिय रहीं। ब्रिगिट ने अपनी टीचिंग जॉब छोड़ दी और फ्रांस की प्रथम महिला के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं। ————————————– ब्रिगिट मैक्रों से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… फ्रांस में राष्ट्रपति की पत्नी के पुरुष होने की अफवाह:2 महिला यूट्यूबर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में केस, कहा था- जेंडर बदलकर शादी की फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पत्नी ब्रिगिट मैक्रों ने दो महिला यूट्यूबर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में केस दायर किया है। इन महिलाओं ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा था कि ब्रिगिट मैक्रों महिला नहीं, बल्कि पुरुष हैं। इनका कहना था कि ब्रिगिट का असली नाम ज्यां-मिशेल ग्रोग्रेन्क्स था। हालांकि यह नाम ब्रिगिट के भाई का है। जीन-मिशेल और ब्रिगिट की शक्ल आपस में काफी हद तक मिलती है। इसके बाद प्रथम महिला ने इनके खिलाफ पेरिस की एक अदालत में केस किया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…

US-Israel vs Iran Conflict Live Updates Trump Addresses Netanyahu

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तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी34 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प गुरुवार सुबह भारतीय समय के अनुसार 6:30 बजे देश को संबोधित करेंगे। ट्रम्प इस दौरान ईरान युद्ध को लेकर बड़ा ऐलान कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प इस संबोधन में यह दावा कर सकते हैं कि अमेरिका इस जंग में जीत की स्थिति में है। वे पहले भी कई बार कह चुके हैं कि अमेरिका ने ईरान को काफी कमजोर कर दिया है। ऐसे में संभावना है कि वे औपचारिक तौर पर जीत का ऐलान करें या फिर युद्ध खत्म करने की कोई समय-सीमा (डेडलाइन) भी बता दें। इसी के साथ ही ट्रम्प NATO को लेकर बड़ा फैसला ले सकते हैं। उन्होंने कल ही NATO को “कागजी शेर” बताया था और कहा था कि वे NATO छोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ईरान पर हमले तेज कर सकता है अमेरिका रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प के संबोधन से पहले अमेरिका ईरान पर कुछ बड़े हमले कर सकता है और उसके बाद ट्रम्प युद्ध खत्म करने का रोडमैप पेश कर सकते हैं। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी उनका रुख साफ हो सकता है। ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि इस समुद्री रास्ते को खुलवाने की जिम्मेदारी अमेरिका नहीं लेगा। उनका कहना है कि जिन देशों को इस रास्ते की जरूरत है, उन्हें खुद अपनी सुरक्षा करनी होगी। इसके अलावा ईरान से जुड़े देशों पर नए प्रतिबंध लगाने का भी ऐलान किया जा सकता है। ट्रम्प ने कहा था- ईरान ने सीजफायर की अपील की ट्रम्प ने कल दावा किया है कि ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका से सीजफायर की मांग की है। उन्होंने कहा कि ईरान की नई लीडरशिप पहले से कम कट्टर और ज्यादा समझदार है। हालांकि ट्रम्प ने साफ किया कि अमेरिका अभी सीजफायर नहीं करेगा। उनका कहना है कि जब तक होर्मुज पूरी तरह सुरक्षित और खुला नहीं हो जाता, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं, ईरान के एक सीनियर अफसर ने कहा कि ट्रम्प के भाषण को लेकर कहा कि उस पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए। CNN से बात करते हुए अधिकारी ने कहा कि ट्रम्प बहुत अस्थिर और अजीब इंसान हैं। उनके बयान को बहुत महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। ट्रम्प बोले- ईरान से किसी डील की जरूरत नहीं ट्रम्प ने कल यह भी कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए किसी समझौते (डील) की जरूरत नहीं है। अमेरिका यह युद्ध 2 से 3 हफ्तों में खत्म कर सकता है। उन्होंने कहा था- ईरान को कोई डील करने की जरूरत नहीं है। जब हमें लगेगा कि वे इतने कमजोर हो गए हैं कि कई सालों तक परमाणु हथियार नहीं बना सकते, तब हम वहां से निकल जाएंगे। डील हो या न हो, अब यह जरूरी नहीं है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान के पास जो यूरेनियम बचा है, उससे उन्हें कोई चिंता नहीं है, क्योंकि वह जमीन के अंदर है और आसानी से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अमेरिका पहले ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफी नुकसान पहुंचा चुका है। फ्रांस बोला- NATO का काम सिर्फ यूरोप की सुरक्षा करना NATO के कई देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया है, जिससे ट्रम्प नाराज हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका हमेशा अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहा है, लेकिन इस बार कोई उसके साथ नहीं आया। वहीं फ्रांस की मंत्री एलिस रूफो ने साफ किया है कि NATO का काम सिर्फ यूरोप की सुरक्षा करना है और होर्मुज में सैन्य कार्रवाई करना उसके दायरे में नहीं आता। ब्रिटेन इस हफ्ते 35 देशों की एक बड़ी बैठक आयोजित करने जा रहा है। इस बैठक का मकसद होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के रास्ते तलाशना है। इसमें दुनिया के कई बड़े देश शामिल होंगे और संभावना है कि भारत भी इसमें भाग ले सकता है, क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरतें इस क्षेत्र पर काफी निर्भर हैं। ———- यह खबर भी पढ़ें… ईरान ने बहरीन में अमेजन ऑफिस पर हमला किया:माइक्रोसॉफ्ट-एपल, गूगल भी निशाने पर; ट्रम्प बोले- ईरान से डील की कोई जरूरत नहीं ईरान ने बहरीन में आज अमेरिकी कंपनी अमेजन वेब सर्विस के एक डेटा सेंटर पर हमला किया। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, हमले के बाद उस जगह पर आग लग गई। इससे पहले बहरीन के गृह मंत्रालय ने भी बताया था कि एक कंपनी की इमारत में आग लगी है, जिसे फायर ब्रिगेड की टीम बुझा रही थी। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी2 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प गुरुवार सुबह भारतीय समय के अनुसार 6:30 बजे देश को संबोधित करेंगे। ट्रम्प इस दौरान ईरान युद्ध को लेकर बड़ा ऐलान कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प इस संबोधन में यह दावा कर सकते हैं कि अमेरिका इस जंग में जीत की स्थिति में है। वे पहले भी कई बार कह चुके हैं कि अमेरिका ने ईरान को काफी कमजोर कर दिया है। ऐसे में संभावना है कि वे औपचारिक तौर पर जीत का ऐलान करें या फिर युद्ध खत्म करने की कोई समय-सीमा (डेडलाइन) भी बता दें। इसी के साथ ही ट्रम्प NATO को लेकर बड़ा फैसला ले सकते हैं। उन्होंने कल ही NATO को “कागजी शेर” बताया था और कहा था कि वे NATO छोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ईरान पर हमले तेज कर सकता है अमेरिका रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प के संबोधन से पहले अमेरिका ईरान पर कुछ बड़े हमले कर सकता है और उसके बाद ट्रम्प युद्ध खत्म करने का रोडमैप पेश कर सकते हैं। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी उनका रुख साफ हो सकता है। ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि इस समुद्री रास्ते को खुलवाने की जिम्मेदारी अमेरिका नहीं लेगा। उनका कहना है कि जिन देशों को इस रास्ते की जरूरत है, उन्हें खुद अपनी सुरक्षा करनी होगी। इसके अलावा ईरान से जुड़े देशों पर नए प्रतिबंध लगाने का भी ऐलान किया जा सकता है। ट्रम्प ने कहा था- ईरान ने सीजफायर की अपील की ट्रम्प ने कल दावा किया है कि ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका से सीजफायर की मांग की है। उन्होंने कहा कि ईरान की नई लीडरशिप पहले से कम कट्टर और ज्यादा समझदार है। हालांकि ट्रम्प ने साफ किया कि अमेरिका अभी सीजफायर नहीं करेगा। उनका कहना है कि जब तक होर्मुज पूरी तरह सुरक्षित और खुला नहीं हो जाता, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं, ईरान के एक सीनियर अफसर ने कहा कि ट्रम्प के भाषण को लेकर कहा कि उस पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए। CNN से बात करते हुए अधिकारी ने कहा कि ट्रम्प बहुत अस्थिर और अजीब इंसान हैं। उनके बयान को बहुत महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। लाइव अपडेट्स 2 मिनट पहले कॉपी लिंक ट्रम्प बोले- ईरान से किसी डील की जरूरत नहीं ट्रम्प ने कल यह भी कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए किसी समझौते (डील) की जरूरत नहीं है। अमेरिका यह युद्ध 2 से 3 हफ्तों में खत्म कर सकता है। उन्होंने कहा था- ईरान को कोई डील करने की जरूरत नहीं है। जब हमें लगेगा कि वे इतने कमजोर हो गए हैं कि कई सालों तक परमाणु हथियार नहीं बना सकते, तब हम वहां से निकल जाएंगे। डील हो या न हो, अब यह जरूरी नहीं है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान के पास जो यूरेनियम बचा है, उससे उन्हें कोई चिंता नहीं है, क्योंकि वह जमीन के अंदर है और आसानी से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अमेरिका पहले ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफी नुकसान पहुंचा चुका है। 3 मिनट पहले कॉपी लिंक फ्रांस बोला- NATO का काम सिर्फ यूरोप की सुरक्षा करना NATO के कई देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया है, जिससे ट्रम्प नाराज हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका हमेशा अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहा है, लेकिन इस बार कोई उसके साथ नहीं आया। वहीं फ्रांस की मंत्री एलिस रूफो ने साफ किया है कि NATO का काम सिर्फ यूरोप की सुरक्षा करना है और होर्मुज में सैन्य कार्रवाई करना उसके दायरे में नहीं आता। ब्रिटेन इस हफ्ते 35 देशों की एक बड़ी बैठक आयोजित करने जा रहा है। इस बैठक का मकसद होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के रास्ते तलाशना है। इसमें दुनिया के कई बड़े देश शामिल होंगे और संभावना है कि भारत भी इसमें भाग ले सकता है, क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरतें इस क्षेत्र पर काफी निर्भर हैं। 5 मिनट पहले कॉपी लिंक यह खबर भी पढ़ें… ईरान ने बहरीन में अमेजन ऑफिस पर हमला किया:माइक्रोसॉफ्ट-एपल, गूगल भी निशाने पर; ट्रम्प बोले- ईरान से डील की कोई जरूरत नहीं ईरान ने बहरीन में आज अमेरिकी कंपनी अमेजन वेब सर्विस के एक डेटा सेंटर पर हमला किया। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, हमले के बाद उस जगह पर आग लग गई। इससे पहले बहरीन के गृह मंत्रालय ने भी बताया था कि एक कंपनी की इमारत में आग लगी है, जिसे फायर ब्रिगेड की टीम बुझा रही थी। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…