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वर्ल्ड अपडेट्स:लंदन में 2 भारतीयों ने सड़क पर पान थूका, डेढ़ लाख रुपए का जुर्माना लगा

वर्ल्ड अपडेट्स:लंदन में 2 भारतीयों ने सड़क पर पान थूका, डेढ़ लाख रुपए का जुर्माना लगा

लंदन के ब्रेंट इलाके में सार्वजनिक जगह पर पान थूकने के मामले में भारतीय मूल के दो लोगों पर 1,391 पाउंड (करीब 1.45 लाख रुपये) का जुर्माना लगाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों लोगों को पहले मौके पर ही 100 पाउंड का जुर्माना भरने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने इसे नहीं भरा। इसके बाद मामला कोर्ट पहुंच गया और जुर्माना कई गुना बढ़ गया। ब्रेंट सिटी काउंसिल ने पान थूकने के खिलाफ सख्त अभियान शुरू किया हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि इससे सार्वजनिक जगहें गंदी होती हैं और सफाई पर काफी खर्च बढ़ जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, काउंसिल को हर साल करीब 30,000 पाउंड (लगभग 30 लाख रुपये) सिर्फ पान के दाग साफ करने में खर्च करने पड़ते हैं। पहला मामला एडगवेयर इलाके के रहने वाले अक्षीतकुमार भद्रे पटेल का है। उन्होंने जून 2025 में किंग्सबरी रोड पर एक मेट्रो स्टेशन के पास पान थूका था। वे कोर्ट में पेश नहीं हुए, इसलिए उनके खिलाफ फैसला उनकी गैरमौजूदगी में ही सुनाया गया। समय पर जुर्माना न भरने के कारण उनकी रकम 10 गुना से ज्यादा बढ़ गई। दूसरा मामला रुइसलिप इलाके के रहने वाले हितेश पटेल का है। उन्होंने वेम्बली हिल रोड पर पान थूका था। वे भी कोर्ट में पेश नहीं हुए और उनके खिलाफ भी गैरहाजिरी में ही फैसला हुआ, जिससे उन पर भी भारी जुर्माना लगा। उत्तर-पश्चिम लंदन के ब्रेंट और आसपास के इलाकों में पान थूकने की समस्या बढ़ रही है, जिस पर स्थानीय प्रशासन सख्त हो गया है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पान के दाग हटाना मुश्किल और महंगा होता है, इसके लिए खास तरीके से सफाई करनी पड़ती है। काउंसिल ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई है। इसके तहत जगह-जगह चेतावनी वाले बैनर लगाए जा रहे हैं, अधिकारी गश्त कर रहे हैं और मौके पर ही 100 पाउंड तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… कनाडा पुलिस बोली- भारत से जुड़े अपराध का कोई सबूत नहीं, ट्रूडो सरकार के दावे से पलटे कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने कहा है कि भारत सरकार से जुड़े किसी एजेंट से कनाडा के लोगों को फिलहाल कोई खतरा नहीं है। RCMP के कमिश्नर माइक डुहेम ने गुरुवार को CTV को दिए इंटरव्यू में कहा कि मौजूदा जांच में किसी विदेशी सरकार से सीधा संबंध साबित नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, “2024 में मैंने जो कहा था, वह उस समय की जांच पर आधारित था। लेकिन अब जो हम देख रहे हैं, उसमें हर मामले को किसी विदेशी संस्था से जोड़ना संभव नहीं है।” यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के भारत दौरे के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार देखा जा रहा है। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एनआईए द्वारा घोषित आतंकी हरदीप निज्जर की हत्या को भारत से जोड़कर आरोप लगाए थे, जिससे दोनों देशों के संबंध खराब हो गए थे। साल 2023 में पैदा हुए तनाव के बाद भारत और कनाडा अपने रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं, और हालिया कूटनीतिक प्रयासों से इसमें सुधार भी दिख रहा है। ट्रम्प ने जापानी पीएम की मौजूदगी में कहा- हमें भी पर्ल हार्बर हमले की जानकारी नहीं थी, वैसा ही हमने ईरान में किया अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने गुरुवार को जापान की प्रधानमंत्री को उस समय चौंका दिया, जब उन्होंने 1941 में हुए पर्ल हार्बर हमले का जिक्र कर दिया। ट्रम्प ने यह बात हल्के अंदाज में कही, लेकिन यह टिप्पणी जापान के लिए असहज करने वाली मानी जा रही है। ट्रम्प ने PM साने ताकाइची के साथ एक बैठक के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। तब उनसे एक रिपोर्टर ने पूछा- अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला करने से पहले अपने सहयोगियों को क्यों नहीं बताया। इस पर ट्रम्प ने कहा, “हमने किसी को नहीं बताया क्योंकि हम सरप्राइज देना चाहते थे। सरप्राइज के बारे में जापान से बेहतर कौन जानता है?” उन्होंने एक जापानी पत्रकार से मजाकिया लहजे में कहा, “तुमने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया?” ताकाइची, जो ट्रांसलेटर के जरिए बात समझ रही थीं, उन्होंने कुछ नहीं कहा, लेकिन ऐसा लगा कि वह यह सुनकर असहज हो गई थीं। दरअसल, 7 दिसंबर 1941 को जापान ने अमेरिका के हवाई स्थित पर्ल हार्बर सैन्य अड्डे पर अचानक हमला किया था। इस हमले में 2400 से ज्यादा अमेरिकी मारे गए थे। इसके बाद अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल हो गया था। नेपाल में बालेन शाह 27 मार्च को PM पद की शपथ ले सकते हैं, एक दिन पहले सांसदों का शपथ ग्रहण समारोह नेपाल में बड़ा राजनीतिक बदलाव होने जा रहा है। हाल ही में हुए संसदीय चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की बंपर जीत के बाद अब बालेंद्र (बालेन) शाह 27 मार्च को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी में हैं। RSP ने 23 फरवरी को हुए चुनाव में 275 में से 182 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। इससे साफ हो गया है कि बालेन शाह के नेतृत्व में एक ही पार्टी की सरकार बनेगी। चुनाव से पहले ही पार्टी ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था और अब सरकार बनाने की तैयारियां आखिरी चरण में हैं। सांसदों का शपथ ग्रहण 26 मार्च को दोपहर 2 बजे होगा। इससे पहले उसी दिन सुबह 11:30 बजे सबसे वरिष्ठ सांसद को शपथ दिलाई जाएगी। 78 साल के अर्जुन नरसिंह केसी सबसे उम्रदराज चुने गए सांसद हैं, जो पहले खुद राष्ट्रपति से शपथ लेंगे और फिर बाकी सांसदों को शपथ दिलाएंगे।

Trump Signals Possible US Move on Cuba After Iran and Venezuela Operations

Trump Signals Possible US Move on Cuba After Iran and Venezuela Operations

हवाना45 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वह ‘क्यूबा को अपने कब्जे में लेने’ का इरादा रखते हैं। उन्होंने कहा, “किसी न किसी रूप में क्यूबा को लूंगा… चाहे मैं उसे आजाद करूं या अपने नियंत्रण में ले लूं। मैं उसके साथ कुछ भी कर सकता हूं।” न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक ट्रम्प के इस बयान को काफी चौंकाने वाला माना जा रहा है। अमेरिका के इतिहास में कई राष्ट्रपति क्यूबा के साथ तनावपूर्ण रिश्तों में रहे हैं, लेकिन किसी ने भी इस तरह खुले तौर पर क्यूबा पर कब्जा करने की बात नहीं कही थी। इस साल ट्रम्प पहले ही वेनेजुएला और ईरान में सैन्य कार्रवाई कर चुके हैं। ऐसे में उनके बयान को सिर्फ मजाक या अचानक कही गई बात नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक संभावित अगला कदम समझा जा रहा है। अमेरिका और क्यूबा के संबंध 65 साल से खराब चल रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से क्यूबा मामले को लेकर बातचीत करते हुए। अमेरिका ने क्यूबा को होने वाली तेल सप्लाई रोकी ट्रम्प ने इससे पहले रविवार को एयर फोर्स वन में भी कहा था, “मैं क्यूबा को संभाल रहा हूं… जल्द ही हम कोई डील करेंगे या जो करना होगा करेंगे।” उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी प्राथमिकता पहले ईरान है, उसके बाद क्यूबा। असल में, अमेरिका पहले से ही क्यूबा पर दबाव बना रहा है। जनवरी से अमेरिका ने क्यूबा को हो रही तेल सप्लाई को लगभग रोक दिया है। दूसरे देशों को भी चेतावनी दी जा रही है कि वे क्यूबा को तेल न दें। हाल ही में अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने कोलंबिया से क्यूबा जा रहे एक तेल टैंकर को भी रोक लिया। इसका असर क्यूबा में साफ दिख रहा है। 9 जनवरी के बाद से वहां कोई बड़ी तेल सप्लाई नहीं पहुंची है। वहां हालात तेजी से खराब हो रहे हैं। क्यूबा के काले बाजार में पेट्रोल करीब 35 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गया है रोजाना बिजली कट रही है, सोमवार को पूरे देश में ब्लैकआउट हुआ। अस्पतालों में सर्जरी टल रही हैं। दवाइयों की कमी हो रही है और खाने की समस्या बढ़ रही है। इन हालातों में क्यूबा की सरकार पर दबाव बढ़ गया है। क्यूबा की राजधानी हवाना में सोमवार रात ब्लैकआउट के दौरान लोग सड़क पर इकट्ठा नजर आए। ट्रम्प से डील की कोशिश कर रहा क्यूबा क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल ने हाल ही में देश को संबोधित करते हुए माना कि अमेरिका से बातचीत चल रही है और जल्द ही अर्थव्यवस्था खोलने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। साथ ही खबर यह भी है कि अमेरिका चाहता है कि क्यूबा के राष्ट्रपति पद से डियाज-कैनेल हटें। हालांकि, अमेरिका फिलहाल कास्त्रो परिवार के खिलाफ सीधी कार्रवाई की बात नहीं कर रहा है। यह रणनीति वैसी ही है जैसी वेनेजुएला में अपनाई गई थी। यानी ट्रम्प क्यूबा में सरकार बदलने के बजाय उसे अपने हिसाब से चलने के लिए मजबूर करना चाहते हैं। रूस बोला- जरूरत पड़ी तो क्यूबा की मदद करेंगे इस बीच रूस ने संकेत दिया है कि वह जरूरत पड़ने पर क्यूबा का समर्थन कर सकता है। दोनों देशों के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं। क्यूबा में आर्थिक सुधार की भी शुरुआत दिख रही है। वहां के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ऐलान किया है कि विदेश में रहने वाले क्यूबाई लोग अब देश में निवेश कर सकेंगे, बैंकिंग कर सकेंगे और कारोबार कर सकेंगे। यह बड़ा बदलाव माना जा रहा है। हालांकि, हालात इतने खराब हैं कि इस घोषणा को टीवी पर नहीं बल्कि रेडियो पर करना पड़ा, क्योंकि बिजली नहीं थी। मंगलवार सुबह तक राजधानी हवाना के करीब 70 प्रतिशत हिस्से में बिजली नहीं थी। क्यूबा में निवेश का मौका बनाना चाहते हैं ट्रम्प ट्रम्प के बयान से यह भी साफ होता है कि वह क्यूबा को सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि कारोबारी नजरिए से भी देख रहे हैं। वह पहले से ही इस द्वीप में निवेश की संभावना देखते रहे हैं। 1998 में उनकी कंपनी ने चुपचाप क्यूबा का दौरा कराया था। 2011-12 में भी उनके संगठन के लोग वहां गोल्फ कोर्स बनाने की संभावनाएं देख चुके हैं। 2016 के चुनाव प्रचार के दौरान भी ट्रम्प ने कहा था कि क्यूबा निवेश के लिए अच्छा मौका हो सकता है। अब उन्होंने फिर कहा, “वे हमसे बात कर रहे हैं। यह एक असफल देश है। उनके पास न पैसा है, न तेल, कुछ भी नहीं है।” इसके साथ ही उन्होंने क्यूबा की जमीन और मौसम की तारीफ भी की और इसे एक सुंदर द्वीप बताया। लेकिन उनके बयान से यह भी दिखा कि उन्हें भौगोलिक जानकारी पूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि क्यूबा तूफानों (हरिकेन) के क्षेत्र में नहीं आता, जबकि हकीकत में क्यूबा अक्सर हरिकेन से प्रभावित होता है। अंत में ट्रम्प ने ऐसे संकेत दिए जैसे क्यूबा पहले से ही अमेरिका की संपत्ति हो। उन्होंने कहा, “उन्हें हर हफ्ते तूफान के लिए हमसे पैसे नहीं मांगने पड़ेंगे।” आजाद होने के बाद क्यूबा को कंट्रोल करता था अमेरिका 1898 में स्पेन-अमेरिका युद्ध के बाद क्यूबा स्पेन से आजाद हुआ, लेकिन असली कंट्रोल अमेरिका के हाथ में चला गया। अमेरिका ने क्यूबा की राजनीति, सेना और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर रखा। वहां की जमीन, चीनी उद्योग और कारोबार में अमेरिकी कंपनियों का दबदबा था। साल 1959 में क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो ने अपने गोरिल्ला सैनिकों के साथ मिलकर तानाशाह बतिस्ता को सत्ता से बेदखल कर दिया। बतिस्ता एक तानाशाह था। उसके खिलाफ लड़ाई के दौरान अमेरिका ने ही फिदेल क्रास्त्रो का समर्थन किया था। अमेरिकी अखबारों में कास्त्रो के इंटरव्यू छपते थे। सत्ता हासिल करने के बाद कास्त्रो ने बड़े बदलाव किए। उन्होंने देश में कम्युनिस्ट नीति अपनाई। अमेरिकी कंपनियों की संपत्ति जब्त कर ली और जमीन और उद्योग को सरकार के नियंत्रण में लिया। फिदेल कास्त्रो ने 1959 से 2008 तक करीब पांच दशक तक क्यूबा की कमान संभाले रखी। US ने प्रतिबंध लगाया तो सोवियत संघ का करीबी बना क्यूबा अमेरिका ने जवाब में क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। व्यापार बंद कर दिया और तेल और जरूरी

World News Updates; Trump Pakistan China

World News Updates; Trump Pakistan China

1 मिनट पहले कॉपी लिंक नॉर्थ कोरिया के संसदीय चुनाव में किम जोंग उन की पार्टी ने जीत दर्ज की है। 15 मार्च को हुए चुनाव में वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया और उसके सहयोगी दलों को 99.93% वोट मिले और सभी सीटों पर कब्जा किया गया। राज्य मीडिया के मुताबिक 99.99% प्रतिशत मतदान हुआ। सुप्रीम पीपुल्स असेंबली के 687 डिप्टी चुने गए, जिसमें सिर्फ 0.07% वोट विरोध में बताए गए। नई संसद का पहला सत्र जल्द प्योंगयांग में होगा, जिसमें देश के शीर्ष नेतृत्व का चुनाव और संविधान में संशोधन पर चर्चा होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार संविधान में दक्षिण कोरिया को दुश्मन देश घोषित करने का प्रावधान जोड़ा जा सकता है। इस सत्र में किम जोंग उन का फिर से सर्वोच्च नेता चुना जाना तय माना जा रहा है। चुनाव में 70% से ज्यादा सांसद बदले गए हैं, जिसे सत्ता को और मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। नई सूची में किम यो-जोंग, विदेश मंत्री चोए सोन-हुई और किम के करीबी सहयोगी जो योंग-वोन शामिल हैं, जबकि पूर्व अध्यक्ष चोए र्योंग-हे को हटाया गया है। हालांकि उत्तर कोरिया की संसद को अक्सर औपचारिक माना जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Iran Regime Still Standing After 15 Days of War as Trump Eyes Victory Declaration

Iran Regime Still Standing After 15 Days of War as Trump Eyes Victory Declaration

वॉशिंगटन डीसी1 घंटे पहले कॉपी लिंक दो हफ्ते तक ईरान के खिलाफ युद्ध चलने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जल्द ही जीत का ऐलान कर सकते हैं। हालांकि आखिरी परिणाम इस बात पर भी निर्भर करेगा कि ईरान आगे क्या करता है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक अगर ईरान लड़ाई जारी रखता है, जहाजों पर हमले करता है या जवाबी कार्रवाई करता है, तो युद्ध वास्तव में खत्म नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की नौसेना का बड़ा हिस्सा नष्ट कर दिया गया है। उसकी कई मिसाइलें खत्म हो चुकी हैं और उसके कई टॉप लीडर्स मारे जा चुके हैं। इसके बावजूद ट्रम्प के वे बड़े राजनीतिक मकसद अब तक पूरे नहीं हुए हैं जिनकी उन्होंने कई बार बात की थी। ईरान में अभी भी पुराना शासन ही कायम है। इसके साथ ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में तेल के समुद्री रास्ते को बाधित करके वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मचा दी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान में अभी भी खेल पलटने की ताकत है। होर्मुज स्ट्रेट के पास 11 मार्च को तेल टैंकर गुजरते हुए दिखाई दिए। अमेरिका में भी दिखने लगा जंग का असर यह स्थिति ट्रम्प के लिए मुश्किल पैदा करती है, क्योंकि उनकी अपनी ही पार्टी के लोग अब उनसे युद्ध खत्म करके अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने की मांग कर रहे हैं। इसी साल नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं। युद्ध का असर अमेरिका के अंदर भी दिखने लगा है। अमेरिका और इजराइल के हमले शुरू होने के बाद पेट्रोल की कीमतों में लगभग 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हो चुकी है। किसानों के लिए खाद महंगे हो गए हैं और अमेरिकी सैनिकों की मौत का आंकड़ा भी बढ़कर 13 पहुंच गया है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ डेलावेयर के डोवर एयर फोर्स बेस पर एक सैनिक के पार्थिव शरीर को सलामी देते हुए। सैनिक सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरान के हमले में मारा गया था। अकेले जंग रोककर तेल की बढ़ती कीमतें नहीं रोक सकते ट्रम्प ईरान ने यह भी दिखाया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर हमला करने की क्षमता रखता है। इस वजह से यह साफ नहीं है कि अमेरिका अगर अकेले युद्ध रोक भी दे, तो क्या तेल की कीमतों में तुरंत कमी आएगी। ईरानी हमलों ने फारस की खाड़ी के उन देशों के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है जो लंबे समय से अमेरिका के सहयोगी रहे हैं और जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी मौजूद हैं। इसके बावजूद ट्रम्प लगातार यह दावा कर रहे हैं कि युद्ध पर उनका पूरा कंट्रोल है। उन्होंने शुक्रवार को फॉक्स न्यूज रेडियो से कहा कि युद्ध तब खत्म होगा जब उन्हें लगेगा कि अब इसे खत्म करने का समय आ गया है। भारत आ रहे थाईलैंड के एक कार्गो शिप ‘मयूरी नारी’ पर होर्मुज स्ट्रेट में हमला हुआ था। परमाणु हथियार और तेजी से बना सकता है ईरान एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि युद्ध में जीत हासिल करना और किसी देश के खतरे को लंबे समय तक खत्म करना दो अलग-अलग बातें हैं। कुछ को यह भी डर है कि युद्ध के बाद ईरान के भीतर कट्टरपंथी ताकतें और मजबूत हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में वे परमाणु हथियार बनाने की दिशा में ज्यादा तेजी से आगे बढ़ने का फैसला कर सकते हैं। ईरान के पास अब भी करीब 440 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम मौजूद है, जिसे अमेरिका और उसके सहयोगी देश एक बड़ा खतरा मानते हैं। यह यूरेनियम ईरान के लिए एक तरह की रणनीतिक ताकत भी है, जिससे वह अमेरिका और इजराइल के हमलों के बीच खुद को बचाने की कोशिश कर सकता है। यह भी साफ नहीं है कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के भंडार तक पहुंच सकता है या नहीं। माना जाता है कि जून में अमेरिकी हमलों के बाद परमाणु ठिकानों पर गिरा मलबा इन गैस के कंटेनरों को ढक चुका है। यह भी अनिश्चित है कि ईरानी वैज्ञानिक इस यूरेनियम गैस को किसी अस्थायी परमाणु हथियार या रेडियो एक्टिव बम में बदल सकते हैं या नहीं। एक्सपर्ट बोले- जंग से हालात और मुश्किल हुए मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के एक्सपर्ट ब्रायन कातुलिस ने वॉशिंगटन पोस्ट से कहा कि इस युद्ध ने स्थिति को और ज्यादा मुश्किल बना दिया है। ईरान लंबे समय से अमेरिका के लिए वैश्विक सुरक्षा से जुड़ी बड़ी चुनौती रहा है। राष्ट्रपति जिमी कार्टर से लेकर अब तक लगभग हर अमेरिकी राष्ट्रपति को ईरान के परमाणु कार्यक्रम, उसके क्षेत्रीय सहयोगियों और आतंकवाद के समर्थन जैसे मुद्दों से जूझना पड़ा है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2015 में ईरान के साथ एक परमाणु समझौता किया था, जिसके तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़े नियंत्रण लगाए गए थे। लेकिन ट्रम्प ने 2017 में सत्ता में आने के बाद इस समझौते को खत्म कर दिया था। उस समय डेमोक्रेट नेताओं ने चेतावनी दी थी कि समझौता खत्म करने से भविष्य में ईरान के साथ युद्ध हो सकता है। हालांकि ट्रम्प के सहयोगियों ने उस आरोप को खारिज कर दिया था। होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक होने से परेशानी बढ़ी ईरान जंग की वजह से कई ऐसे खतरे भी सामने आ गए हैं जो पहले केवल आशंका माने जाते थे। सबसे बड़ा खतरा होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों पर हमले का है। यह 21 मील चौड़ा समुद्री रास्ता ईरान और ओमान के बीच स्थित है। यहीं से सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे तेल उत्पादक देशों से दुनियाभर में तेल भेजा जाता है। जंग से पहले तक होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े खतरे को केवल एक रणनीतिक आशंका माना जाता था। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। एक्सपर्ट ब्रायन कातुलिस का कहना है कि अब यह खतरा पहले से कहीं ज्यादा तात्कालिक और लगातार बना हुआ है। उनका कहना है कि अभी युद्ध की शुरुआत ही है, लेकिन इससे ईरान का शासन और ज्यादा अप्रत्याशित हो सकता है। ऐसे में वह किसी भी समय इस स्ट्रेट में जहाजों पर अचानक हमले कर सकता है। अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने में नाकाम व्हाइट हाउस का कहना है कि जब अमेरिका ने ईरान पर हमला करने की योजना बनाई थी, तब यह भी माना गया था कि

World News Updates; Trump Pakistan China

World News Updates; Trump Pakistan China

21 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका में 11 भारतीयों पर फर्जी लूट की घटनाएं करवाकर U-वीजा लेने की साजिश का आरोप लगा है। अमेरिका का U-वीजा उन लोगों को मिलता है जो किसी बड़े अपराध के शिकार होते हैं और जांच में पुलिस की मदद करते हैं। इससे उन्हें अमेरिका में रहने-काम करने की इजाजत मिलती है और बाद में ग्रीन कार्ड भी मिल सकता है। जांच में पता चला कि आरोपी दुकानों में नकली हथियार के साथ डकैती करवाते थे, ताकि कर्मचारी खुद को पीड़ित बताकर वीजा के लिए आवेदन कर सकें। अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के मुताबिक 6 आरोपी बोस्टन की फेडरल कोर्ट में पेश हुए, जबकि बाकी को मैसाचुसेट्स, केंटकी और ओहायो से गिरफ्तार किया गया। एक आरोपी को पहले ही भारत भेजा जा चुका है। दोष साबित होने पर 5 साल तक जेल और 2.5 लाख डॉलर तक जुर्माना हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो ICU में भर्ती, निमोनिया से हालत गंभीर ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो को गंभीर हालत में अस्पताल के ICU में भर्ती कराया गया है। 70 साल के बोल्सोनारो निमोनिया से जूझ रहे हैं। ब्राजील के डीएफ स्टार अस्पताल ने बताया कि उन्हें तेज बुखार, ठंड लगने और ऑक्सीजन लेवल कम होने के बाद भर्ती किया गया। जांच में ब्रोंकोनिमोनिया (फेफड़ों का संक्रमण) की पुष्टि हुई है। बोल्सोनारो के डॉक्टर के मुताबिक 70 साल से ज्यादा उम्र के मरीजों में निमोनिया खतरनाक हो सकता है क्योंकि इससे सेप्टीसीमिया (खून में संक्रमण) का खतरा बढ़ जाता है। अभी उन्हें ICU में एंटीबायोटिक्स और अन्य मेडिकल सपोर्ट दिया जा रहा है। बोल्सोनारो को 2022 के चुनाव के बाद तख्तापलट की साजिश के मामले में दोषी ठहराया गया था। उन्हें पिछले साल 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने चुनाव हारने के बाद ब्राजील की लोकतांत्रिक व्यवस्था को पलटने की कोशिश की थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

US-Israel vs. Iran Conflict Live Updates Trump Netanyahu mojtaba khamenei

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4 मिनट पहले कॉपी लिंक लाइबेरिया के झंडे वाला टैंकर शिप ‘शेनलॉन्ग’ 2 मार्च को मुंबई बंदरगाह पहुंचा था। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 15वां दिन है। इस जंग के बीच भारत का LPG (रसोई गैस) ले जाने वाला जहाज शिवालिक शुक्रवार रात होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित पार कर गया। जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘मरीनट्रैफिक’ के मुताबिक यह जहाज 7 मार्च को कतर से अमेरिका के लिए रवाना हुआ था। यह जहाज भारत की सरकारी कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया का है और इसमें करीब 55,000 टन LPG ले जाने की क्षमता है। इसी वजह से इस जहाज का सुरक्षित निकलना भारत के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी में स्थित खार्ग आइलैंड पर मौजूद ईरान के सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो इस इलाके के ऑयल इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जा सकता है। ईरान के करीब 80 से 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी आइलैंड से होता है। दावा- ईरान के नए सुप्रीम लीडर का पैर काटना पड़ा कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हैं और कोमा में हैं। ब्रिटिश मीडिया द सन की रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हमले में घायल होने के बाद उन्हें तेहरान के सिना यूनिवर्सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि उनकी हालत बेहद गंभीर है। रिपोर्ट के मुताबिक हमले में चोट इतनी गहरी थी कि उनका एक पैर काटना पड़ा और लिवर को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। अस्पताल के एक हिस्से को पूरी तरह सील कर दिया गया है और वहां भारी सुरक्षा तैनात है। मुजतबा खामेनेई को उनके पिता और ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद 9 मार्च को देश का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया था। अली खामेनेई की 28 फरवरी को मौत हुई थी। पढ़ें पूरी खबर… इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… ट्रम्प ने शनिवार को ईरान के खार्ग आइलैंड पर हमले का फुटेज जारी किया। ईरानी हमले के बाद शुक्रवार को सेंट्रल इजराइल के कुछ हिस्से में आग लग गई। ईरान ने शुक्रवार को इजराइल-अमेरिका के ठिकानों को टारगेट करके कई ड्रोन लॉन्च किए। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… लाइव अपडेट्स 4 मिनट पहले कॉपी लिंक UAE में फर्जी वीडियो पोस्ट करने पर 10 लोग गिरफ्तार UAE में सरकार ने सोशल मीडिया पर वीडियो डालने वाले 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये लोग अलग-अलग देशों के हैं। सरकारी न्यूज एजेंसी WAM के मुताबिक कुछ लोगों ने ऐसे वीडियो पोस्ट किए जिनमें दिखाया गया कि UAE पर हमला हो रहा है या मिसाइलें गिर रही हैं। इनमें से कई वीडियो फर्जी थे या AI से बनाए गए थे। सरकार का कहना है कि ऐसे वीडियो से लोगों में डर और भ्रम फैलता है और देश की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। अगर इन लोगों पर आरोप साबित होते हैं, तो उन्हें कम से कम 1 साल की जेल और 1 लाख दिरहम तक जुर्माना हो सकता है। 24 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान के 90% तेल का एक्सपोर्ट खार्ग आइलैंड से होता है अमेरिका ने दावा किया है कि उसने खार्ग आइलैंड पर हमला किया है। यह आइलैंड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बेहद करीब है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान का भी करीब 80 से 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी आइलैंड से होता है। यहां बड़े तेल टर्मिनल, पाइपलाइन, स्टोरेज टैंक और जहाजों में तेल भरने की फैसिलिटी मौजूद हैं। इसे हर दिन करीब 70 लाख बैरल तक तेल जहाजों में भरा जा सकता है। 1960 के दशक में विदेशी निवेश के बाद इस जगह को बड़े ऑयल एक्सपोर्ट सेंटर के तौर पर डेवलप किया गया था और तब से यह ईरान की ऑयल सप्लाई की रीढ़ बन गया। हडसन इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो माइकल डोरान ने कहा कि ट्रम्प सरकार युद्ध के बाद भी ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था को तबाह नहीं करना चाहती है। अमेरिका की पुरानी ‘रेड लाइन’ यानी तय सीमा यह रही है कि कुछ खास और अहम ठिकानों पर हमला नहीं किया जाए। ईरान के खार्ग आइलैंड स्थित तेल टर्मिनल की 25 फरवरी 2026 को ली गई सैटेलाइट तस्वीर। 31 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका का नए ईरानी सुप्रीम लीडर पर ₹92 करोड़ का इनाम अमेरिका ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के बारे में जानकारी देने पर 10 मिलियन डॉलर (करीब ₹92 करोड़) तक इनाम देने की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश विभाग के ‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम ने यह घोषणा की है। इस सूची में ईरान के सीनियर नेता अली लारिजानी समेत कई अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इनके अलावा इंटेलिजेंस मंत्री इस्माइल खतिब, अली असगर हेजाजी, याह्या रहीम सफवी और इस्कंदर मोमेनी के बारे में भी जानकारी मांगी गई है। अमेरिका का आरोप है कि ये अधिकारी ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े नेटवर्क का संचालन करते हैं, जो दुनिया भर में हमलों और आतंकी गतिविधियों की योजना बनाते हैं। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की तस्वीर। 39 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका बोला- हमारा एयरक्राफ्ट कैरियर पूरी तरह सुरक्षित अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसका USS अब्राह्म लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर पूरी तरह सुरक्षित है। ईरान इस पर हमला करके इसे बेकार करने की झूठी बातें फैला रहा है। उनका कहना है कि यह जहाज अभी भी पूरी तरह काम कर रहा है और समुद्र से हालात पर नजर रख रहा है। इससे पहले ईरान ने दावा किया था कि उसने खाड़ी इलाके में इस जहाज पर चार बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। 43 मिनट पहले कॉपी लिंक सऊदी अरब ने 6 ड्रोन गिराए सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उसने देश में घुसने की कोशिश कर रहे छह ड्रोन मार गिराए हैं। मंत्रालय

World News Updates; Trump Pakistan China

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5 मिनट पहले कॉपी लिंक फाइल फुटेज पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अफगान तालिबान का दावा है कि पाकिस्तान ने कंधार एयरपोर्ट के पास एक एयरलाइन के फ्यूल डिपो पर बमबारी की है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के मुताबिक, यह हमला प्राइवेट एयरलाइन ‘काम एयर’ के फ्यूल डिपो पर किया गया, जो सिविलियन विमानों और UN के विमानों को भी फ्यूल सप्लाई करता है। तालिबान ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने अन्य जगहों, जिनमें राजधानी काबुल भी शामिल है पर बमबारी की। इन हमलों में महिलाओं और बच्चों के मारे जाने की भी बात कही गई है। दोनों देशों के बीच संघर्ष पिछले महीने शुरू हुआ था, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक की थी। पाकिस्तान का कहना था कि यह हमले आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए थे, जबकि अफगानिस्तान ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया था। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें केन्या एयरपोर्ट पर 2,000 से ज्यादा ‘क्वीन चींटियां’ तस्करी करते पकड़ा गया चीनी नागरिक केन्या के एक एयरपोर्ट पर एक चीनी नागरिक को हजारों जिंदा ‘क्वीन चींटियों’ की तस्करी करते हुए पकड़ा गया है। आरोपी के पास से 2,000 से ज्यादा चींटियां मिली हैं। जानकारी के मुताबिक आरोपी झांग केकुन को जोमो केन्याटा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया। उसके बैग की तलाशी लेने पर बड़ी संख्या में जिंदा चींटियां बरामद हुईं, जिन्हें वह चीन ले जाने की कोशिश कर रहा था। अधिकारियों ने बताया कि करीब 1,948 क्वीन चींटियां टेस्ट ट्यूब में पैक की गई थीं, जबकि लगभग 300 चींटियां टिश्यू पेपर के रोल के अंदर छिपाकर रखी गई थीं। ये चींटियां ‘मेसर सेफालोट्स’ नाम की प्रजाति की हैं, जो अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता नियमों के तहत संरक्षित मानी जाती हैं। केन्या वेलफेयर सर्विस के मुताबिक यूरोप और एशिया के कुछ देशों में इन चींटियों को एक्सोटिक पालतू के रूप में रखने का चलन बढ़ रहा है, इसलिए इनकी तस्करी के मामले भी सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मामला किसी अंतरराष्ट्रीय चींटी तस्करी नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है। फिलहाल कोर्ट ने आरोपी को 5 दिन की हिरासत में भेज दिया है, ताकि उसके फोन और लैपटॉप की जांच की जा सके और पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। अमेरिका में भारतीय मूल के दो भाइयों को 835 साल तक की सजा, मेडिकल घोटाले में दोषी अमेरिका में भारतीय मूल के दो भाइयों को धोखाधड़ी के मामले में 835 साल जेल की सजा सुनाई गई है। अमेरिका के पेनसिल्वेनिया के रहने वाले भास्कर सवानी और अरुण सवानी पर आरोप है कि उन्होंने हेल्थकेयर और H-1B वीजा से जुड़े कई घोटाले किए। मामले में उनकी सहयोगी अलेक्जेंड्रा ओला राडोमिक भी दोषी पाई गई हैं। अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के मुताबिक दोनों भाइयों ने करीब 10 साल तक कंपनियों और डेंटल क्लीनिक का नेटवर्क बनाकर धोखाधड़ी की। उन्होंने ‘मेडिकेड’ से 3 करोड़ डॉलर (करीब 250 करोड़ रुपए) से ज्यादा की ठगी की और ऐसे इलाज के बिल भी लगाए जो किए ही नहीं गए थे। आरोप है कि उन्होंने बिना मंजूरी वाले डेंटल इम्प्लांट भी लगाए। साथ ही H-1B वीजा के जरिए विदेशों, खासकर भारत से कर्मचारियों को बुलाने के लिए फर्जी आवेदन किए और कई कर्मचारियों से सैलरी का हिस्सा वापस लेने के लिए दबाव डाला। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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45 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी के नेशनल मॉल पार्क में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की मूर्ति लगाई गई है। इस मूर्ति को फिल्म टाइटैनिक के मशहूर “टाइटैनिक पोज” की तरह बनाया गया है। इसमें दोनों आकृतियां जहाज के आगे खड़े किरदारों की तरह पोज देती दिखाई गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह इंस्टॉलेशन कलाकारों के एक ग्रुप ‘सीक्रेट हैंडशेक’ ने लगाया है। इसे बिना किसी आधिकारिक घोषणा के इस हफ्ते अचानक लगा दिया गया। इस समूह ने पहले भी इसी तरह के विरोध से जुड़े आर्टवर्क लगाए हैं। हाल ही में फैरागट स्क्वायर में ‘जेफ्री एपस्टीन वॉक ऑफ शेम’ नाम से एक और इंस्टॉलेशन लगाया गया था। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने 30 जनवरी को एपस्टीन केस से जुड़े कुछ नए रिकॉर्ड जारी किए थे। इनमें डोनाल्ड ट्रम्प का नाम सैकड़ों बार दर्ज है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… अमेरिका में मानसिक स्थिति से जूझ रहे युवक को पुलिस ने गोली मारी, युवक ने खुद 911 पर कॉल किया था अमेरिका में एलेक्स लामोरी नाम के 25 वर्षीय ऑटिज्म नाम की मानसिक स्थिति से जूझ रहे युवक की मारीलैंड में पुलिस गोलीबारी में मौत हो गई। बताया गया कि युवक ने मानसिक संकट के दौरान खुद 911 पर कॉल कर वेलनेस चेक के लिए मदद मांगी थी। परिवार के अनुसार, एलेक्स के पास मानसिक संकट की स्थिति के लिए एक सेफ्टी प्लान था, जिसमें जरूरत पड़ने पर पुलिस को कॉल करना शामिल था। उनकी मां ने भी पहले ही अधिकारियों को बताया था कि उनका बेटा ऑटिस्टिक है और आत्म-हानि के खतरे में हो सकता है। 28 फरवरी की रात पुलिस जब अपार्टमेंट परिसर में पहुंची तो शुरू में उन्हें एलेक्स नहीं मिला। बाद में पार्किंग लॉट की ओर से वह हाथ में चाकू लिए पुलिस की ओर आते दिखाई दिए। पुलिस का कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें कई बार हथियार छोड़ने के लिए कहा, लेकिन वह आगे बढ़ते रहे। इसके बाद तीन अधिकारियों ने गोली चला दी, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना में शामिल तीन पुलिस अधिकारियों को प्रशासनिक अवकाश पर भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है और बॉडी-कैमरा फुटेज जल्द जारी की जा सकती है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Trump Thanks Reliance & India for $25 Lakh Crore Investment in US Oil Refinery

Trump Thanks Reliance & India for $25 Lakh Crore Investment in US Oil Refinery

Hindi News Business Trump Thanks Reliance & India For $25 Lakh Crore Investment In US Oil Refinery 22 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने टेक्सास में 300 अरब डॉलर (करीब 25.35 लाख करोड़ रुपए) की तेल रिफाइनरी की घोषणा करते हुए भारत और उसकी सबसे बड़ी प्राइवेट एनर्जी कंपनी रिलायंस को धन्यवाद दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में पिछले 50 सालों में पहली नई तेल रिफाइनरी बनाने के लिए भारत और रिलायंस इंडस्ट्रीज की सराहना की है। ट्रंप ने इसे एक ऐतिहासिक निवेश बताते हुए कहा कि यह ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति की बड़ी जीत है। इस प्रोजेक्ट के जरिए अमेरिका ऊर्जा के क्षेत्र में फिर से अपना दबदबा कायम करना चाहता है। 300 अरब डॉलर की है पूरी डील डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस प्रोजेक्ट की घोषणा की। उन्होंने बताया कि टेक्सास के ब्राउन्सविले में बनने वाली यह रिफाइनरी 300 अरब डॉलर के बड़े सौदे का हिस्सा है। ट्रंप के मुताबिक, यह अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी डील है। हालांकि, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि पूरी 300 अरब डॉलर की राशि भारत के साथ हुए समझौते का ही हिस्सा है या इसमें अन्य पार्टनर भी शामिल हैं। दुनिया की सबसे साफ रिफाइनरी होने का दावा ट्रंप ने कहा कि ब्राउन्सविले बंदरगाह पर बनने वाली यह रिफाइनरी न केवल अमेरिकी घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि इससे ग्लोबल एक्सपोर्ट को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि यह दुनिया की सबसे ‘क्लीन’ यानी स्वच्छ रिफाइनरी होगी। इससे अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी मजबूत होगी और साउथ टेक्सास के इलाके में हजारों नए रोजगार पैदा होंगे। ट्रंप बोले- भारत और रिलायंस का शुक्रिया प्रोजेक्ट का खुलासा करते हुए ट्रंप ने लिखा, “इस शानदार निवेश के लिए भारत में हमारे सहयोगियों और उनकी सबसे बड़ी प्राइवेट एनर्जी कंपनी, रिलायंस को धन्यवाद।” ट्रंप ने अपनी सरकार की नीतियों की तारीफ करते हुए कहा कि टैक्स में कटौती और परमिट की प्रक्रिया को आसान बनाने की वजह से ही इतना बड़ा निवेश अमेरिका वापस आ रहा है। मिडल ईस्ट में तनाव के बीच बड़ा ऐलान यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मची हुई है। हॉर्मुज जलमार्ग के बंद होने से दुनिया की 20% तेल सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। ऐसे में अमेरिका अपनी घरेलू तेल उत्पादन क्षमता बढ़ाकर दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना चाहता है। एलिमेंट फ्यूल्स होल्डिंग कर रही है काम न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, डलास की एक स्टार्टअप कंपनी ‘एलिमेंट फ्यूल्स होल्डिंग’ ने 2024 में ब्राउन्सविले में एक नया प्लांट बनाने के प्रयासों को फिर से शुरू करने की बात कही थी। माना जा रहा है कि ट्रंप का इशारा इसी बड़े प्रोजेक्ट की ओर है, जिसमें अब भारतीय सहयोग की बात सामने आ रही है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Kharg Island Trump Military Plan; Iran Oil Export Hub

Kharg Island Trump Military Plan; Iran Oil Export Hub

तेहरान1 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका, इजराइल और ईरान में जारी जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट के पास मौजूद खार्ग आइलैंड की अहमियत अचानक बढ़ गई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रम्प सरकार इस आइलैंड पर कब्जे को लेकर सैन्य विकल्पों पर विचार कर रही है, क्योंकि यह ईरान की तेल कमाई का सबसे बड़ा सेंटर माना जाता है। दरअसल ईरान के करीब 80 से 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी आइलैंड से होता है। यहां बड़े तेल टर्मिनल, पाइपलाइन, स्टोरेज टैंक और जहाजों में तेल भरने की फैसिलिटी मौजूद हैं। इस टर्मिनल से हर दिन करीब 70 लाख बैरल तक तेल जहाजों में भरा जा सकता है। 1960 के दशक में विदेशी निवेश के बाद इस जगह को बड़े ऑयल एक्सपोर्ट सेंटर के तौर पर डेवलप किया गया था और तब से यह ईरान की ऑयल सप्लाई की रीढ़ बन गया। हडसन इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो माइकल डोरान ने कहा कि ट्रम्प सरकार युद्ध के बाद भी ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था को तबाह नहीं करना चाहती। इसलिए कुछ अहम ठिकानों पर हमला नहीं करना अमेरिका की पुरानी ‘रेड लाइन’ रहा है। डोरान के मुताबिक अगर इन जगहों पर हमला हुआ, तो ईरान बड़े पैमाने पर जवाबी हमला कर सकता है, जिससे तीसरे विश्व युद्ध जैसे हालात बन सकते हैं। जंग के बीच भी जारी है तेल निर्यात अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया है, लेकिन खार्ग आइलैंड पर अब तक हमला नहीं हुआ है। सैटेलाइट डेटा और जहाजों की निगरानी करने वाली कंपनियों के मुताबिक जंग जारी होने के बावजूद ईरान यहां से लगातार तेल निर्यात कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी से अब तक करीब 1.2 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल टैंकरों के जरिए बाहर भेजा गया है। असली आंकड़ा इससे ज्यादा भी हो सकता है क्योंकि ईरान के कई जहाज अपनी ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके चलते हैं। डार्क फ्लीट से भेजा जा रहा तेल ईरान कई बार ऐसे टैंकरों का इस्तेमाल करता है जिन्हें डार्क फ्लीट कहा जाता है। ये जहाज अपनी लोकेशन दिखाने वाली ट्रैकिंग मशीन बंद कर देते हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। खार्ग आइलैंड फारस की खाड़ी में ईरान के तट से करीब 25 से 30 किलोमीटर दूर स्थित है। हाल ही में एक बड़ा तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार करते समय कुछ समय के लिए ट्रैकिंग से गायब हो गया था और बाद में फिर दिखाई दिया। रिपोर्ट्स में कहा गया कि वह जहाज एशिया की ओर जा रहा था । खार्ग आइलैंड के पास दुनिया के अहम तेल रास्ते खार्ग आइलैंड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बेहद करीब है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर इस इलाके में हमला होता है या जहाजों की आवाजाही रुकती है तो पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन इस बात पर विचार कर रहा है कि अगर खार्ग आइलैंड के तेल टर्मिनल को तबाह कर दिया जाए या उस पर कब्जा कर लिया जाए, तो ईरान की सबसे बड़ी आय बंद हो सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेल की बिक्री से मिलने वाला पैसा ईरान की सरकार और उसकी सैन्य ताकत के लिए सबसे बड़ा आर्थिक सहारा है। अगर यह कमाई रुक जाती है तो ईरान के लिए लंबे समय तक युद्ध जारी रखना मुश्किल हो सकता है। हमला हुआ तो क्या असर होगा एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर खार्ग आइलैंड पर हमला हुआ तो इसके दो बड़े असर हो सकते हैं: ईरान की तेल से होने वाली कमाई अचानक गिर सकती है दुनिया भर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं कुछ अनुमानों के मुताबिक अगर यहां से सप्लाई रुकती है तो तेल की कीमत प्रति बैरल करीब 10 डॉलर तक बढ़ सकती है। ईरान की तेल उत्पादन क्षमता इस समय ईरान करीब 33 लाख बैरल कच्चा तेल का प्रोडक्शन करता है। इसके अलावा लगभग 13 लाख बैरल कंडेन्सेट और अन्य लिक्विड ईंधन का भी प्रोडक्शन करता है है। इस तरह कुल ग्लोबल एनर्जी सप्लाई का 4.5% हिस्सा ईरान से आता है। ईरान के बड़े तेल क्षेत्र जैसे अहवाज, मरून और गचसरान से पाइपलाइन सीधे खार्ग आइलैंड तक आती हैं। यहां तेल को बड़े स्टोरेज टैंकों में रखा जाता है और फिर टैंकर जहाजों में भरकर दुनिया के अलग-अलग देशों में भेजा जाता है। आइलैंड पर करीब 3 करोड़ बैरल तेल स्टोर करने की क्षमता है। फिलहाल अनुमान है कि यहां लगभग 1.8 करोड़ बैरल तेल स्टोरेज में मौजूद है, जो सामान्य हालात में 10 से 12 दिन के निर्यात के बराबर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जंग शुरू होने से ठीक पहले ईरान ने खार्ग आइलैंड से ऑयल एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ा दिया था। 15 से 20 फरवरी के बीच तेल निर्यात 30 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा हो गया था, जो सामान्य से लगभग तीन गुना था। माना जा रहा है कि ईरान ने युद्ध शुरू होने से पहले ज्यादा से ज्यादा तेल बाहर भेजने की कोशिश की। ईरान-इराक वॉर में इस आइलैंड पर हमला हुआ था खार्ग आइलैंड पहले भी कई बार रणनीतिक चर्चा का हिस्सा रहा है। 1979 के ईरान बंधक संकट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर को सलाह दी गई थी कि इस आइलैंड पर कब्जा कर लिया जाए, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। 1980 के दशक में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के समय अमेरिका ने ईरान की कुछ अन्य तेल सुविधाओं पर हमला किया था, लेकिन खार्ग आइलैंड को निशाना नहीं बनाया गया। हालांकि ईरान-इराक वॉर के दौरान इराकी हमलों में इस आइलैंड के तेल टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन बाद में ईरान ने इसे दोबारा बना लिया। अभी तक हमला क्यों नहीं किया गया एक्सपर्ट्स का कहना है कि खार्ग आइलैंड पर हमला करने से दुनिया भर के तेल बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और खाड़ी क्षेत्र में युद्ध और