Shehbaz Sharif Donald Trump; Board Of Peace Summit Video

वॉशिंगटन डीसी4 घंटे पहले कॉपी लिंक ट्रम्प ने पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ को खड़े होकर अपनी बात सुनने को कहा और शरीफ खड़े हो गए। यह घटना गुरुवार की है। पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और ट्रम्प के बीच हुई मुलाकात सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल, शहबाज बोर्ड ऑफ पीस समिट में शामिल होने पहुंचे थे। लेकिन उन्हें वहां पर ज्यादा तवज्जो नहीं मिली। इसे लेकर उनका मजाक भी बन रहा है। गाजा को लेकर हुई पहली बैठक में शहबाज पीछे की कतार में और अलग-थलग नजर आए। एक पल तो ऐसा भी आया जब ट्रम्प ने भाषण देते हुए शहबाज को इशारा किया और वे तुरंत अपनी सीट से खड़े भी हो गए। ट्रम्प ने मंच से कहा- ‘पाकिस्तान और भारत… यह बड़ा मामला था। आपको खड़ा होना चाहिए, कृपया एक पल के लिए खड़े हो जाइए।’ यह सुनते ही शरीफ तुरंत खड़े भी हो गए। इस दौरान शहबाज बेहद असहज दिखे। सोशल मीडिया पर इसे ‘स्कूल असेंबली वाला मोमेंट’ कहा गया यानी जब टीचर खड़ा होने को कहे और छात्र तुरंत खड़ा हो जाए। एक और वायरल वीडियो में शहबाज, ट्रम्प को गले लगाने की कोशिश करते हुए भी दिखाई देते हैं। इस घटना का VIDEO शहबाज के दौरे की ‘गड़बड़ी’ से शुरुआत अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में गुरुवार को बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक हुई थी। इसमें करीब 40 देशों के अधिकारी शामिल हुए थे। भारत भी इसमें पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल हुआ था। शरीफ की अमेरिका यात्रा की शुरुआत ही विवादों से हुई। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के बयान में कई टाइपो थे, जैसे कि विदेश मंत्रालय की ऑफिशियल प्रेस रिलीज में ‘यूनाइटेड स्टेट्स’ की जगह ‘Unites States of Americas’ लिखा गया। सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट वायरल हो गए और लोग सरकारी स्तर की प्रूफरीडिंग पर सवाल उठाने लगे। पिछले साल इजराइल के ईरान पर हमले की निंदा करते समय शरीफ ने आई कंडेम (I condemn) की जगह आई कंडोम ‘I condom’ लिख दिया था, जिसे तब काफी ट्रोल किया गया। सबसे पीछे नजर आए पाकिस्तानी PM वॉशिंगटन पहुंचने के बाद भी हालात आसान नहीं रहे। ग्रुप फोटो में शरीफ मुश्किल से दिखाई दे रहे थे। ट्रम्प आगे की कतार में खड़े थे, उनके साथ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो थे। सऊदी अरब, इंडोनेशिया और कतर के नेता उनके ठीक पीछे खड़े थे, जबकि शरीफ पीछे की ओर नजर आए। भाषण के दौरान ट्रम्प ने शरीफ को खड़े होने के लिए कहा। शरीफ तुरंत खड़े हो गए, जिसका सोशल मीडिया पर मजाक बना और कुछ लोगों ने उन्हें ‘ट्रम्प का पपेट’ कहा। इसी दौरान ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘महान व्यक्ति’ और ‘बहुत अच्छे दोस्त’ बताया, जिससे शरीफ और असहज दिखे। बोर्ड ऑफ पीस की मीटिंग गुरुवार को हुई, इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ दुनियाभर के नेता एक मंच पर नजर आए। शहबाज शरीफ पीछे की कतार में दाएं से तीसरे नंबर पर हैं। शहबाज ट्रम्प की चापलूसी करते दिखे अपने भाषण में शरीफ ने ट्रम्प को ‘मैन ऑफ पीस’ कहकर संबोधित किया और उन्होंने दक्षिण एशिया का सच्चा रक्षक बता डाला। इस दौरान शहबाज शरीफ ने भारत और पाकिस्तान के बीच मई में सैन्य टकराव के बाद हुए युद्धविराम का क्रेडिट भी ट्रम्प को दे दिया। हालांकि इतनी तारीफ के बावजूद ट्रम्प को इससे खास फर्क नहीं पड़ा। शरीफ ने ट्रम्प को संबोधित करते हुए कहा- “भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर करवाने के लिए आपके समय पर और असरदार हस्तक्षेप ने शायद 2.5 करोड़ लोगों की जान बचाई। आप सच में मैन ऑफ पीस साबित हुए हैं। मैं कहना चाहता हूं कि आप सच में दक्षिण एशिया के मसीहा हैं। गाजा आपकी विरासत होगी।” ————————————– पाकिस्तानी PM से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… रूसी मीडिया ने पाकिस्तानी PM से जुड़ा वीडियो डिलीट किया:40 मिनट तक इंतजार करते रहे शहबाज, फिर पुतिन की मीटिंग में जबरन घुसे थे पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की मीटिंग में जबरन घुसने वाला वीडियो रशिया टुडे (आरटी न्यूज) ने सोशल मीडिया से हटा दिया। इसमें दिख रहा है कि पाकिस्तानी पीएम जबरन पुतिन के मीटिंग हॉल में घुस जाते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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5 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर फैसला फिलहाल टाल दिया है। उन्होंने कहा है कि वे अगले 10 से 15 दिनों के भीतर तय करेंगे कि हमला करना है या नहीं। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने एक बार फिर ईरान से समझौता करने के लिए कहा है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों का कहना है कि वे अभी भी कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ट्रम्प हमला करने का फैसला लेते हैं तो उनके पास कई सैन्य विकल्प मौजूद हैं। इनमें सीमित और टारगेटेड स्ट्राइक से लेकर ऐसे सैन्य अभियान शामिल हैं जो कई हफ्तों तक चल सकते हैं। कुछ प्लान में तेहरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने की भी तैयारी शामिल है। अमेरिका ने पिछले 22 साल में मिडिल ईस्ट में सबसे बड़ा सैन्य तैनाती की है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… पाकिस्तान के पंजाब में बैन संगठनों को चंदा देना अपराध, जैश, लश्कर और जमात जैसे आतंकी संगठन शामिल पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में प्रतिबंधित संगठनों को जकात या किसी भी तरह की आर्थिक मदद देना अपराध माना जाएगा। पंजाब होम डिपार्टमेंट ने शुक्रवार को नोटिफिकेशन जारी कर साफ किया कि जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा जैसे संगठनों को फंडिंग करने वालों पर एंटी-टेररिज्म एक्ट, 1997 के तहत केस दर्ज होगा। सरकार ने कहा है कि किसी भी प्रतिबंधित या अपंजीकृत संगठन को आर्थिक सहायता देना आपराधिक कृत्य है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी जकात और दान केवल पंजाब चैरिटी कमीशन में पंजीकृत संस्थाओं को ही दें। ताजा सूची में करीब 90 संगठनों के नाम शामिल हैं। इनमें अल-कायदा, आईएसआईएस, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी, फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन और तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान भी शामिल हैं। पंजाब सरकार ने चेतावनी दी है कि दान का पैसा जरूरतमंदों तक पहुंचे, न कि आतंकवादी या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल संगठनों तक। प्रतिबंधित संगठनों को किसी भी प्रकार की आर्थिक मदद करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बांग्लादेश चुनाव पर विपक्ष का आरोप- भारत, BNP और अवामी लीग की मिलीभगत से नतीजे प्रभावित हुए बांग्लादेश के हालिया चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद नेशनल सिटिजंस पार्टी (NCP) ने बड़ा आरोप लगाया है। पार्टी संयोजक नाहिद इस्लाम ने दावा किया है कि चुनाव नतीजों में हेरफेर हुआ और सत्तारूढ़ BNP ने भारत और हसीना की अवामी लीग के साथ मिलीभगत की। ढाका में NCP कार्यालय में गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नाहिद ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष थी, लेकिन नतीजों में हेरफेर किया गया। बांग्लादेशी अखबार ‘प्रोथोम आलो’ के मुताबिक, नाहिद ने दावा किया कि भारत, अवामी लीग और BNP के बीच ‘गुपचुप समझौता’ था। 12 फरवरी को हुए आम चुनाव में 297 सीटों में से BNP ने 212 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिलीं, जबकि NCP सिर्फ 6 सीटों पर सिमट गई। इसके बाद नाहिद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव प्रक्रिया और परिणामों पर सवाल उठाए। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया था। इसके बावजूद नाहिद इस्लाम ने BNP की जीत पर सवाल उठाए हैं। मैक्रों ने मेलोनी से कहा- अपने से मतलब रखें; इटली PM ने फ्रांस में दक्षिणपंथी एक्टिविस्ट की हत्या पर बयान दिया था फ्रांस में एक दक्षिणपंथी एक्टिविस्ट की हत्या के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। 23 साल के क्वेंटिन डेरांक की 12 फरवरी को एक प्रदर्शन के दौरान पिटाई के बाद मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर मेलोनी ने वामपंथी चरमपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया। इस पर मैक्रों ने कड़ा जवाब दिया और कहा कि हर देश को अपने मामलों तक सीमित रहना चाहिए। मेलोनी ने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि “वामपंथी चरमपंथ से जुड़े समूहों द्वारा की गई यह हत्या पूरे यूरोप के लिए एक जख्म है।” वहीं मैक्रों ने गुरुवार को भारत दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “जो लोग राष्ट्रवाद की बात करते हैं और नहीं चाहते कि कोई उनके देश के मामलों में दखल दे, वही दूसरे देशों में हो रही घटनाओं पर सबसे पहले टिप्पणी करते हैं।” जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका इशारा मेलोनी की ओर है, तो मैक्रों ने जवाब दिया, “आपने सही समझा।” इसके जवाब में मेलोनी ने इटली के न्यूज चैनल स्काई TG24 को दिए इंटरव्यू में कहा कि मैक्रों ने उनके बयान को गलत समझा। उन्होंने कहा, “मुझे खेद है कि मैक्रों ने इसे दखल के रूप में लिया।” लियोन में दक्षिणपंथी प्रदर्शन के दौरान क्वेंटिन डेरांक की पिटाई की गई थी, जिससे उनकी मौत हो गई। इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बांग्लादेश ने 2 महीने बाद दिल्ली में वीजा सर्विस बहाल की, तारिक रहमान के PM बनने के 3 दिन बाद फैसला भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नरमी की शुरुआत होती दिख रही है। बांग्लादेश हाई कमीशन ने शुक्रवार को दिल्ली में भारतीय नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं फिर से शुरू कर दीं। यह फैसला बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान के पद संभालने के तीन दिन बाद आया है। दोनों देशों के बीच दिसंबर में तनाव बढ़ने के बाद वीजा और काउंसलर सेवाएं रोक दी गई थीं। अब इसे रिश्तों में सुधार की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक सभी कैटेगरी की वीजा सेवाएं भारतीयों के लिए बहाल कर दी गई हैं। इससे एक दिन पहले भारत के एक वरिष्ठ कॉन्सुलर अधिकारी ने भी कहा था कि नई दिल्ली जल्द ही बांग्लादेश में सभी वीजा सेवाएं बहाल करेगी। दिसंबर में भारत विरोधी युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब हो गए थे। हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों में भारत विरोधी नारेबाजी हुई। इस दौरान कई हिंदुओं को निशाना बनाया गया और उनकी लिंचिंग की घटनाएं सामने आईं। इसके बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव काफी बढ़ गया था और वीजा सेवाएं रोक दी गई थीं। ढाका में सत्ता से
Gaza Board Peace Meeting 2026; Donald Trump India

वॉशिंगटन डीसी16 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में गुरुवार को बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने गुरुवार को ऑब्जर्वर देश के तौर पर हिस्सा लिया। यह बैठक वॉशिंगटन डीसी में हुई। भारत की तरफ से भारतीय दूतावास में तैनात चार्ज द’अफेयर्स (सीनियर अधिकारी) नमग्या सी खम्पा ने हिस्सा लिया। भारत ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वह बोर्ड का फुल टाइम मेंबर बनेगा या नहीं। भारत ने पिछले महीने दावोस में इसके लॉन्च कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया था। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की बैठक में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया गया है। ट्रम्प ने कहा कि 9 सदस्य देश गाजा राहत पैकेज के लिए 63 हजार करोड़ रुपए (7 अरब डॉलर) देंगे। जबकि, अमेरिका खुद 90 हजार करोड़ रुपए (10 अरब डॉलर) देगा। वहीं, 5 देशों ने युद्ध से तबाह फिलिस्तीनी इलाके में सैनिक तैनात करने पर सहमति दी है। वॉशिंगटन में हुई इस बैठक में करीब 50 देशों के अधिकारी शामिल हुए। इनमें से 27 देश बोर्ड के सदस्य हैं, जिनमें अजरबैजान, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजराइल, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, UAE, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। भारत और यूरोपीय संघ (EU) सहित बाकी देश ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल हुए। बोर्ड ऑफ पीस से जुड़ी तस्वीरें… राष्ट्रपति ट्रम्प बोर्ड ऑफ पीस की मीटिंग को संबोधित करते हुए। बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग में 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मीटिंग के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प से बात करते हुए। बैठक के दौरान ट्रम्प ने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ को खड़े होने के लिए कहा और वो खड़े हो गए। बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग में भारत की तरफ से सीनियर अधिकारी नमग्या सी खम्पा ने हिस्सा लिया। (फाइल फोटो) ट्रम्प बोले- ये रकम युद्ध पर खर्च के मुकाबले बहुत छोटी ट्रम्प ने कहा कि यह रकम युद्ध पर होने वाले खर्च के मुकाबले बहुत छोटी है। उन्होंने सदस्य देशों से कहा कि अगर सभी देश साथ आएं तो उस इलाके में स्थायी शांति लाई जा सकती है, जो सदियों से युद्ध और हिंसा झेलता आया है। ट्रम्प ने कहा कि गाजा पर खर्च किया गया हर डॉलर इलाके में स्थिरता लाने और बेहतर भविष्य बनाने में निवेश है। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि कितने सैनिक भेजे जाएंगे, वे कब तैनात होंगे और दी गई रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा। UN की निगरानी करेगा ट्रम्प का बोर्ड ऑफ पीस 5 देशों ने युद्ध से तबाह फिलिस्तीनी इलाके में सैनिक तैनात करने पर सहमति दी है। ट्रम्प ने यह भी साफ किया कि यह बोर्ड अब दुनिया भर के संघर्ष सुलझाने में भी भूमिका निभाएगा। ट्रम्प ने कहा, बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) की निगरानी करेगा और सुनिश्चित करेगा कि वह ठीक से काम कर रहा है। वहीं, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक से ठीक पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक हुई। इसमें वेस्ट बैंक में इजरायल के नियंत्रण बढ़ाने की कोशिशों की आलोचना की गई। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ शामिल हुए बैठक में भारत समेत ज्यादातर देशों ने सीनियर अधिकारियों को भेजा। वहीं पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन खुद पहुंचे। जर्मनी, इटली, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और ब्रिटेन उन देशों में हैं, जो बोर्ड में शामिल नहीं हुए हैं, लेकिन ऑब्जर्वर के तौर पर भाग लिया। ट्रम्प ने दावा किया, ‘सभी ने गाजा पर प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और जिन्होंने नहीं माना है वे भी जल्द इसे मान लेंगे।’ बैठक की चर्चा का केंद्र एक ऑर्मड इंटरनेशनल स्टैबलाइजेशन फोर्स बनाना रहा, जिसका काम सुरक्षा बनाए रखना और हमास को निरस्त्र कराना होगा। यह इजराइल की प्रमुख मांग है और सीजफायर डील का अहम हिस्सा भी। हालांकि हमास ने अब तक निरस्त्रीकरण को लेकर बहुत भरोसा नहीं दिलाया है। हमास बोला- जब तक इजराइली सेना यहां है, हथियार नहीं छोड़ेंगे दूसरी ओर हमास ने कहा है कि जब तक इजराइली सेना पूरी तरह नहीं हटती, वह हथियार नहीं डालेगा। हाल ही में हमास लीडर ओसामा हमदान ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में कहा कि संगठन ने अभी तक हथियारों पर कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया है। वहीं, इजराइल का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ता, सेना गाजा से नहीं हटेगी। इजराइल ने हमास को 60 दिन का समय दिया है कि वह पूरी तरह हथियार छोड़ दे। ट्रम्प के दामाद और वार्ताकार जेरेड कुशनर ने दावोस में गाजा के दक्षिणी हिस्से में छह नए शहर बसाने और समुद्री तट पर पर्यटन परियोजना बनाने की योजना पेश की थी। हालांकि, इसके लिए फंडिंग और समय-सीमा अभी तय नहीं है। बोर्ड ऑफ पीस क्या है? ट्रम्प ने पहली बार पिछले साल सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है। दुनिया के नेताओं को भेजे गए न्योते में बताया गया था कि इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में भी काम करेगा। भेजे गए एक मसौदा (चार्टर) में कहा है कि जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा। ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वे चाहते हैं कि यह बोर्ड सिर्फ गाजा के युद्धविराम तक सीमित न रहे, बल्कि दूसरे मुद्दों पर भी काम करे। हालांकि, इससे कुछ देशों को चिंता है कि इससे ग्लोबल डिप्लोमेसी में UN की भूमिका कमजोर हो सकती है। ट्रम्प ने कहा कि जब यह बोर्ड पूरी तरह बन जाएगा, तब यह बड़े फैसले ले सकेगा और जो भी काम होगा, वह UN के सहयोग से किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि UN में बहुत क्षमता है, लेकिन उसका अब तक पूरा इस्तेमाल नहीं
Pakistan India War Vs Donald Trump Tariff Threat; Fighter Jets

वॉशिंगटन डीसी12 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को वॉशिंगटन में फिर से भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि मैंने दोनों देशों पर 200% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद वे संघर्ष रोकने के लिए माने। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये बात ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कार्यक्रम में कही। ट्रम्प ने कहा कि उस समय दोनों देशों के बीच हालात बहुत खराब थे, लड़ाई तेज हो गई थी और विमान गिराए जा रहे थे। मैंने दोनों नेताओं (मोदी और शहबाज शरीफ) को फोन किया। मैंने दोनों से साफ कह दिया था कि अगर वे झगड़ा खत्म नहीं करेंगे तो मैं उनके साथ कोई ट्रेड डील नहीं करूंगा। ट्रम्प के मुताबिक दोनों देश लड़ना चाहते थे, लेकिन जब पैसे का मामला आया और नुकसान की बात सामने आई तो वे मान गए। ट्रम्प ने दावा किया कि इस संघर्ष के दौरान 11 महंगे फाइटर जेट्स गिराए गए थे। हालांकि, उन्होंने ये नहीं बताया कि ये फाइटर जेट्स किस देश के थे। ट्रम्प करीब 100 बार भारत-पाकिस्तान के बीच जंग रुकवाने का दावा कर चुके हैं। वहीं, भारत लगातार यह कहता रहा है कि भारत-पाकिस्तान के मुद्दों में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाएगी। शरीफ ने ट्रम्प को ‘दक्षिण एशिया का रक्षक’ बताया ट्रम्प ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उनके चीफ ऑफ स्टाफ के सामने यह बात मानी थी कि उनकी पहल से भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध टल गया। ट्रम्प के मुताबिक, अगर यह टकराव नहीं रुकता तो करीब 2.5 करोड़ लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी वजह से दोनों देशों के बीच हालात काबू में आए और बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान टल गया। इस दौरान ट्रम्प ने शहबाज शरीफ से खड़े होने के लिए कहा वो खड़े हो गए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस दौरान शहबाज शरीफ ने ट्रम्प को दक्षिण एशिया की हिफाजत करने वाला बताया। ट्रम्प बोले- अप्रैल में चीन दौरे पर जाऊंगा चीन को लेकर ट्रम्प ने कहा कि उनका राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बहुत अच्छा रिश्ता है। उन्होंने बताया कि वह अप्रैल में चीन जाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि पिछली बार जब वे चीन गए थे तो राष्ट्रपति शी ने उनका शानदार स्वागत किया था। ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने इतने सारे सैनिक एक साथ कभी नहीं देखे थे, जो बिल्कुल एक ही कद के थे। उन्होंने मजाक में कहा कि अगर वे हेलमेट उतार देते तो उनके सिर पर बिलियर्ड खेला जा सकता था। भारत बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में शामिल हुआ ट्रम्प के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने गुरुवार को ऑब्जर्वर देश के तौर पर हिस्सा लिया। भारत की तरफ से भारतीय दूतावास में तैनात चार्ज द’अफेयर्स (सीनियर अधिकारी) नमग्या सी खम्पा ने हिस्सा लिया। भारत ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वह बोर्ड का फुल टाइम मेंबर बनेगा या नहीं। भारत ने पिछले महीने दावोस में इसके लॉन्च कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया था। ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की बैठक में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया गया है। ट्रम्प ने कहा कि 9 सदस्य देश गाजा राहत पैकेज के लिए 63 हजार करोड़ रुपए (7 अरब डॉलर) देंगे। जबकि, अमेरिका खुद 90 हजार करोड़ रुपए (10 अरब डॉलर) देगा। पढ़ें पूरी खबर… बोर्ड ऑफ पीस की गुरुवार को हुई मीटिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ दुनियाभर के नेता एक मंच पर नजर आए। बोर्ड ऑफ पीस क्या है? ट्रम्प ने पहली बार सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है। पिछले हफ्ते दुनिया के नेताओं को भेजे गए न्योते में बताया गया कि इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में भी काम करेगा। बोर्ड के मसौदे (चार्टर) में कहा गया है कि जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा। ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वे चाहते हैं कि यह बोर्ड सिर्फ गाजा के युद्धविराम तक सीमित न रहे, बल्कि दूसरे मुद्दों पर भी काम करे। हालांकि, इससे कुछ देशों को चिंता है कि इससे ग्लोबल डिप्लोमेसी में UN की भूमिका कमजोर हो सकती है। ट्रम्प ने कहा कि जब यह बोर्ड पूरी तरह बन जाएगा, तब यह बड़े फैसले ले सकेगा और जो भी काम होगा, वह UN के सहयोग से किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि UN में बहुत क्षमता है, लेकिन उसका अब तक पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पांच स्थायी सदस्यों में से अमेरिका के अलावा किसी भी देश ने अभी तक इस बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है। —————- यह खबर भी पढ़ें… दावा- ईरान पर इस हफ्ते हमला कर सकता है अमेरिका:2003 के बाद सबसे बड़ी एयर फोर्स तैनात, कई हफ्ते चलेगा मिलिट्री ऑपरेशन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बहुत तेजी से बढ़ रहा है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक इस हफ्ते अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से इसे अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने 2003 के इराक युद्ध के बाद अपनी सबसे बड़ी एयर फोर्स तैनात की है। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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1 दिन पहले कॉपी लिंक चीन की एक कंटेंट क्रिएटर का लाइव सेशन उस समय चर्चा में आ गया, जब उनके चेहरे पर लगा ब्यूटी फिल्टर अचानक बंद हो गया। कुछ सेकंड के लिए दर्शकों को उनका बिना फिल्टर वाला चेहरा दिखाई दिया। इस घटना के क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। इसके बाद डिजिटल ब्यूटी स्टैंडर्ड और ऑनलाइन परफॉर्मेंस के दबाव को लेकर बहस तेज हो गई है। वीडियो में दिखता है कि क्रिएटर सामान्य तरीके से लाइव सेशन होस्ट कर रही थीं। तभी अचानक फिल्टर हट गया। पहले जो चेहरा स्मूद, पोर्सिलेन जैसा और हल्के रंग का दिख रहा था, वह प्राकृतिक टेक्सचर और सामान्य रंगत के साथ नजर आया। फिल्टर हटते ही उनकी आंखें छोटी और जॉलाइन कम शार्प दिखी। चेहरा पहले दिख रहे डॉल जैसे लुक की बजाय आम लोगों जैसा नजर आने लगा। हालांकि यह बदलाव कुछ सेकंड का ही था। कुछ ही क्षण बाद फिल्टर फिर से एक्टिव हो गया। आंखें फिर बड़ी दिखने लगीं, चेहरे की शेप ज्यादा शार्प हो गई और त्वचा पहले जैसी साफ और चमकदार दिखने लगी। इस दौरान क्रिएटर ने कोई घबराहट नहीं दिखाई। उन्होंने बाल ठीक किए, कैमरे की ओर मुस्कुराईं और ऐसे ही लाइव जारी रखा, जैसे कुछ हुआ ही न हो। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स एक्स और इंस्टाग्राम पर वायरल पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस घटना के बाद उनके करीब 1.4 लाख फॉलोअर्स कम हो गए। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब चीन में लाइव स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। कई क्रिएटर डॉयिन जैसे प्लेटफॉर्म पर घंटों तक लाइव रहते हैं। वे ऑडियंस से बातचीत करते हैं, परफॉर्म करते हैं या प्रोडक्ट प्रमोट करते हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर आंखें बड़ी दिखाने, त्वचा को स्मूद करने और चेहरे की बनावट को शार्प करने वाले फिल्टर आम हो चुके हैं। कई क्रिएटर इन्हें एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए जरूरी टूल मानते हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… गाजा में मरने वालों की संख्या 75 हजार के पार, मेडिकल जर्नल द लैंसेट की रिपोर्ट में खुलासा गाजा युद्ध में मरने वालों की संख्या 75 हजार के पार हो गई है। मेडिकल जर्नल द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक 7 अक्टूबर 2023 से 5 जनवरी 2025 के बीच गाजा में 75,200 लोगों की हिंसक मौत हुई है, जो आधिकारिको आंकड़ों से 34.7% ज्यादा हैं। रिसर्चर्स ने कहा है कि गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के रिकॉर्ड विश्वसनीय हैं, लेकिन यह संख्या का न्यूनतम है, क्योंकि स्वास्थ्य ढांचा बुरी तरह ध्वस्त हो चुका है। अध्ययन में 16,300 गैर-हिंसक मौतों का भी अनुमान लगाया गया है, जिनमें हजारों मौतें इलाज के अभाव से हुई हैं। मृतकों में 56% महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग हैं। एक अन्य अध्ययन के मुताबिक 1.16 लाख से अधिक लोग घायल हुए हैं और हजारों को सर्जरी की जरूरत है। अस्पतालों की क्षमता आधी से भी कम रह गई है। नाइजीरिया की खदान में जहरीली गैस का रिसाव, 37 की मौत, 26 अस्पताल में भर्ती नाइजीरिया के प्लेटो राज्य में मंगलवार तड़के एक खदान में जहरीली गैस रिसाव से 37 खदानकर्मियों की मौत हो गई। 26 अन्य खदानकर्मियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सरकार ने खदान बंद कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक घटना प्लेटो राज्य के वासे इलाके के कम्पानी जुराक समुदाय में हुई। शुरुआती जांच में सामने आया कि खदानकर्मी लेड ऑक्साइड और सल्फर व कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों के संपर्क में आ गए। ये गैसें खासकर बंद या कम वेंटिलेशन वाले स्थानों में घातक साबित होती हैं। पुलिस ने बताया कि मृतकों के शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिए गए हैं। नाइजीरिया के सॉलिड मिनरल्स डेवलपमेंट मंत्री डेले अलाके ने कहा कि खनिक गैस के जहरीले प्रभाव से अनजान थे और काम जारी रखे हुए थे। अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि खदान में किस खनिज का उत्खनन हो रहा था और क्या वह कानूनी रूप से संचालित थी। नाइजीरिया में अवैध सोना खनन लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। पिछले वर्षों में ऐसे अवैध खनन हादसों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। हादसे के बाद सरकार ने खदान को बंद कर दिया है और गैस रिसाव की वजहों की जांच शुरू कर दी गई है। अमेजन इंडिया के डांस वीडियो पर अमेरिका में विवाद, कहा- यहां छंटनी हो रही और वहां सेलिब्रेशन अमेजन इंडिया ऑफिस के एक सेलिब्रेशन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अमेरिका में विवाद खड़ा हो गया। कुछ अमेरिकी यूजर्स ने दावा किया कि जब अमेरिका में कर्मचारियों की छंटनी हो रही है, तब भारत में जश्न मनाया जा रहा है। वीडियो में कर्मचारी ऑफिस परिसर के अंदर किसी सेलिब्रेशन में हिस्सा लेते दिख रहे हैं। लेकिन कुछ लोगों ने इसे अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरी जाने से जोड़ दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई यूजर्स ने आरोप लगाया कि कंपनी अमेरिका में नौकरियां खत्म कर रही है और भारत में कर्मचारियों को बढ़ावा दे रही है। अमेजन ने जनवरी में वैश्विक स्तर पर कम से कम 16 हजार पद खत्म करने का ऐलान किया था। हाल ही में वाशिंगटन राज्य में दो हजार से अधिक कर्मचारियों की छंटनी की सूचना दी गई। हालांकि छंटनी का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, भारत समेत अन्य देशों में भी कर्मचारियों पर इसका प्रभाव पड़ा है। पूर्व साउथ कोरियाई राष्ट्रपति यून सुक योल विद्रोह भड़काने के दोषी साबित, 2024 में मार्शल लॉ लगाया था साउथ कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को गुरुवार को विद्रोह भड़काने का दोषी ठहराया गया। यह मामला 2024 के अंत में देश में लगाए गए मार्शल लॉ से जुड़ा है। यून सुक योल ने 3 दिसंबर की रात को देश में मार्शल लॉ लगा दिया था। हालांकि भारी विरोध के बाद उन्होंने 6 घंटों के भीतर ही अपना फैसला वापस ले लिया था। इसके बाद उन्हें महाभियोग लगाकर पद से हटा दिया गया था। उनका यह फैसला कुछ ही समय के लिए लागू रहा, लेकिन इससे देश में राजनीतिक उथल-पुथल मच गई थी और दशकों से चली आ रही लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो
अमेरिका के 50 फाइटर जेट मिडिल ईस्ट रवाना:इनमें F-22, F-35 और F-16 शामिल, अमेरिका बोला- ईरान शर्तें नहीं मान रहा, हमारे पास दूसरे रास्ते मौजूद

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में पिछले 24 घंटों में 50 से ज्यादा फाइटर जेट भेजे हैं। इंडिपेंडेंट फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा और मिलिट्री एविएशन मॉनिटर्स ने कई F-22, F-35 और F-16 फाइटर जेट को मिडिल ईस्ट की ओर जाते हुए रिकॉर्ड किया है। यह जानकारी अमेरिका और ईरान के बीच मंगलवार को जिनेवा में हुई दूसरी दौर की बातचीत के दौरान सामने आई है। दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते से जुड़े मुद्दों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तय की गई शर्तों को ईरान मानने को तैयार नहीं है। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि बातचीत के कुछ हिस्से सकारात्मक रहे, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बनी है। इन बयानों से साफ है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत अभी भी नाजुक दौर में है। ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि अगर ईरान अमेरिकी मांगें नहीं मानता, तो अमेरिका ताकत का इस्तेमाल करेगा। अमेरिका ने रिफ्यूलिंग टैंकर भी मिडिल ईस्ट भेजे अमेरिकी फाइटर जेट्स के साथ कई एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर भी मिडिल ईस्ट की ओर जाते देखे गए हैं। इससे संकेत मिलता है कि विमान लंबे समय तक ऑपरेशन की तैयारी में हैं। इस बीच, अमेरिकी अधिकारी ने मीडिया को बताया कि USS जेराल्ड आर. फोर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप कैरिबियन से रवाना होकर मिड-अटलांटिक में पहुंच चुका है और मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। अगले चार-पांच दिन में उसके पहुंचने की उम्मीद है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी ने कहा कि फोर्ड के साथ तीन गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर, USS माहान, USS बैनब्रिज और USS विन्सटन चर्चिल भी हैं। इससे पहले USS अब्राहम लिंकन और अन्य महत्वपूर्ण अमेरिकी एयर और नेवल एसेट्स भी इस साल की शुरुआत में क्षेत्र में तैनात किए जा चुके हैं। इससे अमेरिका की मिडिल ईस्ट में सैन्य मौजूदगी और मजबूत हुई है। F-35 और F-16 फाइटर जेट के बारे में जानिए… ईरान ने ऑपरेशनल क्षमताओं की जांच के लिए नौसैनिक अभ्यास शुरू किया ईरान ने मंगलवार को दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक हॉर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। यह कदम लाइव-फायर सैन्य अभ्यास के दौरान उठाया गया। ईरान ने सोमवार को इस नए अभ्यास की घोषणा की थी। इसे ‘स्मार्ट कंट्रोल ऑफ द स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ नाम दिया गया। ईरानी न्यूज एजेंसियों के मुताबिक, फारस की खाड़ी के संकरे हिस्से में मिसाइल परीक्षण किए गए। ईरानी मीडिया ने सुरक्षा और समुद्री कारणों का हवाला देते हुए कहा कि यह बंदी कुछ घंटों के लिए रहेगी। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक, इसका मकसद खुफिया और ऑपरेशनल क्षमताओं की जांच करना है। समुद्री सुरक्षा कंपनी ईओएस रिस्क ग्रुप ने कहा कि इस इलाके से गुजरने वाले जहाजों को पहले ही रेडियो पर चेतावनी दी गई थी। जनवरी के अंत में हुए इसी तरह के अभ्यास के दौरान अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कड़ा बयान जारी किया था। उसने कहा था कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय हवाई और समुद्री क्षेत्र में पेशेवर तरीके से काम करने का अधिकार है, लेकिन वह अमेरिकी वॉरशिप या ट्रेड जहाजों को परेशान न करें। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल कारोबार के लिए अहम रास्ता हॉर्मुज जलडमरूमध्य अपनी सबसे संकरी जगह पर करीब 33 किलोमीटर (21 मील) चौड़ा है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे वैश्विक बाजारों से जोड़ता है। दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, यूएई और ईरान का तेल और गैस यहीं से बाहर जाता है। ज्यादातर खेप एशिया के लिए होती है। अमेरिकी एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, इस रास्ते का कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं है, हालांकि सऊदी अरब और यूएई ने कुछ पाइपलाइन बनाई हैं जो इस मार्ग को बायपास करती हैं। हालांकि जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है और सभी जहाजों के लिए खुला है, लेकिन इसके किनारों के क्षेत्रीय पानी पर ईरान और ओमान का नियंत्रण है। ईरान-अमेरिका के बीच बैलिस्टिक मिसाइल पर विवाद अटका ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है। ईरान इस पर बिल्कुल भी समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है। ईरान का कहना है कि यह उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रक्षा के लिए जरूरी है। ईरान का कहना है कि जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइटों पर हमला किया, तब ईरान की मिसाइलों ने ही उसकी रक्षा की। इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि ईरान हिजबुल्लाह, हूती जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन देना बंद करे। अमेरिका इस मुद्दे को भी शामिल करना चाहता है, लेकिन ईरान मुख्य रूप से सिर्फ परमाणु मुद्दे पर फोकस रखना चाहता है। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी। यह ईरान की रक्षात्मक क्षमता है और इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं। वेंस बोले- बातचीत का अंतिम फैसला ट्रम्प के हाथ में है वेंस ने कहा कि बातचीत कितने समय तक जारी रखनी है, इसका अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रम्प करेंगे। उन्होंने कहा- हम कोशिश जारी रखेंगे। लेकिन राष्ट्रपति के पास यह अधिकार है कि वे तय करें कि कूटनीति अपनी सीमा तक पहुंच गई है या नहीं। हमें उम्मीद है कि इस बार बातचीत बुरे अंजाम तक नहीं पहुंचेगी, लेकिन अगर पहुंचती है तो फैसला राष्ट्रपति ही करेंगे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान अगले दो हफ्तों में ज्यादा बड़ा प्रस्ताव देगा, जिससे दोनों पक्षों के बीच मतभेद कम किए जा सकें। ईरानी विदेश मंत्री बोले- हमला हुआ तो इसका असर दूसरों पर भी पड़ेगा दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने बातचीत को लेकर उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि समझौते की दिशा में नई खिड़की खुली है। बातचीत के बाद संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में अरागची ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि बातचीत से टिकाऊ और सहमति वाला समाधान निकलेगा, जो सभी
ट्रम्प बोले- ईरान के साथ बातचीत में इनडायरेक्टली शामिल रहूंगा:पिछले साल परमाणु ठिकानों पर बमबारी से इन्हें अक्ल आई; आज स्विट्जरलैंड में बैठक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत में इनडायरेक्ट रूप से शामिल रहेंगे। उन्होंने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। यह बयान ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर दूसरे दौर की बातचीत से पहले आया है। अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत आज (17 फरवरी 2026) जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में हो रही है। इससे पहले ओमान में 6 फरवरी को पहली बैठक हुई थी। ट्रम्प ने कहा, ‘मैं उन बातचीत पर नजर रहूंगा।’ उन्होंने संकेत दिया कि ईरान इस बार समझौते को लेकर गंभीर है। डील की संभावना पर ट्रम्प ने कहा कि ईरान इसे लेकर सख्त रुख अपनाता रहा है, लेकिन पिछले साल अमेरिका की ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी से उसे अक्ल आई। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि वे समझौता न करने के परिणाम भुगतना चाहेंगे।’ ईरान-अमेरिका के बीच किन मुद्दों पर बातचीत होगी ईरान ने ऑपरेशनल क्षमताओं की जांच के लिए नौसैनिक अभ्यास शुरू किया एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक, ईरान ने सोमवार को कुछ ही हफ्तों में दूसरी बार नौसैनिक अभ्यास शुरू किया। यह अभ्यास स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज, पर्शियन गल्फ और गल्फ ऑफ ओमान में हो रहा है। इसका मकसद खुफिया और ऑपरेशनल क्षमताओं की जांच करना है। समुद्री सुरक्षा कंपनी ईओएस रिस्क ग्रुप ने कहा कि इस इलाके से गुजरने वाले जहाजों को रेडियो पर चेतावनी दी गई कि स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज के उत्तरी मार्ग में मंगलवार को लाइव-फायर ड्रिल हो सकती है। हालांकि ईरानी सरकारी टीवी ने लाइव-फायर अभ्यास का जिक्र नहीं किया। जनवरी के अंत में हुए इसी तरह के अभ्यास के दौरान अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कड़ा बयान जारी किया था। उसने कहा था कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय हवाई और समुद्री क्षेत्र में पेशेवर तरीके से काम करने का अधिकार है, लेकिन वह अमेरिकी वॉरशिप या ट्रेड जहाजों को परेशान न करें। ईरान के उप विदेश मंत्री बोले- ट्रम्प प्रतिबंध हटाएं तो डील संभव व्हाइट हाउस का कहना है कि वह ऐसा समझौता चाहता है, जिससे ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। वहीं, रविवार को ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने अमेरिका के साथ परमाणु समझौते को लेकर बातचीत करने की इच्छा जताई है। उन्होंने BBC को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर अमेरिका प्रतिबंध हटाने पर बात करने को तैयार है, तो हम अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कई मुद्दों पर समझौता करने के लिए तैयार है। वहीं अमेरिकी अधिकारी बार-बार कहते रहे हैं कि परमाणु वार्ता में प्रगति रुकने की वजह ईरान है, न कि अमेरिका। रवांची बोले- हमने 60% इंरिच्ड यूरेनियम घटाने का प्रस्ताव दिया ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौता एक लंबे समय से चल रही विवादास्पद बातचीत है, जिसका मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना है। जिससे वह परमाणु हथियार न बना सके। मजीद तख्त-रवांची ने कहा कि ईरान ने 60% तक इंरिच्ड यूरेनियम को कम करने का प्रस्ताव दिया है। ईरान के पास 400 किलो से ज्यादा उच्च स्तर पर इंरिच्ड यूरेनियम का भंडार है। 2015 के परमाणु समझौते के तहत उसने अपना यूरेनियम रूस भेजा था। इस बार क्या वह ऐसा करेगा, इस पर तख्त-रवांची ने कहा कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। रूस ने दोबारा यह सामग्री स्वीकार करने की पेशकश की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान अस्थायी रूप से यूरेनियम इंरिचमेंट रोकने का प्रस्ताव भी दे चुका है। बैलिस्टिक मिसाइल पर विवाद अटका ईरान की एक बड़ी शर्त रही है कि बातचीत सिर्फ परमाणु मुद्दे पर हो। तख्त-रवांची ने कहा कि उनकी समझ है कि अगर समझौता करना है तो फोकस परमाणु मुद्दे पर ही रहेगा। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है। ईरान इस पर बिल्कुल भी समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है। ईरान का कहना है कि यह उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रक्षा के लिए जरूरी है। जब जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइटों पर हमला किया, तब ईरान की मिसाइलों ने ही उसकी रक्षा की। इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि ईरान हिजबुल्लाह, हूती जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन देना बंद करे। अमेरिका इस मुद्दे को भी शामिल करना चाहता है, लेकिन ईरान मुख्य रूप से सिर्फ परमाणु मुद्दे पर फोकस रखना चाहता है। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी। यह ईरान की रक्षात्मक क्षमता है और इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं। रवांची बोले- हमारे अस्तित्व पर खतरा हुआ तो जवाब देंगे ईरान के उप विदेश मंत्री ने ट्रम्प के बयानों पर चिंता जताई। सार्वजनिक रूप से और निजी तौर पर अमेरिका बातचीत में रुचि दिखा रहा है, लेकिन ट्रम्प ने हाल में सत्ता परिवर्तन की बात की। तख्त-रवांची ने कहा कि निजी संदेशों में ऐसा नहीं है। उन्होंने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बढ़ोतरी पर चिंता जताई और कहा कि दूसरा युद्ध सबके लिए बुरा होगा। अगर ईरान को अस्तित्व का खतरा लगा, तो ईरान जवाब देगा। ईरान ने क्षेत्रीय देशों से बात की है और सब युद्ध के खिलाफ हैं। ईरान को लगता है कि इजराइल इस वार्ता को तोड़ना चाहता है। समझौते को लेकर तख्त-रवांची ने कहा कि ईरान जेनेवा में उम्मीद के साथ जाएगा और दोनों पक्षों को ईमानदारी दिखानी होगी। क्षेत्र में तैनात किए जा रहे 40,000 से अधिक अमेरिकी सैनिकों के बारे में पूछे जाने पर, तख्त-रावंची ने जवाब दिया, ‘ऐसी स्थिति में खेल अलग होगा।’ ईरान से तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में तैनाती बढ़ा रहा अमेरिका अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। अमेरिका अब अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड वहां भेज रहा है। यह एक न्यूक्लियर-पावर्ड कैरियर एयरक्राफ्ट है। रॉयटर्स को दो अमेरिकी अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है। अधिकारी के मुताबिक, जेराल्ड
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5 दिन पहले कॉपी लिंक स्वीडन में एक व्यक्ति पर अपनी पत्नी का शोषण कर उससे कम से कम 120 पुरुषों के साथ पैसों के बदले अवैध संबंध बनवाने का आरोप है। मामले की जांच कर रही अभियोजक ने सोमवार को एसोसिएटेड प्रेस (AP) को यह जानकारी दी। आरोपी अक्टूबर से हिरासत में है। उसकी पत्नी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद जांच शुरू हुई। मामले की अभियोजक ईडा एनेरस्टेड ने कहा कि पति के खिलाफ गंभीर स्तर पर देह व्यापार कराने का मामला दर्ज करने की तैयारी है। उनके मुताबिक, जांच में सामने आया है कि आरोपी ने बड़े पैमाने पर अपनी पत्नी का बेरहमी से शोषण किया। सोमवार को पहली बार अभियोजन पक्ष ने सार्वजनिक रूप से बताया कि इस मामले में कम से कम 120 पुरुष शामिल होने की आशंका है। हालांकि दंपती की पहचान उजागर नहीं की गई है। आरोपी की उम्र 60 साल के आसपास बताई गई है और उसने सभी आरोपों से इनकार किया है। अभियोजक ने यह बताने से इनकार किया कि क्या पत्नी पर किसी तरह का दबाव डाला गया था या उसे संबंधों के दौरान नशा दिया गया था। स्वीडन के कानून के मुताबिक, पैसों के बदले यौन सेवाएं खरीदना और किसी से ऐसा कराना अपराध है। हालांकि जो व्यक्ति ऐसी सेवाएं देता है, उसे कानून शोषण का शिकार मानता है, अपराधी नहीं। अगर पति ‘एग्रेवेटेड प्रोक्योरमेंट’ में दोषी पाया जाता है, तो उसे 2 से 10 साल तक की जेल हो सकती है। अभियोजक के मुताबिक, दो ऐसे पुरुषों पर भी आरोप तय किए गए हैं, जिन्होंने महिला के साथ पैसों के बदले संबंध बनाए थे। दोषी पाए जाने पर उन्हें एक साल तक की सजा हो सकती है। स्वीडन में इंटरनेट के जरिए, बिना शारीरिक संपर्क के, यौन सेवाएं खरीदना भी अपराध है। अभियोजक ने बताया कि पति के खिलाफ 13 मार्च को आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा और उसके बाद जल्द ही ट्रायल शुरू होने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… बांग्लादेश- चीफ एडवाइजर यूनुस ने इस्तीफे का ऐलान किया; कल तारिक रहमान PM पद की शपथ लेंगे बांग्लादेश के चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस ने सोमवार को अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। उन्होंने यह घोषणा तारिक रहमान के प्रधानमंत्री पद की शपथ से एक दिन पहले की। तारिक रहमान मंगलवार को PM पद की शपथ लेंगे। यह समारोह राष्ट्रपति भवन की बजाय संसद परिसर के साउथ प्लाजा में आयोजित किया जाएगा। यूनुस शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बनी अंतरिम सरकार के प्रमुख थे। अपने विदाई संदेश में यूनुस ने कहा, “आज अंतरिम सरकार पद छोड़ रही है। लेकिन लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों की जो शुरुआत हुई है, वह रुकनी नहीं चाहिए।” यूनुस अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के कुछ दिनों बाद बांग्लादेश लौटे थे। उन्होंने उस दिन को ‘मुक्ति का दिन’ बताया। यूनुस ने कहा, वह खुशी का दिन था। दुनियाभर के बांग्लादेशियों की आंखों में खुशी के आंसू थे। हमारे देश के युवाओं ने उसे एक दानव की पकड़ से मुक्त कराया। यूनुस ने पिछले हफ्ते हुए आम चुनाव में BNP को जीत की बधाई भी दी। तारिक रहमान की पार्टी BNP ने 297 में से 209 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस स्टेशन पर हमला, 2 की मौत, 14 घायल पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में पुलिस स्टेशन के पास एक जोरदार धमाका हुआ। इस धमाके में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और 14 अन्य लोग घायल हो गए। मरने वालों में एक बच्चा भी शामिल है। पुलिस के बयान के मुताबिक, मोटरसाइकिल में विस्फोटक पदार्थ लगा हुआ था जिसे धमाके से उड़ा दिया गया। मरने वालों में एक बच्चा भी शामिल है। रेस्क्यू अधिकारियों ने बताया कि इमरजेंसी टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। उन्होंने मृतकों के शव और घायलों को पास के अस्पतालों में पहुंचाया। पीएम मोदी अगले हफ्ते इजराइल जा सकते हैं, डिफेंस और AI पर चर्चा संभव पीएम मोदी अगले हफ्ते इजराइल की यात्रा पर जा सकते हैं। यह दौरा 24 और 25 फरवरी को होने की संभावना है। हालांकि भारत सरकार की ओर से अभी तक इस बारे में आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस संभावित यात्रा की जानकारी दी है। प्रधानमंत्री मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में पहली बार इजराइल जाएंगे। इससे पहले वह साल 2017 में इजराइल गए थे। इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच रक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और नई तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में संबंधों को और मजबूत करना है। हाल ही में एक कार्यक्रम में नेतन्याहू ने कहा था कि नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते इजराइल आ रहे हैं। उन्होंने भारत को एक बड़ा और ताकतवर देश बताया और कहा कि इजराइल और भारत के बीच मजबूत साझेदारी है। उन्होंने कहा कि दोनों नेता कई तरह के सहयोग पर चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि मोदी और नेतन्याहू के बीच रक्षा सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने पर खास बातचीत होगी। दोनों नेता पहले भी आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख की बात कर चुके हैं। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, क्वांटम रिसर्च और आधुनिक खेती जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है। पाकिस्तान के पंजाब में अब पुलिस जनता को सर या मैडम बुलाएगी, ओए कहकर बुलाने पर पाबंदी पाकिस्तान के पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने पुलिसकर्मियों को जनता से सम्मानजनक और विनम्र भाषा में बात करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अब सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों को ‘ओए’ कहकर संबोधित करने जैसी अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लाहौर में पुलिस सुधारों को लेकर हुई बैठक में मरियम नवाज ने कहा कि पुलिस को जनता की गरिमा का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हानिकारक सोच और व्यवहार को बदलने की जरूरत है और इसके लिए जवाबदेही तय होगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी पुलिस थानों, दफ्तरों और चेकपोस्ट पर नागरिकों को ‘सर या मैडम’ अथवा ‘साहिब या साहिबा’ कहकर संबोधित किया जाए। यदि कोई पुलिसकर्मी ऐसा करने से इनकार करता है तो









